May 18, 2026

Prapatti Stotram

Sri Narsimha Prapatti Stotram : श्री नरसिंह प्रपत्ति स्तोत्र…

श्री नरसिंह प्रपत्ति स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Narsimha Prapatti Stotram in Hindi माता नृसिंहः पिता नृसिंहःभ्राता नृसिंहः सखा नृसिंहः ।विद्या नृसिंहो द्रविणं नृसिंहःस्वामी नृसिंहः सकलं नृसिंहः ॥ १ ॥ इतो नृसिंहः परतो नृसिंहः यतोयतो याहि(मि) ततो नृसिंहः ।नृसिंहदेवात्परो न Prapatti Stotram कश्चित्तस्मान्नृसिंहं शरणं प्रपद्ये ॥ २ ॥ इतो नृसिंहः परतो नृसिंहः यतोयतो यामि ततो नृसिंहः ।बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहोनृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये ॥ ३ ॥ ॥ इति श्री नरसिंह प्रपत्ति स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥ Sri Narsimha Prapatti Stotram Lyrics : श्री नरसिंह प्रपत्ति स्तोत्र पाठ mata nrusinhah pita nrusinhahbhrata nrusinhah sakha nrusinhah ।vidya nrusinho dravinam nrusinhahsvaami nrusinhah sakalam nrusinhah ॥ 1 ॥ ito nrusinhah parato nrusinhah yatoyato yahi(mi) tato nrusinhah ।nrusinhadevatparo na kaschittasmannrusinham sharanam prapadye ॥ 2 ॥ ito nrusinhah parato nrusinhah yatoyato yami tato nrusinhah ।bahirnrusinho hridaye nrusinhonrusinhamadim sharanam prapadye ॥ 3 ॥ ॥ iti shri narasingh prapatti stotra sampurnam ॥ Narsimha Prapatti Stotram : श्री नरसिंह प्रपत्ति स्तोत्र विशेषताएं: श्री नरसिंह प्रपत्ति स्तोत्र के साथ-साथ यदि नरसिंह कवच या नरसिंह अष्टक कवच का पाठ किया जाए तो, इस स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, यह स्तोत्र शीघ्र ही फल देने लग जाते है| यदि साधक इस स्तोत्र  का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है| अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है| यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस स्तोत्र का पाठ करे| श्री नरसिंह प्रपत्ति स्तोत्र के पाठ के साथ साथ नरसिंह अष्टकम का भी पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है| और नियमित रुप से करने से रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते है| और साधक के जीवन में रोग, भय, दोष, शोक, बुराइया, डर दूर हो जाते है साथ ही नरसिंह जी की पूजा करने से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि प्राप्त होती है। याद रखे इस स्तोत्र पाठ को करने से पूर्व अपना पवित्रता बनाये रखे| इससे मनुष्य को जीवन में बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है|

Sri Narsimha Prapatti Stotram : श्री नरसिंह प्रपत्ति स्तोत्र… Read More »

Panchamrutha Stotram

Sri Narasimha Panchamrutha Stotram : श्री नृसिंह पंचामृत स्तोत्र….

श्री नृसिंह पंचामृत स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Narasimha Panchamrutha Stotram in Hindi अहोबिलं नारसिंहं गत्वा रामः प्रतापवान् ।नमस्कृत्वा श्रीनृसिंहं अस्तौषीत् कमलापतिम् ॥ १ ॥ गोविन्द केशव जनार्दन वासुदेवविश्वेश विश्व मधुसूदन विश्वरूप ।श्री पद्मनाभ पुरुषोत्तम पुष्कराक्षनारायणाच्युत नृसिंह नमो नमस्ते ॥ २ ॥ देवाः समस्ताः खलु योगिमुख्याःगन्धर्व विद्याधर किन्नराश्च ।यत्पादमूलं सततं नमन्ति तंनारसिंहं शरणं गतोऽस्मि ॥ ३ ॥ वेदान् समस्तान् खलु शास्त्रगर्भान्विद्याबले कीर्तिमतीं च लक्ष्मीम् ।यस्य प्रसादात् सततं लभन्ते तंनारसिंहं शरणं गतोऽस्मि ॥ ४ ॥ ब्रह्मा शिवस्त्वं पुरुषोत्तमश्चनारायणोऽसौ Panchamrutha Stotram मरुतां पतिश्च ।चन्द्रार्क वाय्वग्नि मरुद्गणाश्च त्वमेव तंत्वां सततं नतोऽस्मि ॥ ५ ॥ स्वप्नेऽपि नित्यं जगतां त्रयाणाम्स्रष्टा च हन्ता विभुरप्रमेयः ।त्राता त्वमेकस्त्रिविधो विभिन्नः तंत्वां नृसिंहं सततं नतोऽस्मि ॥ ६ ॥ राघवेणकृतं स्तोत्रं पञ्चामृतमनुत्तमम् ।पठन्ति ये द्विजवराः तेषां स्वर्गस्तु शाश्वतः ॥ ७ ॥ ॥ इति श्री नृसिंह पंचामृत स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

Sri Narasimha Panchamrutha Stotram : श्री नृसिंह पंचामृत स्तोत्र…. Read More »

Padmini Ekadashi

Padmini Ekadashi Vrat Katha : पद्मिनी एकादशी सम्पूर्ण व्रत कथा….

Padmini Ekadashi Vrat Katha: धर्मराज युधिष्‍ठिर बोले- हे जनार्दन! अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? तथा उसकी विधि क्या है? कृपा करके आप मुझे बताइए। श्री भगवान बोले, हे राजन्- अधिकमास में शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है वह पद्मिनी (कमला) एकादशी कहलाती है। वैसे तो प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। अधिकमास या मलमास को जोड़कर वर्ष में 26 एकादशियां होती हैं। अधिकमास में 2 एकादशियां होती हैं, जो पद्मिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष) और परमा एकादशी (कृष्ण पक्ष) के नाम से जानी जाती हैं। ऐसा श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की कथा बताई थी। भगवान कृष्‍ण बोले- मलमास में अनेक पुण्यों को देने वाली एकादशी का नाम पद्मिनी है। इसका व्रत करने पर मनुष्य कीर्ति प्राप्त करके बैकुंठ को जाता है, जो मनुष्‍यों के लिए भी दुर्लभ है। यह एकादशी करने के लिए दशमी के दिन व्रत का आरंभ करके कांसे के पात्र में जौ-चावल आदि का भोजन करें तथा नमक न खाएं। भूमि पर सोएं और ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में शौच आदि से निवृत्त होकर दंतधावन करें और जल के 12 कुल्ले करके शुद्ध हो जाएं। सूर्य उदय होने के पूर्व उत्तम तीर्थ में स्नान करने जाएं। इसमें गोबर, मिट्‍टी, तिल तथा कुशा व आंवले के चूर्ण से विधिपूर्वक स्नान करें। Padmini Ekadashi श्वेत वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु के मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करें। हे म‍ुनिवर! पूर्वकाल में त्रेयायुग में हैहय नामक राजा के वंश में कृतवीर्य नाम का राजा महिष्मती पुरी में राज्य करता था। उस राजा की 1,000 परम प्रिय स्त्रियां थीं, परंतु उनमें से किसी को भी पुत्र नहीं था, जो कि उनके राज्यभार को संभाल सके। देव‍ता, पितृ, सिद्ध तथा अनेक चिकि‍त्सकों आदि से राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए काफी प्रयत्न किए, लेकिन सब असफल रहे।  तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया। महाराज के साथ उनकी परम प्रिय रानी, जो इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए राजा हरिश्चंद्र की पद्मिनी नाम वाली कन्या थीं, राजा के साथ वन में जाने को तैयार हो गई। दोनों अपने मंत्री को राज्यभार सौंपकर राजसी वेष त्यागकर गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने चले गए।  राजा ने उस पर्वत पर 10 हजार वर्ष तक तप किया, परंतु फिर भी पुत्र प्राप्ति नहीं हुई। Padmini Ekadashi तब पतिव्रता रानी कमलनयनी पद्मिनी से अनुसूया ने कहा- 12 मास से अधिक महत्वपूर्ण मलमास होता है, जो 32 मास पश्चात आता है। उसमें द्वादशीयुक्त पद्मिनी शुक्ल पक्ष की एकादशी का जागरण समेत व्रत करने से तुम्हारी सारी मनोकामना पूर्ण होगी। इस व्रत के करने से भगवान तुम पर प्रसन्न होकर तुम्हें शीघ्र ही पुत्र देंगे। रानी पद्मिनी Padmini Ekadashi ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से एकादशी का व्रत किया। वह एकादशी को निराहार रहकर रात्रि जागरण कर‍ती। इस व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्‍णु ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। इसी के प्रभाव से पद्मिनी के घर कार्तवीर्य उत्पन्न हुए। जो बलवान थे और उनके समान तीनों लोकों में कोई बलवान नहीं था। Padmini Ekadashi तीनों लोकों में भगवान के सिवा उनको जीतने का सामर्थ्य किसी में नहीं था। सो हे नारद! जिन मनुष्यों ने मलमास शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत किया है, जो संपूर्ण कथा को पढ़ते या सुनते हैं, वे भी यश के भागी होकर विष्‍णुलोक को प्राप्त होते हैं।…… Padmini Ekadashi की सम्पूर्ण जानकारी के लिए क्लिक करें…

Padmini Ekadashi Vrat Katha : पद्मिनी एकादशी सम्पूर्ण व्रत कथा…. Read More »