2025

Achyutashtakam

अर्जुनकृतम् श्रीकृष्णस्तोत्रम्: Arjunakritam Shri Krishna Stotram

Arjunakritam Shri Krishna Stotram Arjunakritam Shri Krishna Stotram:पुलस्त्य उवाच -एवमुक्तोऽर्जुनः सम्यक् प्रणिपत्य जनार्दनम् ।तुष्टाव वाग्भिरिष्टाभिरुद्भूतपुलकस्ततः ॥ १९॥अर्जुन उवाच -नमोऽस्तु ते चक्रधरोग्ररूप नमोऽस्तु ते शार्ङ्गधरारुणाक्ष ।नमोऽस्तु तेऽभ्युद्यतखड्ग रौद्र नमोऽस्तु विभ्रान्तगदान्तकारिन् ॥ २०॥भयेन सन्नोऽस्मि सवेपथेन नाङ्गानि मे देव वशं प्रयान्ति ।वाचः समुच्चारयतः स्खलन्ति केशा हृषीकेश समुच्छ्वसन्ति ॥ २१॥कालो भवान्कालकरालकर्मा येनैतदेवं क्षयमक्षयात्मन् ।क्षत्रं समुद्भूतरुषा समस्तं नीतं भुवो भारविरेचनाय ॥ २२॥प्रसीद कर्तर्जय लोकनाथ प्रसीद सर्वस्य च पालनाय ।स्थितौ समस्तस्य च कालरूप कृतोद्यमेशान जयाव्ययात्मन् ॥ २३॥न मे दृगेषा तव रूपमेतद्द्रष्टुं समर्था क्षुभितोऽस्मि चान्तः ।पूर्वस्वभावस्थितविग्रहोऽपि संलक्ष्यसेऽत्यन्तमसौम्यरूप ॥ २४॥स्मरामि रूपं तव विश्वरूपं यद्दर्शितं पूर्वमभून्ममैव ।यस्मिन्मया विश्वमशेषमासीद्दृष्टं सयक्षोरगदेवदैत्यम् ॥ २५॥सा मे स्मृतिर्दर्शनभाषणादि प्रकुर्वतो नाथ गता प्रणाशम् ।कालोऽहमस्मीत्युदिते त्वया तु समागतेयं पुनरप्यनन्त ॥ २६॥कर्ता भवान्कारणमप्यशेषं कार्यं च निष्कारण कर्तृरूप ।आदौ स्थितौ संहरणे च देव विश्वस्य विश्वं स्वयमेव च त्वम् ॥ २७॥ब्रह्मा भवान्विश्वसृगादिकाले विश्वस्य रूपोऽसि तथा विसृष्टौ ।विष्णुः स्थितौ पालनबद्धकक्षो रुद्रो भवान्संहरणे प्रजानाम् ॥ २८॥एभिस्त्रिभिर्नाथ विभूतिभेदैर्यश्चिन्त्यते कारणमात्मनोऽपि ।वेदान्तवेदोदितमस्ति विष्णोः पदं ध्रुवं तत्परमं त्वमेव ॥ २९॥यन्निर्गुणं सर्वविकल्पहीनमनन्तमस्थूलमरूपगन्धम् ।परं पदं वेदविदो वदन्ति त्वमेव तच्छब्दरसादिहीनम् ॥ ३०॥यथा हि मूले विटपी महाद्रुमः प्रतिष्टितस्कन्धवरोग्रशाखः ।तथा समस्तामरमर्त्यतिर्यग्व्योमादिशब्दादिमयं त्वयीदम् ॥ ३१॥मुञ्चामि यावत्परमायुधानि वैरिष्वनन्ताहवदुर्मदेषु ।दृष्ट्वा हि तावत्सहसा पतन्तो नूनं तवैवाच्युत स प्रभावः ॥ ३२॥हता हतास्ते भवतो दृशैव मया पुनः केशव शस्त्रपूगैः ।काः कर्णभीष्मप्रमुखान्विजेतुं युष्मत्प्रसादेन विना समर्थः ॥ ३३॥त्रिशूलपाणिर्मम यः पुरस्तान्निषूदयन्वैरिबलं जगाम ।ज्ञातं मया साम्प्रतमेतदीश तव प्रसादस्य हि सा विभूतिः ॥ ३४॥यमेन्द्रवित्तेशजलेशवह्निसूर्यात्मको यश्च ममास्त्रपूगः ।नाशाय नाभूत्पतितोऽपि काये त्वत्सन्निधानस्य हि सोऽनुभावः ॥ ३५॥बाल्ये भवान्यानि चकार देव कर्माण्यसह्यानि सुरासुराणाम् ।तैरेव जानीम न यत्परं त्वां दोषः स निर्दोषमनुष्यतायाः ॥ ३६॥तालोच्छ्रिताग्रं गुरुभारसारमायामविस्तारवदद्य जातः ।पादाग्रविक्षेपविभिन्नभाण्डं चिक्षेप कोऽन्यः शकटं यथा त्वम् ॥ ३७॥अन्येन केनाच्युत पूतनायाः प्राणैः समं पीतमसृग्विमिश्रम् ।त्वया यथा स्तन्यमतीव बाल्ये गोष्ठे च भग्नौ यमलार्जुनौ तौ ॥ ३८॥विषानलोष्णाम्बुनिपातभीममास्फोट्य को वा भुवि मानुषोऽन्यः ।ननर्त पादाब्जनिपीडितस्य फणं समारुह्य च कालियस्य ॥ ३९॥सुरेशसन्देशविरोधवत्सु वर्षत्सु मेघेषु गवान्निमित्तम् ।दिनानि सप्तास्ति च कस्य शक्तिर्गोवर्धनं धारयितुं करेण ॥ ४०॥प्रलम्बचाणूरमुखान्निहत्य कंसासुरं यस्य बिभेति शक्रः ।तमष्टवर्षो निजघान कोऽन्यो निरायोधो नाथ मनुष्यजन्मा ॥ ४१॥बाणार्थमभ्युद्यतमुग्रशूलं निर्जित्य सङ्ख्ये त्रिपुरारिमेकः ।सकार्त्तिकेयज्वरमस्त्रबाहुं करोति को बाणमनच्युतोऽन्यः ॥ ४२॥कः पारिजातं सुरसुन्दरीणां सदोपभोग्यं विजितेन्द्रसैन्यः ।स्वर्गान्महीमुच्छ्रितवीर्यधैर्यः समानयामास यथा प्रभो त्वम् ॥ ४३॥हत्वा हयग्रीवमुदारवीर्यं निशुम्भशुम्भौ नरकं च कोऽन्यः ।जग्राह कन्यापुरमात्मनोऽर्थं प्राग्ज्योतिषाख्ये नगरे महात्मन् ॥ ४४॥स्थितौ स्थितस्त्वं परिपासि विश्वं तैस्तैरुपायैरविनीतभीतैः ।मैत्री न येषां विनयाय तांस्तान्सर्वान्भवान्संहरतेऽव्ययात्मन् ॥ ४५॥हिताय तेषां कपिलादिरूपिणा त्वयानुशस्ता बहवोऽनुजीवाः ।येषां न मैत्री हृदि ते न नेया विश्वोपकारी वध एव तेषाम् ॥ ४६॥ इत्थं भवान्दुष्टवधेन नूनं विश्वोपकाराय विभो प्रवृत्तः ।स्थितौ स्थितं पालनमेव विष्णुः करोति हन्त्यन्तगतोऽन्तरुद्रः ॥ ४७॥एतानि चान्यानि च दुष्कराणि दृष्टानि कर्माणि तथापि सत्यम् ।मन्यामहे त्वां जगतः प्रसूतिं किं कुर्म माया तव मोहनीयम् ॥ ४८॥त्वं सर्वमेतत्त्वयि सर्वमेतत्त्वत्तस्तथैतत्तव चैतदीश ।एतत्स्वरूपं तव सर्वभूतं विभूतिभेदैर्बहुभिः स्थितस्य ॥ ४९॥प्रसीद कृष्णाच्युत वासुदेव जनार्दनानन्त नृसिंह विष्णो ।मनुष्यसामान्यधिया यदीश दृष्टो मया तत्क्षमस्वादिदेव ॥ ५०॥न वेद्मि सद्भावमहं तवाद्य सद्भावभूतस्य चराचरस्य ।यो वै भवान्कोऽपि नतोऽस्मि तस्मै मनुष्यरूपाय चतुर्भुजाय ॥ ५१॥देवदेव जगन्नाथ सर्वपापहरो भव ।हेतुमात्रस्त्वहं तत्र त्वयैतदुपसंहृतम् ॥ ५२॥प्रसीदेश हृषीकेश अक्षौहिण्या दशाष्ट च ।त्वया ग्रस्ता भुवो भूत्यै हेतुभूता हि मद्विधाः ॥ ५३॥वयमन्ये च गोविन्द नराः क्रीडनकास्तव ।मद्विधैः करणैर्देव करोषि स्थितिपालनम् ॥ ५४॥यदत्र सदसद्वापि किञ्चिदुच्चारितं मया ।भक्तिमानिति तत्सर्वं क्षन्तव्यं मम केशव ॥ ५५॥इति विष्णुधर्मेषु पञ्चत्रिंशोऽध्यायान्तर्गतं अर्जुनप्रोक्तं श्रीकृष्णस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

अर्जुनकृतम् श्रीकृष्णस्तोत्रम्: Arjunakritam Shri Krishna Stotram Read More »

श्री भरत मंदिर: ऋषिकेश, उत्तराखंड, भारत

परम तेजस्वी भक्त रैभ्य मुनि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने दिए थे दर्शन श्री भरत मंदिर उत्तराखंड के पवित्र शहर ऋषिकेश में स्थित है। यह मंदिर ऋषिकेश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। श्री भरत मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर से ही ऋषिकेश शहर का अस्तित्व सामने आया है। इस मंदिर में बहुत सी प्राचीन कलाकृतियों को आज भी सुरक्षित रखा गया है। श्री भरत मंदिर का इतिहास श्री भरत मंदिर का उल्लेख हिन्दू धर्म के स्कन्द पुराण, श्रीमद्भागवत, महाभारत, नृसिंह पुराण और वराह पुराण में किया गया है। इसमें यह वह स्थान है जहाँ पर परम तेजस्वी भक्त रैभ्य मुनि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने कहा था कि हृषीकेश नाम से मैं सदैव यहीं स्थित रहूँगा। इसलिए इस स्थान का नाम हृषीकेश भी है। इस मंदिर के इतिहास के विषय में बताया जाता है करीब 789 ई. में बसंत पंचमी के शुभ दिन पर, जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने मंदिर में भगवान की प्रतिमा को स्थापित किया गया है। प्रत्येक वर्ष इस दिन शालिग्राम को मायाकुंड में पवित्र स्नान के लिए ले जाते और फिर पुनर्स्थापना हेतु शहर में एक भव्य जुलूस के साथ वापस मंदिर लाया जाता है। श्री भरत मंदिर का महत्व इस मंदिर से सम्बंधित यह भी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन यदि कोई तीर्थयात्री इस मंदिर में भगवान श्री हृषिकेश नारायण की 108 परिक्रमा करता है और उनके चरणों में आशीर्वाद मांगता है तो उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। ऐसा करना बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा के बराबर माना गया है। भगवान विष्णु जी के इस स्थान पर दर्शन दिए जाने के कारण यह मंदिर बहुत ही पवित्र है जिस वजह से मंदिर के दर्शन मात्र से सभी भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। श्री भरत मंदिर की वास्तुकला श्री भरत मंदिर के मुख्य गर्भ ग्रह के भीतर इस मंदिर में भगवान विष्णुजी जी कि ऐसी प्रतिमा है जिसे एक ही काले रंग का एक पत्थर यानी कि शालिग्राम पत्थर को काटकर बनाया गया है। मंदिर के मुख्य द्वार के ठीक सामने एक प्राचीन पेड़ है। वास्तव में यह तीन अलग-अलग पेड़ों का एक संयोजन है जिनकी जड़ें इस तरह से आपस में जुड़ी हुई हैं कि उन्हें अलग अलग देखना लगभग असंभव है। इसमें बरगद के पेड़ यानी वट वृक्ष, पीपल के पेड़ और बेल के पेड़ शामिल हैं। ऐसा माना जाता है कि, ये तीन पेड़ त्रि देव, ब्रह्मा निर्माता, विष्णु, संरक्षक और महेश संहारक का प्रतिनिधित्व करते हैं। भक्त इन वृक्षों की अत्यंत श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करते हैं। इस पेड़ के नीचे बुद्ध की एक खंडित मूर्ति रखी हुई है जो खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी। ऐसा माना जाता है कि यह प्रतिमा अशोक काल की है जब बौद्ध धर्म पूरे देश में फैल रहा था। श्री भरत मंदिर का समय सुबह भरत मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 11:00 AM सांयकाल भरत मंदिर खुलने का समय 01:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद भगवान विष्णु को पीली चीजों का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा सूखे मेवे, फल, फूल भी भगवान को अर्पित किये जाते है।

श्री भरत मंदिर: ऋषिकेश, उत्तराखंड, भारत Read More »

Bhai Dooj 2025: कैसे शुरू हुई भाई दूज मनाने की प्रथा? यमराज और यमुना से जुड़ी है इसकी कथा

भाई दूज 2025: कैसे शुरू हुई यह अनोखी प्रथा? यमराज और यमुना की कहानी Bhai Dooj 2025:दीपावली उत्सव के अंतिम दिन भाई दूज का पवित्र पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। इस शुभ अवसर पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। वहीं, भाई अपनी बहन को जीवन में सदैव रक्षा करने का वचन देते हैं। यह दिन यम देवता की पूजा-अर्चना के लिए भी विशेष महत्व रखता है। आइए जानते हैं कैसे शुरू हुई भाई दूज मनाने की यह अनोखी प्रथा, और क्या है इसकी पौराणिक कथा। भाई दूज 2025 कब है? (Bhai Dooj 2025 Shubh Muhurat) 2025 में भाई दूज 23 अक्टूबर (गुरुवार) को मनाया जाएगा । इसे पूरे भारत में राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश के रूप में नामित नहीं किया गया है; हालाँकि, यह व्यापक रूप से मनाया जाता है और कुछ क्षेत्रों में इसे क्षेत्रीय अवकाश माना जा सकता है, जिससे पारिवारिक समारोह और उत्सव मनाने की अनुमति मिलती है। भाई दूज की पौराणिक कथा (Bhai Dooj Ki Pauranik Katha) भाई दूज Bhai Dooj 2025 की कथा भगवान सूर्यदेव के पुत्र यमराज और पुत्री यमुना से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य भगवान की पत्नी संज्ञादेवी थीं, जिनकी दो संतानें थीं – पुत्र यमराज और कन्या यमुना। यमराज अपनी बहन यमुना से बहुत प्यार करते थे, लेकिन अधिक काम होने के कारण वे उनसे मिलने नहीं जा पाते थे। एक बार, यमुना ने यमराज को वचन दिया कि वे कार्तिक माह की शुक्ल द्वितीया तिथि पर उनके घर भोजन करने आएँगे। यमराज को यमुना के घर जाने में थोड़ा संकोच होने लगा, क्योंकि वे लोगों के प्राण हरने का काम करते हैं, तो इस वजह से कौन उन्हें अपने घर बुलाएगा। लेकिन, फिर भी वे यमुना के घर चले जाते हैं। जब यमराज बहन के घर पहुँचे, तो वे उन्हें देखकर बेहद प्रसन्न हुईं और उनकी खूब सेवा की। यमुना ने अपने भाई के लिए कई तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाए। बहन की सेवा और सत्कार को देखकर यमराज बहुत खुश हुए और यमुना से कोई वर मांगने के लिए कहा। इसके बाद यमुना ने उनसे वचन लिया कि हर साल कार्तिक माह के शुक्ल द्वितीया तिथि पर वे उनके घर आकर भोजन किया करें। यमराज ने भी उन्हें ‘तथास्तु’ कहते हुए तरह-तरह की भेंट भी दीं। एक अन्य कथा के अनुसार, यमुना ने यह वरदान मांगा कि जो लोग उस दिन बहन के घर भोजन करके मथुरा नगरी स्थित विश्राम घाट पर स्नान करें, वे यमलोक न जाएँ। यमराज ने इस बात को स्वीकार कर लिया और कहा कि जो सज्जन इस तिथि पर बहन के घर भोजन नहीं करेंगे, उन्हें वे यमपुरी ले जाएँगे, और यमुना के जल में स्नान करने वालों को स्वर्ग प्राप्त होगा। मान्यता के अनुसार, तभी से भाई दूज के पर्व को मनाने की शुरुआत हुई। भाई दूज का महत्व और अनुष्ठान (Bhai Dooj Ka Mahatva aur Anushthan) भाई दूज Bhai Dooj 2025 को ‘यम द्वितीया’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहनें स्नान-ध्यान के बाद यम देव की पूजा करती हैं। वे अपने भाई के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और माथे पर तिलक करती हैं। तिलक करने के बाद बहनें अपने हाथों से भाई को भोजन कराती हैं। इस दौरान भाई दूज की कथा का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि कथा का पाठ करने से भाई और बहन के रिश्ते में मधुरता आती है, और भाई को लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन भाई-बहन का साथ-साथ यमुना स्नान करना, तिलक लगवाना तथा बहन के घर भोजन करना अति फलदायी माना जाता है। इस पावन अवसर पर भाई द्वारा बहन को श्रद्धाभाव से वस्त्र, मुद्रा आदि भेंट देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के रिश्ते की गहराई, प्रेम और एक-दूसरे के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

Bhai Dooj 2025: कैसे शुरू हुई भाई दूज मनाने की प्रथा? यमराज और यमुना से जुड़ी है इसकी कथा Read More »

The Apex of Devotion: Understanding the Last Sawan Somwar and Udhyapan

The Apex of Devotion: Understanding the Last Sawan Somwar and Udhyapan (भक्ति का शिखर: आखिरी सावन सोमवार और उद्यापन को समझना) The sacred month of Sawan, a period imbued with immense spiritual potency, is wholly dedicated to the veneration of Bhagwan Shiv and Devi Parvati. It is a time when the celestial energies align to bless devotees who observe the Sawan Somwar fasts with utmost faith and perform meticulous worship of Lord Shiva. It is widely believed that engaging in devotional practices during Sawan can manifest all desires. This year, the auspicious Sawan began on July 11th and extends until August 9th. Having already witnessed three powerful Sawan Somwars, we now stand at the threshold of the final Sawan Somwar, which falls on August 4th. For those dedicated souls who have diligently observed all the Sawan Somwar fasts, performing the Udhyapan ritual on this concluding day becomes not just important, but absolutely essential. Why, you ask? Because the complete fruition and full benefit of any fast are only truly realized upon the proper conclusion, known as Udhyapan. This final act is an Upaya (remedial measure) that ensures the spiritual energy accumulated throughout the fasting period is harmonized and effectively integrated into your life’s journey, aligning with your planetary combinations for positive outcomes. The Profound Significance of Sawan Somwar Fasting (सावन सोमवार व्रत का गहरा महत्व) Throughout the month of Sawan, devotees earnestly observe the Sawan Somwar fasts and meticulously perform the worship of Lord Shiva. There’s a deeply held belief that the worship of Lord Shiva during Sawan has the power to fulfill all the desires of devotees. This entire month holds a special sanctity, specifically consecrated to Bhagwan Shiva and Devi Parvati. Performing the Udhyapan: A Step-by-Step Guide for Full Benefits (उद्यापन विधि: पूर्ण लाभ के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका) To truly reap the entire benefits of your Sawan Somwar fasts, the Udhyapan on the last Somwar is paramount. Here’s how you can perform this sacred ritual with traditional reverence: Sacred Offerings for Lord Bholenath (भगवान भोलेनाथ के लिए पवित्र भोग) While completing your spiritual observances, offering a bhog (sacred food offering) to Lord Bholenath is an integral part of the ritual. This act symbolizes gratitude and devotion. Here are some traditional and beloved offerings:

The Apex of Devotion: Understanding the Last Sawan Somwar and Udhyapan Read More »

अगस्त 2025 (1-15) का मासिक राशिफल: आपकी राशि के लिए क्या लेकर आ रहा है यह पखवाड़ा?

अगस्त का यह पखवाड़ा आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहरा प्रभाव डालने वाला है। चाहे आप अपने करियर में नई ऊंचाइयों को छूने की योजना बना रहे हों, वित्तीय स्थिरता की तलाश में हों, रिश्तों में मधुरता चाह रहे हों, या अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाना चाहते हों – ग्रहों की चाल आपको महत्वपूर्ण संकेत दे रही है। आइए, एक-एक करके सभी 12 राशियों के लिए इस अवधि का विस्तृत विश्लेषण करें: 1. मेष राशि (Aries): सीखो और चमको! मेष राशि वाले जातकों के लिए 1 से 15 अगस्त का यह समय थोड़ी मस्ती और थोड़ी रियलिटी के साथ बीतेगा। आपके लिए इस दौरान का मूल मंत्र है “सीखो और चमको”। • करियर और व्यवसाय: नए प्रोजेक्ट्स के अवसर मिलेंगे, खासकर ऐसे प्रोजेक्ट्स जिनमें आपको लगेगा कि आप सक्षम नहीं हैं। ऑफिस या व्यवसाय में नई जिम्मेदारियां मिलेंगी, जिन्हें आपको स्वीकार करना होगा, भले ही घबराहट हो। शनि की साढ़ेसाती में ऐसा बार-बार होता है, और यह बस शुरुआत है। वर्क फ्रॉम होम करने वालों के लिए काम और आराम दोनों संतुलित रहेंगे, फोकस भी बना रहेगा। बॉस की उम्मीदें थोड़ी ऊंची रहेंगी, इसलिए ऊर्जा और धैर्य का संतुलन बनाए रखना होगा। ऑफिस पॉलिटिक्स से दूर रहकर अपने काम पर ध्यान दें, आपका काम ही आपके लिए बोलेगा। • वित्त और धन: आर्थिक स्थिति decent रहेगी। पैसे का प्रवाह बना रहेगा और खर्च भी होगा, लेकिन स्मार्ट तरीके से संभल सकता है। फ्रीलांसिंग, डिजाइनिंग या मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए आय के नए रास्ते खुलेंगे। रुका हुआ पैसा या अटकी हुई डील्स एक्टिवेट हो जाएंगी। निवेश करते समय दिल की बजाय दिमाग का इस्तेमाल करें। • प्रेम संबंध और रिश्ते: दिल थोड़ा संवेदनशील रहेगा, छोटी बातें गहरा असर डालेंगी। पुरानी यादें या लोग दिमाग में लौट सकते हैं। कमिटेड लोगों के लिए खुला संवाद बहुत महत्वपूर्ण है; सुनना भी सीखें और दूसरों की स्थिति को समझने की कोशिश करें। सिंगल्स के लिए किसी नए व्यक्ति से वाइब मैच हो सकती है, मैसेजिंग या चैटिंग शुरू हो सकती है, नई खुशियाँ आने वाली हैं। • शिक्षा और विद्यार्थी जीवन: पढ़ाई का मूड थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। कभी-कभी लगेगा कि पूरा अनुशासन बनाएंगे, और कभी-कभी 3-4 दिनों तक खाली बैठे रहेंगे। एकाग्रता में कमी और गहरे विचारों में खो जाना भी हो सकता है। मीडिया, टेक, भाषा, कंटेंट या क्रिएटिव फील्ड से जुड़े छात्रों के लिए समय बेहतर है। मोबाइल, लैपटॉप आदि से दूरी बनाए रखें यदि वे आपको विचलित कर रहे हैं। • स्वास्थ्य: शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। मूड स्विंग्स और नींद में गड़बड़ी भी हो सकती है। पीठ दर्द और पाचन संबंधी समस्याएँ परेशान कर सकती हैं। नींद का पैटर्न बदलता हुआ दिख रहा है। अधिक पानी पिएं और रात में हल्का भोजन करें। इन 15 दिनों में गुस्से पर नियंत्रण रखना सबसे बड़ी सलाह है। • उपाय: मंगलवार को हनुमान मंदिर जाकर गुड़ या चने का दान करें। यदि स्वास्थ्य अनुमति दे, तो रक्तदान करें। लाल रंग के वस्त्र का दान करना भी लाभकारी रहेगा। 2. वृषभ राशि (Taurus): निरंतरता ही मौन शक्ति है! वृषभ राशि के जातकों को धीरे-धीरे चलना है लेकिन मजबूत बनना समय की पुकार है। इस हफ्ते का मंत्र है “कंसिस्टेंसी इज अ साइलेंट पावर”। • करियर और व्यवसाय: काम धीरे चल रहा है, पर सही दिशा में है। कॉर्पोरेट, मीडिया, मार्केटिंग या फ्रीलांसिंग में जुड़े लोगों के लिए यह विश्वसनीयता, संपर्क और नेटवर्क बनाने का समय है। आपकी बात का लोगों पर असर हो रहा है, मीटिंग्स और कॉल हो रही हैं, लोग आपकी पिच सुन रहे हैं। एक साथ दो विकल्प दिख सकते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनेगी; धैर्य से सोच-विचार कर ही निर्णय लें। कई ऐसे निर्णय आएंगे जहाँ दोनों चीजें अच्छी लगेंगी, लेकिन किसी एक को ही चुनना होगा। सीनियर लोग आपको नोटिस करेंगे, इसलिए हमेशा सोचें कि आप पर कैमरा लगा है और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें, आपको सराहना मिलेगी। • वित्त और धन: पैसों का प्रवाह ठीक-ठाक रहेगा। नए क्लाइंट्स, पुराने भुगतान या साइड इनकम एक्टिवेट हो सकती है। खर्चे कभी-कभी नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं, खासकर लग्जरी या आराम से संबंधित चीजों पर। निवेश करते समय उन योजनाओं से बचें जो कम समय में पैसा दोगुना करने का वादा करती हैं। स्मार्ट निर्णय लें, दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। • प्रेम संबंध और रिश्ते: भावनाएं थोड़ी भारी रह सकती हैं। पुरानी बातें या किसी के शब्द आपको फिर से याद आएंगे जो दिल में चुभेंगे। कमिटेड लोगों के लिए ईमानदारी और खुला संवाद बहुत जरूरी है। सिंगल्स पुराने दोस्तों या चैट के माध्यम से दोबारा जुड़ सकते हैं और उन्हें कोई सच्चा व्यक्ति मिल सकता है। रिश्तों को नाटक से दूर रखकर शांति और परिपक्वता से संभालें। • शिक्षा और विद्यार्थी जीवन: पढ़ाई थोड़ा “स्लो कुकर” मोड में चलेगी। शुरुआत में कम ऊर्जा रहेगी, लेकिन समझने की पूरी कोशिश करते रहेंगे। अकाउंट्स, इकोनॉमिक्स, भाषा या कम्युनिकेशन से संबंधित विषयों में पकड़ मजबूत होती दिखेगी। उच्च शिक्षा या ऑनलाइन सर्टिफिकेशन वाले छात्रों को नए अवसर मिलेंगे। पढ़ाई को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें (जैसे 20-30 मिनट के सेशन)। • स्वास्थ्य: यह समय थोड़ा थका-थका सा जाएगा। शरीर को नींद की आवश्यकता महसूस होगी। मूड स्विंग्स और बर्नआउट भी महसूस कर सकते हैं, ये सब आपकी नींद से जुड़ा है। नींद को ठीक करें, बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा। आप रिचार्ज और ऊर्जावान महसूस करेंगे। पानी पीते रहें, हल्का खाना खाएं, योगा करने से तेजी से रिकवरी होगी। स्ट्रेस ईटिंग और ओवरथिंकिंग से बचें। • उपाय: घर से निकलने से पहले “ॐ शुक्राय नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें। शुक्रवार को माता लक्ष्मी के नाम पर व्रत रख सकते हैं या उनके चरणों में कमल का फूल अर्पित कर सकते हैं। 3. मिथुन राशि (Gemini): विचारों की ऊर्जा और संतुलन! मिथुन राशि के जातकों के लिए अगस्त का यह पखवाड़ा कई नए विचारों और ट्विस्ट से भरा रहेगा, आप ऊर्जावान महसूस करेंगे। • करियर और व्यवसाय: मिथुन राशि का दिमाग पूरी तरह से चार्ज महसूस होगा, खूब सारे आइडियाज आएंगे, और लोग भी आपके नए कदमों पर ध्यान देंगे। लेखन, प्रशिक्षण, पत्रकारिता या शिक्षा से जुड़े लोगों को पहचान मिलना

अगस्त 2025 (1-15) का मासिक राशिफल: आपकी राशि के लिए क्या लेकर आ रहा है यह पखवाड़ा? Read More »

How to celebrate Diwali according to Premanand Maharaj:प्रेमानंद महाराज के अनुसार दिवाली कैसे मनाये

Diwali: दिवाली: बाहरी उत्सव से आंतरिक प्रकाश की ओर एक यात्रा दीपावली, दिवाली, जुआ, शराब, भक्ति, ज्ञान, नाम जप, आंतरिक दीपावली Diwali: दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, भारत और दुनिया भर में मनाया जाने वाला एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह केवल दीप जलाने और खुशियाँ मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि इसका एक गहरा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। ऐसा माना जाता है कि यह उत्सव भगवान श्री रामचंद्र जी के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या में चक्रवर्ती सम्राट के रूप में विराजमान होने की खुशी में मनाया गया था, जब पूरी अयोध्या दीपों से प्रकाशित हो उठी थी। दीपावली (Diwali) का वास्तविक अर्थ और हमें क्या नहीं करना चाहिए? आज हम घरों को सजाते हैं, दीपक जलाते हैं, लेकिन क्या हम दीपावली के आंतरिक स्वरूप को समझते हैं? अक्सर देखने में आता है कि लोग दीपावली के शुभ अवसर पर जुआ खेलने लगते हैं। लोग सोचते हैं कि “साल भर नहीं खेलते पर दीपावली को तो खेलें!” लेकिन क्या कहीं ऐसा लिखा है कि आप दीपावली पर वो अपराध करें जिसमें कलियुग का वास रहता है? पूज्य महाराज Maharaj श्री हमें स्पष्ट रूप से बताते हैं कि द्यूत क्रीड़ा (जुआ खेलना), शराब पीना, मांस खाना, परस्त्री गमन (व्यभिचार करना), स्वर्ण चोरी करना, और हिंसा करना – ये सभी कार्य कलियुग के निवास स्थान हैं। इन आसुरी प्रवृत्तियों वाले कार्यों से हमें बचना चाहिए। धर्मराज युधिष्ठिर और महाराज नल दमयंती जैसे बड़े-बड़े पवित्र चरित्र भी द्यूत क्रीड़ा के कारण भारी विपत्तियों में पड़े थे। यह समझना आवश्यक है कि अधर्म के धन से कभी सुख-शांति नहीं मिलती, बल्कि इससे परिवार बिखर जाता है और अशांति पैदा होती है। महाराज जी दृढ़ता से यह संदेश देते हैं कि यदि आप सुख और शांति प्राप्त करना चाहते हैं, तो इन व्यसनों और गंदे आचरणों को छोड़ दें। यह त्याग ही सबसे बड़ा उत्सव है और यह आपको मानसिक शांति और उन्नति प्रदान करेगा। दीपावली पर क्या करें और कैसे जलाएं आंतरिक दीप? तो, दीपावली Diwali पर हमें क्या करना चाहिए? हमें अपने प्रभु का भजन करना चाहिए, अपने प्रिय प्रीतम का या भगवत विग्रह का ध्यान करना चाहिए। दीपक जलाकर, खूब गुरु मंत्र और नाम जप करना चाहिए, विशेषकर रात 12 बजे तक, क्योंकि इससे कई गुना बढ़कर लाभ मिलता है। ठाकुर जी को भोग लगाएं और आरती करें। दीपावली Diwali 2025 का आंतरिक स्वरूप हमारे हृदय में भक्ति के दीप और प्रेम की बाती जलाने से संबंधित है। जैसे घर में दीपक जलाने से बाहरी अंधेरा दूर होता है, वैसे ही हमारे हृदय का अंधकार ज्ञान के प्रकाश से ही मिटेगा। यह भक्ति का दीपक और प्रेम की बाती किसी बाजार में नहीं मिलती, यह साधु संगति (भगवत प्रेमी महात्माओं का संग) से ही प्राप्त होती है। जब यह ज्ञान का प्रकाश हृदय में प्रकट होता है, तब चिंता, शोक, दुख, और मृत्यु आदि का भय नष्ट हो जाता है। हमें यह समझना चाहिए कि हम शरीर नहीं हैं, बल्कि हमारा स्वरूप सच्चिदानंद है, ईश्वर का अंश है। Diwali जब यह बात पता चल जाती है कि मैं कौन हूँ, तो व्यक्ति आनंद से भर जाता है, मस्त हो जाता है और आत्मा राम बन जाता है। यह समझना कि “मैं भगवान का अंश हूँ” और भगवत प्राप्ति करना ही हमारा परम धर्म है, एक गृहस्थ को भी महात्मा बना देता है। अपने अंदर के अंधकार को दूर करने के लिए, हमें नाम जप और भक्ति करनी चाहिए। यह आंतरिक दीपावली यदि जल गई, तो आप जन्म-मृत्यु के भय से मुक्त हो जाएंगे। एक दृढ़ संकल्प लें: पूज्य महाराज Maharaj जी हम सभी से यह भेंट मांगते हैं कि इस दीपावली पर हम सभी गलत आचरण, शराब, मांस, व्यभिचार, जुआ, चोरी और हिंसा को त्यागने का दृढ़ संकल्प लें। यह संकल्प लेना ही अपने आप में सबसे बड़ा उत्सव है, और इससे हमारा समाज एक धार्मिक, शांतिप्रिय और परमानंद में डूबने वाला समाज बनेगा। Diwali श्री कृष्ण स्वयं आपकी सहायता करेंगे और आपको इन व्यसनों को छोड़ने की सामर्थ्य प्रदान करेंगे, क्योंकि वे हर पल आपके साथ हैं

How to celebrate Diwali according to Premanand Maharaj:प्रेमानंद महाराज के अनुसार दिवाली कैसे मनाये Read More »

दिवाली 2025: तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और 5 दिन का संपूर्ण कैलेंडर – अभी से जानें सब कुछ !

दिवाली 2025: तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और 5 दिन का संपूर्ण कैलेंडर – अभी से जानें सब कुछ! दिवाली का त्योहार हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इसे ‘दीप उत्सव’ के नाम से भी जाना जाता है। ‘दीपावली’ का अर्थ है ‘दीपों की अवली’ यानी दीपों की पंक्ति। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है और बुराई पर अच्छाई की जीत को भी दर्शाता है। यह त्योहार हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, और उनके आगमन की खुशी में लोगों ने घी के दीपक जलाकर उत्सव मनाया था। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है, और ऐसा माना जाता है दिवाली 2025 कि उनकी आराधना से घर में सुख-समृद्धि आती है। दिवाली 2025 मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर भ्रमण के लिए निकलती हैं, इसलिए भी इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। लक्ष्मी जी के साथ भगवान गणेश और कुबेर जी की भी पूजा की जाती है। दिवाली 2025 कब है? (Diwali 2025 Date) 2025 में दिवाली की तिथि को लेकर थोड़ा असमंजस है, क्योंकि कार्तिक अमावस्या तिथि दो दिन पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि का आरंभ 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट / 03 बजकर 45 मिनट पर होगा और यह अगले दिन 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 54 मिनट / 05 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। अधिकांश ज्योतिष मतों के अनुसार, दिवाली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 को ही मनाया जाएगा, क्योंकि इस दिन लक्ष्मी पूजा सूर्यास्त के बाद करने का विधान है, और निशिता काल में पूजा का विशेष महत्व है, जो 20 अक्टूबर को ही है। हालांकि, कुछ मतों के अनुसार, प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण 21 अक्टूबर को भी देश के कुछ हिस्सों में दिवाली मनाई जा सकती है। दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (Diwali 2025 Lakshmi Puja Muhurat) दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का समय 20 अक्टूबर 2025 को निर्धारित है। लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और अन्य महत्वपूर्ण काल इस प्रकार हैं: • लक्ष्मी पूजा का समय: रात 07:08 बजे से रात 08:18 बजे तक।     ◦ अवधि: 1 घंटा 8 मिनट। • प्रदोष काल: शाम 05:46 बजे से रात 08:18 बजे तक / शाम 05:33 बजे से रात 08:08 बजे तक। • वृषभ काल: रात 07:08 बजे से रात 09:03 बजे तक / शाम 06:56 बजे से रात 08:53 बजे तक। • निशिता काल का मुहूर्त: रात 11:41 बजे से 21 अक्टूबर को प्रातः 12:31 बजे तक। • शहर के अनुसार लक्ष्मी पूजा के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। दिवाली 2025 कैलेंडर (5 दिन का त्योहार) दिवाली का त्योहार धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक पाँच दिनों तक चलता है। 2025 के लिए दिवाली का पूरा कैलेंडर इस प्रकार है: • धनतेरस: 17 अक्टूबर 2025 (या कुछ स्रोतों के अनुसार 18 अक्टूबर 2025) • नरक चतुर्दशी: 18 अक्टूबर 2025 (या काली चौदस 19 अक्टूबर 2025) • दिवाली: 20 अक्टूबर 2025 • कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्ति: 21 अक्टूबर 2025 (या दिवाली स्नान 21 अक्टूबर 2025) • गोवर्धन पूजा: 22 अक्टूबर 2025 • भाई दूज: 23 अक्टूबर 2025 धनतेरस पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त: यदि आप धनतेरस पर सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 बजे से 19 अक्टूबर को सुबह 06:08 बजे तक का समय शुभ माना गया है। 19 अक्टूबर को सुबह 06:08 बजे से दोपहर 01:51 बजे तक भी सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त है। दिवाली के दिन करें ये शुभ काम दिवाली 2025 पर घर में सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी का वास बनाए रखने के लिए कुछ शुभ कार्य करने का विधान है: 1. सजावट: दीवाली के दिन अपने घरों और दुकानों को गेंदे के फूल की लड़ियों और अशोक, आम तथा केले के पत्तों से सजाना शुभ माना जाता है। 2. कलश स्थापना: घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर कलश में नारियल स्थापित करना शुभ माना जाता है। 3. स्वच्छता: दिवाली के दिन सफाई का विशेष महत्व है, क्योंकि लक्ष्मी मां उसी घर में प्रवेश करती हैं जहां साफ-सफाई होती है। 4. लक्ष्मी पूजन विधि: लक्ष्मी पूजा के लिए, पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर, उस पर श्री गणेश और देवी लक्ष्मी की सुंदर मूर्तियों को रेशमी वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित कर स्थापित करें और फिर पूजन करें। 5. दीप प्रज्ज्वलन: शाम को लक्ष्मी पूजा के साथ ही जलते हुए दीपकों की भी पूजा की जाती है। घर और आंगन में सब जगह दीपक लगाएं, क्योंकि दिवाली प्रकाश का पर्व है। यह जानकारी मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। एबीपी लाइव किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

दिवाली 2025: तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और 5 दिन का संपूर्ण कैलेंडर – अभी से जानें सब कुछ ! Read More »

Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram:श्रीविष्णुपुराणे नागपत्नीकृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम्

Srikrishna Stotram: यहाँ “विष्णुपुराण” में वर्णित नागपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्र (Nagapatni Kruta Shri Krishna Stotram) से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जा रही है, जो आप अपने हिंदी ब्लॉग में उपयोग कर सकते हैं। Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram:नागपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्र — विष्णुपुराण से भूमिका विष्णुपुराण, जो महर्षि पराशर द्वारा रचित अष्टादश महापुराणों में से एक है, उसमें अनेक प्रसंगों के माध्यम से भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की महिमा का वर्णन किया गया है।श्रीकृष्ण अवतार के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण प्रसंग है — कालिय नाग के दमन का। इस कथा में श्रीकृष्ण जब यमुना में बसे कालिय नाग के भय से गोकुलवासियों को मुक्त करते हैं, तब कालिय की पत्नियाँ (नागपत्नियाँ) श्रीकृष्ण की स्तुति करती हैं। यह स्तुति ही Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram नागपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्र कहलाती है। नागपत्नी कृत स्तोत्र का प्रसंग यमुना नदी का जल कालिय नाग के विष से विषाक्त हो गया था।गोकुलवासियों व गोधन की रक्षा हेतु श्रीकृष्ण यमुना में कूद पड़े।श्रीकृष्ण ने कालिय नाग से युद्ध किया और अंततः उसके फनों पर नृत्य कर उसे पराजित किया।जब कालिय हार गया, तब उसकी पत्नी नागपत्नियाँ रोती हुई श्रीकृष्ण के चरणों में आईं और अत्यंत भावुक होकर भगवान की स्तुति करने लगीं। Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram:नागपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्र का भावार्थ यह स्तोत्र भगवान श्रीकृष्ण की निर्दोषता, करुणा, शौर्य, ब्रह्मत्व और भक्तवत्सलता का वर्णन करता है। कुछ प्रमुख भाव: स्तोत्र के प्रमुख श्लोकों के भावार्थ इस स्तोत्र का महत्व श्रीविष्णुपुराणे नागपत्नीकृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम् हिंदी पाठ: Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram in Hindi ज्ञातोऽसि देवदेवेश सर्वज्ञस्त्वमनुत्तमः ।परं ज्योतिरचिन्त्यं यत्तदंशः परमेश्वरः ॥ १ ॥ न समर्थाः सुरास्स्तोतुं यमनन्यभवं विभुम् ।स्वरूपवर्णनं तस्य कथं योषित्करिष्यति ॥ २ ॥ यस्याखिलमहीव्योमजलाग्निपवनात्मकम् ।ब्रह्माण्डमल्पकाल्पांशः स्तोष्यामस्तं कथं वयम् ॥ ३ ॥ यतन्तो न विदुर्नित्यं यत्स्वरूपं हि योगिनः ।परमार्थमणोरल्पं स्थूलात्स्थूलं नताः स्म तम् ॥ ४ ॥ न यस्य जन्मने धाता यस्य चान्ताय नान्तकः ।स्थितिकर्ता न चाऽन्योस्ति यस्य तस्मै नमस्सदा ॥ ५ ॥ कोपः स्वल्पोऽपि ते नास्ति स्थितिपालनमेव ते ।कारणं कालियस्यास्य दमने श्रूयतां वचः ॥ ६ ॥ स्त्रियोऽनुकम्प्यास्साधूनां मूढा दीनाश्च जन्तवः ।यतस्ततोऽस्य दीनस्य क्षम्यतां क्षमतां वर ॥ ७ ॥ समस्तजगदाधारो भवानल्पबलः फणी ।त्वत्पादपीडितो जह्यान्मुहूर्त्तार्धेन जीवितम् ॥ ८ ॥ क्व पन्नगोऽल्पवीर्योऽयं क्व भवान्भुवनाश्रयः ।प्रीतिद्वेषौ समोत्कृष्टगोचरौ भवतोऽव्यय ॥ ९ ॥ ततः कुरु जगत्स्वामिन्प्रसादमवसीदतः ।प्राणांस्त्यजति नागोऽयं भर्तृभिक्षा प्रदीयताम् ॥ १० ॥ भुवनेश जगन्नाथ महापुरुष पूर्वज ।प्राणांस्त्यजति नागोऽयं भर्तृभिक्षां प्रयच्छ नः ॥ ११ ॥ वेदान्तवेद्य देवेश दुष्टदैत्यनिबर्हण ।प्राणांस्त्यजति नागोऽयं भर्तृभिक्षा प्रदीयताम् ॥ १२ ॥ ॥ इति श्रीविष्णुपुराणे नागपत्नीकृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram:श्रीविष्णुपुराणे नागपत्नीकृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम् Read More »

Vishwa Shanti Stotra: श्री विश्व शान्ति स्तोत्र

Vishwa Shanti Stotra: विश्व शांति स्तोत्र (श्री विश्व शांति स्तोत्र): ज्योतिष ग्रंथ के अनुसार, नवग्रहों को छोड़कर अन्य सभी ग्रह भगवान रुद्र या शिव के क्रोध से उत्पन्न हुए हैं। अधिकांश ग्रहों का स्वभाव सामान्यतः हानिकारक होता है, लेकिन कुछ नवग्रह शुभ ग्रह माने जाते हैं। यदि ज्योतिष के अनुसार इनकी पूजा की जाए, तो ये मनुष्य की सभी समस्याओं, बाधाओं को दूर कर देते हैं। विश्व शांति स्तोत्र या “शांति मंत्र” या पंच शांति, उपनिषदों में पाई जाने वाली शांति (शांति) के लिए हिंदू प्रार्थनाएँ हैं। आमतौर पर इनका पाठ धार्मिक अनुष्ठानों और प्रवचनों के आरंभ और अंत में किया जाता है। यजुर्वेद के विश्व शांति स्तोत्र शांति पाठ मंत्र के माध्यम से साधक ईश्वर से शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। विशेषकर हिंदू समुदाय के लोग अपने किसी भी धार्मिक कृत्य, अनुष्ठान, यज्ञ आदि के आरंभ और अंत में इस शांति पाठ के मंत्रों का जाप करते हैं। वैसे, इस मंत्र के माध्यम से संसार के सभी जीवों, वनस्पतियों और प्रकृति में शांति की प्रार्थना की गई है। उनके अनुसार, ईश्वर स्वरूप शांति, वायु में शांति, अंतरिक्ष में शांति, पृथ्वी पर शांति, जल में शांति, जल में शांति होनी चाहिए। और वनस्पति में शांति, विश्व में शांति हो, सभी देवताओं में शांति हो, शरीर में शांति हो, सभी में शांति हो, सभी में शांति हो, ईश्वर शांति हो, शांति हो, शांति हो। Vishwa Shanti Stotra: श्री विश्व शान्ति स्तोत्र शांति मंत्र महान भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को प्रकट करते हैं। Vishwa Shanti Stotra हमारे सांस्कृतिक विचार, दृष्टिकोण आध्यात्मिक आधारशिलाएँ बनाते हैं। हमारी आध्यात्मिकता का भवन इन्हीं मूल सिद्धांतों पर निर्मित होना चाहिए। आइए इन्हें देखें। दिव्य जीवन संस्था, ऋषिकेश के श्री स्वामी शिवानंद ने इसे संकलित किया है। Vishwa Shanti Stotra Ke Labh: विश्व शांति स्तोत्र के लाभ Vishwa Shanti Stotra: विश्व शांति स्तोत्र के पाठ से सभी जीवों की शांति होती है! शांति से विश्व की शांति, जल में शांति, औषधि में शांति, वनस्पति में शांति, विश्व में शांति आदि शांति के सुख हैं।विश्व शांति स्तोत्र या “शांति मंत्र” या पंच शांति, उपनिषदों में पाई जाने वाली शांति (शांति) के लिए हिंदू प्रार्थनाएँ हैं। आमतौर पर इनका पाठ धार्मिक अनुष्ठानों और प्रवचनों के आरंभ और अंत में किया जाता है। उपनिषदों के कुछ विषयों के आरंभ में विश्व शांति स्तोत्र का आह्वान किया जाता है। माना जाता है कि ये साधक के मन और उसके आस-पास के वातावरण को शांत करते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि इनका पाठ करने से आरंभ किए जा रहे कार्य में आने वाली सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं।विश्व शांति स्तोत्र हमेशा पवित्र अक्षर ॐ (औं) और “शांति” शब्द के तीन उच्चारणों के साथ समाप्त होता है, Vishwa Shanti Stotra: श्री विश्व शान्ति स्तोत्र जिसका अर्थ है “शांति”। तीन बार उच्चारण करने का उद्देश्य तीनों लोकों में शांति और बाधाओं को दूर करना है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए किसी भी कारण से मानसिक पीड़ा से ग्रस्त व्यक्ति को और यज्ञ एवं पूजा करने के बाद भी इस विश्व शांति स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। श्री विश्व शान्ति स्तोत्र हिंदी पाठ:Vishwa Shanti Stotra in Hindi नश्यन्तु प्रेत कूष्माण्डा नश्यन्तु दूषका नरा: ।साधकानां शिवाः सन्तु आम्नाय परिपालिनाम ॥ जयन्ति मातरः सर्वा जयन्ति योगिनी गणाः ।जयन्ति सिद्ध डाकिन्यो जयन्ति गुरु पन्क्तयः ॥ जयन्ति साधकाः सर्वे विशुद्धाः साधकाश्च ये ।समयाचार संपन्ना जयन्ति पूजका नराः ॥ नन्दन्तु चाणिमासिद्धा नन्दन्तु कुलपालकाः ।इन्द्राद्या देवता सर्वे तृप्यन्तु वास्तु देवतः ॥ चन्द्रसूर्यादयो देवास्तृप्यन्तु मम भक्तितः ।नक्षत्राणि ग्रहाः योगाः करणा राशयश्च ये ॥ सर्वे ते सुखिनो यान्तु सर्पा नश्यन्तु पक्षिणः ।पशवस्तुरगाश्चैव पर्वताः कन्दरा गुहाः ॥ ऋषयो ब्राह्मणाः सर्वे शान्तिम कुर्वन्तु सर्वदा ।स्तुता मे विदिताः सन्तु सिद्धास्तिष्ठन्तु पूजकाः ॥ ये ये पापधियस्सुदूषणरतामन्निन्दकाः पूजने ।वेदाचार विमर्द नेष्ट हृदया भ्रष्टाश्च ये साधकाः ॥ दृष्ट्वा चक्रम्पूर्वमन्दहृदया ये कौलिका दूषकास्ते ।ते यान्तु विनाशमत्र समये श्री भैरवास्याज्ञया ॥ द्वेष्टारः साधकानां च सदैवाम्नाय दूषकाः ।डाकिनीनां मुखे यान्तु तृप्तास्तत्पिशितै स्तुताः ॥ ये वा शक्तिपरायणाः शिवपरा ये वैष्णवाः साधवः ।सर्वस्मादखिले सुराधिपमजं सेव्यं सुरै संततम ॥ शक्तिं विष्णुधिया शिवं च सुधियाश्रीकृष्ण बुद्धया च ये ।सेवन्ते त्रिपुरं त्वभेदमतयो गच्छन्तु मोक्षन्तु ते ॥ शत्रवो नाशमायान्तु मम निन्दाकराश्च ये ।द्वेष्टारः साधकानां च ते नश्यन्तु शिवाज्ञया ।तत्परं पठेत स्तोत्रमानंदस्तोत्रमुत्तमम ।सर्वसिद्धि भवेत्तस्य सर्वलाभो प्रणाश्यति ॥ ॥ इति श्री विश्व शान्ति स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

Vishwa Shanti Stotra: श्री विश्व शान्ति स्तोत्र Read More »

Shani Mangal Yuti on Raksha Bandhan : रक्षाबंधन पर शनि-मंगल का महासंयोग, इन 3 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ

Shani Mangal Yuti: रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025 को भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ एक खास ज्योतिषीय संयोग भी लेकर आ रहा है। इस दिन आकाश में शनि और मंगल का दुर्लभ महा-राजयोग बनेगा, जो कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ होगा। इस शुभ संयोग से तीन राशियों को आर्थिक लाभ, नई अवसरों और समृद्धि के योग मिलेंगे। Shani Mangal Yuti: इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का उत्सव नहीं रहेगा, बल्कि यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन रहा है। 9 अगस्त 2025 को ग्रहों की विशेष स्थिति के चलते शनि और मंगल का संयोग बन रहा है, जिससे ‘नवपंचम राजयोग’ का निर्माण होगा। यह योग अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली माना जाता है, जो जातक के जीवन में सफलता, समृद्धि और नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। रक्षाबंधन 2025 के दिन ग्रहों की चाल एक खास खगोलीय संयोग बना रही है। सुबह 08 बजकर 18 मिनट पर मंगल और शनि के बीच 180 अंश की दूरी बनेगी, जिसे ज्योतिष में ‘प्रतियुति’ कहा जाता है। आमतौर पर प्रतियुति को संघर्ष और चुनौतियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस बार की स्थिति थोड़ी अलग है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, Shani Mangal यह राजयोग कुछ खास राशियों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है। जिन राशियों पर इस योग का सीधा प्रभाव पड़ेगा, उनके जीवन में आर्थिक लाभ, करियर में तरक्की और पारिवारिक सुख में वृद्धि के प्रबल योग बनेंगे। Shani Mangal यह समय उनके लिए सौभाग्य, मान-सम्मान और सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। आइए जानें वे कौन सी तीन भाग्यशाली राशियां हैं जिन्हें रक्षाबंधन 2025 पर इस ‘महा-राजयोग’ का विशेष लाभ मिलेगा। आप अपने रिश्ते में सुकून, देखभाल और स्थिरता महसूस करेंगे। इस कार्ड का संकेत है कि आपने इस संबंध में भरोसे और गहराई को मजबूत करने में काफी मेहनत की है। अब आप एक सुरक्षित भावनात्मक ज़ोन में पहुंच चुके हैं Shani Mangal: इन 3 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ मेष राशि इस बार रक्षाबंधन मेष राशि वालों के लिए बेहद खास रहने वाला है। नवपंचम महा-राजयोग के प्रभाव से आपके करियर में एक नई रफ्तार आएगी। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है, वहीं व्यापारियों को बड़ा लाभ होने के संकेत हैं। Shani Mangal आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है और किए गए निवेश से मुनाफा मिलने के योग हैं। इसके अलावा सामाजिक जीवन में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लोग आपके कार्यों की सराहना करेंगे। यह समय आत्मविश्वास और उत्साह से भरपूर रहेगा। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों के लिए रक्षाबंधन का यह समय ऊर्जा और मानसिक शांति का प्रतीक बनकर आएगा। लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में सुधार होगा और आप खुद को पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस करेंगे। पारिवारिक जीवन में खुशियों की बहार आएगी। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और घर में कोई शुभ कार्य भी संपन्न हो सकता है। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी के साथ आपके निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होगी, जिससे आप अपने व्यक्तिगत और पेशेवर लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। मीन राशि मीन राशि वालों के लिए रक्षाबंधन पर बन रहा यह राजयोग शिक्षा, संबंध और आध्यात्मिक उन्नति के क्षेत्र में बेहद शुभ रहेगा। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह समय अनुकूल है। कठिन परीक्षाओं में सफलता और नए अवसर मिलने के योग बन रहे हैं। सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा, जिससे नए और लाभदायक संबंध बन सकते हैं। यात्रा का योग भी बन रहा है, जो न सिर्फ लाभदायक होगी बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी संतुलन प्रदान करेगी। यह समय आपको भीतर से भी मज़बूत और संतुलित बनाएगा। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

Shani Mangal Yuti on Raksha Bandhan : रक्षाबंधन पर शनि-मंगल का महासंयोग, इन 3 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ Read More »

Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी पर भूलकर भी न करें ये काम, होगी धन हानि

Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में हर साल धूमधाम के साथ मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami 2025) भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है तो आइए इस दिन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं। जन्माष्टमी का व्रत। सनातन धर्म में जन्माष्टमी का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त उपवास रखते हैं और अगले दिन या कृष्ण-जन्म के बाद पारण करते हैं। इसके अलावा कुछ साधक विशेष पूजा करने के लिए भगवान कृष्ण के मंदिर भी जाते हैं। जन्माष्टमी के दिन कुछ चीजों को करने से भगवान कृष्ण नाराज हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति भी डगमगा सकती है। Janmashtami Vrat par Kya Na kare जन्माष्टमी पर क्या न करें? मास-मदिरा- सावन के महीने में भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस महीने तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं। तुलसी की पत्तियां- तुलसी की पत्तियां भगवान शिव को अर्पित नहीं करनी चाहिए। Janmashtami Vrat तुलसी जी माता लक्ष्मी का रूप मानी गयी हैं, जो विष्णु जी की पत्नी हैं। इसलिए शिव पूजा के दौरान भूलकर भी तुलसी की पत्तियों को न तो शिव जी को भोग लगाना चाहिए और न ही तुलसी की माला से शिव मंत्र का जाप करना चाहिए। अपमान- कोशिश करें की इस महीने आप किसी का दिल न दुखाएं और वाद-विवाद से भी बचें। Janmashtami Vrat किसी का भी अपमान करने से बचें और न ही किसी का मजाक उड़ाएं। काले वस्त्र- धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ अवसर या फिर पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसलिए कामिका एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। Janmashtami Vrat भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा। भोग लगाते या बनाते समय ध्यान रखें 6 चीजें 1- ध्यान रखें भोग में लहसुन या प्याज का इस्तेमाल न किया गया हो। भोग हमेशा सात्विक चीजों का ही लगाया जाता है। 2- स्नान करने के बाद ही भगवान का भोग तैयार करें। 3- कन्हा जी को भोग लगाने से पहले भोग का सेवन या चखना अच्छा नहीं माना जाता है। 4- बासी चीजों से भोग तैयार नहीं किया जाता है। 5- भोग बिना तुलसी की पत्तियों के नहीं लगता है। 6- आरती कर लेने के बाद भोग लगाकर आचवनी की जाती है और घंटी भी बजाते हैं।

Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी पर भूलकर भी न करें ये काम, होगी धन हानि Read More »

Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बना शुभ वृद्धि योग: इन 3 राशियों पर बरसेगी श्रीहरि की विशेष कृपा

Krishna Janmashtami: देशभर में 15 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा, जिसे कृष्ण जन्माष्टमी भी कहते हैं। जन्माष्टमी के पावन दिन वृद्धि योग का भी महासंयोग बन रहा है जिसका शुभ प्रभाव किन तीन राशिवालों के ऊपर पड़ने वाला है, उनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व और भी विशेष है क्योंकि 15 अगस्त 2025 को ‘वृद्धि योग’ का संयोग बन रहा है। यह योग शुभ कार्यों और साधना के लिए बेहद फलदायी माना जाता है। जो भी भक्त इस दिन विधिपूर्वक व्रत, पूजन और दान करते हैं, उन्हें श्रीकृष्ण की कृपा और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। krishna Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए जन्माष्टमी के पर्व का खास महत्व है, जिसका उत्सव हर साल बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, जो जगत के पालनहार भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं। Janmashtami इसलिए हर साल इस तिथि पर जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। कृष्ण जी को प्रसन्न करने के लिए कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। इस साल 15 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। ज्योतिष दृष्टि से भी जन्माष्टमी का दिन खास है क्योंकि 15 अगस्त 2025 को वृद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। चलिए जानते हैं उन तीन राशियों के राशिफल और उपायों के बारे में, जिन्हें इस शुभ दिन कृष्ण जी की विशेष कृपा प्राप्त होगी। वृद्धि योग का समय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 15 अगस्त की सुबह 9:05 बजे से अगले दिन 16 अगस्त की सुबह 6:32 बजे तक वृद्धि योग रहेगा। इस समय के दौरान श्रीकृष्ण की पूजा, रासलीला, झांकियां, उपवास और दान-पुण्य का विशेष महत्व रहेगा। Janmashtami इस योग में किए गए धार्मिक कार्य अति शुभ फल प्रदान करते हैं। These three zodiac signs will get special blessings on Shri Krishna Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इन तीन राशियों को मिलेगा विशेष आशीर्वाद इस बार की जन्माष्टमी उन लोगों के लिए बेहद लाभकारी रहने वाली है, जिनकी राशि वृषभ, कर्क और सिंह है। आइए जानते हैं इन राशियों का राशिफल और सरल उपाय। वृषभ राशि वृषभ को श्रीकृष्ण की प्रिय राशि माना जाता है, जिसके जातकों के ऊपर भगवान कृष्ण की विशेष कृपा रहती है। इस साल भी जन्माष्टमी के पावन पर्व पर वृषभ राशिवालों को श्रीकृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा। साथ ही वृद्धि योग का शुभ प्रभाव पड़ेगा। Janmashtami जहां एक तरफ कारोबारियों को अटके पैसे मिलने से मानसिक शांति मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ सैलरी बढ़ने से नौकरी कर रहे जातकों का मन खुश रहेगा। कृष्ण जी और राधा रानी के आशीर्वाद से विवाहित कपल के बीच प्रेम बढ़ेगा और घर में खुशहाली का आगमन होगा। उपाय- घर में कृष्ण जी और राधा रानी की मूर्ति स्थापित करें। कर्क राशि वृषभ के अलावा कर्क राशि को भी कृष्ण जी की प्रिय राशियों में से एक माना जाता है, जिसके जातकों के ऊपर ये मेहरबान रहते हैं। सिंगल जातकों को इस साल अपने व्रत का पूरा फल मिलेगा। 15 अगस्त के आसपास सच्चे प्यार से मुलाकात हो सकती है। जिन लोगों की शादी हो चुकी है, उनके परिवारवालों के बीच चल रही दुश्मनी खत्म होगी। पुराने निवेश से मुनाफा होने के कारण आर्थिक स्थिति को बल मिलेगा। उपाय- पानी का दान करें। सिंह राशि जन्माष्टमी पर वृद्धि योग के महासंयोग से सिंह राशिवालों के घर में खुशियां पहले से और ज्यादा बढ़ जाएंगी। किसी रिश्तेदार से झगड़ा चल रहा है तो वो सुलझ जाएगा। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे जातकों को सफलता मिलेगी और जिंदगी में थोड़ी स्थिरता आएगी। जिन लोगों का खुद का बिजनेस है या जो जातक नौकरी कर रहे हैं, उनके आर्थिक पक्ष में थोड़ा सुधार होगा। उपाय- पीले रंग की मिठाई का दान करें।

Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बना शुभ वृद्धि योग: इन 3 राशियों पर बरसेगी श्रीहरि की विशेष कृपा Read More »