Tripur Bhairavi Jayanti 2025 Mein Kab Hai: सनातन धर्म में त्रिपुर भैरवी जयंती को बहुत ही शुभ माना जाता है। यह मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन दस महाविद्याओं में से पांचवें उग्र रूप माता भैरवी की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता भैरवी भगवान भैरव की पत्नी हैं, जो भगवान शिव का एक उग्र स्वरूप हैं। कहा जाता है कि माता भैरवी की पूजा करने से गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
त्रिपुर भैरवी जयंती Bhairavi Jayanti का अर्थ त्रिपुर भैरवी, चैतन्य भैरवी, सिद्ध भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, सम्पदाप्रद भैरवी, कालेश्वरी भैरवी, कामेश्वरी भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, रुद्र भैरवी, भद्र भैरवी, शतकुटी भैरवी और नित्या भैरवी। माना जाता है Bhairavi Jayanti कि मां का यह रूप इतना विचित्र और कठोर दिखता है कि वह उतनी ही मिलनसार है।
त्रिपुर भैरवी जयंती 2025 तिथि
भैरवी जयन्ती Bhairavi Jayanti बृहस्पतिवार, दिसम्बर 4, 2025 पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – दिसम्बर 04, 2025 को 08:37 ए एम बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त दिसम्बर 05, 2025 को 04:43 ए एम बजे
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मां त्रिपुर भैरवी कौन हैं ?
माँ त्रिपुर भैरवी शक्ति का अग्निरूप स्वरूप हैं।
उन्हें
- संहार की शक्ति,
- निडरता का प्रतीक,
- तपस्या और तंत्र-साधना की देवी
माना गया है।
उनके भक्तों को ना सिर्फ आध्यात्मिक शक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में साहस, तेज, सफलता और बुरी शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है।
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त्रिपुर भैरवी जयंती की पूजा विधि:Worship method of Tripura Bhairavi Jayanti
1. प्रातः स्नान और संकल्प
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
- लाल वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को साफ कर लाल वस्त्र बिछाएं।
- संकल्प लें: “मैं माँ त्रिपुर भैरवी की कृपा हेतु यह पूजा कर रहा/रही हूँ।”
2. पूजन सामग्री
लाल फूल, कुमकुम, अक्षत, देसी घी दीपक, लाल फल/अनार, भोग के लिए मिठाई, भैरवी मंत्र की माला (रुद्राक्ष/लाल चंदन)
3. पूजन
- दीपक जलाएं
- देवी के सामने जल, कुमकुम, अक्षत चढ़ाएं
- लाल फूल अर्पित करें
- भैरवी चालीसा या स्तुति पढ़ें
4. विशेष मंत्र जप
माँ त्रिपुर भैरवी का मूल मंत्र:
“ॐ ह्रीं भैरवी स्वाहा”
जप संख्या – कम से कम 108 बार
5. भैरवी कवच का पाठ
यदि संभव हो तो भैरवी कवच का पाठ अवश्य करें — यह नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा देता है।
त्रिपुर भैरवी जयंती पर क्या करना चाहिए?
- लाल वस्त्र धारण करें
- ब्रह्मचर्य का पालन करें
- सत्य, शांति और संयम रखें
- गरीबों और स्त्रियों को दान दें
- देवी का मंत्र जप बढ़ाएँ
- लाल फल और मिश्री का भोग लगाएं
इस दिन क्या न करें?
- शराब, मांस, और तामसिक भोजन का सेवन न करें
- झूठ, क्रोध और अपमानजनक व्यवहार से दूर रहें
- काली शक्तियों से संबंधित किसी भी अनुष्ठान से बचें
- देर रात तक नकारात्मक स्थानों में न रहें
त्रिपुर भैरवी जयंती के लाभ
इस दिन पूजा और मंत्र जप करने से
- आत्मविश्वास बढ़ता है
- भय दूर होता है
- अचानक होने वाली हानि से सुरक्षा मिलती है
- व्यापार और करियर में प्रगति
- साधकों को सिद्धि प्राप्ति में सहायता
- घर में शुभ और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
- विवाह एवं संतान से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं
मां भैरवी Bhairavi Jayanti साधना विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी है जो मानसिक रूप से कमजोर महसूस करते हैं या जीवन में बार-बार असफलता का सामना कर रहे हैं।
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त्रिपुर भैरवी जयंती का महत्व:Significance of Tripura Bhairavi Jayanti
तंत्र विद्या में निपुणता प्राप्त करने के लिए मां आदिशक्ति के स्वरूप त्रिपुर भैरवी की पूजा की जाती है। Bhairavi Jayanti इसके अलावा माता भैरवी को तेरह अलग-अलग रूपों में पूजा जाता है, जैसे-त्रिपुर भैरवी, चैतन्य भैरवी, सिद्ध भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, संपदाप्रद भैरवी, कालेश्वरी भैरवी, कामेश्वरी भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, रुद्र भैरवी, भद्र भैरवी, शतकुटी भैरवी और नित्या भैरवी।
माना जाता है कि मां का यह रूप दिखने में जितना विचित्र और कठोर है, वह उतना ही दयालु भी है। Bhairavi Jayanti ऐसे में अगर आप लगातार किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको माता दुर्गा के इस रौद्र रूप की पूजा जरूर करनी चाहिए।




