September 20, 2025

Navratri Day 1 2025: Maa Shailputri Puja Vidhi, Katha, Mantra & Importance

Navratri 2025 का पहला दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन माँ शैलपुत्री (Maa Shailputri) की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि (Sharadiya Navratri) की शुरुआत इसी दिन से होती है। माँ शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। आइए जानते हैं Navratri Day 1 puja vidhi, story, mantra और महत्व विस्तार से। Navratri Day 1 Puja Vidhi (नवरात्रि प्रथम दिन पूजा विधि) 1. कलश स्थापना (Ghatasthapana): सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। मिट्टी के बर्तन में जौ/गेहूं बोकर उस पर जल से भरा कलश रखें। कलश पर नारियल, आम के पत्ते और मौली बाँधें। 2. माँ शैलपुत्री की पूजा: माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती अथवा शैलपुत्री स्तुति का पाठ करें। 3. विशेष भोग: माँ को घी का भोग चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्तों का मानना है कि इस दिन घी अर्पित करने से जीवन में निरोगिता और शक्ति प्राप्त होती है। Navratri Day 1 Story (माँ शैलपुत्री की कथा) माँ शैलपुत्री का जन्म हिमालय के घर हुआ था, इसलिए इन्हें ‘शैलपुत्री’ कहा गया।पिछले जन्म में ये सती थीं, जिन्होंने भगवान शिव के अपमान को सह न पाने के कारण अपने प्राण त्याग दिए थे। अगले जन्म में हिमालय की पुत्री बनकर इनका पुनर्जन्म हुआ। माँ शैलपुत्री ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त किया।इनका वाहन वृषभ (बैल) है और इनके हाथों में त्रिशूल तथा कमल सुशोभित रहते हैं। Navratri Day 1 Maa Shailputri Mantra ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥ इस मंत्र का जप करने से मन को स्थिरता, शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। Navratri Day 1 Importance (महत्व) नवरात्रि के प्रथम दिन की पूजा से संकल्प शक्ति मजबूत होती है। माँ शैलपुत्री साधना से जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आती है। कलश स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। Navratri Day 1 Puja Vidhi Maa Shailputri Puja Vidhi 2025 Navratri First Day Story in Hindi Navratri 2025 Ghatasthapana Maa Shailputri Mantra Benefits Navratri Day 1 Importance

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bhavAnIstuti: भवानीस्तुति

bhavAnIstuti: भवानीस्तुति आनन्दमन्थरपुरन्दरमुक्तमाल्यं मौलौ हठेन निहितं महिषासुरस्य । पादाम्बुजं भवतु वो विजयाय मंजु-मंजीरशिंजितमनोहरमम्बिकायाः ॥ १॥ ब्रह्मादयोऽपि यदपांगतरंगभंग्या सृष्टि स्थिति-प्रलयकारणतां व्रजन्ति । लावण्यवारिनिधिवी चिपरिप्लुतायै तस्यै नमोऽस्तु सततं हरवल्लभायै ॥ २॥ पौलस्त्यपीनभुजसम्पदुदस्यमानकैलाससम्भ्रमविलोलदृशः प्रियायाः । श्रेयांसिवोदिशतुनिहनुतकोपचिह्नमालिंगनोत्पुलकभासितमिन्दुमौलेः ॥ ३॥ दिश्यान्महासुरशिरः सरसीप्सितानि प्रेंखन्नखावलिमयूखमृणालनालम् । चण्डयाश्चलच्चटुलनूपुरचंचरीकझांकारहारि चरणाम्बुरूहद्वयं वः ॥ ४॥ ॥ इति भवानी स्तुति सम्पूर्णा ॥

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bhagavatIstotram: भगवतीस्तोत्रम्

bhagavatIstotram: भगवतीस्तोत्रम् जय भगवति देवि नमो वरदे जय पापविनाशिनि बहुफलदे ।जय शुम्भ-निशुम्भ कपालधरे प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे ॥ १॥ जय चन्द्रदिवाकर-नेत्रधरे जय पावकभूषितवक्त्रवरे ।जय भैरवदेहनिलीनपरे जय अन्धकदैत्यविशोषकरे ॥ २॥ जय महिषविमर्दिनिशूलकरे जय लोकसमस्तकपापहरे ।जय देवि पितामहविष्णुनुते जय भास्करशक्रशिराऽवनते ॥ ३॥ जय षण्मुख-सायुध-ईशनुते जय सागरगामिनि शम्भुनुते ।जय दुःख-दरिद्र-विनाशकरे जय पुत्रकल त्रविवृद्धिकरे ॥ ४॥ जय देवि समस्तशरीरधरे जय नाकविदर्शिनि दुःखहरे ।जय व्याधिविनाशिनि मोक्षकरे जय वांछितदायिनि सिद्धिकरे ॥ ५॥ एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं यः पठेन्नियतः शुचिः ।गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा ॥ ६॥ ॥ इति व्यासकृतं भगवतीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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Amba Vandana: अम्बावन्दना

Amba Vandana: अम्बावन्दना आदावेकां लोक-सिसृक्षा-रसजुष्टां,द्वन्द्वाध्युष्टां,भूत-निकायान् कलयन्तीम् ।माया-मुख्यैर्नामभिराद्यैरुपदिष्टां,वन्देऽमन्द-द्योत-कदम्बां जगदम्बाम् ॥ १॥ मूलाधारादा च विशुद्वेः प्रविभक्तां,शाब्दीं सृष्टिं,पात्रविशेषाद् घटयन्तीम् ।श्रौतैः स्मार्तैः पौरुष-सूक्तैरुपगीतां,वन्देऽमन्द-द्योत-कदम्बां जगदम्बाम् ॥ २॥ ऐन्द्रीं भूतिं भक्तजनेभ्यो वितरन्तीं,ह्रीङ्कुर्वाणां,तद्विमुखेषु प्रतिवेलम् ।श्रीं निर्दोलां तद्भवनान्ते विदधानां,वन्देऽमन्द-द्योत-कदम्बां जगदम्बाम् ॥ ३॥ किं बन्धूकैः,किं नु जपाभिः,किमु रक्तै-रब्जैरुद्यदभास्कर-रागैरुत सृष्टैः ।अङ्गैरिङ्गत्कान्तिवितानैरभिरामां,वन्देऽमन्द-द्योत-कदम्बां जगदम्बाम् ॥ ४॥ याऽपर्णाहो ताप-निरासाय सपर्णा,वर्णातीता वर्ण-विशेषाञ्जुषमाणा ।तां वैचित्र्योद्भासन-सूनावलि-वल्लींवन्देऽमन्द-द्योत-कदम्बां जगदम्बाम् ॥ ५॥ नीप-श्रेणी-शालिनि चिन्तामणि-गेहे,पीठासीनामावृतिचक्रैरुपगूढाम् ।ब्रह्मादिभ्यो वाञ्छितमर्थं प्रथयन्तीं,वन्देऽमन्द-द्योत-कदम्बां जगदम्बाम् ॥ ६॥ स्फूर्जत्सान्द्रामोद-तरङ्गावलि-लीनै-रर्चामाप्तां,षोडश-मुख्यैरुपचारैः ।उद्यन्नानालङ्कृति-रत्न-द्युति-पुञ्जां,वन्देऽमन्द-द्योत-कदम्बां जगदम्बाम् ॥ ७॥ माद्यद्देवारब्ध-नमस्या-निकुरम्बां,व्यापच्छैलच्छेद-विलक्षीकृत-शम्बाम् ।आज्ञा-दानान्दोलन-हृद्याधर-बिम्बां,वन्देऽमन्द द्योत कदम्बां जगदम्बाम् ॥ ८॥ ब्रह्म-विष्णु-महेशांश्च गमयन्ती महर्षिताम् ।यन्त्रात्मना परिणता पुनातु परमेश्वरी ॥ ॥ इत्यम्बा-वन्दना समाप्ता ॥

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Kojagari Puja 2025

Kojagari Puja 2025 Date And Time: कोजागरी पूजा कब है? धरती पर पधारेंगी मां लक्ष्मी, नोट करें शुभ मुहूर्त और महत्व

Kojagari Puja 2025: कोजागरी पूर्णिमा (Kojagari Purnima) हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है, जिसे कोजागरी लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व अश्विन माह की पूर्णिमा पर मनाया जाता है। इसे शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) भी कहते हैं। माना जाता है कि पूर्णिमा तिथि मां लक्ष्मी की जन्म तिथि भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष रात्रि को मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करने आती हैं और अपने भक्तों के संकटों को दूर करती हैं। जो भी भक्त इस रात को जागरण करते हैं, Kojagari Puja 2025 माता लक्ष्मी उन पर विशेष कृपा बरसाती हैं और उन्हें धन-धान्य से सम्पन्न कर देती हैं। Kojagari Puja 2025 Date And Time : सही तारीख और तिथि कब है? इस वर्ष कोजागरी लक्ष्मी पूजा 6 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। कोजागर व्रत (Kojagar Vrat) सोमवार, 6 अक्टूबर को किया जाएगा। Kojagari Puja 2025 यह पूजा मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा असम आदि राज्यों में विशेष रूप से मनाई जाती है। पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समापन:Beginning and end of Purnima Tithi अश्विन पूर्णिमा तिथि (यानी कोजागरी पूर्णिमा तिथि) का विवरण इस प्रकार है: • पूर्णिमा तिथि शुरू: 6 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से। • पूर्णिमा तिथि समाप्त: अगले दिन 7 अक्टूबर 2025 को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर। कोजागरी लक्ष्मी पूजा 2025 शुभ मुहूर्त (Kojagari Puja Shubh Muhurat) मां लक्ष्मी की पूजा के लिए निशिता काल को सबसे उत्तम माना गया है। विवरण समय स्रोत कोजागरी पूजा निशिता काल समय रात 11 बजकर 45 मिनट से देर रात 12 बजकर 24 मिनट तक। (एक अन्य स्रोत में रात 12 बजकर 34 मिनट तक बताया गया है) चंद्रोदय समय शाम 5 बजकर 27 मिनट। (एक अन्य स्रोत में शाम 5 बजकर 26 मिनट बताया गया है) Importance of Kojagari Puja: Why is night vigil performed: कोजागरी पूजा का महत्व: क्यों किया जाता है रात्रि जागरण? हिंदू धर्म में इस पूजा का अत्यधिक महत्व है। दिवाली की तरह ही, इस दिन भी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। 1. ‘कोजागरी’ का अर्थ: हिन्दू धर्म के अनुसार, इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और यह देखती हैं कि ‘कौन रात्रि जागरण कर रहा है’। इसी कारण इस पूजा को ‘कोजागरी’ (Kojagari) कहा गया है। 2. धन-धान्य की प्राप्ति: जो व्यक्ति इस रात जागरण करता है (रात्रि जागरण करने वाले व्यक्ति का महालक्ष्मी कल्याण करती हैं), माता लक्ष्मी उसे धन-धान्य से सम्पन्न कर देती हैं। 3. अमृत वर्षा और इंद्र पूजा: इस दिन चंद्रमा से अमृत बरसता है, इसलिए चांद की पूजा महत्वपूर्ण मानी गई है। साथ ही, माता लक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा करने के साथ ही इंद्र (Indra) की भी पूजा की जाती है, जिससे पूजा करने वाले व्यक्ति के लिए धन प्राप्ति के द्वार खुल जाते हैं। 4. खुले द्वार: भक्त इस दिन अपने घरों में मिट्टी का दीपक जलाते हैं और पूजा के दौरान दरवाजे और खिड़कियां खुली छोड़ देते हैं, ताकि लक्ष्मी जी का आगमन हो सके। Description of Kojagari fast in Skanda Purana: स्कंद पुराण में कोजागरी व्रत का वर्णन स्कंद पुराण के अनुसार, Kojagari Puja 2025 कोजागरी पूजा को एक सर्वश्रेष्ठ व्रत बताया गया है। इस व्रत का विधिवत पालन करने से एक साधारण प्राणी भी उत्तम गति प्राप्त करता है, और इस जन्म तथा दूसरे जन्मों में भी ऐश्वर्य, आरोग्य एवं पुत्र-पौत्रादि का आनन्द भोगता है। Eight forms of Goddess Lakshmi:मां लक्ष्मी के आठ स्वरूप Kojagari Puja 2025 कोजागरी पूजा के दौरान माता लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का ध्यान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। ये आठ स्वरूप हैं: धनलक्ष्मी, धन्य लक्ष्मी, राजलक्ष्मी, वैभवलक्ष्मी, ऐश्वर्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, कमला लक्ष्मी और विजय लक्ष्मी। Mantra to get the blessings of Mahalakshmi:महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए मंत्र Kojagari Puja 2025: कोजागरी पूजा के दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इन मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी होता है: 1. श्री लक्ष्मी बीज मंत्र ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।। 2. लक्ष्मी प्रार्थना मंत्र नमस्ते सर्वगेवानां वरदासि हरे: प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां या सा मे भूयात्वदर्चनात्।। 3. श्री लक्ष्मी महामंत्र ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

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Padmanabha Dwadashi 2025

Padmanabha Dwadashi 2025 Date: पद्मनाभ द्वादशी तिथि, महत्व, और भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा विधि

Padmanabha Dwadashi 2025 Mein Kab Hai: हिंदू धर्म में द्वादशी तिथि का अत्यंत आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। द्वादशी चंद्र कैलेंडर के प्रत्येक पखवाड़े का बारहवां दिन होता है। यह तिथि एकादशी के उपवास और आध्यात्मिक अभ्यासों के ठीक बाद आती है, और इसे उपवास अनुष्ठानों और पूजा को पूरा करने के लिए एक अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। Padmanabha Dwadashi 2025 द्वादशी को अक्सर भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है, जिन्हें ब्रह्मांड का संरक्षक माना जाता है। भक्त दिव्य आशीर्वाद, आध्यात्मिक शुद्धि, और व्यक्तिगत विकास के लिए इस दिन विभिन्न अनुष्ठान और प्रार्थना करते हैं। Spiritual and physical importance of Padmanabha Dwadashi 2025 :द्वादशी का आध्यात्मिक और शारीरिक महत्व Padmanabha Dwadashi 2025: द्वादशी का पालन करने से व्यक्ति को कई आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक लाभ प्राप्त होते हैं। 1. एकादशी व्रत की पूर्णता द्वादशी एकादशी व्रत (उपवास) के समापन का दिन होता है और उपवास तोड़ने के लिए इसे अत्यधिक शुभ माना जाता है। उपवास तोड़ने का सही समय, जिसे पारण कहा जाता है, Padmanabha Dwadashi 2025 द्वादशी पर सूर्योदय के बाद और धार्मिक ग्रंथों द्वारा निर्दिष्ट समय के दौरान करना आवश्यक है। यह एकादशी के आध्यात्मिक लाभों को बनाए रखता है। 2. दैवीय कृपा और शुद्धि द्वादशी का पालन करने से आध्यात्मिक शुद्धि की भावना आती है, क्योंकि एकादशी का आत्म-अनुशासन और आत्म-नियंत्रण इस दिन आगे बढ़ता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से शांति, सुरक्षा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। 3. दान और करुणा का भाव द्वादशी दान और करुणा का दिन भी है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या दान देने से सद्भाव, दयालुता और निस्वार्थता के मूल्यों को बढ़ावा मिलता है। द्वादशी पर किए गए ऐसे कार्य धन्य और लाभकारी माने जाते हैं। 4. शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्पष्टता उपवास करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। द्वादशी उपवास मन और शरीर को सामंजस्य बिठाने में मदद करता है। यह मानसिक स्पष्टता और बेहतर एकाग्रता को भी बढ़ावा देता है, जिससे ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यासों पर बेहतर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। 5. मोक्ष की ओर मार्ग मान्यता है कि द्वादशी पर उपवास और भक्ति का ईमानदारी से अभ्यास करने वाले लोग चेतना की उच्च अवस्था प्राप्त कर सकते हैं और मोक्ष (मुक्ति) की ओर अपना मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। Padmanabha Dwadashi 2025: Worship of special form of Lord Vishnu:पद्मनाभ द्वादशी 2025: भगवान विष्णु के विशेष स्वरूप की पूजा Padmanabha Dwadashi 2025: पद्मनाभ द्वादशी आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाई जाती है। यह पापांकुशा एकादशी (Pasankusa Ekadasi) के ठीक अगले दिन होती है। पद्मनाभ द्वादशी का महत्व:Importance of Padmanabha Dwadashi यह व्रत श्री हरि विष्णु के अनंत पद्मनाभ स्वरूप को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास में जब सूर्य कन्या राशि में आते हैं, Padmanabha Dwadashi 2025 तब आने वाली द्वादशी को पद्मनाभ द्वादशी कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान श्री हरि क्षीरसागर में शयन करते हैं, और भगवान विष्णु की इसी विश्राम अवस्था को पद्मनाभ कहा जाता है। पद्मनाभ का अर्थ कमल भी है, क्योंकि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने विष्णु की नाभि-कमल से उत्पन्न होकर सृष्टि की रचना की थी। लाभ: जो व्यक्ति पद्मनाभ द्वादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। Padmanabha Dwadashi 2025 इस व्रत के प्रभाव से जीवन में धन-संपदा और वैभव की कमी नहीं होती है। विशेष पूजन से निर्धन भी अमीर बन जाते हैं और नि:संतानों को संतान सुख प्राप्त होता है। पद्मनाभ द्वादशी 2025 तिथि: पद्मनाभ व्रत 2025 की तिथि 4 अक्टूबर है। पद्मनाभ द्वादशी पूजा विधि (Puja Vidhi) पद्मनाभ द्वादशी पर विधि-विधान से पूजा की जाती है। यहां पूजा की चरण-दर-चरण विधि दी गई है: 1. स्थापना: घर की पूर्व दिशा में एक लाल कपड़े पर भगवान पद्मनाभ का चित्र स्थापित करें। 2. कलश स्थापना: एक पीतल का कलश स्थापित करें। इस कलश में जल, रोली, और सिक्के डालें। कलश के मुख पर अशोक के पत्ते रखें और उस पर नारियल रखें, फिर विधिवत पूजन करें। 3. पूजा सामग्री: गाय के घी (गौघृत) का दीपक जलाएं, गुलाब की अगरबत्ती जलाएं, चंदन और लाल फूल चढ़ाएं। 4. भोग: गेहूं और गुड़ के दलिए का भोग लगाएं। 5. तुलसी अर्पण: 12 तुलसी पत्र चढ़ाएं। 6. मंत्र जाप: लाल चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 108 बार जाप करें: ॐ पद्मनाभाय नम:।। 7. प्रसाद वितरण: पूजा समाप्त होने के बाद दलिए का प्रसाद वितरित करें। Devi Skandmata: मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती द्वादशी पर क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts) द्वादशी के दिन आध्यात्मिक लाभों को अधिकतम करने के लिए कुछ आचार संहिता का पालन करना महत्वपूर्ण है: क्या करें (Do’s) क्या न करें (Don’ts) एकादशी व्रत का पारण सही समय पर करें। भोजन में अति-लिप्तता से बचें; सादा, शाकाहारी भोजन करें। भारी, मसालेदार या तैलीय भोजन से बचें। भगवान विष्णु की पूजा करें, मंदिर जाएं या घर पर शांतिपूर्ण स्थान पर पूजा करें। मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन न करें। तुलसी के पौधे की पूजा करें (जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं)। नकारात्मक विचार या कार्य (जैसे गपशप या बहस) से बचें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या सुनें। तुलसी के पत्ते न काटें या तोड़ें। दान-पुण्य करें, जैसे जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, या धन दान करना। दिन में सोने से बचें, क्योंकि इससे आध्यात्मिक योग्यता कम हो सकती है। साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनें। पैसे उधार देने या लेने जैसे वित्तीय लेनदेन से बचें।

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