Shradh or pitra paksha: हर साल पितृ पक्ष के दौरान, लोग अपने स्वर्गवासी पितरों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं, ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें. ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने पूर्वजों की संपत्ति का उपभोग तो करते हैं, लेकिन उनका श्राद्ध तर्पण नहीं करते, उन्हें पितृ दोष के कारण कई तरह के दुखों का सामना करना पड़ता है. Shradh or pitra paksha हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार, पितृ पक्ष को अत्यंत महत्वपूर्ण दर्जा दिया गया है, और श्राद्ध द्वारा ही पितरों का ऋण चुकाया जाता है.
श्राद्ध का तात्पर्य श्रद्धा से किए गए ऐसे कर्मों से है जो देवात्माओं, महापुरुषों, ऋषियों, गुरुजनों और पितर पुरुषों की प्रसन्नता के लिए किए जाते हैं. यह अपने पितृ पुरुषों के उपकारों के प्रति आभार व्यक्त करने और भक्ति भावना प्रदर्शित करने का एक प्रयत्न है. विधिपूर्वक श्राद्ध न करने से पितृ श्राप भी दे सकते हैं, इसलिए इन नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है.
पितृ पक्ष की शुरुआत कब होगी? (Pitru Paksha Date And Time)
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि 07 सितंबर को देर रात 01 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 07 सितंबर को ही रात 11 बजकर 38 मिनट पर होगा। ऐसे में दिन रविवार, 07 सितंबर 2025 के दिन से ही पितृ पक्ष की शुरुआत होने जा रही है। इसके साथ ही इसकी समाप्ति सर्व पितृ अमावस्या यानी 21 सितंबर 2025 को होगी।
आइए जानते हैं कि श्राद्ध के दौरान किन कार्यों को करना चाहिए और किनसे बचना चाहिए, ताकि आपको अपने पितरों का आशीर्वाद मिल सके:
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श्राद्ध में क्या करना चाहिए? (Shradh or pitra paksha)
1. कौन करे श्राद्ध: पिता का श्राद्ध पुत्र द्वारा किया जाना चाहिए. यदि पुत्र अनुपस्थित हो, तो उसकी पत्नी श्राद्ध कर सकती है.
2. सही तिथि: वर्ष के किसी भी मास और तिथि में स्वर्गवासी हुए पितरों के लिए पितृ पक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है.
3. पकवान और भोग: श्राद्ध में बनने वाले पकवान पितरों की पसंद के होने चाहिए.
4. आवश्यक सामग्री: श्राद्ध में गंगाजल, दूध, शहद और तिल का उपयोग सबसे ज़रूरी माना गया है.
5. ब्राह्मणों को भोजन: श्राद्ध पर ब्राह्मणों को अपने घर पर आमंत्रित करना चाहिए. उन्हें सोने, चांदी, कांसे और तांबे के बर्तन में भोजन कराना सर्वोत्तम माना जाता है.
6. भोजन का समय: मध्यान्हकाल (दोपहर) में ब्राह्मण को भोजन खिलाकर और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए.
7. मंत्र जाप: इस दिन पितर स्तोत्र का पाठ और पितर गायत्री मंत्र आदि का जाप दक्षिणा मुखी होकर करना चाहिए.
8. पशु-पक्षियों को ग्रास: श्राद्ध के दिन कौवे, गाय और कुत्ते को ग्रास (भोजन का अंश) अवश्य डालनी चाहिए, क्योंकि इसके बिना श्राद्ध अधूरा माना जाता है.
9. श्रद्धा-भावना: पिण्ड तो प्रतीक मात्र होते हैं, Shradh or pitra paksha असली समर्पण श्रद्धा-भावना ही होती है. यही श्रद्धा पितर, देव, ऋषि और महापुरुषों को प्रसन्न करने का माध्यम बनती है.
10. नित्य पूजन: नित्य देव पूजन, पितर पूजन, ऋषि आत्माओं का पूजन और सत्स्वरूप ईश्वर का आराधन ही असली श्रद्धा है.
श्राद्ध में क्या नहीं करना चाहिए? (Shradh me kya na kare)
1. समय का ध्यान: रात में कभी भी श्राद्ध नहीं करना चाहिए, क्योंकि रात को राक्षसी का समय माना गया है. संध्या के वक्त भी श्राद्ध नहीं करना चाहिए.
2. वर्जित भोजन: Shradh or pitra paksha श्राद्ध में कभी भी मसूर की दाल, मटर, राजमा, कुलथी, काला उड़द, सरसों और बासी भोजन आदि का प्रयोग वर्जित माना गया है.
3. तामसी भोजन: Shradh or pitra paksha श्राद्ध के वक्त घर में तामसी भोजन नहीं बनाना चाहिए.
4. नशीले पदार्थ: इस समय हर तरह के नशीले पदार्थों के सेवन से दूरी बनानी चाहिए.
5. शरीर पर प्रयोग: पितृ पक्ष के दिनों में शरीर पर तेल, सोना, इत्र और साबुन आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए.
6. क्रोध और कलह: श्राद्ध करते समय क्रोध, कलह और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.
इन नियमों का पालन कर आप अपने पितरों को संतुष्ट कर सकते हैं Shradh or pitra paksha और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आपके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहेगी.






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