August 3, 2025

The Apex of Devotion: Understanding the Last Sawan Somwar and Udhyapan

The Apex of Devotion: Understanding the Last Sawan Somwar and Udhyapan (भक्ति का शिखर: आखिरी सावन सोमवार और उद्यापन को समझना) The sacred month of Sawan, a period imbued with immense spiritual potency, is wholly dedicated to the veneration of Bhagwan Shiv and Devi Parvati. It is a time when the celestial energies align to bless devotees who observe the Sawan Somwar fasts with utmost faith and perform meticulous worship of Lord Shiva. It is widely believed that engaging in devotional practices during Sawan can manifest all desires. This year, the auspicious Sawan began on July 11th and extends until August 9th. Having already witnessed three powerful Sawan Somwars, we now stand at the threshold of the final Sawan Somwar, which falls on August 4th. For those dedicated souls who have diligently observed all the Sawan Somwar fasts, performing the Udhyapan ritual on this concluding day becomes not just important, but absolutely essential. Why, you ask? Because the complete fruition and full benefit of any fast are only truly realized upon the proper conclusion, known as Udhyapan. This final act is an Upaya (remedial measure) that ensures the spiritual energy accumulated throughout the fasting period is harmonized and effectively integrated into your life’s journey, aligning with your planetary combinations for positive outcomes. The Profound Significance of Sawan Somwar Fasting (सावन सोमवार व्रत का गहरा महत्व) Throughout the month of Sawan, devotees earnestly observe the Sawan Somwar fasts and meticulously perform the worship of Lord Shiva. There’s a deeply held belief that the worship of Lord Shiva during Sawan has the power to fulfill all the desires of devotees. This entire month holds a special sanctity, specifically consecrated to Bhagwan Shiva and Devi Parvati. Performing the Udhyapan: A Step-by-Step Guide for Full Benefits (उद्यापन विधि: पूर्ण लाभ के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका) To truly reap the entire benefits of your Sawan Somwar fasts, the Udhyapan on the last Somwar is paramount. Here’s how you can perform this sacred ritual with traditional reverence: Sacred Offerings for Lord Bholenath (भगवान भोलेनाथ के लिए पवित्र भोग) While completing your spiritual observances, offering a bhog (sacred food offering) to Lord Bholenath is an integral part of the ritual. This act symbolizes gratitude and devotion. Here are some traditional and beloved offerings:

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अगस्त 2025 (1-15) का मासिक राशिफल: आपकी राशि के लिए क्या लेकर आ रहा है यह पखवाड़ा?

अगस्त का यह पखवाड़ा आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहरा प्रभाव डालने वाला है। चाहे आप अपने करियर में नई ऊंचाइयों को छूने की योजना बना रहे हों, वित्तीय स्थिरता की तलाश में हों, रिश्तों में मधुरता चाह रहे हों, या अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाना चाहते हों – ग्रहों की चाल आपको महत्वपूर्ण संकेत दे रही है। आइए, एक-एक करके सभी 12 राशियों के लिए इस अवधि का विस्तृत विश्लेषण करें: 1. मेष राशि (Aries): सीखो और चमको! मेष राशि वाले जातकों के लिए 1 से 15 अगस्त का यह समय थोड़ी मस्ती और थोड़ी रियलिटी के साथ बीतेगा। आपके लिए इस दौरान का मूल मंत्र है “सीखो और चमको”। • करियर और व्यवसाय: नए प्रोजेक्ट्स के अवसर मिलेंगे, खासकर ऐसे प्रोजेक्ट्स जिनमें आपको लगेगा कि आप सक्षम नहीं हैं। ऑफिस या व्यवसाय में नई जिम्मेदारियां मिलेंगी, जिन्हें आपको स्वीकार करना होगा, भले ही घबराहट हो। शनि की साढ़ेसाती में ऐसा बार-बार होता है, और यह बस शुरुआत है। वर्क फ्रॉम होम करने वालों के लिए काम और आराम दोनों संतुलित रहेंगे, फोकस भी बना रहेगा। बॉस की उम्मीदें थोड़ी ऊंची रहेंगी, इसलिए ऊर्जा और धैर्य का संतुलन बनाए रखना होगा। ऑफिस पॉलिटिक्स से दूर रहकर अपने काम पर ध्यान दें, आपका काम ही आपके लिए बोलेगा। • वित्त और धन: आर्थिक स्थिति decent रहेगी। पैसे का प्रवाह बना रहेगा और खर्च भी होगा, लेकिन स्मार्ट तरीके से संभल सकता है। फ्रीलांसिंग, डिजाइनिंग या मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए आय के नए रास्ते खुलेंगे। रुका हुआ पैसा या अटकी हुई डील्स एक्टिवेट हो जाएंगी। निवेश करते समय दिल की बजाय दिमाग का इस्तेमाल करें। • प्रेम संबंध और रिश्ते: दिल थोड़ा संवेदनशील रहेगा, छोटी बातें गहरा असर डालेंगी। पुरानी यादें या लोग दिमाग में लौट सकते हैं। कमिटेड लोगों के लिए खुला संवाद बहुत महत्वपूर्ण है; सुनना भी सीखें और दूसरों की स्थिति को समझने की कोशिश करें। सिंगल्स के लिए किसी नए व्यक्ति से वाइब मैच हो सकती है, मैसेजिंग या चैटिंग शुरू हो सकती है, नई खुशियाँ आने वाली हैं। • शिक्षा और विद्यार्थी जीवन: पढ़ाई का मूड थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। कभी-कभी लगेगा कि पूरा अनुशासन बनाएंगे, और कभी-कभी 3-4 दिनों तक खाली बैठे रहेंगे। एकाग्रता में कमी और गहरे विचारों में खो जाना भी हो सकता है। मीडिया, टेक, भाषा, कंटेंट या क्रिएटिव फील्ड से जुड़े छात्रों के लिए समय बेहतर है। मोबाइल, लैपटॉप आदि से दूरी बनाए रखें यदि वे आपको विचलित कर रहे हैं। • स्वास्थ्य: शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। मूड स्विंग्स और नींद में गड़बड़ी भी हो सकती है। पीठ दर्द और पाचन संबंधी समस्याएँ परेशान कर सकती हैं। नींद का पैटर्न बदलता हुआ दिख रहा है। अधिक पानी पिएं और रात में हल्का भोजन करें। इन 15 दिनों में गुस्से पर नियंत्रण रखना सबसे बड़ी सलाह है। • उपाय: मंगलवार को हनुमान मंदिर जाकर गुड़ या चने का दान करें। यदि स्वास्थ्य अनुमति दे, तो रक्तदान करें। लाल रंग के वस्त्र का दान करना भी लाभकारी रहेगा। 2. वृषभ राशि (Taurus): निरंतरता ही मौन शक्ति है! वृषभ राशि के जातकों को धीरे-धीरे चलना है लेकिन मजबूत बनना समय की पुकार है। इस हफ्ते का मंत्र है “कंसिस्टेंसी इज अ साइलेंट पावर”। • करियर और व्यवसाय: काम धीरे चल रहा है, पर सही दिशा में है। कॉर्पोरेट, मीडिया, मार्केटिंग या फ्रीलांसिंग में जुड़े लोगों के लिए यह विश्वसनीयता, संपर्क और नेटवर्क बनाने का समय है। आपकी बात का लोगों पर असर हो रहा है, मीटिंग्स और कॉल हो रही हैं, लोग आपकी पिच सुन रहे हैं। एक साथ दो विकल्प दिख सकते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनेगी; धैर्य से सोच-विचार कर ही निर्णय लें। कई ऐसे निर्णय आएंगे जहाँ दोनों चीजें अच्छी लगेंगी, लेकिन किसी एक को ही चुनना होगा। सीनियर लोग आपको नोटिस करेंगे, इसलिए हमेशा सोचें कि आप पर कैमरा लगा है और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें, आपको सराहना मिलेगी। • वित्त और धन: पैसों का प्रवाह ठीक-ठाक रहेगा। नए क्लाइंट्स, पुराने भुगतान या साइड इनकम एक्टिवेट हो सकती है। खर्चे कभी-कभी नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं, खासकर लग्जरी या आराम से संबंधित चीजों पर। निवेश करते समय उन योजनाओं से बचें जो कम समय में पैसा दोगुना करने का वादा करती हैं। स्मार्ट निर्णय लें, दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। • प्रेम संबंध और रिश्ते: भावनाएं थोड़ी भारी रह सकती हैं। पुरानी बातें या किसी के शब्द आपको फिर से याद आएंगे जो दिल में चुभेंगे। कमिटेड लोगों के लिए ईमानदारी और खुला संवाद बहुत जरूरी है। सिंगल्स पुराने दोस्तों या चैट के माध्यम से दोबारा जुड़ सकते हैं और उन्हें कोई सच्चा व्यक्ति मिल सकता है। रिश्तों को नाटक से दूर रखकर शांति और परिपक्वता से संभालें। • शिक्षा और विद्यार्थी जीवन: पढ़ाई थोड़ा “स्लो कुकर” मोड में चलेगी। शुरुआत में कम ऊर्जा रहेगी, लेकिन समझने की पूरी कोशिश करते रहेंगे। अकाउंट्स, इकोनॉमिक्स, भाषा या कम्युनिकेशन से संबंधित विषयों में पकड़ मजबूत होती दिखेगी। उच्च शिक्षा या ऑनलाइन सर्टिफिकेशन वाले छात्रों को नए अवसर मिलेंगे। पढ़ाई को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें (जैसे 20-30 मिनट के सेशन)। • स्वास्थ्य: यह समय थोड़ा थका-थका सा जाएगा। शरीर को नींद की आवश्यकता महसूस होगी। मूड स्विंग्स और बर्नआउट भी महसूस कर सकते हैं, ये सब आपकी नींद से जुड़ा है। नींद को ठीक करें, बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा। आप रिचार्ज और ऊर्जावान महसूस करेंगे। पानी पीते रहें, हल्का खाना खाएं, योगा करने से तेजी से रिकवरी होगी। स्ट्रेस ईटिंग और ओवरथिंकिंग से बचें। • उपाय: घर से निकलने से पहले “ॐ शुक्राय नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें। शुक्रवार को माता लक्ष्मी के नाम पर व्रत रख सकते हैं या उनके चरणों में कमल का फूल अर्पित कर सकते हैं। 3. मिथुन राशि (Gemini): विचारों की ऊर्जा और संतुलन! मिथुन राशि के जातकों के लिए अगस्त का यह पखवाड़ा कई नए विचारों और ट्विस्ट से भरा रहेगा, आप ऊर्जावान महसूस करेंगे। • करियर और व्यवसाय: मिथुन राशि का दिमाग पूरी तरह से चार्ज महसूस होगा, खूब सारे आइडियाज आएंगे, और लोग भी आपके नए कदमों पर ध्यान देंगे। लेखन, प्रशिक्षण, पत्रकारिता या शिक्षा से जुड़े लोगों को पहचान मिलना

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How to celebrate Diwali according to Premanand Maharaj:प्रेमानंद महाराज के अनुसार दिवाली कैसे मनाये

Diwali: दिवाली: बाहरी उत्सव से आंतरिक प्रकाश की ओर एक यात्रा दीपावली, दिवाली, जुआ, शराब, भक्ति, ज्ञान, नाम जप, आंतरिक दीपावली Diwali: दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, भारत और दुनिया भर में मनाया जाने वाला एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह केवल दीप जलाने और खुशियाँ मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि इसका एक गहरा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। ऐसा माना जाता है कि यह उत्सव भगवान श्री रामचंद्र जी के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या में चक्रवर्ती सम्राट के रूप में विराजमान होने की खुशी में मनाया गया था, जब पूरी अयोध्या दीपों से प्रकाशित हो उठी थी। दीपावली (Diwali) का वास्तविक अर्थ और हमें क्या नहीं करना चाहिए? आज हम घरों को सजाते हैं, दीपक जलाते हैं, लेकिन क्या हम दीपावली के आंतरिक स्वरूप को समझते हैं? अक्सर देखने में आता है कि लोग दीपावली के शुभ अवसर पर जुआ खेलने लगते हैं। लोग सोचते हैं कि “साल भर नहीं खेलते पर दीपावली को तो खेलें!” लेकिन क्या कहीं ऐसा लिखा है कि आप दीपावली पर वो अपराध करें जिसमें कलियुग का वास रहता है? पूज्य महाराज Maharaj श्री हमें स्पष्ट रूप से बताते हैं कि द्यूत क्रीड़ा (जुआ खेलना), शराब पीना, मांस खाना, परस्त्री गमन (व्यभिचार करना), स्वर्ण चोरी करना, और हिंसा करना – ये सभी कार्य कलियुग के निवास स्थान हैं। इन आसुरी प्रवृत्तियों वाले कार्यों से हमें बचना चाहिए। धर्मराज युधिष्ठिर और महाराज नल दमयंती जैसे बड़े-बड़े पवित्र चरित्र भी द्यूत क्रीड़ा के कारण भारी विपत्तियों में पड़े थे। यह समझना आवश्यक है कि अधर्म के धन से कभी सुख-शांति नहीं मिलती, बल्कि इससे परिवार बिखर जाता है और अशांति पैदा होती है। महाराज जी दृढ़ता से यह संदेश देते हैं कि यदि आप सुख और शांति प्राप्त करना चाहते हैं, तो इन व्यसनों और गंदे आचरणों को छोड़ दें। यह त्याग ही सबसे बड़ा उत्सव है और यह आपको मानसिक शांति और उन्नति प्रदान करेगा। दीपावली पर क्या करें और कैसे जलाएं आंतरिक दीप? तो, दीपावली Diwali पर हमें क्या करना चाहिए? हमें अपने प्रभु का भजन करना चाहिए, अपने प्रिय प्रीतम का या भगवत विग्रह का ध्यान करना चाहिए। दीपक जलाकर, खूब गुरु मंत्र और नाम जप करना चाहिए, विशेषकर रात 12 बजे तक, क्योंकि इससे कई गुना बढ़कर लाभ मिलता है। ठाकुर जी को भोग लगाएं और आरती करें। दीपावली Diwali 2025 का आंतरिक स्वरूप हमारे हृदय में भक्ति के दीप और प्रेम की बाती जलाने से संबंधित है। जैसे घर में दीपक जलाने से बाहरी अंधेरा दूर होता है, वैसे ही हमारे हृदय का अंधकार ज्ञान के प्रकाश से ही मिटेगा। यह भक्ति का दीपक और प्रेम की बाती किसी बाजार में नहीं मिलती, यह साधु संगति (भगवत प्रेमी महात्माओं का संग) से ही प्राप्त होती है। जब यह ज्ञान का प्रकाश हृदय में प्रकट होता है, तब चिंता, शोक, दुख, और मृत्यु आदि का भय नष्ट हो जाता है। हमें यह समझना चाहिए कि हम शरीर नहीं हैं, बल्कि हमारा स्वरूप सच्चिदानंद है, ईश्वर का अंश है। Diwali जब यह बात पता चल जाती है कि मैं कौन हूँ, तो व्यक्ति आनंद से भर जाता है, मस्त हो जाता है और आत्मा राम बन जाता है। यह समझना कि “मैं भगवान का अंश हूँ” और भगवत प्राप्ति करना ही हमारा परम धर्म है, एक गृहस्थ को भी महात्मा बना देता है। अपने अंदर के अंधकार को दूर करने के लिए, हमें नाम जप और भक्ति करनी चाहिए। यह आंतरिक दीपावली यदि जल गई, तो आप जन्म-मृत्यु के भय से मुक्त हो जाएंगे। एक दृढ़ संकल्प लें: पूज्य महाराज Maharaj जी हम सभी से यह भेंट मांगते हैं कि इस दीपावली पर हम सभी गलत आचरण, शराब, मांस, व्यभिचार, जुआ, चोरी और हिंसा को त्यागने का दृढ़ संकल्प लें। यह संकल्प लेना ही अपने आप में सबसे बड़ा उत्सव है, और इससे हमारा समाज एक धार्मिक, शांतिप्रिय और परमानंद में डूबने वाला समाज बनेगा। Diwali श्री कृष्ण स्वयं आपकी सहायता करेंगे और आपको इन व्यसनों को छोड़ने की सामर्थ्य प्रदान करेंगे, क्योंकि वे हर पल आपके साथ हैं

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दिवाली 2025: तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और 5 दिन का संपूर्ण कैलेंडर – अभी से जानें सब कुछ !

दिवाली 2025: तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और 5 दिन का संपूर्ण कैलेंडर – अभी से जानें सब कुछ! दिवाली का त्योहार हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इसे ‘दीप उत्सव’ के नाम से भी जाना जाता है। ‘दीपावली’ का अर्थ है ‘दीपों की अवली’ यानी दीपों की पंक्ति। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है और बुराई पर अच्छाई की जीत को भी दर्शाता है। यह त्योहार हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, और उनके आगमन की खुशी में लोगों ने घी के दीपक जलाकर उत्सव मनाया था। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है, और ऐसा माना जाता है दिवाली 2025 कि उनकी आराधना से घर में सुख-समृद्धि आती है। दिवाली 2025 मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर भ्रमण के लिए निकलती हैं, इसलिए भी इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। लक्ष्मी जी के साथ भगवान गणेश और कुबेर जी की भी पूजा की जाती है। दिवाली 2025 कब है? (Diwali 2025 Date) 2025 में दिवाली की तिथि को लेकर थोड़ा असमंजस है, क्योंकि कार्तिक अमावस्या तिथि दो दिन पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि का आरंभ 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट / 03 बजकर 45 मिनट पर होगा और यह अगले दिन 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 54 मिनट / 05 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। अधिकांश ज्योतिष मतों के अनुसार, दिवाली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 को ही मनाया जाएगा, क्योंकि इस दिन लक्ष्मी पूजा सूर्यास्त के बाद करने का विधान है, और निशिता काल में पूजा का विशेष महत्व है, जो 20 अक्टूबर को ही है। हालांकि, कुछ मतों के अनुसार, प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण 21 अक्टूबर को भी देश के कुछ हिस्सों में दिवाली मनाई जा सकती है। दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (Diwali 2025 Lakshmi Puja Muhurat) दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का समय 20 अक्टूबर 2025 को निर्धारित है। लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और अन्य महत्वपूर्ण काल इस प्रकार हैं: • लक्ष्मी पूजा का समय: रात 07:08 बजे से रात 08:18 बजे तक।     ◦ अवधि: 1 घंटा 8 मिनट। • प्रदोष काल: शाम 05:46 बजे से रात 08:18 बजे तक / शाम 05:33 बजे से रात 08:08 बजे तक। • वृषभ काल: रात 07:08 बजे से रात 09:03 बजे तक / शाम 06:56 बजे से रात 08:53 बजे तक। • निशिता काल का मुहूर्त: रात 11:41 बजे से 21 अक्टूबर को प्रातः 12:31 बजे तक। • शहर के अनुसार लक्ष्मी पूजा के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। दिवाली 2025 कैलेंडर (5 दिन का त्योहार) दिवाली का त्योहार धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक पाँच दिनों तक चलता है। 2025 के लिए दिवाली का पूरा कैलेंडर इस प्रकार है: • धनतेरस: 17 अक्टूबर 2025 (या कुछ स्रोतों के अनुसार 18 अक्टूबर 2025) • नरक चतुर्दशी: 18 अक्टूबर 2025 (या काली चौदस 19 अक्टूबर 2025) • दिवाली: 20 अक्टूबर 2025 • कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्ति: 21 अक्टूबर 2025 (या दिवाली स्नान 21 अक्टूबर 2025) • गोवर्धन पूजा: 22 अक्टूबर 2025 • भाई दूज: 23 अक्टूबर 2025 धनतेरस पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त: यदि आप धनतेरस पर सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 बजे से 19 अक्टूबर को सुबह 06:08 बजे तक का समय शुभ माना गया है। 19 अक्टूबर को सुबह 06:08 बजे से दोपहर 01:51 बजे तक भी सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त है। दिवाली के दिन करें ये शुभ काम दिवाली 2025 पर घर में सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी का वास बनाए रखने के लिए कुछ शुभ कार्य करने का विधान है: 1. सजावट: दीवाली के दिन अपने घरों और दुकानों को गेंदे के फूल की लड़ियों और अशोक, आम तथा केले के पत्तों से सजाना शुभ माना जाता है। 2. कलश स्थापना: घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर कलश में नारियल स्थापित करना शुभ माना जाता है। 3. स्वच्छता: दिवाली के दिन सफाई का विशेष महत्व है, क्योंकि लक्ष्मी मां उसी घर में प्रवेश करती हैं जहां साफ-सफाई होती है। 4. लक्ष्मी पूजन विधि: लक्ष्मी पूजा के लिए, पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर, उस पर श्री गणेश और देवी लक्ष्मी की सुंदर मूर्तियों को रेशमी वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित कर स्थापित करें और फिर पूजन करें। 5. दीप प्रज्ज्वलन: शाम को लक्ष्मी पूजा के साथ ही जलते हुए दीपकों की भी पूजा की जाती है। घर और आंगन में सब जगह दीपक लगाएं, क्योंकि दिवाली प्रकाश का पर्व है। यह जानकारी मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। एबीपी लाइव किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram:श्रीविष्णुपुराणे नागपत्नीकृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम्

Srikrishna Stotram: यहाँ “विष्णुपुराण” में वर्णित नागपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्र (Nagapatni Kruta Shri Krishna Stotram) से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जा रही है, जो आप अपने हिंदी ब्लॉग में उपयोग कर सकते हैं। Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram:नागपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्र — विष्णुपुराण से भूमिका विष्णुपुराण, जो महर्षि पराशर द्वारा रचित अष्टादश महापुराणों में से एक है, उसमें अनेक प्रसंगों के माध्यम से भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की महिमा का वर्णन किया गया है।श्रीकृष्ण अवतार के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण प्रसंग है — कालिय नाग के दमन का। इस कथा में श्रीकृष्ण जब यमुना में बसे कालिय नाग के भय से गोकुलवासियों को मुक्त करते हैं, तब कालिय की पत्नियाँ (नागपत्नियाँ) श्रीकृष्ण की स्तुति करती हैं। यह स्तुति ही Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram नागपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्र कहलाती है। नागपत्नी कृत स्तोत्र का प्रसंग यमुना नदी का जल कालिय नाग के विष से विषाक्त हो गया था।गोकुलवासियों व गोधन की रक्षा हेतु श्रीकृष्ण यमुना में कूद पड़े।श्रीकृष्ण ने कालिय नाग से युद्ध किया और अंततः उसके फनों पर नृत्य कर उसे पराजित किया।जब कालिय हार गया, तब उसकी पत्नी नागपत्नियाँ रोती हुई श्रीकृष्ण के चरणों में आईं और अत्यंत भावुक होकर भगवान की स्तुति करने लगीं। Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram:नागपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्र का भावार्थ यह स्तोत्र भगवान श्रीकृष्ण की निर्दोषता, करुणा, शौर्य, ब्रह्मत्व और भक्तवत्सलता का वर्णन करता है। कुछ प्रमुख भाव: स्तोत्र के प्रमुख श्लोकों के भावार्थ इस स्तोत्र का महत्व श्रीविष्णुपुराणे नागपत्नीकृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम् हिंदी पाठ: Vishnupuran Nagapatni Kruta-Srikrishna Stotram in Hindi ज्ञातोऽसि देवदेवेश सर्वज्ञस्त्वमनुत्तमः ।परं ज्योतिरचिन्त्यं यत्तदंशः परमेश्वरः ॥ १ ॥ न समर्थाः सुरास्स्तोतुं यमनन्यभवं विभुम् ।स्वरूपवर्णनं तस्य कथं योषित्करिष्यति ॥ २ ॥ यस्याखिलमहीव्योमजलाग्निपवनात्मकम् ।ब्रह्माण्डमल्पकाल्पांशः स्तोष्यामस्तं कथं वयम् ॥ ३ ॥ यतन्तो न विदुर्नित्यं यत्स्वरूपं हि योगिनः ।परमार्थमणोरल्पं स्थूलात्स्थूलं नताः स्म तम् ॥ ४ ॥ न यस्य जन्मने धाता यस्य चान्ताय नान्तकः ।स्थितिकर्ता न चाऽन्योस्ति यस्य तस्मै नमस्सदा ॥ ५ ॥ कोपः स्वल्पोऽपि ते नास्ति स्थितिपालनमेव ते ।कारणं कालियस्यास्य दमने श्रूयतां वचः ॥ ६ ॥ स्त्रियोऽनुकम्प्यास्साधूनां मूढा दीनाश्च जन्तवः ।यतस्ततोऽस्य दीनस्य क्षम्यतां क्षमतां वर ॥ ७ ॥ समस्तजगदाधारो भवानल्पबलः फणी ।त्वत्पादपीडितो जह्यान्मुहूर्त्तार्धेन जीवितम् ॥ ८ ॥ क्व पन्नगोऽल्पवीर्योऽयं क्व भवान्भुवनाश्रयः ।प्रीतिद्वेषौ समोत्कृष्टगोचरौ भवतोऽव्यय ॥ ९ ॥ ततः कुरु जगत्स्वामिन्प्रसादमवसीदतः ।प्राणांस्त्यजति नागोऽयं भर्तृभिक्षा प्रदीयताम् ॥ १० ॥ भुवनेश जगन्नाथ महापुरुष पूर्वज ।प्राणांस्त्यजति नागोऽयं भर्तृभिक्षां प्रयच्छ नः ॥ ११ ॥ वेदान्तवेद्य देवेश दुष्टदैत्यनिबर्हण ।प्राणांस्त्यजति नागोऽयं भर्तृभिक्षा प्रदीयताम् ॥ १२ ॥ ॥ इति श्रीविष्णुपुराणे नागपत्नीकृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

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Vishwa Shanti Stotra: श्री विश्व शान्ति स्तोत्र

Vishwa Shanti Stotra: विश्व शांति स्तोत्र (श्री विश्व शांति स्तोत्र): ज्योतिष ग्रंथ के अनुसार, नवग्रहों को छोड़कर अन्य सभी ग्रह भगवान रुद्र या शिव के क्रोध से उत्पन्न हुए हैं। अधिकांश ग्रहों का स्वभाव सामान्यतः हानिकारक होता है, लेकिन कुछ नवग्रह शुभ ग्रह माने जाते हैं। यदि ज्योतिष के अनुसार इनकी पूजा की जाए, तो ये मनुष्य की सभी समस्याओं, बाधाओं को दूर कर देते हैं। विश्व शांति स्तोत्र या “शांति मंत्र” या पंच शांति, उपनिषदों में पाई जाने वाली शांति (शांति) के लिए हिंदू प्रार्थनाएँ हैं। आमतौर पर इनका पाठ धार्मिक अनुष्ठानों और प्रवचनों के आरंभ और अंत में किया जाता है। यजुर्वेद के विश्व शांति स्तोत्र शांति पाठ मंत्र के माध्यम से साधक ईश्वर से शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। विशेषकर हिंदू समुदाय के लोग अपने किसी भी धार्मिक कृत्य, अनुष्ठान, यज्ञ आदि के आरंभ और अंत में इस शांति पाठ के मंत्रों का जाप करते हैं। वैसे, इस मंत्र के माध्यम से संसार के सभी जीवों, वनस्पतियों और प्रकृति में शांति की प्रार्थना की गई है। उनके अनुसार, ईश्वर स्वरूप शांति, वायु में शांति, अंतरिक्ष में शांति, पृथ्वी पर शांति, जल में शांति, जल में शांति होनी चाहिए। और वनस्पति में शांति, विश्व में शांति हो, सभी देवताओं में शांति हो, शरीर में शांति हो, सभी में शांति हो, सभी में शांति हो, ईश्वर शांति हो, शांति हो, शांति हो। Vishwa Shanti Stotra: श्री विश्व शान्ति स्तोत्र शांति मंत्र महान भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को प्रकट करते हैं। Vishwa Shanti Stotra हमारे सांस्कृतिक विचार, दृष्टिकोण आध्यात्मिक आधारशिलाएँ बनाते हैं। हमारी आध्यात्मिकता का भवन इन्हीं मूल सिद्धांतों पर निर्मित होना चाहिए। आइए इन्हें देखें। दिव्य जीवन संस्था, ऋषिकेश के श्री स्वामी शिवानंद ने इसे संकलित किया है। Vishwa Shanti Stotra Ke Labh: विश्व शांति स्तोत्र के लाभ Vishwa Shanti Stotra: विश्व शांति स्तोत्र के पाठ से सभी जीवों की शांति होती है! शांति से विश्व की शांति, जल में शांति, औषधि में शांति, वनस्पति में शांति, विश्व में शांति आदि शांति के सुख हैं।विश्व शांति स्तोत्र या “शांति मंत्र” या पंच शांति, उपनिषदों में पाई जाने वाली शांति (शांति) के लिए हिंदू प्रार्थनाएँ हैं। आमतौर पर इनका पाठ धार्मिक अनुष्ठानों और प्रवचनों के आरंभ और अंत में किया जाता है। उपनिषदों के कुछ विषयों के आरंभ में विश्व शांति स्तोत्र का आह्वान किया जाता है। माना जाता है कि ये साधक के मन और उसके आस-पास के वातावरण को शांत करते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि इनका पाठ करने से आरंभ किए जा रहे कार्य में आने वाली सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं।विश्व शांति स्तोत्र हमेशा पवित्र अक्षर ॐ (औं) और “शांति” शब्द के तीन उच्चारणों के साथ समाप्त होता है, Vishwa Shanti Stotra: श्री विश्व शान्ति स्तोत्र जिसका अर्थ है “शांति”। तीन बार उच्चारण करने का उद्देश्य तीनों लोकों में शांति और बाधाओं को दूर करना है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए किसी भी कारण से मानसिक पीड़ा से ग्रस्त व्यक्ति को और यज्ञ एवं पूजा करने के बाद भी इस विश्व शांति स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। श्री विश्व शान्ति स्तोत्र हिंदी पाठ:Vishwa Shanti Stotra in Hindi नश्यन्तु प्रेत कूष्माण्डा नश्यन्तु दूषका नरा: ।साधकानां शिवाः सन्तु आम्नाय परिपालिनाम ॥ जयन्ति मातरः सर्वा जयन्ति योगिनी गणाः ।जयन्ति सिद्ध डाकिन्यो जयन्ति गुरु पन्क्तयः ॥ जयन्ति साधकाः सर्वे विशुद्धाः साधकाश्च ये ।समयाचार संपन्ना जयन्ति पूजका नराः ॥ नन्दन्तु चाणिमासिद्धा नन्दन्तु कुलपालकाः ।इन्द्राद्या देवता सर्वे तृप्यन्तु वास्तु देवतः ॥ चन्द्रसूर्यादयो देवास्तृप्यन्तु मम भक्तितः ।नक्षत्राणि ग्रहाः योगाः करणा राशयश्च ये ॥ सर्वे ते सुखिनो यान्तु सर्पा नश्यन्तु पक्षिणः ।पशवस्तुरगाश्चैव पर्वताः कन्दरा गुहाः ॥ ऋषयो ब्राह्मणाः सर्वे शान्तिम कुर्वन्तु सर्वदा ।स्तुता मे विदिताः सन्तु सिद्धास्तिष्ठन्तु पूजकाः ॥ ये ये पापधियस्सुदूषणरतामन्निन्दकाः पूजने ।वेदाचार विमर्द नेष्ट हृदया भ्रष्टाश्च ये साधकाः ॥ दृष्ट्वा चक्रम्पूर्वमन्दहृदया ये कौलिका दूषकास्ते ।ते यान्तु विनाशमत्र समये श्री भैरवास्याज्ञया ॥ द्वेष्टारः साधकानां च सदैवाम्नाय दूषकाः ।डाकिनीनां मुखे यान्तु तृप्तास्तत्पिशितै स्तुताः ॥ ये वा शक्तिपरायणाः शिवपरा ये वैष्णवाः साधवः ।सर्वस्मादखिले सुराधिपमजं सेव्यं सुरै संततम ॥ शक्तिं विष्णुधिया शिवं च सुधियाश्रीकृष्ण बुद्धया च ये ।सेवन्ते त्रिपुरं त्वभेदमतयो गच्छन्तु मोक्षन्तु ते ॥ शत्रवो नाशमायान्तु मम निन्दाकराश्च ये ।द्वेष्टारः साधकानां च ते नश्यन्तु शिवाज्ञया ।तत्परं पठेत स्तोत्रमानंदस्तोत्रमुत्तमम ।सर्वसिद्धि भवेत्तस्य सर्वलाभो प्रणाश्यति ॥ ॥ इति श्री विश्व शान्ति स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Shani Mangal Yuti on Raksha Bandhan : रक्षाबंधन पर शनि-मंगल का महासंयोग, इन 3 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ

Shani Mangal Yuti: रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025 को भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ एक खास ज्योतिषीय संयोग भी लेकर आ रहा है। इस दिन आकाश में शनि और मंगल का दुर्लभ महा-राजयोग बनेगा, जो कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ होगा। इस शुभ संयोग से तीन राशियों को आर्थिक लाभ, नई अवसरों और समृद्धि के योग मिलेंगे। Shani Mangal Yuti: इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का उत्सव नहीं रहेगा, बल्कि यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन रहा है। 9 अगस्त 2025 को ग्रहों की विशेष स्थिति के चलते शनि और मंगल का संयोग बन रहा है, जिससे ‘नवपंचम राजयोग’ का निर्माण होगा। यह योग अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली माना जाता है, जो जातक के जीवन में सफलता, समृद्धि और नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। रक्षाबंधन 2025 के दिन ग्रहों की चाल एक खास खगोलीय संयोग बना रही है। सुबह 08 बजकर 18 मिनट पर मंगल और शनि के बीच 180 अंश की दूरी बनेगी, जिसे ज्योतिष में ‘प्रतियुति’ कहा जाता है। आमतौर पर प्रतियुति को संघर्ष और चुनौतियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस बार की स्थिति थोड़ी अलग है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, Shani Mangal यह राजयोग कुछ खास राशियों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है। जिन राशियों पर इस योग का सीधा प्रभाव पड़ेगा, उनके जीवन में आर्थिक लाभ, करियर में तरक्की और पारिवारिक सुख में वृद्धि के प्रबल योग बनेंगे। Shani Mangal यह समय उनके लिए सौभाग्य, मान-सम्मान और सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। आइए जानें वे कौन सी तीन भाग्यशाली राशियां हैं जिन्हें रक्षाबंधन 2025 पर इस ‘महा-राजयोग’ का विशेष लाभ मिलेगा। आप अपने रिश्ते में सुकून, देखभाल और स्थिरता महसूस करेंगे। इस कार्ड का संकेत है कि आपने इस संबंध में भरोसे और गहराई को मजबूत करने में काफी मेहनत की है। अब आप एक सुरक्षित भावनात्मक ज़ोन में पहुंच चुके हैं Shani Mangal: इन 3 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ मेष राशि इस बार रक्षाबंधन मेष राशि वालों के लिए बेहद खास रहने वाला है। नवपंचम महा-राजयोग के प्रभाव से आपके करियर में एक नई रफ्तार आएगी। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है, वहीं व्यापारियों को बड़ा लाभ होने के संकेत हैं। Shani Mangal आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है और किए गए निवेश से मुनाफा मिलने के योग हैं। इसके अलावा सामाजिक जीवन में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लोग आपके कार्यों की सराहना करेंगे। यह समय आत्मविश्वास और उत्साह से भरपूर रहेगा। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों के लिए रक्षाबंधन का यह समय ऊर्जा और मानसिक शांति का प्रतीक बनकर आएगा। लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में सुधार होगा और आप खुद को पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस करेंगे। पारिवारिक जीवन में खुशियों की बहार आएगी। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और घर में कोई शुभ कार्य भी संपन्न हो सकता है। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी के साथ आपके निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होगी, जिससे आप अपने व्यक्तिगत और पेशेवर लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। मीन राशि मीन राशि वालों के लिए रक्षाबंधन पर बन रहा यह राजयोग शिक्षा, संबंध और आध्यात्मिक उन्नति के क्षेत्र में बेहद शुभ रहेगा। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह समय अनुकूल है। कठिन परीक्षाओं में सफलता और नए अवसर मिलने के योग बन रहे हैं। सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा, जिससे नए और लाभदायक संबंध बन सकते हैं। यात्रा का योग भी बन रहा है, जो न सिर्फ लाभदायक होगी बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी संतुलन प्रदान करेगी। यह समय आपको भीतर से भी मज़बूत और संतुलित बनाएगा। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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