February 2025

दक्ष महादेव हरिद्वार उत्तराखंड,भारत

इसे दक्षेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। दक्ष महादेव उत्तराखंड का हरिद्वार जिला भारत के 7 पवित्र स्थानों में से एक है। यहां की हर की पौड़ी को ब्रह्मकुंड कहा जाता है। गंगा आरती व कुंभ मेले के लिए विश्व प्रसिद्ध हरिद्वार में भगवान शिव के कई मंदिर हैं, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां स्थापित शिवलिंग धरती लोक के साथ पाताल लोक में भी स्थित है। हम बात कर रहे हैं हरिद्वार के कनखल में स्थित दक्ष महादेव मंदिर की। इसे दक्षेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इसी मंदिर में माता सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राणों की आहूति दे दी थी। दक्ष महादेव यहां स्थापित अनोखे शिवलिंग के दर्शन को दूर-दूर से लोग आते हैं। हरिद्वार के 5 पवित्र स्थलों की सूची में इस मंदिर का नाम शामिल है। दक्ष महादेव मंदिर का इतिहास कनखल में स्थित यह मंदिर हरिद्वार के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती के पिता राजा दक्ष ने कनखल में एक यज्ञ का आयोजन किया था। राजा ने इसमें सभी देवी-देवताओं, ऋषियों व संतों को आमंत्रित किया, लेकिन अपने दामाद यानी महादेव को आमंत्रण नहीं भेजा, जिससे उनका बहुत अपमान हुआ। ​पति का यह अपमान देख माता सती बहुत दुखी हो गईं और उन्होंने अपने पिता द्वारा किए जा रहे यज्ञ में कूदकर आहूति दे दी। माता के प्राणों की आहूति देख महादेव क्रोधित हो गए और अपनी जटाओं से वीरभद्र को पैदा किया। भगवान ने वीरभद्र को आदेश दिया कि राजा दक्ष का सिर काटकर यज्ञ को ध्वस्त कर दो। कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु, ब्रह्मा व अन्य देवी-देवताओं ने महादेव को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन भगवान का क्रोध शांत नहीं हुआ। जिसके बाद सिर कटे राजा दक्ष ने प्रभु से क्षमा मांगी। महादेव ने माफी स्वीकार कर ली और दक्ष महादेव भगवान विष्णु, ब्रह्मा व देवी-देवताओं के आग्रह पर राजा दक्ष को बकरे का सिर लगाकर पुन: जीवित कर दिया। यही नहीं, राजा दक्ष के आग्रह पर भगवान शिव ने कहा कि कनखल दक्षेश्वर महादेव के नाम से जाना जाएगा। सावन के महीने में प्रभु यहीं वास करेंगे। 1810 ई में रानी धनकौर ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। दक्ष महादेव मंदिर का महत्व दक्ष मंदिर में शिवलिंग के दर्शन के बिना हरिद्वार की यात्रा अधूरी मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि सावन महीने में मंदिर में दक्षेश्वर महादेव के नाम से गंगाजल चढ़ाने पर हर मनोकामना पूरी होती है। इसके साथ ही वैवाहिक जोड़े यहां भगवान से जन्म जन्मांतर का आशीर्वाद लेने आते है। दक्ष महादेव मंदिर की वास्तुकला माता सती के प्राणों का गवाह है दक्षेश्वर मंदिर। मंदिर के मुख्य द्वार के सामने दक्ष महादेव भगवान शिव और माता सती की एक बहुत बड़ी प्रतिमा है। भगवान ने माता के मृत शरीर को अपने हाथों में उठाया हुआ है, जोकि यज्ञ में दिए माता के प्राणों को दर्शाता है। मुख्य द्वारा के दोनों तरफ बड़े-बड़े शेरों की प्रतिमा लगी है। मंदिर में सबसे खास है यहां स्थापित शिवलिंग। दक्ष महादेव पूरे विश्व में यहां स्थापित एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जो आकाशमुखी नहीं बल्कि पातालमुखी है। यानी शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा जमीन के नीचे है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में सती कुंड, शिवलिंग व नंदी जी विराजमान हैं। मंदिर परिसर में गणेश जी, मां दुर्गा व अन्य देवी देवताओं के मंदिर भी बने हुए हैं। मंदिर के ठीक सामने गंगा की धारा बह रही है। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 09:00 PM शाम की आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM सुबह की आरती का समय 06:00 AM – 07:00 AM मंदिर का प्रसाद महादेव के इस मंदिर में मुख्य रूप से बेलपत्र, दूध, केला, शहद, घी, फूल आर्पित किया जाता है

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Amalaki Ekadashi 2025:आमलकी एकादशी पर व्रती गलती से भी न खाएं ये चीजें, टूट सकता है व्रत

Amalaki Ekadashi 2025:आमलकी एकादशी हर साल फाल्गुन महीने में मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए बहुत शुभ माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह एकादशी 10 मार्च (Amalaki Ekadashi Kab hai 2025) को मनाई जाएगी। कहते हैं कि जो लोग इस उपवास को रखते हैं उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। Amalaki Ekadashi Kab hai 2025:हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सबसे शुभ व्रतों में से एक माना जाता है। एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है और सभी भक्त भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन श्रद्धापूर्वक उपवास करते हैं। एक साल में कुल 24 और महीने में दो बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के दौरान एकादशी आती है। सभी एकादशी का अपना महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च 2025 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाएगा। जब यह व्रत (Amalaki Ekadashi 2025) इतना विशेष है, तो इसमें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? इसका भी ध्यान देना बहुत जरूरी है, तो आइए जानते हैं। ताकि आप व्रत का पूरा फल प्राप्त कर सकें। आमलकी एकादशी पर क्या खाएं और क्या नहीं? (Amalaki Ekadashi 2025 Par Kya Khaye Or Kya Nahi?) क्या खा सकते हैं? (Vrat Me Kya Khana Chahiye) आमलकी एकादशी व्रत को जो लोग रखने वाले हैं, वे दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही इस दिन आंवले का सेवन और आंवले के पेड़ के नीचे भोजन भी जरूर करना चाहिए, क्योंकि यह इस दिन पूजा का अहम भाग माना गया है। हालांकि व्रती को तामसिक व नमक आदि के उपयोग से बचना चाहिए। कहते हैं कि इस दिन जो लोग सभी नियमों का पालन करते हुए व्रत रखते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की कृपा सदैव के लिए प्राप्त होती है। न खाएं ये चीजें (Vrat Me Kya Nahi Khana Chahiye?) Vrat Me Kya Khana Chahiye:जो लोग आमलकी एकादशी का उपवास रखते हैं, उन्हें तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन, मसाले, तेल आदि से भी दूर रहना चाहिए। इसके साथ ही इस दिन (Significance Of Amalaki Ekadashi 2025) चावल और नमक खाने को भी पूरी तरह मना किया गया है। ऐसे में अगर आप इस व्रत को रखने वाले हैं, तो इन बातों का जरूर ध्यान दें। वरना व्रत टूट सकता है। प्रसाद अर्पित करने का मंत्र (Bhog Mantra) Amalaki Ekadashi 2025:प्रसाद अर्पित करते समय इस मंत्र ”त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।” का करें जाप। कहा जाता है कि इससे प्रसाद तुरंत स्वीकार हो जाता है। इसके साथ ही अन्न और धन में बरकत आती है। एकादशी के प्रकार एकादशी दो प्रकार की होती है। 1 सम्पूर्णा 2. विद्धा1) सम्पूर्णा – जिस तिथि में केवल एकादशी तिथि होती है अन्य किसी तिथि का उसमे मिश्रण नहीं होता उसे सम्पूर्णा एकादशी कहते है। 2) विद्धा एकादशी पुनः दो प्रकार की होती है2. A) पूर्वविद्धा – दशमी मिश्रित एकादशी को पूर्वविद्धा एकादशी कहते हैं। Amalaki Ekadashi 2025 यदि एकादशी के दिन अरुणोदय काल (सूरज निकलने से 1घंटा 36 मिनट का समय) में यदि दशमी का नाम मात्र अंश भी रह गया तो ऐसी एकादशी पूर्वविद्धा दोष से दोषयुक्त होने के कारण वर्जनीय है यह एकादशी दैत्यों का बल बढ़ाने वाली है। पुण्यों का नाश करने वाली है। वासरं दशमीविधं दैत्यानां पुष्टिवर्धनम ।मदीयं नास्ति सन्देह: सत्यं सत्यं पितामहः ॥ [पद्मपुराण]दशमी मिश्रित एकादशी दैत्यों के बल बढ़ाने वाली है इसमें कोई भी संदेह नहीं है। 2. B) परविद्धा – द्वादशी मिश्रित एकादशी को परविद्धा एकादशी कहते हैं।द्वादशी मिश्रिता ग्राह्य सर्वत्र एकादशी तिथि।द्वादशी मिश्रित एकादशी सर्वदा ही ग्रहण करने योग्य है। इसलिए भक्तों को परविद्धा एकादशी ही रखनी चाहिए। Amalaki Ekadashi 2025 ऐसी एकादशी का पालन करने से भक्ति में वृद्धि होती है। दशमी मिश्रित एकादशी से तो पुण्य क्षीण होते हैं।

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Dream Interpretation:सपने में बादल, बिजली और बाढ़ का क्या है शुभ-अशुभ संकेत

Dream Interpretation:हम में से अधिकतर लोग रात्रि में नींद के दौरान स्वप्न (Dream Interpretation) देखते हैं। और उन सपनों को देखकर हमारा घबरा जाना भी स्वाभाविक ही है, क्योंकि हमारे मन में निरंतर यह डर सताता रहता है कि हमारे साथ क्या शुभ या अशुभ होने वाला है। सपनों की दुनिया बड़ी अजीब होती है सपने में जो मिलता है वो खो जाता है और जो जाता है वो मिलने वाला होता है.उन पर आपका बस नहीं बस बुरे सपने देखिए तो किसी को बता दीजिए. अच्छे सपने देखिए तो छुपा लीजिए. मान्यता है कि रात की गहरी नींद में आने वाले हमारे सपने हमारे दिन भर किए गए कार्यों और मन में उठे विचारों का परिणाम होते हैं.  यदि आप सपने में बाढ़ का पानी देखते हैं तो यह अच्छा नहीं माना जाता है, क्योंकि इसका अर्थ यह एक अशुभ संकेत है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार आगामी समय में आपको कोई अशुभ समाचार मिलने की संभावना है।  Dream Interpretation:सपने में आसमानी बिजली देखना Dream Interpretation:अगर आपने सपने में आसमानी बिजली गिरते देखा है तो यह आपके लिए शुभ संकेत है. आपके कारोबार में फायदा होने की बहुत उम्मीद दिख रही है, इसलिए आप निश्चिंत रहिए लाभ होगा. सपने में electric discharge आसमानी बिजली देखना शुभ, कारोबार में फायदा होगा सपने में रोती चिड़िया देखना अगर आपने सपने में रोती हुई चिड़िया देखी है तो सतर्क हो जाइए. यह आपके लिए शुभ संकेत नहीं है. यह किसी तरह के नुकसान की ओर इशारा कर रहा है. आप निकट भविष्य में किसी बड़ी परेशानी में फंस सकते हैं.  सपने में चंद्रग्रहण देखना अगर आज आपने सपने में चंद्रग्रहण देख लिया है तो फिर सतर्क रहे हैं. यह सपना किसी अनिष्ट की ओर इशारा कर रहा है. इससे आपके नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है. यह सपना संकेत देता है कि आप किसी बीमारी से ग्रसित होने वाले हैं. चंद्रमा मन का प्रतीक है. चंद्र पर ग्रहण आपके आरोग्य पर ग्रहण की तरह है.  Dream Interpretation:सपने में भेड़िया देखना अगर आज आपने सपने में भेड़िया देखा है तो सतर्क हो जाएं. भेड़िया एक खूंखार और चालाक पशु है. यह चालाकी से घात लगाकर अपने से छोटे जीवों का शिकार करता है. इस तरह यह सपना संकेत दे रहा है कि आज या आने वाले किन्हीं दिनों में आपका कोई शत्रु आपको हानि पहुंचा सकता है. आपको दुश्मन से खतरा है. 

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Neel Saraswati Stotra | नील सरस्वती स्तोत्र

Neel Saraswati Stotra:नील सरस्वती स्तोत्र: हर व्यक्ति के जीवन में कोई शत्रु या दुश्मन नहीं होता। कोई शत्रु प्रत्यक्ष या कभी-कभी अप्रत्यक्ष रूप से हमला करता है और हम परेशान हो जाते हैं। हर कोई चाहता है कि उसके शत्रुओं से छुटकारा मिल जाए और जीवन में सब कुछ ठीक हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं होता। अगर आप अपने शत्रु के कारण परेशानियों का सामना कर रहे हैं, तो यह नील सरस्वती स्तोत्र आपके लिए बहुत मददगार साबित होगा, इसके पाठ से हम अपने शत्रु पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। यह नील सरस्वती स्तोत्र हमारे शत्रुओं का नाश करने में सक्षम है। यह स्तोत्र देवी नीला सरस्वती को समर्पित महामंत्र है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली नीला सरस्वती मंत्र है। इसे कभी-कभी नीला सरस्वती, नील सरस्वती और नील सरस्वती के रूप में भी लिखा जाता है। नीला सरस्वती या नील सरस्वती का सीधा सा मतलब है नीली सरस्वती (शिक्षा की नीली देवी)। उन्हें कभी-कभी देवी नीला देवी और तारा देवी के नाम से भी जाना जाता है। तारा वाणी की अधिष्ठात्री देवी और हिरण्य गर्भ सौर ब्रह्मा की शक्ति हैं। सूर्य के अवतार के रूप में, वे सूर्य प्रलय की सफल स्वामिनी हैं। तारा-साधक साहित्य की सभी शाखाओं में पारंगत हो जाता है। परम्परागत रूप से यह माना जाता है Neel Saraswati Stotra कि व्यास मुनि ने देवी तारा की कृपा से अठारह महापुराणों का निर्माण और पूर्ण किया था। इस स्तोत्र का पाठ बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा में किया जाता है। Neel Saraswati Stotra इसके अलावा, माँ सरस्वती देवी की नियमित पूजा में नील सरस्वती स्तोत्र की पुस्तक का पाठ भी किया जा सकता है। Neel Saraswati Stotra:नील सरस्वती स्तोत्र के लाभ इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से बच्चों को पढ़ाना लाभदायक होता है। Neel Saraswati Stotra नील सरस्वती स्तोत्र के पाठ से बच्चों का मस्तिष्क तेज होता है, पढ़ाई में निपुण होते हैं, सभी प्रकार की कलाओं में पारंगत होते हैं और स्मरण शक्ति भी तीव्र होती है। इस नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ करने से माँ सरस्वती जी की विशेष कृपा होती है। यदि ज्योतिषी नील सरस्वती स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करें तो भविष्यवाणियाँ सत्य और अटल हो जाती हैं। Neel Saraswati Stotra:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए जो व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं और सभी परीक्षणों और परीक्षाओं में सफलता चाहते हैं, उन्हें वैदिक नियमों के अनुसार नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। नील सरस्वती स्तोत्र | Neel Saraswati Stotra घोर रूपे महारावे सर्वशत्रु भयंकरि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।१।। ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते। जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।२।। जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि। द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।३।। सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोSस्तु ते। सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणा गतम्।।४।। जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला। मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।५।। वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नम:। उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम्।।६।। बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे। मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।७।। इन्द्रा दिविलसद द्वन्द्ववन्दिते करुणा मयि। तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणा गतम्।।८।। अष्टभ्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां य: पठेन्नर:। षण्मासै: सिद्धिमा प्नोति नात्र कार्या विचारणा।।९।। मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम्। विद्यार्थी लभते विद्यां विद्यां तर्क व्याकरणा दिकम।।१०।। इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयाSन्वित:। तस्य शत्रु: क्षयं याति महा प्रज्ञा प्रजा यते।।११।। पीडायां वापि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये। य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशय:।।१२।। इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनि मुद्रां प्रदर्श येत।।१३।। ।।इति नीलसरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।

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Neelsaraswati Stotra | नीलसरस्वती स्तोत्र

Neelsaraswati Stotra नीलसरस्वती स्तोत्र: शिक्षा में सफलता पाने के लिए नीलसरस्वती स्तोत्र का जाप किया जाता है। अपनी पसंद के उच्च शिक्षण संस्थानों में अपनी पढ़ाई जारी रखने या विदेश में अपनी पढ़ाई जारी रखने के इच्छुक छात्रों को इस मंत्र का जाप करने से बहुत लाभ होगा। नीलसरस्वती स्तोत्र का जाप शिक्षा में आने वाली बाधाओं और रुकावटों को दूर करने के लिए भी किया जाता है। Neelsaraswati Stotra इसके अलावा, इस मंत्र का जाप याददाश्त और रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। छात्रवृत्ति, अध्ययन अनुदान और शैक्षिक ऋण जैसी वित्तीय सहायता की चाहत रखने वाले छात्र देवी नीला सरस्वती की प्रार्थना कर सकते हैं। नील सरस्वती या नीली सरस्वती अपने उग्र रूप में तारा देवी का एक रूप है। तारा वह देवी हैं जो भव तराना का कारण बनती हैं, इसलिए उन्हें भव तारिणी या जीवन के सागर को पार करने वाली भी कहा जाता है। योगिनी तंत्र के अनुसार, तारा काली के समान ही हैं, जो सर्वोच्च प्रेम का अवतार हैं। वह कामाख्या भी हैं। तांत्रिक साहित्य में तारा के तीन रूपों का उल्लेख किया गया है: एक जातक, कैवल्य या परम के साथ एकता प्रदान करना; उग्र तारा, जो अप्रत्याशित गंभीर कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं और नीला सरस्वती, जो ज्ञान प्रदान करती हैं। तारा पंथ के साधक धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के पुरुषार्थ लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं। तारा हमेशा माया या उसके भीतर के प्रपंच से दूर रहती हैं क्योंकि यह उनकी अपनी रचना है। वे पहले भोग या आनंद प्रदान करती हैं Neelsaraswati Stotra और फिर मोक्ष या मोक्ष प्रदान करती हैं। तारा आठ योगिनियों से घिरी हुई हैं: महाकाली, रुद्राणी, उग्रा, भीमा, गहिरा, भ्रामरी, महारात्रि और भैरवी। Neelsaraswati Stotra:नीलसरस्वती स्तोत्र लाभ: बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती जी की पूजा में नीलसरस्वती स्तोत्र का पाठ किया जाता है। इसके साथ ही मां सरस्वती देवी की पूजा में नीलसरस्वती स्तोत्र का पाठ नियमित रूप से किया जा सकता है। बच्चों को नील सरस्वती का सार सिखाना विशेष रूप से मानस में लाभकारी होता है। नील सरस्वती बच्चों के मन की बात सुनाती हैं। तेज होना, Neelsaraswati Stotra अध्ययनशील होना, सभी कलाओं में पारंगत होना, स्मरण शक्ति का बलवान होना अच्छा है। नील सरस्वती को विशेष रूप से मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त है। यदि नील सरस्वती ध्यान के साथ-साथ नीलसरस्वती स्तोत्र का नियमित पाठ किया जाए तो भविष्यवाणियां सत्य और पूर्ण होती हैं। Neelsaraswati Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र: जो विद्यार्थी उतने मेधावी नहीं हैं और कड़ी मेहनत के बावजूद उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते हैं, उन्हें नियमित रूप से नीलसरस्वती स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। Neelsaraswati Stotra | नीलसरस्वती स्तोत्र मातर्नीलसरस्वति प्रणमतां सौभाग्य-सम्पत्प्रदे, प्रत्यालीढपदस्थिते शवहृदि स्मेराननाम्भोरुहे । फुल्लेन्दीवरलोचने त्रिनयने कत्रीं कपालोत्पले, खड्गञ्चादधती त्वमेव शरणं त्वामीश्वरीमाश्रये ।।1।। वाचामीश्वरि भक्तकल्पलतिके सर्वार्थसिद्धिश्वरी, गद्य-प्राकृत-पद्यजातरचनासर्वार्थ-सिद्धिप्रदे । नीलेन्दी-वर-लोचन-त्रय-युते कारुण्यवारांनिधे, सौभाग्यमृतवर्धनेन कृपया सिञ्च त्वमस्मादृशम् ।।2।। खर्वे गर्वसमूहपूरिततनौ सर्पादिवेषोज्वले, व्याघ्रत्वक्परिवीतसुन्दरकटिव्याधूतघण्टाकिंते । सद्यः कृतगलद्रजः परिमिलन्मुण्डद्वयी-मूर्धज- ग्रन्थिश्रेणि-नृमुण्डदामललिते भीमे भयं नाशय ।।3।। मायानङ्गविकाररुपललना बिन्दूर्ध चन्द्राम्बिके, हूं फट्कारमयि त्वमेव शरणं मन्त्रात्मिके मादृशः । मूर्तिस्ते जननि त्रिधामघटिता स्थूलातिसूक्ष्मा परा, वेदानां नहि गोचरा कथमपि प्राज्ञैर्नुतामाश्रये ।।4।। त्वत्पादाम्बुजसेवया सुकृतिनो गच्छन्ति सायुज्यतां, तस्याः श्रीपरमेश्वर-त्रिनयन-ब्रह्मादिसाम्यात्मनः । संसाराम्बुधिमज्जनेऽपटतनुर्देवेन्द्रमुख्यान् सुरान्, मातर्स्त्वत्यसेवने हि विमुखान् किं मन्दधीः सेवते ।।5।। मातस्त्वत्पदपंकजद्वयरजो-मुद्रांककोटीरिण- स्ते देवा जयसंकरे विजयिनो निःशंकमंके गताः । देवोऽहं भुवने न मे सम इति स्पर्धा वहन्तः परा- स्तत्तुल्यान्नियतं यथाशु चिरवी नाशं व्रजन्ति स्वयम् ।।6।। त्वन्नाम-स्मरणात् पलायनपरा द्रष्टुञ्च शक्ता न ते, भूतप्रेतपिशाचराक्षसगणा यक्षाश्च नागाधिपाः । दैत्यादानवेपुङ्गवाश्च खचरा व्याघ्रदिका जन्तवोः, डाकिन्यः कुपितान्तकश्च मनुजो मातः क्षणं भूतले ।।7।। लक्ष्मीः सिद्धगणाश्च पादुकमुखाः सिद्धास्तथा वैरिणां, स्तम्भशऽचापि वराङ्गने गजघटास्तम्भस्तथा मोहनम् । मातस्त्वत्पदसेवया खलु नृणां सिद्धयन्ति ते ते गुणाः, क्लान्तः कान्तमनोभवस्य भवति क्षुद्रोऽपि वाचस्पतिः ।।8।। ताराष्टकमिदं पुण्यं भक्तिमान् यः पठेन्नरः । प्रातर्मध्याह्नकाले च सायाह्ने नियतः शुचिः ।।9।। लभते कवितां विद्यां सर्वशास्त्रार्थविद् भवेत् । लक्ष्मीमनश्वरां प्राप्य भुक्त्वा भोगान् यथेप्रितान् ।।10।। कीर्ति कान्तिश्च नैरुज्यं प्राप्यान्ते मोक्षमाप्नुयात् । श्रीतारायाः प्रसादेन सर्वत्र शुभमश्नुते ।।11।।

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Naag Stotra:श्री नाग स्तोत्र

श्री नाग स्तोत्र (Naag Stotra) Naag Stotra अगस्त्यश्च पुलस्त्यश्च वैशम्पायन एव च । सुमन्तुजैमिनिश्चैव पञ्चैते वज्रवारका: ॥१॥ मुने: कल्याणमित्रस्य जैमिनेश्चापि कीर्तनात् । विद्युदग्निभयं नास्ति लिखितं गृहमण्डल ॥२॥ अनन्तो वासुकि: पद्मो महापद्ममश्च तक्षक: । Naag Stotra कुलीर: कर्कट: शङ्खश्चाष्टौ नागा: प्रकीर्तिता: ॥३॥ यत्राहिशायी भगवान् यत्रास्ते हरिरीश्वर: । भङ्गो भवति वज्रस्य तत्र शूलस्य का कथा ॥४॥ ॥ इति श्रीनागस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥ श्री नाग स्तोत्र विशेषताए Naag Stotra श्री नाग स्तोत्र के साथ-साथ यदि सर्प सुक्तम का पाठ किया जाए तो, इस स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, यह स्तोत्र शीघ्र ही फल देने लग जाते है| यदि साधक इस स्तोत्र  का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है| अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है| यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस स्तोत्र का पाठ करे| इस स्तोत्र के पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है| और नियमित रुप से करने से रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते है | और साधक के जीवन में रोग, भय, दोष, शोक, बुराइया, डर दूर हो जाते है साथ ही नाग की पूजा करने से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि प्राप्त होती है। याद रखे इस श्री नाग स्तोत्र पाठ को करने से पूर्व अपना पवित्रता बनाये रखे| इससे मनुष्य को जीवन में बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है|

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Sapne Me Hasna And Khana Khana:सपने में खुद को हंसते हुए देखना हो सकता है किसी खास बात का संकेत

Sapne Me Hasna And Khana Khana:सपने में खुद को हंसते हुए देखना हो सकता है किसी खास बात का संकेतहर व्यक्ति आमतौर पर सपने देखता है। साथ ही कुछ सपने देखकर व्यक्ति डर जाता है और कुछ सपने देखकर व्यक्ति सुखद भाव का अनुभव करता है। वहीं स्वप्न शास्त्र अनुसार सुबह के समय में देखे जाने वाले सच होते हैं। साथ ही ये जरूरी नहीं कि जो सपने आपने देखा हो उसका रियल जिंदगी में वो ही मतलब हो। यहां हम बताने जा रहे हैं कि सपने में खुद को हंसते हुए और खाना खाते हुए देखने का क्या मतलब होता है। आइए जानते हैं… हम सपने में कभी न कभी कुछ ऐसी चीजें जरूर देखते हैं जिनसे आने वाले समय में कुछ फायदे या नुकसान हो सकते हैं। ऐसे ही सपनों में से एक है खुद को हंसते हुए देखना। आपमें से कई लोग अक्सर ऐसा सपना देखते होंगे जिसमें आप खुद को मुस्कुराते हुए देखते होंगे और शायद अचानक से ख़ुशी की कोई बात आपको जागने पर मजबूर कर देती होगी। सपने में किसी अजनबी को हंसते हुए देखना यदि आप ऐसा कोई सपना देखते हैं जिसमें कोई अजनबी व्यक्ति हंसता हुआ या खुश नजर आता है, तो समझें कि आपको आगे कोई ऐसा व्यक्ति निर्देशन दे सकता है जिसे आप ज्यादा नहीं जानते हैं। आपका कोई करीबी भी आपके आगे के काम बनाने में आपकी मदद कर सकता है। यह सपना आपके लिए शुभ संकेत हो सकता है और आप भविष्य में अपनी सभी योजनाओं में सफल हो सकते हैं। हालांकि आपको ध्यान देने की जरूरत है और कोई भी निर्णय सोच-समझ कर ही लेने की आवश्यकता है। Sapne Me Hasna And Khana Khana:सपने में किसी बच्चे को हंसते हुए देखना ऐसा सपना आपके मन की मासूमियत को दर्शाता है। एक छोटे से बच्चे की मुस्कान (सपने में छोटे बच्चे को हंसते हुए देखना) सबसे अच्छी मानी जाती है और इसे सपने में देखना इस बात की ओर इशारा करता है कि आपको भविष्य में आपके मासूम स्वभाव की वजह से लोगों का आकर्षण मिल सकता है। आप उनमें से हैं जो चीजों को गहराई से सोचते हैं और उस पर अमल भी करते हैं। Sapne Me Hasna And Khana Khana भविष्य में आने वाला समय अपने पलों का आनंद लेने और दोस्तों या परिवार के साथ इन पलों को संजोने का समय है।वहीं अगर आप किसी महिला को सपने में हंसते हुए देखते हैं तो यह आपके वैवाहिक जीवन के लिए शुभ संकेत हो सकता है। अगर आपको भी ऐसे सपने दिखाई देते हैं, जिनमें आप खुद हो हंसते हुए खुश देखते हैं तो ये आपके जीवन के लिए शुभ हो सकता है और आपको कुछ ऐसे संकेत मिल सकते हैं जो आपको सफलता दिलाएंगे। Sapne Me Hasna And Khana Khana:सपने में दूसरे को खान खाते देखना सपने में अगर आप दूसरों को खाना खाते हुए देख रहे हैं तो यह बेहद शुभ फलदायी संकेत है। Sapne Me Hasna And Khana Khana इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में आपको परिवारीजनों का साथ मिलेगा। साथ ही आप किसी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। वहीं आपको आने वाले दिनों में आकस्मिक धनलाभ हो सकता है।  सपने में खुद को कार्यस्थल पर हंसते हुए देखना स्वप्न शास्त्र अनुसार यदि सपने में आप वर्कप्लेस पर खुद को हंसते हुए देखते हैं तो यह बेहद शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आपको नौकरी में सफलता तो मिल ही सकती है और आप जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना भी कर सकते हैं। सपने में हंसना यदि आप अपने आप को सपने में हंसते हुए देखते हैं, Sapne Me Hasna And Khana Khana तो यह सपना आपके लिए शुभ नहीं माना जाता। आने वाले दिनों में आपको कोई अशुभ समाचार मिल सकता है। साथ ही धनहानि हो सकती है। सपने में खुद को खाना खाते हुए देखना अगर सपने में खुद को भोजन करते हुए देख रहे हैं तो यह एक शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में कोई शुभ सूचना मिल सकती है। साथ ही आने वाले दिनों में आपकी सेहत अच्छी रहेगी। Sapne Me Hasna And Khana Khana वहीं इस समय आपक धनलाभ हो सकता है। साथ ही यह सपना अच्छा पोषण और मन में संतुष्टि का भाव भी दिखाता है। सपने में खुद खाना पकाना स्वप्न शास्त्र अनुसार यदि सपने में आप खुद खाना पकाते हुए देखते हैं Sapne Me Hasna And Khana Khana तो यह एक शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आपकी योजनाएं सफल होंगी। साथ ही आने वाले दिनों में आपकी इच्छाओं की पूर्ति होगी। वहीं आपका कोई मनोरथ पूर्ण हो सकता है।

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Navagraha Stotra | नवग्रह स्तोत्र

Navagraha Stotra:नवग्रह स्तोत्र का जाप आपकी सभी समस्याओं का समाधान कर सकता है। इनमें आपकी कुंडली में मौजूद प्रतिकुल ग्रहों को शांत करने की शक्ति होती है, जो जीवन में दुखों का कारण बन रहे हैं। इन मंत्रों के जाप से उत्पन्न स्तोत्र की ध्वनि कंपन निश्चित रूप से आपको राहत प्रदान कर सकती है और यहां तक ​​कि अभिशाप को भी वरदान में बदल सकती है। मानव जीवन का हर पहलू नौ ग्रहों से प्रभावित होता है। कई बार ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति हमारे जीवन में समस्याएं और ठहराव पैदा करती है। नवग्रह स्तोत्र संबंधित ग्रहों के हानिकारक प्रभावों को शांत करने के लिए सरल, लेकिन शक्तिशाली उपचार उपकरण है। नवग्रह स्तोत्र का नियमित जाप सकारात्मक कंपन पैदा करता है और संबंधित ग्रहों को अनुकूल परिणाम देने के लिए प्रभावित करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, एक मानव जीवन सूर्य और चंद्रमा (प्लूटो, नेपच्यून, यूरेनस और पृथ्वी को छोड़कर) सहित नौ ग्रहों के सार्वभौमिक कंपन और स्थिति से संचालित और प्रभावित होता है। यह कंपन केवल स्तोत्र का सही और उचित तरीके से जाप करके ही बनाया जा सकता है। इस शक्तिशाली नवग्रह स्तोत्र में सभी नौ ग्रहों के नकारात्मक और अशुभ प्रभावों को दूर करने की शक्ति है। ज्योतिष में, राशि चक्र के 12 नक्षत्रों में “नवग्रहों” की स्थिति, उनके ग्रहों की चाल और मनुष्य के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव को काफी महत्व दिया जाता है। नवग्रह स्तोत्र केवल सकारात्मक प्रभाव देते हैं और स्तोत्र के लिए कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं हैं, हालांकि कभी-कभी किसी ग्रह की ऊर्जा की अधिकता के कारण कुछ मामूली दुष्प्रभाव हो सकते हैं जिसके लिए कोई व्यक्ति स्तोत्र का जाप कर रहा है। स्तोत्र हर तरह से रत्नों से बेहतर हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे ज्योतिष में उपलब्ध सर्वोच्च उपाय हैं। ज्योतिष में नवग्रह स्तोत्र के जाप जैसा कोई उपाय नहीं है। Navagraha Stotra:नवग्रह स्तोत्र के लाभ Navagraha Stotra:नवग्रह स्तोत्र का जाप सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाने और उनके हानिकारक परिणामों को कम करने में मदद करता है। नवग्रह स्तोत्र का जाप व्यक्ति के समग्र कल्याण को बढ़ावा देने में अत्यधिक लाभकारी है। नियमित रूप से सभी स्तोत्रों का जाप करने से व्यक्ति अपनी कुंडली में नौ ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम कर सकता है। अपनी कुंडली के अनुसार निर्धारित स्तोत्र का जाप करें और आपको 40 दिनों की अवधि में उल्लेखनीय अंतर दिखाई देगा। व्यक्ति की कुंडली के अनुसार चुना गया नवग्रह स्तोत्र उक्त ग्रह के सकारात्मक प्रभाव को मजबूत करने और नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद करता है। Navagraha Stotra:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए Navagraha Stotra:नौ ग्रहों के अशुभ प्रभावों, पुरानी बीमारियों और अन्य खगोलीय प्रभावों से पीड़ित व्यक्तियों को वैदिक पद्धति के अनुसार नवग्रह स्तोत्र का जाप करना चाहिए। नवग्रह स्तोत्र | Navagraha Stotra  ग्रहाणामादिरात्यो लोकरक्षणकारक:। विषमस्थानसम्भूतां पीड़ां हरतु मे रवि: ।।1।। रोहिणीश: सुधा‍मूर्ति: सुधागात्र: सुधाशन:। विषमस्थानसम्भूतां पीड़ां हरतु मे विधु: ।।2।। भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा। वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीड़ां हरतु में कुज: ।।3।। उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति:। सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीड़ां हरतु मे बुध: ।।4।। देवमन्त्री विशालाक्ष: सदा लोकहिते रत:। अनेकशिष्यसम्पूर्ण:पीड़ां हरतु मे गुरु: ।।5।। दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामति:। प्रभु: ताराग्रहाणां च पीड़ां हरतु मे भृगु: ।।6।। सूर्यपुत्रो दीर्घदेहा विशालाक्ष: शिवप्रिय:। मन्दचार: प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु मे शनि: ।।7।। अनेकरूपवर्णेश्च शतशोऽथ सहस्त्रदृक्। उत्पातरूपो जगतां पीडां पीड़ां मे तम: ।।8।। महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबल:। अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीड़ां हरतु मे शिखी: ।।9।।

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Navgraha Stotra | नवग्रह स्तोत्रम् 

Navgraha Stotra:नवग्रह स्तोत्र का जाप आपकी सभी समस्याओं का समाधान कर सकता है। इनमें आपकी कुंडली में मौजूद प्रतिकुल ग्रहों को शांत करने की शक्ति होती है, जो जीवन में दुखों का कारण बन रहे हैं। इन मंत्रों के जाप से उत्पन्न स्तोत्र की ध्वनि कंपन निश्चित रूप से आपको राहत प्रदान कर सकती है और यहां तक ​​कि अभिशाप को भी वरदान में बदल सकती है। मानव जीवन का हर पहलू नौ ग्रहों से प्रभावित होता है। कई बार ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति हमारे जीवन में समस्याओं और ठहराव का कारण बनती है। नवग्रह स्तोत्र संबंधित ग्रहों के हानिकारक प्रभावों को शांत करने के लिए सरल, Navgraha Stotra लेकिन शक्तिशाली उपचार उपकरण है। नवग्रह स्तोत्र का नियमित जाप सकारात्मक कंपन पैदा करता है और संबंधित ग्रहों को अनुकूल परिणाम देने के लिए प्रभावित करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, एक मानव जीवन सूर्य और चंद्रमा (प्लूटो, नेपच्यून, यूरेनस और पृथ्वी को छोड़कर) सहित नौ ग्रहों के सार्वभौमिक कंपन और स्थिति से संचालित और प्रभावित होता है। यह कंपन केवल नवग्रह स्तोत्र का सही और उचित तरीके से जाप करके ही बनाया जा सकता है। इस शक्तिशाली नवग्रह स्तोत्र में सभी नौ ग्रहों के नकारात्मक और अशुभ प्रभावों को दूर करने की शक्ति है। ज्योतिष में, राशि चक्र के 12 नक्षत्रों में “नवग्रहों” की स्थिति, उनके ग्रहों की चाल और मनुष्य के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव को काफी महत्व दिया जाता है। नवग्रह स्तोत्र केवल सकारात्मक प्रभाव देते हैं और स्तोत्र के लिए कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं हैं, हालांकि कभी-कभी किसी ग्रह की ऊर्जा की अधिकता के कारण कुछ मामूली दुष्प्रभाव हो सकते हैं जिसके लिए कोई व्यक्ति स्तोत्र का जाप कर रहा है। Navgraha Stotra नवग्रह स्तोत्र हर तरह से रत्नों से बेहतर हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे ज्योतिष में उपलब्ध सर्वोच्च उपाय हैं। ज्योतिष में नवग्रह स्तोत्र के जाप जैसा कोई उपाय नहीं है। Navgraha Stotra:नवग्रह स्तोत्र के लाभ Navgraha Stotra इस स्तोत्र का जाप करने से सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाने और उनके हानिकारक परिणामों को कम करने में मदद मिलती है।जाप स्तोत्र व्यक्ति के समग्र कल्याण को बढ़ावा देने में अत्यधिक लाभकारी है। नियमित रूप से सभी नवग्रह स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति अपनी कुंडली में नौ ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम कर सकता है। अपनी कुंडली के अनुसार बताए गए स्तोत्र का जाप करें और 40 दिनों के भीतर आपको एक उल्लेखनीय अंतर दिखाई देगा। व्यक्ति की कुंडली के अनुसार चुना गया नवग्रह स्तोत्र उक्त ग्रह के सकारात्मक प्रभाव को मजबूत करने और नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद करता है। Navgraha Stotra:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए Navgraha Stotra नौ ग्रहों के अशुभ प्रभावों से पीड़ित व्यक्तियों, पुरानी बीमारियों और अन्य खगोलीय प्रभावों के लिए वैदिक पद्धति के अनुसार नवग्रह स्तोत्र का जाप करना चाहिए। नवग्रह स्तोत्रम | Navgraha Stotra अथ नवग्रह स्तोत्र ।। श्री गणेशाय नमः ।। जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महदद्युतिम् । तमोरिंसर्वपापघ्नं प्रणतोSस्मि दिवाकरम् ।। १ ।। दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम् । नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणम् ।। २ ।। धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांति समप्रभम् । कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणाम्यहम् ।। ३ ।। प्रियंगुकलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम् । सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् ।। ४ ।। देवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम् । बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् ।। ५ ।। हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् । सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् ।। ६ ।। नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् । छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम् ।। ७ ।। अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनम् । सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ।। ८ ।। पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रह मस्तकम् । रौद्रंरौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् ।। ९ ।। इति श्रीव्यासमुखोग्दीतम् यः पठेत् सुसमाहितः । दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्न शांतिर्भविष्यति ।। १० ।। नरनारी नृपाणांच भवेत् दुःस्वप्ननाशनम् । ऐश्वर्यमतुलं तेषां आरोग्यं पुष्टिवर्धनम् ।। ११ ।। ग्रहनक्षत्रजाः पीडास्तस्कराग्निसमुभ्दवाः । ता सर्वाःप्रशमं यान्ति व्यासोब्रुते न संशयः ।। १२ ।। ।। इति श्रीव्यास विरचितम् आदित्यादी नवग्रह स्तोत्रम संपूर्णं ।।

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Navgraha Pidaghar Stotram | नवग्रह पीड़ा शांति स्तोत्रम्

Navgraha Pidaghar Stotram:नवग्रह पीड़ा शांति स्तोत्रम् : मनुष्य भी अन्य प्राणियों की तरह पूर्व निर्धारित कर्मों से बने प्रारब्ध को भोगता है। लेकिन अन्य प्राणियों की तरह वह सिर्फ प्रपंच भोगने के लिए बाध्य नहीं है। क्योंकि उसे कर्म करने का अधिकार है, ताकि वह पूर्वाग्रही अशुभ कर्मों की कड़वाहट को कम कर सके। कोई भी बड़ा मार्ग परिपूर्ण नहीं होता, केवल नवग्रह पीड़ा स्तोत्रम् का पाठ करने से ही मनुष्य अपने जीवन को शुभ बना सकता है। नवग्रह पीड़ा स्तोत्रम् का नियमित पाठ करने से जातक नवग्रहों द्वारा मिलने वाली परेशानियों और कष्टों से मुक्ति पा सकता है। जब मनुष्य चारों ओर से विभिन्न समस्याओं से घिर जाता है, तो उसे समझ में नहीं आता कि क्या करे और कहां जाए। धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक रोगों का शिकंजा भी उस पर कसता जाता है। ऐसी स्थिति में वह इतना निराश हो जाता है कि वह विवश होकर अनंत जीवन की शैय्या पर अटक जाता है, चुपचाप बैठकर अपने कर्मों को कोसता रहता है। Navgraha Pidaghar Stotram लेकिन ऐसा करना उचित नहीं है। माना कि यह बात शत-प्रतिशत सत्य है कि हम जो भी सुख भोग रहे हैं, वह हमें अपने ही कर्मों के फलस्वरूप प्राप्त हो रहा है, लेकिन हमें वर्तमान समय में कर्म करने के दुर्लभ अवसर का भी लाभ उठाना चाहिए। वर्तमान समय में हम पूर्वजन्म के पापों के प्रायश्चित के शुभ कर्म भी कर सकते हैं। ग्रहों के माध्यम से प्राप्त होने वाले व्यक्तिगत कार्यों का भोग भी उन कर्मकांडों से प्रभावित हो सकता है, जिन्हें हम ग्रहों से जोड़कर कर पाते हैं। यदि हम बड़े-बड़े कर्मकांड न भी कर सकें, तो भी हमें निराश नहीं होना चाहिए। नवग्रह के प्रत्येक स्तोत्र का नियमित पाठ करने से हमारा जीवन मंगलमय हो सकता है। हमें सभी प्रकार के कष्टों और कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। Navgraha Pidaghar Stotram:नवग्रह पीड़ाघर स्तोत्र के लाभ ग्रहों से होने वाली पीड़ा को कम करने के लिए इस नवग्रह पीड़ाघर स्तोत्र का पाठ अत्यंत लाभकारी है। इसमें एक-एक श्लोक द्वारा क्रमशः प्रत्येक ग्रह से पीड़ा दूर करने की प्रार्थना की गई है। Navgraha Pidaghar Stotram:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए जो व्यक्ति ग्रहों आदि के अशुभ प्रभावों से पीड़ित हैं, उन्हें वैदिक नियमों के अनुसार इस नवग्रह पीड़ा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए, जिससे सभी बुराइयों का नाश होगा और एक सुंदर जीवन मिलेगा। नवग्रह पीड़ा शांति स्तोत्रम् | Navgraha Pidaghar Stotram || श्री गणेशाय नमः || ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षण कारक:। विषमस्थान संभूतां पीडां हरतु मे रवि:।। रोहिणीश: सुधामूर्ति: सुधागात्र: सुधशन:। विषमस्थान संभूतां पीडां हरतु मे विधु:।। भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत्सदा। वृष्टिकुदृष्टिहर्ता च पीडां हरतु मे कुज:।। उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति:। सूर्यप्रियकरो विद्वान्पीडां हरतु में बुध:।। देवमन्त्री विशालाक्ष: सदा लोकहिते रत:। अनेक शिष्यसंपूर्ण: पीडां हरतु में गुरु:।। दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदाश्च महामति:। प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीडां हरतु मे भृगु:।। सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय:। दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि:।। महाशिरो महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबल:। अतनु: ऊध्र्वकेशश्च पीडां हरतु में शिखी।। अनेक रूपवर्णेश्च शतशोऽथ सहश:। उत्पातरूपो जगतां पीडां हरतु मे तम:।।

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Maha Shivratri Mahamantra 2025: महाशिवरात्रि पर करें शिव जी के इन मंत्रों का जाप, मृत्यु के भय से मिल सकती है मुक्ति

Maha Shivratri Mahamantra 2025:इस बार 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की शादी माता पार्वती से हुई थी। महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की आराधना की जाती है इसके साथ ही उपवास भी रखते है। इस दिन शिवलिंग पूजा के दौरान अगर भगवान शिव के महा मंत्रों का जाप किया जाए तो इससे मृत्यु का भय दूर हो जाता है। Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है यह पर्व भोलेनाथ को समर्पित है। यह दिन शिव के विवाह दिवस का प्रतीक है। महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाई जाती है, इस बार महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025, बुधवार को मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि एक हिंदू पर्व है जो भगवान शिव का सम्मान करता है, इसे शिव की रात भी कहा जाता है। इस दिन भक्त दिन-रात व्रत रखकर भगवान की पूजा करते हैं। यह दिन शिव और शक्ति का मिलन का दिन है। Maha Shivratri Mahamantra 2025:इस दिन भगवान भोलेनाथ का विवाह माता पार्वती से हुआ था।  महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शिवलिंग पूजा के दौरान भगवान शिव के महा मंत्रों का जाप किया जाए तो इससे मृत्यु का भय दूर हो जाता है और कुंडली में बनने वाले अकाल मृत्यु का योग भी टल जाता है।  Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के महामंत्र Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि के दिन 4 प्रहरों में भगवान शिव का पूजन किया जाता है। हर एक प्रहर का एक मंत्र भी है। इसलिए चार प्रहर के 4 मंत्र जो मृत्यु के भय से मुक्ति दिला सकते हैं। प्रथम प्रहर की पूजा का समय 26 फरवरी को शाम 6 बजकर 19 मिनट से रात 9 बजकर 26 मिनट तक है। इस प्रहर में भगवान शिव के ‘ह्रीं ईशानाय नमः’ मंत्र का जाप करें। महाशिवरात्रि के दूसरे प्रहर की पूजा का समय 26 फरवरी को रात 9 बजकर 26 मिनट से रात 12 बजकर 34 मिनट तक है। इस दौरान भगवान शिव के  ‘ह्रीं अघोराय नम:’ मंत्र का जाप करें। तीसरे प्रहर की पूजा का समय 26 फरवरी को रात 12 बजकर 34 मिनट से रात 3 बजकर 41 मिनट है। इस दौरान भगवान शिव के ‘ह्रीं वामदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करें। महाशिवरात्रि के चौथे प्रहर की पूजा का समय 26 फरवरी को रात 3 बजकर 41 मिनट से 27 फरवरी को सुबह 6 बजकर 48 मिनट है। ऐसे में इस प्रहर के दौरान भगवान शिव के ह्रीं सद्योजाताय नमः मंत्र का जाप करें। Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि पर जपने योग्य शुभ मंत्र महामृत्युंजय मंत्र – मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए मंत्र:ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥ लाभ: 2. शिव पंचाक्षर मंत्र – शिव कृपा प्राप्ति के लिए मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥ लाभ: 3. रुद्र गायत्री मंत्र – शिव तत्व की प्राप्ति के लिए मंत्र:ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ लाभ: 4. काल भैरव मंत्र – भय और शत्रुओं से मुक्ति के लिए मंत्र:ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्॥ लाभ: Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि पर मंत्र जाप की विधि Maha Shivratri Mahamantra 2025:मंत्र जाप के नियम जाप हमेशा पवित्र मन से करें और शांत स्थान पर बैठें।रुद्राक्ष माला से मंत्र जाप करना श्रेष्ठ माना जाता है।भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बिल्वपत्र, भांग, धतूरा और पंचामृत अर्पित करें। मंत्र जाप के बाद शिव आरती करें और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें। Maha Shivratri Mahamantra 2025:निष्कर्ष Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के इन मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति मृत्यु के भय से मुक्त होकर सुख-शांति, समृद्धि और दीर्घायु प्राप्त करता है। विशेष रूप से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना इस दिन अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस महाशिवरात्रि पर श्रद्धा और भक्ति से शिव पूजन करें और शिव कृपा प्राप्त करें।

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Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:महाशिवरात्रि पर कैसे करें जलाभिषेक? जानें शिवलिंग पर जल चढ़ाने के शुभ नियम और विधि

Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:महाशिवरात्रि पर कैसे करें जलाभिषेक? जानें शिवलिंग पर जल चढ़ाने के शुभ नियम और विधि Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। जलाभिषेक का विशेष महत्व है क्योंकि यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है। यदि जलाभिषेक विधिपूर्वक किया जाए, तो भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक कैसे करें और इसके शुभ नियम क्या हैं। Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:भगवान शिव को जल कैसे चढ़ाएं Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक की विधि Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:शिवलिंग पर जल चढ़ाने के शुभ नियम महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का महत्व Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:पुराणों में जलाभिषेक को पवित्र और कल्याणकारी बताया गया है। मान्यता है कि जल चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्टों को हर लेते हैं। विशेष रूप से, जो लोग आर्थिक संकट, रोग या जीवन की परेशानियों से ग्रसित होते हैं, उन्हें महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक जरूर करना चाहिए। इस महाशिवरात्रि पर श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उनकी असीम कृपा प्राप्त करें। हर-हर महादेव!

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