2024

Shri Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती

Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती ही महाराष्ट्रातील एक प्रसिद्ध देवीची आरती आहे. शांतादुर्गा देवी ही शक्तिपीठांपैकी एक आहे आणि तिची पूजा शांती आणि समृद्धीसाठी केली जाते. आरतीचे काही महत्वाचे भाग: आरतीचे फायदे: आरती कशी करावी: किती वेळा आरती करावी: Shanta Durgechi Aarti:नियमितपणे आरती करणे अधिक फायद्याचे असते. Shanta Durgechi Aarti आपण रोज किंवा आठवड्यातून एकदाही आरती करू शकता. श्री शांतादुर्गेची आरतीचे महत्व: श्री शांतादुर्गेची आरती ही केवळ एक धार्मिक अनुष्ठान नाही तर एक आध्यात्मिक अनुभव आहे. देवीची भक्ति करण्याने मन शांत होते आणि जीवन सुखमय होते Shri Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ भूकैलासा ऐसी ही कवला नगरी ।शांतादुर्गा तेथे भक्तभवहारी ।असुराते मर्दुनिया सुरवरकैवारी ।स्मरती विधीहरीशंकर सुरगण अंतरी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ प्रबोध तुझा नव्हे विश्वाभीतरी ।नेति नेति शब्दे गर्जती पै चारी ।साही शास्त्रे मथिता न कळीसी निर्धारी ।अष्टादश गर्जती परी नेणती तव थोरी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ कोटी मदन रूपा ऐसी मुखशोभा ।सर्वांगी भूषणे जांबूनदगाभा ।नासाग्री मुक्ताफळ दिनमणीची प्रभा ।भक्तजनाते अभय देसी तू अंबा । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ अंबे भक्तांसाठी होसी साकार ।नातरी जगजीवन तू नव्हसी गोचर ।विराटरूपा धरूनी करीसी व्यापार ।त्रिगुणी विरहीत सहीत तुज कैचा पार । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ त्रितापतापे श्रमलो निजवी निजसदनी ।अंबे सकळारंभे राका शशीवदनी ।अगमे निगमे दुर्गे भक्तांचे जननी ।पद्माजी बाबाजी रमला तव भजनी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥

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Kaila Mata Aarti:कैला माता आरती

Kaila Mata Aarti:कैला माता आरती Kaila Mata Aarti:कैला माता की आरती एक अत्यंत पवित्र और भक्तिमय अनुष्ठान है। माँ कैला देवी को शक्ति की देवी माना जाता है और उनकी पूजा करने से भक्तों को मन की शांति, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने का वरदान मिलता है। Kaila Mata Aarti:आइए जानते हैं कैला माता की आरती के कुछ प्रमुख लाभ Kaila Mata Aarti:कैला माता की आरती कैसे करें Kaila Mata Aarti:कैला माता की आरती के कुछ पंक्तियाँ ध्यान रखें: निष्कर्ष: Kaila Mata Aarti:माँ कैला की आरती एक शक्तिशाली अनुष्ठान है जो भक्तों के जीवन में कई तरह के लाभ ला सकता है। यदि आप माँ कैला की भक्त हैं तो नियमित रूप से उनकी आरती करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय बनाएं। Kaila Mata Aarti:कैला माता आरती ॐ जय कैला रानी,मैया जय कैला रानी ।ज्योति अखंड दिये माँतुम सब जगजानी ॥ तुम हो शक्ति भवानीमन वांछित फल दाता ॥मैया मन वांछित फल दाता ॥अद्भुत रूप अलौकिकसदानन्द माता ॥ॐ जय कैला रानी। गिरि त्रिकूट पर आपबिराजी चामुंडा संगा ॥मैया चामुंडा संगा ॥भक्तन पाप नसावौंबन पावन गंगा ॥ॐ जय कैला रानी। भक्त बहोरा द्वारे रहताकरता अगवानी ॥मैया करता अगवानी ॥लाल ध्वजा नभ चूमतराजेश्वर रानी ॥ॐ जय कैला रानी। नौबत बजे भवन मेंशंक नाद भारी ॥मैया शंक नाद भारी ॥जोगन गावत नाचतदे दे कर तारी ॥ॐ जय कैला रानी। ध्वजा नारियल रोलीपान सुपारी साथा ॥मैया पान सुपारी साथा ॥लेकर पड़े प्रेम सेजो जन यहाँ आता ॥ॐ जय कैला रानी । दर्श पार्श कर माँ केमुक्ती जान पाता ॥मैया मुक्ती जान पाता ॥भक्त सरन है तेरीरख अपने साथा ॥ॐ जय कैला रानी । कैला जी की आरतीजो जन है गाता ॥मैया जो जन है गाता ॥भक्त कहे भव सागरपार उतर जाता ॥ ॐ जय कैला रानी,मैया जय कैला रानी ।ज्योति अखंड दिये माँतुम सब जगजानी ॥

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Vaishno Mata Aarti:वैष्णो माता आरती

Vaishno Mata Aarti:वैष्णो माता आरती के लाभ Vaishno Mata Aarti:माँ वैष्णो देवी की आरती सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, Vaishno Mata Aarti बल्कि भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव भी है। माना जाता है कि माँ वैष्णो की आरती करने से मन शांत होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। Vaishno Mata Aarti:आइए जानते हैं वैष्णो माता आरती के कुछ प्रमुख लाभ Vaishno Mata Aarti:कब और कैसे करें आरती ध्यान रखें निष्कर्ष माँ वैष्णो की आरती एक शक्तिशाली अनुष्ठान है जो भक्तों के जीवन में कई तरह के लाभ ला सकता है। यदि आप माँ वैष्णो की भक्त हैं तो नियमित रूप से उनकी आरती करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय बनाएं। Vaishno Mata Aarti:वैष्णो माता आरती जय वैष्णवी माता,मैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगे,आरती मैं गाता ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ शीश पे छत्र विराजे,मूरतिया प्यारी ।गंगा बहती चरनन,ज्योति जगे न्यारी ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे,शंकर ध्यान धरे ।सेवक चंवर डुलावत,नारद नृत्य करे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी,मन को अति भावे ।बार-बार देखन को,ऐ माँ मन चावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ भवन पे झण्डे झूलें,घंटा ध्वनि बाजे ।ऊँचा पर्वत तेरा,माता प्रिय लागे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल,भेंट पुष्प मेवा ।दास खड़े चरणों में,दर्शन दो देवा ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ जो जन निश्चय करके,द्वार तेरे आवे ।उसकी इच्छा पूरण,माता हो जावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ इतनी स्तुति निश-दिन,जो नर भी गावे ।कहते सेवक ध्यानू,सुख सम्पत्ति पावे ॥ जय वैष्णवी माता,मैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगे,आरती मैं गाता ॥

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Utpanna Ekadashi 2024: उत्पन्ना एकादशी पर करें मां तुलसी की खास पूजा, घर में बनी रहेगी बरकत

उत्पन्ना एकादशी व्रत का दिन बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाली एकादशी को उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi 2024 Date And Time) के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह एकादशी 26 नवंबर को मनाई जाएगी। वहीं इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। Utpanna Ekadashi 2024:सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत ही पावन माना गया है। उत्पन्ना एकादशी यह दिन श्री हरि की पूजा के लिए बेहद खास होता है। इस पावन तिथि पर सभी विष्णु भक्त उपवास रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। इसके साथ ही द्वादशी तिथि पर अपना व्रत खोलते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी तिथि (Utpanna Ekadashi 2024) यानी 26 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी। वहीं, इस दिन देवी तुलसी की पूजा का भी महत्व है। अगर आप जीवन में आ रही किसी भी समस्या से लगातार परेशान हैं, तो आपको इस एकादशी पर देवी तुलसी को जल चढ़ाना चाहिए। मां तुलसी की पूजा का महत्व उत्पन्ना एकादशी मां तुलसी को वैष्णव धर्म में विष्णु भगवान की पत्नी माना गया है। उत्पन्ना एकादशी पर तुलसी का पूजन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे पर दीपक जलाने और विशेष मंत्रों का जाप करने से घर में बरकत बनी रहती है। Utpanna Ekadashi 2024: 26 या 27 नवंबर, कब है उत्पन्ना एकादशी? जाने इस व्रत की सही डेट पूजन विधि उत्पन्ना एकादशी के फायदे उत्पन्ना एकादशी फिर पांच दीपक देवी के सामने जलाने चाहिए और उनकी 7 बार परिक्रमा पूरी करके उनके 108 नामों का जाप (Maa Tulsi Ke 108 Naam) करना चाहिए, जो यहां पर दिए गए हैं। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और अपार धन की प्राप्ति होगी। ।।मां तुलसी के 108 नाम।। (Maa Tulsi Ke 108 Naam) 1.ॐ श्री तुलस्यै नमः। 2.ॐ नन्दिन्यै नमः। 3.ॐ देव्यै नमः। 4.ॐ शिखिन्यै नमः। 5.ॐ धारिण्यै नमः। 6.ॐ धात्र्यै नमः। 7.ॐ सावित्र्यै नमः। 8.ॐ सत्यसन्धायै नमः। 9.ॐ कालहारिण्यै नमः। 10.ॐ गौर्यै नमः। 11.ॐ देवगीतायै नमः। 12.ॐ द्रवीयस्यै नमः। 13.ॐ पद्मिन्यै नमः। 14.ॐ सीतायै नमः। 15.ॐ रुक्मिण्यै नमः। 16.ॐ प्रियभूषणायै नमः। 17.ॐ श्रेयस्यै नमः। 18.ॐ श्रीमत्यै 19.ॐ मान्यायै नमः। 20.ॐ गौर्यै नमः। 21.ॐ गौतमार्चितायै नमः। 22.ॐ त्रेतायै नमः। 23.ॐ त्रिपथगायै नमः। 24.ॐ त्रिपादायै नमः। 25.ॐ त्रैमूर्त्यै नमः। 26.ॐ जगत्रयायै नमः। 27.ॐ त्रासिन्यै नमः। 28.ॐ गात्रायै नमः। 29.ॐ गात्रियायै नमः। 30.ॐ गर्भवारिण्यै नमः। 31.ॐ शोभनायै नमः। 32.ॐ समायै नमः। 33.ॐ द्विरदायै नमः। 34.ॐ आराद्यै नमः। 35.ॐ यज्ञविद्यायै नमः। 36.ॐ महाविद्यायै नमः। 37.ॐ गुह्यविद्यायै नमः। 38.ॐ कामाक्ष्यै नमः। 39.ॐ कुलायै नमः। 40.ॐ श्रीयै नमः। 41.ॐ भूम्यै नमः। 42.ॐ भवित्र्यै नमः। 43.ॐ सावित्र्यै नमः। 44.ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः। 45.ॐ शंखिन्यै नमः। 46.ॐ चक्रिण्यै नमः। 47.ॐ चारिण्यै नमः। 48.ॐ चपलेक्षणायै नमः। 49.ॐ पीताम्बरायै नमः। 50.ॐ प्रोत सोमायै नमः। 51.ॐ सौरसायै नमः। 52.ॐ अक्षिण्यै नमः। 53.ॐ अम्बायै नमः। 54.ॐ सरस्वत्यै नमः। 55.ॐ सम्श्रयायै नमः। 56.ॐ सर्व देवत्यै नमः। 57.ॐ विश्वाश्रयायै नमः। 58.ॐ सुगन्धिन्यै नमः। 59.ॐ सुवासनायै नमः। 60.ॐ वरदायै नमः। 61.ॐ सुश्रोण्यै नमः। 62.ॐ चन्द्रभागायै नमः। 63.ॐ यमुनाप्रियायै नमः। 64.ॐ कावेर्यै नमः। 65.ॐ मणिकर्णिकायै नमः। 66.ॐ अर्चिन्यै नमः। 67.ॐ स्थायिन्यै नमः। 68.ॐ दानप्रदायै नमः। 69.ॐ धनवत्यै नमः। 70.ॐ सोच्यमानसायै नमः। 71.ॐ शुचिन्यै नमः। 72.ॐ श्रेयस्यै नमः। 73.ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः। 74.ॐ विभूत्यै नमः। 75.ॐ आकृत्यै नमः। 76.ॐ आविर्भूत्यै नमः। 77.ॐ प्रभाविन्यै नमः। 78.ॐ गन्धिन्यै नमः। 79.ॐ स्वर्गिन्यै नमः। 80.ॐ गदायै नमः। 81.ॐ वेद्यायै नमः। 82.ॐ प्रभायै नमः। 83.ॐ सारस्यै नमः। 84.ॐ सरसिवासायै नमः। 85.ॐ सरस्वत्यै नमः। 86.ॐ शरावत्यै नमः। 87.ॐ रसिन्यै नमः। 88.ॐ काळिन्यै नमः। 89.ॐ श्रेयोवत्यै नमः। 90.ॐ यामायै नमः। 91.ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः। 92.ॐ श्यामसुन्दरायै नमः। 93.ॐ रत्नरूपिण्यै नमः। 94.ॐ शमनिधिन्यै नमः। 95.ॐ शतानन्दायै नमः। 96.ॐ शतद्युतये नमः। 97.ॐ शितिकण्ठायै नमः। 98.ॐ प्रयायै नमः। 99.ॐ धात्र्यै नमः। 100.ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः। 101.ॐ कृष्णायै नमः। 102.ॐ भक्तवत्सलायै नमः। 103.ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः। 104.ॐ हरायै नमः। 105.ॐ अमृतरूपिण्यै नमः। 106.ॐ भूम्यै नमः। 107.ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः। 108.ॐ श्री तुलस्यै नमः।

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Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती

Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती के लाभ (फायदे) Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि, माँ दुर्गा के सातवें रूप के रूप में पूजी जाती हैं। उनका स्वरूप भय को दूर करने वाला और भक्तों को शत्रु-भय, अंधकार, और बुरी शक्तियों से रक्षा प्रदान करने वाला है। माँ कालरात्रि की आरती करने से आध्यात्मिक और भौतिक दोनों लाभ मिलते हैं। Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती के फायदे: 1. भय और शत्रु से मुक्ति: 2. Mata Kalratri Ki Aarti नकारात्मक शक्तियों का नाश: 3. आध्यात्मिक उन्नति: 4. स्वास्थ्य लाभ: 5. आकस्मिक संकटों से सुरक्षा: 6. कुंडली दोष और ग्रह बाधा का निवारण 7. परिवार में सुख-शांति: माँ कालरात्रि की आरती का शुभ समय: आरती विधि: माँ कालरात्रि की आरती करने से न केवल भय और संकटों का नाश होता है, बल्कि भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि, और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है। Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती नवरात्रि के सातवें दिन माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है, माँ कालरात्रि की यह अत्यंत महत्वपूर्ण आरती के लिरिक्स कुछ इस प्रकार से हैं। कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।काल के मुह से बचाने वाली ॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।महाचंडी तेरा अवतार ॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा ।महाकाली है तेरा पसारा ॥ खडग खप्पर रखने वाली ।दुष्टों का लहू चखने वाली ॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥ सभी देवता सब नर-नारी ।गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥ रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥ ना कोई चिंता रहे बीमारी ।ना कोई गम ना संकट भारी ॥ उस पर कभी कष्ट ना आवें ।महाकाली माँ जिसे बचाबे ॥ तू भी भक्त प्रेम से कह ।कालरात्रि माँ तेरी जय ॥

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Chandra Dev Aarti:चन्द्र देव आरती

Chandra Dev चंद्र देव की आरती के लाभ (फायदे): Chandra Dev:चंद्र देव, मन के स्वामी और ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण ग्रह के रूप में माने जाते हैं। उनकी आरती करने से मन, भावनाओं और जीवन के अन्य पहलुओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। Chandra Dev :चंद्र देव आरती के फायदे: 1. मानसिक शांति और स्थिरता: 2. भावनात्मक संतुलन: 3. धन और समृद्धि: 4. स्वास्थ्य लाभ: 5. वैवाहिक जीवन में सुख: 6. चंद्र दोष का निवारण: 7. रचनात्मकता और कलात्मक क्षमता: Chandra Dev Aarti:चन्द्र देव आरती ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी । रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी । जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि । योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा । वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी । शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे । विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें । ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

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Gorakhnath ji Arti:श्री नाथ जी आरती 

Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी आरती के लाभ Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी, भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के रूप में पूजे जाते हैं। उनकी आरती करने से कई आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। 1. आध्यात्मिक शांति और भक्ति का भाव श्रीनाथ जी की आरती नियमित करने से मन शांत होता है और भक्त के हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव प्रबल होता है। 2. परिवार में सुख-शांति श्रीनाथ जी को समर्पित आरती करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कलह दूर होते हैं। यह आरती परिवार में आपसी प्रेम और सौहार्द बढ़ाती है। 3. धन-समृद्धि का आशीर्वाद Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी, गोवर्धन पर्वत के उद्धारकर्ता, धन और समृद्धि के प्रतीक हैं। उनकी आरती करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और घर में धन की बरकत होती है। 4. संकटों और कष्टों से मुक्ति श्रीनाथ जी को “संकट मोचन” भी माना जाता है। उनकी आरती करने से जीवन के सभी संकट और बाधाएं दूर होती हैं। 5. आध्यात्मिक उन्नति आरती के माध्यम से भक्त अपने मन को श्रीकृष्ण के चरणों में लगाकर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे आत्मा की उन्नति होती है। 6. कार्यों में सफलता Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी की कृपा से हर कार्य निर्विघ्न और सफल होता है। उनके प्रति समर्पित आरती व्यापार, नौकरी, और अन्य क्षेत्रों में सफलता दिलाती है। 7. संतान प्राप्ति और संतानों की रक्षा Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी को बाल स्वरूप मानकर उनकी आरती करने से नि:संतान दंपतियों को संतान का सुख प्राप्त होता है और संतान की उन्नति होती है। आरती करने का शुभ समय आरती विधि महत्व:Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी की आरती करने से जीवन में श्रीकृष्ण का आशीर्वाद बना रहता है, जो जीवन को मंगलमय और सुखद बनाता है। Gorakhnath ji Arti:श्री नाथ जी आरती  जय गोरख योगी (श्री गुरु जी) हर हर गोरख योगी ।वेद पुराण बखानत, ब्रह्मादिक सुरमानत, अटल भवन योगी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ बाल जती ब्रह्मज्ञानी योग युक्ति पूरे (श्रीगुरुजी) योग युक्ति पूरे ।सोहं शब्द निरन्तर (अनहद नाद निरन्तर) बाज रहे तूरे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ रत्नजड़ित मणि माणिक कुण्डल कानन में (श्री गुरुजी) कुंडल कानन मेंजटा मुकुट सिर सोहत मन मोहत भस्मन्ती तन में ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ आदि पुरुष अविनाशी, निर्गुण गुणराशी (श्री गुरुजी) निर्गुण गुणराशी,सुमिरण से अघ छूटे, सुमिरन से पाप छूटे, टूटे यम फाँसी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ ध्यान कियो दशरथ सुत रघुकुल वंशमणी (श्री गुरुजी) रघुकुल वंशमणि,सीता शोक निवारक, सीता मुक्त कराई, मार्यो लंक धनी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ नन्दनन्दन जगवन्दन, गिरधर वनमाली, (श्री गुरुजी) गिरधर वनमालीनिश वासर गुण गावत, वंशी मधुर वजावत, संग रुक्मणी बाली ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ धारा नगर मैनावती तुम्हरो ध्यानधरे (श्रीगुरुजी) तुम्हरो ध्यान धरेअमर किये गोपीचन्द, अमर किये पूर्णमल, संकट दूर करे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ चन्द्रावल लखरावल निजकर घातमरी, (श्रीगुरुजी) निजकर घातमरी,योग अमर फल देकर, 2 क्षण में अमर करी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ भूप अमित शरणागत जनकादिक ज्ञानी, (श्रीगुरुजी)जनकादिक ज्ञानीमान दिलीप युधिष्ठिर 2 हरिश्चन्द्र से दानी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ वीर धीर संग ऋद्धि सिद्धि गणपति चंवर करे (श्रीगुरुजी) गणपति चँवर करेजगदम्बा जगजननी 2 योगिनी ध्यान धरे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ दया करी चौरंग पर कठिन विपतिटारी (श्रीगुरुजी) कठिन विपतिटारीदीनदयाल दयानिधि 2 सेवक सुखकारी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ इतनी श्री नाथ जी की मंगल आरती निशदिन जो गावे (श्रीगुरुजी)प्रात समय गावे, भणत विचार पद (भर्तृहरि भूप अमर पद)सो निश्चय पावे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥

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Gauri Nandan Arti: गौरी नंदन आरती

Gauri Nandan Arti:गौरी नंदन आरती के फायदे और शुभ मुहूर्त Gauri Nandan Arti:गौरी नंदन आरती के फायदे: Gauri Nandan Arti;गौरी नंदन आरती के शुभ मुहूर्त: Gauri Nandan Arti:आरती करने का तरीका: यह आरती जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है और भगवान गणेश का विशेष आशीर्वाद प्रदान करती है। Gauri Nandan Arti: गौरी नंदन आरती जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते शुभ कार्यो में सबसे पहलेतेरा पूजन करतेविघ्न हटाते काज बनातेसभी अमंगल हरतेओ देवा सिद्धि और सिद्धि बाटेचुनते राहो के काटेखुशियों के रंग को बिखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते ओमकार है रूप तिहाराअलौकिक है मायालम्ब कर्ण तेरे उज्जवल नैनाधुम्रवर्ण है कायाओम्हर है रूप तिहाराअलौकिक है मायाओ देवा शम्भू के लाल दुलारेसंतो के नैनन तारेमस्तक पे चन्द्रमा को वारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते गणपति बाप्पा घर में आनासुख वैभव कर जानाएक दन्त लम्बोदर स्वामीसारे कष्ट मिटानागणपति बाप्पा घर में आनासुख वैभव बरसानादेवा लडूअन का भोग लगातेमूषक वहानपे आतेभक्तो की बिगड़ी संवारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते धन कुबेर चरणों के चाकरलक्ष्मी संग विराजेदसो दिशा नवखण्ड में देवाडंका तेरा बाजेदेवा तुझमे ध्यान लगायेमन चाहा फल वो पाएनैया भवंर से उबारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते बांझो की गोदे भर देनानिर्धन को धन देनादिनों को सन्मान दिलानानिर्बल को बाल देनाओ देवा सुनलो अरदास हमारीविनती करते नर नारीसेवा में तन मन वारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते

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Utpanna Ekadashi 2024: 26 या 27 नवंबर, कब है उत्पन्ना एकादशी? जाने इस व्रत की सही डेट

Utpanna Ekadashi 2024: भगवान विष्णु को समर्पित उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। साल 2024 में ये व्रत कब है और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा, आइए जानते हैं। Utpanna Ekadashi 2024: उत्पन्ना एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास (अगहन) के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी पापों का नाश होता है। साल 2024 में यह तिथि नवंबर के महीने में है, लेकिन इसको लेकर संशय बना हुआ है कि, उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर को रखा जाएगा कि 27 नवंबर को। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा। इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब है और किस विधि से आपको इस दिन पूजा करनी चाहिए। Utpanna Ekadashi :उत्पन्ना एकादशी की सही तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह की एकादशी तिथि को रखा जाता है। साल 2024 में इस तिथि की शुरुआत 26 नवंबर की सुबह 1 बजकर 1 मिनट (25 नवंबर की रात्रि) पर होगी वहीं इसका समापन 27 नवंबर की देर सुबह 3 बजकर 47 मिनट (26 नवंबर की देर रात) पर होगा। यानि उदयातिथि के अनुसार, एकादशी तिथि 26 नवंबर को ही रहेगी, इसलिए उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर को ही रखा जाएगा।  उत्पन्ना एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह 5 बजकर 5 मिनट से पूजा का शुभ मुहूर्त शुरू होगा और लगभग 6 बजे तक आप ब्रह्म मुहूर्त की पूजा कर सकते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करने से भक्तों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। वहीं जो लोग सुबह के समय पूजा न कर पाएं वो सुबह 11 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी की पूजा कर सकते हैं। वहीं एकादशी व्रत का पारण आप 27 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट के बीच कर सकते हैं।  उत्पन्ना एकादशी 2024 डेट और शुभ मुहूर्त (Utpanna Ekadashi 2024 Date and Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 26 नवंबर को देर रात 01 बजकर 01 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 27 नवंबर को देर रात 03 बजकर 47 मिनट पर होगा। ऐसे में 26 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी (Kab Hai Utpanna Ekadashi 2024) व्रत किया जाएगा। उत्पन्ना एकादशी व्रत की पूजा विधि 1. व्रत का संकल्प: 2. पूजा सामग्री: 3. पूजा विधि: व्रत का पारण: Utpanna Ekadashi 2024 उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा भक्तों को प्राप्त होती है। साथ ही आपकी मनोकामनाओं को भी भगवान विष्णु पूरा करते हैं। इस दिन व्रत रखने वालों को पारिवारिक जीवन में भी सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।  Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।

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Meaning of dreams : सपने में खुद को भागने और गिरते हुए देखते हैं? जानें इसका मतलब

सपने में खुद को स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में दौड़ना ये बताता है कि आप अपने जीवन में बुरे दौर से गुजर रहे हैं और आप इसका सामना करने के बजाए परिस्थितियों से दूर भागने की कोशिश कर रहे हैं. सपने तो सभी देखते हैं अब चाहे वह अच्छे हों या बुरे. लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है जो सपनों का मतलब जानते हैं. जी हां, स्वप्न शास्त्र में हर सपने का अपना विशेष महत्व है जो हमारे भविष्य को लेकर बड़े संकेत देते हैं. आमतौर पर ज्यादातर लोग सपना देखने के बाद उसे भूल जाते हैं. लेकिन एक तथ्य ये भी है कि यदि आप सपने का मतलब जानकर अपने व्यक्तित्व में बदलाव करें तो परिस्थितियां सुधर सकती हैं. इसी सिलसिले में आज हम आपको ‘सपने में दौड़ने’ के पीछे का मतलब बताने जा रहे हैं. आपने भी कई बार सपने में खुद को दौड़ते हुए देखा होगा, ऐसा भी हो सकता है कि आपको इस तरह के सपने के बारे में कुछ याद न हो. इसके अलावा, ऐसा भी हो सकता है कि आप कभी भविष्य में ऐसा सपना देख लें. किस ओर इशारा करता है ‘सपने में दौड़ना’ स्वप्न शास्त्र के मुताबिक सभी सपनों के पीछे एक खास वजह और एक खास संकेत होता है. लिहाजा, सपने में दौड़ना भी मनुष्य का एक खास संकेत देता है. यदि आप सोते समय सपने में खुद को दौड़ते हुए देखते हैं तो ये इस बात की ओर संकेत करता है कि आपको अपने व्यक्तित्व में बदलाव लाने की जरूरत है. दरअसल, स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में दौड़ना ये बताता है कि आप अपने जीवन में बुरे दौर से गुजर रहे हैं और आप इसका सामना करने के बजाए परिस्थितियों से दूर भागने की कोशिश कर रहे हैं. असल जिंदगी में हमें ऐसे कई लोग देखने को मिल जाते हैं जो मुश्किल समय से बचने या फिर मुसीबतों में घिरने के बाद उसका सामना करने के बजाए पीछा छुड़ाकर निकल लेते हैं. सपने में खुद को उंचाई से गिरना अगर आप खुद को सपने में खुद को ऊंचाई से गिरता हुआ पाएं या गिरने के बाद आपका मन दुखी महसूस हो तो इसका तलब है कि आप पर कोई परेशानी आने वाली है। वहीं अगर आप ऊंचाई से गिर कर खुश होते सपने में नजर आएं तो इसका मतलब है कि आप किसी विपदा से बाहर आने वाले हैं। सपने में खुद को भागते हुए देखना सपने में आप अगर किसी से बच कर भाग रहे या किसी अन्य कारण से भागते नजर आएं तो इसका मतलब है आप अपनी परेशानियों से भाग रहे हैं। किसी से बचकर भागने का मतलब है कि आपके पीछे कोई षडयंत्र कर रहा है। ऐसे में आपको सचेत रहने की जरूरत है। भागना आपके आत्मविश्वास की कमी को भी दर्शाता है। सपने में खुद को हवा में उड़ना इस सपने खुद को आप हवा में उड़ता पाएं तो समझ लें कि आपको कोई खुशियां मिलने वाली हैं। आप अपनी चल रहे परेशानी से मुक्त होंगे। सपने में छत गिरते देखना यदि आपको सपने में छत गिरते हुए दिखाई दे तो इससे आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस सपने का मतलब है कि आपको धन की प्राप्ति होने वाली है। सपने में नदी में गिरते देखना यदि आप खुद को किसी नदी में गिरता हुआ पाएं तो समझ लें कि ये एक अच्छा संकेत नहीं है। यह सपना आपके किसी मुसिबत में पड़ने का संकेत देता है। ऐसे में आपको हर कार्य बहुत ही सजगता के साथ करना चाहिए। सपने में रोते देखना सपने में खुद को रोते हुए या चिल्लाते हुए देखना यह बताता है कि आप अपने अतीत से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसका एक दूसरा मतलब यह है कि आपको बेचैनी, दुख, पीड़ा, अवसाद जैसी भावनाएं घेरे हुए हैं। सपनों के मतलब को समझने के बाद आपको परेशानी से निकलने और मुकाबला करने की तैयारी करनी चाहिए।

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Sankata Mata Aarti:संकटा माता आरती

Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक, मानसिक, और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। संकटा माता को संकटों को हरने वाली देवी माना जाता है। उनकी आराधना से भक्त को जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने के फायदे 1. Sankata Mata Aarti संकटों और बाधाओं से मुक्ति 2. सुख-समृद्धि में वृद्धि 3. स्वास्थ्य लाभ 4. भय और नकारात्मकता का नाश 5. परिवारिक सुख और सामंजस्य 6. आध्यात्मिक जागरूकता 7. मनोकामनाओं की पूर्ति 8. शत्रुओं पर विजय 9. धार्मिक पुण्य का संचय आरती का समय और विधि सारांश Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने से व्यक्ति को न केवल संकटों से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का आगमन भी होता है। माता की कृपा से भक्त का जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है और वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। Sankata Mata Aarti:संकटा माता आरती जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।शरण पड़ी हूँ तेरी माता,अरज सुनहूं अब मेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ नहिं कोउ तुम समान जग दाता,सुर-नर-मुनि सब टेरी ।कष्ट निवारण करहु हमारा,लावहु तनिक न देरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ काम-क्रोध अरु लोभन के वशपापहि किया घनेरी ।सो अपराधन उर में आनहु,छमहु भूल बहु मेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ हरहु सकल सन्ताप हृदय का,ममता मोह निबेरी ।सिंहासन पर आज बिराजें,चंवर ढ़ुरै सिर छत्र-छतेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ खप्पर, खड्ग हाथ में धारे,वह शोभा नहिं कहत बनेरी ॥ब्रह्मादिक सुर पार न पाये,हारि थके हिय हेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ असुरन्ह का वध किन्हा,प्रकटेउ अमत दिलेरी ।संतन को सुख दियो सदा ही,टेर सुनत नहिं कियो अबेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ गावत गुण-गुण निज हो तेरी,बजत दुंदुभी भेरी ।अस निज जानि शरण में आयऊं,टेहि कर फल नहीं कहत बनेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।भव बंधन में सो नहिं आवै,निशदिन ध्यान धरीरी ॥ जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।शरण पड़ी हूँ तेरी माता,अरज सुनहूं अब मेरी ॥

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Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती

Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने के अनेक आध्यात्मिक और जीवनशैली से जुड़े लाभ हैं। एकादशी का व्रत और आरती विष्णु भगवान और उनकी अवतार स्वरूपा माता एकादशी को समर्पित होती है। यह भक्ति, ध्यान, और अनुशासन का प्रतीक है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने के लाभ 1. पापों का नाश 2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 3. आध्यात्मिक बल और मानसिक शांति 4. सांसारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि 5. भक्ति और विश्वास में वृद्धि 6. स्वास्थ्य में सुधार 7. मोक्ष और पुनर्जन्म से मुक्ति 8. धार्मिक और पारिवारिक एकता 9. विष्णु भगवान की कृपा आरती का समय और विधि सारांश Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने से मन, शरीर, और आत्मा को शांति मिलती है। यह आरती व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥ॐ जय एकादशी…॥ तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥ॐ जय एकादशी…॥ पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥ॐ जय एकादशी…॥ नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥ॐ जय एकादशी…॥ विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥ॐ जय एकादशी…॥ चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥ॐ जय एकादशी…॥ शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥ॐ जय एकादशी…॥ योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥ॐ जय एकादशी…॥ अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥ॐ जय एकादशी…॥ पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥ॐ जय एकादशी…॥ देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥ॐ जय एकादशी…॥ परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥ॐ जय एकादशी…॥

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