Shri Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान आरती
Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। महावीर भगवान जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं और उनकी आराधना आत्मिक शांति, संयम, और जीवन में सादगी लाने में सहायक मानी जाती है। आरती के निम्नलिखित लाभ हैं: 1. आत्मिक शांति और ध्यान में वृद्धि 2. संयम और सहनशीलता का विकास 3. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 4. धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव 5. पापों का नाश और पुण्य का संचय 6. अहिंसा और सत्य की प्रेरणा Mahaveer Bhagwan Arti 7. Mahaveer Bhagwan Arti रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ 8. परिवार में शांति और सुख-समृद्धि आरती का समय और विधि: श्री महावीर भगवान की आरती से व्यक्ति का जीवन अध्यात्म, अहिंसा और सत्य की राह पर चलता है, जो जीवन को पूर्णता और समृद्धि प्रदान करता है। Shri Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान आरती जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे,त्रिशला के जाये ।कुण्डलपुर अवतार लिया,प्रभु सुर नर हर्षाये ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ देव इन्द्र जन्माभिषेक कर,उर प्रमोद भरिया ।रुप आपका लख नहिं पाये,सहस आंख धरिया ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये,घर में बाल यती ।राजपाट ऐश्वर्य छोड़ सब,ममता मोह हती ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ बारह वर्ष छद्मावस्था में,आतम ध्यान किया।घाति-कर्म चूर-चूर,प्रभु केवल ज्ञान लिया ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ पावापुर के बीच सरोवर,आकर योग कसे ।हने अघातिया कर्म शत्रु सब,शिवपुर जाय बसे ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ भूमंडल के चांदनपुर में,मंदिर मध्य लसे ।शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी,दर्शन पाप नसे ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ करुणासागर करुणा कीजे,आकर शरण गही।दीन दयाला जगप्रतिपाला,आनन्द भरण तु ही ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥ जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥
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