January 2024

Makar Sankranti 2024:वर्ष 2024 में कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति, जानिए शुभ मुहूर्त और महत्व

मकर संक्रांति भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पूरे भारत और नेपाल में भिन्न रूपों में मनाया जाता है। पौष मास में जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है।मकर संक्रांति Makar Sankranti के दिन कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। Makar Sankranti 2024 Dateवर्ष 2024 में मकर संक्रांति 15 जनवरी 2024 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव प्रातः 02 बजकर 54 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा। Makar Sankrantiमकर संक्रांति पुण्यकाल – 07 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक मकर संक्रांति महा पुण्यकाल – 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 06 मिनट तक दूर होते हैं शनि दोषमकर संक्रांति पर भगवान सूर्य की उपासना, दान, गंगा स्नान और शनिदेव की पूजा करने से सूर्य और शनि से संबंधित तमाम तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। दरअसर सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं और शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं,उसमें सूर्य के प्रवेश मात्र से शनि का प्रभाव क्षीण हो जाता है। अयोध्या का पौराणिक महत्व: सप्तपुरियों में से एक है अयोध्या, जानिए किसने बसाई यह नगरी Makar Sankranti मकर संक्रांति का महत्व मकर संक्रांति के दिन कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। मकर संक्रांति Makar Sankranti का धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। हिंदू धर्म में सूर्य को देवता माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में प्रकाश और ज्ञान का उदय होता है। मकर संक्रांति की पौराणिक मान्यताएं मकर संक्रांति (Makar Sankranti)के दिन ही भीष्म पितामह महाभारत युद्ध समाप्ति के बाद सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में मकर संक्रान्ति को प्राण त्यागे थे। मकर संक्रांति पर देवी यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी और भगीरथ के पूर्वज महाराज सगर के पुत्रों को मुक्ति प्रदान की थी। मकर संक्रांति पर उपायमकर संक्रांति पर कुछ उपाय करने से कष्टों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए ऐसा करने से दस हजार गौ दान का फल प्राप्त होता है। इस दिन ऊनी कपड़े, कम्बल, तिल और गुड़ से बने व्यंजन और खिचड़ी दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। 

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Dream Interpretation:जब आप सपने में किसी को मरते हुए देखते हैं तो इसका क्या मतलब है?

सपने Dream में किसी को मरते हुए देखना अक्सर परिवर्तन या समाप्ति का प्रतीक होता है। यह किसी पुराने रिश्ते, स्थिति या जीवन के चरण के अंत का संकेत दे सकता है। यह नए अवसरों या शुरुआत के लिए भी एक संकेत हो सकता है। यदि आप सपने में किसी को मरते हुए देख रहे हैं, तो यह संभवतः आपकी भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य स्थिति को दर्शाता है। किसी के मरने का सपना देखने के आपके जीवन की स्थिति के आधार पर कई तरह के अर्थ हो सकते हैं, ये सपने परेशान करने वाले हो सकते हैं, लेकिन अंततः भविष्य में दिशा और संभावित विकास में सकारात्मक बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। Dream :सपने में जीवित व्यक्ति को मृत अवस्था में देखना परिवर्तन का संकेत  यदि आपको ऐसा कोई भी सपना दिखाई देता है तो समझें कि जल्द ही आप किसी बड़े परवर्तन से गुजरने वाले हैं। दरअसल यह सपना (Dream)इसलिए दिखाई दे सकता है क्योंकि आप किसी तरह के बदलाब की उम्मीद रखते हैं और आप उस बदलाव को हासिल करने में असमर्थ हैं। यह सपना उस व्यक्ति से जुड़ा हो सकता है जिसे आप सपने में मृत अवस्था में देख रहे हैं। आप जिस व्यक्ति के बारे में सपना देख रहे हैं ये उसके जीवन के लिए परिवर्तन का प्रतीक हो सकता है। यह सपना जीवन के एक चरण के अंत और दूसरे की शुरुआत का प्रतिनिधित्व कर सकता है। Dream:सपने में जीवित व्यक्ति को मृत देखना किसी बीमारी का संकेत  ऐसा माना जाता है कि अगर आप सपने में किसी जीवित व्यक्ति को मृत अवस्था में देखते हैं तो आपके घर में किसी बीमारी का आगमन हो सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि उस व्यक्ति को बीमारी आए जो आपको सपने में दिख रहा है, बल्कि ये किसी भी करीबी की सेहत से जुड़ा हुआ हो सकता है। ऐसे सपने का मतलब है कि आपको अपनी सेहत का और करीबियों की भी सेहत का ध्यान रखने की जरूरत है।  Dream:सपने में जीवित व्यक्ति को मृत देखना उस व्यक्ति से दूरी का संकेत  सपने में किसी जीवित व्यक्ति को मृत के रूप में देखना उस व्यक्ति से दूरी या भावनात्मक अलगाव की भावना का प्रतीक हो सकता है। यह इस बात का संकेत भी हो सकता है की आपके रिश्ते जल्द ही उस व्यक्ति के साथ बिगड़ सकते हैं। ऐसा हमेशा जरूरी नहीं है, लेकिन कुछ लोगों के लिए इस सपने का मतलब किसी करीबी से अलगाव हो सकता है।  Sapne Me Bandar Dekhna: क्या आपको भी सपने में बार-बार दिखाई देते हैं बंदर ? Dream:सपने में जीवित व्यक्ति को मृत देखना किसी बड़े नुकसान का डर यदि आप ऐसा कोई भी सपना देखते हैं तो ये आपके किसी नुकसान के दर को दिखाता है। (सपने में इन 5 चीजों का दिखाई देना माना जाता है बेहद शुभ, जानिए हर एक का मतलब )ऐसे सपने का मतलब यह है कि आपको किसी बड़े नुकसान से गुजरना पड़ सकता है। यह आपके भीतर के भय का प्रतीक हो सकता है। ऐसा संभव है कि आप अपने किसी करीबी की सेहत के लिए इतने ज्यादा चिंतित हैं कि आपको सपने में वह मृत अवस्था में दिखाई दे रहा है। हालांकि यह आपकी कल्पना मात्र है जो ऐसे सपने का कारण बनती है।  Dream:सपने में स्वयं को मृत अवस्था में देखना देता है ये संकेत यदि आपको कोई ऐसा सपना दिखाई देता है जिसमें आप खुद को ही मृत अवस्था  में देख रहे हैं तो ये आपके मानसिक तनाव की वजह से भी हो सकता है। ऐसा भी संभव है कि आपको वास्तविकता में अपनी मृत्यु का भय इतना ज्यादा है कि सपने में आप ऐसी चीजें देख रहे हैं। ये सपना आपकी बढती हुई जिम्मेदारियों का भी संकेत हो सकता है। असल जीवन में आप अपनी जिम्मेदारियों से इतना घिरे हुए हैं कि आपको इस बात का डर सता रहा है कि आप जिम्मेदारियां निभाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं और इसी वजह से ऐसे सपने दिखाई दे रहे हैं।  कुछ संस्कृतियों का मानना है कि ऐसे सपने आपके आध्यात्मिक क्षेत्र की झलक दिखा सकते हैं। किसी जीवित व्यक्ति को मृत अवस्था में देखना आध्यात्मिक दुनिया का एक ऐसा संकेत हो सकता है कि आपको ईश्वर से जुड़ने की जरूरत है।   सपने हमेशा आपके वास्तविक जीवन से संबंध रखें ऐसा जरूरी नहीं होता है, लेकिन कुछ सपने ऐसे हो सकते हैं जो आपके लिए भविष्य का संकेत देते हों। 

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Lohri 2024: लोहड़ी के दिन क्या करें और क्या न करें? यहां जानें

लोहड़ी एक लोकप्रिय हिंदू त्योहार है जो पंजाबी समुदाय द्वारा मनाया जाता है। यह त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है। लोहड़ी का अर्थ है “लौ”। इस दिन लोग एकत्र होकर आग जलाते हैं और उसमें गेहूं की बालियां, रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की, गुड़ आदि सामग्री अर्पित करते हैं। इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य नई फसल की खुशी मनाना और भगवान सूर्य का आभार व्यक्त करना है। लोहड़ी के शुभ अवसर पर लोग एक-दूसरे को मिठाइयां देकर लोहड़ी (Lohri) की शुभकामनाएं देते हैं। यह पर्व नए फसल के तैयार होने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन शाम को सब लोग एक जगह इकट्ठा होकर आग जलाते हैं। इस अलाव में अग्नि में गेहूं की बालियां रेवड़ी मूंगफली खील चिक्की गुड़ से निर्मित चीजें अर्पित करते हैं। Lohri 2024 लोहड़ी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर नए वस्त्र धारण करें। फिर घर के आंगन में अग्नि जलाकर उसमें गेहूं की बालियां, रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की, गुड़ आदि सामग्री अर्पित करें। अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करें और भगवान सूर्य की आराधना करें। हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी Lohri का पर्व मनाया जाता है। इस त्योहार को पंजाबी समुदाय के लोग बेहद उत्साह के साथ मनाते हैं। इस शुभ अवसर पर लोग एक-दूसरे को मिठाइयां देकर लोहड़ी की शुभकामनाएं देते हैं। इस दिन कुछ कार्यों को करने की सख्त मनाही है, जिनको करने से व्यक्ति को जीवन में परेशानियों को सामना करना पड़ता है। चलिए आपको बताते हैं लोहड़ी के दिन क्या करें और क्या न करें। लोहड़ी के दिन क्या करें लोहड़ी के अवसर पर गरीब कन्याओं को रेवडी खिलानी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से अन्न की कमी नहीं होती है। Calendar 2024 : साल 2024 के व्रत-त्योहार की तारीखें, होली से लेकर रामनवमी, नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा तक सनातन धर्म में अग्नि शुभता और पवित्रता की प्रतीक है। लोहड़ी के दिन अग्नि देव की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने के लिए लाल रंग के कपड़े में गेहूं बांधकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दें। माना जाता है कि ऐसा करने से सदैव मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। लोहड़ी की पूजा करें। अग्नि को प्रणाम करें। गरीबों को दान दें। गरीब कन्याओं को रेवड़ी खिलाएं। एक-दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएं दें। Lohri 2024: लोहड़ी के दिन क्या न करें लोहड़ी के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। काले वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए। लोहड़ी में अर्पित करने वाले चीजें जैसे कि मूंगफली और रेवड़ी आदि की पहले पूजा करें। लोहड़ी Lohri की अग्नि में झूठी चीजें अर्पित करनी चाहिए। लहसुन, प्याज और मीट का सेवन न करें। काले रंग के कपड़े न पहनें। लड़ाई-झगड़ा न करें। झूठ न बोलें। Lohri 2024:लोहड़ी की पूजा: लोहड़ी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर नए वस्त्र धारण करें। फिर घर के आंगन में अग्नि जलाकर उसमें गेहूं की बालियां, रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की, गुड़ आदि सामग्री अर्पित करें। अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करें और भगवान सूर्य की आराधना करें। डिसक्लेमर: ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’

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Ayodhya:अयोध्या का पौराणिक महत्व: सप्तपुरियों में से एक है अयोध्या, जानिए किसने बसाई यह नगरी

अयोध्या (Ayodhya)का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह माना जाता है कि भगवान राम (ram bhagwan) का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। रामायण, हिंदू धर्म का एक प्रमुख महाकाव्य, अयोध्या में भगवान राम ram की कहानी को बताता है। राम मंदिर के शिलान्यास का हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए बहुत महत्व है। यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा, जो हिंदू धर्म के लिए एक नए युग की शुरुआत को चिह्नित करेगा। Ayodhya अयोध्या के धार्मिक महत्व अयोध्या भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र शहरों में से एक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह भगवान राम, हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक का जन्मस्थान है। अयोध्या को सप्तपुरियों में से एक माना जाता है, जो सात पवित्र शहर हैं। ये शहर मोक्ष का मार्ग प्रदान करते हैं। अयोध्या में कई महत्वपूर्ण मंदिर और धार्मिक स्थल हैं। इनमें से कुछ सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में राम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी मंदिर और लक्ष्मण मंदिर शामिल हैं। Ayodhya अयोध्या की स्थापना किसने की ?रामायण के अनुसार सरयू नदी के किनारे बसा अयोध्या Ayodhya नगर सूर्य पुत्र वैवस्वत मनु के द्वारा स्थापना की गई थी। वैवस्वत मनु का जन्म लगभग 6673 ईसा पूर्व में हुआ था। मनु ब्रह्रााजी के पौत्र कश्यप की संतान थे। बाद में मनु के 10 पुत्र हुए जिनमें- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यंत, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध थे। इक्ष्वाकु कुल में कई प्रतापी राजा, मुनि और भगवान हुए है। इक्ष्वाकु कुल में भगवान राम का जन्म हुआ था। Ayodhya अयोध्या की स्थापना कैसे हुई ?  स्कंद पुराण के अनुसार जिस तरह से काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है उसी प्रकार अयोध्या भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र पर विराजमान है। पौराणिक कथा के अनुसार मनु ने ब्रह्रााजी से अपने लिए एक नगर के निर्माण की बात को लेकर उनके पास पहुंचे तब ब्रह्रााजी जी उन्हें भगवान विष्णु के पास भेजा। तब भगवान विष्णु ने मनु के लिए साकेतधाम का चयन किया। Shree Ram Bhagwan Story:भगवान राम के बारे में सुनी-अनसुनी 10 कथाएं साकेतधाम के चयन के बाद ब्रह्रााजी और मनु के साथ विष्णुजी ने देवताओं के शिल्पकार विश्वकर्मा को भेज दिया। विष्णु जी ने महर्षि वशिष्ठ को भी भेजा। वशिष्ठ मुनि ने सरयू नदी के किनारे लीला भूमि का चयन किया। भूमि चयन के बाद देवशिल्पी नगर के निर्माण की प्रकिया आरंभ की। रामायण में अयोध्या (Ayodhya) का जिक्र कौशल जनपद के रूप में भी किया गया। भगवान राम ram bhagwan के जन्म के समय इस नगर का नाम अवध के रूप जाना जाता था। अयोध्या (Ayodhya) का एक नाम साकेत भी है। अयोध्या के अलावा कपिलवस्तु, वैशाली, मिथिला और कौशल में इक्ष्वाकु वंश के शासकों ने राजपाठ चलाया।   सप्तपुरी हिंदू धर्म में सात पवित्र शहरों को संदर्भित करता है। इन शहरों को मोक्ष प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सप्तपुरियों का उल्लेख कई हिंदू ग्रंथों में मिलता है, जिनमें ऋग्वेद, पुराण और रामायण शामिल हैं। सभी प्राचीन सप्तपुरियां और उनका महत्वमथुरामथुरा यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे। मथुरा का काफी धार्मिक महत्व है।उज्जैनउज्जैन को उज्जयिनी और अवंतिका के नाम से भी जाना जाता है। यह नगर शिप्रा नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां पर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्व स्थित है और प्रत्येक 12 वर्ष में कुंभ लगता है।काशीहिंदू धर्म में काशी का विशेष महत्व है। यह भगवान शिव की नगरी है। यह गंगा नदी के किनारे पर बसा है। यह सप्तपुरियों में से एक है। भोले भंडारी की इस नगरी में काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित है।हरिद्वारहरिद्वार भी एक प्रमुख धार्मिक नगरी है। हरिद्वार भी सप्तपुरियों में एक है। यह पर भी प्रयाग की भांति कुंभ मेला लगता है।द्वारिका धामद्वारिका धाम गुजरात में स्थित है। यह भगवान श्रीकृष्ण का धाम है। यह नगर समुद्र के किनारे स्थित है। द्वारिका धाम भी सप्तपुरियों में एक है।कांचीपुरमकांचीपुरम का संबंध देवी पार्वती से है। यह वेगवदी नदी के किनारे बसा हुआ है। कांचीपुरम में बहुत ही धार्मिक स्थल और मंदिर है। यह भी सप्तपुरियों में से एक है।Ayodhya अयोध्या अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है। यह धार्मिक नगर सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। अयोध्या नगरी की स्थापना राजा मनु ने किया।

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Vishvamitr:विश्वामित्र ने अपने ही पुत्रों को चांडाल बनने का श्राप क्यों दिया, उनसे कौनसी भूल हुई ?

इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। हमें अपने स्वार्थ को दूसरों के ऊपर नहीं रखना चाहिए। दूसरों की मदद करने से हमें पुण्य प्राप्त होता है और हमारा जीवन सफल होता है। विश्वामित्र Vishvamitr के पुत्रों ने अपने स्वार्थ के कारण शुनःशेप की मदद करने से इंकार कर दिया। इससे उन्हें बुरा परिणाम भुगतना पड़ा। उन्हें कुत्ते का मांस खाने वाली मुष्टिक आदि जातियों में जन्म लेकर पूरे एक हजार वर्षां तक इस पृथ्वी पर रहना पड़ा। ऋचीक मुनि के मझले पुत्र ने खुद को राजा अम्बरीष को यज्ञ बलि के पुरुष के रूप में बेच दिया। महायशस्वी राजा अम्बरीष शुनःशेप को साथ लेकर दोपहर के समय पुष्कर तीर्थ में आये और वहाँ विश्राम करने लगे। जब वे विश्राम करने लगे, उस समय महायशस्वी शुनःशेप ज्येष्ठ पुष्कर में आकर ऋषियों के साथ तपस्या करते हुए अपने मामा विश्वामित्र से मिला। वह अत्यन्त आतुर एवं दीन हो रहा था। उसके मुख पर विषाद छा गया था। वह भूख-प्यास और परिश्रम से दीन हो मुनि की गोद में गिर पड़ा। उसने कहा, न मेरे माता हैं, न पिता, फिर भाई-बन्धु कहाँ से हो सकते हैं? आप ही मेरी रक्षा करें। आप सबके रक्षक तथा अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति कराने वाले हैं। ये राजा अम्बरीष कृतार्थ हो जायँ और मैं भी विकार रहित दीर्घायु होकर सर्वोत्तम तपस्या करके स्वर्गलोक प्राप्त कर लूँ, कोई ऐसी कृपा आप करिये। जैसे पिता अपने पुत्र की रक्षा करता है, उसी प्रकार आप मुझे इस पापमूलक विपत्ति से बचाइये। शुनःशेप की वह बात सुनकर महातपस्वी विश्वामित्र Vishvamitr ने उसे सांत्वना दी और अपने पुत्रों से इस प्रकार के वचन कहे। प्राचीन मंदिर Ayodhya शुभ की अभिलाषा रखने वाले पिता जिस पारलौकिक हित के उद्देश्य से पुत्रों को जन्म देते हैं, उसकी पूर्ति का यह समय आ गया है। यह बालक मुनि कुमार मुझसे अपनी रक्षा चाहता है, तुम लोग अपना जीवनमात्र देकर इसका प्रिय करो। तुम सब-के-सब पुण्यात्मा और धर्मपरायण हो, अतः राजा के यज्ञ में पशु बनकर अग्निदेव को तृप्ति प्रदान करो। इससे शुनःशेप सनाथ होगा, राजा का यज्ञ भी बिना किसी विघ्न-बाधा के पूर्ण हो जायगा, देवता भी तृप्त होंगे और तुम्हारे द्वारा मेरी आज्ञा का पालन भी हो जायगा। विश्वामित्र मुनि का वह वचन सुनकर उनके मधुच्छन्द आदि पुत्र अभिमान और अवहेलनापूर्वक वचन कहने लगे। आप अपने बहुत-से पुत्रों को त्यागकर दूसरे के एक पुत्र की रक्षा कैसे करते हैं? जैसे पवित्र भोजन में कुत्ते का मांस पड़ जाय तो वह अग्राह्य हो जाता है, उसी प्रकार जहाँ अपने पुत्रों की रक्षा आवश्यक हो, वहाँ दूसरे के पुत्र की रक्षा के कार्य को हम अकर्त्तव्य के रूप में देखते है। अपने पुत्रों का ऐसा वचन सुनकर विश्वामित्र (Vishvamitr)क्रोध से लाल हो गए और उन्हें शाप दिया कि मेरी आज्ञा का उल्लङ्घन करके जो यह दारुण एवं रोमाञ्चकारी बात तुमने मुँह से निकाली है, इस अपराध के कारण तुम सब लोग भी वसिष्ठ के पुत्रों की भाँति कुत्ते का मांस खाने वाली मुष्टिक आदि जातियों में जन्म लेकर पूरे एक हजार वर्षां तक इस पृथ्वी पर रहोगे।

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Calendar 2024 : साल 2024 के व्रत-त्योहार की तारीखें, होली से लेकर रामनवमी, नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा तक

जनवरी, 2024 को नए साल की शुरुआत हो गई है। अंग्रेजी कैलेंडर (Calendar 2024) के अनुसार, साल का पहला महीना जनवरी से शुरू होता है। इस बार नया साल 2024 सोमवार से शुरू हो रहा है। यह दिन भगवान शिवजी का प्रिय वार है। साथ ही इस बार नए साल के पहले दिन आयुष्मान योग का भी निर्माण हुआ है। आयुष्मान योग को बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। Calendar 2024 हिंदी कैलेंडर के अनुसार हिंदी कैलेंडर के अनुसार, नए साल की शुरुआत पौष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और मघा नक्षत्र में होगी। इस दिन सुबह 08:36 मिनट तक मघा नक्षत्र है और फिर बाद पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। नए साल के शुभ योग नए साल के पहले दिन बहुत ही शुभ और मंगलकारी आयुष्मान योग भी बनेगा। आयुष्मान योग को बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में शिवजी की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। Calendar 2024: हिंदू कैलेंडर 2024, जानें सालभर के सभी  व्रत-त्योहारों की लिस्ट नए साल का इंतजार सभी को नए साल के आने का बेसब्री से इंतजार रहता है। साथ ही हर कोई साल में आने वाले प्रमुख व्रत-त्योहार की तारीख को लेकर उत्सुक रहता है। Festivals And Holidays List In 2024: साल 2024 के पहले महीने में सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। फिर 14 फरवरी को बसंत पंचमी, 08 मार्च को महाशिवरात्रि, 25 मार्च को होली, 19 अगस्त को रक्षाबंधन और 01 नवंबर 2024 को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं साल 2024 में जनवरी से लेकर दिसंबर के महीने में कब-कब और कौन-कौन से व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे। साल 2024 के प्रमुख त्योहार और तारीखें Calendar 2024 15 जनवरी  मकर संक्रंति  14 फरवरी बसंत पंचमी   08 मार्च महाशिवरात्रि   25 मार्च   होली 09 अप्रैल चैत्र नवरात्रि                 17 अप्रैल राम नवमी                   10 मई अक्षय तृतीया                 09 अगस्त नाग पंचमी                     19 अगस्त रक्षा बंधन                     26 अगस्त जन्माष्टमी                     07 सितंबर गणेश चतुर्थी                 03 अक्तूबर शरद नवरात्रि             12 अक्तूबर दशहरा                       20 अक्तूबर करवा चौथ                 29 अक्तूबर धनतेरस                     01 नवंबर दिवाली                       07 नवंबर छठ पूजा       साल के पहले महीने यानी जनवरी में मकर संक्रांति, पोंगल और सूर्य के उत्तरायण का त्योहार मनाया जाएगा। फरवरी माह के शुरुआत में षटतिला एकादशी फिर 14 फरवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का बड़ा त्योहार मनाया जाएगा। मार्च के महीने में महाशिवरात्रि फिर 25 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार अप्रैल माह में चैत्र नवरात्रि और राम नवमी जैसे बड़े त्योहार आएंगे। मई माह में वैशाख अमावस्या और अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। जून के महीने में निर्जला एकादशी का त्योहार मनाया जाएगा। इसके अलावा इस माह ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत भी रखा जाएगा। जुलाई के महीने विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसके अलावा चार माह के लिए भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी पर योग निद्रा में चले जाएंगे। अगस्त माह में नाग पंचमी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और हरियाली तीज जैसे प्रमुख त्योहार होंगे। सितंबर में गणेश चतुर्थी और ओणम जैसे प्रमुख त्योहार मनाएंं जाएंगे। अक्तूबर के महीने में शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाएंगे। 14 अक्तूबर को दशहरा, 20 अक्तूबर को करवा चौथ और 29 अक्तूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। साल 2024 में दिवाली का त्योहार 01 नवंबर को मनाया जाएगा और 7 नवंबर को सूर्य आराधना का महापर्व छठ पूजा होगी। साल के आखिरी महीने यानी दिसंबर में मोक्षदा एकादशी और क्रिसमस का त्योहार मनाया जाएगा। Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यह बताना जरूरी है कि Karmasu.in किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. /

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Sapna:इस वजह से आपके सपने में आता हैं अनजान चेहरा

सपनों (Sapna) में अनजान चेहरे देखना एक आम बात है। कई बार, ये चेहरे हमारे जीवन में किसी व्यक्ति का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जिसे हमने कभी नहीं देखा है। ये चेहरे हमारे अवचेतन मन में दबे हुए विचारों, भावनाओं या अनुभवों का भी प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। हमारे अवचेतन मन में दबे हुए विचारों, भावनाओं या अनुभवों का प्रतिनिधित्व: सपने sapna अक्सर हमारे अवचेतन मन की अभिव्यक्ति होते हैं। अनजान चेहरे हमारे अवचेतन मन में दबे हुए विचारों, भावनाओं या अनुभवों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर हम किसी चीज से डरते हैं, तो हमारा अवचेतन मन उस डर का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक अनजान चेहरे का सपना देख सकता है। Sapne Me Bandar Dekhna: क्या आपको भी सपने में बार-बार दिखाई देते हैं बंदर ? सपनों की दुनिया में सब कुछ हकीकत लगता है। सपनों के कई जाने पहचाने चेहरे हमारे आस पास रहते हैं, लेकिन कई बार हमारे सपने में कुछ ऐसे चेहरे दिखाई दे जाते हैं, जिन्हें कभी देखा तक नहीं। कभी न कभी आपके सपने में भी कोई अनजाना चेहरा जरूर आया होगा। जानिए आखिर सपने में अनजान चेहरे क्यों दिखाई देते हैं। कई बार सपनों Sapna में अनजाने चेहरे दिखते हैं, जिनसे असल जिंदगी में ना कभी मिले और कही भीड़ में उन्हें देखा। फिर भी सपनों में आ जाते हैं। कभी दोस्त बनकर तो कभी दुश्मन बनकर। अगर आपके सपनों में भी अनजाने चेहरे आ रहे हैं। मतलब जब आप सो रहे हैं और सपने में अनजान चेहरा देख रहे हैं तो कोई शक्ति उस समय आप पर नजर रखें हुए हैं। उस शक्ति के प्रभाव से सपनों में आपकी मुलाकात किसी अनजान व्यक्ति से होती हैं। ये हमारा नहीं बल्कि पैरासाइकोलॉस्टि हेलेन टेलर का मानना है। उनके अनुसार किसी शक्ति के प्रभाव के कारण आपको सपने में अनजान  चेहरे का दिखते हैं। अच्छी शक्तियां आपको होने वाली घटना का संकेत देती है या आपसे कुछ कहने की कोशिश करती हैं। इसके अलावा अगर आप किसी अनजान व्यक्ति से सपने में मिलते हैं तो इसका एक मतलब ये भी है कि आप खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं और आपको किसी की जरूरत है।

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Saphala Ekadashi 2024: सफला एकादशी व्रत 7 जनवरी को, श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का जाप

सफला एकादशी Saphala Ekadashi हिंदू धर्म में एक प्रमुख व्रत है। यह व्रत पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की जाती है। हर माह एकादशी व्रत को पूरी आस्था और विश्वास के रखा जाता है। एकादशी व्रत के दौरान भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी कहा जाता है और साल 2024 की पहली एकादशी 7 जनवरी को है। इस दिन यदि पूरी आस्था के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है तो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। Saphala Ekadashi सफला एकादशी पर पूजा का मुहूर्त एकादशी सफला 7 जनवरी को मनाई जाएगी। पंचांग के मुताबिक, पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 7 जनवरी को 12:41 AM पर होगा और इस तिथि का समापन 08 जनवरी सोमवार को 12:46 AM पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार व्रत भी 7 जनवरी को ही रखा जाएगा। 7 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07:15 बजे से रात 10:03 बजे तक है और इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ होगा। व्रत के पारण का समय 8 जनवरी को सुबह 07:15 बजे से सुबह 09:20 बजे के बीच रहेगा। Mokshada Ekadashi :क्यों करते हैं मोक्षदा एकादशी व्रत? जानिए व्रत कथा और इसका महत्व Saphala Ekadashi 2024 सफला एकादशी पर भोग में लगाएं ये चीजें सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की मूर्ति को पीले वस्त्र अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा पूजा के दौरान हल्दी, चंदन, दीप, धूप अर्पित करना चाहिए। प्रसाद में तुलसी की पत्तियां जरूर चढ़ाना चाहिए। भगवान विष्णु को खीर, फल और मिठाई का भोग लगाना चाहिए। इन मंत्रों का करें जाप त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।। Saphala Ekadashi 2024:सफला एकादशी का महत्व धार्मिक मत है कि सफला एकादशी का व्रत करने से कार्यों में सफलता (Saphala Ekadashi) मिलती है और इंसान को जीवन के दुखों से छुटकारा मिलता है। एकादशी व्रत करने से मृत्यु के बाद मोक्ष और जीवन में सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।इसके अलावा साधक की मनचाही मनोकामना पूरी होती है। सफला व्रत की कथा पढ़ने या सुनने से पूजा सफल होती है। Saphala Ekadashi 2024:सफला एकादशी की पूजा विधि सफला एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी, बेलपत्र, फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करना चाहिए। पूजा के बाद भगवान विष्णु की आरती करनी चाहिए। इस दिन व्रती को एक समय भोजन करना चाहिए। शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करने के बाद पारण करना चाहिए। Saphala Ekadashi सफला एकादशी का व्रत करने के लाभ सफला एकादशी का व्रत करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं: Saphala Ekadashi सफला एकादशी की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय में महिष्मान नाम का एक राजा था। उसके चार पुत्र थे। उनमें से लुम्पक नाम का पुत्र बहुत ही दुष्ट था। वह भगवान, ब्राह्मण और वैष्णवों की निंदा किया करता था। एक दिन राजा महिष्मान ने लुम्पक को समझाने का प्रयास किया, लेकिन लुम्पक नहीं माना। एक दिन राजा महिष्मान ने युधिष्ठिर से लुम्पक के उद्धार का उपाय पूछा। युधिष्ठिर ने कहा कि लुम्पक को सफला एकादशी का व्रत करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से लुम्पक के सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और वह भगवान का भक्त बन जाएगा। राजा महिष्मान ने लुम्पक को सफला एकादशी Saphala Ekadashi का व्रत करने के लिए कहा। लुम्पक ने व्रत करने की सहमति दे दी। व्रत के दिन लुम्पक ने विधिवत पूजा की और भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने लुम्पक की प्रार्थना सुनी और उसे पापमुक्त कर दिया। लुम्पक भगवान का भक्त बन गया और उसने अपना जीवन धर्म-कर्म में व्यतीत किया।

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Sapne Me Bandar Dekhna: क्या आपको भी सपने में बार-बार दिखाई देते हैं बंदर ?

Sapne me Bandar Dekhna:अक्सर बुद्धि, चालाकी और अनुकरणशीलता के साथ जुड़े होते हैं। इसलिए, सपने Sapne में बार-बार बंदर देखना यह संकेत दे सकता है कि आपको अपने अवचेतन मन से एक संदेश मिल रहा है। यह संदेश कुछ ऐसा हो सकता है जैसे कि आपको अपने आसपास की दुनिया के बारे में अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है, या आपको अपने विचारों और कार्यों पर अधिक सावधानी से विचार करने की आवश्यकता है। हिंदू धर्म में किसी भी सपने को देखने के पीछे एक कारण माना जाता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार ये सपने हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं के होने का संकेत देते हैं. आपके सपने में अक्सर बंदर दिखाई देते हैं तो जान लें कि सपने में बंदर का दिखना शुभ है या अशुभ. सपने देखना महज संयोग नहीं होता है. सपने हमें भविष्य के अच्छे बुरे संकेतों के बारे में बताते हैं. सपने हमें कई बार ऐसी चीज दिखाते हैं जो हमें भयभीत कर देते हैं. सपने (Sapne) में नजर आने वाली हर चीज़ का कोई न कोई मतलब जरूर होता है. इससे हम भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में सतर्क हो जाते हैं. Sapne बंदर को गुस्से में देखना सपने में बंदर को गुस्से में देखना अशुभ माना जाता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार इसका मतलब होता है कि आपका किसी से झगड़ा हो सकता है और आपके मान में कमी आ सकती है और जीवन की परेशानियों का ये कारण भी बन सकता है. Sapne Me Khud Ko Dekhna:सपने में खुद को देखना देता है बड़ा संके Sapne बंदर को खाते हुए देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में बंदर को कुछ खाते हुए देखना एक अशुभ सपना माना जाता है. यह सपना इस बात का संकेत करता है कि आपको भारी नुकसान होने वाला है और आने वाले समय में आपके परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही संकेत देता है कि आने वाले दिनों में हानि हो सकती है. Sapne सपने में बंदर को खुश या मस्ती करते हुए देखना स्वप्न शास्त्र में बंदर को खुश देखने में देखना एक शुभ सपना होता है. इस सपने का अर्थ है कि आपकी जिसके साथ लड़ाई हुई थी, उससे आपकी दोबारा मित्रता हो जाएगी और आपका पुराना दोस्त आपको मिलने वाला है. साथ ही साथ यह सपना इस लिहाज़ से भी अच्छा होता है कि आपके मान सम्मान में वृद्धि होने वाली है. Sapne बंदर का झुंड में देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने Sapne में बंदर को झुंड में देखना एक शुभ सपना माना जाता है. यह सपने देखने का मतलब होता है कि आपका परिवार आपके साथ है और आपको धन लाभ होने वाला है. साथ ही आने वाले समय में आपके परिवार का साथ बना रहेगा और आने वाला समय खुशहाल रहेगा.

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