2023

Vikram Betaal:विक्रम बेताल की:ब्राह्मण कुमार की कथा

Vikram Betaal वर्षों पहले की बात है, जब उज्जैन नगर में राजा महासेन राज किया करता था। उसी राज्य में एक ब्राह्मण रहता था, जिसका नाम वासुदेव था। वासुदेव के एक पुत्र था, जिसका नाम मनस्वामी था। मनस्वामी बहुत ही बुद्धिमान और सुंदर था। एक दिन, राजा महासेन ने एक उत्सव का आयोजन किया। उस उत्सव में मनस्वामी भी गया था। उत्सव में एक सुंदर राजकुमारी भी आई थी। राजकुमारी का नाम शशिप्रभा था। मनस्वामी और शशिप्रभा की पहली नजर में ही एक-दूसरे से प्रेम हो गया। मनस्वामी ने शशिप्रभा से मिलने के लिए बहुत कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। उसने एक सिद्ध पुरुष से मदद मांगी। सिद्ध पुरुष ने मनस्वामी को एक गोली दी और कहा, “इस गोली को मुंह में रखकर तुम लड़की का रूप धारण कर लोगे। तुम इस रूप में शशिप्रभा से मिल सकते हो।” मनस्वामी ने सिद्ध पुरुष की बात मानी और गोली मुंह में रख ली। जैसे ही उसने गोली मुंह से निकाली, वह एक सुंदर लड़की बन गया। मनस्वामी ने लड़की के रूप में शशिप्रभा से मिलने का मौका पाया और दोनों प्यार में पड़ गए। कुछ दिनों बाद, मनस्वामी ने अपने असली रूप को शशिप्रभा को बताया। शशिप्रभा भी मनस्वामी से प्यार करती थी, इसलिए उसने कोई आपत्ति नहीं की। एक दिन, मनस्वामी और शशिप्रभा एकांत में बात कर रहे थे। तभी, राजा महासेन आ गए। राजा को यह देखकर बहुत गुस्सा आया कि उसकी बेटी एक लड़के से बात कर रही है। राजा ने मनस्वामी को कैद कर लिया और शशिप्रभा को अपने महल में ले गए। मनस्वामी ने राजा से कहा, “महाराज, मैं शशिप्रभा से प्यार करता हूं। मैं उससे शादी करना चाहता हूं।” राजा ने कहा, “तुम एक ब्राह्मण हो और मेरी बेटी एक राजकुमारी है। तुम दोनों का विवाह नहीं हो सकता।” मनस्वामी ने कहा, “मैं किसी भी हालत में शशिप्रभा से शादी करूंगा।” राजा ने मनस्वामी को मौत की सजा सुनाई। मनस्वामी को फांसी देने के लिए ले जाया जा रहा था। तभी, शशिप्रभा ने राजा से कहा, “महाराज, मैं मनस्वामी से प्यार करती हूं। मैं उससे शादी करना चाहती हूं।” राजा ने कहा, “तुम एक राजकुमारी हो। तुम किसी भी ब्राह्मण से शादी नहीं कर सकती।” शशिप्रभा ने कहा, “मैं मनस्वामी से शादी करना चाहती हूं। अगर आप मेरी शादी नहीं करवाएंगे, तो मैं भी आत्महत्या कर लूंगी।” राजा को शशिप्रभा की बातों से मान जाना पड़ा। उसने मनस्वामी और शशिप्रभा की शादी करवा दी। मनस्वामी और शशिप्रभा बहुत खुश थे। उन्होंने एक साथ कई साल बिताए और उनकी कई संतानें हुईं। बेताल का सवाल बेताल ने विक्रमादित्य से पूछा, “राजन, बताओ कि मनस्वामी और शशिप्रभा में कौन अधिक साहसी था?” विक्रमादित्य ने कहा, “मनस्वामी और शशिप्रभा दोनों ही साहसी थे। मनस्वामी ने अपने प्रेम के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। शशिप्रभा ने अपने प्रेम के लिए अपने पिता की इच्छा का विरोध किया। मैं मानता हूं कि मनस्वामी अधिक साहसी थे। उन्होंने अपने प्रेम के लिए अपने धर्म और समाज के नियमों को भी तोड़ा। शशिप्रभा ने केवल अपने पिता की इच्छा का विरोध किया, लेकिन उन्होंने अपने धर्म और समाज के नियमों को नहीं तोड़ा। इसलिए, मैं मानता हूं कि मनस्वामी अधिक साहसी थे।” बेताल ने विक्रमादित्य का जवाब सुनकर कहा, “तुमने सही कहा। मनस्वामी अधिक साहसी थे।” बेताल ने विक्रमादित्य को छोड़ दिया और पेड़ पर लटक गया।

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Vikram Betaal:विक्रम बेताल की कहानी: अधिक साहसी कौन है?

Vikram Betaal विक्रम बेताल की कहानी: सबसे साहसी कौन? Vikram Betaal इस कहानी में, राजा यशोधन और सेनापति बलधर दोनों ही साहसी हैं। राजा यशोधन ने राज धर्म निभाया और अपनी पत्नी के लिए अपने प्रेम को त्याग दिया। सेनापति बलधर ने अपने राजा के लिए अपनी जान दे दी। हालांकि, मैं मानता हूं कि राजा यशोधन अधिक साहसी थे। राजा यशोधन ने एक कठिन निर्णय लिया, जिसका उन्हें पता था कि इसका मतलब उनके लिए मृत्यु हो सकती है। उन्होंने अपनी भावनाओं पर काबू पाया और अपने कर्तव्य को पूरा किया। सेनापति बलधर का कार्य भी साहसपूर्ण था, लेकिन यह राजा यशोधन के कार्य की तुलना में कम साहसपूर्ण था। सेनापति बलधर अपने राजा के लिए मरने के लिए तैयार थे, लेकिन यह उनके लिए एक स्वाभाविक कार्य था। एक सेनापति का कर्तव्य होता है कि वह अपने राजा के लिए अपनी जान दे दे। राजा यशोधन ने एक ऐसा कार्य किया जो उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने अपने प्रेम को त्यागा और अपने कर्तव्य का पालन किया। यही कारण है कि मैं मानता हूं कि वे अधिक साहसी थे। Betaal बेताल का सवाल बेताल का सवाल यह है कि राजा और सेनापति में से कौन अधिक साहसी था। इस सवाल का जवाब व्यक्तिपरक है। कुछ लोग मान सकते हैं कि सेनापति अधिक साहसी थे, क्योंकि उन्होंने अपने राजा के लिए अपनी जान दे दी। अन्य लोग मान सकते हैं कि राजा अधिक साहसी थे, क्योंकि उन्होंने अपने प्रेम को त्यागा और अपने कर्तव्य का पालन किया। मैंने पहले ही अपने जवाब में बताया है कि मैं मानता हूं कि राजा अधिक साहसी थे। कहानी से सीख : असली हिम्मतवाला इंसान वही होता है, जो खुद से पहले अपने परिवार के बारे में सोचे और अपनों का ध्यान रखे।

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Vikram Betaal:विक्रम बेताल की कहानी: शशिप्रभा किसकी पत्नी?

Vikram Betaal वर्षों पहले नेपाल के शिवपुर नाम के एक नगर में यशकेतु राजा का राज हुआ करता था। वह बहुत साहसी और बलवान था। शादी के सालों बाद पत्नी चंद्रप्रभा से उसे एक बेटी शशिप्रभा हुई। शशिप्रभा बहुत सुंदर और गुणवान थी। एक दिन, राजा यशकेतु को एक युद्ध में भाग लेना पड़ा। वह अपनी बेटी शशिप्रभा को अपने मंत्री के घर छोड़कर गए। मंत्री के घर में एक नौकर मनस्वामी भी काम करता था। मनस्वामी शशिप्रभा से प्यार करने लगा। एक दिन, मनस्वामी ने शशिप्रभा को बताया कि वह उससे प्यार करता है। शशिप्रभा भी मनस्वामी से प्यार करने लगी। दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर शादी कर ली। युद्ध से लौटने पर, राजा यशकेतु को पता चला कि शशिप्रभा की शादी हो चुकी है। वह बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने शशिप्रभा को घर से निकाल दिया। Vikram Betaal शशिप्रभा और मनस्वामी एक गाँव में रहने लगे। वे बहुत खुश थे। एक दिन, राजा यशकेतु ने शशिप्रभा और मनस्वामी को खोज लिया। उन्होंने शशिप्रभा को वापस घर ले जाने की कोशिश की। शशिप्रभा ने राजा यशकेतु से कहा कि वह मनस्वामी से प्यार करती है और उसे छोड़ना नहीं चाहती। राजा यशकेतु ने शशिप्रभा को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी। राजा यशकेतु ने शशिप्रभा को एक चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर शशिप्रभा यह बता सकती है कि वह किसकी पत्नी है, तो वह उसे मनस्वामी के साथ रहने देगा। शशिप्रभा ने राजा यशकेतु की चुनौती स्वीकार कर ली। वह राजा यशकेतु के साथ चली गई। राजा यशकेतु ने शशिप्रभा को एक जंगल में ले जाया और उसे छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि अगर शशिप्रभा 24 घंटे के भीतर वापस आ सकती है, तो वह उसे मनस्वामी के साथ रहने देगा। शशिप्रभा जंगल में भटकने लगी। वह बहुत थकी हुई और भूखी थी। तभी, उसे एक बेताल मिला। बेताल ने शशिप्रभा को अपनी पीठ पर बैठाया और उसे राजा यशकेतु के महल तक ले गया। शशिप्रभा ने राजा यशकेतु को बताया कि वह मनस्वामी की पत्नी है। राजा यशकेतु को शशिप्रभा का जवाब पसंद नहीं आया। उन्होंने शशिप्रभा को एक और चुनौती दी। राजा यशकेतु ने कहा कि अगर शशिप्रभा यह बता सकती है कि एक स्त्री के तीन पति कैसे हो सकते हैं, तो वह उसे मनस्वामी के साथ रहने देगा। शशिप्रभा ने राजा यशकेतु की चुनौती स्वीकार कर ली। वह राजा यशकेतु के साथ चली गई। राजा यशकेतु ने शशिप्रभा को एक कमरे में बंद कर दिया और कहा कि अगर वह 24 घंटे के भीतर वापस आ सकती है, तो वह उसे मनस्वामी के साथ रहने देगा। शशिप्रभा ने कमरे में ही सोचने-समझने लगी। उसे एक जवाब मिला। उसने एक पत्र लिखा और उसे एक चिड़िया को दे दिया। चिड़िया पत्र लेकर राजा यशकेतु के पास पहुंची। राजा यशकेतु ने पत्र पढ़ा। पत्र में लिखा था कि एक स्त्री के तीन पति हो सकते हैं। पहला पति वह है जिससे वह शादी करती है। दूसरा पति वह है जिससे वह प्यार करती है। और तीसरा पति वह है जिसे वह अपने पति मानती है। राजा यशकेतु को शशिप्रभा का जवाब पसंद आया। उन्होंने शशिप्रभा को मनस्वामी के साथ रहने की अनुमति दे दी। शशिप्रभा और मनस्वामी बहुत खुश थे। वे राजा यशकेतु के साथ रहने लगे। राजा यशकेतु भी शशिप्रभा और मनस्वामी के प्रेम को देखकर खुश थे। कहानी से सीख : छल-कपट से किया गया प्रयास असफलता का कारण बनता है।

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Vivah Panchami 2023: कब है विवाह पंचमी? जानें इस दिन विवाह करना क्यों माना जाता है अशुभ

विवाह पंचमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह भगवान राम और देवी सीता के विवाह की जयंती है। यह त्योहार अगहन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल, विवाह पंचमी 17 दिसंबर 2023 को मनाई जाएगी। विवाह पंचमी के दिन, हिंदू मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान किए जाते हैं। देवी सीता और भगवान राम की मूर्तियों को सजाया जाता है और उन्हें फूल, मिठाई और अन्य प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। अविवाहित लोग इस दिन भगवान राम और देवी सीता से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें एक सुयोग्य साथी मिल जाए। इस दिन, कुंवारी कन्याएं “ऊँ जानकी वल्लभाय नमः” मंत्र का जाप करती हैं। विवाह पंचमी के दिन, लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। इस दिन, नए कपड़े पहनना और नए काम शुरू करना शुभ माना जाता है। विवाह पंचमी एक खुशी का त्योहार है जो प्रेम, विवाह और समृद्धि का प्रतीक है। यह एक दिन है जब लोग एक-दूसरे के साथ खुशियां मनाते हैं और भगवान राम और देवी सीता से आशीर्वाद मांगते हैं। Vivah Panchami 2023 पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास (अगहन) के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी (Vivah Panchami) मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ दिन पर माता सीता और भगवान राम का विवाह मिथिलांचल में संपन्न हुआ था. इसलिए लोग इस दिन को भगवान राम और माता सीता के विवाहोत्सव या वैवाहिक वर्षगांठ के रूप में मनाते हैं. कहा जाता है कि, इसी दिन तुलसीदास जी के द्वारा रामचरितमानस भी पूरा किया गया था. विवाह पंचमी के दिन रामजी और माता सीता का विवाह कराया जाता है, पूजा पाठ किए जाते हैं. मान्यता है कि इससे घर पर खुशियों का आगमन होता है और वैवाहिक जीवन में प्यार बढ़ता है. ज्योतिष में विवाह पंचमी पर किए जाने वाले कुछ उपायों के बारे में भी बताया गया है. इन उपायों को करने से कुंवाली कन्याओं की शादी में आने वाली बाधाएं दूर होती है और उनके हाथ पीले होते हैं. कब है विवाह पंचमी 2023 (Vivah Panchami 2023 Date) इस साल विवाह पंचमी रिववार, 17 दिसंबर 2023 को पड़ रही है. इसी दिन भगवान राम और सीता जी का वैवाहिक वर्षगांठ मनाया जाएगा. खासकर अयोध्या और नेपाल में इस दिन भव्य आयोजन होता है और लोग राम-सीता के विवाह का आयोजन कराते हैं. हिंदू धर्म में विवाह पंचमी के दिन को बहुत ही शुभ माना गया है. लेकिन इसके बावजूद भी इस दिन माता-पिता अपनी कन्या का विवाह नहीं कराते. खासकर मिथिलांचल और नेपाल में इस दिन विवाह आयोजन नहीं होते. क्योंकि विवाह के लिए इस दिन को अशुभ माना जाता है. आइये जानते हैं आखिर इसका कारण क्या है? Vivah Panchami 2023 इसलिए विवाह पंचमी के दिन नहीं किया जाता विवाहराम और सीता की जोड़ी को आदर्शतम जोड़ी माना जाता है। भारतीय समाज में सुहागिन महिलाओं को राम-सीता की जोड़ी जैसा आशीर्वाद दिया जाता है। साथ ही आज भी भगवान राम और माता सीता के परिश्रम की कहानी सबको सुनाई जाती हैं। लेकिन फिर भी उनके विवाह की तिथि के दिन शादी करना अशुभ माना जाता है। दरअसल, इसके पीछे की वजह ये है कि विवाह के बाद भगवान राम और माता सीता के जीवन में ढेरों कष्ट आए थे। दोनों ने 14 साल का वनवास भी काटा। साथ ही माता सीता को अग्नि परीक्षा से भी गुजरना पड़ा। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार, सामाजिक मान्यताओं और अपने निष्पक्ष उसूलों के चलते भगवान राम ने गर्भवती सीता का परित्याग कर दिया। जिसके बाद माता सीता ने अकेले ही अपने आगे का जीवन वन में गुजारा था। उन्होंने अकेले ही अपने बच्चों का पालन पोषण किया। राम और सीता के वैवाहिक जीवन में इतने संघर्षों को देखते हुए ये लोग ये पर्व तो मनाते हैं, लेकिन इस दिन अपनी संतान का विवाह नहीं करते। ऐसा इसलिए ताकी  राम और सीता जितने दुख उनकी संतान को झेलने न पड़ें।

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Vikram Betaal विक्रम बेताल की कहानी: चोर हंसने से पहले क्यों रोया ?

Vikram Betaal एक बार की बात है, अयोध्या नगरी में वीरकेतु नाम का एक राजा राज करता था। उसी राज्य में एक साहूकार भी रहता था। धनी साहूकार का नाम था रत्नदत्त। उसकी एक ही सुंदर सी बेटी थी रत्नावती। रत्नावती के लिए कई रिश्ते आए, लेकिन उसने किसी से भी शादी करने के लिए हां नहीं की। इस वजह से उसके पिता काफी परेशान थे। रत्नावती को सिर्फ सुंदर और धनवान नहीं बल्कि बुद्धिमान और बलवान वर चाहिए था। एक दिन, रत्नावती की मुलाकात एक चोर से हो जाती है। चोर बहुत ही कुशल था। वह किसी भी घर में बिना किसी को जगाए चोरी कर सकता था। रत्नावती को चोर से बहुत लगाव हो गया। वह रोज चोर से मिलने जाती थी। चोर भी रत्नावती से बहुत प्यार करता था। इधर, नगर में चोरी बढ़ने लगी थी। इस वजह से रत्नदत्त को हर समय यह डर सताता था कि कहीं, उसके घर से चोर सारा धन न लेकर चला जाए। एक दिन, राजा वीरकेतु नगर में घूम रहे थे। तभी उन्होंने एक घर में चोर को चोरी करते हुए देखा। राजा ने चोर को पकड़ लिया और उसे अपने साथ राजमहल ले गए। चोर को फांसी की सजा सुनाई गई। रत्नावती को चोर की सजा सुनकर बहुत दुख हुआ। वह चोर से बहुत प्यार करती थी। वह चोर को बचाने के लिए राजा के पास गई। उसने राजा से कहा कि वह चोर से बहुत प्यार करती है और अगर उसे फांसी हो गई, तो वह भी अपने प्राण त्याग देगी। राजा ने रत्नावती की बात नहीं सुनी और चोर को फांसी दे दी। चोर को फांसी होते ही रत्नावती भी अपने प्राण त्यागने की कोशिश करती है। उसी समय आकाशवाणी होती है। भगवान रत्नावती से कहते हैं, “हे पुत्री! तुम्हारा प्रेम बहुत पवित्र है। तुम्हारे इस प्यार को देखकर हम बहुत खुश हुए हैं। तुम मांगों, जो भी तुम्हें मांगना है।” यह सुनकर रत्नावती कहती है, “मेरे पिता का कोई बेटा नहीं, आप उन्हें आशीर्वाद दें कि उनके सौ पुत्र हो जाएं।” एक बार फिर, आकाशवाणी होती है, “ऐसा ही होगा, लेकिन तुम कुछ और भी वरदान मांग सकती हो।” फिर रत्नावती कहती है, “मैं उस चोर से बेहद प्यार करती हूं, अगर हो सके तो आप उन्हें जीवित कर दीजिए।” रत्नावती के वरदान मांगते ही चोर फिर से जीवित हो जाता है। चोर को जीवित होते देखकर राजा बहुत हैरान हो जाते हैं। राजा चोर को कहते हैं, “अगर तुम सही रास्ते पर चलने का वचन देते हो, तो मैं तुम्हें राज्य का सेनापति घोषित करने को तैयार हूं।” चोर खुशी-खुशी हां कर देता है। Vikram Betaal Story कहानी की शिक्षा इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि

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Vikram Betaal विक्रम बेताल की कहानी: अपराधी कौन है ?

Vikram Betaal विक्रम बेताल की कहानी: अपराधी कौन? एक बार की बात है, बनारस में हरिस्वामी नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी बहुत सुन्दर थी और उसका नाम लावण्यवती था। लावण्यवती का रूप इतना सुन्दर था कि कोई भी पुरुष उस पर मोहित हो जाता। एक दिन लावण्यवती अपने घर की छत्त पर सो रही थी। जैसे ही आधी रात हुई, एक गंधर्व कुमार आकाश मार्ग से उड़ता हुआ जा रहा था। उसकी नजर लावण्यवती पर पड़ी तो वो उसकी ओर आकर्षित हो गया। गंधर्व कुमार लावण्यवती को उठाकर ले गया। हरिस्वामी ने सुबह उठकर देखा तो उसकी पत्नी गायब थी। हरिस्वामी के लिए यह बड़े दुख की बात थी। वह अपनी पत्नी के अपहरण से इतना दुखी हुआ कि उसने आत्महत्या करने की ठान ली। जब लोगों को यह बात पता चली तो उन्होंने हरिस्वामी को समझाया कि उसे तीर्थ यात्रा करनी चाहिए। तीर्थ यात्रा से सारे पाप कट जाएंगे और तुम्हारी पत्नी तुम्हें वापस मिल जाएगी। हरिस्वामी के पास और कोई विकल्प न था इसलिए वो तीर्थ यात्रा के लिए घर से निकल पड़ा। हरिस्वामी जब एक गांव से गुजर रहा था तो उसे भूख लगी। वह एक ब्राह्मण के घर पहुंचा। ब्राह्मण की पत्नी ने हरिस्वामी को खीर खाने को दी। हरिस्वामी उस खीर को लेकर एक तालाब के किनारे पहुंचा ताकि वो मुहं हाथ धोकर खीर खा सके और प्यास लगने पर उसे पानी भी मिल जाए। खीर का कटोरा एक पेड़ के नीचे रखकर हरिस्वामी हाथ पैर धोने लगा। तभी उस पेड़ पर एक बाज आकर बैठ गया। बाज के मुहं में सांप था और वो उसे खा रहा था। सांप का जहर हरिस्वामी की खीर में टपक गया। भूखा हरिस्वामी जल्दी-जल्दी उस खीर को खा गया। उसे ये पता ही नहीं चला कि खीर में जहर है। जहर हरिस्वामी के शरीर में फैल गया और वो तड़पने लगा। हरिस्वामी दौड़कर ब्राह्मण की पत्नी के पास आकर कहने लगा कि तूने मुझे जहर क्यों दिया और इतना कहकर वो मर गया। ब्राह्मण ने जब यह देखा तो उसने अपनी पत्नी की एक बात भी नहीं सुनी और उस पर ब्राह्मण हत्या का दोष लगाकर अपने घर से निकाल दिया। इतनी कहानी सुनाकर बैताल ने राजा विक्रमादित्य से पूछा, “राजन बताओ कि इस कहानी में अपराधी कौन है सांप, बाज या ब्राह्मण की पत्नी?” राजा विक्रमादित्य ने उत्तर दिया, “इस कहानी में इन तीनों में से कोई अपराधी नहीं हैं, क्योंकि सांप अपने शत्रु यानी बाज के वश में था, वह कुछ कर ही नहीं सकता था। बाज ने जान बूझकर खीर में जहर नहीं मिलाया, बल्कि वो तो शांतिपूर्वक अपना खाना खा रहा था। ब्राह्मण की पत्नी ने अतिथि का सत्कार किया था, उसे भोजन दिया था। जो इन तीनों को दोषी कहेगा, वो खुद दोषी माना जाएगा। इस कहानी में अगर कोई अपराधी है तो वो है ब्राह्मण, जिसने बिना विचार करे और सच्चाई को जाने बिना अपनी निर्दोष पत्नी को बेघर कर दिया।” Vikram Betaal बैताल बोला, “राजन आपने इस बार भी बिलकुल सही जवाब दिया है।” इतना कहकर बैताल फिर से उड़कर पेड़ पर जा लटका। राजा विक्रमादित्य उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे भागे। कहानी की शिक्षा इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें दूसरों पर बिना किसी सबूत के आरोप नहीं लगाने चाहिए। हमें दूसरों की बात सुननी चाहिए और उनकी बात समझने की कोशिश करनी चाहिए। हमें दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। इस कहानी में, ब्राह्मण ने बिना किसी सबूत के अपनी पत्नी पर आरोप लगाया और उसे घर से निकाल दिया। इससे हम सीख सकते हैं कि हमें दूसरों पर बिना किसी सबूत के आरोप नहीं लगाने चाहिए।

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Vikram Betaal विक्रम बेताल की कहानी: दीवान की मृत्यु

कई असफलताओं के बाद राजा विक्रमादित्य ने एक बार फिर बेताल को योगी के पास ले जाने की कोशिश में अपनी पीठ कर लादा और चल पड़े। रास्ता काटने के लिए बेताल ने फिर से राजा को एक नई कहानी सुनानी शुरू की।एक बार राजा विक्रमादित्य ने बेताल से पूछा, “दीवान की मृत्यु कैसे हुई?” Vikram Betaal बेताल ने कहा, “एक बार एक राज्य में यशकेतु नाम का राजा राज्य करता था। उसका सत्यमणि नाम का एक दीवान था। सत्यमणि बड़ा ही समझदार और चतुर मंत्री था। वह राजा का सारा राज-पाठ संभालता था और विलासी राजा मंत्री पर सारा भार डालकर भोग में पड़ा रहता था। राजा के भोग-विलासिता में होते अधिक खर्च की वजह से राज कोष का धन कम होने लगा। प्रजा भी राजा से नाराज रहने लगी। जब मंत्री को इस बारे में पता चला कि सब राजा की निंदा कर रहे हैं, तो उसे बहुत दुःख हुआ। एक दिन, राजा ने मंत्री से कहा कि वह एक सुंदर राजकुमारी से शादी करना चाहता है। मंत्री ने राजा को मना किया और कहा कि यह विवाह राजा और राज्य के लिए हानिकारक होगा। राजा ने मंत्री की बात नहीं सुनी और उसने उस राजकुमारी से शादी कर ली। राजकुमारी बहुत ही सुंदर और गुणवान थी। वह राजा से बहुत प्यार करती थी। लेकिन राजा अभी भी भोग-विलास में डूबा हुआ था। वह राजकुमारी के साथ समय बिताने के बजाय अपने दोस्तों और रानियों के साथ समय बिताता था। एक दिन, मंत्री ने राजा को बताया कि राजकुमारी गर्भवती है। राजा बहुत खुश हुआ और उसने मंत्री से कहा कि वह राजकुमारी की देखभाल करे। मंत्री ने राजकुमारी की बहुत अच्छी देखभाल की। समय के साथ राजकुमारी ने एक पुत्र को जन्म दिया। राजकुमार बहुत ही सुंदर और स्वस्थ था। राजा और राजकुमारी बहुत खुश थे। एक दिन, राजा को पता चला कि मंत्री ने उस राजकुमारी से शादी करने से राजा को मना किया था। राजा को बहुत गुस्सा आया और उसने मंत्री को मौत की सजा सुनाई। Vikram Betaal मंत्री को मौत की सजा सुनकर बहुत दुःख हुआ। उसने सोचा कि अगर उसने राजा को उस राजकुमारी से शादी करने से नहीं रोका होता, तो राजा अभी भी भोग-विलास में नहीं डूबता और राजा और राज्य दोनों खुश होते। मंत्री ने राजा से कहा, “महाराज, आपने मुझे बहुत ही गलत सजा सुनाई है। मैंने तो आपके लिए ही यह सब किया था। मैंने सोचा कि अगर मैं आप को उस राजकुमारी से शादी करने से नहीं रोकता, तो आप अभी भी भोग-विलास में डूबे रहते और राजा और राज्य दोनों बर्बाद हो जाते।” राजा ने मंत्री की बात नहीं सुनी और उसने मंत्री को मार डाला। मंत्री की मृत्यु से राजा को बहुत पछतावा हुआ। वह समझ गया कि मंत्री ने उसके लिए ही यह सब किया था। लेकिन अब सब कुछ बहुत देर हो चुकी थी।” राजा विक्रमादित्य ने कहा, “बेताल, तुमने एक बहुत ही अच्छी कहानी सुनाई है। मंत्री ने राजा के लिए बहुत कुछ किया था, लेकिन राजा ने उसकी बात नहीं सुनी और उसे मार डाला। यह बहुत ही दुखद है।” इसके बाद राजा ने उससे पूछा  बेताल ने कहा, “राजा, कभी-कभी लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की बात नहीं सुनते। इससे बहुत नुकसान होता है।” इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें दूसरों की बात हमेशा ध्यान से सुननी चाहिए। हमें दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

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Vikram Betaal :विक्रम बेताल की कहानी: सबसे अधिक कोमल कौन ?

Vikram Betaal विक्रम बेताल की कहानी “सबसे अधिक कोमल कौन?” में, बेताल राजा विक्रमादित्य से पूछता है कि सबसे अधिक कोमल कौन है? राजा विक्रमादित्य को इस सवाल का जवाब देने में बहुत मुश्किल होती है। वह सोचता है कि तन से कोमल कौन है? क्या वह राजकुमारी है जो चांद की रोशनी से भी जल जाती है? या वह राजकुमारी है जो गुलाब के फूल से भी चोट खा जाती है? या वह राजकुमारी है जो किसी की आवाज सुनते ही बेहोश हो जाती है? बेताल का उड़कर पेड़ पर लौटने और राजा विक्रम का उसे दोबारा पकड़ने का सिलसिला जारी रहता है। इस बार राजा विक्रमादित्य बेताल को फिर से पेड़ से उतारकर ले जाते हैं। रास्ते में बेताल राजा से कहता है, “मार्ग बहुत बड़ा है, चलो मैं तुम्हें एक और कहानी सुनाता हूं, इसे तुम ध्यान से सुनना।” बेताल बताता है.. राजा विक्रमादित्य को यह भी लगता है कि मन से कोमल कौन है? क्या वह राजकुमारी है जो किसी भी कष्ट को सहने के लिए तैयार है? या वह राजकुमारी है जो दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहती है? या वह राजकुमारी है जो हमेशा खुश रहती है? अंत में, राजा विक्रमादित्य बेताल को जवाब देते हैं कि तीसरी राजकुमारी सबसे अधिक कोमल है। वह सिर्फ तन से नहीं, बल्कि मन से भी कोमल है। वह बिना कुछ किए ही अपने हाथ-पांव पर छाले पड़ने और बेहोश होने जैसी कष्ट सहन कर सकती है। वह दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहती है और हमेशा खुश रहती है। बेताल राजा विक्रमादित्य के जवाब से खुश होता है और उसे वापस पेड़ पर ले जाता है। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कोमलता सिर्फ तन से नहीं, बल्कि मन से भी होती है। जो व्यक्ति दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता है और हमेशा खुश रहता है, वह सबसे अधिक कोमल होता है।

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Vikram Betaal विक्रम बेताल की कहानी: सबसे अधिक त्यागी कौन ?

एक बार राजा विक्रमादित्य ने बेताल से पूछा, “सबसे अधिक त्यागी कौन है?” बेताल ने कहा, “एक बार एक नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। उसके पास बहुत सारा धन-संपत्ति था। वह अपने धन-संपत्ति से बहुत ही खुश था। एक दिन, वह अपने धन-संपत्ति से घबराया और उसने सोचा कि अगर वह मर गया तो उसका धन-संपत्ति किसके पास जाएगा? उसने सोचा कि वह अपना धन-संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति को दे देगा जो उसका उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करे। उसने अपने धन-संपत्ति का दान एक साधु को कर दिया। साधु ने उस धन-संपत्ति का उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने में किया। व्यापारी ने साधु को धन-संपत्ति देने के बाद बहुत ही खुश महसूस किया। उसने सोचा कि उसने सबसे अच्छा काम किया है। एक दिन, व्यापारी की मृत्यु हो गई। स्वर्ग में, व्यापारी को एक देवता ने बताया कि वह सबसे अधिक त्यागी व्यक्ति है। व्यापारी को यह सुनकर बहुत ही खुशी हुई।” राजा विक्रमादित्य ने बेताल से कहा, “बेताल, तुमने एक बहुत ही अच्छी कहानी सुनाई है। व्यापारी ने अपने धन-संपत्ति का त्याग करके दूसरों की भलाई के लिए एक अच्छा काम किया।” Vikram Betaal बेताल ने कहा, “राजा, त्याग का अर्थ है अपने लिए कुछ भी ना रखना। जो व्यक्ति अपने लिए कुछ भी नहीं रखता है, वह सबसे अधिक त्यागी होता है।” इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि त्याग एक महान गुण है। जो व्यक्ति त्याग करता है, वह दूसरों की भलाई के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करता है।

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Utpanna Ekadashi 2023: उत्पन्ना एकादशी कब ? एकादशी व्रत शुरू करने वालों के लिए खास है ये दिन

Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। उत्पन्ना एकादशी का महत्व उत्पन्ना एकादशी को कई नामों से जाना जाता है, जैसे कि “उत्पन्न एकादशी”, “उत्तम एकादशी”, “कल्याण एकादशी” और “अमृत एकादशी”। इस दिन व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। देवशयनी एकादशी व्रत कथा (Devshayani Ekadashi Vrat Katha) उत्पन्ना एकादशी की पूजा उत्पन्ना एकादशी की पूजा सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके की जाती है। फिर, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित किया जाता है। प्रतिमा या तस्वीर को फूल, माला, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से सजाया जाता है। फिर, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा में भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप किया जाता है। पूजा के बाद, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को प्रसाद अर्पित किया जाता है। प्रसाद में खीर, दूध, फल, मिठाई आदि शामिल होते हैं। उत्पन्ना एकादशी 2023 मुहूर्त (Utpanna Ekadashi 2023 Muhurat) पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 8 दिसंबर 2023 को सुबह 05 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगी और 9 दिसंबर 2023 को सुबह 06 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगी. श्रीहरि की पूजा का समय – सुबह 07.01 – सुबह 10.54 उत्पन्ना एकादशी 2023 व्रत पारण समय (Utpanna Ekadashi 2023 Vrat Parana Time) उत्पन्ना एकादशी का व्रत अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद खोला जाता है। व्रत पारण के समय भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। फिर, भगवान विष्णु की कथा सुनी जाती है। कथा सुनने के बाद, प्रसाद ग्रहण किया जाता है। उत्पन्ना एकादशी का व्रत पारण 9 दिसंबर 2023 को दोपहर 01 बजकर 15 मिनट से दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर किया जाएगा. इस दिन हरि वासर समाप्त होने का समय दोपहर 12.41 है. उत्पन्ना एकादशी 2023 डेट (Utpanna Ekadashi 2023 Date) Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी 8 दिसंबर 2023 को है. इस दिन देवी एकादशी का प्राकट्य हुआ था. देवी एकादशी ने मुर नाम के राक्षस का इंद्रदेव को और समस्त स्वर्गवासियों को बचाया था. उत्पन्ना एकादशी की कथा उत्पन्ना एकादशी की कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने एक बार राजा त्रिविक्रम को एकादशी व्रत करने का उपदेश दिया। राजा त्रिविक्रम ने एकादशी व्रत किया और भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें सभी पापों से मुक्ति प्राप्त हुई और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। उत्पन्ना एकादशी का व्रत सभी के लिए फलदायी है। इस दिन व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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Vikram Betaal विक्रम बेताल की कहानी: सर्वश्रेष्ठ वर कौन है ?

Vikram Betaa विक्रम बेताल की कहानी “सर्वश्रेष्ठ वर कौन है” में, एक राजा की एक पुत्री है। राजकुमारी बहुत सुंदर और बुद्धिमान है। राजा अपनी पुत्री के लिए एक योग्य वर खोज रहे हैं। एक दिन, तीन पुरुष राजकुमारी के पास विवाह के प्रस्ताव लेकर आते हैं। पहला पुरुष एक वीर योद्धा है, दूसरा पुरुष एक धनी व्यापारी है, और तीसरा पुरुष एक विद्वान ब्राह्मण है। राजकुमारी तीनों पुरुषों से मिलती है और उनकी बातें सुनती है। उसे तीनों पुरुषों में से कोई भी पसंद नहीं आता है। वह सोचती है कि उसे ऐसा वर चाहिए जो उसे प्यार करे, उसकी परवाह करे, और उसे समझे। राजकुमारी अपने पिता से कहती है कि वह किसी भी पुरुष से विवाह नहीं करना चाहती है। राजा बहुत निराश हो जाते हैं। उसी रात, बेताल विक्रम को राजकुमारी के निर्णय के बारे में बताता है। विक्रम बेताल को अपने कंधे पर रखकर महल में ले जाते हैं। Vikram Betaa बेताल विक्रम को एक कहानी सुनाता है। कहानी में, एक राजकुमारी एक वीर योद्धा से विवाह करती है। लेकिन, वीर योद्धा हमेशा युद्ध में व्यस्त रहता है। वह राजकुमारी को समय नहीं दे पाता है। राजकुमारी बहुत दुखी होती है। कहानी सुनने के बाद, विक्रम बेताल से कहते हैं कि राजकुमारी का निर्णय सही है। वह किसी ऐसे पुरुष से विवाह नहीं करना चाहती है जो उसे प्यार नहीं करे। बेताल विक्रम की बात से सहमत होता है। वह विक्रम को बताता है कि राजकुमारी के लिए सबसे अच्छा वर वह व्यक्ति है जो उसे प्यार करे, उसकी परवाह करे, और उसे समझे। इस प्रकार, कहानी का नैतिक यह है कि प्रेम और समझ ही दो व्यक्तियों के बीच संबंधों का आधार हैं।

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Vikram Betaal :विक्रम बेताल की कहानी: सबसे अधिक सुकुमार कौन ?

Vikram Betaal विक्रम बेताल की कहानी “सबसे अधिक सुकुमार कौन” में, तीन रानियां हैं: इन्दुलेखा, तारावली और मृगांकवती। वे तीनों ही बहुत सुंदर और सुकुमार हैं। लेकिन, बेताल पूछता है कि उनमें से सबसे अधिक सुकुमार कौन है? कहानी में, इन तीनों रानियों को एक-एक करके सुकुमारता की परीक्षा दी जाती है। इन्दुलेखा एक फूल के टूटने से बेहोश हो जाती है, तारावली चांद की रोशनी से परेशान हो जाती है, और मृगांकवती रसोईघर से आती हुई आवाज से परेशान हो जाती है। इन तीनों घटनाओं से पता चलता है कि इन्दुलेखा फूलों के प्रति संवेदनशील है, तारावली प्रकाश के प्रति संवेदनशील है, और मृगांकवती आवाज के प्रति संवेदनशील है। बेताल का मानना है कि सबसे अधिक सुकुमार वह व्यक्ति है जो सबसे अधिक संवेदनशील है। इसलिए, बेताल का मानना है कि मृगांकवती सबसे अधिक सुकुमार है। हालांकि, यह भी कहा जा सकता है कि सबसे अधिक सुकुमार वह व्यक्ति है जो सबसे अधिक नाजुक है। इसलिए, इन्दुलेखा सबसे अधिक सुकुमार हो सकती है। अंततः, “सबसे अधिक सुकुमार कौन” का उत्तर एक व्यक्तिगत निर्णय है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप सुकुमारता को कैसे परिभाषित करते हैं।

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