July 10, 2023

 भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिया गया वह ज्ञान जिससे आप भी बन सकते हैं सफल

भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के रणभूमि में अर्जुन के मन में धर्म और युद्ध के बीच चल रहे ध्वन्ध को गीता के उपदेश के माध्यम से समझाया था। उन्हीं उपदेशों को समझने से वर्तमान के समय में भी व्यक्ति सफलता हासिल कर सकता है। श्री कृष्ण का जीवन ऐसी ही बातों से भरा पड़ा है, ज़रूरत है नज़रिए की। उनका जीवन आपके लिए माइथोलॉजी का एक हिस्सा मात्र भी हो सकता है और आपका पूरा जीवन बदलकर रख देने वाला ज्ञान भी। यह हमें तय करना है कि हम उनके जीवन से लेना क्या चाहते हैं। श्री कृष्ण मात्र कथाओं में पढ़े या सुने जाने वाले पात्र नहीं, वह चरित्र और व्यवहार में उतारे जाने वाले देव हैं। वह हमें सीख देते हैं कि, सिर्फ मुर्दों को आराम है, ज़िंदगी संघर्ष का दूसरा नाम है कभी अगर आपको जीवन की स्थितियों पर रोना आए, तो एक बार श्री कृष्ण की जीवनी पर नज़र ज़रूर डाल लें। रोना बंद कर देंगे आप। श्री कृष्ण ने एक जेल में जन्म लिया था और जन्म लेने के तुरंत बाद ही उन्हें रात में ही उफनती यमुना पार कर गोकुल ले जाया गया। तीसरे दिन ही राक्षसनी पूतना उन्हें मारने आ पहुंची और यहां से जो संघर्ष का सिलसिला शुरू हुआ, वह देह त्यागने तक बना रहा। शिक्षा वही जो अज्ञान घटाए, कौशल बढ़ाए श्री कृष्ण ने अपनी शिक्षा मध्य प्रदेश के उज्जैन में सांदीपनि ऋषि के आश्रम में रहकर पूरी की थी। कहा जाता है कि 64 दिन में उन्होंने 64 कलाओं का ज्ञान हासिल कर लिया था। वैदिक ज्ञान के अलावा उन्होंने कलाएं सीखीं। शिक्षा ऐसी ही होनी चाहिए, जो हमारे व्यक्तित्व का रचनात्मक विकास करे। संगीत, नृत्य, युद्ध सहित 64 कलाएं कृष्ण के व्यक्तित्व का हिस्सा बनीं। अगर आप विद्यार्थी हैं, तो ख़ुद को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित ना रखें। अपने कौशल पर ध्यान दें। हरफनमौला बनें। अगर आपके बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, तो उन्हें अपने व्यक्तित्व को कौशल-समृद्ध करने को प्रोत्साहित करें। उनमें कोरा ज्ञान ना भरें। उनकी पढ़ाई ऐसी हो कि उनकी रचनात्मकता को नए आयाम मिलें। गीता के इन उपदेश से जानें सफलता का रहस्य  कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ।। भगवद गीता के अनुसार केवल कर्म पर ही व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन उसका फल कैसा होगा यह कोई नहीं जानता है। इसलिए फल की चिंता किए बिना कर्म करते रहना ही समझदारी का काम है और इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि उससे अधिक लगाव न हो। महाभारत और श्रीमद्भागवत गीता से स्पष्ट होता है कि श्रीकृष्ण ही पूर्ण सर्वोपरि सनातन ब्रह्मा हैं. लेकिन परमात्मा गुप्त रहते हैं और इस कारण मानव स्वयं को कर्ता मान बैठते हैं.

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सपने में सांप का दिखना होता है शुभ या अशुभ, जानें 

अकसर लोगों को सपने में जो चीजें दिखाई देती हैं, वे सुबह तक या तो उन्हें याद नहीं रहती या फिर कुछ धुंधला याद रहता है. अकसर लोगों को सपने में जो चीजें दिखाई देती हैं, वे सुबह तक या तो उन्हें याद नहीं रहती या फिर कुछ धुंधला याद रहता है. लेकिन कई बार सपने में कुछ ऐसा देख लेते हैं, जिन्हें देखते ही या तो डर के आंख खुल जाती है. या फिर सुबह आंख खुलते ही सपना आंखों के आगे घूमने लगता है और मन में ये ही ख्याल आता है कि क्या सपने में ये सब दिखना शुभ है या अशुभ. कई बार सपनों में लोगों को सांप दिखाई देता है. स्वप्नशास्त्र के अनुसार सांप का सपनों में दिखने का मतलब अच्छा भी हो सकता है या बुरा भी.  – अगर सपने में बहुत सारे सांप दिखाई देते हैं, तो सपने का मतलब अशुभ होता है. ऐसे में इस तरह का सपना देखना भविष्य में परेशानियां आने का संकेत देता है. वहीं, अगर आपको सपने में सांप दिखाई दे रहा है, और वे आपका पीछा कर रहा है और आप घबराए हुए हैं, तो इसका मतलब है कि आप किसी चीज को लेकर डरे हुए हैं. सपने में इस तरह का सपना देखना भी अशुभ ही माना जाता है.  सपने में दिख रहे हैं सांप तो हो जाए सतर्क,  हर सपने का अपना एक अलग मतलब होता है। स्वप्न शास्त्र नाम की किताब में हर सपने का अर्थ बताया गया है। आप में से कई लोगों को सांप से जुड़े सपने दिखाई देते होंगे। कई बार आप सांप को खुद के पीछे भागते हुए देखते होंगे तो कई बार सांप आपको काट रहा है ऐसा प्रतीत होता होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर किसी की कुंडली में काल सर्प दोष होता है और उसपर राहु केतु की दशा चल रही हो तो ऐसे समय में सांप के अधिक सपने आते हैं। वहीं, स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सांप से जुड़े कई सपने शुभ और कुछ अशुभ संकेत भी देते हैं। तोD आइए जानते हैं सपने में अलग अलग रूप में सांप देखने का क्या है मतलब। सपने में सांप मारना अगर आपको सपने में सांप दिखाई देता है और आप उस सपने को मार देते हैं तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह के सपना शुभ संकेत देने वाला होता है। इस तरह के सपने आने का मतलब होता है कि आप जल्द ही अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।

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सपने में भगवान शिव का आना, देता है ये खास संकेत

नींद में आने वाले सपने आपके अच्छे और बुरे भविष्य की ओर इशारा करते हैं। सपनों में मिले इन संकेतों से आप जीवन में होने वाली घटनाओं के बारे में जान सकते हैं। आज यहां हम जानेंगे कि अगर आपको सपने में भगवान शिव जी दिखाई देते हैं तो उन सपनों का क्या अर्थ होता है। सपने में शिवलिंग देखना अगर आप सपने में शिवलिंग देखते हैं तो ये आपके लिए शुभ संकेत है। इस सपने का अर्थ है कि आप पिछले जन्म में भगवान शिव के भक्त थे। अब आपकी सभी समस्याओं के खत्म होने का वक्त आ गया है। आपको जल्द ही तरक्की होने वाली है और यश मिलने वाला है। सपने में त्रिशूल दिखनासपने में त्रिशूल का दिखना भी शुभ संकेत हैं। इसका मतलब है कि सभी कष्ट दूर होने वाले हैं।  सपने में शिवजी का उग्र रूप यदि सपने में भगवान शिव उग्र रूप में तांडव करते हुए नजर आते हैं तो आपको सतर्क रहने की जरूरत है। यह अशुभ संकेत देता है। शिव जी का रौद्र रूप उनके क्रोध को दर्शाता है। सपने में भगवान शिव का आना नींद में सपना आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन क्या आपको पता है कि ये सपने आने वाले भविष्य की ओर भी इशारा करते हैं। स्वप्नों में मिलने वाले इन्हीं संकेतों को समझाने के लिए जहां कुछ लोग स्वप्न शास्त्र की मदद लेते हैं, वहीं कुछ लोग इस संबंध में या तो जानकारों से मदद लेते है या कुछ लोग इसकी जानकारी के अभाव में कुछ समझ ही नहीं पाते। शिवजी को क्यों प्रिय है सावन का महीना, जानिए 5 रहस्य

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सोमवार के व्रत में जरूर सुनें ये कथा, मिलेगी श‍िव-पार्वती की कृपा – KARMASU

सोमवार का दिन शंकर भगवान को समर्पित होता है. आज के दिन भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. कुछ लोग आज के दिन व्रत भी रखते ॐ जय शिव ओंकारा… आरती जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ॐ जय शिव ओंकारा हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है. माना जाता है सोमवार के दिन भगवान शिव की आराधना करने से मन चाहा फल मिलता है. सोमवार का व्रत दिन के तीसरे पहर तक होता है. इस व्रत मे फलाहार का कोई खास नियम नहीं है. इस व्रत में रात मे केवल एक बार भोजन किया जाता है. व्रत में शिव, पार्वती की पूजा करते हैं. सोमवार के व्रत में पूजा के बाद कथा सुननी चाहिए. सोमवार भगवान शिव व्रत कथा एक बार की बात है एक शहर में एक साहूकार रहता था। उनके घर में पैसों की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी, जिससे वे बहुत दुखी रहते थे। पुत्र प्राप्ति के लिए वे प्रत्येक सोमवार का व्रत रखते थे और शिव मंदिर में जाकर पूरी श्रद्धा से भगवान शिव और पार्वती जी की पूजा करते थे। उनकी भक्ति देखकर एक दिन माता पार्वती प्रसन्न हुई और उन्होंने भगवान शिव से उस साहूकार की इच्छा पूरी करने का अनुरोध किया। पार्वती की इच्छा सुनकर, भगवान शिव ने कहा कि ‘हे पार्वती, इस दुनिया में हर प्राणी को उसके कर्मों का फल मिलता है और उसके भाग्य में जो कुछ भी है उसे भुगतना पड़ता है।’ लेकिन पार्वती जी ने साहूकार की भक्ति का सम्मान करने के लिए उसकी इच्छाओं को पूरा करने की इच्छा व्यक्त की। माता पार्वती के अनुरोध पर शिव ने साहूकार को पुत्र प्राप्त करने का वरदान दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसके बच्चे की उम्र केवल बारह वर्ष होगी। साहूकार माता पार्वती और भगवान शिव की बातचीत सुन रहा था। वह इससे न तो खुश था और न ही दुखी। वह पहले की तरह शिव की पूजा करता रहा। कुछ समय बाद साहूकार के एक पुत्र का जन्म हुआ। जब बालक ग्यारह वर्ष का हुआ तो उसे पढ़ने के लिए काशी भेज दिया गया। साहूकार ने बेटे के मामा को बुलाकर ढेर सारा पैसा दिया और कहा कि वह इस बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने के लिए काशी ले जाए और रास्ते में यज्ञ करे। जहां कहीं भी यज्ञ किया जाता है, वहां ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है। इसी प्रकार दोनों चाचा-भतीजे यज्ञ करके और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर काशी की ओर चले गए। रात के समय एक नगर था जहाँ नगर के राजा की पुत्री का विवाह हुआ था। लेकिन जिस राजकुमार से वह शादी करने वाली थी, वह अंधी थी। राजकुमार ने इस तथ्य को छिपाने की एक योजना के बारे में सोचा कि उसके बेटे की एक आंख नहीं है। सोमवार को करें शिव मंत्र का जाप, पूरी होगी मनोकामना साहूकार के बेटे को देखकर उसके मन में एक विचार आया। उसने सोचा क्यों न इस लड़के को दूल्हा बना कर राजकुमारी से शादी करा दी जाए। शादी के बाद, मैं इसे पैसे के साथ भेज दूंगा और राजकुमारी को अपने शहर ले जाऊंगा। लड़के की शादी दूल्हे के कपड़े पहन कर राजकुमारी से कर दी गई। लेकिन साहूकार का बेटा ईमानदार था। उसे यह उचित नहीं लगा। मौका पाकर उसने राजकुमारी की चुन्नी के किनारे पर लिखा कि ‘तुम्हारी शादी तो मुझसे हो गई है, लेकिन जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जाएगा, वह आंख का कान है। मैं काशी पढ़ने जा रहा हूँ। जब शिव मृत बालक के पास गए तो उन्होंने कहा कि यह उसी साहूकार का पुत्र है, जिसे मैंने 12 वर्ष की आयु का वरदान दिया था। अब इसकी उम्र हो गई है। लेकिन माता पार्वती ने कहा, हे महादेव, कृपया इस बच्चे को और उम्र दें, नहीं तो इसके माता-पिता भी इसके अलग होने के कारण तड़प-तड़प कर मर जाएंगे। माता पार्वती के अनुरोध पर भगवान शिव ने बालक को जीवित रहने का वरदान दिया। शिव की कृपा से बालक जीवित हो गया। लड़का अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने मामा के साथ अपने शहर चला गया। दोनों उसी शहर पहुंचे जहां उनकी शादी हुई थी। उस नगर में यज्ञ का भी आयोजन किया। लड़के के ससुर ने उसे पहचान लिया और महल में ले जाकर उसकी देखभाल की और अपनी बेटी को विदा किया। यहां साहूकार और उसकी पत्नी भूखे-प्यासे अपने बेटे का इंतजार कर रहे थे। उसने कसम खाई थी कि अगर उसे अपने बेटे की मौत की खबर मिली तो वह भी अपनी जान दे देगा, लेकिन अपने बेटे के जीवित रहने की खबर पाकर वह बहुत खुश हुआ। उसी रात भगवान शिव ने व्यापारी के सपने में आकर कहा – हे श्रेष्ठी, मैंने सोमवार का व्रत करके और व्रत कथा सुनकर प्रसन्न होकर आपके पुत्र को लंबी आयु दी है। इसी प्रकार जो कोई भी सोमवार का व्रत रखता है या कथा को सुन और पढ़ता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सोमवार को जरूर करें ये महाउपाय, आत्मविश्वास में होगी वृद्धि और दूर होगी धन से जुड़ी समस्या  मान्यताओं के अनुसार जो भक्त सच्चे मन से सोमवार के दिन व्रत करता है और भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा अर्चना करता है उस पर शिव शम्भू के साथ मां पार्वती भी प्रसन्न होती हैं। हिंदू धर्म में देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन शिव जी के भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त सच्चे मन से सोमवार के दिन व्रत करता है और भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा अर्चना करता है उस पर शिव शम्भू के साथ मां पार्वती भी प्रसन्न होती हैं। इसके अलावा अविवाहित लड़कियां यदि सोमवार का व्रत करती हैं, तो उन्हें योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। वहीं ज्योतिष शास्त्र में महादेव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार के कुछ उपाय बताए गए हैं, जिन्हें करने से

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सोमवार के व्रत में जरूर सुनें ये कथा, मिलेगी श‍िव-पार्वती की कृपा

सोमवार का दिन शंकर भगवान को समर्पित होता है. आज के दिन भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. कुछ लोग आज के दिन व्रत भी रखते हैं ताकि शिव की विशेष कृपा प्राप्त की जा सके. बाबा भोलेनाथ के आशिर्वाद के लिए आप भी सोमवार का व्रत कर रहे हैं, तो शिव व्रत कथा को पढ़कर या सुनकर इस उपवास को पूरा करें (सोमवार व्रत कथा) पौराणिक कथा के अनुसार, किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसका घर धन-धान्य से भरा हुआ था। लेकिन वह निःसंतान था। जिसके कारण वह बहुत दुखी रहता था। संतान प्राप्ति के लिए वह प्रत्येक सोमवार के दिन व्रत रखता था और पूरी श्रद्धा के साथ शिव मंदिर जाकर भगवान शिव संग माता पार्वती की पूजा करता था। उसकी भक्ति देख मां पार्वती प्रसन्न हो गईं। फिर भगवान शिव से उस साहूकार की मनोकामना पूरी करने का निवेदन किया। माता पार्वती की इच्छा सुनकर शिवजी ने कहा ‘हे पार्वती! इस संसार में हर प्राणी को उसके कर्मों का फल मिलता है। जिसके भाग्य में जो होता है उसे भोगना ही पड़ता है।’ पर फिर भी पार्वती जी अपनी बातों पर अड़ी रही और साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने की इच्छा जताई। महाश‍िवरात्रि पर जानें श‍िव-पार्वती के अप्रत‍िम प्रेम और व‍िवाह की यह रोचक कथा माता पार्वती के अनुरोध पर भगवान ने साहूकार को संतान-प्राप्ति का वरदान तो दिया। लेकिन उस बालक की आयु कम यानी केवल बारह वर्ष होगी कहकर चले गए। ये सारी बात उधर साहूकार सुन रहा था। वह न तो खुश था और न ही दुखी। वह पहले की तरह ही शिवजी की विधिवत पूजा करता रहा। कुछ समय के बाद साहूकार के पुत्र का जन्म हुआ। जब वह बालक 11वर्ष का हुआ तो साहूकार ने उसे उसके मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेज दिया। उसके साथ पिता ने बहुत सारा धन दिया और काशी विद्या प्राप्ति के लिए ले जाने की आज्ञा दी। साथ ही जाते जाते मार्ग में यज्ञ कराने का भी उपदेश दिया। इसके अलावा जहां भी यज्ञ हो वहां ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा जरूर देने का सलाह देते हुए जाने को कह दिया। इस तरह दोनों मामा-भांजे साहूकार की आज्ञा का पालन करते हुए चल पड़े। रात में एक नगर में विश्राम करने के लिए रुके। उस नगर में एक राजकुमारी का विवाह था। लेकिन जिस राजकुमार से विवाह होने जा रहा था वह वास्तव में एक आंख से काना था। राजकुमार के पिता इस बात को छिपाने के लिए एक चाल सोची। कपटी राजा ने साहूकार के पुत्र को देखकर राजकुमारी से विवाह कराने और विवाह के बाद धन का लालच देकर इसे विदा करने का निर्णय लिया। इसी तरह लड़के को जबरदस्ती दूल्हे के वस्त्र पहनाकर राजकुमारी से विवाह कर दिया। लेकिन साहूकार के पुत्र को यह बात न्यायसंगत नहीं लगी। उसने मौका मिलते ही राजकुमारी की चुन्नी के पल्ले पर अपनी बात लिख दी कि ‘तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है लेकिन जिस राजकुमार के साथ तुम्हें विदा किया जाएगा वह असल में एक आंख से काना है। मैं तो काशी पढ़ने जा रहा था।’ जैसे ही राजकुमारी की नजर चुन्नी पर पड़ी तो वह अपने माता-पिता को यह बात बताई। राजा ने अपनी पुत्री को विदा नहीं किया और बारात वापस लौटा दी। दूसरी ओर, मामा-भांजा काशी पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने यज्ञ कराया। जिस दिन लड़के की आयु 12 साल होने वाली थी, उसी दिन यज्ञ रखवाया गया था। लड़के तबीयत कुछ खराब होने लगती है। तब उसके मामा ने कहा कि तुम कमरे के अंदर आराम कर लो। कुछ ही देर में उस बालक की मृत्यु हो गई। मृत भांजे की हालत देख मामा ने विलाप शुरू कर दिया। संयोगवश उसी समय माता पार्वती और शिव जी गुजर रहे थे। पार्वती ने एक बार फिर भगवान से कहा- हे स्वामी! मैं इसके रोने का स्वर सहन नहीं कर पा रही हूं। कृपा कर के आप इस व्यक्ति के कष्ट को दूर करें। शिवजी उस मृत बालक को देखकर बोले यह उसी साहूकार का पुत्र है, जिसे मैंने 12 वर्ष की आयु का वरदान दिया था और अब इसकी 12 वर्ष पूरी हो चुकी है। लेकिन माता पार्वती इस बात से काफी दुखी थी। उन्होंने महादेव से आग्रह किया और बोलीं, हे महादेव! आप इस बालक की आयु देने की कृपा करें। इस पर भगवान शिव ने उस लड़के को पुनः जीवित होने का वरदान दे दिया। लड़के का प्राण उसके शरीर में वापस आ गया। फिर शिक्षा पूरी करके लड़का मामा के साथ अपने नगर की ओर वापस चल पड़ा। दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे, जहां लड़के का विवाह एक राजकुमारी से हुआ था। नगर के राजा ने उस लड़के को पहचान लिया और महल में ले जाकर उसकी खातिरदारी की। फिर खूब सारा धन और आशीर्वाद देकर अपनी पुत्री को विदा किया। इधर साहूकार और उसकी पत्नी भूखे-प्यासे रहकर बेटे की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अपने बेटे की मृत्यु के समाचार पर प्राण त्याग देने का प्रण कर रखा था। लेकिन बेटे कोणाही सलामत और जीवित होने का समाचार पाकर वह बेहद प्रसन्न हुए। उसी रात भगवान शिव साहूकार के सपने में आए और बोले – हे मनुष्य! मैंने तुम्हारे सोमवार व्रत रखने, इसे विधिवत पूरा करने और व्रत कथा को सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लम्बी आयु प्रदान की है। उसकी भक्ति देखकर एक दिन मां पार्वती प्रसन्न हो गईं और भगवान शिव से उस साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने का आग्रह किया. पार्वती जी की इच्छा सुनकर भगवान शिव ने कहा कि ‘हे पार्वती, इस संसार में हर प्राणी को उसके कर्मों का फल मिलता है और जिसके भाग्य में जो हो उसे भोगना ही पड़ता है.’ लेकिन पार्वती जी ने साहूकार की भक्ति का मान रखने के लिए उसकी मनोकामना पूर्ण करने की इच्छा जताई. माता पार्वती के आग्रह पर शिवजी ने साहूकार को पुत्र-प्राप्ति का वरदान तो दिया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसके बालक की आयु केवल बारह वर्ष होगी. माता पार्वती और भगवान शिव की बातचीत को साहूकार सुन रहा था. उसे ना तो इस बात

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महाश‍िवरात्रि पर जानें श‍िव-पार्वती के अप्रत‍िम प्रेम और व‍िवाह की यह रोचक कथा

माता पार्वती और महादेव का अप्रत‍िम प्रेम माता पार्वती और महादेव के अप्रत‍िम प्रेम से पूरा संसार वाक‍िफ है। कहते हैं क‍ि उनके आगे प्रेम की पराकाष्‍ठा भी छोटी महसूस होने लगती है। कई ऐसे पौराण‍िक क‍िस्‍से भी सुनने को म‍िलते हैं जहां देवी-देवताओं ने स्‍वयं भोलेनाथ के प्रेम को असीम और अनन्‍य बताया है। शायद यही वजह है क‍ि महादेव ने मां पार्वती को अपने आधे अंग पर स्‍थान द‍िया और स्‍वयं अर्धनारीश्‍वर कहलाए। तो आइए आज महा श‍िव रात्रि के पव‍ित्र मौके पर आपको बताते हैं मां पार्वती और महादेव के प्रेम और उनके व‍िवाह की रोचक कथा सोमवार को करें शिव मंत्र का जाप, पूरी होगी मनोकामना महादेव को पाने के ल‍िए मां का कठोर संकल्‍प माता पार्वती भगवान शिव को मन ही मन अपना पति मान चुकी थीं। वह दृढ़ संकल्पित थीं कि विवाह करेंगी तो भोलेनाथ के साथ ही करेंगी। उधर देवता भी यही चाहते थे। देवताओं ने माता पार्वती के विवाह का प्रस्‍ताव कन्‍दर्प से भगवान शिव के पास भेजा। जिसे भोलेनाथ ने ठुकरा दिया और उसे अपने तीसरे नेत्र से भस्‍म भी कर दिया। लेकिन माता इससे भी विचलित नहीं हुईं और कठोर तपस्‍या शुरू कर दी। तब रीझ गए भोलेबाबा माता पार्वती पर देवी पार्वती की तपस्‍या से तीनों लोक में हाहाकार मच गया। बडे़-बड़े पहाड़ डगमगाने लगे। देवता भी मदद के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे। भोले बाबा भी पार्वती के तप से प्रसन्‍न हुए और उन्‍हें दर्शन देकर कहा कि वह किसी राजकुमार से विवाह कर लें। उन्‍होंने कहा कि उनके साथ रहना आसान नहीं होगा। लेकिन माता पार्वती ने कहा कि वह उन्‍हें ही अपना पति मान चुकी हैं। अब उनके सिवा किसी और से विवाह नहीं करेंगी। पार्वती के इस असीम प्रेम को देखकर भोलेनाथ विवाह के लिए मान गए। जब अनोखी बारात लेकर श‍िव चले ब्‍याहने पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव जब माता पार्वती को ब्‍याहने पहुंचे तो उनके साथ संपूर्ण जगत के भूत-प्रेत थे। इसके अलावा डाकिनियां, शाकिनियां और चुड़ैलें भी शिव जी की बारात में शामिल थीं। उन्‍होंने ने ही भोलेनाथ का भस्‍म से श्रृंगार किया। हड्डियों की माला पहनाई। इस अनोखी बारात को देखकर तो रानी मैना देवी यानी कि माता पार्वती की मां हैरान रह गईं। उन्‍होंने अपनी बेटी का विवाह करने से इंकार कर दिया। प्रेम की प्राप्ति के ल‍िए जब मां को मनाया शिव के इस रूप को देखकर माता पार्वती ने उनसे आग्रह किया कि वह विवाह की परंपरा के अनुसार तैयार होकर आएं। इसके बाद भोलेनाथ ने उनकी विनती स्‍वीकार की और दुल्‍हे के रूप में तैयार हुए। उनके इस अनुपम सौंदर्य को देखकर रानी मैना देवी चकित रह गईं। इसके बाद सृष्टि रचयिता श्री ब्रह्मा जी की मौजूदगी में देवी पार्वती और भोलेनाथ का विवाह संपन्‍न हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव -पार्वती के विवाह की यह तिथि ही महा शिव रात्रि कहलाई। इसल‍िए व‍िशेष है महाश‍िवरात्रि का द‍िन मान्‍यता है कि महा शिव रात्रि का व्रत करने से भक्‍तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और शिव जी के साथ-साथ माता पार्वती का भी आशीर्वाद मिलता है। कुंवारी कन्‍याओं को मनचाहा वर मिलता है। इसके लिए विद्वानजन बताते हैं कि कुंवारी कन्‍याओं को इस दिन नित्‍य कर्म से निवृत्‍त होकर व्रत करना चाहिए। इसके बाद किसी भी ऐसे शिव मंदिर में जाएं जहां पर शिव-पार्वती एक साथ विराजते हों। पार्वतीजी को सुहाग का समान अर्पित करते हुए पार्वती और शिव को लाल रंग कलावे से 7 बार बांध देना चाहिए। इसके बाद शीघ्र विवाह की प्रार्थना करनी चाहिए। वहीं सुहागिन स्त्रियों को इस पूजा से अखंड सौभाग्‍य का वरदान मिलता है।

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सोमवार को करें शिव मंत्र का जाप, पूरी होगी मनोकामना

सोमवार का दिन भोलेनाथ का होता है. इस दिन महादेव के मंत्रों का जाप करने से महादेव जल्द प्रसन्न होते हैं. सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम दिन होता है. सभी देवी देवताओं में सबसे सरल स्वभाव के देवता भोलेनाथ को माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन पूजा अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यहां हम आपको भगवान शिव के कुछ ऐसे मंत्र बता रहें हैं, जिनका जाप सोमवार को करने से भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. सावन में क्यों होता है भगवान शिव का जलाभिषेक जानें वजह भगवान शिव के कुछ मंत्र शिव नमस्कार मंत्रनम: श‍िव जी को प्रसन्‍न करना है तो इस मंत्र का जाप पूजन से पहले करें.शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।। पंचाक्षरी मंत्रइस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से सभी संकटों तथा कष्टों से मुक्ति मिलती है ॐ नम: शिवाय। श‍िव नामावली मंत्रसोमवार को पूजा करते समय नामावली मंत्रों का जाप करना अधिक फलदायी माना जाता है.।। श्री शिवाय नम:।।।। श्री शंकराय नम:।।।। श्री महेश्वराय नम:।।।। श्री सांबसदाशिवाय नम:।।।। श्री रुद्राय नम:।।।। ओम पार्वतीपतये नम:।।।। ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।। महामृत्युंजय मंत्रइस मंत्र का जाप नियमित रूप से करने से रोग, दोष तथा सभी सकंट समाप्त हो जाते हैं.ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ शिव गायत्री मंत्रगायत्री मंत्र का जाप करने से पितृ दोष, कालसर्प दोष, राहु केतु तथा शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है.।। ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात ।। लघु महामृत्युंजय मंत्रजिन लोगों के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना कठिन होता, उन्हें लघु महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए इससे असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं.ॐ हौं जूं सः

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