2022

तुलसी और विष्णु की कहानी

 सावर्णि मुनि की पुत्री तुलसी अपूर्व सुंदरी थी। उनकी इच्छा थी कि उनका विवाह भगवान नारायण के साथ हो। इसके लिए उन्होंने नारायण पर्वत की घाटी में स्थित बदरीवन में घोर तपस्या की। दीर्घ काल तक तपस्या के उपरांत ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर दर्शन दिया और वर मांगने को कहा।तुलसी ने कहा- “सृष्टिकर्ता ब्रह्मदेव

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गजेन्द्र मोक्ष की कहानी 

अति प्राचीन काल की बात है। द्रविड़ देश में एक पाण्ड्यवंशी राजा राज्य करते थे। उनका नाम था इंद्रद्युम्न। वे भगवान की आराधना में ही अपना अधिक समय व्यतीत करते थे। यद्यपि उनके राज्य में सर्वत्र सुख-शांति थी। प्रजा प्रत्येक रीति से संतुष्ट थी तथापि राजा इंद्रद्युम्न अपना समय राजकार्य में कम ही दे पाते

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वराह अवतार कथा – जब हिरण्याक्ष का वध करने के लिए विष्णु बने वराह

एक बार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनत-सनकादि भगवान विष्णु के दर्शन करने वैकुंठ धाम पहुंचे। वैकुंठ में विष्णु धाम के द्वार पर भगवान के दो पार्षद जय-विजय द्वारपाल के रूप में बैठे थे। इन दिगम्बर साधुओं को देखकर पहले तो उन्हें हंसी आ गई, फिर पूछा- “आप लोग कौन है ? ऐसे नंग-धड़ंग यहां

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कोकिलावन – यहाँ कोयल दर्शन दिए थे, श्री कृष्ण ने शनिदेव को

 दिल्ली से 128 किमी की दूरी पर तथा मथुरा से 60 किमी की दूरी पर स्थित कोसी कला स्थान पर सूर्यपुत्र भगवान शनिदेव जी का एक अति प्राचीन मंदिर स्थापित है। इसके आसपास ही नंदगांव, बरसाना एवं श्री बांके बिहारी मंदिर स्थित है। कोकिलावन धाम का यह सुन्दर परिसर लगभग 20 एकड में फैला है।

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असावरी देवी – यह है भगवान शिव कि बहन, जानिए कैसे और क्यों हुई उत्पन्न?

पौराणिक कथा के अनुसार जब देवी पार्वती ने भगवान शिव से विवाह किया तो वह खुद को घर में अकेली महसूस करती थीं। उनकी इच्छा थी कि काश उनकी भी एक ननद होती जिससे उनका मन लगा रहता। लेकिन भगवान शिव तो अजन्मे थे, उनकी कोई बहन नहीं थी इसलिए पार्वती मन की बात मन

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क्यों होता है 12 साल में एक बार कुंभ मेले का आयोजन?

कुम्भ मेले का आयोजन चार स्थानों हरिद्वार, प्रयाग, नासिक तथा उज्जैन में होता है।  हर जगह कुम्भ मेले का आयोजन  12 साल में एक बार होता है। आइए जानते है क्या है इसका कारण-कुम्भ मेले के 12 वर्ष में एक बार आयोजित होने के पीछे दो मान्यताएं है। पहली ज्योतिष, दूसरी पौराणिक।ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार

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महाभारत युद्ध में पांण्डवों को जिताने के लिए श्री कृष्ण ने किये ये छल

महाभारत में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को बहुत ही चतुर और सभी कलाओं का जानकार बताया गया है। श्रीकृष्ण ने कई बार चतुराई का उपयोग करते हुए ऐसे काम किए, जिन्हें छल माना जाता है। यहां जानिए 5 ऐसे प्रसंग जब श्रीकृष्ण ने अपनी इस चतुराई का प्रयोग महाभारत युद्ध में पांडवों को जिताने में

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श्री राम और कंबंध राक्षस का प्रसंग

यह तब की बात है जब सीताजी को रावण, श्रीराम तथा लक्ष्मण की अनुपस्थिति मंं हरण कर ले गया था। जब तक दोनों वापस लौटे सीताजी कुटिया में नहीं थीं, यह देख श्रीराम व्याकुल हो उठे। वे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिरकार सीता कहां गईं, और उनकी खोज में दोनों जंगल की ओर

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आरंग- यहाँ कृष्ण ने ली थी राज मोरध्वज की परीक्षा, मांगा था उसके बेटे का मांस

छत्तीसगढ़ की राजधानी से करीब 30 किलोमीटर दूर रायपुर-कोलकाता हाईवे पर एक कस्बा है- आरंग। कहा जाता है कि यह कभी राजा मोरध्वज की राजधानी थी और इसकी पहचान एक समृद्ध नगर के रूप में थी। मोरध्वज की कहानी पुराणों में मिलती है जिसे कृष्ण ने आदेश दिया था कि वह अपने बेटे ताम्रध्वज को आरी

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क्यों गया में हर व्यक्ति चाहता है पिंडदान?

बिहार की राजधानी पटना से करीब 104 किलोमीटर की दूरी पर बसा है गया जिला। धार्मिक दृष्टि से गया न सिर्फ हिन्दूओं के लिए बल्कि बौद्ध धर्म मानने वालों के लिए भी आदरणीय है। बौद्ध धर्म के अनुयायी इसे महात्मा बुद्ध का ज्ञान क्षेत्र मानते हैं जबकि हिन्दू गया को मुक्तिक्षेत्र और मोक्ष प्राप्ति का

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गणेश चतुर्थी के दिन करें इन 8 मंत्रों का जाप, मिलेगा रोजगार, सुख-समृद्धि

श्री गणेश चतुर्थी व्रत कथा श्री गणेश चतुर्थी व्रत को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलन में है. कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती नर्मदा नदी के निकट बैठे थें. वहां देवी पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से समय व्यतीत करने के लिये चौपड खेलने को कहा. भगवान शंकर चौपड खेलने के लिये

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गणेश चतुर्थी के दिन करें इन 8 मंत्रों का जाप, मिलेगा रोजगार, सुख-समृद्धि

हरतालिका तीज के अगले दिन गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का व्रत रखा जाता है. इस दिन प्रथमपूज्य श्री गणेश जी का जन्म दिवस मनाया जाता है. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि को गणेश जी का जन्म हुआ था. इस वर्ष गणेश चतुर्थी 31 अगस्त को है. इस दिन आप अपने घर पर गणेश जी की मूर्ति की स्थापाना करके पूजन

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