2022

लक्ष्मी, सरस्वती और गंगा का परस्पर श्राप देना

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु की तीन पत्नियाँ- लक्ष्मी, गंगा और सरस्वती थीं। एक बार विष्णुजी ने गंगा के प्रति विशेष अनुराग और लगाव दिखाया जिसके फलस्वरूप सरस्वती के मन में ईर्ष्या भाव उत्पन्न हो गया। सरस्वती, तीनों पत्नियों के प्रति समान अनुरक्ति रखने के आर्योचित सिद्धांत की उपेक्षा करके गंगा के प्रति आसक्ति

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कहानी राजा पृथु की -अपने पिता वेन की दाहिनी भुजा के मंथन से पैदा हुए थे पृथु

ध्रुव के वनगमन के पश्चात उनके पुत्र उत्कल को राजसिंहासन पर बैठाया गया, लेकिन वे ज्ञानी एवम विरक्त पुरुष थे, अतः प्रजा ने उन्हें मूढ़ एवं पागल समझकर राजगद्दी से हटा दिया और उनके छोटे भाई भ्रमिपुत्र वत्सर को राजगद्दी पर बैठाया। उन्होंने तथा उनके पुत्रों ने लम्बी अवधि तक शासन किया। उनके ही वंश

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कहानी महर्षि दधीचि की- देवताओं की प्राण रक्षा के लिए किया था अपनी अस्थियों का दान

एक बार देवराज इंद्र के मन में अभिमान पैदा हो गया जिसके फलस्वरूप उसने देवगुरु बृहस्पति का अपमान कर दिया। उसके आचरण से क्षुब्ध होकर देवगुरु इंद्रपुरी छोड़कर अपने आश्रम में चले गए। बाद में जब इंद्र को अपनी भूल का आभास हुआ तो वह बहुत पछताया, क्योंकि अकेले देवगुरु बृहस्पति ही ऐसे व्यक्ति थे,

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केवल लक्ष्मण ही कर सकते थे मेघनाद(इंद्रजीत) का वध, पर क्यों? जानिए रामायण का एक अनजान सत्य

हनुमानजी की रामभक्ति की गाथा संसार में भर में गाई जाती है। लक्ष्मणजी की भक्ति भी अद्भुत थी। लक्ष्मणजी की कथा के बिना श्री रामकथा पूर्ण नहीं है अगस्त्य मुनि अयोध्या आए और लंका युद्ध का प्रसंग छिड़ गया भगवान श्रीराम ने बताया कि उन्होंने कैसे रावण और कुंभकर्ण जैसे प्रचंड वीरों का वध किया और

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जनक पैदा हुए थे अपने पिता निमि के शरीर मंथन से, यह है धर्म ग्रंथो में वर्णित श्रृष्टि के तीन अदभुत मंथन

आप में अधिकतर पाठक देवताओं और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के बारे में जानते है। लेकिन हमारे धर्म ग्रंथो में इसके अलावा भी अन्य मंथन का वर्णन है। आज हम आपको तीन ऐसे ही मंथन की कहानियां बता रहे है। ये तीन मंथन इस प्रकार है –1. सागर मंथन2. राजा निमि के शरीर

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मोहिनी और विष्णु भक्त रुक्मांगद की कहानी

 प्राचीन काल में रुक्मांगद नामक एक प्रसिद्ध सार्वभौम नरेश थे। भगवान की आराधना ही उनका जीवन था। वे चराचार जगत में अपने आराध्य भगवान हषीकेश के दर्शन करते तथा भगवान विष्णु की सेवा की भावना से ही अपने राज्य का संचालन करते थे। वे सभी प्राणियों पर क्षमा भाव रखते थे।राजा रुक्मांगद ने अपने जीवन

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राधा जन्म की कहानी – ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार मां के गर्भ से नहीं जन्मी थी राधा 

 धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन व्रज में श्रीकृष्ण के प्रेयसी राधा का जन्म हुआ था। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, राधा भी श्रीकृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं, उनका जन्म माता के गर्भ

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उच्ची पिल्लयार मंदिर- मान्यता है की यहां विभीषण ने किया था श्रीगणेश पर वार, जानिए क्यों 

भगवान गणेश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है उच्ची पिल्लयार मंदिर (Ucchi Pillayar Temple) जो की तमिलनाडू के तिरुचिरापल्ली (त्रिचि) नामक स्थान पर रॉक फोर्ट पहाड़ी की चोटी पर बसा बसा हुआ है। यह मंदिर लगभग 273 फुट की ऊंचाई पर है और मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 400 सिढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है।

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जानिए कैसे हुआ भागीरथी गंगा से पहले,”पंच गंगाओं “का धरती पर अवतरण

हिन्दू धर्म ग्रंथो के अनुसार इस धरती पर भागीरथी गंगा के आने से पहले ही पंच गंगाओं का धरती पर अवतरण हो चूका था। इन पंच गंगाओं का जहाँ अवतरण हुआ था वो जगह “पंचनद तीर्थ” कहलाती है। आइए जानते है कैसे हुआ पंच गंगाओं का धरती पे आगमन ? रिषी शालंकायन के पुत्र शिलाद

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महाभारत प्रसंग- जब एक स्त्री के देखने मात्र से काले हो गए थे युधिष्ठिर के पैरों के नाखून

शास्त्रों में महाभारत को पांचवां वेद कहा गया है। महाभारत की कथा जितनी बड़ी है, उतनी ही रोचक भी है। इसके रचयिता महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास हैं। इस ग्रंथ में कुल एक लाख श्लोक हैं, इसलिए इसे शतसाहस्त्री संहिता भी कहते हैं।हम अब तक आपको महाभारत में वर्णित अनेकों कथाएं व प्रसंग बता चुके है। आज

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जब सुदर्शन चक्र के भय से भागे दुर्वासा

अम्बरीष (Ambarish) बड़े धर्मात्मा राजा थे। उनके राज्य में बड़ी सुख शांति थी। धन, वैभव,राज्य, सुख, अधिकार, लोभ, लालच से दूर निश्चिन्त होकर वह अपना अधिकतर समय ईश्वर भक्ति में लगाते थे। अपनी सारी सम्पदा, राज्य आदि सब कुछ वे भगवान विष्णु की समझते थे। उन्हीं के नाम पर वह सबकी देखभाल करते और स्वयं

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रहस्यमई “चूडामणि” का अदभुत रहस्य “

आज हम अपने पाठकों को रामायण में वर्णित चूडामणि की कहानी (Story of Chudamani) बता रहे है। इस कहानी में आप जानेंगे की- १–कहाँ से आई चूडा मणि ? २–किसने दी सीता जी को चूडामणि ? ३–क्यों दिया लंका में हनुमानजी को सीता जी ने चूडामणि ? ४–कैसे हुआ वैष्णो माता का जन्म? चौ.-मातु मोहि

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