2022

हरतालिका तीज की पूजा के समय पढ़ें यह व्रत कथा, पूर्ण होंगी मनोकामनाएं

हरतालिका तीज व्रत हर साल भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि को रखा जाता है. इस दिन सुहागन महिलाएं और विवाह योग्य युवतियां ​निर्जला व्रत रखती हैं और कठोर नियमों का पालन करती हैं. सुहागन महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन और पति के दीर्घायु के लिए और युवतियां मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं. उनको पूर्ण विश्वास होता

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जानिए कैसे हुई गरुड़ और नागों की उत्पत्ति और कैसे बने गरुड़ विष्णु के वाहन ?

आज हम आपको एक पौराणिक कथा बता रहे है जिसका वर्णन महाभारत के आदि पर्व में मिलता है। यह कथा बताती है की इस धरती पर गरुड़ और नागों की उत्पत्ति कैसे हुई, क्यों गरुड़ नाग के दुशमन हुए, क्यों नागो की जीभ आगे से दो हिस्सों में बटी हुई है और कैसे गरुड़, भगवान

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जब विष्णु जी और लक्ष्मी जी को बनना पड़ा अश्व और अश्वी

एक बार भगवान विष्णु वैकुण्ठ लोक में लक्ष्मी जी के साथ विराजमान थे। उसी समय उच्चेः श्रवा नामक अश्व पर सवार होकर रेवंत का आगमन हुआ। उच्चेः श्रवा अश्व सभी लक्षणों से युक्त, देखने में अत्यंत सुन्दर था। उसकी सुंदरता की तुलना किसी अन्य अश्व से नहीं की जा सकती थी। अतः लक्ष्मी जी उस अश्व

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ऐतरेय ब्राह्मण की कथा

 संसार में सबसे प्राचीन ग्रन्थ हमारे वेद हैं  ये चार हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद। प्रत्येक वेदों को दो भागों में बंटा है। जिन्हें मन्त्र तथा ब्राह्मण कहा जाता है। जिन ग्रन्थों में मन्त्रों का संग्रह है वे सहिंता पुकारे गए। ब्राह्मण के तीन उप भाग हुए ब्राह्मण आरण्यक तथा उपनिषद। ब्राह्मण ग्रन्थ मनुष्यों

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जानिए किस कारण कुरुक्षेत्र में ही लड़ा गया था महाभारत का युद्ध?

महाभारत के अनुसार, भरतवंश में राजा कुरु ने जिस भूमि को बार-बार जोता, वह स्थान कुरुक्षेत्र कहलाया। राजा कुरु को देवराज इंद्र ने वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति इस स्थान पर युद्ध करते हुए मरेगा, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होगी। यही कारण है कि महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में लड़ा गया। ऐसे आगे

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भगवान गणेश से जुडी 6 कहानियां

भगवान श्रीगणेश की कथाओं का वर्णन अनेक ग्रंथों में मिलता है। श्रीगणेश ने कई लीलाएं ऐसी की हैं, जो कृष्ण की लीलाओं से मिलती-जुलती हैं। इन लीलाओं का वर्णन मुद्गलपुराण, गणेशपुराण, शिवपुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। आज हम आपको भगवान श्रीगणेश से जुड़ी कुछ ऐसी ही रोचक कथाएं बता रहे हैं, जिसके बारे

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इस चाल से दुर्योधन ने पांडवों के मामा शल्य को युद्ध में कर लिया था अपनी तरफ

महाभारत युद्ध न‌िश्च‌ित समझकर कौरव और पांडव, दोनों पक्ष ने देश-देशांतर के नरेशों के पास सहायता के लिए अपने दूत भेजे। मद्रराज शल्य को भी समाचार मिला।वे अपने महारथी पुत्रों के साथ एक अक्षौहिणी सेना लेकर पांडवों पास चले। शल्य की बहन माद्री का विवाह पांडु से हुआ था। नकुल और सहदेव उनके सगे भांजे

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रेणुका तीर्थ- मान्यता है की यहां भगवान परशुराम से मिलने आज भी आती हैं मां रेणुका

मां-पुत्र के पावन मिलन का श्री रेणुका जी मेला हिमाचल प्रदेश के प्राचीन मेलों में से एक है। जो हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी से पूर्णिमा तक उत्तरी भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री रेणुका में मनाया जाता है। जनश्रुति के अनुसार इस दिन भगवान परशुराम जामूकोटी से वर्ष में एक

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मान्यता है की आज भी जिंदा है अश्वत्थामा, जानिए उनसे जुडी कुछ रोचक बातें।

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत में ऐसे अनेक पात्र हैं, जिनके बारे में लोग जानना चाहते हैं। अश्वत्थामा भी उन्हीं में से एक हैं। अश्वत्थामा महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक हैं। हिंदू धर्म में जिन 8 महापुरुषों को अमर माना गया है, अश्वत्थामा भी उन्हीं से से एक है। मृत्यु से पहले दुर्योधन

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शिव कथा जानिए भगवान शिव क्यों कहलाए त्रिपुरारी

कार्तिक मास की पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के त्रिपुरों का नाश किया था। त्रिपुरों का नाश करने के कारण ही भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी भी प्रसिद्ध है। भगवान शिव ने कैसे किया त्रिपुरों का नाश, ये पूरी कथा

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समुद्र मंथन से निकले थे ये 14 रत्न, जाने इनके पीछे छिपे अर्थ

 पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन धनवंतरि त्रयोदशी मनाई जाती है।मान्यता के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है। समुद्र मंथन से धन्वतंरि के साथ अन्य रत्न भी निकले थे। आज हम आपको

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जानिए क्यों मनाते है धन तेरस और क्यों जलाते है यम के नाम का दीपक?

दिवाली का त्योहार 5 दिनों का होता है, जो कि धन तेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है। पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन धनवंतरि त्रयोदशी मनाई जाती है। जिसे आम बोलचाल में ‘धन तेरस’ कहा जाता है। यह दिन मूल रूप से आयुर्वेद के जनक

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