March 13, 2022

जानें क्यों नहीं देखनी चाहिए जलती हुई होलिका

होली का त्योहार आने में अब कुछ दिन ही बाकी हैं। होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन होलिका दहन किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इसके अगले दिन चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को रंग वाली होली खेली जाती है। इस साल होलिका दहन 17 मार्च

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क्या होता है खरमास, इस दौरान क्यों नहीं किए जाते कोई भी शुभ कार्य?

खरमास क्या होता हैजब से सूर्य बृहस्पति राशि मीन में प्रवेश करता है तभी से खरमास या मलमास या अधिकमास शुरू हो जाता है. हिन्दू धर्म में यह महीना शुभ नहीं माना जाता है, इसलिए इस महीने में नए या शुभ काम नहीं किए जाते हैं. खरमास महीने के अपने कुछ अलग नियम बताए गए

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पापमोचनी एकादशी व्रत कथा (Papmochani Ekadashi Vrat Katha)

पापमोचनी एकादशी का महत्त्व:अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से कहा: हे मधुसूदन! आपने फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात आमलकी एकादशी के बारे मे विस्तार पूर्वक बतलाया। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष मे आने वाली एकादशी का क्या नाम है? तथा उसकी विधि क्या है? कृपा करके आप मेरी बढ़ती हुई जिज्ञासा को शांत करें।भगवान श्रीकृष्ण ने कहा: हे

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कोकिला व्रत कथा (Kokila Vrat Katha)

कोकिला व्रत से जुड़ी कथा का संबंध भगवान शिव एवं माता सती से जुड़ा है। माता सती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए लम्बे समय तक कठोर तपस्या को करके उन्हें पाया था। कोकिला व्रत कथा का वर्णन शिव पुराण में मिलता है। इस कथा के अनुसार देवी सती ने भगवान को अपने जीवन

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देवशयनी एकादशी व्रत कथा (Devshayani Ekadashi Vrat Katha)

देवशयनी एकादशी का महत्त्व:ब्रह्म वैवर्त पुराण में देवशयनी एकादशी के विशेष माहात्म्य का वर्णन किया गया है। इस व्रत से प्राणी की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी  कहते हैं, के बाद आती है।आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इसी एकादशी से

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मंगला गौरी व्रत कथा (Mangla Gauri Vrat Katha)

श्रावण माह के प्रत्येक मंगलवार को माँ गौरी को समर्पित यह व्रत मंगला गौरी व्रत के नाम से प्रसिद्ध है। मंगला गौरी व्रत महिलाओं के बीच उनके पति की लंबी आयु के लिए जाना जाता है।मंगला गौरी पौराणिक व्रत कथा :एक समय की बात है, एक शहर में धरमपाल नाम का एक व्यापारी रहता था। उसकी पत्नी

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वरलक्ष्मी व्रत कथा (Varalakshmi Vrat Katha)

कथा के अनुसार बहुत पौराणिक समय मैं मगध राज्य में कुण्डी नामक एक नगर था। पुरातन काल की कथाओं के अनुसार स्वर्ग की कृपा से इस नगर का निर्माण हुआ था। यह नगर मगध राज्य के मध्य स्थापित था। इस नगर में एक ब्राह्मणी नारी चारुमति अपने परिवार के साथ रहती थी। चारुमति कर्त्यव्यनिष्ठ नारी

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भाद्रपद संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा (Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha)

पूर्वकाल में राजाओं में श्रेष्ठ राजा नल था उसकी रूपवती रानी का नाम दमयन्ती था। शाप वश राजा नल को राज्यच्युत खोना पड़ा और रानी के वियोग से कष्ट सहना पड़ा। तब दमयन्ती ने इस व्रत के प्रभाव से अपने पति को प्राप्त किया।राजा नल के ऊपर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा था। डाकुओं ने

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हरतालिका तीज व्रत कथा (Hartalika Teej Vrat Katha)

एक कथा के अनुसार माँ पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर गंगा के तट पर अपनी बाल्यावस्था में अधोमुखी होकर घोर तप किया। इस दौरान उन्होंने अन्न का सेवन नहीं किया। काफी समय सूखे पत्ते चबाकर ही काटे और फिर कई वर्षों तक

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ऋषि पंचमी व्रत कथा (Rishi Panchami Vrat Katha)

विदर्भ देश में उत्तंक नामक एक सदाचारी ब्राह्मण देव रहते थे। उनकी पत्नी बड़ी पतिव्रता थी, जिसका नाम सुशीला था। उन ब्राह्मण के एक पुत्र तथा एक पुत्री दो संतान थी। विवाह योग्य होने पर उन्होने समान कुलशील वर के साथ कन्या का विवाह कर दिया। दैवयोग से कुछ दिनों बाद वह विधवा हो गई।

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जितिया व्रत कथा (Jitiya Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार एक गरुड़ और एक मादा लोमड़ी नर्मदा नदी के पास एक हिमालय के जंगल में रहते थे। दोनों ने कुछ महिलाओं को पूजा करते और उपवास करते देखा और खुद भी इसे देखने की कामना की। उनके उपवास के दौरान, लोमड़ी भूख के कारण बेहोश हो गई और चुपके

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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा (Papankusha Ekadashi Vrat Katha)

पापांकुशा एकादशी का महत्त्व:अर्जुन कहने लगे कि हे जगदीश्वर! मैंने आश्विन कृष्ण एकादशी  का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे आश्विन/क्वार माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के विषय में भी बतलाइये। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसके व्रत का क्या विधान है? इसका व्रत करने से किस फल की प्राप्ति होती है?

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