March 13, 2022

करवा चौथ व्रत कथा: पतिव्रता करवा धोबिन की कथा! (Karwa Chauth Vrat Katha)

पुराणों के अनुसार करवा नाम की एक पतिव्रता धोबिन अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित गांव में रहती थी। उसका पति बूढ़ा और निर्बल था। एक दिन जब वह नदी के किनारे कपड़े धो रहा था तभी अचानक एक मगरमच्छ वहां आया, और धोबी के पैर अपने दांतों में दबाकर यमलोक की

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अहोई अष्टमी व्रत कथा (Ahoi Ashtami Vrat Katha)

॥ श्री गणेशाय नमः ॥प्राचीन काल में किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात लड़के थे। दीपावली से पहले साहूकार की स्त्री घर की लीपापोती हेतु मिट्टी लेने खदान में गई और कुदाल से मिट्टी खोदने लगी।दैवयोग से उसी जगह एक सेह की मांद थी। सहसा उस स्त्री के हाथ से कुदाल बच्चे

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रमा एकादशी व्रत कथा (Rama Ekadashi Vrat Katha)

रमा एकादशी का महत्त्व:धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने आश्विन शुक्ल एकादशी अर्थात का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के विषय में भी बतलाइये। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसके व्रत का क्या विधान है? इसकी विधि क्या है? इसका व्रत करने से किस फल की

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देवोत्थान / प्रबोधिनी एकादशी व्रत कथा (Devutthana Ekadashi Vrat Katha)

देवोत्थान एकादशी का महत्त्व:धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने कार्तिक कृष्ण एकादशी अर्थात का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के विषय में भी बतलाइये। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसके व्रत का क्या विधान है? इसकी विधि क्या है? इसका व्रत करने से किस

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उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा (Utpanna Ekadashi Vrat Katha)

उत्पन्ना एकादशी का महत्त्व:धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात  का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के विषय में भी बतलाइये। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसके व्रत का क्या विधान है? इसकी विधि क्या है? इसका व्रत करने

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मोक्षदा एकादशी व्रत कथा (Mokshada Ekadashi Vrat Katha)

मोक्षदा एकादशी का महत्त्व:धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी अर्थात  का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के विषय में भी बतलाइये। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसके व्रत का क्या विधान है? इसकी विधि क्या है? इसका व्रत करने

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पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा (Pausha Putrada Ekadashi Vrat Katha)

पौष पुत्रदा एकादशी का महत्त्व:धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! आपने पौष कृष्ण एकादशी अर्थात सफला एकादशी का माहात्म्य बताकर बड़ी कृपा की। अब आप कृपा करके मुझे पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के विषय में भी बतलाइये। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसके व्रत का क्या विधान है? इसकी

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सकट चौथ व्रत कथा: एक साहूकार और साहूकारनी (Sakat Chauth Pauranik Vrat Katha – Ek Sahukar Aur Ek Sahukarni)

एक साहूकार और एक साहूकारनी थे। वह धर्म पुण्य को नहीं मानते थे। इसके कारण उनके कोई बच्चा नहीं था। एक दिन साहूकारनी पडोसी के घर गयी। उस दिन सकट चौथ था, वहाँ पड़ोसन सकट चौथ की पूजा करके कहानी सुना रही थी।साहूकारनी ने पड़ोसन से पूछा: तुम क्या कर रही हो?तब पड़ोसन बोली कि आज

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सकट चौथ पौराणिक व्रत कथा – श्री महादेवजी पार्वती (Sakat Chauth Pauranik Vrat Katha – Shri Mahadev Parvati)

एक बार महादेवजी पार्वती सहित नर्मदा के तट पर गए। वहाँ एक सुंदर स्थान पर पार्वतीजी ने महादेवजी के साथ चौपड़ खेलने की इच्छा व्यक्त की।तब शिवजी ने कहा: हमारी हार-जीत का साक्षी कौन होगा? पार्वती ने तत्काल वहाँ की घास के तिनके बटोरकर एक पुतला बनाया और उसमें प्राण-प्रतिष्ठा करके उससे कहा: बेटा! हम चौपड़

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माँ बगलामुखी पौराणिक कथा (Maa Baglamukhi Pauranik Katha)

एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच गया। संसार की रक्षा करना असंभव हो गया। यह तूफान सब कुछ नष्ट-भ्रष्ट करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था, जिसे देख कर भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए।इस समस्या का कोई

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गणगौर व्रत कथा (Gangaur Vrat Katha)

एक समय की बात है, भगवान शंकर, माता पार्वती जी एवं नारदजी के साथ भ्रमण हेतु चल दिए। वे चलते-चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गाँव में पहुँचे। उनका आगमन सुनकर ग्राम की निर्धन स्त्रियाँ उनके स्वागत के लिए थालियों में हल्दी एवं अक्षत लेकर पूजन हेतु तुरतं पहुँच गई।पार्वती जी ने उनके पूजा भाव को समझकर

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Vijaya Ekadashi Vrat Katha

Vijaya Ekadashi Vrat Katha: विजया एकादशी व्रत कथा

विजया एकादशी का महत्त्व: Vijaya Ekadashi Vrat Katha: धर्मराज युधिष्‍ठिर बोले: हे जनार्दन! आपने माघ के शुक्ल पक्ष की विजया एकादशी का अत्यन्त सुंदर वर्णन करते हुए सुनाया। अब आप फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? Vijaya Ekadashi Vrat Katha तथा उसकी विधि क्या है? कृपा करके आप मुझे बताइए।श्री भगवान बोले:

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