November 2021

क्यों लिया देवी माँ ने भ्रामरी देवी और शाकंभरी माता का अवतार?

देवताओं की सहायता के लिए देवी ने अनेक अवतार लिए। भ्रामरी देवी का अवतार लेकर देवी ने अरुण नामक दैत्य से देवताओं की रक्षा की। इसकी कथा इस प्रकार है- पूर्व समय की बात है। अरुण नामक दैत्य ने कठोर नियमों का पालन कर भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या की। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव

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पौराणिक वृतांत- एक राक्षस ‘गयासुर’ के कारण गया बना है मोक्ष स्‍थली

बिहार की राजधानी पटना से करीब 104 किलोमीटर की दूरी पर बसा है गया जिला। धार्मिक दृष्टि से गया न सिर्फ हिन्दूओं के लिए बल्कि बौद्ध धर्म मानने वालों के लिए भी आदरणीय है। बौद्ध धर्म के अनुयायी इसे महात्मा बुद्ध का ज्ञान क्षेत्र मानते हैं जबकि हिन्दू गया को मुक्तिक्षेत्र और मोक्ष प्राप्ति का

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इस कारण देवर्षि नारद को बनना पड़ा था एक बार बंदर !

 श्री नारद बड़े ही तपस्वी और ज्ञानी ऋषि हुए जिनके ज्ञान और तप की माता पार्वती भी प्रशंसक थीं। तब ही एक दिन माता पार्वती श्री शिव से नारद मुनि के ज्ञान की तारीफ करने लगीं। शिव ने पार्वती जी को बताया कि नारद बड़े ही ज्ञानी हैं। लेकिन किसी भी चीज का अंहकार अच्छा

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कहानी बालक ध्रुव के ध्रुव तारा बनने की

स्वयंभुव मनु और शतरुपा के दो पुत्र थे-प्रियवत और उत्तानपाद। उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो पत्नियां थीं। राजा उत्तानपाद को सुनीति से ध्रुव और सुरुचि से उत्तम नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए। यद्पि सुनीति बड़ी रानी थी परन्तु उत्तानपाद का प्रेम सुरुचि के प्रति अधिक था। एक बार सुनीति का पुत्र ध्रुव अपने

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अक्षत का क्या मतलब होता है और हिन्दू धर्म में पूजा में इसका क्या महत्व है ?

अक्षत का अर्थ है बिना टूटे चावल। क्योंकि अक्षत शिवलिंग स्वरूप होते हैं और गेहूं का आकार योनि की तरह होता है, जिसे नवरात्रों में माँ की पूजा के पहले गेहूं के जवाव बोए जाते हैं। अक्षत शिवलिंग स्वरूप होने से धन्य-धान्य के प्रतीक हैं। समृद्धि कारक अक्षत चावलों से निकलने वाली सूक्ष्म तरंगे देवताओं

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