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Published October 8, 2023
Updated July 29, 2024

धूम्रवर्णस्तुति: अघमर्षण द्वारा प्रकट किया गया एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। इस स्तोत्र में, अघमर्षण भगवान शिव को धूम्रवर्ण के रूप में वर्णित करते हैं, जो धुएं के रंग के हैं।

धूम्रवर्णस्तुति 12 श्लोकों का है। प्रत्येक श्लोक में, भगवान शिव की एक विशेषता का वर्णन किया गया है। स्तोत्र की शुरुआत भगवान शिव के नमस्कार के साथ होती है। इसके बाद, प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव की एक विशेषता का वर्णन किया गया है। स्तोत्र के अंत में, भगवान शिव से प्रार्थना की जाती है कि वह भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाएं।

धूम्रवर्णस्तुति एक बहुत ही शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

धूम्रवर्णस्तुति के 12 श्लोक इस प्रकार हैं:

1. नमस्ते धूम्रवर्णाय त्रिनेत्राय त्रिशूलधारिणे।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे धूम्रवर्ण शिव! आपके तीन नेत्र हैं और आप तीन शूल धारण करते हैं।

2. महादेवाय नमः सर्वदेवनमस्कृताय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे महादेव! आप सभी देवताओं द्वारा नमस्कृत हैं।

3. नमस्ते शूलपाणये नमस्ते त्रिपुरांतकाय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे शूलपाणि! आप त्रिपुर का अंत करने वाले हैं।

4. नमस्ते रुद्राय नमस्ते नीलकंठाय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे रुद्र! आप नीलकंठ हैं।

5. नमस्ते भस्मधारिणे नमस्ते भक्तवत्सलाय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे भस्मधारी! आप भक्तों के लिए दयालु हैं।

6. नमस्ते शंभवे नमस्ते भवाय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे शंभु! आप भव हैं।

7. नमस्ते शिवाय नमस्ते ओंकारस्वरूपाय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे शिव! आप ओंकार के स्वरूप हैं।

8. नमस्ते गौर्यापत्याय नमस्ते पार्वतीप्रियाय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे पार्वती के पुत्र! आप पार्वती के प्रिय हैं।

9. नमस्ते त्रिशूलधारिणे नमस्ते सर्वशक्तिमानाय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे त्रिशूलधारी! आप सर्वशक्तिमान हैं।

10. नमस्ते चंद्रशेखराय नमस्ते महाकालाय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे चंद्रशेखर! आप महाकाल हैं।

11. नमस्ते त्र्यंबकाय नमस्ते सदाशिवाय।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे त्र्यंबक! आप सदाशिव हैं।

12. नमस्ते सर्वदेवानां नमस्ते सर्वलोकानां।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे सभी देवताओं के! मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे सभी लोकों के!

अघमर्षण कौन थे?

अघमर्षण एक महान तपस्वी थे। उन्होंने भगवान शिव की आराधना की और उनकी कृपा से धूम्रवर्णस्तुति की रचना की। अघमर्षण को भगवान शिव का अवतार माना जाता है।

धूम्रवर्णस्तुति का महत्व:

धूम्रवर्णस्तुति एक बहुत ही शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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