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Published October 8, 2023
Updated October 8, 2023

गणेशाष्टकम 2 एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र महर्षि व्यास द्वारा रचित है। यह स्तोत्र पद्मपुराण के उत्तरखण्ड में पाया जाता है।

गणेशाष्टकम 2 6 श्लोकों का है। प्रत्येक श्लोक में, भगवान गणेश की एक विशेषता का वर्णन किया गया है।

गणेशाष्टकम 2 के 6 श्लोक इस प्रकार हैं:

1. नमस्ते गणपतये चारुकेयूरहारं गिरिधरवरसारं योगिनीचक्रचारम्।

अर्थ: मैं आपको नमस्कार करता हूं, हे चारुकेयूरहार गणेश! आप गिरिधर वरसार हैं, जो योगिनियों की चक्रचारी हैं।

2. अखिलमलविनाशम्पाणिनाहस्तपाशं कनकगिरिनिकाशंसूर्यकोटिप्रकाशम्।

अर्थ: आपके हाथ में पाश हैं, जो सभी प्रकार के दोषों को नष्ट करते हैं। आपके शरीर का रंग कनकगिरि के समान है और आपकी कान्ति सूर्य के समान है।

3. विविधमणिमयूखैः शोभमानं विदूरैः कनकरचितचित्रङ्कण्ठदेशेविचित्रम्।

अर्थ: आपके सिर पर विविध मणियों की माला है, जो दूर से भी दिखाई देती है। आपके गले में स्वर्ण से निर्मित चित्रमय माला है।

4. दधति विमलहारं सर्वदा यत्नसारं गणपतिमभिवन्दे वक्रतुण्डावतारम्।

अर्थ: आप हमेशा एक सफेद माला धारण करते हैं, जो आपकी साधना का प्रतीक है। मैं आपको वक्रतुण्ड अवतार के रूप में नमस्कार करता हूं।

5. दुरितगजममन्दं वारुणीं चैव वेदं विदितमखिलनादं नृत्यमानन्दकन्दम्।

अर्थ: आपके हाथ में एक दंड है, जो दुष्टों को दंडित करता है। आप एक हाथ में वारुणी कलश धारण करते हैं, जो ज्ञान और विद्या का प्रतीक है। आप एक हाथ में वेद धारण करते हैं, जो ज्ञान का भंडार है। आप एक हाथ में शंख धारण करते हैं, जो सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। आप एक हाथ में चक्र धारण करते हैं, जो बुराई का नाश करता है। आप एक हाथ में अंकुश धारण करते हैं, जो भक्तों को सही मार्ग पर ले जाता है।

6. त्रिनयनयुतभालेशोभमाने विशाले मुकुटमणिसुढाले मौक्तिकानां च जाले।

अर्थ: आपके तीन नेत्र हैं, जो ज्ञान, कर्म और भक्ति का प्रतीक हैं। आपका चेहरा विशाल और सुंदर है। आपके मुकुट में मणियों की माला है, जो आपकी भव्यता का प्रतीक है। आपके बालों में मोतियों की माला है, जो आपकी पवित्रता का प्रतीक है।

गणेशाष्टकम 2 का महत्व:

गणेशाष्टकम 2 एक बहुत ही शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

गणेशाष्टकम 2 का कुछ महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:

  • यह स्तोत्र भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करता है।
  • यह स्तोत्र 6 श्लोकों का है।
  • इसमें भगवान गणेश के सभी प्रमुख नामों और विशेषताओं का वर्णन किया गया है।
  • यह स्तोत्र सभी भक्तों के लिए पढ़ने योग्य है।

गणेशाष्टकम 2 का सार:

गणेशाष्टकम 2 में, भगवान गणेश को एक शक्तिशाली देवता के रूप में चित्रित किया गया है जो सभी प्रकार के कष्टों को दूर कर सकता है। यह स्तोत्र भक्तों को आशा और शक्ति प्रदान करता है।

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