पार्वती

उमाऽष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Umaashtottarashatanamastotram

उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के भारतीय कवि और संत, मम्मट द्वारा लिखा गया था। उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र में 9 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग रूप या गुण का वर्णन किया गया है। उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र का पहला श्लोक

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ईहाष्टकं Ehashtakan

एकाष्टक एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है “आठ दिन”। यह एक प्रकार का भक्ति भजन है जो किसी देवी या देवता की आठ रातों तक स्तुति करता है। एकाष्टक आमतौर पर हिंदू धर्म में पाए जाते हैं, लेकिन अन्य धर्मों में भी पाए जा सकते हैं। एकाष्टक अक्सर किसी देवी या देवता के विशेष

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आर्याभ्यर्चना Aryabhyarchana

आर्याभ्यर्चना एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 19वीं शताब्दी के भारतीय आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक, स्वामी विवेकानंद द्वारा लिखा गया था। आर्याभ्यर्चना के 9 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। आर्याभ्यर्चना का पहला श्लोक इस

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अवस्था-निवेदनं Avastha-nivedanan

पार्वती हिंदू धर्म में एक प्रमुख देवी हैं। वह शिव की पत्नी, शक्ति की अवतार, और हिंदू त्रिदेवी की एक हैं। पार्वती को मातृत्व, प्रेम, सौंदर्य, सद्भाव, विवाह, और संतान की देवी के रूप में पूजा जाता है। पार्वती का जन्म हिमालय के राजा हिमालय और रानी मैना की पुत्री के रूप में हुआ था।

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अम्बास्तोत्रम् Ambastotram

अम्बास्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 19वीं शताब्दी के भारतीय आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक, स्वामी विवेकानंद द्वारा लिखा गया था। अम्बास्तोत्र के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। अम्बास्तोत्र का पहला श्लोक इस

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अम्बास्तोत्रं स्वामी विवेकानन्दरचितम् Ambastotram Swami Vivekananda Chitam

अम्बास्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 19वीं शताब्दी के भारतीय आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक, स्वामी विवेकानंद द्वारा लिखा गया था। अम्बास्तोत्र के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। अम्बास्तोत्र का पहला श्लोक इस

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अम्बा नवमणिमाला Amba Navamanimala

अम्बा नवमी, जो दुर्गा नवमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक प्रमुख त्योहार है जो देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित है। यह त्योहार सितंबर या अक्टूबर के महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। अम्बा नवमी का त्योहार देवी दुर्गा के नौ रूपों की

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सौख्याष्टकम् Saukhyashtakam

सौख्याष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। सौख्याष्टकम् के 8 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। सौख्याष्टकम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: निरर्गल-समुन्मिषन्नव-नवानुकम्पामृत-

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श्रीमेनकानन्दिनीस्तोत्रम् Srimenkanandinistotram

श्रीमेनकानंदिनीस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी श्रीमेनकानंदिनी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। श्रीमेनकानंदिनीस्तोत्रम् के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी श्रीमेनकानंदिनी के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। श्रीमेनकानंदिनीस्तोत्रम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: नमस्तेऽस्तु

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श्रीभवानीस्तवः Sribhavanistvah

श्रीभवानीस्तव एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी भगवती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। श्रीभवानीस्तव के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी भगवती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। श्रीभवानीस्तव का पहला श्लोक इस प्रकार है: जय

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श्रीभवानीकवचम् Sri Bhavanikavacham

श्री भवानिकावचम एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी भगवती की रक्षा करने वाली शक्ति को दर्शाता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। श्री भवानिकावचम के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी भगवती की एक अलग शक्ति या गुण का वर्णन किया गया है। श्री भवानिकावचम

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श्रीपार्वत्यष्टोत्तरशतनामावलिः Shriparvatyashtottarashatanamavalih

श्रीपर्वत्याष्टोत्तराशतनामावली एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। श्रीपर्वत्याष्टोत्तराशतनामावली के 108 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। श्रीपर्वत्याष्टोत्तराशतनामावली का पहला श्लोक इस प्रकार है: नमस्तेऽस्तु

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