पार्वती

श्रीगोमत्यम्बाष्टकम् Srigomatyambashtakam

श्रीगोमतीअम्बाशटकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी गोमती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 8 श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक देवी के एक अलग गुण या रूप का वर्णन करता है। श्रीगोमतीअम्बाशटकम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: गोमती देवी नमस्ते, करुणामयी नारायणी। नदीतुंगमालिकामृद्धि, कर्तुं कृपां कुरु देवि। इस श्लोक में, भक्त देवी

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श्रीकमलाम्बिकास्तोत्रम् Srikamalambikastotram

श्रीकामाम्बिकास्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी कामाक्षी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 10 श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक देवी के एक अलग गुण या रूप का वर्णन करता है। श्रीकामाम्बिकास्तोत्रम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: अम्भोजवासिनी देवी, कामाक्षी त्रिलोचना। शम्भोर्मातः प्रीतिदा, नमस्ते नमस्ते नमस्ते। इस श्लोक में, भक्त देवी कामाक्षी

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श्रीकमलाम्बाष्टकम् Srikamalambashtakam

श्रीकामाम्बाशटकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी कामाक्षी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 10 श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक देवी के एक अलग गुण या रूप का वर्णन करता है। श्रीकामाम्बाशटकम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: अम्भोजासन शम्भरारि विनुतां रम्भादिसंसेवितां। शम्भो कोटिप्रभां शतमखस्कन्देन्दु सम्पूजिताम्। अम्बां कमलाम्बिकां भजे कामेश्वरी चण्डिकाम्। इस श्लोक

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श्रीअन्नपूर्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Sriannapurnashtottarashatanamastotram

श्रीअन्नपूर्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी अन्नपूर्णा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 108 नामों से देवी अन्नपूर्णा की स्तुति करता है, और प्रत्येक नाम देवी के एक अलग गुण या रूप का वर्णन करता है। श्रीअन्नपूर्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र का पहला श्लोक इस प्रकार है: अन्नपूर्णे नमस्ते देवी, सर्वशक्तिमये। इस श्लोक में, भक्त देवी अन्नपूर्णा को

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श्यामलानवरत्नमालिकास्तवम् Shyamalanvaratnamalikastvam

श्यामलनवरत्नमालिकासत्वम एक संस्कृत वाक्यांश है जिसका अर्थ है “काले मणियों की माला का अस्तित्व”। यह वाक्यांश अक्सर देवी पार्वती के संदर्भ में उपयोग किया जाता है, जिन्हें अक्सर काले रंग के वस्त्र पहने हुए और उनके गले में काले मणियों की माला पहने हुए चित्रित किया जाता है। श्यामलनवरत्नमालिकासत्वम का शाब्दिक अर्थ है “काले मणियों

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वीरककृता पार्वतीस्तुतिः Virakkrita Parvati Stuti:

विराक्त पार्वती स्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है, जो एक विरक्त, या दुनिया से अलग, रूप में दिखाई देती हैं। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के भारतीय कवि, मम्मट द्वारा लिखा गया था। विराक्त पार्वती स्तुति में 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण

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पार्वतीस्तुतिः Parvatistutih

पार्वतीस्तुति एक संस्कृत स्तुति है जो देवी पार्वती की स्तुति करती है। यह स्तोत्र 10वीं शताब्दी के भारतीय कवि, अप्पय दंडी द्वारा लिखा गया था। पार्वतीस्तुति में 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। पार्वतीस्तुति का पहला श्लोक इस प्रकार है: जय

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पर्वतवर्धिन्यष्टकं Parvatvardhinyashtakam

पार्वत्‍वर्धन्यष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की वृद्धि और समृद्धि की प्रार्थना करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के भारतीय कवि और संत, मम्मट द्वारा लिखा गया था। पार्वत्‍वर्धन्यष्टकम् में 8 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। पार्वत्‍वर्धन्यष्टकम् का पहला

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जगदम्बा जयवादः Jagdamba Jayavadah

जगदम्बा जयवदः एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के भारतीय कवि और संत, मम्मट द्वारा लिखा गया था। जगदम्बा जयवदः में 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी दुर्गा के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। जगदम्बा जयवदः का पहला श्लोक

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गणेशकृता गौरीस्तुतिःGaneshkrita Gauristutih

गणेशकृत गौरी स्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के भारतीय कवि और संत, मम्मट द्वारा लिखा गया था। गणेशकृत गौरी स्तुति में 9 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। गणेशकृत गौरी स्तुति

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कुमारविरचितं गौरीस्तवःKumaravirchitam Gauristavah

कुमारविरचितम गौरीस्तव एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के भारतीय कवि और संत, कुमारभट्ट द्वारा लिखा गया था। कुमारविरचितम गौरीस्तव में 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। कुमारविरचितम गौरीस्तव का पहला श्लोक

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कुमारकृता शिवशिवास्तुतिः Kumarakrita Shivshivastutih

कुमारकृत शिवशिवस्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव और देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के भारतीय कवि और संत, कुमारभट्ट द्वारा लिखा गया था। कुमारकृत शिवशिवस्तुति में 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव और देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया

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