पार्वती

श्रीदेवीषट्कं Sridevishatkanm

श्रीदेवि शतकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। श्रीदेवि शतकम् के 100 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी दुर्गा के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। श्रीदेवि शतकम् का पहला श्लोक इस

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श्रीजगदम्बा स्तुतिः Shreejagadamba stuti

श्री जगदंबा स्तवन एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी जगदंबा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। श्री जगदंबा स्तवन के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी जगदंबा के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। श्री जगदंबा स्तवन का

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श्री अम्बिकास्तवः Shri Ambikastava

श्री अम्बिकास्तव एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी अम्बिका की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। श्री अम्बिकास्तव के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी अम्बिका के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। श्री अम्बिकास्तव का पहला श्लोक इस

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शिवास्तोत्रम् Shivastotram

शिवस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 10वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। शिवस्तोत्रम् के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। शिवस्तोत्रम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: नमस्ते

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विन्ध्येश्वरीस्तोत्रम् Vindhyashwaristotram

विन्ध्यश्वरस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान विन्ध्यवासिनी के पति, भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। विन्ध्यश्वरस्तोत्रम् के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। विन्ध्यश्वरस्तोत्रम् का पहला श्लोक

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विन्ध्यवासिनीस्तोत्रम् Vindhyavasinistotram

विन्ध्यवासिनीस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी विन्ध्यवासिनी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। विन्ध्यवासिनीस्तोत्रम् के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी विन्ध्यवासिनी के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। विन्ध्यवासिनीस्तोत्रम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: श्रीगणेशाय

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रमास्तोत्रम् Ramstotram

रामस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान राम की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। रामस्तोत्रम् के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में भगवान राम के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। रामस्तोत्रम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: अगणितगुणमप्रमेयमाद्यं

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मुनयः कृता देविस्तुतिः Maanav: krta deveestuti:

मानवकृत देवेस्तूति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। मानवकृत देवेस्तूति के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में तीनों देवताओं के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। मानवकृत

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भवानीस्तुति Bhavaaneestuti

भावानेष्टुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। भावानेष्टुति के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। भावानेष्टुति का पहला श्लोक इस प्रकार है: नमस्ते

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भगवत्यष्टकम् Bhagavatyashtakam

भगवतीस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। भगवतीस्तोत्रम् के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी दुर्गा के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। भगवतीस्तोत्रम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: जय

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भगवतीस्तोत्रम् Bhagavatistotram

भगवतीस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। भगवतीस्तोत्रम् के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी दुर्गा के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है। भगवतीस्तोत्रम् का पहला श्लोक इस प्रकार है: जय

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बृहद्बलकृता शिवगिरिजास्तुतिः Brihadbalakrita Shivagirijastuti:

बृहद्बलकृत शिवगिरिजास्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव और देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था। बृहद्बलकृत शिवगिरिजास्तुति के 100 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव और देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है।

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