Buffalo in dream:सपने में भैंस देखने का क्या होता है मतलब, और अगर पूंछ दिख जाए तो फिर

Buffalo in dream:स्वप्न शास्त्र के अनुसार नींद में जो सपने हम देखते हैं उनका संबंध कहीं न कहीं हमारी जिंदगी से जुड़ा होता है. क्या आपको पता है सपने में भैंस देखने का क्या मतलब होता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार नींद में जो सपने हम देखते हैं उनका संबंध कहीं न कहीं हमारी जिंदगी से जुड़ा होता है. कहा जाता है कि उनसे हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं की जानकारी पहले ही मिल जाती है. सपनों के कई शुभ व अशुभ फल भी होते हैं. Buffalo in dream इसलिए हमें अपने सपनों को समझने की कोशिश करनी चाहिए. यहां हम आपको बताते हैं कि सपने में भैंस को देखना कैसा होता है. हालांकि भैंस को आपने किस अवस्था में देखा है ये भी महत्वपूर्ण होता है. सपने में भैंस देखना शुभ है या अशुभ? खूंटी में बंधी भैंस देखना यदि आप किसी खूंटी में बंधी भैंस देखते है तो यह आपके लिए एक अच्छा संकेत हो सकता है इसका मतलब है की यदि आप कोई मुश्किल काम करने जा रहे हो तो उसके सकारात्मक परिणाम ही देखने को मिलेंगे और सभी परिस्थितियां आपके नियंत्रण में ही रहने वाली है। Buffalo in dream:सपने में भैंस को भागते हुए देखना यदि आप सपने में किसी भैंस को आपके पीछे भागते हुए देखते हैं या फिर आप पर हमला करते हुए देखते हैं तो यह एक तरह से अशुभ संकेत हो सकता है इसका मतलब यह है कि आपके दुश्मन आपको आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा सकते है Buffalo in dream या फिर आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा को चोट पहुंचा सकते हैं। ऐसे में आपको किसी नए कार्य को करने में थोड़ा धैर्य और सावधानी बरतनी चाहिए।  Buffalo in dream:सपने में भैंस की सवारी करना यदि आप सपने में खुद को किसी भैंस की सवारी करते हुए देखते हैं या फिर भैंस के उसके ऊपर चढ़ा हुआ देखते हैं तो यह एक तरह का अशुभ संकेत है इसका क्या मतलब है की भविष्य में आपको स्वास्थ्य से जुड़ी हुई बुरी खबर मिल सकती है। Buffalo in dream या इस प्रकार का सपना आपके स्वास्थ्य को लेकर एक तरह की चेतावनी है अतः आपको अपने स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। सपने में भैंस का दूध निकालते हुए देखना सपने में खुद को किसी भैंस का दूध निकालते हुए देखते हैं तो यह बहुत ही शुभ संकेत है इसका यह मतलब है कि आपको बहुत जल्द आर्थिक लाभ होने वाला है। बहुत समय से अटका हुआ धन आपको मिलने वाला है Buffalo in dream यदि आप किसी दोस्त या रिश्तेदार से उधार मांगते हैं वह भी आपको प्राप्त होने वाला है। यह सपना इस तरफ इशारा करता है कि आप द्वारा अतीत में की गई मेहनत का आपको भविष्य में बहुत अच्छा लाभ मिलने वाला है। सपने में भैंस का झुंड देखना यदि आप सपने में भैंस का झुंड देखते हैं तो यह भी एक तरह का शुभ संकेत है, इसका मतलब है कि आने वाला समय आपके परिवार के लिए खुशियों से भरा होगा या फिर परिवार का कोई सदस्य नौकरी भी लग सकता है, जिससे परिवार में खुशी का माहौल होगा। Buffalo in dream और सपने में भैंस को भागते देखना या भैंस का झुण्ड को आपके पीछे भागते हुए देखते हैं तो यह सही संकेत नहीं है इसका यह मतलब है कि आपकी सफलता के कारण आपके बहुत से दुश्मन बनने वाले है। सपने में भैंस का हमला करना यदि आप ऐसा कोई सपना देखते है जिसमें भैंस आप पर हमला कर रही है तो यह अच्छा सपना नहीं है। इस सपने का अर्थ है की आने वाले समय में आप पर कोई भारी विपत्ति आ सकती है ।Buffalo in dream जिससे आप की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ जायेगी और साथ ही साथ आपको चिंता और डर घेरे हुए रहेगा। ऐसे में आपको रात्रि विचरण से बचना चाहिए। आप के साथ किसी तरह की दुर्घटना हो सकती है । सपने में भैंस का गोबर देखना सपने में भैंस का गोबर देखना शुभ ही समझा जाता है। गोबर चाहे भैंस का हो या फिर गाय का सपने में इसे देखना शुभ समझा जाता है। इस तरह का सपना यह संकेत करता है कि आने वाले समय में आपके घर में किसी तरह का आयोजन हो सकता है Buffalo in dream या फिर घर की साफ-सफाई अथवा रिपेयरिंग का काम आप करवा सकते हैं। सपने में भैंस को बच्चा पैदा करते देखना यदि आप सपने में भैंस का बच्चा पैदा होते हुए देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आपके ऊपर आने वाले समय में कार्य का बोझ बढ़ सकता है। और आपको कुछ दिनों तक कार्य को लेकर परेशानी रह सकती है Buffalo in dream अतः इस तरह का सपना भविष्य में आपको मिलने वाली जिम्मेदारियों की तरफ इशारा करता है। इस सपने को अशुभ तो नहीं कहा जा सकता परंतु आपको अपने भविष्य को लेकर तैयार रहना चाहिए। सपने में भैंस का पीछे भागना यदि सपने में भैंस को पीछे भागते हुए देखते हैं तो यह सपना शुभ नहीं है। इसका अर्थ है कि कोई समस्या बहुत जल्द आपके दरवाजे पर दस्तक देने वाली है। यह समस्या आपके कार्यक्षेत्र से जुड़ी हो सकती है या फिर घर में किसी तरह का लड़ाई झगड़ा भी हो सकता है। या कोई बीमारी आपको काफी परेशान कर सकती है। ऐसा भी हो सकता है किसी काम की चिंता आपको अंदर ही अंदर खाई जा सकती है। अतः यह सपना एक तरह की चेतावनी है। सपने में 3 भैंस देखना सपने में 3 भैंस देखना शुभ नहीं समझा जाता है। इस सपने का अर्थ है कि आपके द्वारा अतीत में की गई गलतियों का खामियाजा आपको वर्तमान और भविष्य में भुगतना पड़ सकता है। Buffalo in dream आपकी कोई आदत जिससे आप काफी समय से ग्रसित हैं। आप को परेशानी में डाल सकती है। यदि आपको शराब या फिर सिगरेट आदि का नशा है तो इससे आपको भविष्य में किसी तरह की शारीरिक समस्या देखने को मिल सकती है। सपने में हाथी और भैंस देखना यदि आप सपने में हाथी और भैंस देखते हैं तो यह सपना भविष्य में आपके मजबूत होने की तरफ इशारा करता है Buffalo in dream और आप हर समस्या से दृढ़ निश्चय के साथ लड़ोगे और यह सपना आपकी आर्थिक

Buffalo in dream:सपने में भैंस देखने का क्या होता है मतलब, और अगर पूंछ दिख जाए तो फिर Read More »

श्री कालभैरव मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत

कालभैरव को शहर की रक्षा के लिए किया गया नियुक्त कालभैरव मंदिर भगवान का मंदिर भारत के मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है। क्षिप्रा नदी के किनारे भैरवगढ़ क्षेत्र में स्थित इस मंदिर का इतिहास करीब 6,000 वर्ष पुराना बताया जाता है। काल भैरव को उज्जैन शहर का संरक्षक भी कहा जाता है और यह मंदिर इन्हीं को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान कालभैरव के वैष्णव स्वरूप की पूजा की जाती है। श्री कालभैरव मंदिर का इतिहास उज्जैन के काल भैरव मंदिर को राजा भद्रसेन ने बनवाया था, जिसका जिक्र स्कन्द पुराण के अवन्ती खंड में भी किया गया है। परमार शासनकाल (9वीं से 13वीं शताब्दी) के दौरान की शिवजी, माँ पार्वती, भगवान विष्णु और गणेश जी की प्रतिमाएं इसी जगह से मिली है। वहीं राजा भोज के समय इस मंदिर का पुनर्निर्माण भी करवाया गया था। श्री कालभैरव मंदिर का महत्व उज्जैन के राजा महाकाल ने ही कालभैरव को शहर की रक्षा के लिए नियुक्त किया है। इसी वजह से कालभैरव को शहर का कोतवाल भी कहा जाता है। भैरव बाबा के इस मंदिर में उनको मदिरा चढ़ाई जाती है, लेकिन मदिरा जाती कहां है ये रहस्य आज रहस्य बनके ही रह गया है। कालभैरव की इस प्रतिमा को मदिरा पीते हुए देखने के लिए यहां हजारों श्रद्धालु हर रोज पहुंचते हैं। इस मंदिर में भगवान कालभैरव की प्रतिमा सिंधिया पगड़ी पहने हुए दिखाई देती है। यह पगड़ी बाबा भैरवनाथ के लिए ग्वालियर के सिंधिया परिवार की ओर से आती है। यह प्रथा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। श्री कालभैरव मंदिर की वास्तुकला उज्जैन के काल भैरव मंदिर का निर्माण मराठा स्थापत्य शैली के अनुसार किया है, मंदिर की दीवारों में मालवा शैली में बने शानदार चित्रों के अवशेष अभी भी देखने को मिलते हैं। वहीं मंदिर के गर्भ गृह में भगवान काल भैरव की मूर्ति एक चट्टान के रूप में विराजमान है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 10:00 PM सायंकाल आरती का समय 06:00 AM – 07:00 AM सुबह की आरती का समय 07:00 AM – 08:00 AM मंदिर का प्रसाद उज्जैन के इस कालभैरव बाबा को मदिरा का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा भक्त यहाँ पर मावे और बेसन के लड्डू का भी भोग लगाते हैं।

श्री कालभैरव मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

देवी क्षमा प्रार्थना स्तोत्र | Devi Kshama Prarthana Stotram

देवी क्षमा प्रार्थना स्तोत्र (Devi Kshama Prarthana Stotram) अपराध सहस्राणि कृयन्थे आहर्निसं मया, दासो आयमिथि मां मथ्व क्शमस्व परमेश्वरि ॥१॥ आवजनं न जानामि, न जानामि विसर्जनम्, पूजां चैव न जानामि, क्षंयथं अरमेश्वरि ॥२॥ मन्थ्रहीनम् , क्रियाहीनं, भक्थिहीनं, श्रुरेस्वरि, यतः पूजिथं मया देवी परिपूर्णं थादस्थुथे ॥३॥ आपराध स्थं क्रुथ्व जगदंबेथि चो उचरतः, यं गथिं संवप्नोथे न थां ब्रह्मदाय सुरा ॥४॥ सपरधोस्मि सरणं प्रथस्थ्वं जगदम्बिके, इधनी मनु कंप्योऽहं यदेच्छसि तदा कुरु ॥५॥ अज्ञान स्मृथेर्ब्रन्थ्य यन्यूनं अधिकं कर्थं, ततः सर्व क्षंयधं देवी प्रसीध परमेश्वरि ॥६॥ ख़मेश्वरि जगन्मथ सचिदनन्द विग्रहे, ग़्रहनर्चमीमम् प्रीथ्य प्रसीद परमेश्वरि ॥७॥ गुह्यधि गुह्य गोप्थ्री ग्रहण अस्मद कर्थं जपं, सिधिर भवथु मेय देवी थ्वत् प्रसादतः सुरेश्वरि ॥८॥

देवी क्षमा प्रार्थना स्तोत्र | Devi Kshama Prarthana Stotram Read More »

Devi Apradh Kshamapan Stotra | देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्

Devi Apradh Kshamapan Stotra (देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्): देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् माँ दुर्गा का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, यदि आपसे माँ दुर्गा की पूजा में कोई त्रुटी हो जाए है, आपको लगे की किसी ने आपके उपर तंत्र प्रयोग कर दिया है, जिसके कारण आपकी शक्ति काम नही कर रही है या नष्ट हो हई है, तो आप रात्रि के समय, 9 बजे से 11 बजे के बीच लाल के ऊनि आसन पर बैठकर, पूर्व दिशा की और मुख करके, देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् के 1,3, या 5 पाठ अवश्य ही करे, उसके बाद आप माँ दुर्गा की आरती करे। Devi Apradh Kshamapan Stotra:इस तरह पाठ करने से माँ प्रसन्न होती है, और आपकी गलती को क्षमा करके माँ आपकों आशिर्वाद प्रदान करती है। यदि आप (Devi Apradh Kshamapan Stotra) देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् को संस्कृत में नही पाठ कर सकते तो, हिंदी में पाठ करे, तब भी आपको देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् का पूर्ण लाभ मिलेगा। न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा:। न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्।।1।। अर्थ – हे मातः ! मैं तुम्हारा मन्त्र, यंत्र, स्तुति, आवाहन, ध्यान, स्तुतिकथा, मुद्रा तथा विलाप कुछ भी नहीं जानता, परन्तु सब प्रकार के क्लेशों को दूर करने वाला आपका अनुसरण करना ही जानता हूँ. विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया विधेयाशक्यत्वात्तव  चरणयोर्या च्युतिरभूत्। तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।।2।। अर्थ: Devi Apradh Kshamapan Stotra सबका उद्धार करने वाली हे करुणामयी माता ! तुम्हारी पूजा की विधि न जान्ने के कारण, धन के आभाव में, आलस्य से और उन विधियों को अच्छी तरह न कर सकने के कारण, तुम्हारे चरणों की सेवा करने में जो भूल हुई हो उसे क्षमा करो, क्योंकि पूत तो कपूत हो जाता है पर माता कुमाता नहीं होती. पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहव: सन्ति सरला: परं  तेषां  मध्ये  विरलतरलोSहं  तव  सुत:। मदीयोSयं त्याग: समुचितमिदं नो तव शिवे कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।।3।। Devi Apradh Kshamapan Stotra:अर्थ: माँ ! भूमण्डल में तुम्हारे सरल पुत्र अनेको है पर उनमे एक मैं विरला ही बड़ा चंचल हूँ, तो भी हे शिवे ! मुझे त्याग देना तुम्हे उचित नहीं, क्योंकि पूत तो कपूत हो जाता है पर माता कुमाता नहीं होती. जगन्मातर्मातस्तव  चरणसेवा न रचिता न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया। तथापि त्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।।4।। अर्थ:  हे जगदम्ब ! हे मातः ! मैंने तुम्हारे चरणों की सेवा नहीं की Devi Apradh Kshamapan Stotra अथवा तुम्हारे लिए प्रचुर धन भी समर्पण नहीं किया तो भी मेरे ऊपर यदि तुम ऐसा अनुपम स्नेह रखती हो तो यह सच ही है की क्योंकि पूत तो कपूत हो जाता है पर माता कुमाता नहीं होती. परित्यक्ता देवा विविधविधिसेवाकुलतया मया पंचाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि। इदानीं चेन्मातस्तव यदि कृपा नापि भविता निरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम्।।5।। अर्थ:  हे गणेश जननी ! मैंने अपनी पचासी वर्ष से अधिक आयु बीत जाने पर Devi Apradh Kshamapan Stotra विविध विधियों द्वारा पूजा करने से घबड़ा कर सब देवों को छोड़ दिया है, यदि इस समय तुम्हारी कृपा न हो तो मैं निराधार होकर किस की शरण में जाऊं? श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा निरातंको रंको विहरति चिरं कोटिकनकै:। तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं जन: को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ।।6।। अर्थ: हे माता अपर्णे ! यदि तुम्हारे मंत्राक्षरों के कान में पड़ते ही चांडाल भी मिठाई के समान सुमधुरवाणी से युक्त बड़ा भारी वक्ता बन जाता है और महादरिद्र भी करोड़पति बन कर चिरकाल तक निर्भय विचरता है तो उसके जप का अनुष्ठान करने पर जपने से जो फल होता है, उसे कौन जान सकता है? चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो जटाधारी कण्ठे भुजगपतिहारी पशुपति:। कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम्।।7।। अर्थ: जो चिता का भस्म रमाए है, विष खाते है, नंगे रहते है, जटाजूट बांधे है, गले में सर्पमाला पहने है, Devi Apradh Kshamapan Stotra हाथ में खप्पर लिए है, पशुपति और भूतों के स्वामी है, ऐसे शिवजी ने भी जो एकमात्र जगदीश्वर की पदवी प्राप्त की है, वह हे भवानि ! तुम्हारे साथ विवाह होने का ही फल है. न मोक्षस्याकाड़्क्षा भवविभववाण्छापि च न मे न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुन:। अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै मृडानी रुद्राणी शिव शिव भवानीति जपत:।।8।। अर्थ: हे चंद्रमुखी माता ! मुझे मोक्ष की इच्छा नहीं है, सांसारिक वैभव की भी लालसा नहीं है, विज्ञान तथा सुख की भी अभिलाषा नहीं है, इसलिए मैं तुमसे यही मांगता हूँ कि मेरी साड़ी आयु मृडानी, रुद्राणी, शिव-शिव, भवानी आदि नामो के जपते-जपते ही बीते. नाराधितासि विधिना विविधोपचारै: किं रुक्षचिन्तनपरैर्न कृतं वचोभि:। श्यामे त्वमेव यदि किंचन मय्यनाथे धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव।।9।। अर्थ: हे श्याम ! मैंने अनेको उपचारों से तुम्हारी सेवा नहीं कि (यही नहीं, इसके विपरीत) Devi Apradh Kshamapan Stotra अनिष्ट चिंतन में तत्पर अपने वचनों से मैंने क्या नहीं किया? (अर्थात अनेकों बुराइयाँ कि है) फिर भी मुझ अनाथ पर यदि तुम कुछ कृपा रखती हो तो यह तुम्हे बहुत ही उचित है, क्योंकि तुम मेरी माता हो. आपत्सु मग्न: स्मरणं त्वदीयं करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि। नैतच्छठत्वं मम भावयेथा: क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति।।10।। अर्थ – हे दुर्गे ! हे दयासागर माहेश्वरी ! जब मैं किसी विपत्ति में पड़ता हूँ तो तुम्हारा ही स्मरण करता हूँ, इसे तुम मेरी दुष्टता मत समझना, क्योंकि भूखे-प्यासे बालक अपनी माँ को याद किया करते हैं. जगदम्ब विचित्रमत्र किं परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि। अपराधपरम्परावृतं न हि माता समुपेक्षते सुतम्।।11।। अर्थ:  हे जगज्जननी ! मुझ पर तुम्हारी पूर्ण कृपा है, इसमें आश्चर्य ही क्या है? क्योंकि अनेक अपराधों से युक्त पुत्र को भी माता त्याग नहीं देती. मत्सम: पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि। एवं ज्ञात्वा महादेवि यथा योग्यं तथा कुरु।।12।। अर्थ: हे महादेवी ! Devi Apradh Kshamapan Stotra मेरे समान कोई पापी नहीं है और तुम्हारे समान कोई पाप नाश करने वाली नहीं है, यह जानकार जैसा उचित समझो, वैसा करो. इति श्रीमच्छंकराचार्यकृतं देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्।

Devi Apradh Kshamapan Stotra | देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् Read More »

Devkrit Laxmi Stotra | देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र

Devkrit Laxmi Stotra:देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र: महात्मा पुष्कर ने परशुराम को बताया कि भगवान इंद्र, देवी लक्ष्मी को राज्यलक्ष्मी के रूप में हमेशा के लिए इंद्रलोक में बनाए रखना चाहते हैं। इंद्र ने देवी महालक्ष्मी की उनके अंश से स्तुति की, जिससे उनका राज्य सुरक्षित हो गया और देवों और दानवों के बीच युद्ध में उनके शत्रुओं को परास्त कर दिया गया। जो लोग देवी लक्ष्मी के इस महास्तोत्र को पढ़ते और सुनते हैं, उन्हें समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है और इसलिए महात्मा पुष्कर ने परशुराम को सलाह दी कि वे देवी लक्ष्मी के स्तोत्र को यथासंभव बार-बार और प्रत्येक सप्ताह शुक्रवार को अवश्य पढ़ें। समृद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए यह देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र बहुत शक्तिशाली पाठ है। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करता है, वह एक महीने में भगवान कुबेर बन जाता है। भगवान इस शक्तिशाली स्तोत्र से देवी Devkrit Laxmi Stotra महालक्ष्मी की स्तुति करते हैं। कोई भी साधक देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का प्रतिदिन 21 बार जाप कर सकता है। दीपावली के पावन अवसर पर देवी लक्ष्मी की पूजा की जा सकती है तथा इस देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का 108 बार जाप करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, Devkrit Laxmi Stotra देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का जाप करना सबसे शक्तिशाली उपाय है। सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको प्रातः स्नान करने के पश्चात देवी लक्ष्मी की मूर्ति अथवा चित्र के समक्ष देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का जाप करना चाहिए। इसके प्रभाव को अधिकतम करने के लिए आपको सबसे पहले स्तोत्र का अर्थ हिंदी में समझना चाहिए। इस स्तोत्र की पूजा प्रतिदिन सभी धनवानों को धन-धान्य की प्राप्ति कराने के लिए करनी चाहिए। Devkrit Laxmi Stotra महालक्ष्मी की कृपा से हमें वैभव, सौभाग्य, स्वास्थ्य, ऐश्वर्य, शील, विद्या, विनय, ओज, गम्भीरी तथा कांति की प्राप्ति होती है। आश्चर्यजनक रूप से असीमित सम्पत्ति प्रदान करने वाला महालक्ष्मी कृपा प्रार्थना सूत्र है, जिसमें श्री महालक्ष्मी की बहुत ही सुन्दर पूजा की गई है। Devkrit Laxmi Stotra:देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र के लाभ देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का नियमित जाप करने से मन को शांति मिलती है और आपके जीवन से सभी बुराइयाँ दूर रहती हैं और आप स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनते हैं।देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र श्री लक्ष्मी देवी जी को समर्पित है। देवी लक्ष्मी स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को सफलता मिलती है; उसे अपने जीवन में किसी भी मामले में धन के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता है। Devkrit Laxmi Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ धनहीन जीवन जी रहे व्यक्ति को वैदिक पद्धति के अनुसार इस देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। Devkrit Laxmi Stotra | देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र क्षमस्व भगवंत्यव क्षमाशीले परात्परे | शुद्धसत्त्वस्वरूपे च कोपादिपरिवर्जिते |1| उपमे सर्वसाध्वीनां देवीनां देवपूजिते | त्वया विना जगत्सर्वं मृततुल्यं च निष्फलम् |2| सर्वसंपत्स्वरूपा त्वं सर्वेषां सर्वरूपिणी | रासेश्वर्यधि देवी त्वं त्वत्कलाः सर्वयोषितः |3| कैलासे पार्वती त्वं च क्षीरोदे सिन्धुकन्यका | स्वर्गे च स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं मर्त्यलक्ष्मीश्च भूतले |4| वैकुंठे च महालक्ष्मीर्देवदेवी सरस्वती | गंगा च तुलसी त्वं च सावित्री ब्रह्मालोकतः |5| कृष्णप्राणाधिदेवी त्वं गोलोके राधिका स्वयम् | रासे रासेश्वरी त्वं च वृंदावन वने- वने |6| कृष्णा प्रिया त्वं भांडीरे चंद्रा चंदनकानने | विरजा चंपकवने शतशृंगे च सुंदरी |7| पद्मावती पद्मवने मालती मालतीवने | कुंददंती कुंदवने सुशीला केतकीवने |8| कदंबमाला त्वं देवी कदंबकाननेऽपि च | राजलक्ष्मी राजगेहे गृहलक्ष्मीगृहे गृहे |9| इत्युक्त्वा देवताः सर्वा मुनयो मनवस्तथा | रूरूदुर्नम्रवदनाः शुष्ककंठोष्ठ तालुकाः |10| इति लक्ष्मीस्तवं पुण्यं सर्वदेवैः कृतं शुभम् | यः पठेत्प्रातरूत्थाय स वै सर्वै लभेद् ध्रुवम् |11| अभार्यो लभते भार्यां विनीतां सुसुतां सतीम् | सुशीलां सुंदरीं रम्यामतिसुप्रियवादिनीम् |12| पुत्रपौत्रवतीं शुद्धां कुलजां कोमलां वराम् | अपुत्रो लभते पुत्रं वैष्णवं चिरजीविनम् |13 परमैश्वर्ययुक्तं च विद्यावंतं यशस्विनम् | भ्रष्टराज्यो लभेद्राज्यं भ्रष्टश्रीर्लभते श्रियम् |14| हतबंधुर्लभेद्बंधुं धनभ्रष्टो धनं लभेत् | कीर्तिहीनो लभेत्कीर्तिं प्रतिष्ठां च लभेद् ध्रुवम् |15| सर्वमंगलदं स्तोत्रं शोकसंतापनाशनम् | हर्षानंदकरं शश्वद्धर्म मोक्षसुहृत्प्रदम् |16| || इति श्रीदेवकृत लक्ष्मीस्तोत्रं संपूर्णम् ||

Devkrit Laxmi Stotra | देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र Read More »

Durgashtotar Stotra | दुर्गाष्टोतर स्तोत्र

Durgashtotar Stotra दुर्गाष्टोतर स्तोत्र: दुर्गाष्टोतर स्तोत्र माता श्री दुर्गा को समर्पित है। इसमें श्री माँ दुर्गा के 108 नामों का वर्णन किया गया है। दुर्गाष्टोतर स्तोत्र के नियमित पाठ से व्यक्ति के सभी दुख दूर हो जाते हैं। यह जीवन में आने वाली समस्याओं या परेशानियों से मुक्ति के लिए माँ दुर्गा से की जाने वाली प्रार्थना है। दुर्गाष्टोतर स्तोत्र श्री दुर्गा सप्तशती के आह्वान मंत्रों में से एक है। इसमें भगवान शिव माता पार्वती को दुर्गा माता के 108 नाम बताते हैं, जिनके माध्यम से दुर्गा या सती को प्रसन्न किया जा सकता है। जो लोग प्रतिदिन दुर्गा स्तोत्र के इन 108 नामों का पाठ करते हैं, उन्हें दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं लगता। उन्हें धन, विलासिता, संतान और वंश, हाथी, चार चीजें – धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष जैसे लाभ मिलते हैं और अंत में उन्हें हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। इसलिए हाथ जोड़कर और विनम्र भाव से हम देवी के शुभ दुर्गाष्टोत्र स्तोत्र का जाप करते हैं Durgashtotar Stotra जैसा कि मार्कंडेय पुराण में पाए जाने वाले 700 श्लोकों के चंडी पाठ (जिसे दुर्गा सप्तशती के नाम से भी जाना जाता है) में लिखा है। Durgashtotar Stotra:दुर्गाष्टोत्र स्तोत्र के लाभ दुर्गा का नियमित जाप मन को शांति देता है और आपके जीवन से सभी बुराइयों को दूर रखता है और आपको स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनाता है। दुर्गाष्टोत्र स्तोत्र Durgashtotar Stotra का उपयोग करने से सभी उपयोगकर्ताओं को ढेर सारा पैसा, ढेर सारी संपत्ति, तंदुरुस्ती और अच्छा स्वास्थ्य, चीजों को याद रखने के लिए बेहतरीन याददाश्त, चीजों के बारे में ढेर सारा ज्ञान, अपने जीवन में सफलता से भरपूर, अपने जीवन में आने वाली सभी बाधाओं पर विजय, बहुत अच्छा पारिवारिक जीवन और कई अन्य चीजें मिलेंगी। Durgashtotar Stotra दुर्गाष्टोत्र स्तोत्र का जाप करने से न केवल उनके जीवन की सभी परेशानियाँ दूर हो जाएँगी बल्कि उनके जीवन से सभी भय, दुख और कमी भी दूर हो जाएगी जैसे कपड़े धोने के बाद धूल पानी में मिल जाती है। यह जीवन में दुर्गाष्टोत्र Durgashtotar Stotra स्तोत्र का महत्व है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। दुर्गाष्टोतर स्तोत्र के कई लाभ हैं जैसे कि अगर कोई व्यक्ति धन की कमी से जूझ रहा है तो उसे अपने जीवन में बहुत कुछ मिल सकता है, अगर कोई व्यक्ति व्यापार में नुकसान से जूझ रहा है तो वह अपने व्यापार में हुए नुकसान की भरपाई कर सकता है, अगर कोई व्यक्ति कई बीमारियों से पीड़ित है Durgashtotar Stotra और दुनिया के सबसे प्रसिद्ध डॉक्टर की मदद लेने के बाद भी उसे लाभ नहीं मिल रहा है तो वह दुर्गाष्टोतर स्तोत्र की मदद से न केवल बीमारी से उबर सकता है बल्कि अपना जीवन भी बीमारियों से पहले की तरह व्यतीत कर सकता है और भी बहुत कुछ। Durgashtotar Stotra:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए जिन व्यक्तियों को बिना किसी कारण के जीवन में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें वैदिक नियमों के अनुसार दुर्गाष्टोतर स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। दुर्गाष्टोतर स्तोत्र | Durgashtotar Stotra ईश्वर उवाच शतनाम प्रवक्ष्यामि शृणुष्व कमलानने । यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत् सती ॥ 1॥ ॐ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी । आर्या दुर्गा जया चाद्या त्रिनेत्रा शूलधारिणी ॥ 2॥ पिनाकधारिणी चित्रा चण्डघण्टा महातपाः । मनो बुद्धिरहंकारा चित्तरूपा चिता चितिः ॥ 3॥ सर्वमन्त्रमयी सत्ता सत्यानन्द स्वरूपिणी । अनन्ता भाविनी भाव्या भव्याभव्या सदागतिः ॥ 4॥ शाम्भवी देवमाता च चिन्ता रत्नप्रिया सदा । सर्वविद्या दक्षकन्या दक्षयज्ञविनाशिनी ॥ 5॥ अपर्णानेकवर्णा च पाटला पाटलावती । पट्टाम्बर परीधाना कलमञ्जीररञ्जिनी ॥ 6॥ अमेयविक्रमा क्रुरा सुन्दरी सुरसुन्दरी । वनदुर्गा च मातङ्गी मतङ्गमुनिपूजिता ॥ 7॥ ब्राह्मी माहेश्वरी चैन्द्री कौमारी वैष्णवी तथा । चामुण्डा चैव वाराही लक्ष्मीश्च पुरुषाकृतिः ॥ 8॥ विमलोत्कर्षिणी ज्ञाना क्रिया नित्या च बुद्धिदा । बहुला बहुलप्रेमा सर्ववाहन वाहना ॥ 9॥ निशुम्भशुम्भहननी महिषासुरमर्दिनी । मधुकैटभहन्त्री च चण्डमुण्डविनाशिनी ॥ 10॥ सर्वासुरविनाशा च सर्वदानवघातिनी । सर्वशास्त्रमयी सत्या सर्वास्त्रधारिणी तथा ॥ 11॥ अनेकशस्त्रहस्ता च अनेकास्त्रस्य धारिणी । कुमारी चैककन्या च कैशोरी युवती यतिः ॥ 12॥ अप्रौढा चैव प्रौढा च वृद्धमाता बलप्रदा । महोदरी मुक्तकेशी घोररूपा महाबला ॥ 13॥ अग्निज्वाला रौद्रमुखी कालरात्रिस्तपस्विनी । नारायणी भद्रकाली विष्णुमाया जलोदरी ॥ 14॥ शिवदूती कराली च अनन्ता परमेश्वरी । कात्यायनी च सावित्री प्रत्यक्षा ब्रह्मवादिनी ॥ 15॥ य इदं प्रपठेन्नित्यं दुर्गानामशताष्टकम् । नासाध्यं विद्यते देवि त्रिषु लोकेषु पार्वति ॥ 16॥ धनं धान्यं सुतं जायां हयं हस्तिनमेव च । चतुर्वर्गं तथा चान्ते लभेन्मुक्तिं च शाश्वतीम् ॥ 17॥ कुमारीं पूजयित्वा तु ध्यात्वा देवीं सुरेश्वरीम् । पूजयेत् परया भक्त्या पठेन्नामशताष्टकम् ॥ 18॥ तस्य सिद्धिर्भवेद् देवि सर्वैः सुरवरैरपि । राजानो दासतां यान्ति राज्यश्रियमवाप्नुयात् ॥ 19॥ गोरोचनालक्तककुङ्कुमेव सिन्धूरकर्पूरमधुत्रयेण । विलिख्य यन्त्रं विधिना विधिज्ञो भवेत् सदा धारयते पुरारिः ॥ 20॥ भौमावास्यानिशामग्रे चन्द्रे शतभिषां गते । विलिख्य प्रपठेत् स्तोत्रं स भवेत् संपदां पदम् ॥ 21॥

Durgashtotar Stotra | दुर्गाष्टोतर स्तोत्र Read More »

Sapne Me Accident Dekhna: सपने में एक्‍सीडेंट में खुद की मौत देखना इस बात का है संकेत, हो जाएं सावधान

Sapne Me Accident Dekhna:सपने में किसी कार का एक्‍सीडेंट देखना यकीनन बेहद डरावना होता है और ऐसा सपना देखने के बाद संभव है कि आप कई दिनों तक चैन की नींद न सो पाएं। लेकिन क्‍या आपको ऐसे किसी सपने का अर्थ पता है? स्‍वप्‍नशास्‍त्र में ऐसे सपनों का अर्थ बताया गया है। आइए जानते हैं सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े सपने और उनका क्‍या होता है अर्थ। Sapne Me Accident Dekhna:रात की नींद में कई बार ऐसे डरावने सपने आते हैं जो कि कई दिन तक हमारे दिलोदिमाग पर गहरा असर डालते हैं। इन्‍हीं में से एक है सपने में सड़क दुर्घटना देखना। आज हम ऐसे ही डरावने सपने और उनके अर्थ के बारे में आपको बता रहे हैं। आइए जानते हैं सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े सपनों का अर्थ। Car Accident Dreams: सपना देखना एक स्वभाविक क्रिया है और आमतौर पर हर इंसान सपने देखता है। वहीं कुछ सपने देखकर व्यक्ति को हर का एहसास होता है। तो कुछ सपने देखकर व्यक्ति सुखद अनुभव करता है। Sapne Me Accident Dekhna स्वप्न शास्त्र अनुसार जो सपने सुबह के समय देखे जाते हैं, वो सच होते हैं। लेकिन आपको बता दें कि ये जरूरी नहीं कि जो सपना आपने देखा हो उसका असल जिंदगी में भी यही मतलब हो। ऐसे में यहां हम बात करने जा रहे हैं सपने मेंं अगर आप कार एक्सीडेंट या कोई दुर्घटना देखें तो इसका क्या मतलब होता है। आइए जानते हैं… Sapne Me Accident Dekhna:कार एक्‍सीडेंट में किसी को मरते देखना स्वप्न शास्त्र अनुसार कार एक्सीडेंट में किसी को मरते देखना शुभ नहीं माना जाता है। मतलब अगर आपने ऐसा सपना देखा है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। मतलब आपको ऊपर कोई संकट या विपदा आ सकती है। Sapne Me Accident Dekhna साथ ही आपको वाहन सावधनी से चलाना चाहिए।  Sapne Me Accident Dekhna:दुर्घटना में खुद को मरते देखना सपने में आप खुद को दुर्घटना में मरते हुए देखते हैं तो यह एक अशुभ संकेत है। इसका मतलब कि आपको कार्यस्थल पर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही आपका स्वास्थ्य खराब हो सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में आपको सावधान रहना चाहिए।  किसी दूसरे की कार का एक्‍सीडेंट देखना स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में किसी दूसरे की कार का एक्सीडेंट या दुर्घटनाग्रस्त देखते हैं तो यह एक अशुभ संकेत है। इसका अर्थ है कि आपकी वजह से दूसरे लोग परेशानी में फंस सकते हैं। साथ ही आपको धनहानि हो सकती है या कोई अशुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है।  सपने में खुद का कार एक्सीडेंट देखना  सपने में अगर आफ खुद का कार एक्सीडेंट देखते हैं तो यह एक अशुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में आपकी सेहत खराब हो सकती है। साथ ही धन की हानि हो सकती है। इसलिए आपको हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए। साथ ही लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।  सपने में ट्रेन एक्सीडेंट अगर आप सपने में किसी ट्रेन का एक्सीडेंट देखते हैं तो इसका मतलब होता है कि आपको भारी आर्थिक नुकसान होने वाला है। इसलिए आपको नए निवेश से बचना चाहिए। साथ ही किसी को कुछ दिन तक धन भी उधार नहीं देखना चाहिए।

Sapne Me Accident Dekhna: सपने में एक्‍सीडेंट में खुद की मौत देखना इस बात का है संकेत, हो जाएं सावधान Read More »

Kalashtami 2025: कालाष्टमी के दिन लगाएं इन विशेष चीजों का भोग, प्रसन्न होंगे बाबा काल भैरव, मनोकामनाएं होंगी पूरी!

Kalashtami 2025: 20 फरवरी को कालाष्टमी व्रत रखा जाएगा. इस दिन काल भैरव का व्रत और पूजन करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. साथ ही भय व शत्रुओं से मुक्ति मिलती है. Kalashtami Puja Upay Niyam and Importance: कालाष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन भगवान भैरव को समर्पित है, जो भगवान शिव के उग्र रूप माने जाते हैं. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से सभी प्रकार के भय और संकट दूर होते हैं. मान्यता है कि भगवान भैरव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें नकारात्मक शक्तियों से बचाते हैं. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. जो लोग सच्चे मन से भगवान भैरव की पूजा करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 20 फरवरी दिन गुरुवार को सुबह 03 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 21 फरवरी दिन शुक्रवार को सुबह 01 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार कालाष्टमी की पूजा 20 फरवरी को करना शुभ रहेगा. इस दिन मनाई जाएगी कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 20 फरवरी को सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर शुरु होगी और 21 फरवरी को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में कालाष्टमी का व्रत 20 फरवरी के दिन रखा जाएगा और इसी दिन कालाष्टमी व्रत रखा जाएगा. भगवान काल भैरव को लगाए ये भोग कालाष्टमी के दिन बाबा काल भैरव को गुलगुले, जलेबी या हलवे का भोग लगाना चाहिए. यह उन्हें बेहद प्रिय माने जाते हैं. भगवान काल भैरव को कालाष्टमी के दिन मदिरा का भोग लगाने का भी महत्व है, इसलिए इस दिन आप इन्हें मदिरा का भोग लगा सकते हैं. मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव को इस दिन पूजा के समय पान, सुपारी, लौंग सहित मुखवास आदि चढ़ाना भी अच्छा माना जाता है. एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि जब भी आप कालाष्टमी की पूजा करके उन्हें भोग लगाएं. उसके बाद गरीबों को भोजन अवश्य कराएं. इससे आपको अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा. Kalashtami 2025 Ki Puja Vidhi:कालाष्टमी की पूजा विधि कालाष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. भगवान भैरव की प्रतिमा को एक चौकी पर स्थापित करें. भगवान भैरव को धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें. कालाष्टमी की व्रत कथा सुनें. दिन भर व्रत रखें और भगवान भैरव का ध्यान करें. शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करें. व्रत पारण के लिए सबसे पहले भगवान भैरव को मोदक का भोग लगाएं. इसके बाद आप फल, मिठाई और अन्य सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं. इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है. Kalashtami 2025:काल भैरव को अर्पित करें ये चीजें Kalashtami 2025:कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व है. Kalashtami 2025 इस दिन काल भैरव को कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से मनोकामनाएं जल्द पूरी होती हैं. यहां कुछ चीजें बताई गई हैं जिन्हें आप कालाष्टमी के दिन काल भैरव को अर्पित कर सकते हैं. काला तिल: कालाष्टमी के दिन काल भैरव को काले तिल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है. इससे पितृ दोष शांत होता है और राहु-केतु के दोष भी दूर होते हैं. उड़द की दाल: उड़द की दाल से बनी चीजें जैसे कि पकौड़े, बड़े आदि काल भैरव को अर्पित करने से शनि के दोष शांत होते हैं. सरसों का तेल: कालाष्टमी के दिन काल भैरव को सरसों का तेल अर्पित करना चाहिए. इससे रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है. भैरव अष्टमी: इस दिन काल भैरव को आठ प्रकार के फल अर्पित करने से अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति होती है. काले वस्त्र: काल भैरव को काले वस्त्र अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुरक्षा मिलती है. पंच मेवा: काल भैरव को पंच मेवा अर्पित करने से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है. मदिरा: कुछ लोग कालाष्टमी के दिन काल भैरव को मदिरा भी अर्पित करते हैं. कुत्ते को भोजन: कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को भोजन कराना बहुत शुभ माना जाता है. इससे Kalashtami 2025 काल भैरव प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कालाष्टमी Kalashtami 2025 के दिन काल भैरव को ये चीजें अर्पित करने से आपके जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. Kalashtami 2025:कालाष्टमी का महत्व ऐसी मान्यता है कि Kalashtami 2025 कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से जीवन में समृद्धि और सफलता आती है. भगवान भैरव को धन और ऐश्वर्य का देवता भी माना जाता है. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. यह दिन बुरी शक्तियों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए बहुत शुभ माना जाता है. भगवान भैरव की पूजा करने से आध्यात्मिक विकास होता है. यह दिन आत्मा को शुद्ध करने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

Kalashtami 2025: कालाष्टमी के दिन लगाएं इन विशेष चीजों का भोग, प्रसन्न होंगे बाबा काल भैरव, मनोकामनाएं होंगी पूरी! Read More »

श्री वेणी माधव मंदिर प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

श्री वेणी माधव मंदिर:वेणी माधव मंदिर की गिनती प्रयागराज के सबसे पुराने मंदिरों में की जाती है। श्री वेणी माधव मंदिर:जैसे काशी को भगवान भोलेनाथ की नगरी कहा जाता है, ठीक वैसे ही प्रयागराज को भगवान विष्णु की नगरी कहा जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित वेणी माधव मंदिर प्रयागराज के दारागंज में निराला मार्ग पर स्थित है। वेणी माधव मंदिर लोकप्रिय रूप से वाणी माधव मंदिर के रूप में जाना जाता है और प्रयागराज के प्रयाग में 12 माधव मंदिरों में से एक है। वेणी माधव मंदिर में भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा अर्चना की जाती है। श्री वेणी माधव मंदिर:मंदिर का इतिहास वेणी माधव मंदिर 171 साल पुराना है। इतिहासकारों की माने तो इसका निर्माण श्रीमंत दौलत राव सिंधिया की पत्नी बैजा बाई साहब ने वर्ष 1835 में करवाया था। वेणी माधव मंदिर की गिनती प्रयागराज के सबसे पुराने मंदिरों में की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार बंगाल के प्रसिद्ध वैष्णवों के संत- चैतन्य महाप्रभु जी ने लंबे समय तक वेणी माधव मंदिर में तपस्या की थी। पद्म पुराण के अनुसार, यह प्रसिद्ध बंगाली गुरु प्रयाग के मुख्य देवता है। वह भगवान महा विष्णु और देवी लक्ष्मी के उत्साही भक्तों में से एक थे। वेणी माधव मंदिर प्रवेश द्वार के बायीं ओर लगे शिलालेख में उल्लेख है कि मंदिर का प्रबंधन सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट, ग्वालियर के पास है। श्री वेणी माधव मंदिर:मंदिर का महत्व वेणी माधव मंदिर के बारे में कहा जाता है कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रयाग में प्रथम यज्ञ किया था। पुराणों के अनुसार प्रयाग में सभी तीर्थों का उद्गम है। इस पावन नगरी के निर्माता भगवान श्री विष्णु स्वयं है और वह यहां भगवान श्री वेणी माधव मंदिर के रूप में विराजमान है। संगम स्नान के बाद भगवान श्री वेणी माधव जी के दर्शन करने से ही पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता पुराणों एवं रामचरितमानस में वर्णित है। इस प्राचीनतम मंदिर के प्रांगण में चैतन्य महाप्रभु जी वेणी माधव जी के दर्शन करने हेतु संकीर्तन एवं नृत्य किया करते थे। श्री वेणी माधव मंदिर:मंदिर की वास्तुकला वेणी माधव मंदिर की वास्तुकला बहुत सुंदर है, जो विशिष्ट मराठी वास्तुकला की एक झलक देता है। मंदिर के ‘शिखर’ पर नक्काशी की गई है और इसके उच्चतम बिंदु को पीतल की संरचना से सजाया गया है जो सूरज की रोशनी में चमकता है। शिखर पर सिंधिया राजवंश का प्रतीक चिन्ह (दो नागों से घिरे सूर्य की भव्य आकृति) भी उकेरा गया है। श्री कृष्ण भगवान जी की मूर्ति यहां पर श्याम रंग की है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर काले रंग का बड़ा गेट लगा है। पत्थर की सीढ़ियां गर्भगृह तक ले जाती हैं जहां श्री वेणी, माधव और गरुण की मूर्तियां हैं। मूर्तियों के पास बैजा बाई की संगमरमर की मूर्ति भी रखी हुई है। प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर स्वर्गीय माधव राव सिंधिया की दो तस्वीरें हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सांयकाल आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM शाम में मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM मंदिर का प्रसाद वेणी माधव मंदिर में वेणी माधव जी को लड्डू का प्रसाद चढ़ाया जाता है। श्रद्धालु वेणी माधव जी को ड्राई फ्रूट्स, फल और पेड़े का भी भोग लगाते हैं।

श्री वेणी माधव मंदिर प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

बाँके बिहारी मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर की गिनती प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में की जाती है। उत्तर प्रदेश मथुरा जिले के वृंदावन में बिहारीपुरा में बाँके बिहारी मंदिर है। इस मंदिर की गिनती भी प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में की जाती है। बाँके बिहारी भगवान् श्री कृष्ण का ही एक रूप है। जो बहुत ही अद्भुत है। बाँके बिहारी मंदिर विश्व में प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त इस मंदिर के दर्शन करते है उनका जीवन सफल हो जाता है। मंदिर का इतिहास इस मंदिर के इतिहास के पीछे भी एक कहानी है। बाँके बिहारी मंदिर की कहानी कुछ इस प्रकार है। बाँके बिहारी मंदिर का निर्माण 1864 में स्वामी हरिदास ने करवाया था। स्वामी हरिदास भगवान कृष्ण और राधा जी के परम भक्त थे। उनके भक्ति और समर्पण के आगे भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को निधिवन में साक्षात् प्रकट होना पड़ा। इस दिव्य जोड़े की सुंदरता और आकर्षण का तेज इतना था की एक साधारण मनुष्य इसे सहन नहीं कर सकता था। इसलिए स्वामी हरिदास ने भगवान को सहज रूप में प्रकट होने का अनुरोध किया। उनका अनुरोध स्वीकार कर भगवान बांके बिहारी जी और राधारानी एकीकृत होकर एक काली आकर्षक मूर्ति में विलीन हो गए। इस प्रतिमा की आज भी पूजा होती है। स्वामी हरिदास जी के अनुयायियों ने 1921 में बाके बिहारी मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। बाँके बिहारी मंदिर वृंदावन:मंदिर का महत्व इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त बाके बिहारी जी के दर्शन करता है वह उन्ही का हो कर रह जाता है। जो भी व्यक्ति बांके बिहारी की मूर्ति की एक झलक लेता है वह सब सुध बुध भूलकर उन्ही में रम जाता है। बांके बिहारी जी की पूजा करने से सभी संकटों का नाश होता है। बांके का अर्थ है तीन कोणों पर मुड़ा हुआ, यह एक तरह से बांसुरी बजाते भगवान कृष्ण की एक मुद्रा ही है। बांसुरी बजाने के समय भगवान श्री कृष्ण का दाहिना घुटना बाएं घुटने के समीप मुड़ा हुआ रहता था और दायां हाथ बांसुरी को थामने हेतु मुड़ा रहता था। इस कारण श्री कृष्ण का सिर भी हल्का सा एक तरफ झुका रहता था। उनके द्वारा इस तरह किये जाने के कारण उनका नाम बांके बिहारी पड़ा। बाँके बिहारी मंदिर वृंदावन:मंदिर की वास्तुकला बांके बिहारी मंदिर की वास्तुकला राजस्थानी वास्तुकला से प्रेरित है। इस मंदिर के मेहराब और स्तम्भ बहुत ही अट्रेक्टिव है। बांके बिहारी जी की काले पत्थर से निर्मित प्रतिमा बहुत ही आकर्षक है। इसे देखकर सभी मंत्र मुग्ध हो जाते है। इस प्रतिमा में राधा और कृष्ण का एकी कारण है। मंदिर का समय गर्मियों में बांके बिहारी मंदिर खुलने का समय 07:45 AM – 12:00 PM राजभोग आरती का समय 11:55 AM – 12:00 PM शयन आरती का समय 09:25 PM – 09:30 PM सर्दियों में बांके बिहारी मंदिर शाम को खुलने का समय 04:30 PM – 08:30 PM राज भोग का समय 11:00 AM – 11:30 AM गर्मियीं में बांके बिहारी मंदिर शाम को खुलने का समय 05:30 PM – 09:30 PM सर्दियों में बांके बिहारी मंदिर खुलने का समय 08:45 AM – 01:00 PM मंदिर का प्रसाद बांके बिहारी मंदिर में भगवान को माखन- मिश्री, चंदन, गुलाब जल और केसर का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूल भी चढ़ाये जाते है।

बाँके बिहारी मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

प्रेम मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

55 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में बने प्रेम मंदिर पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रेम मंदिर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले के समीप वृंदावन में स्थित है। जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज जी की संस्था जगद्गुरु कृपालु परिषत द्वारा भगवान श्री कृष्ण और राधा के इस भव्य मन्दिर का निर्माण करवाया गया है। 54 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में बना प्रेम मंदिर पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रेम मंदिर में राधा-कृष्ण की भव्य मूर्ति की स्थापना के साथ सीता-राम जी प्रतिमा की स्थापित की गई है। प्रेम मंदिर में देश के लोगों के अलावा विदेशों से भी कई लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। होली और दीवाली पर तो यहां का नजारा और भव्य हो जाता है। मंदिर का इतिहास जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज जी ने प्रेम मंदिर की नींव जनवरी 2001 में रखी थी। मंदिर पूरे एक हजार मजदूरों द्वारा 11 सालों में बनकर तैयार किया गया। इसका उद्घाटन समारोह 15 फरवरो 2012 को किया गया था। फिर 17 फरवरी को इसे भक्तों के लिए खोल दिया गया था। मंदिर संगमरमर के पत्थरों से बना है, जो कि इटली से मंगवाए गए थे। इसको बनाने में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 1,000 शिल्पकारों को लगाया गया था। मंदिर की सतरंगी रोशनी भी भक्तों को बेहद आकर्षित करती है। मंदिर का महत्व प्रेम मंदिर की एक खासियत ये भी है कि आपको ये दिन में एकदम सफेद दिखाई देगा और शाम के समय रोशनी के बीच मंदिर का रंग कुछ अलग ही नजर दिखाई देता है। प्रेम मंदिर एक आध्यात्मिक मंदिर है। इसमें रखी राधा कृष्ण की मूर्ति के दर्शन मात्र से भक्तों को अत्यंत शुकून और शांति मिलती है। प्रेम मंदिर राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का प्रतीक है। इसमें भगवान कृष्ण की लीलाएं जैसे की गोवर्धन लीला, कालिया नाग लीला, झूलन लीला जैसी अनेक लीलाओं की झांकियां सजाई गई है। मंदिर की वास्तुकला प्रेम मंदिर के निर्माण में इटालियन संगमरमर का उपयोग किया गया है। दो मंजिला सफेद रंग के प्रेम मंदिर को एक ऊंचे चबूतरे पर बनाया गया है, जो 128 फीट चौड़ा और 125 फीट ऊंचा और 190 फीट लंबा है। मंदिर में सत्संग के लिए एक विशाल भवन का निर्माण किया गया है, जिसमें एक साथ 25000 हजार लोग बैठ सकते हैं। प्रेम मंदिर की दीवारें 3.25 फीट मोटी हैं और इटालियन संगमरमर से बनी हैं। इस मंदिर के द्वार चारों दिशाओं में खुलते है। विशाल शिखर, स्वर्ण कलश और ध्वज का वजन सहने के लिए गर्भगृह की दीवारें 8 फीट मोटी हैं। प्रेम मंदिर में 94 कलामंडित स्तम्भ हैं, जो मंदिर की खूबसूरती में चार-चांद लगा रहे हैं। मंदिर के गर्भगृह के बाहर और अन्दर प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प की उत्कृष्ट पच्चीकारी और नक्काशी की गयी है। संगमरमर की शिलाओं पर राधा गोविन्द गीत सरल भाषा में लिखे गये हैं। मंदिर परिसर में गोवर्धन पर्वत की सजीव झाँकी बनायी गयी है। प्रेम मंदिर खुलने का समय 05:30 AM – 12:00 PM सुबह भोग का समय 06:30 AM – 07:00 AM सुबह भोग का समय 11:30 AM – 12:00 PM शाम दर्शन और आरती का समय 04:30 PM – 05:30 PM शाम परिक्रमा का समय 07:00 PM – 08:00 PM सुबह की आरती और परिक्रमा का समय 05:30 AM – 06:30 AM सुबह दर्शन और आरती का समय 08:30 AM – 11:30 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 08:30 PM शाम भोग का समय 05:30 PM – 06:00 PM शाम की आरती का समय 08:10 PM – 08:30 PM मंदिर का प्रसाद प्रेम मंदिर में फूलों के साथ माखन, मिश्री, पेड़ा और बर्फी का भोग लगाया जाता है। श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 50 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

प्रेम मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

Lucky Dream For Money: सपने में दिखें ये चीजें, तो समझ लें कि जल्द होने वाले हैं मालामाल, भाग्य का मिलेगा पूरा साथ

Lucky Dream For Money:स्वप्न शास्त्र के अनुसार, व्यक्त को सोते समय विभिन्न तरह के सपने आते हैं। जिसका कोई न कोई कनेक्शन आपके भविष्य से होता है। ऐसे ही जानिए सपने में कौन सी चीजें देता है धन लाभ का संकेत। Lucky Dream For Money धनवान बनने का सपना आप भी देखते हैं तो खुली आंखों की बजाय नींद में इन सपनों को देखने की चाहत कीजिए। स्वप्नशास्त्र के अनुसार इन सपनों का संबंध आपके जीवन की खुशी से है। इन सपनों के दिखने से व्यक्ति को जल्दी धन लाभ और उन्नति मिलती है। आप भी दुआ कीजिए आपको भी ऐसे सपने आज रात दिखे। Lucky Dream For Money:सपने जो बताते हैं मिलने वाला खूब पैसा सपने देखना एक सामान्य क्रिया मानी जाती है लेकिन स्वप्नशास्त्र के अनुसार, यह महज कोई संयोग नहीं होता है बल्कि सपने आपके जीवन में होने वाली घटनाओं के बारे में पहले ही जानकारी दे देते हैं। प्राचीन काल में राजा-महाराजा अपने शासनकाल में तो स्वपन विशेषज्ञों को दरबार में रखते थे, ताकि वह सपनों के रहस्यों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। हर सपने का कोई न कोई मतलब जरूर होता है या फिर ये कहें कि आने वाले भविष्य की जानकारी देते हैं। Lucky Dream For Money कुछ सपने तो ऐसे होते हैं, जो आपकी किस्मत तक को चमका जाते हैं। स्वप्नशास्त्र में बताया गया है कि कुछ सपने देखने से अच्छे धन की प्राप्ति होती है और करियर में भी ग्रोथ होती है। आइए जानते हैं इन सपनों के बारे में… खुद को अंगूठी पहनते हुए देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर आप खुद को सपने में अंगूठी पहनते हुए देखते हैं, तो इसका मतलब है कि जल्द ही आपको धन लाभ हो सकता है। Sapne me cow dekhna:सपने में गाय का दूध लेते हुए देखना सपने में कोई व्यक्ति गाय का दूध ले रहा है, Lucky Dream For Money तो ये इस बात की ओर इशारा करता है कि आपको जल्द ही धन की प्राप्ति हो सकती है और घर में खुशहाली आ सकती है। Sapne me Safed Ghoda dekhna:सपने में सफेद घोड़े को देखना अगर सपने में किसी सफेद घोड़े को देखते हैं, तो इसका मतलब भी धन लाभ माना जाता है। सपने में नेवला को देखना:Sapne me nevla Dekhna सपने में नेवला को देखना भी शुभ माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर कोई सपने में नेवला देखता है, तो  उसे भविष्य में धन लाभ के साथ हीरे जवाहरात मिल सकता है। सपने में आम का बगीचा देखना अगर आपने सपने में आम का बगीचा देखा है, Lucky Dream For Money तो इसका मतलब है कि जल्द ही आपको धन लाभ हो सकता है। इसके साथ ही कई कार्यों में सफलता हासिल हो सकती है। सपने में सारस को देखना सपने में सारस पक्षी को देखना भी शुभ संकेत माना जाता है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में धन लाभ हो सकता है। खुद को चढ़ते हुए देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में खुद को पेड़ या पहाड़ में चढ़ते हुए देखते हैं, तो उसका मतलब है कि आप भविष्य में ऊंचाइयों को छूने वाले हैं। इसके साथ ही अपार धन संपदा की प्राप्ति हो सकती है।

Lucky Dream For Money: सपने में दिखें ये चीजें, तो समझ लें कि जल्द होने वाले हैं मालामाल, भाग्य का मिलेगा पूरा साथ Read More »