बजरंग बाण | Bajrang Baan

Bajrang Baan (बजरंग बाण) : भौतिक मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये बजरंग बाण/Bajrang Baan का अमोघ विलक्षण प्रयोग करे, अपने इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार के दिन हनुमानजी के सामने लाल आसन पर बैठकर 108 बार पाठ करे। जप के प्रारम्भ में यह संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, Bajrang Baan अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग बाण का जाप प्रारम्भ करें। “श्रीराम” से लेकर “सिद्ध करैं हनुमान” तक एक बैठक में ही इसकी एक माला जप करनी है। गूगुल की सुगन्ध देकर जिस घर में बगरंग बाण/Bajrang Baan का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट आ ही नहीं सकते, समयाभाव में जो व्यक्ति नित्य पाठ करने में असमर्थ हो, Bajrang Baan उन्हें कम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए। दीप दान Bajrang Baan हनुमान जी के अनुष्ठान मे अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। Bajrang Baan पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएँ। Bajrang Baan बत्ती के लिए अपनी लम्बाई के बराबर कलावे का एक तार लें अथवा एक कच्चे सूत को लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें। इस धागे को पाँच बार मोड़ लें। इस प्रकार के धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें। समस्त पूजा काल में यह दिया जलता रहना चाहिए। हनुमानजी के लिये गूगुल की धूनी की भी व्यवस्था रखें। Bajrang Baan:बजरंग बाण ध्यान श्रीराम अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।। दोहा निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।। चौपाई जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।। जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।। जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।। आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।। जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।। बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।। अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।। लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।। अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।। जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।। जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।। ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।। गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।। सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।। ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।। सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।। जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।। पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।। वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।। पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।। जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।। बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।। भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।। इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।। जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।। जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।। उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पाँय परौं कर जोरि मनाई।। ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।। ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।। अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।। ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।। ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।। हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।। हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।। जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।। जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।। जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।। जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।। जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।। ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।। राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।। विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भाँति।। तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।। यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।। सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।। एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।। याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।। मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।। पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।। डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।। भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।। प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।। आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छाँह काल नहिं चापै।। दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।। यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।। शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर काँपै।। तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।। दोहा प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।। तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।

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Hanuman Jayanti kab ki hai: हनुमान जयंती कब है? नोट कर लें सही तिथि और पूजा विधि

Hanuman Jayanti kab ki hai: हर साल चैत्र माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बजरंग बली हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान राम और हनुमान जी पूजा करने से जीवन से सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है, तो आइए जानते हैं कि इस साल कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती. Hanuman Jayanti Date and Importance: हनुमान जन्मोत्सव हिंदू धर्म में एक पवित्र पर्व है, जो भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार संकट मोचन हनुमान जी आज भी धरती पर विद्यमान हैं और भक्तों के कष्टों को हरने वाले देवता माने जाते हैं। हर साल यह पर्व चैत्र माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। Hanuman Jayanti kab ki hai इस दिन श्री राम और हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्री हनुमान जन्मोत्सव या हनुमान जयंती श्री राम भक्त, वानर राज, वीर हनुमान जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री हनुमंत शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक हैं, वह जादुई शक्तियों, भूत, प्रेत एवं बुरी आत्माओं पर विजय प्राप्त करने वाले देव के रूप मे पूजे जाते हैं। Lord Hanuman: मंगलवार के दिन ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, जीवन के संकटों से मिलेगा छुटकारा हनुमान जयंती भारत के विभिन्न क्षेत्रों मे अलग-अलग समय पर मनाई जाती है, उत्तर भारत मे यह त्यौहार मुख्य रूप से चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है। हनुमान जयंती के दिन उपवास रखने वाले व्यक्ति को एक दिन ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करना चाहिए। हनुमान जयंती तिथि |Hanuman Jayanti 2025 Date हिंदू पंचांग के अनुसार, हनुमान जयंती यानी चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल को सुबह 3 बजकर 21 मिनट पर होगी. साथ ही तिथि का समापन अगले दिन 13 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा. Hanuman Jayanti kab ki hai उदया तिथि के अनुसार, हनुमान जयंती 12 अप्रैल को मनाई जाएगी. श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर:गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत Hanuman Jayanti kab ki hai:हनुमान जन्मोत्सव 2025 कब है? इस वर्ष 12 अप्रैल 2025 को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 12 अप्रैल को सुबह 3:21 बजे से शुरू होकर 13 अप्रैल सुबह 5:51 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को मनाया जाएगा। हनुमान जयंती पूजा विधि |Hanuman Jayanti Puja Vidhi Hanuman Jayanti kab ki hai हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा की जाती है. इस दिन सुबह उठकर स्नान कर लाल रंग के वस्त्र पहने. उसके बाद हनुमान जी को सिंदूर, लाल रंग के फूल, तुलसी दल, चोला और बूंदी के लड्डू का प्रसाद अर्पित करें. उसके बाद मंत्र जाप करें. फिर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें. अंत में आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें. April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें हनुमान जयंती का महत्व |Hanuman Jayanti Significance Hanuman Jayanti kab ki hai हिंदू धर्म में हनुमान जी को 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है. कहते हैं वह आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, Hanuman Jayanti kab ki hai जिससे उसके जीवन के सभी कष्ट और संकट दूर होते हैं. इस दिन पूजा में उन्हें फूल, माला, सिंदूर चढ़ाने के साथ बूंदी या बेसन के लड्डू, तुलसी दल अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं. पूजा विधि         “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्॥” हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। आरती कर प्रसाद वितरित करें। हनुमान जन्मोत्सव के इस शुभ अवसर पर विधिपूर्वक पूजा करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है Hanuman Jayanti kab ki hai और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।  Bandi Mochan Hanuman Stotra | बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र

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Jain Festival 2025 Calendar 2025: में कब-कब मनाए जाएंगे जैन धर्म के प्रमुख त्योहार, महावीर स्वामी के बारे में जानें ये ख़ास बातें

Jain Festival 2025 Calendar 2025 : महावीर जयंती इस साल चार अप्रैल को है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर जयंती जैन समुदाय का विशेष पर्व होता है. इस जयंती को भगवान महावीर स्वामी के जन्म के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे. उनका जन्म ईसा पूर्व 599 वर्ष माना जाता है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 उनके पिता राजा सिद्धार्थ और माता रानी त्रिशला थीं और बचपन में उनका नाम वर्द्धमान था. Mahavir Jayanti 2025: महावीर जयंती 2025 कब है? Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर जयंती हिंदू चंद्र कैलेंडर में चैत्र महीने के 13वें दिन आती है, Jain Festival 2025 Calendar 2025 जो आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में मार्च या अप्रैल में आती है। इस वर्ष, महावीर जयंती 10 अप्रैल, 2025 (गुरुवार) को मनाई जाएगी। Jain calendar 2025 Festival: जैन धर्म, अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह जैसे महान सिद्धांतों पर आधारित, विश्व के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। इस धर्म के संस्थापक ऋषभदेव माने जाते हैं। जैन धर्म का एक विशेष कैलेंडर होता है, Jain Festival 2025 Calendar 2025 जिसमें उनके सभी व्रत और त्योहारों की जानकारी दी जाती है। जैसे हिंदू कैलेंडर में त्योहारों का उल्लेख होता है, वैसे ही जैन कैलेंडर में भी विभिन्न व्रत और पर्वों की तिथियां निर्धारित होती हैं। यहां 2025 के जैन कैलेंडर में महत्वपूर्ण व्रत और पर्वों के बारे में जानकारी है। जैन कैलेंडर के 12 महीने हिंदू कैलेंडर की तरह ही जैन कैलेंडर में भी 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीना 30 दिनों का होता है। इन 12 महीनों के नाम, कार्तक, मगसर, पोष, महा, फागन, चैत्र, वैशाख, जेठ, आषाढ़, श्रावण, भादरवो और आसो है। Jain Festival 2025 Calendar 2025 जैन धर्म का नववर्ष दिवाली के अगले दिन से शुरू होता है। यह दिन वीर निर्वाण संवत के अनुसार वर्ष का पहला दिन माना जाता है। जैन धर्म के अनुयायी अपने व्रत और त्योहारों को आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मिक शुद्धि के लिए मनाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2025 में जैन धर्म के कौन से त्योहार किस दिन मनाए जाएंगे।  जैन धर्म किन चीज़ों पर आधारित है? हिंदू धर्म की तरह जैन धर्म का भी कोई संस्थापक नहीं है. जैन धर्म 24 तीर्थंकरों के जीवन और शिक्षा पर आधारित है. तीर्थंकर यानी वो आत्माएं जो मानवीय पीड़ा और हिंसा से भरे इस सांसारिक जीवन को पार कर आध्यात्मिक मुक्ति के क्षेत्र में पहुंच गई हैं. सभी जैनियों के लिए 24वें तीर्थंकर महावीर जैन का ख़ास महत्व है. महावीर इन आध्यात्मिक तपस्वियों में से अंतिम तीर्थंकर थे. लेकिन, जहां औरों की ऐतिहासिकता अनिश्चित है वहीं, महावीर जैन के बारे में पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि उन्होंने इस धरती पर जन्म लिया. अहिंसा के इस उपदेशक का जन्म क्षत्रिय जाति में हुआ. वो गौतम बुद्ध के समकालीन थे. Jain Festival 2025 Calendar 2025:महावीर जयंती का उत्सव  Jain Festival 2025 Calendar 2025:महावीर जयंती को दुनिया भर में जैन धर्मावलंबियों द्वारा जीवंत उत्सव और गहरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव में आम तौर पर ये शामिल होते हैं: जुलूस और रथ यात्राएँ : कई शहरों और कस्बों में भव्य जुलूस निकाले जाते हैं, जिन्हें रथ यात्रा के नाम से जाना जाता है। Jain Festival 2025 Calendar 2025 भगवान महावीर की मूर्तियों को भव्य रूप से सजाए गए रथों पर ले जाया जाता है, साथ में भक्त भजन गाते हैं, धार्मिक गीत गाते हैं और पारंपरिक नृत्य करते हैं। मंदिर भ्रमण और प्रार्थना : जैन धर्मावलंबी जैन मंदिरों (देरासार) में प्रार्थना करने और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए जाते हैं। भगवान महावीर की मूर्तियों का विशेष अभिषेक (औपचारिक स्नान) किया जाता है। व्याख्यान और प्रवचन: धार्मिक नेता और विद्वान भगवान महावीर के जीवन और शिक्षाओं पर व्याख्यान और प्रवचन देते हैं। ये सत्र जैन दर्शन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं और श्रोताओं को अपने दैनिक जीवन में इसके सिद्धांतों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। धर्मार्थ गतिविधियाँ और सामुदायिक सेवा: इस शुभ दिन पर, जैन लोग विभिन्न धर्मार्थ गतिविधियों में संलग्न होते हैं, जैसे कि जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और दवाएँ दान करना। वे रक्तदान शिविर और निःशुल्क चिकित्सा जाँच शिविर भी आयोजित करते हैं। पशु आश्रयों को अक्सर सहायता दी जाती है, और जानवरों को बचाने और उनकी रक्षा करने के प्रयास किए जाते हैं। उपवास और ध्यान: कई जैन लोग महावीर जयंती पर उपवास रखते हैं, भोजन से परहेज करते हैं या केवल कुछ प्रकार के भोजन का सेवन करते हैं। वे आंतरिक शांति और आध्यात्मिक विकास की तलाश में ध्यान और चिंतन के लिए भी समय समर्पित करते हैं। बूचड़खानों से पशुओं को मुक्त करना: बूचड़खानों में जाने वाले पशुओं को मुक्त करना एक विशेष रूप से प्रभावशाली प्रथा है। करुणा का यह कार्य अहिंसा के सिद्धांत का प्रतीक है और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा के लिए जैन प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। सजावट और रोशनी: जैन मंदिरों और घरों को रंग-बिरंगे झंडों, फूलों और रोशनी से सजाया जाता है, जिससे उत्सव का माहौल बनता है। किसी भी जीव को नुकसान पहुँचाए बिना तैयार किए गए विशेष जैन व्यंजन परोसे जाते हैं। 2025: जैन धर्म के प्रमुख पर्व-त्योहार Jain Festival 2025 Calendar 2025 2 जनवरी 2025 यतीन्द्र सुरेश्वर दिवस   गुरुवार 02 जनवरी 2025 त्रिस्तुति     गुरुवार 06 जनवरी 2025 श्री राजेंद्र सूरीश्वर दिवस सोमवार 26 जनवरी 2025  शीतलनाथ जन्म तप   रविवार 27 जनवरी 2025 मेरु त्रयोदशी     सोमवार 27 जनवरी 2025  आदिनाथ निर्वाण कल्याणक  सोमवार 28 जनवरी 2025 ऋषभदेव मोक्ष   मंगलवार 02 फरवरी 2025  दशलक्षण (3/3) प्रारम्भ रविवार 04 फरवरी 2025 मर्यादा महोत्सव   मंगलवार 11 फरवरी 2025  श्री जीतेन्द्र रथ यात्रा  मंगलवार 11 फरवरी 2025   दशलक्षण (3/3) समाप्त  मंगलवार 07 मार्च 2025   अष्टान्हिका (3/3) प्रारम्भ   शुक्रवार 14 मार्च 2025  अष्टान्हिका (3/3) समाप्त शुक्रवार 02 अप्रैल 2025  दशलक्षण (1/3) प्रारम्भ बुधवार 04 अप्रैल 2025 आयंबिल ओली प्रारंभ शुक्रवार 10 अप्रैल 2025 महावीर जयंती  गुरुवार 11 अप्रैल 2025 दशलक्षण (1/3) समाप्त     शुक्रवार 12 अप्रैल 2025  आयंबिल ओली अंत  शनिवार 07 मई 2025 श्री महावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान दिवस बुधवार 13 मई 2025 ज्येष्ठ जिनवार व्रत प्रारंभ मंगलवार 24 मई 2025  श्री अनंतनाथ जन्म तप शनिवार 11 जून 2025 

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Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय

Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai: कामदा एकादशी व्रत चैत्र नवरात्रि के राम नवमी के बाद की पहली एकादशी है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह एकादशी आमतौर पर मार्च या अप्रैल महीने में आती है। Kamada Ekadashi 2025: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत होगा। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। इस बार Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai कामदा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि व रवि योग बनने से इस दिन का महत्व बढ़ रहा है। जानें अप्रैल माह की पहली एकादशी कब है और पूजन व व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- कब है कामदा एकादशी | Kamada Ekadashi 2025 Date  Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 7 अप्रैल की शाम 4 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो जाएगी और इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 8 अप्रैल को 5 बजकर 42 मिनट पर होगा. ऐसे में कामदा एकादशी का व्रत 8 अप्रैल, मंगलवार के दिन रखा जाएगा.  कब किया जाएगा कामदा एकादशी का पारण (Kamada Ekadashi Paran Time)  Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai कामदा एकादशी का पारण (Paran) द्वादशी तिथि पर होता है. ऐसे में 9 अप्रैल बुधवार के दिन कामदा एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा. व्रत पारण करने यानी व्रत समाप्त करने का शुभ मुहूर्त 9 अप्रैल सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगा और 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. इस समयावधि में एकादशी व्रत का पारण करना शुभ होगा. Ram Navami Kab hai 2025:आने वाले साल में कब है, राम नवमी पर करें इन मंत्रों का जाप, नोट कर लें सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त कामदा एकादशी की पूजा विधि | Kamada Ekadashi Puja Vidhi  कामदा एकादशी Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai के दिन सुबह-सवेरे उठकर स्नान पश्चात व्रत का प्रण लिया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूरे मनोभाव से पूजा की जाती है. पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस रंग को श्रीहरि का प्रिय रंग कहा जाता है. पीले रंग के वस्त्र पहनना, चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाना, पीले फूल, पीले फल और पीले फल को पूजा में शामिल करना बेहद शुभ होता है. एकादशी की पूजा (Ekadashi Puja) में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जाता है. पूजा करते हुए एकादशी की व्रत कथा पढ़ी जाती है, आरती होती है, भोग लगाने के बाद पूजा संपन्न की जाती है और भगवान विष्णु के आशीर्वाद की कामना की जाती है.  April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें कामदा एकादशी पूजन मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त- 04:32 ए एम से 05:18 ए एम अभिजित मुहूर्त- 11:58 ए एम से 12:48 पी एम विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:20 पी एम अमृत काल- 06:13 ए एम से 07:55 ए एम सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:03 ए एम से 07:55 ए एम रवि योग- 06:03 ए एम से 07:55 ए एम कामदा एकादशी का महत्व- हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत रखने से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai राक्षस योनि से मुक्ति मिलने की मान्यता है। जगत के पालन हार भगवान विष्णु की कृपा से सभी पाप मिट जाते हैं। कामदा एकादशी व्रत पारण का मुहूर्त- कामदा एकादशी व्रत का पारण 09 अप्रैल 2025 को किया जाएगा। Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 02 मिनट से सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। पारण तिति के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय रात 10 बजकर 55 मिनट है। may 2025 vrat tyohar list: मई 2025 व्रत और त्योहारों की संपूर्ण सूची एवं महत्व (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय Read More »

Swapna Shastra Ke Mutabik Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna:पने में मां दुर्गा को देखने से मिलते हैं ये शुभ संकेत, जीवन में हो सकते हैं ये बदलाव

Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna: माता दुर्गा को सपने में अलग-अलग रूपों में देखने का क्या अर्थ होता है, इसके बारे में विस्तार से जानें हमारे लेख में। सपने में कई तरह के अनुभव हमें होते हैं। स्वप्नशास्त्र की मानें तो हर सपना हमको कुछ न कुछ संकेत देता है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि अगर सपने में आपको दुर्गा माता, अलग-अलग रूपों में दिखती है तो इसका क्या अर्थ लगाया जाता है। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna ये सपना कैसे हमारे जीवन में परिवर्तन ला सकता है आइए विस्तार से जानते हैं।  Sapne Me Durga Mata ka Mandir Dekhna:सपने में माता दुर्गा का मंदिर देखना  माता दुर्गा के मंदिर तो माता के सभी भक्त जाते हैं, लेकिन कभी सपने में माता का मंदिर दिख जाए तो इसे बेहद शुभ संकेत माना जाता है। इस सपने का अर्थ होता है कि आप धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna माता की कृपा आप पर बनी हुई है और आप सही रास्ते पर अग्रसर हैं। यह सपना आपकी मनोकामनाओं को भी पूरा करने वाला माना गया है। वहीं आपको बार-बार सपने में माता का मंदिर दिख रहा है तो इसका अर्थ है कि, मोह-माया के बंधनों को आप तोड़ सकते हैं और विरक्ति का भाव आपके मन में जाग सकता है।  Sapne Me Srangar Kiye Mata Ko Dekhne Ka Matlab:सपने में श्रृंगार किये माता को देखने का मतलब अगर सपने में आप दुर्गा माता को श्रृंगार किये हुए देखते हैं तो ये सपना भी शुभ मान गया है। ये सपना आपके जीवन में आने वाली खुशियों की ओर संकेत करता है। इस सपने के आने के बाद कोई अच्छी खबर आपको मिल सकती है। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna इसके साथ ही विवाहित लोग इस सपने को देखते हैं तो उनके वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां दूर होती हैं। करियर से जुड़ा कोई अच्छा समाचार भी आपको मिल सकता है।  Dreams About Hairs : सपने में काले सफेद बाल देखना देता है भविष्य में होने वाली इन घटनाओं का संकेत सपने में दुर्गा माता की मूर्ति देखने का अर्थ Sapne Mai Durga Mata Ki Murti Dekhne Ka Arth सपने में अगर आप माता दुर्गा की मूर्ति देखते हैं तो इसका अर्थ यह लगाया जाता है कि, जीवन की कोई बड़ी परेशानी दूर हो सकती है। अपने जीवन में जिस संतुलन की आप कामना करते हैं वो आपको प्राप्त होगा। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna हालांकि सपने में माता की खंडित मूर्ति को देखना अच्छा नहीं माना जाता, ऐसा सपना आने के बाद आपको हर कार्य सोच-समझकर करना चाहिए। अगर आप करियर या पारिवारिक जीवन से जुड़ा कोई निर्णय लेने वाले हैं तो बड़े-बजुर्गों की सलाह के बाद ही आपको आगे बढ़ना चाहिए।  Lion Dream Interpretation: सपने में शेर को देखना देता है कुछ विशेष संकेत, बदल सकती है किस्मत मिलते हैं ये शुभ संकेत Milte hai Ye Subh Sanket स्वप्न शास्त्र की मानें तो सपने में मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति देखना अधिक शुभ माना गया है। इस सपने का अर्थ यह है कि जीवन में लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से छुटकारा मिलने वाला है। इसके अलावा मानसिक समस्या भी जल्द ही खत्म हो सकती है। इसके अलावा यदि आपने सपने में मां दुर्गा के मंदिर को देखा है, तो यह सपना शुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ यह है कि आप आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं। इस तरह के सपने देखने से मां दुर्गा की कृपा आप पर बनी हुई है Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna और साथ ही मनचाही मनोकामनाएं पूरी होने वाली हैं। यदि आपने सपने में मां दुर्गा को श्रृंगार के साथ देखा है, तो यह सपना शुभ माना जाता है। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna इस सपने से जीवन में खुशियों के संकेत मिलते हैं। विवाहित लोगों को इस तरह के सपने देखने से जीवन में चल रही समस्याएं खत्म होती हैं। सपने में मां दुर्गा को लाल साड़ी में देखना शुभ माना जाता है। इस सपने से जीवन में अच्छे बदलाव के संकेत मिलते हैं Snake Dream Meaning: अगर सपने में देखा है सांप, तो समझिए कि जीवन में आने वाली हैं खुशियां Sapne Mai Mata Durga Ko Lal Kapdo Mai Dekhna:सपने में माता दुर्गा को लाल कपड़ों में देखना  यह सपना माता की कृपा का संकेत है। ऐसा सपना आने के बाद आपकी कोई दबी ख्वाहिश पूरी हो सकती है। ऐसा सपना अगर अविवाहित लोग देखते हैं तो उन्हें योग्य वर या वधु की प्राप्ति होती है।  आपको भी अगर इन सपनों में से कोई सपना होता है तो समझ जाइए माता की आप पर कृपा है। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna आपके जीवन में जल्द ही अच्छे बदलाव आ सकते हैं। वहीं, Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna नवरात्रि के दौरान अगर आप माता सपना देखते हैं तो समझ लिजिए अब जीवन की गाड़ी पटरी पर आने वाली है।  Mata Durga:सपने में इस रूप में दिखें माता दुर्गा, तो खुल जाएगी किस्मत, धन-धान्य की होगी प्राप्ति

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Ram Navami Kab hai 2025:आने वाले साल में कब है, राम नवमी पर करें इन मंत्रों का जाप, नोट कर लें सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी को भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस के रूप मे मानते है। यह पर्व हिंदू पंचांग के प्रथम माह चैत्र के शुक्ला पक्ष की नवमी के दिन आता है तथा यह उत्सव चैत्र नवरात्रि का नौवें दिन के रूप मे भी मनाया जाता है। श्री राम का प्राकट्य अभिजित नक्षत्र में दोपहर बारह बजे हुआ था। भगवान श्रीराम को भारत मे एक आदर्श पुरुष के रूप मे माना जाता है, Ram Navami Kab hai 2025:इस कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहा जाता है, तथा उनके उच्चतम प्रशासनिक कौशल को राम-राज्य के नाम से संबोधित किया जाता है। राम नवमी के दिन भक्त पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र की जन्मभूमि अयोध्या की पवित्र नदी सरयू में डुबकी लगाते हैं। तथा भक्त भगवान श्री राम, उनकी पत्नी माता सीता, उनके छोटे भाई श्री लक्ष्मण और श्री राम भक्त हनुमान जी से संबंधित भजन, कीर्तन, रामायण पाठ, उपवास, शोभा यात्रा और रथ यात्रा का आयोजन किया जाता हैं। माना जाता है कि, श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस दिन राम चरित मानस की रचना आरंभ की थी। Ram Navami 2025: राम नवमी का पर्व हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, जिन्हें विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम ने धरती पर अधर्म का नाश करने और धर्म की पुनः स्थापना के लिए अवतार लिया था। इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ माना जाता है। Ram Navami Kab hai 2025 राम नवमी का पर्व हर हिंदू परिवार में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, लेकिन अयोध्या में इसकी भव्यता देखते ही बनती है।  राम नवमी के दिन करें ये काम, बरसेगी मां दुर्गा की कृपा ramnavmi Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी 2025 तिथि इस साल  चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का प्रारम्भ 5 अप्रैल की शाम को 07:26 बजे होगा और समाप्त 6 अप्रैल की शाम 07:22 बजे होगा। ऐसे में इस साल राम नवमी का पर्व 6 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन चैत्र नवरात्रि का समापन भी होगा, इसलिए यह दिन और अधिक पावन माना जाएगा। Ram Navami puja subh muhurat पूजा का शुभ मुहूर्त राम नवमी के दिन मध्याह्न पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:08 बजे से लेकर दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा। यह अवधि 2 घंटे 31 मिनट की रहेगी। हालांकि, मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर 12 बजे हुआ था, इसलिए 12:34 का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इस समय पूजन और अभिषेक करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। राम नवमी के दिन पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान राम की बरसेगी कृपा Ram Navami puja mantra:राम नवमी पूजा मंत्र इस दिन श्रीराम के विभिन्न मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व होता है। “ॐ श्री रामचन्द्राय नमः”“ॐ रां रामाय नमः” श्रीराम तारक मंत्र “श्री राम, जय राम, जय जय राम” श्रीराम गायत्री मंत्र “ॐ दाशरथये विद्महे, सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥” इस दिन इन मंत्रों का जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। रामनवमी कथा Ram Navami Puja vidhi:पूजा विधि  Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने और सूर्यदेव को जल अर्पित करने का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत का संकल्प लेने के बाद घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर भगवान राम की प्रतिमा स्थापित की जाती है। Ram Navami Kab hai 2025 दोपहर 12 बजे के करीब श्रीराम का गंगाजल, पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है।  पूजा में तुलसी पत्ता और कमल का फूल रखना शुभ माना जाता है। फिर षोडशोपचार विधि से भगवान राम की पूजा की जाती है और खीर, फल एवं अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। इस दिन राम रक्षा स्तोत्र, सुंदरकांड और रामायण का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। अंत में आरती करने के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है और भक्तों को आशीर्वाद दिया जाता है। आज राम नवमी पर इस सरल विधि से करें हवन, प्रभु श्री राम के साथ मां सिद्धिदात्री भी होंगी प्रसन्न राम नवमी पूजा (Lord Ram puja vidhi) Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर राम जी का ध्यान करें। इसका बाद पूजा स्थल पर चौकी बिछाकर भगवान राम के साथ-साथ माता सीता, लक्ष्मण और भगवान हनुमान की मूर्ति या फिर तस्वीर स्थापित करें। Ram Navami Kab hai 2025 सभी को चंदन, रोली, धूप, फूल माला आदि अर्पित करें।इसके बाद अलग-अगल तरह के फल अर्पित करें। साथ ही इस दिन पर रामायण, रामचरितमानस और रामरक्षास्तोत्र का पाठ करना भी काफी लाभदायक माना जाता है। अंत में श्रद्धापूर्वक आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बांटें।

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may 2025 vrat tyohar list: मई 2025 व्रत और त्योहारों की संपूर्ण सूची एवं महत्व

may 2025 vrat tyohar list:मई 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, जो हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में विशेष स्थान रखते हैं। नीचे मई 2025 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची प्रस्तुत है: मई 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं, may 2025 vrat tyohar list जिनका धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह माह बुद्ध पूर्णिमा, वट सावित्री व्रत, मोहिनी एकादशी, शनि जयंती जैसे प्रमुख पर्वों से भरा हुआ है। may 2025 vrat tyohar list आइए जानते हैं मई 2025 के सभी व्रत और त्योहारों की सूची और उनके महत्व के बारे में विस्तार से। तारीख दिन व्रत/त्योहार 1 मई 2025 गुरुवार चतुर्थी व्रत, महाराष्ट्र दिवस, मई दिवस 2 मई 2025 शुक्रवार सूरदास जयंती 3 मई 2025 शनिवार बगलामुखी जयंती, दुर्गा अष्टमी व्रत 5 मई 2025 सोमवार गंगा सप्तमी 6 मई 2025 मंगलवार सीता नवमी 7 मई 2025 बुधवार रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 8 मई 2025 गुरुवार मोहिनी एकादशी 9 मई 2025 शुक्रवार प्रदोष व्रत 11 मई 2025 रविवार नरसिंह जयंती, मातृ दिवस 12 मई 2025 सोमवार पूर्णिमा, कूर्म जयंती, चित्रा पूर्णिमा, श्री सत्यनारायण व्रत, बुद्ध पूर्णिमा 13 मई 2025 मंगलवार नारद जयंती 15 मई 2025 गुरुवार वृषभ संक्रांति 16 मई 2025 शुक्रवार संकष्टी चतुर्थी 20 मई 2025 मंगलवार कालाष्टमी 23 मई 2025 शुक्रवार भद्रकाली जयंती, अपरा एकादशी 24 मई 2025 शनिवार प्रदोष व्रत 25 मई 2025 रविवार मासिक शिवरात्रि 26 मई 2025 सोमवार वट सावित्री व्रत 27 मई 2025 मंगलवार रोहिणी व्रत, भौमवती अमावस्या, शनि जयंती 28 मई 2025 बुधवार चंद्र दर्शन 29 मई 2025 गुरुवार चतुर्थी व्रत 30 मई 2025 शुक्रवार महाराणा प्रताप जयंती 31 मई 2025 शनिवार शीतल षष्ठी may 2025 vrat tyohar list:इन व्रतों और त्योहारों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। उदाहरण के लिए: may 2025 vrat tyohar list पूजा विधि और लाभ इन व्रतों और त्योहारों के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हैं और may 2025 vrat tyohar list आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं।

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April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें

April 2025 vrat tyohar list: अप्रैल अंग्रेजी कैलेंडर का चौथा महीना है जो नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है. इस साल अप्रैल में चैत्र और वैशाख महीने का संयोग बन रहा है. April 2025 vrat tyohar list:वैशाख महीना दान पुण्य और हनुमान जी, राम जी, लक्ष्मी जी की पूजा के लिए खास माना जाता है. April 2025 vrat tyohar list अप्रैल में कई महत्वपूर्ण व्रत त्योहार भी मनाए जाते हैं जैसे हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया, राम नवमी, परशुराम जयंती आदि. April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। नीचे अप्रैल 2025 के व्रत और त्योहारों की सूची प्रस्तुत की गई है: Lakshmi Panchami 2025:लक्ष्मी पंचमी 2025 शुभ तिथि, पूजा विधि और व्रत कथा से पाएं अपार धन-संपदा तिथि दिन व्रत/त्योहार 1 अप्रैल 2025 मंगलवार विनायक चतुर्थी 3 अप्रैल 2025 गुरुवार यमुना छठ, रोहिणी व्रत 5 अप्रैल 2025 शनिवार दुर्गाष्टमी व्रत 6 अप्रैल 2025 रविवार राम नवमी 7 अप्रैल 2025 सोमवार विश्व स्वास्थ्य दिवस 8 अप्रैल 2025 मंगलवार कामदा एकादशी 10 अप्रैल 2025 गुरुवार महावीर जयंती, प्रदोष व्रत 11 अप्रैल 2025 शुक्रवार ज्योतिराव फुले जयंती, गुड फ्राइडे 12 अप्रैल 2025 शनिवार हनुमान जयंती, पूर्णिमा व्रत 13 अप्रैल 2025 रविवार ईस्टर 14 अप्रैल 2025 सोमवार अम्बेडकर जयंती, बैसाखी, मेष संक्रांति 15 अप्रैल 2025 मंगलवार बंगाली नव वर्ष 16 अप्रैल 2025 बुधवार संकष्टी चतुर्थी 21 अप्रैल 2025 सोमवार कालाष्टमी 22 अप्रैल 2025 मंगलवार पृथ्वी दिवस 24 अप्रैल 2025 गुरुवार वरुथिनी एकादशी 25 अप्रैल 2025 शुक्रवार प्रदोष व्रत 26 अप्रैल 2025 शनिवार मासिक शिवरात्रि 27 अप्रैल 2025 रविवार अमावस्या 28 अप्रैल 2025 सोमवार चन्द्र दर्शन, सोमवार व्रत 29 अप्रैल 2025 मंगलवार परशुराम जयंती 30 अप्रैल 2025 बुधवार अक्षय तृतीया, रोहिणी व्रत, मातंगी जयंती April 2025 vrat tyohar list:नीचे इन व्रतों और त्योहारों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है: विनायक चतुर्थी (1 अप्रैल 2025, मंगलवार): इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। श्रद्धालु गणेश जी की आराधना करके विघ्नों के नाश और सौभाग्य की कामना करते हैं। यमुना छठ (3 अप्रैल 2025, गुरुवार): मथुरा-वृंदावन में यमुना नदी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। भक्त यमुना नदी में स्नान कर उनकी पूजा करते हैं। रोहिणी व्रत (3 अप्रैल 2025, गुरुवार): जैन धर्म में महत्वपूर्ण व्रत, जिसे महिलाएं अपने परिवार की समृद्धि और सुख-शांति के लिए करती हैं। दुर्गाष्टमी व्रत (5 अप्रैल 2025, शनिवार): मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे भक्तों को शक्ति और साहस प्राप्त होता है। राम नवमी (6 अप्रैल 2025, रविवार): भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन रामायण का पाठ और रामजी की विशेष पूजा की जाती है। कामदा एकादशी (8 अप्रैल 2025, मंगलवार): भगवान विष्णु की आराधना का यह दिन पापों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। महावीर जयंती (10 अप्रैल 2025, गुरुवार): जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जैन मंदिरों में विशेष पूजा और प्रवचन होते हैं। हनुमान जयंती (12 अप्रैल 2025, शनिवार): भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भक्त हनुमान जी की पूजा करके बल, बुद्धि और विद्या की कामना करते हैं। वरुथिनी एकादशी (24 अप्रैल 2025, गुरुवार): इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। अक्षय तृतीया (30 अप्रैल 2025, बुधवार): यह दिन शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सोना खरीदना, दान करना और नए कार्यों की शुरुआत करना विशेष फलदायी होता है। April 2025 vrat tyohar list इन व्रतों और त्योहारों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता और April 2025 vrat tyohar list धार्मिक आस्था की झलक मिलती है। प्रत्येक पर्व का अपना विशेष महत्व है, जो समाज में एकता, प्रेम और सद्भावना को बढ़ावा देता है। 2025 ke vrat aur tyohar List:पढ़ें साल 2025 के प्रमुख व्रत-त्योहारों की सूची, नहीं पड़ेगी कैलेंडर देखने की जरूरत

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2025 ke vrat aur tyohar List:पढ़ें साल 2025 के प्रमुख व्रत-त्योहारों की सूची, नहीं पड़ेगी कैलेंडर देखने की जरूरत

2025 ke vrat aur tyohar List :1 जनवरी 2025 से नया साल शुरू हो रहा है. इस साल के प्रमुख व्रत त्योहार की तारीख जानने के लिए लोगों में उत्सुकता है. जानें जनवरी से दिसंबर 2025 तक व्रत-फेस्टिवल की लिस्ट. Calendar 2025: 1 जनवरी 2025, बुधवार से नया साल शुरू हो रहा है. 2025 ke vrat aur tyohar List ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल के राजा मंगल होंगे और मंत्री भी मंगल होंगे. नए साल का पहला बड़ा त्योहार मकर संक्रांति होगा. 2025 ke vrat aur tyohar List:जनवरी में जब सूर्य मकर राशि में 2025 ke vrat aur tyohar List प्रवेश करेंगे तब खरमास का समापन होगा. इस दिन से शुभ कार्य की शुरुआत भी हो जाएगी. इस साल 2025 में नवरात्रि, होली, करवा चौथ, दिवाली, रक्षाबंधन, छठ पूजा, बसंत पंचमी, 2025 ke vrat aur tyohar List महाशिवरात्रि आदि व्रत त्योहार किस दिन है आइए जानें इनकी डेट. साल 2025 के मुख्य व्रत-त्योहार (Hindu Calendar 2025 Festival and Vrat) जनवरी –गुरु गोबिंद सिंह जयंती – सोमवार, 06 जनवरी लोहड़ी – सोमवार, 13 जनवरीशिवाजी महाराज जयंती – बुधवार, 19 फरवरी महाशिवरात्रि – बुधवार, 26 फरवरी फरवरी –बसंत पंचमी – सोमवार, 03 फरवरीशिवाजी महाराज जयंती – बुधवार, 19 फरवरीमहाशिवरात्रि – बुधवार, 26 फरवरी मार्च –होलिका दहन – गुरुवार, 13 मार्चहोली, चंद्र ग्रहण – शुक्रवार, 14 मार्चपहला सूर्य ग्रहण – शनिवार, 29 मार्चचैत्र नवरात्र, घटस्थापना – रविवार, 30 मार्च अप्रैल –रामनवमी – रविवार, 6 अप्रैल मई –बुद्ध पूर्णिमा – सोमवार, 12 मई जुलाई –देवशयनी एकादशी – रविवार, 06 जुलाईसावन शिवरात्रि – बुधवार 23 जुलाई अगस्त –रक्षाबंधन – शनिवार, 9 अगस्तहरतालिका तीज – मंगलवार 26 अगस्तगणेश चतुर्थी – बुधवार, 27 अगस्त सितंबर –आश्विन अमावस्या, सूर्य ग्रहण – रविवार, 21 सितंबरशारदीय नवरात्र, कलश स्थापना – सोमवार, 22 सितंबर अक्टूबर –विजयादशमी, दशहरा, गांधी जयंती – गुरुवार, 2 अक्टूबरकरवा चौथ – शुक्रवार, 10 अक्टूबरधनतेरस – शनिवार, 18 अक्टूबरदीपावली – मंगलवार, 21 अक्टूबरगोवर्धन पूजा, अन्नकूट – बुधवार, 22 अक्टूबरभैया दूज, चित्रगुप्त पूजा – गुरुवार, 23 अक्टूबरनहाय खाय – शनिवार, 25 अक्टूबरखरना – रविवार, 26 अक्टूबरछठ पूजा, संध्या अर्घ्य – सोमवार, 27 अक्टूबरउषा अर्घ्य, पारण का दिन – मंगलवार, 28 अक्टूबर नवंबर –देवोत्थान एकादशी – शनिवार, 01 नवंबरकार्तिक पूर्णिमा व्रत, गुरु नानक जयंती – बुधवार, 5 नवंबर दिसंबर –क्रिसमस – गुरुवार, 25 दिसंबर Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि में कब है अष्टमी, नोट करें तारीख और पूजा की विधि 2025 ke vrat aur tyohar List 2025 में विवाह के मुहूर्त Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि Karmasu.in  किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.  Lakshmi Panchami 2025:लक्ष्मी पंचमी 2025 शुभ तिथि, पूजा विधि और व्रत कथा से पाएं अपार धन-संपदा

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Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि में कब है अष्टमी, नोट करें तारीख और पूजा की विधि

Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से होगी और समापन 6 अप्रैल को. इस बार नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 8 दिनों की होगी. अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा, हवन और कन्या पूजन का विधान है. Chaitra Navratri 2025: हिंदू धर्म में नवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण होती है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है.आइए जानते हैं, नवरात्रि के बारे में: इस साल चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो रही है. यह त्योहार हिंदू धर्म में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. इस दौरान व्रत रखने और पूजा करने से मां दुर्गा सभी इच्छाएं पूरी करती हैं. आइए जानते हैं कि इस बार चैत्र नवरात्रि कितने दिनों की होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल Chaitra Navratri 2025 चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से होगी और इसका समापन 6 अप्रैल, रविवार को होगा. इस बार तिथियों में बदलाव के कारण अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही हैं, इसलिए नवरात्रि केवल 8 दिन की होगी. ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की सही तरीके से पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं. Chaitra Navratri 2025 चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 5 अप्रैल 2025, शनिवार को है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. दुर्गाष्टमी के दिन नौ छोटे कलश स्थापित किए जाते हैं और उनमें देवी दुर्गा की नौ शक्तियों को आमंत्रित किया जाता है. पूजा के दौरान मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की आराधना की जाती है. चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू 4 अप्रैल 2025, रात 8 बजकर 12 मिनट पर चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि खत्म 5 अप्रैल 2025, रात 7 बजकर 26 मिनट पर Chaitra Navratri 2025:चैत्र नवरात्रि 2025 की अष्टमी तिथि 5 अप्रैल, शनिवार को है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है और विशेष रूप से दुर्गाष्टमी व्रत रखा जाता है. भक्त इस अवसर पर देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं और कलश स्थापना के साथ हवन व कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं. यह दिन शक्ति, भक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है. Chaitra Navratri 2025:चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी कब है: पंडित मोहन कुमार दत्त मित्र ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 05 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी। जबकि राम नवमी या नवमी 06 अप्रैल को है। 30 मार्च को कलश स्थापना की जाएगी और पहला नवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। 31 मार्च 2025 को द्वितीय नवरात्रि व्रत रखा जाएगा। 1 अप्रैल को तीसरा नवरात्रि व्रत रखा जाएगा। 2 अप्रैल 2025, बुधवार को चौथी और पंचमी की पूजा होगी। 3 अप्रैल को षष्ठी तिथि और 4 अप्रैल को सप्तमी तिथि मनाई जाएगी। चैत्र नवरात्रि घट स्थापना का मुहूर्त– कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 30 मार्च 2025, रविवार को सुबह 06 बजकर 13 मिनट से सुबह 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त सुबह 12 बजकर 01 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। घटस्थापना के शुभ चौघड़िया मुहूर्त- लाभ – उन्नति: 09:20 ए एम से 10:53 ए एम अमृत – सर्वोत्तम: 10:53 ए एम से 12:26 पी एम शुभ – उत्तम: 01:59 पी एम से 03:32 पी एम

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Kanakadhara Stotram:कनकधारा स्तोत्र सिद्धि कोर्स को पढ़ने का फायदा,धन, समृद्धि और सौभाग्य पाने का दिव्य मार्ग

Kanakadhara Stotram:कनकधारा स्तोत्र पाठ करने के लाभ Kanakadhara Stotram:कनकधारा स्तोत्र भगवान आदिशंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसे माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने और जीवन में धन, समृद्धि तथा सुख-शांति लाने के लिए पढ़ा जाता है। इस स्तोत्र के पाठ से आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस लेख में हम कनकधारा स्तोत्र के पाठ करने से मिलने वाले लाभों को विस्तार से समझेंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार यदि कोई व्यक्ति निरंतर धन की कमी, कर्ज, व्यापार में हानि या नौकरी में आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा हो, तो कनकधारा स्तोत्र का नित्य पाठ करने से आर्थिक समृद्धि आती है। यह स्तोत्र माँ लक्ष्मी को प्रसन्न कर उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने में सहायक होता है। कैसे लाभ मिलता है? 2. गरीबी और ऋण से मुक्ति इस स्तोत्र के नियमित पाठ से व्यक्ति गरीबी, ऋण और आर्थिक तंगी से बाहर निकल सकता है। Kanakadhara Stotram कहा जाता है कि जब आदिशंकराचार्य ने यह स्तोत्र पढ़ा था, तो माता लक्ष्मी ने गरीब ब्राह्मण की झोपड़ी में स्वर्ण (कनक) वर्षा कर दी थी। यह घटना इस स्तोत्र की चमत्कारी शक्ति को दर्शाती है। कैसे लाभ मिलता है? 3. भाग्य में वृद्धि और सफलता कई बार लोग मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन भाग्य का साथ नहीं मिलता। ऐसे में कनकधारा स्तोत्र का पाठ भाग्योदय करने वाला सिद्ध होता है। यह स्तोत्र व्यक्ति के कर्मों को शुभ फल देने के लिए माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक होता है। कैसे लाभ मिलता है? 4. घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा कई बार घर में नकारात्मक ऊर्जा, अशांति और कलह बनी रहती है, Kanakadhara Stotram जिससे परिवार के सदस्य मानसिक तनाव में रहते हैं। कनकधारा स्तोत्र का पाठ घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करता है। कैसे लाभ मिलता है? 5. विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए लाभकारी जो विद्यार्थी शिक्षा में सफलता पाना चाहते हैं या Kanakadhara Stotram नौकरीपेशा लोग करियर में तरक्की चाहते हैं, उनके लिए भी कनकधारा स्तोत्र अत्यंत फलदायी सिद्ध होता है। कैसे लाभ मिलता है? 6. ग्रह दोष और पितृ दोष की शांति यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर हो या पितृ दोष हो, तो उसे जीवन में धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से इन दोषों का निवारण होता है। Kanakadhara Stotram:कैसे लाभ मिलता है? 7. महिलाओं के लिए विशेष लाभकारी कनकधारा स्तोत्र महिलाओं के लिए विशेष रूप से फलदायी होता है। Kanakadhara Stotram यह स्तोत्र न केवल समृद्धि देता है, बल्कि सौभाग्य और पारिवारिक सुख भी प्रदान करता है। कैसे लाभ मिलता है? 8. आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति जो लोग आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं और मानसिक शांति की तलाश में हैं, Kanakadhara Stotram उनके लिए कनकधारा स्तोत्र का पाठ एक अद्भुत उपाय है। कैसे लाभ मिलता है? कैसे करें कनकधारा स्तोत्र का पाठ? विशेष उपाय: Kanakadhara Stotram:कनकधारा स्तोत्र सिद्धि कोर्स

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जयपुर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। जयपुर मंदिर वृन्दावन भगवान श्रीकृष्ण की लीला से जुड़ा हुआ एक धार्मिक व ऐतिहासिक नगर है, जो भारत के उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में स्थित है। यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। वैसे तो वृंदावन में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं लेकिन वृंदावन-मथुरा रोड पर किशोर पुरा में स्थित जयपुर मंदिर की अपनी अलग पहचान है। खास बात ये है कि उत्तर प्रदेश में बने होने के बाद भी जयपुर मंदिर का रख-रखाव राजस्थान सरकार करती है। भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है, लेकिन यहां बांके बिहारी के अलग-अलग रूप की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां पर प्रभु के राधा माधव, आनंद बिहारी और हंस गोपाल रूप की मूर्तियां विद्यमान हैं। मंदिर का इतिहास जयपुर मंदिर का निर्माण, जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह जी ने 1916 में करवाया था। माधो सिंह जी ने अपने गुरु ब्रह्मचारी श्री गिरिधारीशरण जी के प्रसन्नता हेतु जयपुर से वृंदावन आकर पहले 100 एकड़ जमीन खरीदी, फिर उसके बाद इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इस मंदिर को बनने में करीब 30 साल लगे थे। कई हजार मजदूरों और कुशल कारीगरों ने इस मंदिर का निर्माण किया। मंदिर का महत्व जयपुर मंदिर वृंदावन में श्री कृष्ण का सबसे बड़ा मंदिर है। जानकार बताते हैं कि पूरे बृज मण्डल जयपुर मंदिर से बड़ा दूसरा कोई मंदिर नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है कि जयपुर मंदिर निर्माण के लिए इस्तेमाल हो रहे पत्थरों को मथुरा से वृंदावन तक लाने के लिए माधो सिंह जी ने मथुरा से वृंदावन तक नई रेलवे लाइन बिछवाई थी। जयपुर मंदिर में राधा माधव, आनंद बिहारी और हंस गोपाल जी और उनकी सखियों की मूर्तियां दूसरे तल पर स्थापित हैं, जिनके दर्शन मंदिर के बाहर खड़े भक्त भी आसानी से कर सकते हैं। मंदिर की वास्तुकला जयपुर मंदिर की वास्तुकला में प्राचीन राजस्थानी शैली का उत्कृष्ट कला देखने को मिलती है। जयपुर मंदिर लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर पत्थर से बना है, मंदिर के दीवारों पर नक्काशी की गई है। दो मंजिला बने इस मंदिर में 16 विशाल खंबे बने हैं। जयपुर मंदिर में तीन प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। मुख्य मंदिर के दोनों तरफ पत्थर से तुलसी चौरा बनाया गया है, जिनमे एक साथ 108 दीप जलाने के लिए खूबसूरत नक्काशी दार आले बनाए गए हैं। मंदिर का मुख्य दरवाजा अष्ट धातु से बनाया गया है, जो कि जितना भव्य है उतना ही खूबसूरत भी है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह आरती का समय 07:00 AM – 08:00 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 10:00 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM

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