गोपेश्वर महादेव मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर में भगवान शिव की पुरुष और स्त्रियों की शक्ति के संगम को बताया गया हैं। गोपेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। गोपेश्वर महादेव मंदिर वंशी बट और यमुना नदी के तट पर बना है जो भगवान भोलेनाथ को समर्पित हैं। गोपेश्वर मंदिर में महादेव अपने भक्तों को दिन में दो स्वरूप में दर्शन देते हैं। जहां भक्त सुबह के समय महादेव का जलाभिषेक करते हैं तो शाम को भोलेनाथ का 16 श्रृंगार कर उन्हें गोपी के रूप में सजाया जाता है। पवित्र यमुना नदी के जल से शिव लिंग को स्नान कराने की धार्मिक प्रथा आज भी इस पवित्र स्थान पर प्रचलित है। भगवान शंकर के गोपी रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में आज भी शिव को नारी के रूप में सजाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर के परिसर में पीपल का पेड़ स्थित है जो हर मनोकामना को पूरा करता है। इस मंदिर में भगवान शिव की पुरुष और स्त्रियों की शक्ति के संगम को बताया गया हैं। मंदिर का इतिहास वृंदावन के गोपेश्वर महादेव के मंदिर में शिव गोपी रूप में विराजमान हैं। ये विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां महादेव का महिलाओं की तरह शृंगार किया जाता है। श्रीकृष्ण वृंदावन में गोपियों के साथ रास लीला किया करते थे तो सभी देवता उन्हें देखने के लिए आतुर रहते थे। भगवान शिव के मन में भी इस महारास में भाग लेने की इच्छा उत्पन्न हुई। जब भगवान शिव ने गोपी रूप धारण करके महारास में हिस्सा लिया तो भगवान श्रीकृष्ण उन्हें पहचान गए। महारास के खत्म होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी के साथ मिलकर महादेव के गोपी रूप की पूजा की और उनसे इस रूप में ब्रज में ठहरने का आग्रह किया। शिव जी ने श्री कृष्ण के आग्रह को स्वीकार किया। तब राधारानी ने शिव जी के गोपी के रूप को गोपेश्वर महादेव का नाम दिया। तब से आज तक महादेव का ये रूप वृंदावन में विराजमान है। मंदिर का महत्व गोपेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग का विशेष श्रृंगार किया जाता हैं और उन्हें गोपियों के रूप में तैयार किया जाता हैं। रासलीला के वक्त शाम को 5 बजे से 9 बजे के दौरान भगवान शिव की पूजा की जाती हैं। मंदिर के परिसर में मौजूद बडा सा पीपल का पेड़ सबकी इच्छाए पूरी करता है इसीलिए इस पेड़ को कल्पवृक्ष कहा जाता है। मंदिर की वास्तुकला वृंदावन में स्थित भगवान शिव के गोपेश्वर महादेव मंदिर में राजस्थानी और नागर शैली का प्रयोग किया गया है। गोपेश्वर महादेव मंदिर का परिसर बहुत बड़ा और भव्य बनाया गया है। मंदिर परिसर में बड़ा आंगन है, जहां श्रद्धालु भगवान शिव और श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर के बगल में एक पीपल का पेड़ है। जिसे कल्पवृक्ष भी कहते है। श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने गोपेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह आरती का समय 07:30 AM – 08:30 AM सांय मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 09:30 PM शाम आरती का समय 07:30 PM – 08:30 PM मंदिर का प्रसाद गोपेश्वर महादेव मंदिर में शिव जी को फल,दूध, दही, पेड़े का भोग लगाया जाता है। कुछ भक्त भगवान को जलाभिषेक करते है तो कुछ दूध या शहद से अभिषेक करते है।

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Mata Durga:सपने में इस रूप में दिखें माता दुर्गा, तो खुल जाएगी किस्मत, धन-धान्य की होगी प्राप्ति

Mata Durga:सपने में मां काली का दिखाई देना शुभ माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार आपको समस्याओं से जल्द ही छुटकारा मिल सकता है। Sapne Mai Mata Durga Ka Mandir Dekhna:सपने में माता दुर्गा का मंदिर देखना  माता दुर्गा के मंदिर तो माता के सभी भक्त जाते हैं, लेकिन कभी सपने में माता का मंदिर दिख जाए तो इसे बेहद शुभ संकेत माना जाता है। इस सपने का अर्थ होता है कि आप धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं। माता की कृपा आप पर बनी हुई है और आप सही रास्ते पर अग्रसर हैं। यह सपना आपकी मनोकामनाओं को भी पूरा करने वाला माना गया है। वहीं आपको बार-बार सपने में माता का मंदिर दिख रहा है तो इसका अर्थ है कि, मोह-माया के बंधनों को आप तोड़ सकते हैं और विरक्ति का भाव आपके मन में जाग सकता है।  Snake Dream Meaning: अगर सपने में देखा है सांप, तो समझिए कि जीवन में आने वाली हैं खुशियां Sapne Mai Maa Kali Ko Roudra Roop Mai Dekhna:सपने में मां काली को रौद्र रूप में देखना सपने में मां काली को रौद्र रूप में देखने के सकारात्मक संकेत माने गए हैं। Mata Durga इसका अर्थ ही जीवन में संघर्ष के बाद ही आपको सफलता प्राप्त हो सकती है। Sapne Mai Srangar Kiye Mata Ko Dekhne Ka Matlab:सपने में श्रृंगार किये माता को देखने का मतलब अगर सपने में आप दुर्गा माता को श्रृंगार किये हुए देखते हैं तो ये सपना भी शुभ मान गया है। ये सपना आपके जीवन में आने वाली खुशियों की ओर संकेत करता है। इस सपने के आने के बाद कोई अच्छी खबर आपको मिल सकती है। इसके साथ ही विवाहित लोग इस सपने को देखते हैं तो उनके वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां दूर होती हैं। करियर से जुड़ा कोई अच्छा समाचार भी आपको मिल सकता है।  Sapne Mai Durga Mata Ki Murti Dekhne Ka Arth:सपने में दुर्गा माता की मूर्ति देखने का अर्थ सपने में अगर आप माता दुर्गा की मूर्ति देखते हैं तो इसका अर्थ यह लगाया जाता है कि, जीवन की कोई बड़ी परेशानी दूर हो सकती है। अपने जीवन में जिस संतुलन की आप कामना करते हैं वो आपको प्राप्त होगा। हालांकि सपने में माता की खंडित मूर्ति को देखना अच्छा नहीं माना जाता, ऐसा सपना आने के बाद आपको हर कार्य सोच-समझकर करना चाहिए। अगर आप करियर या पारिवारिक जीवन से जुड़ा कोई निर्णय लेने वाले हैं तो बड़े-बजुर्गों की सलाह के बाद ही आपको आगे बढ़ना चाहिए।  Sapno ka matlab : सपने में खुद को देख लिया है तो आपके साथ होने वाला है यह, जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र Sapne Mai Mata Durga Ko Lal Kapdo Mai Dekhna:सपने में माता दुर्गा को लाल कपड़ों में देखना  यह सपना Mata Durga माता की कृपा का संकेत है। ऐसा सपना आने के बाद आपकी Mata Durga कोई दबी ख्वाहिश पूरी हो सकती है। ऐसा सपना अगर अविवाहित लोग देखते हैं तो उन्हें योग्य वर या वधु की प्राप्ति होती है।  आपको भी अगर इन सपनों में से कोई सपना होता है तो समझ जाइए माता की आप पर कृपा है। आपके जीवन में जल्द ही अच्छे बदलाव आ सकते हैं। वहीं, नवरात्रि के दौरान अगर आप माता सपना देखते हैं तो समझ लिजिए अब जीवन की गाड़ी पटरी पर आने वाली है।  Sapne Mai Maa Kali Ki Puja Karne Ke Sanket सपने में मां काली की पूजा करने के संकेत सपने में मां काली की पूजा करना भी शुभ संकेत माना गया है। इसका अर्थ होता है कि निकट भविष्य में आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। वहीं यह भी माना गया है कि आने वाले समय में आपको धन लाभ भी हो सकता है। Sapne Me Mandir Dekhna: सपने में मंदिर और मंदिर की घंटी बजाते देखना इस बात का संकेत, जरूर जानें मतलब Sapne Mai Devi Kali Ki Tasveer Dekhna:सपने में देवी काली की तस्वीर देखना सपने में देवी काली की तस्वीर देखना सकारात्मक संकेत माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार आपको कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता मिल सकती है। वहीं अगर सपने में मां काली आपको आशीर्वाद दे रही हैं, तो इसका अर्थ होता है कि जल्द ही आपको आर्थिक तंगी की समस्या से निजात मिल सकती है। Sapne Mai maa kali ka dikhai Dena:सपने में मां काली का दिखाई देना सपने में मां काली का दिखाई देना शुभ माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार नकारात्मक शक्तियों का विनाश हो सकता है। Mata Durga यदि कोई बीमार जातक सपने में मां काली को देखता है, Mata Durga तो ऐसे माना गया है कि वह बीमारी से जल्द ही छुटकारा पा सकता है। वहीं यह भी माना गया है कि अगर सपने में मां काली का दर्शन होता है, तो घर में सुख-समृद्धि आ सकती है। Sapne Me Hasna And Khana Khana:सपने में खुद को हंसते हुए देखना हो सकता है किसी खास बात का संकेत

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Papmochani Ekadashi 2025: पापमोचनी एकादशी पर भगवान विष्णु को लगाएं पंजीरी का भोग, बेहद आसान है रेसिपी

Papmochani Ekadashi 2025:एकादशी तिथि को भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम मानी जाती है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में पापमोचनी एकादशी (Papmochani Ekadashi 2025) व्रत किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर करने का विधान है। इसके बाद दान जरूर करें। आइए जानते हैं कैसे व्रत का पारण? एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत अहम माना जाता है। मार्च की 25 तारीख को पापमोचनी एकादशी (Papmochni Ekadashi 2025) है, जिसका काफी महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और आराधना के लिए समर्पित होता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु को खास भोग (Ekadashi Bhog) लगाया जाता है, जिसमें धनिया की पंजीरी (Dhaniya Panjiri For Ekadashi) एक अहम प्रसाद के रूप में तैयार की जाती है। धनिया की पंजीरी न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी काफी है। एकादशी के दिन इस प्रसाद (Ekadashi Bhog) को बनाने और भगवान विष्णु को अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें आशीर्वाद मिलता है। यह प्रसाद सात्विक होता है और इसे बनाने की विधि भी काफी आसान है। आइए जानते हैं कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु के भोग के लिए धनिया की पंजीरी कैसे बनाई जाती है (Dhaniya Panjiri Recipe)। Papavimocani Ekadashi 2025:पापमोचनी एकादशी कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण मुहूर्त धनिया की पंजीरी कैसे बनाएं? (Dhaniya Panjiri Recipe) सामग्री- बनाने की विधि- सबसे पहले धनिया के बीजों को अच्छी तरह से साफ कर लें। फिर इन्हें किसी साफ कपड़े पर फैला कर धूप में सुखाएं। धनिया के बीज पूरी तरह से सूख जाने चाहिए, ताकि वे आसानी से पिस सकें। एक कड़ाही में थोड़ा-सा घी डालें और उसमें सूखे हुए धनिया के बीजों को डालकर भूनें। धनिया को मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उसकी खुशबू न आने लगे और वह हल्का सुनहरा हो जाए। ध्यान रखें कि धनिया जले नहीं, वरना इसका स्वाद खराब हो सकता है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती भुने हुए धनिया को ठंडा होने दें। फिर इसे मिक्सर या ग्राइंडर में पीस लें। धनिया को बारीक पाउडर के रूप में पीसना चाहिए। यदि आप चाहें, तो इसमें थोड़ा-सा कद्दूकस किया हुआ नारियल भी मिला सकते हैं, जो इसके स्वाद को और बढ़ा देगा। अब को भी बारीक पीस लें। एक बड़े कटोरे में पिसा हुआ धनिया, गुड़ का पाउडर, इलायची पाउडर और बचा हुआ घी डालें। Papmochani Ekadashi 2025 इन सभी सामग्रियों को अच्छी तरह से मिलाएं। मिश्रण को हाथों से मलकर अच्छी तरह से मिलाएं, ताकि सभी सामग्रियां आपस में अच्छी तरह मिल जाएं। पंजीरी को एक साफ और सूखे बर्तन में निकाल लें। इसे किशमिश और बादाम से सजा सकते हैं। यह प्रसाद भगवान विष्णु को भोग लगाने के लिए तैयार है। पापमोचनी एकादशी व्रत कथा (Papmochani Ekadashi Vrat Katha) पापमोचनी एकादशी व्रत पारण विधि (Papamochani Ekadashi Vrat Paran Vidhi) Papmochani Ekadashi 2025:द्वादशी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें। स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। प्रभु के मंत्रों के जप करें। फल मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं। जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कमान करें। इसके बाद तुलसी मिश्रित जल ग्रहण कर व्रत खोलें और दान करें।   शुभ समय (Today Shubh Muhurat) ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 31 मिनट तकगोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 58 मिनट तकनिशिता मुहूर्त – देर रात 12 बजकर 03 मिनट से देर रात 12 बजकर 50 मिनट तकअभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं पापमोचनी एकादशी 2025 व्रत पारण टाइम (Papamochani Ekadashi 2025 Vrat Paran Time) Papmochani Ekadashi 2025:एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाता है। 26 मार्च को पापमोचनी एकादशी व्रत पारण करने का समय दोपहर 01 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 08 मिनट तक है। Papmochani Ekadashi 2025 इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है। इसके बाद अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान जरूर करना चाहिए। Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi)

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Bajrang Ki Kainchi/बजरंग की कैंची

Bajrang Ki Kainchi:बजरंग की कैंची: यह भी एक चमत्कारी प्रयोग है जो तंत्र और मुसलमानों दोनों को आसानी से काट सकता है, इसमें कोई खतरा नहीं है। बजरंग की कैंची साधना 21 दिन की होती है, अगर आप खुद नहीं कर सकते तो किसी योग्य साधक से भी करवा सकते हैं। इस विद्या से तैयार नींबू को जहां लटकाया जाएगा, वहां किसी भी तरह का भय, भूत-प्रेत नहीं रहेगा। Bajrang Ki Kainchi दुकान में लटकाने से घर में सुख-शांति बनी रहेगी। 3, 5 या 7 बार अभ्यस्त जल छिड़कने के बाद व्यक्ति के नाम का तिलक लगाकर लौंग छिड़ककर खिला दें, उसकी भूत-प्रेत शक्ति नष्ट हो जाएगी। कुछ लोग पिशाच गतिविधियों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं, उन्हें सुरक्षा उपाय अवश्य अपनाने चाहिए अन्यथा उनका जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाएगा और उनकी जान भी जा सकती है। Bajrang Ki Kainchi बजरंग की कैंची उनके पारिवारिक जीवन को प्रभावित करेगी और परिवार के सदस्यों में कलह होगी। उनका रूप डरावना होगा और लोग उन्हें पहचान भी नहीं पाएंगे। बजरंग की कैंची एक ऐसा स्तोत्र है जो व्यक्ति को भूत-प्रेत, पिशाच प्रभाव और कई अन्य अप्रत्याशित समस्याओं से बचाता है, जब इसे नियम और कायदे के अनुसार जपते हैं। Bajrang Ki Kainchi यह आत्मविश्वास की कमी और शारीरिक समस्याओं से राहत देता है। यह भी कहा जाता है कि जब साधक पर कोई बुरा प्रभाव पड़ता है तो उसके ऊपर एक कवच बन जाता है। जिन लोगों को बुरे सपने आते हैं और किसी भी तरह का अप्राकृतिक वातावरण होता है, Bajrang Ki Kainchi वे बजरंग की कैंची का पाठ करके अपनी रक्षा कर सकते हैं। यह एक सिद्ध प्रणाली है, लेकिन बजरंग की कैंची करने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। बजरंग की कैंची के लाभ Bajrang Ki Kainchi व्यक्ति सभी अप्राकृतिक प्रभावों से मुक्त हो जाता है।उस पर कोई जादू-टोना नहीं किया जा सकता।दुश्मनों को अच्छी तरह से दंडित किया जाता है।काले जादू का कोई प्रभाव नहीं होता।इससे शत्रुओं का पर्दाफाश हो जाता है और साधक उनका ख्याल रख सकता है। कौन करे बजरंग की कैंची का पाठ Bajrang Ki Kainchi भूत-प्रेत, जादू-टोना या अन्य पिशाच प्रभाव से प्रभावित व्यक्ति, जो बीमार हो रहा हो, व्यापार में नुकसान हो रहा हो, नौकरी छूट रही हो या आर्थिक संकट हो रहा हो, उन्हें बजरंग की कैंची का पाठ किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में करना चाहिए, ताकि सफलता मिले। बजरंग की कैंची/Bajrang ki Kainchi पाठ विधिः- हनुमान जी का पूजन कर नित्य 108 निम्न स्तोत्र का पाठ 21 दिन करें, 21वें दिन हनुमान् जी को सिन्दूर, लंगोट, सवा सेर का रोट, नारियल अर्पित करें। लाभः इस विद्या से अभिमन्त्रित नींबू जहाँ लटका दिया जाएगा, वहाँ किसी भी प्रकार का अभिचार, भूत-प्रेतादि नहीं ठहर सकते। दुकान में लटकाने से धन्धा अच्छा चलेगा। भूत-प्रेत लगे व्यक्ति को 3, 5 या 7 बार अभिमन्त्रित जल छिड़कने से व्यक्ति के नाम से मन्त्र पढ़कर लवंग अभिमन्त्रित कर उसे खिला दें, तो उसकी विद्या नष्ट हो जाती है। “फजले बिस्मिल्ला रहमान, अटल खुरजी तेज खुरान । घड़ी-घड़ी में निकलै बान । लालो लाल कमान, राखवाले की जबान । खाक माता खाक पिता । त्रिलोकी की मिसैली । राजा – प्रजा पड़ै मोहिनी । जल देखै, थल कतरै । राजा इन्द्र की आसन कतरै । तलवार की धार कतरै । आकाश पाताल, वायु – मण्डल को कतरै । तेंतीस कोटि देवी- देवताओं को कतरै । शिव – शंकर को कतरै । भीमसेन की गदा कतरै । अर्जुन को बाण कतरै । कृष्ण को सुदर्शन कतरै । सोला हंसा को कतरै । पेट में के बावरे को कतरै । दौलतपुर के डोमा को कतरै । ब्राह्मण के ब्रहम-राक्षस को कतरै । धोबी के जिन को कतरै । भंगी के जिन को कतरै । रमाने के जिन को कतरै । मसान के जिन को कतरै । मेरे नरसिंह से कतरै । गुरु के नरसिंह से कतरै । बौलातन चुड़ैल को कतरै । जहाँ खुरी नौ खण्ड, बारह बंगाले की विद्या जा पहुँचे । अञ्जनी के पूत हनुमान ! तोहे एक लाख अस्सी हजार पीर-पैगम्बरों की दुहाई, दुहाई, दुहाई ।” चेतावनी: हमारे KARMASU.IN लेख का उद्देश्य केवल प्रस्तुत विषय से संबंधित जानकारी प्रदान करना है लेख को पढ़कर यदि कोई व्यक्ति किसी टोने-टोटके,गंडे,ताविज अथवा नक्स आदि का प्रयोग करता है और उसे लाभ नहीं होता या फिर किसी कारण वश हानि होती है, तो उसकी जिम्मेदारी हमारी संथानकी नहीं होगी,क्योकि मेरा उद्देश्य केवल विषय से परिचित कराना है।

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श्री रंगनाथ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

रंग जी मंदिर, वृन्दावन के सबसे बड़े मंदिरों में शामिल है। श्री रंगनाथ मंदिर:उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृन्दावन में श्री रंगनाथ मंदिर स्थित है। इस मंदिर को “रंग जी मंदिर ” के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु जी की मूर्ति स्थापित है। वृन्दावन के सबसे बड़े मंदिरों में यह मंदिर शामिल है। इस मंदिर की खास बात यह है कि मंदिर के पुजारी दक्षिण भारतीय ब्राह्मण है। मंदिर का इतिहास सेठ गोबिंद दास और राधा कृष्ण द्वारा श्री रंगनाथ मंदिर की स्थापना की गयी थी। इस मंदिर के निर्माण में स्वामी रंगाचार्य का मार्गदर्शन लिया गया था, जो एक प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान और गुरु थे। इस मंदिर का निर्माण कार्य 1845 में आरम्भ हुआ और सन 1851 में यह मंदिर पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो गया था। इस मंदिर को बनने में करीब 6 साल का समय लगा। लगभग 45 लाख रुपये की लागत में यह मंदिर बना था। मंदिर का महत्व रंगनाथ मंदिर के उपस्थित सातवें दरवाजे का नाम वैकुंठ दरवाजा है। केवल वैकुंठ एकादशी के दिन इस दरवाजे को खोला जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जिसने भी इस दरवाजे को पार कर लिया। उसे मोक्ष मिल जाता है। यह मंदिर इस तरह से बनाया गया है कि इस मंदिर में जाने पर ऐसा लगता है जैसे आप दक्षिण के मंदिर का दर्शन कर रहे है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह मूर्ति अयोध्‍या में स्‍थापित थी। जब श्री राम जी का राज्‍याभिषेक हुआ तो वह सभी को दान दे रहे थे। उस समय विभीषण ने उनसे श्रीरंगजी की मूर्ति मांगी और कहा कि वह उस मूर्ति को लंका ले जाना चाहते है। यात्रा के दौरान विभीषण के एक स्थान पर मूर्ति को रख दिया। इसके बाद वह मूर्ति वहां से बिलकुल भी नहीं हिली। बाद में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया गया। जो आज श्री रंगनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला इस मंदिर के वास्तुकला की बात करें तो यह मंदिर दक्षिण के श्री रंगम मंदिर के आधार पर बनाया गया है। श्री रंगनाथ मंदिर में आपको दक्षिण और उत्तर भारतीय शैली का मिश्रण देखने को मिलेगा। जो बहुत ही अद्भुत है। यह मंदिर द्रविड वास्तुशिल्प शैली में बनाया गया है। इस मंदिर के गर्भगृह के चारों तरफ 5 आयताकार बाड़े है। इसके पूर्वी और पश्चिमी ओर जयपुर शैली के दो खूबसूरत पत्थर से निर्मित गेट है। मंदिर के पश्चिमी गेट पर एक लकड़ी का रथ है जो कि ब्रह्मोत्सव के समय निकाला जाता है। इस मंदिर में श्रीरंगनाथ जी शेषनाग पर मूर्ति रूप में विराजमान है। उनके चरणों के समीप माता लक्ष्‍मी बैठी है। मंदिर का समय श्री रंगनाथ मंदिर के सुबह दर्शन का समय 08:00 AM – 12:00 PM शाम को श्री रंगनाथ मंदिर के खुलने का समय 03:00 PM – 07:30 PM मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM शाम की मंगला आरती का समय 06:00 PM – 06:30 PM मंदिर का प्रसाद श्री रंगनाथ मंदिर में लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूल भी अर्पित किये जाते है।

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शाहजी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर में खम्भे टेढ़े-मढ़े है जिस कारण इसे “टेढ़ा खंभा मंदिर” भी कहा जाता है। शाहजी मंदिर:वृंदावन:उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध नगरी मथुरा, वृन्दावन में शाह जी मंदिर स्थित है। यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर को “छोटे राधा रमण मंदिर ” के नाम से भी जाना जाता है। शाहजी मंदिर:वृंदावन इस मंदिर में खम्भे टेढ़े-मढ़े है जिस कारण इसे “टेढ़ा खंभा मंदिर” भी कहा जाता है। राधा जी और श्री कृष्ण के एक साथ विग्रह वाला यह मंदिर विशेष महत्त्व रखता है। मंदिर का इतिहास शाहजी मंदिर का निर्माण 1876 में लखनऊ के व्यापारी शाह कुन्दन लाल और शाह फुन्दन लाल ने करवाया था। वह श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे। इस कारण ही इस मंदिर का नाम शाह जी मंदिर रखा गया। इस मंदिर के निर्माण में आठ साल का समय लगा। भगवान राधा-कृष्ण की मूर्ति द्वारा स्थापित यह मंदिर अपनी अद्भुत ईमारत के कारण दुनिया भर से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मंदिर का महत्व ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन मंदिर के बसंती कमरे में ही श्रीजी ने शाह जी को दर्शन दिए थे। भगवान के दर्शन की आस में भक्त हर साल भारी संख्या में बसंत पंचमी पर इस मंदिर में आते है। इस मंदिर में जन्माष्टमी और गोवर्धन पूजा जैसे त्योहारों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। इन विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों से सजाया जाता है साथ ही रोशनी भी की जाती है। बसंत पंचमी के दिन भगवान बसंती पोशाक पहनकर भक्तों को दर्शन देते है। ऐसा बताया जाता है कि शाह कुंदन लाल जी और फुंदन लाल जी लखनऊ के निवासी थे। उनकी भगवान कृष्ण में अगाध आस्था थी। लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह से इनकी गहरी दोस्ती हुआ करती थी। सन 1858 में जब लड़ाई छिड़ी तो अंग्रेजों द्वारा वाजिद अली शाह को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद शाह परिवार के पूर्वज वृन्दावन में आकर बस गए। यहाँ आने के बाद उन्होंने इस मंदिर की नीव रखी। शाहजी मंदिर:वृंदावन बसंत पंचमी के दिन सन 1876 में यह मंदिर बनकर तैयार हो गया। शाहजी मंदिर:वृंदावन मंदिर में ठाकुर राधारमण लाल जी के श्री विग्रह सबसे पहले इसी कमरे में विराजमान हुए थे। शाहजी मंदिर:वृंदावन तभी से इस बसंती कमरे का विशेष महत्त्व है। इस कमरे के पट हर साल बसंत पंचमी के दिन खुलते है। इसके अलावा श्रावण मास में त्रयोदशी व चतुर्दशी के दिन भी इस कमरे के पट खुलते है और ठाकुर जी अपने भक्तों को दर्शन देते है। मंदिर की वास्तुकला शाह जी मंदिर की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है। सफ़ेद संगमरमर से बने इस मंदिर को देख कर हर कोई आचार्यचकित रह जाता है। इस मंदिर में खम्भे सर्पाकार है जो मंदिर की शोभा को और बढ़ा देते है। इस मंदिर में “बसंती कमरा” भी है जो बहुत ही शानदार है। शाहजी मंदिर:वृंदावन मंदिर के अंदर आकर्षक पेंटिंग भी आपको देखने को मिलेंगी। भगवान के दर्शन के साथ साथ इस मंदिर की वास्तुकला को देख कर हर भक्त आनंदित हो जाता है। मंदिर का समय गर्मियों में शाहजी मंदिर खुलने का सुबह का समय 05:30 AM – 12:30 PM गर्मियों में मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM गर्मियों में शाम को शाहजी मंदिर खुलने का का समय 04:30 PM – 08:30 PM सर्दियों में मंगला आरती का समय 06:30 AM – 07:00 AM सर्दियों में शाहजी मंदिर खुलने का सुबह का समय 08:30 AM – 12:30 PM सर्दियों में शाम को शाहजी मंदिर खुलने का का समय 05:30 PM – 07:30 PM

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Yamuna Chhath 2025:यमुना छठ वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

Yamuna Chhath 2025:यमुना छठ एक हिंदू त्योहार है माना जाता है कि इसी दिन देवी यमुना पृथ्वी पर अवतरित हुई थी और इस दिन को यमुना जयंती के रूप में भी जाना जाता है। यह उत्सव चैत्र मास में शुक्ल पक्ष षष्ठी को होता है और यह आमतौर पर चैत्र नवरात्रि के दौरान होता है। Yamuna Chhath kya hai:यमुना छठ क्या है? यमुना छठ, जिसे यमुना जयंती के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में मनाई जाती है। इसके अलावा, यह यमुना नदी के गौलोक से पृथ्वी पर आने का प्रतीक है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, श्री हरि ने यमुनाजी को गौलोक से उतरने का आदेश दिया था। इस प्रकार, उन्होंने आज्ञा का पालन किया और अपनी दिव्य उपस्थिति से दुनिया को आशीर्वाद दिया। इसलिए भक्तजन इस दिन को गहरी आस्था और भक्ति के साथ मनाते हैं। यमुना छठ: आस्था और श्रद्धा का पावन पर्व (Yamuna Chhath: A Festival of Devotion and Faith) Introductionयमुना छठ (Yamuna Chhath) भारत के प्रमुख धार्मिक त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह पर्व मां यमुना (Maa Yamuna) को समर्पित है, जो हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में से एक मानी जाती हैं। इस दिन भक्त यमुना नदी के तट पर एकत्रित होकर पूजा-अर्चना करते हैं और पवित्र स्नान (holy bath) करके मां यमुना का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। श्रीयमुनाष्टकम् sriyamunashtakam यमुना छठ का महत्व (Significance of Yamuna Chhath) मां यमुना को हिंदू धर्म में जीवनदायिनी नदी माना जाता है। उनकी पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन यमुना स्नान (Yamuna Snan) करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। यमुना छठ कब और कहां मनाया जाता है? (When and Where is Yamuna Chhath Celebrated?) वर्ष 2025 में यमुना छठ 3 अप्रैल 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी। हालांकि, षष्ठी तिथि 02 अप्रैल 2025 को रात्रि 11:49 बजे प्रारंभ होगी और 03 अप्रैल 2025 को रात्रि 09:41 बजे समाप्त होगी। यह पर्व चैत्र मास (Chaitra month) के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि (Shashthi Tithi) को मनाया जाता है। खासतौर पर यह उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), दिल्ली (Delhi), हरियाणा (Haryana) और उत्तराखंड (Uttarakhand) में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मथुरा (Mathura), वृंदावन (Vrindavan), प्रयागराज (Prayagraj) और आगरा (Agra) के घाटों पर इस दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। यमुना छठ पूजन विधि (Yamuna Chhath Puja Vidhi) श्रीयमुना कवचम् Sriyamuna Kavacham Yamuna Chhath 2025:यमुना छठ 2025 का महत्व Yamuna Chhath 2025:यमुना छठ प्रकृति के प्रति हमारी गहरी आस्था का एक सुंदर प्रतिबिंब है। Yamuna Chhath 2025 हिंदू होने के नाते, हम न केवल प्रकृति के साथ रहते हैं, बल्कि उसका सम्मान भी करते हैं। वैसे तो लोग भारत को सपेरों का देश कहते हैं, लेकिन हमारे लिए प्रकृति की हर रचना पवित्र है। हमारे त्यौहार उनका सम्मान करते हैं, चाहे वो भैया पंचमी हो, जिसमें हम साँपों की पूजा करते हैं, या वट सावित्री व्रत हो , Yamuna Chhath 2025 जिसमें हम बरगद के पेड़ को नमन करते हैं या फिर कार्तिक पंचमी हो , जिसमें हम तुलसी माता की पूजा करते हैं। इसी तरह, इस खास दिन पर हम यमुना नदी के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं, उसकी पवित्रता और कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं। गंगा, नर्मदा, शिप्रा और सरयू की तरह Yamuna Chhath 2025 यमुना भी सिर्फ एक नदी नहीं बल्कि हमारे जीवन में एक दिव्य आशीर्वाद है। जाहिर है, छठ पूजा साल में दो बार की जाती है। इसके अलावा, चैत्र महीने में मनाई जाने वाली छठ को चैती छठ और कार्तिक महीने में मनाई जाने वाली छठ को कार्तिकी छठ कहा जाता है जिसे सूर्य छठ पूजा के नाम से भी जाना जाता है । Yamuna Chhath 2025 दरअसल, चैती छठ को यमुना छठ के नाम से भी जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, यह माना जाता है कि जो लोग यमुना छठ पर यमुना में स्नान करते हैं, Yamuna Chhath 2025 दान करते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं, उन्हें यमराज और शनि से सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है ।

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Durga Maa:सपने में मां दुर्गा को देखने से मिलते हैं ये शुभ संकेत, जीवन में हो सकते हैं ये बदलाव

Durga Maa:हिंदू धर्म में स्वप्न शास्त्र का अधिक महत्व है। Durga Maa स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हर सपने का अपना एक अर्थ और महत्व होता है। स्वप्न शास्त्र को लेकर ऐसा कहा जाता है कि इसका सीधा संबंध इंसान के जीवन में जुड़ी घटनाओं से होता है। सपने में कुछ चीजों के देखने से भविष्य में होने वाले लाभ का संकेत मिलते हैं, तो वहीं कुछ संकेत जीवन की अशुभ घटनाओं के संकेत देते हैं। Durga Maa ऐसे में इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि यदि आपने सपने में मां दुर्गा के अलग- अलग रूप को देखा है, तो इससे भविष्य में किस तरह के संकेत मिलते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से। Dreams About Hairs : सपने में काले सफेद बाल देखना देता है भविष्य में होने वाली इन घटनाओं का संकेत Durga Maa:मां दुर्गा को सपने में देखने के शुभ संकेत समस्याओं से मुक्ति (Freedom from Troubles) यदि आप किसी परेशानी में हैं और सपने में मां दुर्गा के दर्शन होते हैं, durga puja 2025 तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपकी परेशानियां जल्द ही खत्म होने वाली हैं। सफलता और प्रगति (Success and Progress) यदि आप अपने करियर या बिजनेस में किसी बाधा का सामना कर रहे हैं और सपने में मां दुर्गा को देखते हैं, तो यह सफलता और आर्थिक उन्नति का संकेत हो सकता है। Sapno ka matlab : सपने में खुद को देख लिया है तो आपके साथ होने वाला है यह, जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth) मां दुर्गा का सपना यह भी दर्शाता है कि आप आध्यात्मिक रूप से विकसित हो रहे हैं Durga Maa और आपको अपने जीवन में नए आध्यात्मिक अनुभव मिल सकते हैं। नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा (Protection from Negative Energy) यदि आपके जीवन में किसी भी तरह की नकारात्मक शक्तियां प्रभाव डाल रही हैं, तो मां दुर्गा का सपना आपके लिए एक ढाल की तरह काम करता है। परिवार में खुशहाली (Happiness in Family Life) यदि आपने मां दुर्गा को प्रसन्न मुद्रा में देखा है, तो यह आपके परिवार में सुख-समृद्धि Durga Maa और खुशहाली का प्रतीक हो सकता है। Lion Dream Interpretation: सपने में शेर को देखना देता है कुछ विशेष संकेत, बदल सकती है किस्मत सपने में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों का महत्व मां दुर्गा को शेर पर सवार देखना (Seeing Maa Durga on a Lion) यह सपना साहस, आत्मबल और शक्ति का प्रतीक है। इसका अर्थ है कि आप किसी भी मुश्किल का सामना करने के लिए तैयार हैं। मां दुर्गा का आशीर्वाद देना (Receiving Blessings from Maa Durga) यह सपना दर्शाता है कि आपके जीवन में किसी बड़ी सफलता का आगमन होने वाला है। यह संकेत देता है कि आपको देवी की कृपा प्राप्त हो रही है। मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र देखना (Seeing an Idol or Picture of Maa Durga) यह सपना आपके जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का संकेत देता है। मां दुर्गा को युद्ध करते देखना (Seeing Maa Durga Fighting a Battle) यदि आप Durga Maa मां दुर्गा को युद्ध करते हुए देखते हैं, तो यह संकेत देता है कि आप अपने जीवन की कठिनाइयों से लड़ने के लिए तैयार हैं और जीत आपकी ही होगी। Ancestors Dream Meaning: क्या आपको भी सपने में दिखाई देते हैं पूर्वज? स्वप्न शास्त्र से जानें इसका मतलब क्या करें अगर आपको यह सपना आए? मां दुर्गा का आभार प्रकट करें – यदि आपको यह सपना आए, तो सुबह उठकर Durga Maa मां दुर्गा का ध्यान करें और उनका धन्यवाद अर्पित करें। मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें – आप दुर्गा सप्तशती या ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। नवरात्रि व्रत रखें – यदि संभव हो, तो मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए नवरात्रि में व्रत रखें। दान-पुण्य करें – जरूरतमंदों को दान करें, जिससे देवी मां की कृपा और बढ़ेगी। Holi Dream Meaning: सपने में होली देखने और खेलने का क्या है मतलब, जानें आपके लिए शुभ या अशुभ मिलते हैं ये शुभ संकेत स्वप्न शास्त्र की मानें तो सपने में मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति देखना अधिक शुभ माना गया है। इस सपने का अर्थ यह है कि जीवन में लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से छुटकारा मिलने वाला है। इसके अलावा मानसिक समस्या भी जल्द ही खत्म हो सकती है। इसके अलावा यदि आपने सपने में मां दुर्गा के मंदिर को देखा है, तो यह सपना शुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ यह है कि durga chalisa आप आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं। इस तरह के सपने देखने से मां दुर्गा की कृपा आप पर बनी हुई है और साथ ही मनचाही मनोकामनाएं पूरी होने वाली हैं। यदि आपने सपने में मां दुर्गा को श्रृंगार के साथ देखा है, तो यह सपना शुभ माना जाता है। इस सपने से जीवन में खुशियों के संकेत मिलते हैं। विवाहित लोगों को इस तरह के सपने देखने से जीवन में चल रही समस्याएं खत्म होती हैं। सपने में मां दुर्गा को लाल साड़ी में देखना शुभ माना जाता है। इस सपने से जीवन में अच्छे बदलाव के संकेत मिलते हैं। Snake Dream Meaning: अगर सपने में देखा है सांप, तो समझिए कि जीवन में आने वाली हैं खुशियां

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राधा श्याम सुंदर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

राधा श्याम सुंदर मंदिर:ये मंदिर गौडीय वैष्णव समुदाय के लिए सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। राधा श्याम सुंदर मंदिर:श्री राधा श्याम मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। श्री राधा श्याम मंदिर शहर के लोई बाजार में सेवा कुंज नाम के स्थान पर बना हुआ है। राधा श्याम सुंदर मंदिर ये मंदिर गौडीय वैष्णव समुदाय के लिए सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। वैसे तो वृंदावन में गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के 7 मुख्य मंदिर हैं, लेकिन श्री राधा श्यामसुंदर मंदिर का सभी वैष्णवों के दिलों में एक खास स्थान है। मंदिर वृंदावन धाम, लोई बाजार में सेवा कुंज नाम के स्थान पर स्थित है। राम जनार्दन मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत मंदिर का इतिहास 1580 ई में भरतपुर राज्य के राजा को अपने खजाने में श्री राधारानी की एक सुंदर मूर्ति मिली। राजा मूर्ति को श्री श्यामानंद प्रभु के कुटीर में ले आए और वसंत पंचमी के दिन श्री श्याम सुंदर के साथ उनका विवाह संपन्न कराया। राधा श्याम सुंदर मंदिर राजा ने जोड़े के लिए एक सुंदर मंदिर भी बनवाया। मंदिर में श्री श्यामसुंदर के सबसे सुंदर और अद्वितीय देवता हैं, जो राधारानी के हृदय से प्रकट हुए थे। द्वारकाधीश गोपाल मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत मंदिर का महत्व यह विशेष स्थल श्री श्यामानंद प्रभु की भक्ति के लिए विश्व विख्यात है। कहा जाता है कि प्रभु पर श्री राधारानी की व्यक्तिगत कृपा है। गौड़ीय वैष्णव पंथ के सभी प्रमुख आचार्य इस दिव्य मंदिर में उनकी आधिपत्य, राधा श्याम सुंदर मंदिर श्री श्यामसुंदर के दर्शन के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में दर्शन पूजन से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं व भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है। मंदिर में अत्यंत सौभाग्यशाली ही प्रवेश कर पाता है। मंदिर में प्रार्थना करने का सबसे अच्छा समय वसंत पंचमी के दिन होता है। पंचमी का त्योहार यहां सबसे महत्वपूर्ण रूप में मनाया जाता है। हरसिद्धि माता मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत मंदिर की वास्तुकला श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर की वास्तुकला में राजस्थानी कला की झलक देखने को मिलती है। मंदिर में एक बहुत बड़ा खुला क्षेत्र और एक संगमरमर का मंच है। राधा श्यामसुंदर मंदिर में श्री लाला लाली , श्री राधा कुंजबिहारी, श्री राधा श्याम सुंदर जी मूर्तियों के तीन सेट है। इसमें मुख्य देवताओं के विपरीत तरफ वृंदा माता की मूर्ति भी है। गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के आचार्य बलदेव विद्याभूषण के सेव्य ठा. राधाश्यामसुंदर मंदिर में मुख्य सिंहासन पर विराजमान हैं। इनके बाईं ओर श्री श्यामसुंदर व राधारानी प्रतिष्ठित हैं। मनकामेश्वर मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:00 AM – 12:00 PM सुबह मंगला आरती का समय 04:00 AM – 05:00 AM सुबह शृंगार आरती का समय 10:30 AM – 11:00 AM संध्या आरती का समय 06:15 PM – 07:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 10:00 PM सुबह धूप आरती का समय 08:15 AM – 08:30 AM सुबह राज भोग आरती का समय 11:30 AM – 12:00 PM रात में शयन आरती का समय 09:00 PM – 09:30 PM मंदिर का प्रसाद श्री श्याम सुंदर मंदिर में माखन और मिश्री का भोग चढ़ाया जाता है। इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पेड़े, पंजीरी का भोग लगाया जाता है।

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राधा दामोदर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

भगवान राधा कृष्ण की लीला भूमि वृंदावन को सात देवताओं की प्राकट्य स्थली भी कहा जाता है। राधा दामोदर मंदिर:भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। राधा दामोदर मंदिर में गौड़ीय संप्रदाय के साथ अन्य संप्रदायों के भक्तों और अनुयाईयों का आस्था का केंद्र रहा है। राधा दामोदर मंदिर भगवान राधा कृष्ण की लीला भूमि वृंदावन को सात देवताओं की प्राकट्य स्थली भी कहा जाता है। यहां चैतन्य महाप्रभु के शिष्य 6 गोस्वामियों ने अपनी भक्ति के जरिए 7 देवताओं की प्रतिमा को प्रकट किया था। इन्हीं में से एक हैं राधा दामोदर, जिनको श्रीरूप गोस्वामी ने स्थापित किया था। इसकी सेवा की जिम्मेदारी जीव गोस्वामी को दी थी। राधा दामोदर मंदिर की चार परिक्रमाएँ करने से गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा का फल मिलता है। श्री राधा वल्लभ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर का इतिहास राधा दामोदर मंदिर करीब साढ़े चार सौ वर्ष पुराना है। संवत 1599 सन् 1542 की माघ शुक्ल दशमी के दिन श्रीरूप गोस्वामी ने यहाँ राधा दामोदर जी के विग्रहों की स्थापना करके, उनकी सेवा का भार जीव गोस्वामी को सौंपा। इसी मंदिर में छह गोस्वामियों, रूप गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, भक्त रघुनाथ, जीव गोस्वामी, गोपाल भट्ट, रघुनाथ दास ने अपनी साधना स्थली बनाया। श्री रूपगोस्वामी जी सेवाकुंज के अन्तर्गत यहीं भजन कुटी में वास करते थे। यहीं पर तत्कालीन गोस्वामीगण एवं भक्तजन सम्मिलित होकर इष्टगोष्ठी करते थे और श्री रघुनाथभट्ट जी अपने मधुर कंठ से उस वैष्णव सभा में श्रीमद्भागवत की व्याख्या करते। नीलेश्वर महादेव मंदिर:हरिद्वार, उत्तराखंड, भारत मंदिर का महत्व राधा दामोदर मंदिर को इस्कॉन मन्दिर के संस्थापक प्रभुपाद महाराज ने अपने वृन्दावन प्रवास के दौरान सर्वप्रथम आराधना का केंद्र बनाया था। ऐसी मान्यता है कि राधा दामोदर मंदिर की परिक्रमा करने से उसमें विराजमान गिरिराज शिला की स्वतः परिक्रमा हो जाती है। इसकी एक किलोमीटर से भी कम की चार परिक्रमाएँ करने से श्रृद्धालु गिरिराज गोवर्धन की 25 किलोमीटर लम्बी परिक्रमा का पुण्य अर्जित कर लेता है। श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर:गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर की वास्तुकला राधा दामोदर मंदिर में राजस्थानी शैली की वास्तुकला दिखाई देती है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर राजस्थानी शैली में भव्य गेट बना है। मंदिर के केंद्र में एक खुले आंगन के साथ-साथ खूबसूरती से नक्काशीदार खंभे और एक शानदार चित्रित छत है। गर्भ गृह के सिंहासन में श्री वृन्दावनचन्द्र, श्री छैलचिकनिया, श्री राधाविनोद और श्री राधामाधव आदि विग्रह विराजमान हैं। मंदिर के पीछे श्री जीवगोस्वामी तथा श्री कृष्णदास गोस्वामी की समाधियाँ प्रतिष्ठित हैं। मंदिर के उत्तर भाग में श्रीपाद रूपगोस्वामी की भजन-कुटी और समाधि मन्दिर स्थित हैं। पास ही श्रीभूगर्भ गोस्वामी की समाधि है। पागल बाबा मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:30 AM – 01:00 PM मंगला आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद राधा दामोदर मंदिर में श्री कृष्ण जी को फल, माखन, मिश्री, ड्राई फ्रूट्स का भोग लगाया जाता है। मंदिर में प्रभु को खीर भी चढ़ाई जाती है। राधा रमण मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

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Chaitra Navratri :नवरात्रि के दौरान व्रत कैसे रखा जाता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Chaitra Navratri 2025: Dates, Significance, व्रत नियम और पूजा विधि नवरात्रि Chaitra Navratri 2025 कब से शुरू होगी? Chaitra Navratri 2025 की शुरुआत 30 मार्च से होगी और यह 7 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान 9 दिनों तक माता दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। Chaitra Navratri 2025 Dates & Tithi List दिन तिथि देवी स्वरूप 30 मार्च प्रतिपदा माता शैलपुत्री 31 मार्च द्वितीया माता ब्रह्मचारिणी 1 अप्रैल तृतीया माता चंद्रघंटा 2 अप्रैल चतुर्थी माता कूष्मांडा 3 अप्रैल पंचमी माता स्कंदमाता 4 अप्रैल षष्ठी माता कात्यायनी 5 अप्रैल सप्तमी माता कालरात्रि 6 अप्रैल अष्टमी माता महागौरी (महाष्टमी) 7 अप्रैल नवमी माता सिद्धिदात्री (राम नवमी) Chaitra Navratri का महत्व (Significance) Chaitra Navratri हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इस दौरान देवी दुर्गा की पूजा करने से व्यक्ति को शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह समय आत्मशुद्धि और साधना का भी होता है। Shri Durga 108 Name:श्री दुर्गा के 108 नाम Ghatasthapana (Kalash Sthapana) Vidhi नवरात्रि की पूजा का प्रारंभ घटस्थापना से होता है। इसके लिए: Navratri Vrat Rules & Food नवरात्रि में उपवास रखने वाले भक्त सात्विक आहार ग्रहण करते हैं। लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। व्रत के दौरान निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है: इन पांच बातों का रखें ध्यान कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के दिनों में किसी भी कन्या व महिला का अपमान न करें। इस दौरान आप अष्टमी या नवमी पर कन्याओं को भरपेट हलवा पूरी का भोजन कराएं। इससे देवी की कृपा प्राप्त होती है। नवरात्रि का यदि आपने व्रत रखा है, तो नियमानुसार माता की पूजा करें। इन दिनों घर को कभी खाली नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करना अशुभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शारदीय नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा घरों में भ्रमण करती हैं। ऐसे में घर में उजाला रखें। इससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। नवरात्रि के नौ दिनों में प्याज लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आपने व्रत नहीं रखा है, तब भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। यही नहीं घर में भी इसका उपयोग करने से बचें। नवरात्रि का समय मां की भक्ति को समर्पित है। इन दिनों पूजा पाठ करने से जातक की सभी समस्याएं समाप्त होती हैं। साथ ही मनोवांछित फल मिलता है। ऐसे में अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो दिन के अनुसार देवी की पूजा जरूर करें। Navratri Vrat रखने के नियम (Vrat Rules) Chaitra Navratri 2025 Dates:चैत्र नवरात्रि कब से शुरू होती है और इसकी तिथियाँ क्या हैं ? Navratri Vrat में क्या खाएं? (Fasting Foods) Shri Durga Manasa Puja:श्री दुर्गा मानस पूजा Chaitra Navratri 2025 की FAQs 1. Chaitra Navratri 2025 कब शुरू होगी? Chaitra Navratri 2025 30 मार्च से 7 अप्रैल तक चलेगी। 2. नवरात्रि में कौन से रंग पहनने चाहिए? हर दिन एक विशेष रंग पहना जाता है, जैसे कि पहला दिन लाल, दूसरा दिन सफेद, आदि। 3. Chaitra Navratri का धार्मिक महत्व क्या है? यह नवरात्रि देवी दुर्गा की कृपा पाने और नववर्ष की सकारात्मक शुरुआत के लिए विशेष मानी जाती है। Durga Maa Kali Aarti:जगदम्बे काली आरती  4. नवरात्रि में कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए? 5. नवरात्रि में कन्या पूजन कब करना चाहिए? अष्टमी (6 अप्रैल) या नवमी (7 अप्रैल) को कन्या पूजन करना सबसे शुभ माना जाता है।

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Chaitra Navratri 2025 Dates:चैत्र नवरात्रि कब से शुरू होती है और इसकी तिथियाँ क्या हैं ?

Chaitra Navratri 2025 कब से शुरू होगी ? Chaitra Navratri 2025 की शुरुआत 30 मार्च से होगी और यह 7 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान 9 दिनों तक माता दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का पर्व माता दुर्गा की भक्ति और शक्ति उपासना का विशेष समय होता है। भक्तजन नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना कर धर्म और आध्यात्मिकता में लीन रहते हैं। Chaitra Navratri 2025 Dates देवी पुराण के अनुसार इस दौरान मां दुर्गा धरती पर वास करती हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है। Chaitra Navratri 2025 Dates & Tithi List तिथि देवी स्वरूप प्रतिपदा माता शैलपुत्री द्वितीया माता ब्रह्मचारिणी तृतीया माता चंद्रघंटा चतुर्थी माता कूष्मांडा पंचमी माता स्कंदमाता षष्ठी माता कात्यायनी सप्तमी माता कालरात्रि अष्टमी माता महागौरी (महाष्टमी) नवमी माता सिद्धिदात्री (राम नवमी) Chaitra Navratri का महत्व (Significance) Chaitra Navratri नवरात्रि में माता की आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। इस दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, Chaitra Navratri 2025 Dates जिससे भक्तों को शक्ति, ज्ञान और समृद्धि प्राप्त होती है। इस साल नवरात्रि विशेष रूप से फलदायी होगी क्योंकि देवी का वाहन हाथी शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। Durga Maa Kali Aarti:जगदम्बे काली आरती  Ghatasthapana (Kalash Sthapana) Vidhi नवरात्रि की पूजा का प्रारंभ घटस्थापना से होता है। इसके लिए: माता के आगमन और प्रस्थान का वाहन इस बार नवरात्रि का आरंभ और समापन दोनों रविवार को हो रहा है, जिससे मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और इसी पर प्रस्थान करेंगी। हाथी पर माता का आगमन बेहद शुभ माना जाता है, जो अच्छे वर्षा चक्र, समृद्धि और खुशहाली का संकेत देता है। मान्यता है कि देवी की सवारी से आने वाले समय की स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है, जिसमें प्रकृति, कृषि और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव शामिल होते हैं। Shri Durga 108 Name:श्री दुर्गा के 108 नाम Navratri Vrat Rules & Food नवरात्रि में उपवास रखने वाले भक्त सात्विक आहार ग्रहण करते हैं। फलों, दूध और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन खाए जाते हैं। लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 30 मार्च 2025 से प्रारंभ होगी। वहीं 6 अप्रैल 2025 को राम नवमी के साथ इसका समापन होगा। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ हिंदू नववर्ष का शुभारंभ भी होगा और गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाएगा। 1. Chaitra Navratri 2025 कब शुरू होगी? Chaitra Navratri 2025 30 मार्च से 7 अप्रैल तक चलेगी। 2. नवरात्रि में कौन से रंग पहनने चाहिए? हर दिन एक विशेष रंग पहना जाता है, जैसे कि पहला दिन लाल, दूसरा दिन सफेद, आदि। 3. Chaitra Navratri का धार्मिक महत्व क्या है? यह नवरात्रि देवी दुर्गा की कृपा पाने और नववर्ष की सकारात्मक शुरुआत के लिए विशेष मानी जाती है। 4. नवरात्रि में कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए? 5. नवरात्रि में कन्या पूजन कब करना चाहिए? अष्टमी (6 अप्रैल) या नवमी (7 अप्रैल) को कन्या पूजन करना सबसे शुभ माना जाता है। (Maa Durga Maa Kali Aarti) अम्बे तू है जगदम्बे काली माँ दुर्गा, माँ काली आरती Conclusion Chaitra Navratri 2025 एक पवित्र समय है जब भक्त माता दुर्गा की आराधना कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यह समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी उत्तम माना जाता है। अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे शेयर करें और अपने परिवार व दोस्तों को भी बताएं। जय माता दी! कलश स्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 29 मार्च 2025, शाम 4:27 बजेप्रतिपदा तिथि समाप्त: 30 मार्च 2025, दोपहर 12:49 बजेकलश स्थापना का शुभ मुहूर्त: सुबह 6:13 बजे से 10:22 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 12:50 बजे तककलश स्थापना शुभ मुहूर्त में करने से व्रत और पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है

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