Shriganadhish Stotram

Shiv Shakti-Kritam Shriganadhish Stotram : शिवशक्ति कृत श्रीगणाधीश स्तोत्र….

शिवशक्ति कृत श्रीगणाधीश स्तोत्र हिंदी पाठ : Shiv Shakti-Kritam Shriganadhish Stotram ।। श्रीगणेशाय नमः ।। ।। श्रीशक्तिशिवावूचतुः ।। नमस्ते गणनाथाय गणानां पतये नमः ।भक्तिप्रियाय देवेश भक्तेभ्यः सुखदायक ॥ १ ॥ स्वानन्दवासिने तुभ्यं सिद्धिबुद्धिवराय च ।नाभिशेषाय देवाय ढुण्ढिराजाय ते नमः ॥ २ ॥ वरदाभयहस्ताय नमः परशुधारिणे ।नमस्ते सृणिहस्ताय नाभिशेषाय ते नमः ॥ ३ ॥ अनामयाय सर्वाय सर्वपूज्याय ते नमः ।सगुणाय नमस्तुभ्यं ब्रह्मणे निर्गुणाय च ॥ ४ ॥ ब्रह्मभ्यो ब्रह्मदात्रे च Shriganadhish Stotram गजानन नमोऽस्तु ते ।आदिपूज्याय ज्येष्ठाय ज्येष्ठराजाय ते नमः ॥ ५ ॥ मात्रे पित्रे च सर्वेषां हेरम्बाय नमो नमः ।अनादये च विघ्नेश विघ्नकर्त्रे नमो नमः ॥ ६ ॥ विघ्नहर्त्रे स्वभक्तानां Shriganadhish Stotram लम्बोदर नमोऽस्तु ते ।त्वदीयभक्तियोगेन योगीशाः शान्तिमागताः ॥ ७ ॥ किं स्तुवो योगरूपं तं प्रणमावश्च विघ्नपम् ।तेन तुष्टो भव स्वामिन्नित्युकत्वा तं प्रणेमतुः ॥ ८ ॥ तावुत्थाप्य गणाधीश उवाच तौ महेश्वरौ ।भवत्कृतमिदं स्तोत्रं मम भक्तिविवर्धनम् ॥ ९ ॥ भविष्यति च सौख्यस्य Shriganadhish Stotram पठते शुण्वते प्रदम् ।भुक्तिमुक्तिप्रदं चैव पुत्रपौत्रादिकं तथा ॥ १० ॥ धनधान्यादिकं सर्वं लभते तेन निश्चितम् । ।। इति शिवशक्ति कृत श्रीगणाधीश स्तोत्र संपूर्णम् ।। Shiv Shakti-Kritam Shriganadhish Stotram Lyrics : शिवशक्ति कृत श्रीगणाधीश स्तोत्र पाठ ।। shriganeshay namah ।। ।। shrishaktishivavuchatuh ।। namaste gananathay gananam pataye namah ।bhaktipriyay devesh bhaktebhyah sukhdayak ।। 1 ।। svanandavasine tubhyam siddhibuddhivaray ch ।nabhisheshay devay dhundhirajay te namah ।। 2 ।। varadabhayahastay namah parashudharine ।namaste srunihastay nabhisheshay te namah ।। 3 ।। anamayay sarvay sarvapujyay te namah ।sagunay namastubhyam bramane nirgunay ch ।। 4 ।। bramabhyo bramadatre ch gajanan namo̕stu te ।adipujyay jyeshthay jyeshtharajay te namah ।। 5 ।। matre pitre ch sarvesham herambaay namo namah ।anadaye ch vignesh vignakartre namo namah ।। 6 ।। vignahartre svabhaktanam lambodar namo̕stu te ।tvadiyabhaktiyogen yogishah shantimagatah ।। 7 ।। kim stuvo yogarupam tam pranamavasch vignapam ।ten tushto bhav svaaminnityukatva tam pranematuh ।। 8 ।। tavutthapya ganadhish uvach tau maheshvarau ।bhavatkrutamidam stotram mam bhaktivivardhanam ।। 9 ।। bhavishyati ch saukhyasya pathate shunvate pradam ।bhuktimuktipradam chaiv putrapautradikam tatha ।। 10 ।। dhandhanyadikam sarvam labhate ten nischitam । ।। iti shiv shakti-kritam shriganadhish stotram sampurnam ।।

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Nirjala Ekadashi 2026

Nirjala Ekadashi 2026 Date And Time : निर्जला एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, अचूक पूजा विधि और दान का महत्व….

Nirjala Ekadashi 2026 Mein Kab Hai : सनातन धर्म और हमारी अत्यंत प्राचीन भारतीय संस्कृति में भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित व्रतों का अत्यधिक और गहरा आध्यात्मिक महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार मनाए जाने वाले तमाम उपवासों में एकादशी के व्रत को सर्वोपरि और सबसे श्रेष्ठ माना गया है। Nirjala Ekadashi 2026 शास्त्रों के अनुसार एक सामान्य वर्ष में कुल 24 एकादशियां आती हैं, लेकिन इन सभी में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को सबसे अधिक पुण्यकारी, शक्तिशाली और तपस्या के दृष्टिकोण से अत्यंत कठोर माना जाता है। इस साल Nirjala Ekadashi 2026 को लेकर देशभर के भक्तों के बीच काफी उत्साह और साथ ही तिथियों को लेकर थोड़ा असमंजस भी देखा जा रहा है। यह एक ऐसा जाग्रत उपवास है जो इंसान के शरीर और मन को गहरा संयम सिखाता है, विचारों को शुद्ध करता है और शरीर को एक नई सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। Nirjala Ekadashi 2026 आज के इस अत्यंत विस्तृत, एसईओ-फ्रेंडली (SEO Friendly) और शत-प्रतिशत मौलिक लेख में हम गहराई से जानेंगे कि यह पवित्र व्रत कब रखा जाएगा, इसके नियम क्या हैं, और इसका इतना अधिक महत्व क्यों है। Nirjala Ekadashi 2026 Date And Time : निर्जला एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त…. तिथि का असमंजस और पंचांग की एकदम सटीक गणना : Uncertainty regarding the date and the highly precise calculations of the almanac. अक्सर हिंदू त्योहारों में अलग-अलग पंचांगों के भेदों के कारण तिथियों को लेकर संशय बन जाता है। इस बार भी कई लोग इस बात को लेकर गहरी उलझन में हैं कि Nirjala Ekadashi 2026 का पवित्र व्रत 24 जून को रखा जाएगा या फिर 25 जून को। Nirjala Ekadashi 2026 द्रिक पंचांग की सटीक गणनाओं के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून 2026 की शाम 6 बजकर 12 मिनट पर शुरू हो जाएगी और इसका पूर्ण समापन अगले दिन 25 जून को रात 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। (वहीं कुछ अन्य पंचांगों के अनुसार यह तिथि 24 जून को रात 8:09 बजे से शुरू होकर 25 जून रात 9:14 बजे तक मान्य रहेगी)। हमारे वैदिक और सनातन धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार को मनाने के लिए ‘उदया तिथि’ (यानी सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को ही मुख्य और सबसे प्रामाणिक माना जाता है। अतः उदया तिथि के सर्वमान्य नियम के अनुसार, Nirjala Ekadashi 2026 का यह अत्यंत फलदायी व्रत 25 जून 2026, दिन गुरुवार को ही पूरे भारतवर्ष में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा जाएगा। पूजा के अत्यंत शुभ मुहूर्त और मंगलकारी योग : Highly auspicious timings and propitious celestial combinations for the worship. इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना और ध्यान के लिए पंचांग में कई अत्यंत शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पंचांग के अनुसार, इस दिन प्रातः काल का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 5 मिनट से लेकर 4 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी प्रकार की आध्यात्मिक साधना और पूजा-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ समय होता है। इसके साथ ही, दिन के समय अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। सबसे खास और दुर्लभ बात यह है कि इस बार Nirjala Ekadashi 2026 के पावन दिन पर ‘रवि योग’ का भी अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। यह मंगलकारी रवि योग सुबह 5 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर शाम 4 बजकर 29 मिनट तक पूरी तरह प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में रवि योग को जीवन के सभी दोषों को नष्ट करने वाला और किसी भी नए व शुभ कार्य को करने के लिए बहुत अच्छा माना गया है। भीमसेनी एकादशी की रहस्यमयी और पौराणिक कथा : The Mysterious and Mythological Legend of Bhimseni Ekadashi इस परम पावन एकादशी को सनातन धर्म में ‘पांडव एकादशी’ या ‘भीमसेनी एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे एक बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक धार्मिक कथा जुड़ी हुई है। पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में पांचों पांडवों में से महाबली भीम को छोड़कर सभी भाई-बहन और माता कुंती एकादशी का उपवास पूरे नियम से रखते थे। भीम को बहुत अधिक भूख लगती थी और वे किसी भी कीमत पर भूखे नहीं रह सकते थे। अपने इस आचरण और व्रत न कर पाने के कारण भीम मन ही मन बहुत आत्मग्लानि महसूस करते थे। तब अपनी इस परेशानी को लेकर उन्होंने महर्षि वेद व्यास जी से कोई उचित उपाय पूछा। महर्षि व्यास ने उनकी समस्या को समझते हुए उन्हें सलाह दी कि वे साल भर की अन्य एकादशियां छोड़ दें और केवल ज्येष्ठ मास में आने वाली इस विशेष एकादशी का व्रत बिना जल पिए (निर्जला) करें। भीम ने अपने गुरु की आज्ञा का पालन किया, लेकिन बिना भोजन और पानी के वे मूर्छित होकर गिर पड़े। इसी अत्यंत कठोर तपस्या और भीम के समर्पण के कारण इस महान व्रत का नाम ‘भीमसेनी एकादशी’ पड़ गया। शास्त्रों में यह स्पष्ट लिखा है कि जो व्यक्ति जीवन में केवल इस एक Nirjala Ekadashi 2026 का उपवास बिना जल पिए रख लेता है, उसे साल भर की सभी एकादशियों के बराबर महान पुण्य फल की प्राप्ति स्वयं ही हो जाती है। भगवान विष्णु की अचूक पूजा विधि : The infallible method of worshipping Lord Vishnu यदि आप इस अगामी Nirjala Ekadashi 2026 का पूरा, अचूक और चमत्कारी फल पाना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताई गई इस पूजा विधि का कड़ाई से पालन करें: व्रत के शुभ दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठकर शुद्ध जल से स्नान करें और उगते हुए भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करें। भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए स्नान के बाद पीले या साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और हाथ जोड़कर अपने निर्जल व्रत का दृढ़ संकल्प लें। घर के स्वच्छ पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की सुंदर प्रतिमा स्थापित करें। पूजा में भगवान को पीले फूल, कुमकुम, अक्षत, पंचामृत और पीले फल अर्पित करें। भगवान विष्णु को जो भी सात्विक भोग लगाएं, उसमें पवित्र तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अवश्य शामिल करें, क्योंकि तुलसी के बिना भगवान विष्णु कोई भी भोग स्वीकार नहीं करते। भगवान के समक्ष शुद्ध घी का दीपक

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Kavacha Stotram

Sri Venkateswara Vajra-Kavacha Stotram : श्रीवेंकटेश्वर वज्र कवच स्तोत्र…

श्रीवेंकटेश्वर वज्र कवच स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Venkateswara Vajra-Kavacha Stotram in Hindi ।। मार्कण्डेय उवाच ।। नारायणं परब्रह्म सर्वकारणकारणम् ।प्रपद्ये वेङ्कटेशाख्यं तदेव कवचं मम ॥ 1 ॥ सहस्रशीर्षा पुरुषो Kavacha Stotram वेङ्कटेशश्शिरोऽवतु ।प्राणेशः प्राणनिलयः प्राणान् रक्षतु मे हरिः ॥ 2 ॥ आकाशराट्सुतानाथ आत्मानं मे सदावतु ।देवदेवोत्तमो पायाद्देहं मे वेङ्कटेश्वरः ॥ 3 ॥ सर्वत्र सर्वकालेषु Kavacha Stotram मङ्गाम्बाजानिरीश्वरः ।पालयेन्मां सदा कर्मसाफल्यं नः प्रयच्छतु ॥ 4 ॥ य एतद्वज्रकवचमभेद्यं वेङ्कटेशितुः ।सायं प्रातः पठेन्नित्यं मृत्युं तरति निर्भयः ॥ 5 ॥ ।। इति श्रीवेंकटेश्वर वज्र कवच स्तोत्र संपूर्णम् ।। Sri Venkateswara Vajra-Kavacha Stotram :श्रीवेंकटेश्वर वज्र कवच स्तोत्र  ।। markandeya uvach ।। narayanam parabram sarvakaranakaranam ।prapadye venkateshakhyam tadev kavacham mam ॥ 1 ॥ sahasrashirsha purusho venkateshashshiro̕vatu ।praneshah prananilayah pranan rakshatu me harih ॥ 2 ॥ akasharatsutanath aatmanam me sadavatu ।devdevottamo payaddeham me venkateshvarah ॥ 3 ॥ sarvatra sarvakaleshu mangambajanirishvarah ।palayenmaam sada karmasafalyam nah prayachatu ॥ 4 ॥ ya etadvajrakavachamabhedyam venkateshituh ।sayam pratah pathennityam mrutyum tarati nirbhayah ॥ 5 ॥ ।। iti sri venkateswara vajra-kavach stotram sampurnam ।। श्रीवेंकटेश्वर वज्र कवच स्तोत्र विशेषताए: श्रीवेंकटेश्वर वज्र कवच स्तोत्र के साथ-साथ यदि श्री वेंकटेश्वर अष्टकम का पाठ किया जाए तो, इस स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, यह स्तोत्र शीघ्र ही फल देने लग जाते है| यदि साधक इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है| अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है| यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस स्तोत्र का पाठ करे| श्रीवेंकटेश्वर वज्र कवच स्तोत्र के पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है| और नियमित रुप से करने से रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते है | और साधक के जीवन में रोग, भय, दोष, शोक, बुराइया, डर दूर हो जाते है साथ ही श्री वेंकटेश जी की पूजा करने से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि प्राप्त होती है। याद रखे इस पाठ को करने से पूर्व अपना पवित्रता बनाये रखे| इससे मनुष्य को जीवन में बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है|

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Mangala Stotram

Sri Venkateswara Mangala Stotram: श्री वेंकटेश मंगल स्तोत्र….

श्री वेंकटेश मंगल स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Venkateswara Mangala Stotram in Hindi श्रियः कान्ताय कल्याणनिधये निधयेऽर्थिनाम् ।श्रीवेङ्कटनिवासाय श्रीनिवासाय मङ्गलम् ॥ १ ॥ लक्ष्मीसविभ्रमालोकसद्मविभ्रमचक्षुषे ।चक्षुषे सर्वलोकानां वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ २ ॥ श्रीवेङ्कटाद्रिशृङ्गाय मङ्गलाभराणाङ्घ्रये ।मङ्गलानां निवासाय वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ ३ ॥ सर्वावयवसौन्दर्यसंपदा सर्वचेतसाम् ।सदा सम्मोहनायास्तु वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ ४ ॥ नित्याय निरवद्याय Mangala Stotram सत्यानन्द चिदात्मने ।सर्वान्तरात्मने श्रीमद् वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ ५ ॥ स्वतः सर्वविदे सर्वशक्तये सर्वशेषिणे ।सुलभाय सुशीलाय वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ ६ ॥ परस्मै ब्रह्मणे Mangala Stotram पूर्णकामाय परमात्मने ।प्रपन्नपरतत्वाय वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ ७ ॥ अकालतत्वविश्रान्तावात्मानमनुपश्यताम् ।अतृप्तामृतरूपाय वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ ८ ॥ प्रायः स्वचरणौ पुंसां शरण्यत्वेन पाणिना ।कृपया दर्शयते श्रीमद् वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ ९ ॥ दयामृततरङ्गिण्याः तरङ्गैरतिशीतलैः ।अपाङ्गैः सिञ्चते विश्वं वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ १० ॥ स्रग्भूषाम्बरहेतीनां सुषमावहमूर्तये ।सर्वार्तिशमनायास्तु वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ ११ ॥ श्रीवैकुण्ठविरक्ताय स्वामिपुष्करणीतटे ।रमया रममाणाय वेङ्कटेशाय मङ्गलम् ॥ १२ ॥ श्रीमद् सुन्दरजामातृमुनिमानसवासिने ।सर्वलोकनिवासाय श्रीनिवासाय मङ्गलम् ॥ १३ ॥ नमः श्रीवेङ्कटेशाय शुद्धज्ञानस्वरूपिणे ।वासुदेवाय शान्ताय श्रीनिवासाय मङ्गलम् ॥ १४ ॥ ॥ इति श्री वेंकटेश मंगल स्तोत्र संपूर्णम् ॥

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Dwadasa Nama Stotram

Srivenkatesa Dwadasa Nama Stotram: श्रीवेंकटेश द्वादश नाम स्तोत्रम्…

श्रीवेंकटेश द्वादश नाम स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Srivenkatesa Dwadasa Nama Stotram in Hindi वेङ्कटेशो वासुदेवः वारिजासनवन्दितः,स्वामिपुष्करणीवासः शङ्खचक्रगदाधरः ॥ १ ॥ पीतांबरधरो देवः गरुडारूढशोभितः,विश्वात्मा विश्वलोकेशः विजयो वेङ्कटेश्वरः ॥ २ ॥ एतत् द्वादश नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः,सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णोस्सायुज्यमाप्नुयात् ॥ ३ ॥ ॥ इति श्रीवेंकटेश द्वादश नाम स्तोत्रम् संपूर्णम् ॥ Srivenkatesa Dwadasa Stotram Lyrics : श्रीवेंकटेश द्वादश नाम स्तोत्रम् पाठ venkatesho vasudevahvarijasanavanditah,svaamipuskaranivasahshankhchakragadadharah ।। 1 ।। pitambaradharo devahgarudarudhashobhitah,vishvatma vishvalokeshahvijayo venkateshvarah ।। 2 ।। etat dvadash namanitrisandhyam yah pathennarah,sarvapapavinirmuktovishnossayujyamaapnuyat ।। 3 ।। ।। iti sri venkatesa dwadasa nama stotram sampurnam ।।

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Venkateswara Stotram

Sri Venkateswara Stotram : श्री वेंकटेश्वर स्तोत्र….

श्री वेंकटेश्वर स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Venkateswara Stotram in Hindi कमलाकुच चूचुक कुंकमतोनियतारुणि तातुल नीलतनो ।कमलायत लोचन लोकपतेविजयीभव वेंकट शैलपते ॥ सचतुर्मुख षण्मुख पंचमुखप्रमुखा खिलदैवत मौलिमणे ।शरणागत वत्सल सारनिधेपरिपालय मां वृष शैलपते ॥ अतिवेलतया तव दुर्विषहैरनु वेलकृतै Venkateswara Stotram रपराधशतैः ।भरितं त्वरितं वृष शैलपतेपरया कृपया परिपाहि हरे ॥ अधि वेंकट शैल मुदारमते-र्जनताभि मताधिक दानरतात् ।परदेवतया गदितानिगमैःकमलादयितान्न परंकलये ॥ कल वेणुर वावश गोपवधूशत कोटि वृतात्स्मर कोटि समात् ।प्रति पल्लविकाभि मतात्-सुखदात्वसुदेव सुतान्न परंकलये ॥ अभिराम गुणाकर दाशरधेजगदेक धनुर्थर धीरमते ।रघुनायक राम रमेश विभोवरदो भव देव दया जलधे ॥ अवनी तनया कमनीय करंरजनीकर चारु Venkateswara Stotram मुखांबुरुहम् ।रजनीचर राजत मोमि हिरंमहनीय महं रघुराममये ॥ सुमुखं सुहृदं सुलभं सुखदंस्वनुजं च सुकायम मोघशरम् ।अपहाय रघूद्वय मन्यमहंन कथंचन कंचन जातुभजे ॥ विना वेंकटेशं न नाथो न नाथःसदा वेंकटेशं स्मरामि स्मरामि ।हरे वेंकटेश प्रसीद प्रसीदप्रियं वेंकटॆश प्रयच्छ प्रयच्छ ॥ अहं दूरदस्ते पदां भोजयुग्मप्रणामेच्छया गत्य सेवां करोमि ।सकृत्सेवया नित्य सेवाफलं त्वंप्रयच्छ पयच्छ प्रभो वेंकटेश ॥ अज्ञानिना मया दोषा न शेषान्विहितान् हरे ।क्षमस्व त्वं क्षमस्व त्वं शेषशैल शिखामणे ॥ ॥ इति श्री वेंकटेश्वर स्तोत्र संपूर्णम् ॥

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Venkatesa Stotram

Shri Venkatesa Stotram : श्री वेङ्कटेश स्तोत्रम्….

श्री वेङ्कटेश स्तोत्रम् हिन्दी पाठ : Shri Venkatesa Stotram in Hindi वेङ्कटेशो वासुदेवः प्रद्युम्नोऽमितविक्रमः ।सङ्कर्षणोऽनिरुद्धश्च शेषाद्रिपतिरेव च ॥ १ ॥ जनार्दनः पद्मनाभो वेङ्कटाचलवासनः ।सृष्टिकर्ता जगन्नाथो माधवो भक्तवत्सलः ॥ २ ॥ गोविन्दो गोपतिः कृष्णः केशवो गरुडध्वजः ।वराहो वामनश्चैव नारायण अधोक्षजः ॥ ३ ॥ श्रीधरः पुण्डरीकाक्षः सर्वदेवस्तुतो हरिः ।श्रीनृसिंहो महासिंहः सूत्राकारः पुरातनः ॥ ४ ॥ रमानाथो महीभर्ता Venkatesa Stotram भूधरः पुरुषोत्तमः ।चोळपुत्रप्रियः शान्तो ब्रह्मादीनां वरप्रदः ॥ ५ ॥ श्रीनिधिः सर्वभूतानां भयकृद्भयनाशनः ।श्रीरामो रामभद्रश्च भवबन्धैकमोचकः ॥ ६ ॥ भूतावासो गिरावासः श्रीनिवासः श्रियःपतिः ।अच्युतानन्तगोविन्दो विष्णुर्वेङ्कटनायकः ॥ ७ ॥ सर्वदेवैकशरणं सर्वदेवैकदैवतम् ।समस्तदेवकवचं सर्वदेवशिखामणिः ॥ ८ ॥ इतीदं कीर्तितं यस्य Venkatesa Stotram विष्णोरमिततेजसः ।त्रिकाले यः पठेन्नित्यं पापं तस्य न विद्यते ॥ ९ ॥ राजद्वारे पठेद्घोरे सङ्ग्रामे रिपुसङ्कटे ।भूतसर्पपिशाचादिभयं नास्ति कदाचन ॥ १० ॥ अपुत्रो लभते पुत्रान् निर्धनो धनवान् भवेत् ।रोगार्तो मुच्यते रोगाद् बद्धो मुच्येत बन्धनात् ॥ ११ ॥ यद्यदिष्टतमं लोके तत्तत्प्राप्नोत्यसंशयः ।ऐश्वर्यं राजसम्मानं भक्तिमुक्तिफलप्रदम् ॥ १२ ॥ विष्णोर्लोकैकसोपानं सर्वदुःखैकनाशनम् ।सर्वैश्वर्यप्रदं नॄणां सर्वमङ्गलकारकम् ॥ १३ ॥ मायावी परमानन्दं त्यक्त्वा वैङ्कुण्ठमुत्तमम् ।स्वामिपुष्करिणीतीरे रमया सह मोदते ॥ १४ ॥ कल्याणाद्भुतगात्राय कामितार्थप्रदायिने ।श्रीमद्वेङ्कटनाथाय श्रीनिवासाय ते नमः ॥ १५ ॥ वेङ्कटाद्रिसमं स्थानं ब्रह्माण्डे नास्ति किञ्चन ।वेङ्कटेशसमो देवो न भूतो न भविष्यति ॥ १६ ॥ ॥ इति श्री वेङ्कटेश स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

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Ganesh Stotram

Shri Vishnu krutam-Ganesh Stotram : श्रीविष्णु कृतं गणेश स्तोत्र….

श्रीविष्णु कृतं गणेश स्तोत्र हिंदी:Shri Vishnu krutam-Ganesh Stotram ॥ श्रीविष्णुरुवाच ॥ ईश त्वां स्तोतुमिच्छामि ब्रह्मज्योतिः सनातनम् ।निरुपितुमशक्तोsहमनुरुपमनीहकम् ॥ १ ॥ प्रवरं सर्वदेवानां सिद्धानां योगिनां गुरुम् ।सर्वस्वरुपं सर्वेशं ज्ञानराशिस्वरुपिणम् ॥ २ ॥ अव्यक्तमक्षरं नित्यं सत्यमात्मस्वरुपिणम् ।वायुतुल्यातिनिर्लिप्तं चाक्षतं सर्वसाक्षिणम् ॥ ३ ॥ संसारार्णवपारे च मायापोते सुदुर्लभे ।कर्णधारस्वरुपं च भक्तानुग्रहकारकम् ॥ ४ ॥ वरं वरेण्यं वरदं वरदानामपीश्र्वरम् ।सिद्धं सिद्धिस्वरुपं च सिद्धिदं सिद्धिसाधनम् ॥ ५ ॥ ध्यानातिरिक्तं ध्येयं च Ganesh Stotram ध्यानासाध्यं च धार्मिकम् ।धर्मस्वरुपं धर्मज्ञं धर्माधर्मफलप्रदम् ॥ ६ ॥ बीजं संसारवृक्षाणामङकुरं च तदाश्रयम् ।स्त्रीपुत्रपुंसकानां च रुपमेतदतीन्द्रियम् ॥ ७ ॥ सर्वाद्यमग्रपूज्यं च सर्वपूज्यं गुणार्णवम् ।स्वेच्छया सगुणं ब्रह्म निर्गुणं चापि स्वेच्छया ॥ ८ ॥ स्वयं प्रकृतिरुपं च प्राकृतं प्रकृतेः परम् ।त्वां स्तोतुमक्षमोsनन्तः सहस्त्रवदनेन च ॥ ९ ॥ न क्षमः पञ्चवक्त्रश्र्च न क्षमश्र्चतुराननः ।सरस्वती न शक्ता च न शक्तोsहं तव स्तुतौ ।न शक्ताश्र्च चतुर्वेदाः के वा ते वेदवादिनः ॥ १० ॥ इत्येवं स्तवनं कृत्वा सुरेशं सुरसंसदि ।सुरेशश्र्च सुरैः सार्द्धं विरराम रमापतिः ॥ ११ ॥ इदं विष्णुकृतं स्तोत्रं Ganesh Stotram गणेशस्य च यः पठेत् ।सायंप्रातश्र्च मध्याह्ने भक्तियुक्तः समाहितः ॥ १२ ॥ तद्विघ्ननिघ्नं कुरुते विघ्नेशः सततं मुने ।वर्धते सर्वकल्याणं कल्याणजनकः सदा ॥ १३ ॥ यात्राकाले पठित्वा तु यो याति भक्तिपूर्वकम् ।तस्य सर्वाभीष्टसिद्धिर्भवत्येव न संशयः ॥ १४ ॥ तेन दृष्टं च दुःस्वप्नं सुस्वप्नमुपजायते ।कदापि न भवेत्तस्य ग्रहपीडा च दारुणा ॥ १५ ॥ भवेद् विनाशः शत्रूणां बन्धूनां च विवर्धनम् । शश्र्वदिघ्नविनाशश्र्च शश्र्वत् सम्पद्विवर्धनम् ॥ १६ ॥ स्थिरा भवेद् गृहे लक्ष्मीः पुत्रपौत्रविवर्धिनी ।सर्वैश्र्वर्यमिह प्राप्य ह्यन्ते विष्णुपदं लभेत् ॥ १७ ॥ फलं चापि च तीर्थानां यज्ञानां यद् भवेद् ध्रुवम् ।महतां सर्वदानानां श्रीगणेशप्रसादतः ॥ १८ ॥ ॥ इति श्रीब्रह्मवैवर्ते श्रीविष्णुकृतं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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Rishta

Sapne Mein Shadi Ka Rishta Aana : सपने में शादी का रिश्ता आना क्या यह कोई इशारा है या सिर्फ कल्पना ?

Sapne Mein Shadi Ka Rishta Aana : दुनिया भर में सपनों को लेकर कई रहस्यमयी धारणाएं और कहानियां प्रचलित हैं। जब हम गहरी नींद के आगोश में होते हैं, तो हमारा अवचेतन मन (Subconscious mind) एक अलग ही ब्रह्मांड में सफर कर रहा होता है। स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हम नींद में जो भी दृश्य या घटनाएं देखते हैं, उनका हमारे वास्तविक जीवन, हमारी आंतरिक भावनाओं और आने वाले भविष्य से बहुत ही गहरा और सीधा संबंध होता है। नींद में देखे जाने वाले इन्हीं अत्यधिक भावनात्मक और रहस्यमयी सपनों में से एक है—विवाह या रिश्ते की बात तय होते हुए देखना। अक्सर जब किसी इंसान को सोते समय सपने में shadi ka rishta आता हुआ दिखाई देता है, तो सुबह आंख खुलते ही उसके मन में ढेरों सवाल उठने लगते हैं। इंसान यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि क्या सच में उसके घर शहनाई बजने वाली है? या फिर यह भविष्य में आने वाली किसी बड़ी अनहोनी या बदलाव का कोई गुप्त ईश्वरीय इशारा है? आज हम आपको मनोविज्ञान और प्राचीन स्वप्न विज्ञान के आधार पर बहुत ही गहराई से बताएंगे कि इस तरह के सपनों का असली अर्थ क्या होता है। Sapne Mein Shadi Ka Rishta Aana : सपने में शादी का रिश्ता आना क्या यह कोई इशारा है….. मनोविज्ञान और स्वप्न शास्त्र का नजरिया : The Perspective of Psychology and Dream Interpretation स्वप्न शास्त्र के अनुसार, विवाह का प्रस्ताव, सगाई, या शादी की तैयारियों से जुड़े सपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और बड़े बदलावों को दर्शाते हैं। इसे एक बेहद ही शुभ, फलदायी और कीमती सपना माना गया है। यदि आप अपने वर्तमान जीवन में किसी भारी मानसिक तनाव या परेशानी से जूझ रहे हैं, तो सपने में shadi ka rishta आना इस बात का एक बहुत ही मजबूत और स्पष्ट संकेत है कि जल्द ही आपकी सभी परेशानियां जड़ से खत्म होने वाली हैं। मनोवैज्ञानिकों का भी यह मानना है कि ऐसे सपने सिर्फ शादी तक सीमित नहीं होते; बल्कि यह आपके व्यवसाय, ठप्प पड़े व्यापार, डूबते करियर और नौकरी में अचानक होने वाले किसी बड़े धन लाभ का भी एक सीधा इशारा हो सकते हैं। विभिन्न अवस्थाओं में इस सपने का सटीक और अचूक मतलब : The precise and unerring meaning of this dream across various scenarios. 1. अविवाहित (कुंवारे) लोगों के लिए एक वरदान: अगर आपकी उम्र हो चुकी है, आपकी अभी तक शादी नहीं हुई है और आप विवाह के योग्य हैं, तो आपके लिए यह सपना साक्षात खुशियों का खजाना है। एक अविवाहित व्यक्ति द्वारा सपने में shadi ka rishta तय होते हुए देखना यह प्रमाणित करता है Rishta कि उसके जीवन में बहुत ही जल्द मंगल कार्य होने वाले हैं। अगर आप काफी लंबे समय से मन ही मन अपने लिए एक अच्छे और सुयोग्य जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं, तो भगवान ने आपको यह स्पष्ट इशारा दे दिया है कि आपकी यह खोज अब सफलता के साथ पूरी होने वाली है। 2. पहले से शादीशुदा लोगों के लिए चेतावनी: वहीँ दूसरी ओर, सपनों की दुनिया के कुछ कड़े नियम भी होते हैं। यदि कोई व्यक्ति जो पहले से ही विवाहित है और वह ऐसा सपना देखता है, तो स्वप्न शास्त्र इसे एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखता है। Rishta एक शादीशुदा इंसान के सपने में shadi ka rishta आना बिल्कुल भी अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। यह सपना भविष्य में आने वाली किसी बड़ी पारिवारिक उलझन, कलह, या किसी बड़ी परेशानी की ओर इशारा करता है। इसलिए अगर आपको ऐसा सपना आए, तो भविष्य के बड़े फैसले बहुत ही धैर्य और सोच-समझकर लेने चाहिए। 3. बड़े भाई के लिए प्रस्ताव आना: सपनों का सटीक अर्थ इस बात पर भी बहुत निर्भर करता है कि आप सपने में किस व्यक्ति को देख रहे हैं। अगर आप नींद में देखते हैं कि आपके बड़े भाई के लिए shadi ka rishta आया है, तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। हमारे प्राचीन ज्योतिष और स्वप्न शास्त्र इसे एक अशुभ संकेत मानते हैं। यह सपना आपके परिवार में किसी गंभीर परेशानी, अचानक होने वाली अनहोनी या किसी बहुत दुखद समाचार के आने का पूर्व संकेत हो सकता है। 4. किसी करीबी दोस्त के लिए प्रस्ताव आना: इसके बिल्कुल विपरीत, अगर आप सपने में यह दृश्य देखते हैं कि आपके किसी बहुत करीबी दोस्त के लिए shadi ka rishta आ रहा है, तो यह बहुत ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। यह सपना इस बात की पूरी गारंटी देता है कि जल्द ही आपके या आपके उस दोस्त के जीवन में किसी नए और लाभदायक कार्य की शुरुआत होने वाली है, जो भविष्य में मनचाहे परिणाम देगा। सपनों में आपकी भावनाएं क्या इशारा करती हैं : What do your emotions in dreams indicate ? 1. प्रस्ताव को खुशी-खुशी स्वीकार कर लेना: सपनों में आपकी खुद की भावनाएं (Emotions) और प्रतिक्रिया क्या थीं, यह बात सपनों के अर्थ को पूरी तरह बदल सकती है। यदि सपने में कोई प्रस्ताव आता है और आप बिना किसी डर या झिझक के उस shadi ka rishta को सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं, तो मनोविज्ञान कहता है कि आपका आत्मविश्वास अब चरम पर है। आप जीवन की नई जिम्मेदारियों और चुनौतियों को उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार, मजबूत और मानसिक रूप से परिपक्व (Mature) हो चुके हैं। 2. अनजान व्यक्ति द्वारा प्रस्ताव लाना: अगर आपके सपने में कोई ऐसा बिल्कुल अनजान चेहरा आपके लिए shadi ka rishta लेकर आता है जिसे आपने असल जिंदगी में कभी नहीं देखा, तो इसे ब्रह्मांड का एक बहुत ही रहस्यमयी इशारा समझें। इसका सीधा सा मतलब यह है कि आपकी जिंदगी में अचानक कोई ऐसा नया अवसर (Opportunity) या अनदेखा बदलाव आने वाला है जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। 3. रिश्ते से बुरी तरह घबराना या उसका टूट जाना: अगर सपने में प्रस्ताव आते ही आपको भयंकर डर लगने लगे, या आप घबराकर प्रस्ताव को ठुकरा दें, तो इसका मतलब है कि आप अंदर से डरे हुए हैं और नई जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। इसके अलावा, यदि आप देखते हैं कि बात पक्की होने से ठीक

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Vishnu Stotra

Shri Vishnu Stotra : श्री विष्णु स्तोत्र….

Vishnu Stotra: श्री विष्णु स्तोत्र: श्री विष्णु स्तोत्र हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और सम्मानित मंत्रों में से एक है। यह पूजा का एक शक्तिशाली और लोकप्रिय माध्यम है जो परम लक्ष्य, मोक्ष और सांसारिक बंधनों से मुक्ति का मार्ग दिखाता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से मानवीय समस्याओं से छुटकारा मिलता है। भगवान की महिमा अपार है। वे गुणों, ज्ञान और वैराग्य से भरपूर हैं। भगवान की पूजा करने से हम दुनिया के प्रति अपने मोह से मुक्त हो जाते हैं – हमें एक तरह की मुक्ति या आज़ादी का अनुभव होता है। Vishnu Stotra जैसे नदी समुद्र में मिलकर अपनी पहचान खो देती है, वैसे ही जब हम परमात्मा में विलीन हो जाते हैं, तो हम परम स्वरूप को प्राप्त कर लेते हैं। दिव्य रूपों का ध्यान करने और भगवान के पवित्र नाम का उच्चारण करने से हमारी इंद्रियां और क्षमताएं उच्च स्तर पर पहुंच जाती हैं; हम आध्यात्मिकता की राह पर चल पड़ते हैं। श्री विष्णु स्तोत्र के लाभ: भगवान विष्णु ब्रह्मांड के सर्वोच्च देवता हैं और अन्य सभी देवता उन्हीं से उत्पन्न हुए हैं। यदि शुद्ध हृदय से जप किया जाए, तो भगवान विष्णु के 1000 नामों में अपार शक्ति होती है।जो लोग नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करते हैं, उन पर सौभाग्य की कृपा होती है, जिससे उन्हें जीवन में – चाहे वह पेशेवर हो या व्यक्तिगत – अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है। श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करने से विचारों को शांत करने और चिंताओं को कम करने में भी मदद मिलती है। Vishnu Stotra इस मंत्र से मिलने वाली मानसिक शांति व्यक्ति को अपने विचारों को सकारात्मकता की ओर ले जाने में मदद कर सकती है।भक्तों के जीवन से सभी बाधाएं और समस्याएं दूर हो जाती हैं और वे सफलता प्राप्त करने की ओर अग्रसर होते हैं। यह पाठ करने वाले के शरीर और मन के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाता है। श्री विष्णु स्तोत्र उन्हें दुश्मनों के बुरे इरादों से बचाता है।श्री विष्णु स्तोत्र हमारे पापों को धोने में मदद कर सकता है; चाहे वे इस जीवन के हों या पिछले जन्मों के। Vishnu Stotra तब हम ज्ञानी और गुणी व्यक्ति बन जाते हैं जो ईश्वर और धर्म के प्रति समर्पित होते हैं।श्री विष्णु स्तोत्र Vishnu Stotra का पाठ करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह भक्त को परलोक में मोक्ष प्राप्त करने की संभावना के करीब ले जाता है। यह मन को सभी बुरे विचारों से शुद्ध करता है।इससे मन की दृढ़ता, अच्छी याददाश्त, आत्म-सुख (आंतरिक खुशी) और क्रोध, ईर्ष्या व लालच से मुक्ति जैसे लाभ मिलते हैं। Vishnu Stotra यह दुख, शोक और पीड़ा को कम करता है। किसे यह स्तोत्र पढ़ना चाहिए: जो व्यक्ति गहरे दुख में हो और मुश्किलों से बाहर न निकल पा रहा हो, उसे वैदिक नियमों के अनुसार श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। श्री विष्णु स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Vishnu Stotra in Hindi किं नु नाम सहस्त्राणि जपते च पुन: पुन: ।यानि नामानि दिव्यानि तानि चाचक्ष्व केशव: ।। 1 ।। मत्स्यं कूर्मं वराहं च वामनं च जनार्दनम् ।गोविन्दं पुण्डरीकाक्षं माधवं मधुसूदनम् ।। 2 ।। पदनाभं सहस्त्राक्षं वनमालिं हलायुधम् ।गोवर्धनं ऋषीकेशं वैकुण्ठं पुरुषोत्तमम् ।। 3 ।। विश्वरूपं वासुदेवं रामं नारायणं हरिम् ।दामोदरं श्रीधरं च वेदांग गरुड़ध्वजम् ।। 4 ।। अनन्तं कृष्णगोपालं जपतो नास्ति पातकम् ।गवां कोटिप्रदानस्य अश्वमेधशतस्य च ।। 5 ।। कन्यादानसहस्त्राणां फलं प्राप्नोति मानव: ।अमायां वा पौर्णमास्यामेकाद्श्यां तथैव च ।। 6 ।। संध्याकाले स्मरेन्नित्यं प्रात:काले तथैव च ।मध्याहने च जपन्नित्यं सर्वपापै: प्रमुच्यते ।। 7 ।। ।। इति श्री विष्णु स्तोत्र संपूर्णम् ।।

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Laghu Stotram

Shri Laghu Stotram : श्री लघु स्तोत्रम्….

श्री लघु स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Shri Laghu Stotram in Hindi आधारे तरुणार्कबिम्बरूचिरं सोमप्रभं वाग्भवंबीजं मनमथमिंद्रगोपकनिभं ह्रत्पंकजे संस्थितम् ।रन्ध्रे ब्रह्मपदे च शाक्तमपरं चन्द्रप्रभाभासुरं येध्यायंति पदत्रयं तव शिवे ते यांति सौख्यं पदम् ।। 1 ।। ॐ अस्य श्रीलघुस्तोत्रस्य वृद्धसारस्वतऋषि: ।त्रिपुराभैरवी देवता । शार्दूलविक्रीडितं छंद: ।मम सर्वकामफलप्राप्त्र्थे जपे विनियोग: । ॐ ऐन्द्रस्येव शरासनस्य दधतो मध्ये ललाटप्रभांशौक्लीं कान्तिमनुष्य गोरिव शिरस्यातन्वती सर्वत: ।एषाऽसौ त्रिपुरा ह्रदि द्युतिरिवोष्मांशो: सदा संस्थिताछिद्यान्न: सहसा पदैस्त्रिभिरघं ज्योतिर्मयी वांगमयी ।। 1 ।। या मात्रा त्रिपुषोलतातनुलसत्तंतुसिथतिस्पर्धिनीवाग्बीजे प्रथमे स्थिता तव सदा तां मन्महे ते वयम् ।शक्ति कुण्डलिनीति विश्वजननव्यापारबद्धोद्यमांज्ञात्वेत्थं न पुन: स्प्रशंति जननीगर्भेर्भकत्वं नरा: ।। 2 ।। दृष्ट्वा संभ्रमकारि वस्तु सहसा ऐं ऐमिति व्याह्रतंयेनाकूतवशादपीह वरदे बिंदु बिनाप्यक्षरम् ।तस्यापि ध्रुवमेव देवितरसा Laghu Stotram जाते तवानुग्रहे वाच:सूक्तिसुधारसद्रवमुचो निर्यान्ति वक्त्रोदरात् ।। 3 ।। यन्नित्ये तव कामराजमपरं मन्त्राक्षरं निष्कलंतत्सारस्वतमित्यवैति विरल: कश्र्चिद्बुधश्रेचद्भुवि ।आख्यां प्रतिपर्व सत्यतपसो यत्कीर्तयन्तो द्विजा:प्रारम्भे प्रणवास्पदं प्रणयितुं नित्योंच्चरंति स्फुटम् ।। 4 ।। यत्सदयो वचसां प्रव्रत्तिकरणे दृष्टप्रभावंबुधैस्तार्तीयं तदहं नमामि मनसा तद्वीजमिंदुप्रभम् ।अस्त्वौर्वोऽपि सरस्वतीमनुगते जाड्यांबुविच्छित्तयेगोशब्दो गिरिवर्तते सुनियतं योगं विना सिद्धित: ।। 5 ।। एकैकं तव देवि जन्म हयनघं सव्यंजनाव्यंजनंकूटस्थं यदि वा प्रथक क्रमगतं यद्वा स्थितं व्युत्क्रमात् ।यं यं काममपेक्ष्य येन विधिना केनापि वा चिन्तितंजप्तं वा सफलीकरोति तरसा तं तं समस्तं न्रणाम् ।। 6 ।। वामे पुस्तकधारिणीमभयदां साक्षस्त्रजं दक्षिणेभक्तेभ्या वरदानपेशलकरां Laghu Stotram कर्पूरकंदोज्ज्वलाम् ।उज्ज्रम्भाम्बुजपत्रकान्तिनयनां स्त्रिग्धप्रभालोकिनीं येत्वामंब न शीलयन्ति मनसा तेषां कवित्वं कुत: ।। 7 ।। ये त्वां पांडुरपुण्डरीकपटलस्पष्टाभिरामप्रभांसिंचंतीममृतद्रवैरिव शिरो ध्यायंति मूर्धि्न स्थिताम् ।अश्रातं विकटं स्फ्टाक्षरपदा निर्यान्ति वक्त्राम्बुजात्तेषांभारति भारती सुरसरित्कल्लोललोलोर्मय: ।। 8 ।। ये सिंदूरपरागपुंजपिहितां त्वत्तेजसा द्यामिमामुर्वींचापि विलीनयावकरसप्रस्तारमगनामिव ।पश्यन्ति क्षणमप्यनन्यमनसस्तेषामनंगज्वरक्लांतास्त्रस्तकुरंगदारकद्रशो वश्या भवानी ध्रुवम् ।। 9 ।। चंचत्कांचनकुण्डलांगदधरामाबद्धकांचिस्रजं ये त्वांचेतसि तदनतेक्षणमपि Laghu Stotram ध्यायन्ति कृत्वा स्थिराम् ।तेषां वेश्मसु विभ्रमादहरह:कारीभवंत्यश्र्चिरंमाद्यत्कुंजकर्णतालतरला: स्थैर्यं भजंति श्रिय: ।। 10 ।। आर्भक्याशशिखण्डमण्डित जटाजूटां न्रमुंडस्त्रजंबंधूकप्रसवारुणांबरधरां प्रेतासनाध्यासिनीम् ।त्वां ध्यायंति चतुर्भुजां Laghu Stotram त्रिनयनामापीनतुंगस्तनीं मध्येनिम्नवलित्रयांकिततनुं त्वद्रूपकं चिन्तये ।। 11 ।। जातोऽप्यल्पहरिच्छिदे क्षितिभुजां सामान्यमात्रे कुलेनि:शेषावनिचक्रवर्तिपदवीं लब्धवा प्रतापोन्नत: ।यद्विद्याधरवृन्दवन्दितपद: श्रीवत्सराजोभवद्देवित्वंचरणांबुजप्रणतित: सोऽयं प्रसादोदय: ।। 12 ।। चण्डी त्वंचरणाम्बुजार्चनकृते बिल्वीदलोल्लुण्ठनात्त्रुट्यत्कंटककोटिभि: परिचयं येषां न जग्मु: करा: ।ते दंडाकुशचक्रचापकुलिशश्रीवत्सवत्सांकितेर्जायन्तेपृथिवीभुज: कथमिवाम्भोजप्रभै: पाणिभि: ।। 13 ।। विप्रा: क्षोणिभुजो विशस्तदितरे क्षीराज्यमध्वासवैस्त्वांदेवि त्रिपुरे परां परकलां संतर्प्य पूजाविधौ ।यां यां प्रार्थयते मन: स्थिरधियां येषां त एव ध्रुवं तांतां सिद्धि मवापनुवन्ति तरसा विघ्नैरविघ्नीकृता: ।। 14 ।। शब्दानां जननि त्वमत्र भुवने वाग्वादिनोत्युच्यसेत्वत्त केशववासवप्रभृतयोप्याविर्भवन्ति ध्रुवम् ।लीयन्ते खलु यत्र कल्पवरिमे Laghu Stotram ब्रह्मादयस्तेऽप्यमी सात्वं काचिदचिन्त्यरूपगहना शक्ति: परा गीयसे ।। 15 ।। देवानां त्रितयं त्रयीहुतभुजां शक्तित्रयं त्रिस्वरास्त्रैलोक्यंत्रिपदी त्रिपुष्करमथो त्रिर्ब्रह्मकर्णास्त्रय: ।यत्किंचिंज्जगति त्रिधा नियमितं वस्तु त्रिवर्गादिकंतत्सर्व त्रिपुरेति नाम भगवत्यन्वेति ते सत्तवत: ।। 16 ।। लक्ष्मीं राजकुले जयं रणमुखे क्षेमकंरीमध्वनिक्रव्यादद्विपसर्पभाजि शबरीकांतारदुर्गे गिरौ ।भूतप्रेतपिशाचज्रम्भकभयं स्मृत्वा महाभैरवीं व्यामोहेत्रिपुरां तरन्ति विपदस्तारांचतां यत्प्लवे ।। 17 ।। या या कुण्डलिनी क्रिया मधुमती काली कलामालिनीमातंगी विजया जया भगवती देवी शिवा शाम्भवी ।शक्ति शंकरवल्लभा त्रिनयना Laghu Stotram वाग्वादिनी भैरवीह्रींकारी त्रिपुरा परापरमयी माता कुमारीत्यसि ।। 18 ।। आईपल्लवितै: परस्परयुतैर्द्वित्रिक्रमाद्यक्षरै: काद्यै:क्षान्तगतै: स्वरादिभिरथ क्षांतैश्र्च तै: सस्वरै: ।नामानि त्रिपुरे भवन्ति खलु या नित्यं तु गुह्यानि तेतेभ्यो भैरवपत्नि विंशतिसहस्त्रेभ्य: परेभ्यो नम: ।। 19 ।। बोद्धव्या निपुणं बुधै: स्तुतिरियं कृत्वा मनस्तदन्तंभारत्यास्त्रिपुरेत्यनन्यमनसा यत्राद्यवृत्ति: स्फुटम् ।एकद्वित्रिपदक्रमेण कथितस्तत्पादसंख्या-क्षरैर्मन्त्रोद्धारविधिर्विशेषसहित: सत्संप्रदायान्वित: ।। 20 ।। सावद्यं निरवद्यमस्तु यदि वा किंवाऽनया चिन्तयानूनं स्तोत्रमिदं पठिष्यति जनो यस्यास्ति भक्तिस्त्वयि ।संचिन्त्यापि लघुत्वमात्मनि दृढ संजायमानं हठात्वद्भक्त्यामुखरीकृतेन रचितं यत्स्यान्मयाऽपि ध्रुवम् ।। 21 ।। आनन्दोद्भवकम्पघूर्णंनयनं निद्राट्टहासादिकंवेदव्याकरणावगाहकवितातर्कोक्तिमुक्तिप्रदम् ।वश्याकर्षपुरप्रवेशनगरक्षोभादिसिद्धयष्टकं लघ्वाचार्यइदं करोति सततं सौभाग्यमारोग्यताम् ।। 22 ।। गौरि त्र्म्बकपत्नि पार्वति सति त्रैलोक्यगाने शिवेशर्वाणि त्रिपुरे भवानि वरदे रुद्राणि कात्यायनि ।भीमे भैरवि चण्डिसर्ववरदे कालेक्षये शूलिनि त्वत्पादप्रणतं ।। इति श्री लघु स्तोत्रम् संपूर्णम् ।।

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Annapurna Stotram

Sri Laghu Annapurna Stotram : श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र…..

श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Laghu Annapurna Stotram in Hindi भगवति भवरोगात् पीडितं दुष्कृतोत्यात् ।सुतदुहितृकलत्र उपद्रवेणानुयातम् ।विलसदमृतदृष्ट्या वीक्ष विभ्रान्तचित्तम् ।सकलभुवनमातस्त्राहि माम् ॐ नमस्ते ॥ १ ॥ माहेश्र्वरीमाश्रितकल्पवल्लीमहंभवोच्छेदकरीं भवानीम् ।क्षुधार्तजायातनयाद्दुपेतस्त्वान्नपूर्णे शरणं प्रपद्दे ॥ २ ॥ दारिद्र्यदावानलदह्यमानम्,पाह्यन्नपूर्णे गिरिराजकन्ये ।कृपाम्बुधौ मज्जय मां त्वदीये,त्वपादपद्मार्पितचित्तवृतिम् ॥ ३ ॥ दूत्थन्नपूर्णास्तुतिरत्नमेतत्,श्लोकत्रयं यः पठतीह भक्त्या ।तस्मै ददात्यन्नसमृद्धिमम्बा,श्रियं च विद्दां च यशश्र्च मुक्तिम् ॥ ४ ॥ ॥ इति श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र संपूर्णम् ॥ श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र विशेषताए: श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र के साथ-साथ यदि अन्नपूर्णा आरती का पाठ किया जाए तो, इस स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, Annapurna Stotram यह अष्टकम शीघ्र ही फल देने लग जाते है| यदि साधक इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है Annapurna Stotram साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है| अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है| यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस स्तोत्र का पाठ करे| श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र के पाठ के साथ साथ अन्नपूर्णा चालीसा  और अन्नपूर्णा अष्टकम का भी पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है | Annapurna Stotram और नियमित रुप से करने से रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते है | और साधक के जीवन में रोग, भय, दोष, शोक, बुराइया, डर दूर हो जाते है साथ ही माँ अन्नपूर्ण की पूजा करने से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि प्राप्त होती है। याद रखे इस श्री लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र पाठ को करने से पूर्व अपना पवित्रता बनाये रखे| इससे मनुष्य को जीवन में बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है|

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