Narayana Stotram

Sri Lakshmi Narayana Stotram : श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम्….

श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Sri Lakshmi Narayana Stotram in Hindi ध्यानम् – चक्रं विद्या वर घट गदा दर्पणम् पद्मयुग्मंदोर्भिर्बिभ्रत्सुरुचिरतनुं मेघविद्युन्निभाभम् ।गाढोत्कण्ठं विवशमनिशं पुण्डरीकाक्षलक्ष्म्योरेकीभूतं वपुरवतु वः पीतकौशेयकान्तम् ॥ १ ॥ शंखचक्रगदापद्मकुंभाऽऽदर्शाब्जपुस्तकम् ।बिभ्रतं मेघचपलवर्णं लक्ष्मीहरिं भजे ॥ २ ॥ विद्युत्प्रभाश्लिष्टघनोपमानौशुद्धाशयेबिंबितसुप्रकाशौ ।चित्ते चिदाभौ कलयामि लक्ष्मी-नारायणौ सत्त्वगुणप्रधानौ ॥ ३ ॥ लोकोद्भवस्थेमलयेश्वराभ्यांशोकोरुदीनस्थितिनाशकाभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ४ ॥ सम्पत्सुखानन्दविधायकाभ्यांभक्तावनाऽनारतदीक्षिताभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां Narayana Stotram नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ५ ॥ दृष्ट्वोपकारे गुरुतां च पञ्च-विंशावतारान् सरसं दधत्भ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां Narayana Stotram नतिरस्तु लक्ष्मीनारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ६ ॥ क्षीरांबुराश्यादिविराट्भवाभ्यांनारं सदा पालयितुं पराभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ७ ॥ दारिद्र्यदुःखस्थितिदारकाभ्यांदयैवदूरीकृतदुर्गतिभ्याम्नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ८ ॥ भक्तव्रजाघौघविदारकाभ्यांस्वीयाशयोद्धूतरजस्तमोभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ९ ॥ रक्तोत्पलाभ्राभवपुर्धराभ्यांपद्मारिशंखाब्जगदाधराभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ १० ॥ अङ्घ्रिद्वयाभ्यर्चककल्पकाभ्यांमोक्षप्रदप्राक्तनदंपतीभ्याम् ।नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ११ ॥ इदं तु यः पठेत् स्तोत्रं लक्ष्मीनारयणाष्टकम् ।ऐहिकामुष्मिकसुखं भुक्त्वा स लभतेऽमृतम् ॥ १२ ॥ ।। इति श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् संपूर्णम् ।।

Sri Lakshmi Narayana Stotram : श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम्…. Read More »

Chaturthi

Krishnapingal Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time : कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सभी कष्टों से मुक्ति का अचूक उपाय…..

Krishnapingal Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time: सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में भगवान श्री गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। किसी भी शुभ कार्य, अनुष्ठान या नए व्यापार की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा अनिवार्य मानी जाती है। वैदिक पंचांग की सटीक ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, हर महीने में दो Chaturthi आती हैं; एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। इनमें से शुक्ल पक्ष की तिथि को विनायक चतुर्थी कहा जाता है, जबकि हर महीने कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली Chaturthi को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। संकष्टी का शाब्दिक अर्थ ही होता है ‘संकटों को हरने वाली’। Chaturthi इस पवित्र दिन जो भी भक्त पूरे सच्चे मन और गहरी आस्था के साथ भगवान गणेश का उपवास रखता है, उसके जीवन की हर बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और भयंकर से भयंकर समस्याएं हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं। Krishnapingal Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time : कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी तिथि, शुभ मुहूर्त….. कृष्णपिङ्गल संकष्टी का अत्यंत गहरा महत्व : The profound significance of Krishnapingala Sankashti. वर्ष 2026 में आषाढ़ माह (पूर्णिमांत हिंदी पंचांग के अनुसार) या ज्येष्ठ माह (अमावस्यांत पंचांग के अनुसार) में पड़ने वाली यह कृष्णपिङ्गल संकष्टी Chaturthi आपके सभी रुके हुए और बिगड़े कार्यों को पूरा करने का एक अद्भुत आध्यात्मिक अवसर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने वाले इंसान को अपार धन, वैभव, उत्तम स्वास्थ्य और असीम यश की प्राप्ति होती है। इस व्रत को पूरे भारत में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। उदाहरण के लिए, दक्षिण भारत के कुछ राज्यों जैसे तमिलनाडु में इस Chaturthi को ‘गणेश संकटहरा’ या ‘संकटहरा चतुर्थी’ के भव्य नाम से भी पुकारा जाता है। Chaturthi वहीं दक्षिण भारत के मलयालम कैलेंडर के अनुसार यह व्रत एदवा (Edava) या मिधुना (Midhuna) महीने में आता है, जबकि बंगाली कैलेंडर के अनुसार यह आषाढ़ महीने में ही मनाया जाता है। यह एक ऐसा पावन दिन है जब साक्षात भगवान गणेश पृथ्वी पर अपने भक्तों की हर सच्ची मनोकामना को पूर्ण करते हैं और उनके परिवार में अगाध सुख-शांति का स्थायी निवास बनाए रखते हैं। सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त 2026 (Dates & Timings) सनातन धर्म में किसी भी वैदिक उपवास या अनुष्ठान का पूर्ण और अचूक फल तभी प्राप्त होता है जब वह एकदम सही तिथि और शुभ मुहूर्त में किया जाए। साल 2026 में यह पवित्र Chaturthi 3 जुलाई, दिन शुक्रवार को पूरे भारतवर्ष में अत्यंत अपार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। पंचांग की एकदम सटीक गणनाओं के अनुसार तिथियों का विवरण इस प्रकार है: व्रत के लिए Chaturthi तिथि का विधिवत आरंभ 3 जुलाई 2026 को सुबह 11:20 बजे से होगा। इस पावन तिथि का पूर्ण समापन अगले दिन यानी 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:39 बजे होगा। चूंकि यह एक ऐसा विशेष उपवास है जो हमेशा रात के चंद्रोदय (चांद निकलने के समय) के आधार पर तय किया जाता है, इसलिए जिस रात चंद्रमा के दर्शन चतुर्थी तिथि के दौरान होते हैं, उसी दिन यह व्रत मुख्य रूप से रखा जाता है। 3 जुलाई की रात को चंद्रोदय का शुभ समय रात 09:48 बजे (09:48 PM) रहेगा। प्रातः काल सूर्योदय से शुरू होने वाला यह महान और जाग्रत व्रत रात को चंद्र दर्शन करने और उन्हें पवित्र जल का अर्घ्य देने के बाद ही पूरी तरह से संपन्न माना जाता है। भगवान का विशेष स्वरूप और महा पीठ की पूजा : The Special Form of the Deity and Worship at the Maha Peetha पूरे साल में आने वाली हर संकष्टी का अपना एक अलग तांत्रिक महत्व और भगवान गणेश का एक बहुत ही विशेष स्वरूप होता है। इस शुभ अवसर पर कृष्णपिङ्गल Chaturthi के दिन भगवान गणेश के अत्यंत ही तेजस्वी ‘कृष्ण पिङ्गल महा गणपति’ स्वरूप की आराधना पूरे विधि-विधान से की जाती है। इसके साथ ही, पूजा के दौरान जिस परम पवित्र पीठ का विशेष रूप से आह्वान किया जाता है, उसका नाम ‘श्री शक्ति गणपति पीठ’ (Sri Shakti Ganapathi Peetha) है। मान्यता है कि इस सिद्ध पीठ की पूजा करने से इंसान के पिछले कई जन्मों के भारी से भारी पाप नष्ट हो जाते हैं और वह जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त करता है। इस दिन मंत्रों के उच्चारण के साथ अभिषेक (Abhishekam) करना पूजा का सबसे मुख्य और अनिवार्य अनुष्ठान माना जाता है। नारद पुराण के अनुसार व्रत कथा की महिमा : Glory of Vrat Katha according to Narad Purana नारद पुराण में बहुत ही स्पष्ट रूप से बताया गया है कि संकष्टी के दिन व्रती को पूरे दिन का निर्जल या फलाहार उपवास रखना चाहिए और शाम के समय व्रत कथा को अनिवार्य रूप से पढ़ना या सुनना चाहिए। अपने घर के पूजा कक्ष में इस विशेष पूजा को संपन्न करने से हर प्रकार के भयंकर नकारात्मक प्रभाव और बुरी शक्तियों का हमेशा के लिए नाश हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि प्रत्येक महीने की संकष्टी की अपनी एक अलग और बेहद रहस्यमयी पौराणिक कथा होती है, जिसे सुने बिना इंसान का व्रत बिल्कुल अधूरा माना जाता है। अचूक और सिद्ध पूजा विधि (Puja Vidhi) यदि आप अपने व्रत का पूरा और चमत्कारी फल पाना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताई गई इस पूजा विधि का कड़ाई से पालन करें…. प्रातः काल की दिनचर्या: इस Chaturthi पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठकर सबसे पहले शुद्ध जल से स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन ही मन भगवान का ध्यान करते हुए अपने व्रत का दृढ़ संकल्प लें। गणेश जी को प्रिय वस्तुएं: घर के स्वच्छ पूजा स्थल पर भगवान गणेश की सुंदर मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें उनका सबसे प्रिय और मीठा भोग—मोदक, लड्डू और ताजी हरी दूर्वा घास (Durva grass) अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ अर्पित करें। संध्या काल की पूजा: शाम के समय चंद्रोदय से ठीक पहले एक बार फिर से पूजा की पूरी तैयारी करें। शाम की विशेष पूजा में भगवान गणेश जी की प्रतिमा के ठीक बाजू में माता दुर्गा जी की भी मूर्ति या फोटो रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है; इस दिन उनकी संयुक्त

Krishnapingal Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time : कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सभी कष्टों से मुक्ति का अचूक उपाय….. Read More »

Rama Stotram

Shri Rama Stotram : श्री राम स्तोत्र….

श्री राम स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Rama Stotram in Hindi आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम् ।लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥ १ ॥ आर्तानामार्तिहन्तारं Shri Rama Stotram भीतानां भीतिनाशनम् ।द्विषतां कालदण्डं तं रामचन्द्रं नमाम्यहम् ॥ २ ॥ नमः कोदण्डहस्ताय Shri Rama Stotram सन्धीकृतशराय च ।खण्डिताखिलदैत्याय रामायाऽऽपन्निवारिणे ॥ ३ ॥ रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥ ४ ॥ अग्रतः पृष्ठतश्चैव Shri Rama Stotram पार्श्वतश्च महाबलौ ।आकर्णपूर्णधन्वानौ रक्षेतां रामलक्ष्मणौ ॥ ५ ॥ सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।गच्छन् ममाग्रतो नित्यं रामः पातु सलक्ष्मणः ॥ ६ ॥ अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात् ।नश्यन्ति सकला रोगास्सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥ ७ ॥ सत्यं सत्यं पुनस्सत्यमुद्धृत्य भुजमुच्यते ।वेदाच्छास्त्रं परं नास्ति न दैवं केशवात् परम् ॥ ८ ॥ शरीरे जर्जरीभूते व्याधिग्रस्ते कलेवरे ।औषधं जाह्नवीतोयं वैद्यो नारायणो हरिः ॥ ९ ॥ आलोड्य सर्वशास्त्राणि विचार्य च पुनः पुनः ।इदमेकं सुनिष्पन्नं ध्येयो नारायणो हरिः ॥ १० ॥ कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् ।करोमि यद्यत् सकलं परस्मै Shri Rama Stotram नारायणायेति समर्पयामि ॥ ११ ॥ यदक्षरपदभ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत् ।तत्सर्वं क्षम्यतां देव नारायण नमोऽस्तु ते ॥ १२ ॥ विसर्गबिन्दुमात्राणि Shri Rama Stotram पदपादाक्षराणि च ।न्यूनानि चातिरिक्तानि क्षमस्व पुरुषोत्तम ॥ १३ ॥ ॥ इति श्री राम स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥ श्री राम स्तोत्र विशेषताएँ: श्री राम स्तोत्र के साथ-साथ यदि राम आरती या राम चालीसा का पाठ किया जाए तो, इस स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, यह स्तोत्र शीघ्र ही फल देने लग जाते है| यदि साधक इस स्तोत्र  का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है| अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है| यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस स्तोत्र का पाठ करे| श्री राम स्तोत्र के पाठ के साथ साथ श्री राम स्तुति का भी पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है| और नियमित रुप से करने से रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते है | और साधक के जीवन में रोग, भय, दोष, शोक, बुराइया, डर दूर हो जाते है साथ ही राम जी की पूजा करने से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि प्राप्त होती है। याद रखे इस श्री राम स्तोत्र पाठ को करने से पूर्व अपना पवित्रता बनाये रखे| इससे मनुष्य को जीवन में बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है|

Shri Rama Stotram : श्री राम स्तोत्र…. Read More »

prayata Stotram

Sri Rama Bhujanga-prayata Stotram : श्रीराम भुजङ्ग प्रयात स्तोत्रम्………

श्रीराम भुजङ्ग प्रयात स्तोत्रम् हिंदी पाठ: Sri Rama Bhujanga-prayata Stotram in Hindi विशुद्धं परं सच्चिदानंदरूपंगुणाधारमाधारहीनं वरेण्यम् ।महांतं विभांतं गुहांतं गुणांतंसुखांतं स्वयं धाम रामं प्रपद्ये ॥ 1 ॥ शिवं नित्यमेकं विभुं तारकाख्यंसुखाकारमाकारशून्यं सुमान्यम् ।महेशं कलेशं सुरेशं परेशंनरेशं निरीशं महीशं प्रपद्ये ॥ 2 ॥ यदावर्णयत्कर्णमूलेऽंतकालेशिवो राम रामेति रामेति काश्याम् ।तदेकं परं तारकब्रह्मरूपंभजेऽहं भजेऽहं भजेऽहं भजेऽहम् ॥ 3 ॥ महारत्नपीठे शुभे कल्पमूलेसुखासीनमादित्यकोटिप्रकाशम् ।सदा जानकीलक्ष्मणोपेतमेकंसदा रामचंद्रं भजेऽहं भजेऽहम् ॥ 4 ॥ क्वणद्रत्नमंजीरपादारविंदंलसन्मेखलाचारुपीतांबराढ्यम् ।महारत्नहारोल्लसत्कौस्तुभांगंनदच्चंचरीमंजरीलोलमालम् ॥ 5 ॥ लसच्चंद्रिकास्मेरशोणाधराभंसमुद्यत्पतंगेंदुकोटिप्रकाशम् ।नमद्ब्रह्मरुद्रादिकोटीररत्नस्फुरत्कांतिनीराजनाराधितांघ्रिम् ॥ 6 ॥ पुरः प्रांजलीनांजनेयादिभक्तान्स्वचिन्मुद्रया भद्रया prayata Stotram बोधयंतम् ।भजेऽहं भजेऽहं सदा रामचंद्रंत्वदन्यं न मन्ये न मन्ये न मन्ये ॥ 7 ॥ यदा मत्समीपं कृतांतः समेत्यप्रचंडप्रकोपैर्भटैर्भीषयेन्माम् ।तदाविष्करोषि त्वदीयं स्वरूपंसदापत्प्रणाशं सकोदंडबाणम् ॥ 8 ॥ निजे मानसे मंदिरे सन्निधेहिप्रसीद प्रसीद prayata Stotram प्रभो रामचंद्र ।ससौमित्रिणा कैकयीनंदनेनस्वशक्त्यानुभक्त्या च संसेव्यमान ॥ 9 ॥ स्वभक्ताग्रगण्यैः कपीशैर्महीशै–रनीकैरनेकैश्च राम प्रसीद ।नमस्ते नमोऽस्त्वीश राम प्रसीदप्रशाधि प्रशाधि प्रकाशं प्रभो माम् ॥ 10 ॥ त्वमेवासि दैवं परं मे यदेकंसुचैतन्यमेतत्त्वदन्यं न मन्ये ।यतोऽभूदमेयं वियद्वायुतेजोजलोर्व्यादिकार्यं चरं चाचरं च ॥ 11 ॥ नमः सच्चिदानंदरूपाय तस्मैनमो देवदेवाय prayata Stotram रामाय तुभ्यम् ।नमो जानकीजीवितेशाय तुभ्यंनमः पुंडरीकायताक्षाय तुभ्यम् ॥ 12 ॥ नमो भक्तियुक्तानुरक्ताय तुभ्यंनमः पुण्यपुंजैकलभ्याय तुभ्यम् ।नमो वेदवेद्याय चाद्याय पुंसेनमः सुंदरायेंदिरावल्लभाय ॥ 13 ॥ नमो विश्वकर्त्रे नमो विश्वहर्त्रेनमो विश्वभोक्त्रे नमो विश्वमात्रे ।नमो विश्वनेत्रे नमो विश्वजेत्रेनमो विश्वपित्रे नमो विश्वमात्रे ॥ 14 ॥ नमस्ते नमस्ते समस्तप्रपंच–प्रभोगप्रयोगप्रमाणप्रवीण ।मदीयं prayata Stotram मनस्त्वत्पदद्वंद्वसेवांविधातुं प्रवृत्तं सुचैतन्यसिद्ध्यै ॥ 15 ॥ शिलापि त्वदंघ्रिक्षमासंगिरेणुप्रसादाद्धि चैतन्यमाधत्त राम ।नरस्त्वत्पदद्वंद्वसेवाविधाना–त्सुचैतन्यमेतीति किं चित्रमत्र ॥ 16 ॥ पवित्रं चरित्रं विचित्रं त्वदीयंनरा ये स्मरंत्यन्वहं रामचंद्र ।भवंतं भवांतं भरंतं भजंतोलभंते कृतांतं न पश्यंत्यतोऽंते ॥ 17 ॥ स पुण्यः स गण्यः शरण्यो ममायंनरो वेद यो देवचूडामणिं त्वाम् ।सदाकारमेकं चिदानंदरूपंमनोवागगम्यं परं धाम राम ॥ 18 ॥ प्रचंडप्रतापप्रभावाभिभूत–प्रभूतारिवीर प्रभो रामचंद्र ।बलं ते कथं वर्ण्यतेऽतीव बाल्येयतोऽखंडि चंडीशकोदंडदंडम् ॥ 19 ॥ दशग्रीवमुग्रं सपुत्रं समित्रंसरिद्दुर्गमध्यस्थरक्षोगणेशम् ।भवंतं विना राम वीरो नरो वासुरो वाऽमरो वा जयेत्कस्त्रिलोक्याम् ॥ 20 ॥ सदा राम रामेति रामामृतं तेसदाराममानंदनिष्यंदकंदम् ।पिबंतं नमंतं सुदंतं हसंतंहनूमंतमंतर्भजे तं नितांतम् ॥ 21 ॥ सदा राम रामेति रामामृतं तेसदाराममानंदनिष्यंदकंदम् ।पिबन्नन्वहं नन्वहं नैव मृत्यो–र्बिभेमि प्रसादादसादात्तवैव ॥ 22 ॥ असीतासमेतैरकोदंडभूषै–रसौमित्रिवंद्यैरचंडप्रतापैः ।अलंकेशकालैरसुग्रीवमित्रै–ररामाभिधेयैरलं दैवतैर्नः ॥ 23 ॥ अवीरासनस्थैरचिन्मुद्रिकाढ्यै–रभक्तांजनेयादितत्त्वप्रकाशैः ।अमंदारमूलैरमंदारमालै–ररामाभिधेयैरलं दैवतैर्नः ॥ 24 ॥ असिंधुप्रकोपैरवंद्यप्रतापै–रबंधुप्रयाणैरमंदस्मिताढ्यैः ।अदंडप्रवासैरखंडप्रबोधै–ररामाभिधेयैरलं दैवतैर्नः ॥ 25 ॥ हरे राम सीतापते रावणारेखरारे मुरारेऽसुरारे परेति ।लपंतं नयंतं सदाकालमेवंसमालोकयालोकयाशेषबंधो ॥ 26 ॥ नमस्ते सुमित्रासुपुत्राभिवंद्यनमस्ते सदा कैकयीनंदनेड्य ।नमस्ते सदा वानराधीशवंद्यनमस्ते नमस्ते सदा रामचंद्र ॥ 27 ॥ प्रसीद प्रसीद प्रचंडप्रतापप्रसीद प्रसीद प्रचंडारिकाल ।प्रसीद प्रसीद प्रपन्नानुकंपिन्प्रसीद प्रसीद प्रभो रामचंद्र ॥ 28 ॥ भुजंगप्रयातं परं वेदसारंमुदा रामचंद्रस्य भक्त्या च नित्यम् ।पठन्संततं चिंतयन्स्वांतरंगेस एव स्वयं रामचंद्रः स धन्यः ॥ 29 ॥ ॥ इति श्रीराम भुजङ्ग प्रयात स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

Sri Rama Bhujanga-prayata Stotram : श्रीराम भुजङ्ग प्रयात स्तोत्रम्……… Read More »

Mangalashasanam Stotra

Shri Ram Mangalashasanam Stotra : श्री राम मंगलाशासनम स्तोत्र….

श्री राम मंगलाशासनम स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Ram Mangalashasanam Stotra in Hindi मंगलं कौशलेन्द्राय महनीयगुणाब्धय ।चक्रवर्तितनूजाय सार्वभौमाय मंगलम् ।। 1 ।। वेदवेदान्तवेदाय मेघश्यामलमूर्तये ।पुंसां मोहनरूपाय पुण्यश्लोकाय मंगलम् ।। 2 ।। विश्वामित्रान्तरंगाय मिथिलानगरीपते: ।भाग्यानां परिपाकाय भव्यरूपाय मंगलम् ।। 3 ।। पितृभक्ताय सततं भ्रातृभि: सह सीतया ।नन्दिताखिललोकाय रामभद्राय मंगलम् ।। 4 ।। त्यक्तसाकेतवासाय Shri Ram Mangalashasanam Stotra चित्रकूटविहारिणे ।सेव्याय सर्वयमिनां धीरोदयाय मंगलम् ।। 5 ।। सौमित्रिणा च जानक्या चापबाणासिधारिणे ।संसेव्याय सदा भक्त्या स्वामिने मम मंगलम् ।। 6 ।। दण्डकारण्यवासाय Shri Ram Mangalashasanam Stotra खरदूषणशत्रवे ।गृधृराजाय भक्ताय मुक्तिदायास्तु मंगलम् ।। 7 ।। सादरं शबरीदत्तफलमूलाभिलाषिणे ।सौलभ्यपरिपूर्णाय सत्त्वोद्रिक्ताय मंगलम् ।। 8 ।। हनुमत्समवेताय हरीशाभीष्टदायिने ।बालिप्रमथनायास्तु महाधीराय मंगलम् ।। 9 ।। श्रीमते रघुवीराय सेतूल्लंघितसिन्धवे ।जितराक्षसराजाय रणधीराय मंगलम् ।। 10 ।। विभीषणकृते प्रीत्या लंकाभीष्टप्रदायिने ।सर्वलोकशरण्याय श्रीराघवाय मंगलम् ।। 11 ।। आसाध नगरीं दिव्यामभिषिक्ताय सीतया ।राजाधिराजराजाय रामभद्राय मंगलम् ।। 12 ।। ब्रह्मादिदेवसेव्याय ब्रह्मण्याय महात्मने ।जानकीप्राणनाथाय रघुनाथाय मंगलम् ।। 13 ।। श्रीसौम्यजामातृमुने: कृपयास्मानुपेयुषे ।महते मम नाथाय रघुनाथाय मंगलम् ।। 14 ।। मंगलाशासनपरैर्मदाचार्यपुरोगमै: सर्वैश्च ।पूर्वैराचार्यै: सत्कृतायास्तु मंगलम् ।। 15 ।। रम्यजामातृमुनिना मंगलाशासनं कृतम् ।त्रैलोक्याधिपति: श्रीमान् करोतु मंगलं सदा ।। 16 ।। ।। इति श्री राम मंगलाशासनम स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

Shri Ram Mangalashasanam Stotra : श्री राम मंगलाशासनम स्तोत्र…. Read More »

Matangi Stotra

Shri Raj Matangi Stotra : श्री राज मातंगी स्तोत्र….

श्री राज मातंगी स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Raj Matangi Stotra in Hindi मातङ्गीं मधुपानमत्तनयनां मातङ्ग सञ्चारिणींकुम्भीकुम्भविवृत्तपीवरकुचां कुम्भादिपात्राञ्चिताम् ।ध्यायेऽहं मधुमारणैकसहजां ध्यातुस्सुपुत्रप्रदां ।शर्वाणीं सुरसिद्धसाध्यवनिता संसेविता पादुकाम् ॥ १ ॥ मातङ्गी महिषादिराक्षसकृतध्वान्तैकदीपो मणिःमन्वादिस्तुत मन्त्रराजविलसत्सद्भक्त चिन्तामणिः ।श्रीमत्कौलिकदानहास्यरचना चातुर्य राकामणिःदेवित्वं हृदये वसाद्यमहिमे मद्भाग्य रक्षामणिः ॥ २ ॥ जयदेवि विशालाक्षि जय सर्वेश्वरि जय ।जयाञ्जनगिरिप्रख्ये महादेव प्रियङ्करि ॥ ३ ॥ महाविश्वेश दयिते जय ब्रह्मादि पूजिते ।पुष्पाञ्जलिं प्रदास्यामि गृहाण कुलनायिके ॥ ४ ॥ जयमातर्महाकृष्णे जय नीलोत्पलप्रभे ।मनोहारि नमस्तेऽस्तु नमस्तुभ्यं वशङ्करि ॥ ५ ॥ जय सौभाग्यदे नॄणां Matangi Stotra लोकमोहिनि ते नमः ।सर्वैश्वर्यप्रदे पुंसां सर्वविद्याप्रदे नमः ॥ ६ ॥ सर्वापदां नाशकरीं सर्वदारिद्र्यनाशिनीम् ।नमो मातङ्गतनये नमश्चाण्डालि कामदे ॥ ७ ॥ नीलाम्बरे नमस्तुभ्यं नीलालकसमन्विते ।नमस्तुभ्यं महावाणि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ८ ॥ महामातङ्गि पादाब्जं तव Matangi Stotra नित्यं नमाम्यहम् ।एतदुक्तं महादेव्या मातङ्गयाः स्तोत्रमुत्तमम् ॥ ९ ॥ सर्वकामप्रदं नित्यं यः पठेन्मानवोत्तमः ।विमुक्तस्सकलैः पापैः समग्रं पुण्यमश्नुते ॥ १० ॥ राजानो दासतां यान्ति नार्यो दासीत्वमाप्नुयुः ।दासीभूतं जगत्सर्वं शीघ्रं तस्य भवेद् ध्रुवम् ॥ ११ ॥ महाकवीभवेद्वाग्भिः साक्षाद् वागीश्वरो भवेत् ।अचलां श्रियमाप्नोति अणिमाद्यष्टकं लभेत् ॥ १२ ॥ लभेन्मनोरथान् सर्वान् त्रैलोक्ये नापि दुर्लभान् ।अन्ते शिवत्वमाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥ १३ ॥ ॥ इति श्री राज मातंगी स्तोत्र सपूर्णम् ॥

Shri Raj Matangi Stotra : श्री राज मातंगी स्तोत्र…. Read More »

Radhakrishna Stotram

Shri Radhakrishna Stotram : श्री राधा कृष्ण स्तोत्र….

श्री राधा कृष्ण स्तोत्र हिंदी पाठ: Shri Radhakrishna Stotram in Hindi वन्दे नवघनश्यामं पीतकौशेयवाससम् ।सानन्दं सुन्दरं शुद्धं श्रीकृष्णं प्रकृतेः परम् ॥ १ ॥ राधेशं राधिकाप्राणवल्लभं वल्लवीसुतम् ।राधासेवितपादाब्जं राधावक्षस्थलस्थितम् ॥ २ ॥ राधानुगं राधिकेष्टं राधापहृतमानसम् ।राधाधारं भवाधारं सर्वाधारं नमामि तम् ॥ ३ ॥ राधाहृत्पद्ममध्ये च Radhakrishna Stotram वसन्तं सन्ततं शुभम् ।राधासहचरं शश्वत् राधाज्ञापरिपालकम् ॥ ४ ॥ ध्यायन्ते योगिनो योगान् सिद्धाः सिद्धेश्वराश्च यम् ।तं ध्यायेत् सततं शुद्धं भगवन्तं सनातनम् ॥ ५ ॥ निर्लिप्तं च निरीहं च परमात्मानमीश्वरम् ।नित्यं सत्यं च परमं भगवन्तं सनातनम् ॥ ६ ॥ यः सृष्टेरादिभूतं च सर्वबीजं परात्परम् ।योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ॥ ७ ॥ बीजं नानावताराणां सर्वकारणकारणम् ।वेदवेद्यं वेदबीजं वेदकारणकारणम् ॥ ८ ॥ योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ।गन्धर्वेण कृतं स्तोत्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।इहैव जीवन्मुक्तश्च परं याति परां गतिम् ॥ ९ ॥ हरिभक्तिं हरेर्दास्यं गोलोकं च निरामयम् ।पार्षदप्रवरत्वं च लभते नात्र संशयः ॥ १० ॥ ॥ इति श्री राधा कृष्ण स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

Shri Radhakrishna Stotram : श्री राधा कृष्ण स्तोत्र…. Read More »

Vat Purnima 2026

Vat Purnima 2026 Date And Time:वट पूर्णिमा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, अचूक पूजा विधि और व्रत कथा….

Vat Purnima 2026 Mein Kab Hai : सनातन धर्म और हमारी भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की अपार खुशहाली के लिए कई तरह के व्रत रखे जाते हैं। इन्हीं तमाम सुहाग व्रतों में से एक सबसे प्रमुख, शक्तिशाली और सौभाग्यदायी व्रत वट पूर्णिमा का माना जाता है। हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को यह महान व्रत पूरे विधि-विधान और गहरी आस्था के साथ रखा जाता है। इस साल Vat Purnima 2026 का पर्व महिलाओं के लिए एक बहुत ही विशेष आध्यात्मिक अवसर लेकर आ रहा है। यह पावन पर्व सदियों से हिंदू विवाहित स्त्रियों के लिए अटूट प्रेम, त्याग और अपने जीवनसाथी के प्रति समर्पण का सबसे बड़ा प्रतीक बना हुआ है। अगर आप भी Vat Purnima 2026 की तैयारी कर रही हैं और अपने दांपत्य जीवन को सुख-समृद्धि से भरना चाहती हैं, तो पूजा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और इसके पीछे छिपे गहरे धार्मिक महत्व को जान लेना आपके लिए बहुत जरूरी है। आज के इस विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख में हम आपको इस व्रत से जुड़ी हर एक छोटी-बड़ी जानकारी बेहद सरल शब्दों में देंगे, ताकि आपकी पूजा बिना किसी विघ्न के सफलतापूर्वक संपन्न हो सके। Vat Purnima 2026 की सटीक तिथि और एकदम शुभ मुहूर्त…. किसी भी व्रत का पूर्ण फल इंसान को तभी मिलता है जब वह सही तिथि और सटीक मुहूर्त पर किया जाए। पंचांग की एकदम सटीक गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 29 जून 2026 की सुबह 03 बजकर 07 मिनट पर हो जाएगा। वहीं, इस अत्यंत पवित्र पूर्णिमा तिथि का पूर्ण समापन अगले दिन यानी 30 जून को सुबह 05 बजकर 27 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में ‘उदया तिथि’ (सूर्य उदय होने के समय जो तिथि मौजूद होती है) का सर्वाधिक महत्व होता है। इसलिए उदया तिथि के आधार पर Vat Purnima 2026 का यह पावन व्रत 29 जून, दिन सोमवार को ही पूरे हर्षोल्लास के साथ रखा जाएगा। इस बार का यह व्रत इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि पंचांग के मुताबिक इस दिन दो बहुत ही दुर्लभ और शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस बार Vat Purnima 2026 के दिन सबसे पहले ‘शुक्ल योग’ बन रहा है, जो सुबह से शुरू होकर दोपहर 2 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। इसके ठीक बाद ‘ब्रह्म योग’ की शुरुआत हो जाएगी। धार्मिक दृष्टि से इन दोनों ही शुभ योगों में पूजा-अर्चना करना महिलाओं के लिए अत्यंत फलदायी साबित होगा और उनकी हर मनोकामना शीघ्र पूरी होगी। वट सावित्री और वट पूर्णिमा के बीच का मुख्य अंतर और मलमास का प्रभाव : Main difference between Vat Savitri and Vat Purnima and effect of Malamas अक्सर कई महिलाओं के मन में यह सवाल आता है कि वट सावित्री और Vat Purnima 2026 में क्या मुख्य अंतर है। Vat Purnima 2026 दरअसल, इन दोनों ही व्रतों का मुख्य उद्देश्य और इनका धार्मिक महत्व बिल्कुल एक समान होता है, फर्क केवल इनकी तिथियों का है। वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है, जबकि वट पूर्णिमा का व्रत ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर किया जाता है। आमतौर पर इन दोनों व्रतों के बीच केवल 15 दिनों का ही अंतर होता है, लेकिन इस साल पंचांग के अनुसार 17 मई से अधिक मास (मलमास) लग गया था। इसी अधिक मास के कारण इस वर्ष वट सावित्री और वट पूर्णिमा व्रत के बीच लगभग डेढ़ महीने का लंबा अंतर आ गया है। भारत के विभिन्न राज्यों में अपनी-अपनी क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार इसे मनाया जाता है; विशेष रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में वट पूर्णिमा व्रत का चलन बहुत अधिक है। वट (बरगद) वृक्ष की ही पूजा क्यों की जाती है ?: Why is only the Banyan tree worshipped इस दिन बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) की पूजा का बहुत गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य है। हिंदू धर्म में बरगद के पेड़ को सबसे पवित्र और अत्यंत दीर्घायु (लंबी उम्र वाला) वृक्ष माना गया है। पुराणों के अनुसार, वट वृक्ष में त्रिदेवों का साक्षात वास होता है; इसकी जड़ों में भगवान ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और ऊपरी हिस्से में देवों के देव महादेव (शिव) निवास करते हैं। Vat Purnima 2026 इसलिए जब सुहागिन महिलाएं इस वृक्ष की परिक्रमा कर पूजा करती हैं, तो उन्हें तीनों लोकों के देवताओं का एक साथ भरपूर आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे उनके पति की आयु बरगद के पेड़ की तरह ही लंबी और उनका वैवाहिक रिश्ता बेहद मजबूत हो जाता है। Vat Purnima 2026 की संपूर्ण और सरल पूजा विधि व्रत का पूरा और श्रेष्ठ फल प्राप्त करने के लिए पूजा की इस अचूक विधि का क्रमबद्ध तरीके से पालन करना बहुत जरूरी है: स्नान और शृंगार: व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर शुद्ध जल से स्नान करें। इसके बाद शुभ और लाल रंग के कपड़े पहनें तथा पूरे सोलह शृंगार करें, जो सौभाग्य का प्रतीक है। पूजा की थाली तैयार करना: अपनी पूजा की साफ थाली में ताजे फल, फूल, रोली, कुमकुम, हल्दी, शुद्ध घी का दीपक, कच्चा सूत (सफेद या लाल धागा), और भोग के लिए भीगा हुआ चना व गुड़ अवश्य रख लें। वृक्ष की परिक्रमा: शुभ मुहूर्त में किसी पुराने वट वृक्ष के पास जाएं। वहां दीपक प्रज्वलित करें, पेड़ के तने पर हल्दी और कुमकुम अर्पित करें और चना-गुड़ का मीठा भोग लगाएं। कच्चा सूत बांधना: पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वृक्ष की परिक्रमा करना है। अपने हाथ में कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की 7, 11 या फिर 21 बार परिक्रमा करते हुए उस धागे को पेड़ के तने पर अच्छी तरह से लपेटें। कथा का श्रवण: परिक्रमा पूर्ण होने के बाद वहीं पेड़ के नीचे शांति से बैठकर माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा को खुद पढ़ें या किसी से सुनें। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। अंत में आरती करके अपने पति की लंबी आयु की प्रार्थना करें। माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक व्रत कथा : Mythological fast story of Mata Savitri and Satyavan किसी भी उपवास की तरह Vat Purnima 2026 की पूजा भी

Vat Purnima 2026 Date And Time:वट पूर्णिमा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, अचूक पूजा विधि और व्रत कथा…. Read More »

Parma ekadashi

Parma ekadashi 2026 Vrat Significance Rules : परमा एकादशी की सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त, अचूक पूजा विधि और व्रत कथा….

Parma ekadashi 2026 Puja Vidhi : सनातन धर्म और वैदिक पंचांग की असीम व ज्ञानवर्धक दुनिया में भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित व्रतों का अत्यधिक महत्व है। हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले सभी प्रमुख व्रतों में एकादशी को सर्वोपरि और सबसे अधिक पुण्यकारी माना गया है। आम तौर पर एक सामान्य वर्ष में कुल 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन जब हिंदू पंचांग की सटीक ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार हर तीन साल के बाद एक अतिरिक्त मास (जिसे हम अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं) जुड़ता है, तो एकादशियों की कुल संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। इसी अत्यंत पवित्र अधिकमास के कृष्ण पक्ष (जब चंद्रमा का आकार घटता है) में आने वाली पावन एकादशी को शास्त्रों में परमा एकादशी या कमला एकादशी के नाम से जाना जाता है। चूंकि यह दुर्लभ और दिव्य संयोग हर तीन साल में केवल एक ही बार बनता है, इसलिए इस वर्ष Parma Ekadashi 2026 का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व अन्य सभी सामान्य व्रतों की तुलना में कई हजार गुना अधिक माना जा रहा है। भगवान विष्णु की अपार कृपा पाने और जीवन के हर बड़े कष्ट से मुक्ति के लिए यह दिन किसी महा उत्सव से कम नहीं है। Parma ekadashi 2026 Vrat Significance Rules : परमा एकादशी की सटीक तिथि….. पंचांग की सटीक गणना: तिथि और पारण का शुभ समय किसी भी वैदिक व्रत का शत-प्रतिशत और अचूक फल इंसान को तभी मिलता है, जब उसे व्रत की सही तिथि और सटीक शुभ मुहूर्त का पूर्ण ज्ञान हो। Parma ekadashi हिंदू पंचांग की एकदम सटीक गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष Parma Ekadashi 2026 का अत्यंत पावन उपवास 11 जून (गुरुवार) को पूरे भारतवर्ष में अपार श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ रखा जाएगा। व्रत की पवित्र तिथियों का एकदम विस्तृत और सटीक विवरण इस प्रकार है: एकादशी तिथि का विधिवत आरंभ: हिंदू पंचांग के अनुसार, 10 जून की रात (या 11 जून की मध्यरात्रि) को ठीक 12 बजकर 57 मिनट (कुछ पंचांगों के अनुसार 12:59 बजे) से एकादशी तिथि की शुरुआत हो जाएगी। एकादशी तिथि का पूर्ण समापन: यह पावन तिथि अगले दिन यानी 11 जून को रात के 10 बजकर 36 या 37 मिनट पर अपना पूर्ण समापन करेगी। व्रत का पारण (उपवास खोलने का पवित्र समय): सनातन धर्म शास्त्रों के कड़े नियमों के अनुसार इस महान व्रत का पारण हमेशा अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। Parma ekadashi इसलिए 12 जून की सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर 8 बजकर 10 मिनट के बीच व्रत खोलना सबसे अधिक शुभ रहेगा। (उदया तिथि की सनातनी मान्यताओं का पूर्ण रूप से पालन करते हुए यह व्रत 11 जून को ही संपन्न होगा।) आध्यात्मिक महत्व और इसके गहरे रहस्य हमारे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, मलमास में आने के कारण Parma Ekadashi 2026 के दिन भगवान श्री हरि विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा अपने चरम पर होती है। इस अद्भुत उपवास को इंसान को अत्यंत दुर्लभ सिद्धियां, मानसिक शांति और अपार धन-संपत्ति प्रदान करने वाला माना गया है। जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन और शुद्ध अंतरात्मा से भगवान श्री हरि की विधिवत पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन की घोर दरिद्रता हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। पौराणिक मान्यता तो यह भी है कि इस पावन दिन पर केवल पूरे नियम से उपवास रखने और इसकी कथा सुनने मात्र से ही मनुष्य को सैकड़ों महान यज्ञों को संपन्न करने के बराबर असीम फल प्राप्त हो जाता है और अंत में मृत्यु के पश्चात उसे सीधे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। पौराणिक और चमत्कारी व्रत कथा कहा जाता है कि कथा के श्रवण के बिना एकादशी का उपवास बिल्कुल अधूरा रहता है। Parma Ekadashi 2026 की पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अवंतीपुर नामक एक अत्यंत ही सुंदर और समृद्ध गाँव में एक बहुत ही ज्ञानी और विद्वान ब्राह्मण रहा करते थे। Parma ekadashi उनके पाँच पुत्र थे; जिनमें से चार तो बहुत ही संस्कारी और आज्ञाकारी थे, लेकिन उनका पाँचवाँ पुत्र, जिसका नाम जयशर्मा था, वह पूरी तरह से दुराचारों और पाप कर्मों के अंधेरे में डूबा हुआ था। उसके पापी आचरण और बुरे व्यवहार के कारण गाँव के आस-पास के सभी लोग हमेशा बहुत परेशान रहते थे। अंततः उसके दुराचरण से तंग आकर उसके सगे-संबंधियों और स्वयं उसके पिता ने भी उसे हमेशा के लिए अपने घर से निकाल दिया। अपनों के भारी तिरस्कार और सामाजिक अपमान से आहत होकर वह दुखी मन से गाँव छोड़कर एक घने जंगल की ओर चला गया। दर-दर भटकते हुए वह भूख-प्यास से बुरी तरह व्याकुल होकर प्रयाग के पवित्र तीर्थ स्थल पर जा पहुँचा। Parma ekadashi वहां उसे महर्षि हरिमित्र का शांत और आध्यात्मिक आश्रम दिखाई दिया। चूँकि वह पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) का अत्यंत पवित्र समय था, इसलिए वहां बहुत से विद्वान ब्राह्मण और श्रद्धालु एकत्रित थे। वहां बैठकर सभी लोग भगवान विष्णु की महिमा गा रहे थे। Parma ekadashi महर्षि के मार्गदर्शन में Parma Ekadashi 2026 का यह कठिन व्रत पूरे विधि-विधान से संपन्न किया। उसके इस जाग्रत व्रत के प्रबल प्रभाव से उसी रात साक्षात देवी लक्ष्मी उसके समक्ष प्रकट हुईं और कहा, “हे ब्राह्मण पुत्र! तुमने यह व्रत पूरी श्रद्धा और नियम से किया है, इसलिए तुम्हें मेरा आशीर्वाद और महान सौभाग्य प्राप्त होगा”। माता लक्ष्मी के इस दिव्य वरदान से वह भटका हुआ युवक अपार धन और असीम समृद्धि से संपन्न होकर खुशी-खुशी अपने पिता के पास घर लौट आया। Parma ekadashi इसलिए कहा जाता है कि इस कथा को सुनने वाला हर इंसान पापों से मुक्त हो जाता है। अचूक पूजा विधि यदि आप Parma Ekadashi 2026 का पूरा, अचूक और चमत्कारी फल पाना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताई गई इस पूजा विधि का कड़ाई से पालन करें: व्रत के शुभ दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठकर शुद्ध जल (यदि संभव हो तो गंगाजल मिलाकर) से स्नान करें और पूरी तरह साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। घर के स्वच्छ पूजा स्थल पर भगवान विष्णु के समक्ष हाथ जोड़कर अपने निर्जल या फलाहार व्रत का दृढ़ संकल्प लें। भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की सुंदर मूर्तियों को पंचामृत से आदरपूर्वक स्नान

Parma ekadashi 2026 Vrat Significance Rules : परमा एकादशी की सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त, अचूक पूजा विधि और व्रत कथा…. Read More »

Mahatmya Stotram

Shri Radha Naam-Mahatmya Stotram : श्रीराधा नाम महात्म्य स्तोत्र….

Shri Radha Naam-Mahatmya Stotram in Hindi: श्रीराधा नाम महात्म्य स्तोत्र हिंदी पाठ रेफो हि कोटी जन्माघं कर्मभोगं शुभाशुभम् ।आकारो गर्भवासं च मृत्युं च रोगमुत्सृजेत् । धकार आयुषो हानिमाकारो भवबन्धनम् ।श्रवणस्मरणोक्तिभ्यः प्रणश्यति न संशयः ।रेफ़ो हि निश्चलां भक्तिं दास्यं कृष्णपदाम्बुजे ।। सर्वेप्सितं सदानन्दं सर्वसिद्धौघमीश्वरम् ।धकारः सहवासं च तत्तुल्यकालमेव च । ददाति सार्ष्टिसारूप्यं तत्त्वज्ञानं हरेः समम् ।आकरस्तेजसां राशिं दानशक्तिं हरौ यथा ।  योगशक्तिं योगमतिं सर्वकालं हरिस्मृतिम् ।श्रुत्युक्तिस्मरणाद्योगान्मोहजालं च किल्बिषम् ।रोगशोक मृत्युयमा वेपन्ते नात्र संशयः ।  ।। इति श्रीराधा नाम महात्म्य स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

Shri Radha Naam-Mahatmya Stotram : श्रीराधा नाम महात्म्य स्तोत्र…. Read More »

Mrityunjay Stotra

Shri Mrityunjay Stotra : श्री मृत्युंजय स्तोत्र….

Shri Mrityunjay Stotra : श्री मृत्युंजय स्तोत्र: श्री मृत्युंजय स्तोत्र के बारे में माना जाता है कि महा मृत्युंजय मंत्र आपको गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है। वेदों के सबसे पुराने स्तोत्रों में से एक माने जाने वाले महामृत्युंजय जाप का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है; यह भगवान शिव के ‘रुद्र’ अवतार को समर्पित है। Mrityunjay Stotra यह आपकी आयु बढ़ाने में भी सहायक है। जब इस मंत्र का नियमित रूप से सच्ची श्रद्धा के साथ जाप किया जाता है, तो यह पारिवारिक कलह, संपत्ति के बंटवारे और वैवाहिक तनाव जैसी समस्याओं को सुलझाने में मदद कर सकता है। श्री मृत्युंजय स्तोत्र में अद्भुत रोग-निवारक शक्तियाँ निहित हैं। हिंदुओं के बीच इसे सबसे श्रेष्ठ आध्यात्मिक साधना माना जाता है। शिव ही परम सत्य हैं और वे ही परमेश्वर हैं। शिव के अनुयायी मानते हैं कि वे ‘स्वयंभू’ (स्वयं प्रकट होने वाले) हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करना अत्यंत सरल है और वे अक्सर अपने भक्तों को वरदान देते हैं। Mrityunjay Stotra चाहे बात धन-संपत्ति, स्वास्थ्य या सुख-समृद्धि की हो—वे आपकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं और आपको आपके कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं। शिव पुराण में इस मंत्र के उल्लेख से जुड़ी दो कथाएँ प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार: यह मंत्र केवल ऋषि मार्कण्डेय को ज्ञात था, जिन्हें स्वयं भगवान शिव ने इस मंत्र का वरदान दिया था। अब प्रश्न यह उठता है कि शिव की आराधना किस प्रकार की जाए? सत्ययुग में मूर्ति-पूजा फलदायी थी, परंतु कलियुग में केवल मूर्ति के समक्ष प्रार्थना कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। यहाँ तक कि भविष्य पुराण में भी सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति हेतु मंत्र-जाप के महत्व का वर्णन किया गया है। Mrityunjay Stotra इसी प्रकार, शिव के मंत्र—महामृत्युंजय मंत्र—का प्रतिदिन जाप करने से आपको उत्तम स्वास्थ्य, धन-संपत्ति, समृद्धि और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। यह मंत्र सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और आपको विपत्तियों तथा संकटों से सुरक्षित रखता है। श्री मृत्युंजय स्तोत्र के लाभ: यदि आपकी जन्मकुंडली में मास, गोचर, दशा, अंतर्दशा अथवा किसी अन्य प्रकार का दोष विद्यमान है, तो श्री मृत्युंजय स्तोत्र आपको उससे मुक्ति दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।यदि आप किसी रोग अथवा शारीरिक व्याधि से पीड़ित हैं, Mrityunjay Stotra तो यह मंत्र आपके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। Mrityunjay Stotra यह आयु वृद्धि में भी सहायक है; यदि आप पूर्ण निष्ठा और श्रद्धा के साथ श्री मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो यह अकाल मृत्यु को टाल सकता है अथवा मृत्यु को कुछ समय के लिए स्थगित कर सकता है। श्री मृत्युंजय स्तोत्र का जाप पारिवारिक कलह, संपत्ति के बंटवारे और किसी महामारी के कारण लोगों की मृत्यु होने जैसी स्थितियों में सहायक होता है। यदि आप किसी आर्थिक परेशानी से गुज़र रहे हैं या व्यापार में घाटा उठा रहे हैं, तो श्री मृत्युंजय स्तोत्र का जाप आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा।श्री मृत्युंजय स्तोत्र में रोग-निवारक शक्तियाँ निहित हैं; ऐसा माना जाता है कि Mrityunjay Stotra श्री मृत्युंजय स्तोत्र के पाठ से दिव्य तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो रोगों को दूर करती हैं और मृत्यु से जुड़े भय को समाप्त करने में सहायता करती हैं, जिससे आप जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। इसीलिए, इसे ‘मोक्ष मंत्र’ भी कहा जाता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: जो व्यक्ति किसी असाध्य या दीर्घकालिक रोग से पीड़ित हैं, अथवा जिनका स्वास्थ्य लगातार खराब बना रहता है, Mrityunjay Stotra उन्हें वैदिक नियमों के अनुसार श्री मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। श्री मृत्युंजय स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Mrityunjay Stotra in Hindi रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनंशिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम् ।क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवंदितंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 1 ॥ पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितंभाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम् ।भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 2 ॥ मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरंपंकजासनपद्मलोचनपूजितांगघ्रिसरोरुहम् ।देवसिद्धतरंगिणी करसिक्तशीतजटाधरंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 3 ॥ कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरकुण्डलं वृषवाहनंनारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम् ।अंधकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 4 ॥ यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजंगविभूषणंशैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम् ।क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 5 ॥ भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणंदक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम् ।भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 6 ॥ भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरंसर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनूपमम् ।भूमिवारिनभोहुताशनसोमपालितस्वाकृतिंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 7 ॥ विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परंसंहरन्तमथ प्रपंचमशेषलोकनिवासिनम् ।क्रीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमाव्रतंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ 8 ॥ रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ 9 ॥ कालकण्ठं कलामूर्तिं कालाग्निं कालनाशनम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ 10 ॥ नीलकण्ठं विरुपाक्षं निर्मलं निरूपद्रवम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ 11 ॥ वामदेवं महादेवं लोकनाथं जगद्गुरुम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ 12 ॥ देवदेवं जगन्नाथं देवेशमृषभध्वजम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ 13 ॥ अनन्तमव्ययं शान्तमक्षमालाधरं हरम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ 14 ॥ आनन्दं परमं नित्यं कैवल्यपदकारणम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ 15 ॥ स्वर्गापवर्गदातारं सृष्टिस्थित्यन्तकारिणम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ 16 ॥ ॥ इति श्री मृत्युंजय स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

Shri Mrityunjay Stotra : श्री मृत्युंजय स्तोत्र…. Read More »

Mahishasura

Sri Mahishasura Mardini Stotram : श्री महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्….

श्री महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Sri Mahishasura Mardini Stotram in Hindi अयि गिरि नन्दिनी नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवर विन्ध्यशिरोधिनिवासिनी विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ सुरवर वर्षिणि दुर्धर धर्षिणि दुर्मुख मर्षिणि हर्षरतेत्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिष मोषिणि घोषरते ।दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥ अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रिय वासिनि हासरतेशिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमालय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।मधुमधुरे मधुकैटभ गञ्जिनि कैटभ भञ्जिनि रासरतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥ अयि शतखण्ड विखण्डित रुण्ड वितुण्डित शुंड गजाधिपतेरिपुगजगण्ड विदारणचण्ड Mahishasura पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥ अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृतेचतुरविचार धुरीणमहाशिव Mahishasura दूतकृत प्रमथाधिपते ।दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदूत कृतान्तमतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥ अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरेत्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे ।दुमिदुमितामर धुन्दुभिनाद महोमुखरीकृत दिङ्मकरेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥ अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशतेसमरविशोषित शोणितबीज समुद्भव शोणित बीजलते ।शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥ धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटकेकनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हतावटुके ।कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुकेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि Mahishasura रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥ सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरतेकृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥ जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुतेझणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत Mahishasura नूपुर शिञ्जितमोहित भूतपते ।नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥ अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुतेश्रितरजनी रजनीरजनी Mahishasura रजनीरजनी करवक्त्रवृते ।सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमराधिपतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥ सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरतेविरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते ।शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललितेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥ अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपतेत्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥ कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललतेसकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुलेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥ करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमतेमिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित Mahishasura रञ्जितशैल निकुञ्जगते ।निजगुणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितलेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥ कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचेप्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे ।जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥ विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुतेकृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते ।सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥ पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवेअयि कमले कमलानिलये Mahishasura कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥ कनकलसत्कल सिन्धुजलैरनु षिञ्चति ते गुण रङ्गभुवम्भजति स किं न शचीकुचकुम्भ तटीपरिरम्भ सुखानुभवम् ।तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥ तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयतेकिमु पुरुहूतपुरीन्दुमुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥ अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमेअयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते ।यदुचितमत्र भवत्युररी कुरुतादुरुतापमपाकुरुतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१ ॥ ॥ इति श्री महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

Sri Mahishasura Mardini Stotram : श्री महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्…. Read More »