Shani Mangal Yuti on Raksha Bandhan : रक्षाबंधन पर शनि-मंगल का महासंयोग, इन 3 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ

Shani Mangal Yuti: रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025 को भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ एक खास ज्योतिषीय संयोग भी लेकर आ रहा है। इस दिन आकाश में शनि और मंगल का दुर्लभ महा-राजयोग बनेगा, जो कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ होगा। इस शुभ संयोग से तीन राशियों को आर्थिक लाभ, नई अवसरों और समृद्धि के योग मिलेंगे। Shani Mangal Yuti: इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का उत्सव नहीं रहेगा, बल्कि यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन रहा है। 9 अगस्त 2025 को ग्रहों की विशेष स्थिति के चलते शनि और मंगल का संयोग बन रहा है, जिससे ‘नवपंचम राजयोग’ का निर्माण होगा। यह योग अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली माना जाता है, जो जातक के जीवन में सफलता, समृद्धि और नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। रक्षाबंधन 2025 के दिन ग्रहों की चाल एक खास खगोलीय संयोग बना रही है। सुबह 08 बजकर 18 मिनट पर मंगल और शनि के बीच 180 अंश की दूरी बनेगी, जिसे ज्योतिष में ‘प्रतियुति’ कहा जाता है। आमतौर पर प्रतियुति को संघर्ष और चुनौतियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस बार की स्थिति थोड़ी अलग है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, Shani Mangal यह राजयोग कुछ खास राशियों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है। जिन राशियों पर इस योग का सीधा प्रभाव पड़ेगा, उनके जीवन में आर्थिक लाभ, करियर में तरक्की और पारिवारिक सुख में वृद्धि के प्रबल योग बनेंगे। Shani Mangal यह समय उनके लिए सौभाग्य, मान-सम्मान और सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। आइए जानें वे कौन सी तीन भाग्यशाली राशियां हैं जिन्हें रक्षाबंधन 2025 पर इस ‘महा-राजयोग’ का विशेष लाभ मिलेगा। आप अपने रिश्ते में सुकून, देखभाल और स्थिरता महसूस करेंगे। इस कार्ड का संकेत है कि आपने इस संबंध में भरोसे और गहराई को मजबूत करने में काफी मेहनत की है। अब आप एक सुरक्षित भावनात्मक ज़ोन में पहुंच चुके हैं Shani Mangal: इन 3 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ मेष राशि इस बार रक्षाबंधन मेष राशि वालों के लिए बेहद खास रहने वाला है। नवपंचम महा-राजयोग के प्रभाव से आपके करियर में एक नई रफ्तार आएगी। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है, वहीं व्यापारियों को बड़ा लाभ होने के संकेत हैं। Shani Mangal आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है और किए गए निवेश से मुनाफा मिलने के योग हैं। इसके अलावा सामाजिक जीवन में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लोग आपके कार्यों की सराहना करेंगे। यह समय आत्मविश्वास और उत्साह से भरपूर रहेगा। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों के लिए रक्षाबंधन का यह समय ऊर्जा और मानसिक शांति का प्रतीक बनकर आएगा। लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में सुधार होगा और आप खुद को पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस करेंगे। पारिवारिक जीवन में खुशियों की बहार आएगी। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और घर में कोई शुभ कार्य भी संपन्न हो सकता है। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी के साथ आपके निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होगी, जिससे आप अपने व्यक्तिगत और पेशेवर लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। मीन राशि मीन राशि वालों के लिए रक्षाबंधन पर बन रहा यह राजयोग शिक्षा, संबंध और आध्यात्मिक उन्नति के क्षेत्र में बेहद शुभ रहेगा। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह समय अनुकूल है। कठिन परीक्षाओं में सफलता और नए अवसर मिलने के योग बन रहे हैं। सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा, जिससे नए और लाभदायक संबंध बन सकते हैं। यात्रा का योग भी बन रहा है, जो न सिर्फ लाभदायक होगी बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी संतुलन प्रदान करेगी। यह समय आपको भीतर से भी मज़बूत और संतुलित बनाएगा। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी पर भूलकर भी न करें ये काम, होगी धन हानि

Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में हर साल धूमधाम के साथ मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami 2025) भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है तो आइए इस दिन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं। जन्माष्टमी का व्रत। सनातन धर्म में जन्माष्टमी का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त उपवास रखते हैं और अगले दिन या कृष्ण-जन्म के बाद पारण करते हैं। इसके अलावा कुछ साधक विशेष पूजा करने के लिए भगवान कृष्ण के मंदिर भी जाते हैं। जन्माष्टमी के दिन कुछ चीजों को करने से भगवान कृष्ण नाराज हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति भी डगमगा सकती है। Janmashtami Vrat par Kya Na kare जन्माष्टमी पर क्या न करें? मास-मदिरा- सावन के महीने में भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस महीने तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं। तुलसी की पत्तियां- तुलसी की पत्तियां भगवान शिव को अर्पित नहीं करनी चाहिए। Janmashtami Vrat तुलसी जी माता लक्ष्मी का रूप मानी गयी हैं, जो विष्णु जी की पत्नी हैं। इसलिए शिव पूजा के दौरान भूलकर भी तुलसी की पत्तियों को न तो शिव जी को भोग लगाना चाहिए और न ही तुलसी की माला से शिव मंत्र का जाप करना चाहिए। अपमान- कोशिश करें की इस महीने आप किसी का दिल न दुखाएं और वाद-विवाद से भी बचें। Janmashtami Vrat किसी का भी अपमान करने से बचें और न ही किसी का मजाक उड़ाएं। काले वस्त्र- धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ अवसर या फिर पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसलिए कामिका एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। Janmashtami Vrat भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा। भोग लगाते या बनाते समय ध्यान रखें 6 चीजें 1- ध्यान रखें भोग में लहसुन या प्याज का इस्तेमाल न किया गया हो। भोग हमेशा सात्विक चीजों का ही लगाया जाता है। 2- स्नान करने के बाद ही भगवान का भोग तैयार करें। 3- कन्हा जी को भोग लगाने से पहले भोग का सेवन या चखना अच्छा नहीं माना जाता है। 4- बासी चीजों से भोग तैयार नहीं किया जाता है। 5- भोग बिना तुलसी की पत्तियों के नहीं लगता है। 6- आरती कर लेने के बाद भोग लगाकर आचवनी की जाती है और घंटी भी बजाते हैं।

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Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बना शुभ वृद्धि योग: इन 3 राशियों पर बरसेगी श्रीहरि की विशेष कृपा

Krishna Janmashtami: देशभर में 15 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा, जिसे कृष्ण जन्माष्टमी भी कहते हैं। जन्माष्टमी के पावन दिन वृद्धि योग का भी महासंयोग बन रहा है जिसका शुभ प्रभाव किन तीन राशिवालों के ऊपर पड़ने वाला है, उनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व और भी विशेष है क्योंकि 15 अगस्त 2025 को ‘वृद्धि योग’ का संयोग बन रहा है। यह योग शुभ कार्यों और साधना के लिए बेहद फलदायी माना जाता है। जो भी भक्त इस दिन विधिपूर्वक व्रत, पूजन और दान करते हैं, उन्हें श्रीकृष्ण की कृपा और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। krishna Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए जन्माष्टमी के पर्व का खास महत्व है, जिसका उत्सव हर साल बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, जो जगत के पालनहार भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं। Janmashtami इसलिए हर साल इस तिथि पर जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। कृष्ण जी को प्रसन्न करने के लिए कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। इस साल 15 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। ज्योतिष दृष्टि से भी जन्माष्टमी का दिन खास है क्योंकि 15 अगस्त 2025 को वृद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। चलिए जानते हैं उन तीन राशियों के राशिफल और उपायों के बारे में, जिन्हें इस शुभ दिन कृष्ण जी की विशेष कृपा प्राप्त होगी। वृद्धि योग का समय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 15 अगस्त की सुबह 9:05 बजे से अगले दिन 16 अगस्त की सुबह 6:32 बजे तक वृद्धि योग रहेगा। इस समय के दौरान श्रीकृष्ण की पूजा, रासलीला, झांकियां, उपवास और दान-पुण्य का विशेष महत्व रहेगा। Janmashtami इस योग में किए गए धार्मिक कार्य अति शुभ फल प्रदान करते हैं। These three zodiac signs will get special blessings on Shri Krishna Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इन तीन राशियों को मिलेगा विशेष आशीर्वाद इस बार की जन्माष्टमी उन लोगों के लिए बेहद लाभकारी रहने वाली है, जिनकी राशि वृषभ, कर्क और सिंह है। आइए जानते हैं इन राशियों का राशिफल और सरल उपाय। वृषभ राशि वृषभ को श्रीकृष्ण की प्रिय राशि माना जाता है, जिसके जातकों के ऊपर भगवान कृष्ण की विशेष कृपा रहती है। इस साल भी जन्माष्टमी के पावन पर्व पर वृषभ राशिवालों को श्रीकृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा। साथ ही वृद्धि योग का शुभ प्रभाव पड़ेगा। Janmashtami जहां एक तरफ कारोबारियों को अटके पैसे मिलने से मानसिक शांति मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ सैलरी बढ़ने से नौकरी कर रहे जातकों का मन खुश रहेगा। कृष्ण जी और राधा रानी के आशीर्वाद से विवाहित कपल के बीच प्रेम बढ़ेगा और घर में खुशहाली का आगमन होगा। उपाय- घर में कृष्ण जी और राधा रानी की मूर्ति स्थापित करें। कर्क राशि वृषभ के अलावा कर्क राशि को भी कृष्ण जी की प्रिय राशियों में से एक माना जाता है, जिसके जातकों के ऊपर ये मेहरबान रहते हैं। सिंगल जातकों को इस साल अपने व्रत का पूरा फल मिलेगा। 15 अगस्त के आसपास सच्चे प्यार से मुलाकात हो सकती है। जिन लोगों की शादी हो चुकी है, उनके परिवारवालों के बीच चल रही दुश्मनी खत्म होगी। पुराने निवेश से मुनाफा होने के कारण आर्थिक स्थिति को बल मिलेगा। उपाय- पानी का दान करें। सिंह राशि जन्माष्टमी पर वृद्धि योग के महासंयोग से सिंह राशिवालों के घर में खुशियां पहले से और ज्यादा बढ़ जाएंगी। किसी रिश्तेदार से झगड़ा चल रहा है तो वो सुलझ जाएगा। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे जातकों को सफलता मिलेगी और जिंदगी में थोड़ी स्थिरता आएगी। जिन लोगों का खुद का बिजनेस है या जो जातक नौकरी कर रहे हैं, उनके आर्थिक पक्ष में थोड़ा सुधार होगा। उपाय- पीले रंग की मिठाई का दान करें।

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Heramb Sankashti Chaturthi 2025 Date: कब है भादो माह की हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी, इस तरह करें गणेश जी को प्रसन्न

Heramb Sankashti Chaturthi: गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। भाद्रपद माह में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाले सभी विघ्न दूर हो जाते हैं और साधक पर गणेश जी की कृपा बनी रहती है। संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखा जाता है और चंद्रोदय के बाद ही इस व्रत का पारण किया जाता है। Heramb Sankashti Chaturthi 2025 Subh Muhurat: संकष्टी चतुर्थी मुहूर्त भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 12 अगस्त को सुबह 8 बजकर 40 मिनट पर हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 13 अगस्त को सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर होगा। ऐसे में भाद्रपद माह की हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार 12 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन चन्द्रोदय का समय रात 8 बजकर 59 मिनट पर रहेगा। संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि Heramb Sankashti Chaturthi Puja Vidhi संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। Heramb Sankashti Chaturthi पूजा स्थल को साफ करने के बाद गंगाजल का छिड़काव करें। एक चौकी पर हरा या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान गणेश जी को चंदन, कुमकुम, हल्दी, अक्षत और फूल आदि अर्पित करें। धूप-दीप जलाएं और गणेश जी को मोदक या फिर लड्डूओं का भोग लगाएं। संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें और गणेश जी की आरती करें। शाम को चंद्र दर्शन के बाद, चंद्रमा को अर्घ्य दें और अपना व्रत खोलें। संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा: Heramb Sankashti Chaturthi Vrat Mahima नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। ध्यान दें – संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। Heramb Sankashti Chaturthi इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। Ganesh Ji ke Mantra: गणेश जी के मंत्र 1. वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥ 2. एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं। विघ्नशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥ 3. ॐ ग्लौम गौरी पुत्र,वक्रतुंड,गणपति गुरु गणेश ग्लौम गणपति,ऋदि्ध पति। मेरे दूर करो क्लेश।। 4. एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं। विघ्नशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥

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विलक्कु पूजा: घर में सुख-समृद्धि लाने का पावन अनुष्ठान Vilakku Pooja: A Sacred Ritual to Bring Prosperity Home

दक्षिण भारत में विलक्कु पूजा (Vilakku Pooja) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र अनुष्ठान है, जो घर में सुख-शांति और समृद्धि लाने के लिए किया जाता है। ‘विलक्कु’ का अर्थ है ‘दीपक’ और यह पूजा मुख्यतः दीपकों, विशेष रूप से पारंपरिक पीतल या मिट्टी के दीपकों को प्रज्वलित करके देवी-देवताओं का आह्वान करने पर केंद्रित होती है। इस पूजा को करने से न केवल सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि यह परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य और खुशहाली भी बढ़ाती है। यदि आप अपनी Karmasu वेबसाइट के लिए इस विषय पर एक ब्लॉग पोस्ट की तलाश में हैं, तो यह विस्तृत गाइड आपको बताएगी कि विलक्कु पूजा कैसे करें, क्या करें और क्या नहीं, और कौन से मंत्रों का जाप करें। विलक्कु पूजा का महत्व (Significance of Vilakku Pooja) विलक्कु पूजा प्रकाश के महत्व को दर्शाती है, जो अंधकार को दूर कर ज्ञान, समृद्धि और खुशी लाता है। यह पूजा मुख्य रूप से देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi), देवी पार्वती (Goddess Parvati), और देवी सरस्वती (Goddess Saraswati) का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है। माना जाता है कि दीपकों की लौ में इन देवियों का वास होता है, जो भक्तों की प्रार्थनाओं को स्वीकार करती हैं और उन्हें मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। विलक्कु पूजा कब और कैसे करें? (When and How to Perform Vilakku Pooja?) विलक्कु पूजा किसी भी शुभ दिन, विशेष रूप से शुक्रवार (Friday) को की जा सकती है, क्योंकि यह दिन देवी लक्ष्मी को समर्पित है। इसे दिवाली (Diwali), नवरात्रि (Navratri), करक चतुर्थी (Karak Chaturthi) जैसे त्योहारों पर भी विशेष रूप से किया जाता है। पूजा विधि: विलक्कु पूजा में क्या करें और क्या नहीं (Do’s and Don’ts in Vilakku Pooja) क्या करें (Do’s): क्या नहीं करें (Don’ts): विलक्कु पूजा के लिए मंत्र (Mantras for Vilakku Pooja) विलक्कु पूजा के दौरान कई मंत्रों का जाप किया जा सकता है, जो देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं और पूजा को अधिक शक्तिशाली बनाते हैं। विलक्कु पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक अनुभव है जो मन और आत्मा को शांति प्रदान करता है। अपनी Karmasu वेबसाइट के माध्यम से इस प्राचीन परंपरा के बारे में जानकारी साझा करके, आप कई लोगों को इस पवित्र कार्य को करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। क्या आप विलक्कु पूजा से जुड़े किसी विशेष पहलू, जैसे विभिन्न प्रकार के दीपकों या संबंधित त्योहारों पर और जानकारी चाहेंगे? Sources

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Tulsidas Jayanti 2025: क्या करें और क्या नहीं, और कौन सा मंत्र पढ़ें?

तुलसीदास जयंती, गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है, जो भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा के एक महान संत कवि थे। उन्होंने रामचरितमानस जैसे कालजयी ग्रंथ की रचना की, जिसने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। 2025 में, तुलसीदास जयंती 31 जुलाई को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर, आइए जानते हैं कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं, और किन मंत्रों का जाप करना चाहिए। तुलसीदास जयंती पर क्या करें (What to do on Tulsidas Jayanti): तुलसीदास जयंती पर क्या न करें (What not to do on Tulsidas Jayanti): कौन सा मंत्र पढ़ें (Which Mantra to Chant): तुलसीदास जयंती पर भगवान राम, हनुमान जी और स्वयं तुलसीदास जी से संबंधित मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है। तुलसीदास जयंती हमें गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन और शिक्षाओं को याद करने का अवसर प्रदान करती है। इस दिन उनके दिखाए मार्ग पर चलकर और भक्तिमय वातावरण में लीन होकर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।

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राहु ग्रह को शांत करने के ज्योतिषीय उपाय: Lal Kitab Remedies for Rahu

राहु ग्रह को शांत करने के ज्योतिषीय उपाय: Lal Kitab Remedies for Rahu ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक shadow planet माना जाता है, जिसका impact human life पर गहरा होता है। यह sudden events, confusion, और unexpected changes का कारक है। जब कुंडली में राहु unfavorable position में हो, तो यह व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की बाधाएँ और challenges उत्पन्न कर सकता है। Lal Kitab astrology में राहु को शांत करने और उसके negative effects को कम करने के लिए विशेष remedies बताए गए हैं। राहु का प्रभाव और पहचान (Impact and Identification of Rahu) Lal Kitab के अनुसार, राहु के negative impact से कई symptoms प्रकट हो सकते हैं। [cite_start]यदि राहु अशुभ हो, तो व्यक्ति के जीवन में धोखे और फरेब की घटनाएँ बढ़ सकती हैं, धन हानि (financial loss) हो सकती है, और ससुराल पक्ष (in-laws) से संबंध खराब हो सकते हैं [cite: 1477]। [cite_start]Health related problems जैसे सिर में चोट (head injury), अजीब बीमारियाँ (unusual diseases), दमा (asthma), मिर्गी (epilepsy), काली खांसी (whooping cough) जैसी तकलीफें भी देखने को मिल सकती हैं [cite: 1478, 1482]। [cite_start]इसके अतिरिक्त, innocent imprisonment या accidental death का भय भी हो सकता है [cite: 1482]। [cite_start]Mental disturbance, confusion और पागलपन जैसी स्थितियाँ भी राहु के दुष्प्रभाव का result हो सकती हैं [cite: 1484]। राहु ग्रह को शांत करने के Lal Kitab Remedies राहु के unfavorable effects को शांत करने और शुभ फल प्राप्त करने के लिए कई effective remedies बताए गए हैं: Remedies करते समय ध्यान रखने योग्य बातें (Important Points to Remember During Remedies) इन remedies को faith और belief के साथ करने से राहु के unfavorable effects को कम किया जा सकता है और life में peace और prosperity प्राप्त की जा सकती है। यह ध्यान रखना important है कि astrological remedies केवल guidelines होते हैं और व्यक्ति के कर्मों का phal ही अंततः determine होता है।

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अगस्त 2025 के प्रमुख हिंदू पर्व: तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त – संपूर्ण मार्गदर्शिका

अगस्त: हिंदू पर्वों का पावन महीना अगस्त माह हिंदू कैलेंडर में एक विशेष स्थान रखता है, क्योंकि यह भारत में त्योहारों के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है. यह महीना विविध और जीवंत उत्सवों से भरा होता है, जो आध्यात्मिक विकास और पारिवारिक जुड़ाव के अवसर प्रदान करते हैं. इस अवधि में कई महत्वपूर्ण हिंदू पर्व मनाए जाते हैं, जो देश भर में भक्तों के लिए उत्साह और श्रद्धा का माहौल बनाते हैं. यह शोध-आधारित ब्लॉग पोस्ट अगस्त 2025 में आने वाले प्रमुख हिंदू पर्वों – रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी – का विस्तृत विवरण प्रदान करेगी. इसमें प्रत्येक पर्व की तिथि, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाएँ, महत्व और पालन किए जाने वाले अनुष्ठान शामिल होंगे. इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक और व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है ताकि वे इन पावन अवसरों को पूर्ण श्रद्धा और उत्साह के साथ मना सकें. अगस्त 2025 के प्रमुख हिंदू पर्व: एक नज़र अगस्त 2025 में कई महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार मनाए जाएंगे, जो भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं. यह तालिका इन प्रमुख पर्वों का एक त्वरित अवलोकन प्रस्तुत करती है, जिससे पाठकों को पूरे महीने के त्योहारों की तिथियों और मुख्य महत्व को एक ही स्थान पर देखने में मदद मिलती है. यह जानकारी उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो अपने उत्सवों की योजना बना रहे हैं या इन त्योहारों के बारे में त्वरित संदर्भ चाहते हैं. Table 1: अगस्त 2025 के प्रमुख हिंदू पर्व पर्व का नाम तिथि मुख्य महत्व श्रावण पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त, मंगलवार संतान प्राप्ति, पापों से मुक्ति रक्षा बंधन 9 अगस्त, शनिवार भाई-बहन का प्रेम और सुरक्षा का बंधन कजरी तीज 12 अगस्त, मंगलवार वैवाहिक सुख, अच्छे पति की कामना, गायों की पूजा जन्माष्टमी 15/16 अगस्त, शुक्र/शनि भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव, धर्म के सिद्धांत सिंह संक्रांति 17 अगस्त, रविवार सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश, पवित्र स्नान, दान हरतालिका तीज 26 अगस्त, मंगलवार वैवाहिक सुख, अखंड सौभाग्य, देवी पार्वती की तपस्या गणेश चतुर्थी 27 अगस्त, बुधवार बुद्धि, समृद्धि, नई शुरुआत, बाधाओं का निवारण Export to Sheets रक्षा बंधन: भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षा बंधन, जिसे राखी के नाम से भी जाना जाता है, भाई-बहन के बीच के पवित्र और अनूठे बंधन का सम्मान करने वाला एक विशेष हिंदू त्योहार है. “रक्षा” का अर्थ है सुरक्षा और “बंधन” का अर्थ है बंधन. यह त्योहार देखभाल और जिम्मेदारी पर आधारित रिश्ते का प्रतीक है. तिथि और शुभ मुहूर्त भारत में, रक्षा बंधन मुख्य रूप से शनिवार, 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा. हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे कुछ स्थानों पर, पूर्णिमा तिथि के आरंभ और अंत के आधार पर यह शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 को भी मनाया जा सकता है. पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त 2025 को दोपहर 02:12 बजे (भारत) या सुबह 04:42 बजे (पूर्वी समय, यूएसए) शुरू होगी और 9 अगस्त 2025 को दोपहर 01:24 बजे (भारत) या सुबह 03:54 बजे (पूर्वी समय, यूएसए) समाप्त होगी. राखी बांधने का सबसे शुभ समय 9 अगस्त को सुबह 05:47 बजे से दोपहर 01:24 बजे तक है , जिसकी अवधि 7 घंटे 37 मिनट है. अपराह्न मुहूर्त (देर दोपहर) को पारंपरिक रूप से सबसे शुभ माना जाता है. 9 अगस्त 2025 को अपराह्न मुहूर्त लगभग 01:41 बजे से 02:54 बजे तक है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भद्रा काल में राखी बांधने से बचना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है और यह नकारात्मक परिणाम ला सकता है. 2025 में, भद्रा 9 अगस्त को सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी. यह एक महत्वपूर्ण कारक है क्योंकि इसका अर्थ है कि राखी बांधने के लिए पूरा सुबह का समय शुभ और सुरक्षित हो जाएगा, जिससे भक्तों को अपने अनुष्ठानों की योजना बनाने में आसानी होगी. Table 2: रक्षा बंधन 2025: शुभ मुहूर्त विवरण तिथि/समय (भारत) तिथि/समय (पूर्वी समय, यूएसए) पर्व की तिथि 9 अगस्त 2025 (शनिवार) 8 अगस्त 2025 (शुक्रवार) पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 8 अगस्त 2025, दोपहर 02:12 बजे 8 अगस्त 2025, सुबह 04:42 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त 9 अगस्त 2025, दोपहर 01:24 बजे 9 अगस्त 2025, सुबह 03:54 बजे राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 9 अगस्त 2025, सुबह 05:47 बजे से दोपहर 01:24 बजे तक 8 अगस्त 2025, अपराह्न मुहूर्त – 04:18 PM से 05:14 PM तक अपराह्न मुहूर्त 9 अगस्त 2025, दोपहर 01:41 बजे से 02:54 बजे तक (उपरोक्त यूएसए समय में शामिल) भद्रा काल की समाप्ति 9 अगस्त 2025 को सूर्योदय से पहले 9 अगस्त 2025 को सूर्योदय से पहले (स्थानीय समय के अनुसार) Export to Sheets महत्व और पौराणिक कथाएँ रक्षा बंधन केवल एक अनुष्ठान नहीं है; यह साझा बचपन, गुप्त चुटकुलों और अनकहे समर्थन को एक पवित्र धागे में समेटने का एक क्षण है. यह भाई-बहन के बीच के भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है. यह सार्वभौमिक प्रेम और एकता का भी प्रतिनिधित्व करता है, ऐतिहासिक रूप से सैनिकों, दोस्तों और पड़ोसियों तक भी सम्मान और एकजुटता के भाव के रूप में विस्तारित होता है. इस त्योहार से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं. महाभारत की एक कहानी में, भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी चोट पर बांध दिया था. उनके इस भाव से द्रवित होकर कृष्ण ने हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन दिया, जिसे उन्होंने चीर-हरण के दौरान पूरा किया. महाभारत के एक अन्य प्रसंग में, रानी कुंती ने अपने पोते अभिमन्यु के युद्ध में जाने से पहले उसकी कलाई पर एक पवित्र धागा बांधा था, जिसे प्रेम और सुरक्षा के रूप में देखा जाता है. एक अन्य लोकप्रिय कथा इंद्र और इंद्राणी से संबंधित है. देवताओं और असुरों के बीच युद्ध के दौरान, इंद्र को असुर राजा बलि ने अपमानित किया था. गुरु बृहस्पति ने श्रावण पूर्णिमा की सुबह एक रक्षा विधान किया, जिसमें इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, जिससे उन्हें असुरों को हराने में मदद मिली. चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजकर मदद मांगी थी, और हुमायूँ ने राखी का सम्मान करते हुए उनकी रक्षा के लिए सेना भेजी थी. एक अन्य कथा के अनुसार, देवी लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर राखी बांधी थी. ये कथाएँ त्योहार के गहरे

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Krishna Janmashtami 2025 Date:इस साल जन्माष्टमी 15 या 16 अगस्त? जानिए पंचांग के अनुसार सटीक तिथि

Krishna Janmashtami 2025: जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा निशिता काल में की जाती है। यह मध्यरात्रि का समय होता है। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जानें इस साल कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व कब मनाया… Krishna Janmashtami 2025 Kab Hai: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। उस समय चंद्रमा वृषभ राशि में था। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्ंम हुआ था। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। जानें जन्माष्टमी कब है, महत्व व पूजन मुहूर्त। Krishna Janmashtami 2025 Date (कृष्ण जन्माष्टमी कब है 2025 में): कृष्ण जन्माष्टमी सनातन धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आधी रात में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए हर साल इस दिन को कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन बना हुआ है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि जन्माष्टमी की तारीख 15 अगस्त की रात में लग रही है और अगले दिन 12 बजे से पहले ही समाप्त हो जा रही है। Krishna Janmashtami 2025 Date ऐसे में क्या जन्माष्टमी 15 अगस्त को मनाई जाएगी या फिर उदया तिथि के अनुसार ये पर्व 16 अगस्त को ही मनाया जाएगा। चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं यहां। श्री कृष्ण जन्माष्टमी कब है 2025 में (Krishna Janmashtami 2025 Date) जन्माष्टमी का व्रत कब से कब तक रहेगा (Janmashtami Vrat Time 2025) जन्माष्टमी का व्रत कई लोग सूर्योदय से लेकर रात 12 बजे तक रखते हैं। वहीं कई लोग इस व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करते हैं। कुछ कृष्ण-भक्त रोहिणी नक्षत्र या अष्टमी तिथि समाप्ति होने के बाद व्रत का पारण कर लेते हैं। Krishna Janmashtami इस व्रत में फलाहारी भोजन के अलावा कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता।

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Sawan Purnima 2025: कब है सावन पूर्णिमा? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और क्या करें क्या नहीं

Purnima 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का काफी महत्व होता है. ऐसे में 8 अगस्त 2025 को श्रावण मास की पूर्णिमा है. इस दिन क्या करना शुभ होता है और क्या करना अशुभ होता है? जानिए इसके बारे में. Sawan Purnima 2025: प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा की तिथि होती है. चंद्रमा की कलाओं के उतरने चढ़ने से ही महीने के दो पक्ष निर्धारित होते हैं. अमावस्या के दौरान चंद्रमा पूरी तरह गायब हो जाता है Sawan Purnima 2025 तो वही पूर्णिमा के दिन चांद एकदम दुधिया चांदनी का हो जाता है.  जिन दिनों में चंद्रमा का आकार घटता है तो वह कृष्ण पक्ष कहलाता है. वही जिन दिनों में चंद्रमा का आकार बढ़ता है वो शुक्ल पक्ष कहलाता है. पूर्णिमा को पूर्णमासी या पूनम की रात के नामों से भी जाना जाता है. धार्मिक रूप से ये समय अत्यंत शुभ और लाभदायक होता है. ऐसे में सावन मास की पूर्णिमा कई मायनों में खास है. आइए जानते हैं इस महीने के बारे में.  When is Sawan Purnima 2025:सावन पूर्णिमा 2025 कब है? इस साल सावन पूर्णिमा का व्रत शनिवार 9 अगस्त 2025 को है. पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 8 अगस्त, दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर 9 अगस्त, दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर खत्म होगा.  What should be done on Savan Purnima:सावन पूर्णिमा में क्या करना चाहिए? शिव भगवान की पूजा करें- सावन पूर्णिमा में शिव भगवान की पूजा आराधना करनी चाहिए. इसके साथ ही बेलपत्र, दूध, दही, शहद और गंगाजल से रुद्राभिषेक करना चाहिए. ऐसा करने से शिव भगवान की कृपा प्राप्त होती है.  रक्षा सूत्र बांधे- सावन मास की पूर्णिमा में ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन बहनें भाइयों को राखी बांधती है और उनकी लंबी उम्र की कामना करती है.  जरूरतमंदों को दान करें- श्रावण मास की पूर्णिमा में ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्न, कपड़े और धन का दान करना चाहिए. ऐसा करना शुभ होता है.  यज्ञोपवीत संस्कार करें- श्रावण मास की पूर्णिमा में वैदिक परंपरा से यज्ञोपवीत संस्कार करना चाहिए. धार्मिक कर्मकांड करने के लिए ये दिन शुभ होता है.  व्रत रखें- श्रावण मास की पूर्णिमा में व्रत रखने का अपना विशेष महत्व होता है. इस दिन व्रत रखने से शिवजी की कृपा प्राप्त होती है.  What not to do on Savan Purnima:सावन पूर्णिमा पर क्या न करें मांस-मदिरा का सेवन न करें- श्रावण मास की पूर्णिमा में तामसिक भोजन को ग्रहण नहीं करना चाहिए. इस महीने मांस-मदिरा का सेवन करना वर्जित होता है.  झगड़ा या कटु वचन न बोलें- इस दिन किसी के प्रति भी गलत वाणी का प्रयोग नहीं करना चाहिए. Sawan Purnima 2025 इसके साथ ही झूठ बोलने से भी बचना चाहिए. बाल कटवाना या नाखून काटना वर्जित- श्रावण मास की पूर्णिमा में बाल कटवाना या नाखून काटना अशुभ होता है. इस दिन इन कामों को करने से आयु कम होती है.  काले और गंदे वस्त्र नहीं पहने- श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन काले और गंदे रंग के वस्त्रों को धारण करने से बचें.  Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN  किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Vishwa Shanti Stotra: श्री विश्व शान्ति स्तोत्र

Vishwa Shanti Stotra: विश्व शांति स्तोत्र (श्री विश्व शांति स्तोत्र): ज्योतिष ग्रंथ के अनुसार, नवग्रहों को छोड़कर अन्य सभी ग्रह भगवान रुद्र या शिव के क्रोध से उत्पन्न हुए हैं। अधिकांश ग्रहों का स्वभाव सामान्यतः हानिकारक होता है, लेकिन कुछ नवग्रह शुभ ग्रह माने जाते हैं। यदि ज्योतिष के अनुसार इनकी पूजा की जाए, तो ये मनुष्य की सभी समस्याओं, बाधाओं को दूर कर देते हैं। विश्व शांति स्तोत्र या “शांति मंत्र” या पंच शांति, उपनिषदों में पाई जाने वाली शांति (शांति) के लिए हिंदू प्रार्थनाएँ हैं। आमतौर पर इनका पाठ धार्मिक अनुष्ठानों और प्रवचनों के आरंभ और अंत में किया जाता है। यजुर्वेद के विश्व शांति स्तोत्र शांति पाठ मंत्र के माध्यम से साधक ईश्वर से शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। विशेषकर हिंदू समुदाय के लोग अपने किसी भी धार्मिक कृत्य, अनुष्ठान, यज्ञ आदि के आरंभ और अंत में इस शांति पाठ के मंत्रों का जाप करते हैं। वैसे, इस मंत्र के माध्यम से संसार के सभी जीवों, वनस्पतियों और प्रकृति में शांति की प्रार्थना की गई है। Vishwa Shanti Stotra उनके अनुसार, ईश्वर स्वरूप शांति, वायु में शांति, अंतरिक्ष में शांति, पृथ्वी पर शांति, जल में शांति, जल में शांति होनी चाहिए। और वनस्पति में शांति, विश्व में शांति हो, सभी देवताओं में शांति हो, शरीर में शांति हो, सभी में शांति हो, सभी में शांति हो, ईश्वर शांति हो, शांति हो, शांति हो। शांति मंत्र महान भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को प्रकट करते हैं। हमारे सांस्कृतिक विचार, दृष्टिकोण आध्यात्मिक आधारशिलाएँ बनाते हैं। हमारी आध्यात्मिकता का भवन इन्हीं मूल सिद्धांतों पर निर्मित होना चाहिए। आइए इन्हें देखें। दिव्य जीवन संस्था, ऋषिकेश के श्री स्वामी शिवानंद ने इसे संकलित किया है। Vishwa Shanti Stotra ke Labh: विश्व शांति स्तोत्र के लाभ विश्व शांति स्तोत्र के पाठ से सभी जीवों की शांति होती है! शांति से विश्व की शांति, जल में शांति, औषधि में शांति, वनस्पति में शांति, विश्व में शांति आदि शांति के सुख हैं। (Vishwa Shanti Stotra) विश्व शांति स्तोत्र या “शांति मंत्र” या पंच शांति, उपनिषदों में पाई जाने वाली शांति (शांति) के लिए हिंदू प्रार्थनाएँ हैं। आमतौर पर इनका पाठ धार्मिक अनुष्ठानों और प्रवचनों के आरंभ और अंत में किया जाता है।उपनिषदों के कुछ विषयों के आरंभ में विश्व शांति स्तोत्र का आह्वान किया जाता है। माना जाता है कि ये साधक के मन और उसके आस-पास के वातावरण को शांत करते हैं। (Vishwa Shanti Stotra) ऐसा भी माना जाता है कि इनका पाठ करने से आरंभ किए जा रहे कार्य में आने वाली सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं।विश्व शांति स्तोत्र हमेशा पवित्र अक्षर ॐ (औं) और “शांति” शब्द के तीन उच्चारणों के साथ समाप्त होता है, जिसका अर्थ है “शांति”। तीन बार उच्चारण करने का उद्देश्य तीनों लोकों में शांति और बाधाओं को दूर करना है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: (Vishwa Shanti Stotra) किसी भी कारण से मानसिक पीड़ा से ग्रस्त व्यक्ति को और यज्ञ एवं पूजा करने के बाद भी इस विश्व शांति स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। श्री विश्व शान्ति स्तोत्र हिंदी पाठ:Vishwa Shanti Stotra in Hindi नश्यन्तु प्रेत कूष्माण्डा नश्यन्तु दूषका नरा: ।साधकानां शिवाः सन्तु आम्नाय परिपालिनाम ॥ जयन्ति मातरः सर्वा जयन्ति योगिनी गणाः ।जयन्ति सिद्ध डाकिन्यो जयन्ति गुरु पन्क्तयः ॥ जयन्ति साधकाः सर्वे विशुद्धाः साधकाश्च ये ।समयाचार संपन्ना जयन्ति पूजका नराः ॥ नन्दन्तु चाणिमासिद्धा नन्दन्तु कुलपालकाः ।इन्द्राद्या देवता सर्वे तृप्यन्तु वास्तु देवतः ॥ चन्द्रसूर्यादयो देवास्तृप्यन्तु मम भक्तितः ।नक्षत्राणि ग्रहाः योगाः करणा राशयश्च ये ॥ सर्वे ते सुखिनो यान्तु सर्पा नश्यन्तु पक्षिणः ।पशवस्तुरगाश्चैव पर्वताः कन्दरा गुहाः ॥ ऋषयो ब्राह्मणाः सर्वे शान्तिम कुर्वन्तु सर्वदा ।स्तुता मे विदिताः सन्तु सिद्धास्तिष्ठन्तु पूजकाः ॥ ये ये पापधियस्सुदूषणरतामन्निन्दकाः पूजने ।वेदाचार विमर्द नेष्ट हृदया भ्रष्टाश्च ये साधकाः ॥ दृष्ट्वा चक्रम्पूर्वमन्दहृदया ये कौलिका दूषकास्ते ।ते यान्तु विनाशमत्र समये श्री भैरवास्याज्ञया ॥ द्वेष्टारः साधकानां च सदैवाम्नाय दूषकाः ।डाकिनीनां मुखे यान्तु तृप्तास्तत्पिशितै स्तुताः ॥ ये वा शक्तिपरायणाः शिवपरा ये वैष्णवाः साधवः ।सर्वस्मादखिले सुराधिपमजं सेव्यं सुरै संततम ॥ शक्तिं विष्णुधिया शिवं च सुधियाश्रीकृष्ण बुद्धया च ये ।सेवन्ते त्रिपुरं त्वभेदमतयो गच्छन्तु मोक्षन्तु ते ॥ शत्रवो नाशमायान्तु मम निन्दाकराश्च ये ।द्वेष्टारः साधकानां च ते नश्यन्तु शिवाज्ञया ।तत्परं पठेत स्तोत्रमानंदस्तोत्रमुत्तमम ।सर्वसिद्धि भवेत्तस्य सर्वलाभो प्रणाश्यति ॥ ॥ इति श्री विश्व शान्ति स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर बहनों को भूलकर भी न दें ये उपहार, बन सकते हैं दुर्भाग्य का कारण

Raksha Bandhan 2025 : किसी को भी गिफ्ट देना अपने प्यार का इजहार करने का शानदार तरीका है। जल्द ही रक्षाबंधन का त्योहार भी आ रहा है। भाई-बहन एक दूसरे को गिफ्ट देकर अपने स्नेह और प्यार से इस त्योहार को मनाएंगे।  मगर, कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें गिफ्ट करने पर दुर्भाग्य लाने वाला या रिश्ते में समस्याएं पैदा करने वाला माना जाता है। खासकर अपने समाज में जहां धार्मिक मान्यताएं और अंधविश्वास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आइए जानते हैं कि आपको किन चीजों को गिफ्ट करने से बचना चाहिए। Raksha Bandhan gift: सालभर कई सारे पर्व आते हैं, इनमें से कुछ विशेष होते हैं. इन्हीं में से एक है श्रावण मास की पूर्णिमा को आने वाला रक्षाबंधन का पर्व. यह भाई और बहन के प्रेम का प्रतीक है. जब बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी कि रा​खी बांधती है और भाई भी इसके साथ अपनी बहन की रक्षा के लिए संकल्प लेता है. साथ ही अपनी बहन को कुछ उपहार भी देता है. इस दिन आप अपनी बहन को उपहार में क्या ना दें? आपको बता दें कि रक्षाबंधन सहित कई त्योहारों को भ्रदा काल में मनाने की मनाही होती है. Raksha Bandhan 2025 यदि भ्रदा काल है तो इस समय के पहले या बाद में शुभ कार्य किए जाते हैं क्योंकि भद्रा के दौरान राखी बांधन से अशुभता की संभावना रहती है. लेकिन क्या आप जानते हैं उपहार देते समय भी कई बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए और बहनों को भूल कर भी कई चीजें उपहार में नहीं देना चाहिए. Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर बहनों को भूलकर भी न दें ये उपहार 1. चमड़े संबंधित चीजें: leather related items लेदर बैग सहित कई सारी स्टाइलिश वस्तुएं बाजार में उपलब्ध हैं. जिन्हें उपहार के लिए कई बार खरीद लेते हैं, लेकिन आपको बता दें कि चमड़े की चीजें शनि देव से सबंधित हैं, Raksha Bandhan 2025 इसलिए इन चीजों को अपनी बहन को कभी ना दें, नहीं तो उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. 2. काले रंग की चीजें: Black coloured things बहनों के लिए जब भी आप उपहार लें, ध्यान रहे वह काले रंग का ना हो क्योंकि काला रंग किसी के भी जीवन में नकारात्मकता लेकर आता है. ऐसे में आप रक्षाबंधन पर कभी भी बहन को काले कपड़े या काले रंग की चीजें उपहार में ना दें. 3. जूते-चप्पल: Footwear ऐसा माना जाता है कि जूते-चप्पल का संबंध शनि देव से होता है. Raksha Bandhan 2025 ऐसे में आप कभी भी अपनी बहन को जूते-चप्पल जैसी चीजें उपहार में ना दें. इससे उसके जीवन में कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं. 4. घड़ी: Watch आजकल मार्केट में कई प्रकार की घड़ी मौजूद हैं, इनमें स्मार्टवॉच भी शामिल हो गई है, लेकिन घड़ी को बेहद अशुभ माना जाता है क्योंकि घड़ी से व्यक्ति का अच्छा और बुरा समय जुड़ा होता है. आपको बहनों को घड़ी भूलकर भी नहीं देना चाहिए. 5. नुकीली चीजें: sharp objects हिंदू धर्म में नुकीली चीजों को उपहार के रूप में देना शुभता के आधार पर नहीं देखा जाता. ऐसा माना जाता है कि जब आप किसी को नुकीली चीजें देते हैं तो इससे आपके रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. 6. कांच का सामान :Glassware कांच के बर्तन उपहार में देना अक्सर अशुभ माना जाता है। कांच की नाजुकता को रिश्ते के साथ भी जोड़ा जाता है। माना जाता है कि जिस तरह से ये फ्रेजाइल यानी भंगुर होता है, उसी तरह से इसे गिफ्ट करने से आपका रिश्ता भी टूट सकता है। 7. परफ्यूम:Perfume रिश्तों का महकते रहना जरूरी है। मगर, ये जरूरी नहीं है कि आपका दिया गया परफ्यूम सामने वाले व्यक्ति को भी पसंद आए। दरअसल, परफ्यूम का सेलेक्शन बेहद निजी मामला होता है। कुछ लोगों का मानना है कि कुछ सुगंधों में नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है, जो व्यक्ति के स्वास्थ्य या उसके औरा यानी आभामंडल को भी प्रभावित कर सकती है। लिहाजा, परफ्यूम को गिफ्ट में नहीं देना चाहिए। 

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