षटतिला एकादशी व्रत कथा

माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहते है। एक बार दालभ्य ऋषि ने पुलस्त्य ऋषि से पूछा- ‘हे ऋषि श्रेष्ठ! मनुष्य मृत्युलोक में ब्रह्महत्या आदि महापाप करते हैं और दूसरे के धन की चोरी तथा दूसरे की उन्तति देखकर ईर्ष्या आदि करते हैं, ऐसे महान पाप मनुष्य क्रोध, ईर्ष्या, आवेग और

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परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। वैसे इस एकादशी के कई अन्य नाम भी है जैसे की – जलझूलनी एकादशी, वामन एकादशी, डोल ग्यारस आदि। इस कथा को स्वयं

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शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा (Shukravar Santoshi Mata Vrat Katha)

शुक्रवार के दिन माँ संतोषी का व्रत-पूजन किया जाता है। इस पूजा के दौरान माता की आरती, पूजन तथा अंत में माता की कथा सुनी जाती है। आइए जानें! शुक्रवार के दिन की जाने वाली संतोषी माता व्रत कथा..संतोषी माता व्रत कथा-एक बुढ़िया थी, उसके सात बेटे थे। 6 कमाने वाले थे जबकि एक निक्कमा

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अथ श्री बृहस्पतिवार व्रत कथा | बृहस्पतिदेव की कथा (Shri Brihaspatidev Ji Vrat Katha)

॥ अथ श्री बृहस्पतिवार व्रत कथा ॥भारतवर्ष में एक प्रतापी और दानी राजा राज्य करता था। वह नित्य गरीबों और ब्राह्मणों की सहायता करता था। यह बात उसकी रानी को अच्छी नहीं लगती थी, वह न ही गरीबों को दान देती, न ही भगवान का पूजन करती थी और राजा को भी दान देने से

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Hanuman Ji Vrat Katha: मंगलवार के व्रत में पढ़ें ये व्रत कथा और इस विधि से पूजन करने से प्रसन्न होंगे बजरंगबली

Hanuman Ji Vrat Katha: हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है. इस दिन हनुमान जी विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है. Hanuman Ji Vrat Katha: हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है. इस दिन हनुमान जी की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यता है

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Shani Pradosh Vrat Katha : आज प्रदोष काल में पूजा के समय पढ़े ये व्रत कथा

हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) रखा जाता है. ये व्रत महादेव को समर्पित है और उन्हें अत्यंत प्रिय है. कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय जब महादेव ने संसार को बचाने के लिए विषपान किया था, उस दिन त्रयोदशी (Trayodashi) तिथि थी. तब सभी देवताओं ने उनका आभार व्य​क्त करने के लिए प्रदोष

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क्‍या है होलाष्‍टक का अर्थ, क्‍या इस समय उग्र रहते हैं ग्रह?

होलाष्‍टक का अर्थहोलाष्टक शब्द होली और अष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है. इसका अर्थ होता है होली से पहले के आठ दिन. इसी दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो जाती है.  होलाष्‍टक की अशुभता क्‍या है?ज्‍योतिष के अनुसार, होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में होते हैं.

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संपूर्ण महामृत्युंजय मंत्र, जानें जप विधि, अर्थ एवं इससे होने वाले लाभ

आज महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव की आराधाना के लिए समर्पित होता है। ऐसे में आज हम आपको उनके सबसे प्रभावशाली महामृत्युंजय मंत्र के बारे में बता रहे हैं। महामृत्युंजय मंत्र के जाप की विधि क्या है? महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है? महामृत्युंजय मंत्र के जाप से होने वाले लाभ क्या हैं? संपूर्ण महामृत्युंजय

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बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है

वसंत पञ्चमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। … वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था।वसंत पञ्चमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्यौहार है। इस

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भागवत कथा प्रसंग: कुंती ने श्रीकृष्ण से दुख क्यों माँगा? (Kunti Ne Shrikrishna Se Upahar Mein Dukh Kyon Manga)

महाभारत का युद्ध खत्म हो गया था। युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर की राजगादी संभाल ली थी। सब कुछ सामान्य हो रहा था। एक दिन वो घड़ी भी आई जो कोई पांडव नहीं चाहता था। भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका लौट रहे थे। सारे पांडव दु:खी थे। श्रीकृष्ण उन्हें अपना शरीर का हिस्सा ही लगते थे, जिसके अलग होने

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श्री सत्यनारायण कथा – प्रथम अध्याय (Shri Satyanarayan Katha Pratham Adhyay)

एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, अठ्ठासी हजार ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती है? तथा उनका उद्धार कैसे होगा? हे मुनि श्रेष्ठ ! कोई ऎसा तप बताइए जिससे थोड़े समय में ही पुण्य मिलें और

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सकट चौथ व्रत कथा: एक साहूकार और साहूकारनी (Sakat Chauth Pauranik Vrat Katha – Ek Sahukar Aur Ek Sahukarni)

एक साहूकार और एक साहूकारनी थे। वह धर्म पुण्य को नहीं मानते थे। इसके कारण उनके कोई बच्चा नहीं था। एक दिन साहूकारनी पडोसी के घर गयी। उस दिन सकट चौथ था, वहाँ पड़ोसन सकट चौथ की पूजा करके कहानी सुना रही थी।साहूकारनी ने पड़ोसन से पूछा: तुम क्या कर रही हो?तब पड़ोसन बोली कि आज

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