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Masik Shivratri 2025: अगस्त में कब है मासिक शिवरात्रि? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व

Masik Shivratri 2025: भक्तों के लिए मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की कृपा पाने का एक पावन अवसर होता है. हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. यह व्रत और पूजा विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है. सावन माह की शिवरात्रि के बाद अब भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि आने वाली है, जो बेहद शुभ मानी जाती है. Masik Shivratri 2025: प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और भक्त इस दिन उनकी पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. Masik Shivratri अगर आप भी अगस्त 2025 में आने वाली मासिक शिवरात्रि के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है. यहां हम आपको इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा के महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे. Masik Shivratri 2025 : प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस शुभ दिन पर देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना की जाती है और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति के लिए उपवास भी रखा जाता है। Masik Shivratri मान्यता है कि ऐसा करने से भोलेनाथ अपने भक्तों को सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस समय वैशाख माह चल रहा है। Kab Hai August Masik Shivratri: कब है अगस्त 2025 की मासिक शिवरात्रि पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 21 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, यह तिथि अगले दिन यानी 22 अगस्त को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर इसका समापन होगा. मासिक शिवरात्रि की पूजा निशाकाल (रात के समय) में की जाती है, इसलिए इस बार मासिक शिवरात्रि 21 अगस्त 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी. मासिक शिवरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा के लिए निशाकाल का समय सबसे शुभ माना जाता है. 21 अगस्त की रात, पूजा का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. इस दौरान भक्त भगवान शिव की विशेष पूजा और अभिषेक कर सकते हैं. मासिक शिवरात्रि की पूजा का महत्व मासिक शिवरात्रि का व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं: जिन लोगों के विवाह में रुकावटें आ रही हैं, Masik Shivratri उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए. माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है. मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से जीवन में सुख-शांति आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं. कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को भगवान शिव उनकी इच्छा के अनुसार फल देते हैं. Masik Shivratri मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपने सभी पापों से मुक्ति मिलती है और वह मोक्ष की ओर अग्रसर होता है. सावन शिवरात्रि पर भद्रावास योग, जलाभिषेक और पूजा के लिए चार पहर का समय जान लें पूजा-विधि: इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। शिवलिंग का गंगा जल, दूध, आदि से अभिषेक करें। भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की पूजा अर्चना भी करें। भगवान गणेश की पूजा अवश्य करें। किसी भी शुभ कार्य से पहलेभगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। भोलेनाथ का अधिक से अधिक ध्यान करें। ऊॅं नम: शिवाय मंत्र का जप करें। भगवान भोलेनाथ को भोग लगाएं। पूजा सामग्री लिस्ट : मासिक शिवरात्रि की पूजा के लिए पंचामृत के लिए दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल,फल,फूल, मिठाई कच्चा दूध, चंदन, धूप-दीप, भांग,धतूरा, बिल्वपत्र, शिव परिवार की प्रतिमा या तस्वीर, पंचमेवा, इत्र, कपूर ,रोली,मौली, जनेऊ समेत पूजा की सभी सामग्री एकत्रित कर लें। शिवजी को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर अर्पित करें ये चीजें– जल, दूध, दही, शहद, इत्र, घी, चंदन।

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Sawan Amavasya 2025: कब पड़ेगी सावन महीने की अमावस्या? जानें इस दिन किन कामों की है सख्त मनाही

Sawan Amavasya 2025: श्रावण मास की अमावस्या पर कुंडली और जीवन से जुड़े तमाम तरह के दोषों को दूर करने के लिए पूजा के कौन से उपाय प्रभावी माने गये हैं? इस दिन किस कार्य को करना और किस कार्य को भूलकर भी नहीं करना चाहिए, जानने के लिए पढ़ें ये लेख. Sawan Amavasya 2025 Date: पवित्र श्रावण मास को शिव की साधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है. इस मास में तमाम पर्वों के साथ जो अमावस्या पड़ती है, उसे हरियाली अमावस के नाम से जाना जाता है. अमावस्या तिथि को मंत्र सिद्धि, पितृ कार्य और स्नान-दान आदि के लिए फलदायी माना गया है. पंचांग के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या तिथि इस साल 24 जुलाई को प्रात:काल 02:28 बजे से प्रारंभ होकर 25 जुलाई 2025 को पूर्वाह्न 12:40 बजे तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार स्नान-दान और पितृपूजा आदि कार्य के लिए 24 जुलाई 2025 को ही अमावस्या मान्य होगी. आइए जानते हैं कि श्रावण अमावस्या के दिन शुभ फल की प्राप्ति के लिये क्या करना और अशुभ फल से बचने के लिए क्या नहीं करना चाहिए.  Sawan Amavasya 2025: कब पड़ेगी सावन महीने की अमावस्या सावन अमावस्या शुभ योग: Sawan Amavasya Auspicious Yoga Sawan Amavasya 2025: ज्योतिषियों की मानें तो हरियाली अमावस्या पर हर्षण योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इनमें गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग प्रमुख हैं। इन योग में देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक की हर एक मनोकामना पूरी होगी। साथ ही सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलेगी। श्रावण अमावस्या में क्या न करें: What not to do in Shravan Amavasya सनातन परंपरा में न सिर्फ श्रावण बल्कि अन्य मासों में भी पड़ने वाली अमावस्या को लेकर कुछेक नियम बताए गये है. जैसे अमावस्या के दिन शुभ कार्यों को करने की मनाही है. ऐसे में इस दिन किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य से बचें. इस दिन व्यक्ति लंबे समय से वीरान और बंद पड़े अंधेरे स्थान पर नहीं जाना चाहिए. Sawan Amavasya 2025 इसी प्रकार अमावस्या के दिन किसी का प्रयोग हुआ कपड़े, जूते अथवा अन्य कोई सामान नहीं लेना चाहिए. अमावस्या के दिन व्यक्ति को किसी के साथ वाद-विवाद से बचना चाहिए. शास्त्रों में अमावस्या के दिन केश और नाखून काटने की भी मनाही है.  श्रावण अमावस्या में क्या करें:What to do in Shravan Amavasya Sawan Amavasya 2025 : श्रावण अमावस्या के दिन नदी अथवा सरोवर तीर्थ आदि पर स्नान-ध्यान और दान करना अत्यंत ही पुण्यदायी माना गया है.  श्रावण मास की अमावस्या पर पेड़-पौधे लगाना तथा दान करना अत्यंत ही शुभ माना गया है. ऐसे में इस​ दिन आप अपने पितरों की याद में पौधे लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.  यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष है तो पितरों के लिए श्राद्ध तथा उनके नाम से जरूरतमंद लोगों को धन और अन्न आदि का दान करना चाहिए.  श्रावण मास की अमावस्या के दिन गाय को चारा खिलाएं तथा उनकी सेवा करें. श्रावण अमावस्या के दिन खराब सामान घर से निकाल कर पूरे घर में दीये आदि से प्रकाश करना चाहिए. इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दीया जरूर जलाएं.  कुंडली में कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए श्रावण अमावस्या के दिन विधि-विधान से रुद्राभिषेक करें. 

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Sawan Shivratri 2025: सावन शिवरात्रि पर भद्रावास योग, जलाभिषेक और पूजा के लिए चार पहर का समय जान लें

Sawan Shivratri 2025: सावन मास की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो भोले बाबा पर जल अर्पित करता है, उसकी भोलेबाबा सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।   Sawan Shivrati 2025 Jalabhishek time: सावन मास की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो भोले बाबा पर जल अर्पित करता है, उसकी भोलेबाबा सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। Sawan Shivratri 2025 इस बार सावन शिवरात्रि ग्रहों का उत्तम संयोग रहेगा। इस समय गुरु मिथुन राशि में है, सूर्य कर्क राशि में शनि मीन राशि में हैं और शुक्र कर्क राशि में है। इसके अलावा ग्रहों के कारणइस दिन सर्वार्थ सिद्धि, गजकेसरी, नवपंचम राजयोग बन रहे हैं। इसके अलावा शिवरात्रि पर भद्रावास योग भी रहेगा। सावन शिवरात्रि पर भद्रा का समय सुबह 5:37 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक रहेगा। Sawan Shivratri 2025 वैसे तो सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, लेकिन शिवरात्रि परशिवभक्त शिवालयों में जलाभिषेक कर शिव की पूजा अर्चना में करते हैं। Sawan Shivratri 2025: इस साल शिवरात्रि का पर्व 23 जुलाई बुधवार को मनाया जाएगा। इस साल सावन शिवरात्रि की शुरुआत 23 जुलाई को सुबह 4 बजकर 39 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन, यानी 24 जुलाई को अर्धरात्रि में 2 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी।ऐसे में श्रद्धालु शिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त में भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं। Sawan Shivratri 2025: सावन शिवरात्रि पर भद्रावास योग Sawan Shivratri 2025 Date: सावन शिवरात्रि की तिथि  सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आरंभ: 23 जुलाई,  प्रातः  04:39 मिनट परसावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि समाप्त:24 जुलाई,  देर रात 02:28  मिनट पर इस तरह 23 जुलाई को सावन माह की शिवरात्रि मनाई जाएगी। सावन शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त:Auspicious time of Sawan Shivratri निशिता काल पूजा समय: 23 जुलाई,  12: 07 मिनट से  12: 48  मिनट तक  भद्रावास योग:  दोपहर 03:31 मिनट तकहर्षण योग: दोपहर 12:35 मिनट से 4 प्रहर का पूजन समय :4 prahar puja time प्रथम प्रहर- सांय  6:59 से रात 9:36 तकद्वितीय प्रहर- रात्रि 9:36 से 12:13 तकतृतीय प्रहर- रात्रि  12:13 से देर रात्रि 2:50 तकचतुर्थ प्रहर-  देर रात्रि  2:50 प्रातः 5:27 तक सावन शिवरात्रि व्रत पारण का समय: Time of breaking of Saavan Shivratri fast सावन शिवरात्रि व्रत पारण : 24 जुलाई 2025, प्रातः 05:27 मिनट से शुरू होगा। सावन शिवरात्रि पर इस विधि से करें पूजा :Worship with this method on Sawan Shivratri सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर मंदिर को स्वच्छ करें।  फिर व्रत का संकल्प लें। अब  गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर यानी पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।  इसके उपरांत बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल, चंदन, फल और धूप-दीप अर्पित करें।  अब भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करें।  संभव हो तो रात्रि जागरण करें।  शिवरात्रि के अगले दिन शुभ मुहूर्त पर व्रत का पारण करें।  शिव प्रार्थना मंत्र:shiva prayer mantra करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं ।विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥ शिव नमस्कार मंत्र:Shiva Namaskar Mantra शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।। शिव मूल मंत्र: Shiva Mool Mantra ॐ नमः शिवाय॥ रूद्र मंत्र: Rudra mantra ॐ नमो भगवते रूद्राय । रूद्र गायत्री मंत्र: Rudra Gayatri Mantra ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवायधीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ महामृत्युंजय मंत्र:Mahamrityunjaya Mantra: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Sawan 2025: जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में होता है ये बड़ा अंतर, जानें पूजा के नियम और महत्त्व

Sawan 2025: श्रावण के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे जलाभिषेक कहा जाता है। इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण विधि है रुद्राभिषेक। आइए जानते हैं कि जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या अंतर होता है। Jalabhishek and Rudrabhishek: क्या आप जानते हैं कि जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या फर्क है? जलाभिषेक और रुद्राभिषेक दोनों ही शिवभक्ति के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। Sawan 2025 एक सरल आस्था की अभिव्यक्ति है, तो दूसरा गहराई से जुड़ी वैदिक परंपरा। दोनों का अपना अलग महत्त्व है और शिवजी हर उस श्रद्धा को स्वीकार करते हैं जो सच्चे मन से की जाए। इस लेख में जानिए दोनों पूजाओं की विधि, नियम, महत्व और धार्मिक दृष्टिकोण से इनका महत्व। Sawan 2025 Jalabhishek vs Rudrabhishek: शिवभक्तों के लिए विशेष माने जाने वाले श्रावण मास की शुरुआत इस बार 11 जुलाई 2025 से चुकी है। यह महीना भगवान शिव की पूजा, व्रत, उपवास और कांवड़ यात्रा जैसे अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रावण के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे जलाभिषेक कहा जाता है। Sawan 2025 इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण विधि है रुद्राभिषेक, जो वैदिक मंत्रों और विशेष सामग्री के साथ किया जाता है। कई बार लोग इन दोनों पूजा विधियों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर होता है। आइए जानते हैं कि जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या अंतर होता है Sawan 2025: जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में होता है ये बड़ा अंतर क्या होता है जलाभिषेक: What is Jalabhishek? जलाभिषेक का अर्थ है शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करना। Sawan 2025 यह सबसे सरल और प्रचलित अभिषेक विधि है, जिसे कोई भी भक्त आसानी से कर सकता है। विशेष रूप से श्रावण मास में भक्तजन सुबह उठकर शिव मंदिर जाते हैं और शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। यह एक सामान्य लेकिन अत्यंत पुण्यदायक पूजा मानी जाती है। जलाभिषेक की विधि: Method of Jalabhishek प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें कांसे या तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल अर्पित करें जल के साथ बेलपत्र, आक, धतूरा और सफेद फूल भी अर्पित करें महत्त्व: importance जलाभिषेक से मन की शुद्धि होती है, पापों का नाश होता है और व्यक्ति में मानसिक शांति आती है। Sawan 2025 यह शिवभक्ति की पहली और सरल सीढ़ी मानी जाती है। क्या होता है रुद्राभिषेक :What is Rudrabhishek? रुद्राभिषेक एक विशेष वैदिक प्रक्रिया है जिसमें ऋग्वेद या यजुर्वेद के रुद्र सूक्त मंत्रों का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद आदि से अभिषेक किया जाता है। यह पूजा विशेष अवसरों पर ब्राह्मणों द्वारा की जाती है और इसमें मंत्रोच्चारण की विशेष भूमिका होती है। रुद्राभिषेक की विधि: Method of Rudrabhishek शुभ मुहूर्त में पंडित के साथ पूजा आरंभ करें पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से शिवलिंग का अभिषेक करें रुद्र सूक्त, शिवोपासना मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र आदि का उच्चारण करें अंत में आरती, प्रसाद वितरण और शिव चालीसा का पाठ करें महत्त्व: importance रुद्राभिषेक अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इससे कष्टों का निवारण, ग्रहदोष शांति, स्वास्थ्य लाभ और समृद्धि प्राप्त होती है। विशेष रूप से श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि या जन्मदिन/विवाह के अवसर पर यह करवाना अत्यंत फलदायक होता है। उद्देश्य और प्रक्रिया में महत्वपूर्ण अंतर:Important differences between purpose and process जलाभिषेक और रुद्राभिषेक दोनों ही भगवान शिव की आराधना के प्रभावशाली माध्यम हैं, लेकिन इनकी विधि, उद्देश्य और प्रक्रिया में महत्वपूर्ण अंतर होता है। जलाभिषेक एक सरल प्रक्रिया है जिसमें भक्त केवल शुद्ध जल को शिवलिंग पर अर्पित करता है। यह पूजा कोई भी व्यक्ति बिना पंडित की सहायता के कर सकता है और यह किसी भी दिन की जा सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य सरल भक्ति के माध्यम से मन की शुद्धि और शांति प्राप्त करना होता है। वहीं दूसरी ओर, रुद्राभिषेक एक विस्तृत और वैदिक प्रक्रिया है जिसमें विविध पवित्र द्रव्यों जैसे दूध, दही, घी, शहद आदि से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। इस पूजन में रुद्रसूक्त, महामृत्युंजय मंत्र और अन्य वैदिक मंत्रों का उच्चारण आवश्यक होता है, अतः इसे पंडित की उपस्थिति में ही संपन्न किया जाता है। रुद्राभिषेक विशेष रूप से श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि या किसी विशेष अवसर पर किया जाता है। इसका उद्देश्य विशेष फल की प्राप्ति, ग्रहदोषों की शांति और मानसिक व आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करना होता है।

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Shiv Ji Ki Puja: शिवलिंग पर भूल से भी न चढ़ाएं ये फल, रूठ सकते हैं भोलेनाथ

Shiv Ji Ki Puja: सावन का महीना चल रहा है, भक्तों की भारी भीड़ रोजाना शिवालयों पर उमड़ रही है। भक्त भगवान शिव की पसंदीदा चीजों का चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। ऐसे में कुछ फल ऐसे भी हैं जो भोलेनाथ को नहीं चढ़ाए जाने चाहिए…. Shiv Ji Ki Puja: श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस साल यह पावन महीना 11 जुलाई से प्रारंभ हो चुका है और यग 9 अगस्त तक चलेगा। इस अवधि में भक्तगण हर दिन शिवजी की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। जलाभिषेक, मंत्र जाप, व्रत और विविध प्रकार के फल-फूलों से शिव की आराधना की जाती है। माना जाता है कि भगवान शिव जल्दि प्रसन्न हो जाते हैं। यदि सच्चे मन से केवल जल अर्पित किया जाए, तो भोलेनाथ वह भी स्वीकार कर लेते हैं। शिव जी को सामान्य प्रसाद प्रिय है, लेकिन कुछ फल ऐसे भी हैं, जिन्हें उनकी पूजा में अर्पित नहीं करना वर्जित माना जाता है। आइए जानते हैं कि ये फल कौन से हैं… Shiv Ji Ki Puja: शिवलिंग पर भूल से भी न चढ़ाएं ये फल केला:(Banana) पुराणों और शास्त्रों में कहा गया है कि केले के उत्पत्ति भगवान शिव के रौद्र रूप और ब्राह्मण के श्राप के कारण हुई थी। ऐसे में कभी भी शिवलिंग पर केला नहीं चढ़ाना चाहिए। नारियल(Coconut) कहते हैं नारियल की उत्पत्ति समुद्र मंथन की प्रक्रिया के समय हुई और इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक भी माना जाता है। मां लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं। ऐसे में माना जाता है कि भगवान शिव को नारियल नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि यह शिव को लक्ष्मी जी अर्पित करने जैसा है, जो कि शास्त्रों के मुताबिक वर्जित है। जामुन(Jamun) जामुन को भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों में इसे भी शुद्ध नहीं माना गया है। अनार(Pomegranate) शिवलिंग पर संपूर्ण अनार नहीं चढ़ाना चाहिए। Shiv Ji Ki Puja धार्मिक मान्यता है कि अनार पूरी तरह से शुद्ध नहीं है इसी कारण इसे शिवजी को अर्पित करना उचित नहीं माना जाता। हालांकि, अनार के रस से अभिषेक किया जा सकता है। कटहल(Jackfruit) Shiv Ji Ki Puja:भगवान शिव को भूलकर भी कटहल नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि धार्मिक मान्यता है कि कटहल में तमो गुण विद्यमान होता है। जो कि राक्षसी प्रवृत्ति को जन्म देता है।

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Sawan Shivratri 2025 कब है, सावन मासिक शिवरात्रि जानें व्रत की तिथि और महत्व

Sawan Shivratri 2025: सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ अवसर है. यह दिन विशेष व्रत, पूजा और भक्ति से जुड़ा होता है, जो मनोकामनाओं की पूर्ति और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक माना जाता है. जानें इस बार शिवरात्रि की तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त. Sawan Shivratri 2025:सावन मासिक शिवरात्रि 2025: तिथि और समय निशीथ काल में पूजा का महत्व Sawan Shivratri 2025 पूजा का शुभ समय (निशीथ काल): रात 12:07 से 12:48 बजे तक इसी समय शिवलिंग पर जलाभिषेक, पंचामृत, बेलपत्र, भस्म, धतूरा आदि चढ़ाकर पूजन करने से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है. यह काल शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. इस बार बन रहे हैं विशेष योग कामिका एकादशी 2025: कब और कैसे करें व्रत का पारण, जानें सही समय और महत्व सावन शिवरात्रि व्रत के लाभ 23 जुलाई 2025: पंचांग अनुसार प्रमुख समय Sawan Shivratri 2025 सावन मासिक शिवरात्रि केवल एक व्रत नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना और शिव कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर है. इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत, जप, दान और पूजन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शुभता और आत्मिक शांति का संचार होता है.

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Sawan Bael Patra: सावन में बेलपत्र चढ़ाने का महत्व और नियम

Sawan Bael Patra: भोलेनाथ की पूजा में बेलपत्र का महत्व हर अनुष्ठान में है क्योंकि इसके बिना शिवजी की पूजा पूरी नहीं होती। मान्यता है कि बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाने से महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है जैसे कि बेलपत्र की तीनों पत्तियों पर चंदन लगाना और सूखे पत्ते नहीं चढ़ाना। Sawan Right Way Of Offering Bael Patra: सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय है. इस महीने में कई ऐसी चीजें हैं, जो भगवान शिव को जरूर अर्पण करनी चाहिए. मान्यता है कि इससे प्रभु बेहद खुश होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं जरूर पूरी करते हैं. इसके साथ ही घर में सुख-समृद्धि की भी बढ़ोतरी होती है. वहीं, सावन के महीने में बेलपत्र का भी खास महत्व होता है, क्योंकि बेलपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है. बेलपत्र दूर करता है सारी परेशानियां:Belpatra removes all the troubles शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि अगर सावन के महीने में, विशेषकर सोमवार के दिन, एक भी शुद्ध और पवित्र बेलपत्र विधि-विधान के साथ Sawan Bael Patra भगवान शिव के शिवलिंग पर अर्पण कर दिया जाए, तो भक्त के जीवन में रोग, दोष, कष्ट, दुख और काल सब खत्म हो जाता है. लेकिन बेलपत्र चढ़ाने के भी कुछ खास नियम होते हैं. क्या हैं वे नियम? जानते हैं…… Sawan Bael Patra: बेलपत्र की तीनों पत्तियों पर लगाएं चंदन बेल पत्र की पत्तियां त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। यह भगवान शिव के त्रिशूल का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। यह त्रिगुण यानी सत्व, रजस और तमस का भी प्रतीक हैं। ये तीन अवस्थाओं वात, पित्त और कफ प्रकृति को भी दर्शाती हैं।  इसीलिए शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र हमेशा तीन पत्ती वाला होना चाहिए। टूटी हुई, कटी-फटी और खंडित बेलपत्र को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। पूर्ण और अक्षत बेलपत्र ही भगवान शिव को प्रिय है। इसे चढ़ाते समय तीनों पत्तियों पर चंदन जरूर लगाएं।  सूखे पत्ते न चढ़ाएं : Do not offer dry leaves हमेशा ताजा और स्वच्छ बेलपत्र ही भोलेनाथ को चढ़ाना चाहिए। सूखा या मुरझाया Sawan Bael Patra बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। यदि ताजा बेलपत्र नहीं मिले, तो शिवलिंग पर चढ़ाए गए बेलपत्र को उठा लें। इसके बाद उसे धोकर फिर से शिव पूजन में प्रयोग कर सकते हैं।  दरअसल, विधान है कि बेलपत्र कभी निर्माल्य नहीं होता है। शास्त्रों के अनुसार, बेलपत्र को 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता है। बशर्ते वह सूखा न हो और मुरझा न गया हो।  क्या हैं बेलपत्र चढ़ाने के खास नियम ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि बेलपत्र चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ बहुत खुश होते हैं. लेकिन Sawan Bael Patra बेलपत्र नियमपूर्वक चढ़ाना चाहिए, जो इस प्रकार हैं. कटा-फटा न हो बेलपत्र बेलपत्र हमेशा साफ-सुथरा ही भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए. कटा-फटा या मुरझाया हुआ बेलपत्र भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए. तीन दलों का हो भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर हमेशा तीन दलों वाला ही Sawan Bael Patra बेलपत्र चढ़ाना चाहिए. तीन दल वाला बेलपत्र त्रिदेव का प्रतीक हैं- ब्रह्मा, विष्णु और महेश. वहीं, अगर पांच दलों वाला बेलपत्र मिल जाए तो वह बहुत शुभ होता है. बेलपत्र की डंडी जलहरी की तरफ रखें लोग जैसे-तैसे शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पण कर देते हैं. इससे आपकी पूजा व्यर्थ हो सकती है. शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा नियमपूर्वक अर्पण करें, जैसे बेलपत्र की जो डंडी होती है, वह जलहरी की तरफ रहनी चाहिए और जो पत्ता होता है यानी चिकना भाग, वह शिवलिंग के मस्तक पर होना चाहिए. राम नाम लिखा होना चाहिए भगवान भोलेनाथ को राम नाम बेहद प्रिय है. अगर आप बेलपत्र पर राम नाम लिखकर शिवलिंग पर अर्पण करते हैं, तो दोगुना फल मिलता है और आपकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं. इन नियमों का ध्यान रखकर बेलपत्र चढ़ाने से भक्त की सारी समस्याएं खत्म होने की मान्यता है.

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Sawan Food: सावन व्रत में क्या खाएं, क्या न खाएं ? पूरी सूची देखें

Sawan Food: सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है. इस पूरे माह भोलेनाथ की भक्ति की जाती है. लेकिन सावन के महीने में कुछ चीजों को खाने की मनाही होती है. Sawan Somvar Vrat: सावन सोमवार व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है, खासकर खान-पान से जुड़ी बातों का। इस दिन कुछ चीजों का सेवन वर्जित माना गया है, जिनका पालन न करने से व्रत का फल अधूरा रह सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि सावन सोमवार व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं… सावन का महीना भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे पावन अवसर माना जाता है। Sawan Food इस माह में भोलेनाथ के साथ-साथ माता पार्वती की उपासना की जाती है। विशेष रूप से सावन सोमवार का व्रत बेहद कल्याणकारी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। हालांकि, इस व्रत को करते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। अगर इन नियमों का पालन न किया जाए, तो इससे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। ऐसे में आइए जानते हैं सोमवार व्रत के दौरान किन चीजों का सेवन वर्जित माना गया है और किन चीजों का सेवन करना चाहिए। Sawan Food सावन सोमवार व्रत में क्या खाना चाहिए- (What should be eaten during the Sawan Monday fast) 1. सात्विक भोजन- Sawan Food सावन सोमवार व्रत के दौरान फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा जैसी चीजें खानी चाहिए. यह भगवान शिव को भी अर्पित की जाती हैं. इसी के साथ यह शरीर को एनर्जी भी देती है. 2. फल और मेवे-  ताजे फल जैसे केला, सेब, अंगूर और सूखे मेवे जैसे बादाम, अखरोट आदि व्रत में खाए जाते है.  4. बेलपत्र- शिव जी की पूजा में बेलपत्र को खासतौर पर चढ़ाया जाता है. आप इसे प्रसाद के तौर पर खा भी सकते हैं.  सावन सोमवार व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए- (What should not be eaten during the Sawan Monday fast) 1. प्याज-लहसुन (Onion Garlic) सावन के महीने में आपको प्याज और लहसुन खाने से परहेज करना चाहिए. यह तामसिक भोजन माने जाते हैं इसलिए व्रत के दौरान इन्हें नहीं खाया जाता है. इसी के साथ दही, छाछ, कढ़ी जैसी ठंडी चीजों के सेवन से भी परहेज करना चाहिए. 2. मांस-मछली और अंडा (Meat and Egg) व्रत और पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से परहेज करना चाहिए. पूरे एक महीने तक मांसाहारी भोजन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए और शुद्ध और सात्विक भोजन और करना चाहिए. 3. नमक (Salt) Sawan Food सावन सोमवार व्रत में सादे नमक का उपयोग नहीं किया जाता है. केवल सेंधा नमक ही खाया जाता है क्योंकि इस नमक को ही शुद्ध माना जाता है. 4. शराब- (Alcohol) सावन के दिनों और सोमवार व्रत शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. इसका सेवन इन दिनों वर्जित माना जाता है.

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Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि के दिन जरूर करें ये उपाय, बिना रुकावट पूरा होगा हर काम

Masik Shivratri 2025: मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और विधिपूर्वक शिव पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। May Masik Shivratri 2025 Upay: हर माह आने वाली शिवरात्रि का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अति शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना के साथ-साथ अन्न, वस्त्र और अन्य जरूरतमंद चीजों का दान करते हैं। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और विधिपूर्वक शिव पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। Masik Shivratri puja Mein Jarur kare ye kaam: पूजा में जरूर करें ये काम मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करें। इसके साथ ही इस भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र का जाप 11 बार रुद्राक्ष की माला से करें। ऐसा करने से शिव जी कृपा आपके ऊपर बनी रहती है। नहीं सातएगी धन की कमी अगर आप धन संबंधी परेशानियां झेल रहे हैं, तो इसके लिए मासिक शिवरात्रि के दिन आपको शिवलिंग पर गन्ने का रस जरूर अर्पित करें। ऐसा करने से आपको अपनी स्थिति में काफी लाभ देखने को मिल सकता है। Masik Shivratri साथ ही धन लाभ के योग भी बनने लगते हैं। नहीं पड़ेगा ग्रहों का अशुभ प्रभाव मासिक शिवरात्रि के दिन आप पूजा के दौरान शिवलिंग का शहद से अभिषेक कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे जातक को अशुभ ग्रहों के प्रभाव में मुक्ति मिल सकती है। Masik Shivratri वहीं शहद का संबंध गुरु ग्रह से माना गया है, ऐसे में मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग का शहद से अभिषेक करने से कुंडली में देवगुरु बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है। शिव जी के मंत्र 1. ॐ नमः शिवाय 2. ॐ नमो भगवते रूद्राय 3. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात 4. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् 5. कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

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Shiva Mantra: शिव के 5 दिव्य मंत्रों का करें नियमित जाप, जीवन में आएगा सुख-शांति

Shiv Mantra: भोलेनाथ अपने अनुयायियों पर अपनी कृपा बरसाते हैं, जिससे वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं. महादेव को अत्यधिक दयालु माना जाता है, इसलिए वे केवल एक लोटा जल से ही संतुष्ट हो जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र में महादेव के कुछ अद्भुत मंत्रों का उल्लेख किया गया है. यदि इन मंत्रों का जाप नियमों के अनुसार किया जाए, तो जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. आइए, शिवजी के चमत्कारिक मंत्रों के बारे में जानते हैं. Shiva Mantra: शिव के 5 दिव्य मंत्रों का करें नियमित जाप होगी आरोग्य की प्राप्ति 1. ॐ नमः शिवाय Shiva Mantra: यह मंत्र जीतना सरल है उतना प्रभावशाली भी माना गया है। यदि कोई साधक रोजाना इस मंत्र का जाप करता है तो उसे आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है। दूर होगा अकाल मृत्यु का भय 2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ Shiva Mantra: यह शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र है। माना जाता है कि रोजाना इस मंत्र का जप करने से व्यक्ति की अकाल मृत्यु का भय टाला जा सकता है। साथ ही व्यक्ति की आयु भी लंबी होती है और हर प्रकार के भय से भी मुक्ति मिलती है। इस मंत्र से होगी इच्छा पूरी 3. ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः यह शिव जी का रूद्र मंत्र है। माना जाता है कि प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो सकती है। आर्थिक स्थिति होगी मजबूत 4. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ यह शिव जी का बहुत ही प्रभावशाली मंत्र है। यदि कोई साधक रोजाना शिव जी का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप करता है तो उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। भय होगा दूर 5. ऊं पषुप्ताय नमः यह भी शिव जी का एक प्रभावशाली मंत्र है। पूजा के दौरान रोजाना इस शिव मंत्र का जाप करने से साधक को महादेव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।

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Sawan Somwar Vrat Katha In Hindi: इस कथा के बिना अधूरी है सावन सोमवार की पूजा, जरूर करें इसका पाठ

Sawan Somwar Vrat Katha: हिंदू धर्म की पवित्र परंपराओं में सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत केवल एक नियम नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मिक जुड़ाव की गहराई से जुड़ा एक दिव्य साधन है। यह व्रत न केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग है, बल्कि भगवान शिव के चरणों में समर्पण का प्रतीक भी है। सावन (Sawan Somwar Vrat Katha) का महीना बेहद पावन होता है। इस महीने के प्रत्येक सोमवार पर भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। साथ ही सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत रखा जाता है। इस व्रत की महिमा का वर्णन शास्त्रों में निहित है। भगवान शिव की पूजा से हर मनोकामना पूरी होती है। Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi: सावन सोमवार Somwar Vrat Katha के व्रत में कथा का पाठ करने का महत्‍व श‍िव पुराण में बहुत खास माना गया है। मान्‍यता है कि जो लोग सावन सोमवार का व्रत करते हैं उनको विधि विधान से पूजा करने के बाद व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। भगवान शिव का सबसे पहले दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है और फिर विधि विधान से पूजा करने के बाद सावन सोमवार के व्रत की कथा का पाठ करने से आपका व्रत संपूर्ण माना जाता है और पूजा का शुभ फल प्राप्‍त होता है। तो पढ़ें सावन सोमवार की व्रत कथा विस्‍तार से। Sawan Somwar Vrat Katha: सावन सोमवार की व्रत कथा मृत्युलोक में भ्रमण करने की इच्‍छा करके एक समय श्री भूतनाथ भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ मृत्युलोक में पधारे। भ्रमण करते-करते दोनों विदर्भ देशांतर्गत अमरावती नाम की अति रमणीक नगरी में पहुंचे। अमरावती नगरी स्‍वर्ग के सदृश सभी प्रकार के सुखों से परिपूर्ण थी। उसमें वहां के महाराज द्वारा बनवाया हुआ अति रमणीक शिवजी का मंदिर भी था। भगवान शंकर भगवती पार्वती के साथ इस मन्दिर में निवास करने लगे। Somwar Vrat Katha एक समय माता पार्वतीजी भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न देखकर बोली, हे महाराज आज तो हम दोनों चौंसर खेलेंगे। शिवजी ने प्राण प्रिया की बात को मान लिया और चौंसर खेलने लगे। उसी समय मन्दिर का पुजारी ब्राह्मण मन्दिर में पूजा करने आया। माता पार्वती ने पुजारी से प्रश्‍न किया पुजारी जी, बताओ इस बाजी में हम दोनों में से किसी जीत होगी? ब्राह्मण बिना विचारे जल्‍दी से बोल उठा कि महादेव जी की जीत होगी। थोड़ी देर में बाजी समाप्‍त हो गई और पार्वतीजी जीत हुई। Somwar Vrat Katha पार्वतीजी को बहुत गुस्सा आया और ब्राह्मण को झूठ बोलने के अपराध के कारण श्राप देने चलीं। भोलेनाथ ने पार्वती को बहुत समझाया लेकिन उन्होंने ब्राह्मण को कोढ़ी होने का शाप दे दिया। कुछ समय बाद पार्वती जी के श्रापवश पुजारी के शरीर में कोढ़ पैदा हो गया। वह बहुत अधिक दुखी रहने लगा। पूजारी को कष्ट भोगते हुए जब बहुत दिन गुजर गए तब एक दिन देवलोक की अप्‍सराएं शिवजी की पूजा करने के लिए उस मंदिर में पधारीं। Somwar Vrat Katha पुजारी के कोड़ के कष्ट को देखकर उन्हें बड़ी दया आई। उन्‍होंने उससे रोगी होने का कारण पूछा। पुजारी ने निसंकोच सारी बातें बता दीं। वे अप्‍सराएं बोलीं हे पुजारी, अब तुम अधिक दुःखी मत होना। सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत भक्तिभाव से करो। पुजारी ने अप्‍सराओं से व्रत की विधि पूछी। अप्‍सराओं ने बताया, सोमवार को भक्ति भाव से व्रत करो। साफ वस्‍त्र पहनो। संध्या व उपासना के बाद आधा सेर गेहूं का आटा लो और उसके तीन भाग कर लो। घी, गुड़, दीप, नैवेद्य, पूंगीफल, बेलपत्र, जनेऊ जोड़ा, चंदन, अक्षत पुष्‍पादि से प्रदोषकाल में भगवान शिव की पूजा करो। उसके बाद तीन भागों में से एक भाग शिवजी को अर्पण करो, बाकी दो शिवजी का प्रसाद समझकर उपस्थित लोगों में बांट दो और आप भी प्रसाद समझकर खाओ। इस विधि से सोलह सोमवार व्रत रखो। Somwar Vrat Katha सत्रहवें सोमवार को पाच-सेर पवित्र गेहूं के आटे की बाटी बनाओ, उसमें घी और गुड़ मिलाकर चूरमा बनाओ। भगवान भोलेनाथ को भोग लगाकर उपस्थित भक्तों में बांट दो। इसके बाद कुट्‌म्ब सहित प्रसाद लो तो शिवजी की कृपा से उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। “ऐसा कहकर अप्सराएं स्वर्ग को चली गईं। ब्राहाण ने यथाविधि षोड्श सोमवार व्रत किया तथा भगवान शिव की कृपा से रोग से मुक्ति पाकर आनन्द से रहने लगा। कुछ दिन बाद शिवजी और पार्वतीजी उस मन्दिर में पुनः पधारे। ब्राह्मण को निरोग देखकर पार्वती जी ने ब्राह्मण से रोग से मुक्त होने का उपाय पूछा। ब्राह्मण ने सोलह सोमवार व्रत कथा सुनाई। पार्वतीजी बहुत प्रसन्‍न हुईं। ब्राह्मण से व्रत विधि पूछकर स्‍वयं भी व्रत करने के लिए तैयार हो गई। व्रत करने के बाद उनकी मनोकामना पूरी हुई हुई और उनके रूठे बेटे स्वामी कार्तिकेय स्वय माता के आज्ञाकारी हुए। कार्तिकेय जी को अपना यह विचार परिवर्तन का रहस्य जानने की इच्छा हुई। वे माता से बोले हे माता। आपने ऐसा कौन सा उपाय किया जिससे मेरा मम आपकी ओर आकर्षित हो गया?” पार्वती जी ने वही षोड्श सोमवार व्रत कथा की कथा उनको सुना दी। कार्तिकय जी कहा इस व्रत को में भी करूंगा, क्योंकि मेरा प्रिय मित्र ब्राह्मण बहुत दुःखी दिल से परदेश गया है। मेरी इसमे मिलने की बहुत इच्छा है। कार्तिकेय जी ने भी इस व्रत को किया और उनका प्यारा मित्र मिल गया। मित्र ने इस आकस्मिक मिलन का भेद पूछा तो कार्तिकेय जी बोले हे मित्र। हमने तुम्हारे मिलने की इच्छा करके सोलह सोमवार का व्रत किया था। अब तो ब्राह्मण मित्र को अपने विवाह की बड़ी चिन्ता हुई। Somwar Vrat Katha उसने कार्तिकेय जी से व्रत की विधि पूछी और यथाविधि व्रत किया। व्रत के प्रभाव से जब वह किसी कार्य से विदेश गया तो वहां के राजा की लड़की का स्वयंवर था। राजा ने प्रण किया था कि जिस राजकुमार के गले में सब प्रकार से श्रृङ्गारित हथिनी माला डालेगी, मैं उसी के साथ अपनी प्यारी बेटी का विवाह कर दूंगा। शिवजी की कृपा से वह ब्राह्मण भी उस स्वयंवर को देखने की इच्छा से राज्यसभा में एक ओर जाकर बैठ गया। Somwar Vrat Katha नियत समय पर हथिनी आई और उसने जयमाला उस ब्राह्मण

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Sawan upay: सावन में कहां जलाएं दीया? जानिए 5 शुभ स्थान और उनका महत्व

Sawan upay: सावन के दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक के जीवन में मंगल का आगमन होता है। साथ ही घर में सुख समृद्धि एवं खुशहाली होती है। सावन महीने में दान करने से व्यक्ति को जीवन में अक्षय फल मिलता है। सावन सोमवार पर दो राशि ( Sawan upay ) के जातकों को लाभ मिलने वाला है। Sawan upay: वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 जुलाई को सावन माह का पहला सोमवार है। सावन सोमवार के दिन देवों के देव महादेव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस शुभ अवसर पर साधक गंगा स्नान कर देवों के देव महादेव का गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं। भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में आने वाली बलाएं भी टल जाती हैं। Sawan mah me shiv ji ko khush karne ke upay : श्रावण मास जिसे “सावन” भी कहा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का पांचवा माह होता है. यह मास धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. आपको बता दें कि श्रावण मास भगवान शिव Sawan upay का प्रिय माह है. इस महीने में विशेष रूप से सोमवार का व्रत रखकर शिवजी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है सावन माह में भोलेनाथ की आराधना करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस माह में आप पूजा पाठ के अलावा कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है… कैसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न: Sawan upay सावन के पवित्र महीने में रोजाना सुबह और प्रदोष काल में शिवलिंग के पास दीपक जलाने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं जो आपको शांति प्रदान करता है. आप इस माह में तुलसी और शमी के पौधे के पास दीपक जलाते हैं तो घर में सकारात्मकता आती है. इससे दुख-दरिद्र दूर होता है. इस माह में पीपल के पेड़ के नीचे भी दीपक जलाने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसे देव वृक्ष कहा गया है. मान्यता है इस पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश निवास करते हैं. Sawan upay आप प्रदोष काल में पीपल के वृक्ष के नीचे दीया जलाते हैं तो त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.  सावन माह में घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में लक्ष्मी जी का वास होता है. इसके अलावा सावन में स्नान के बाद नाग देवता का ध्यान करते हुए सुनसान स्थान में और घर के बाहर एक दीपक जरूर जलाएं. सावन के महीने में रोजाना पूजा घर में एक दीपक उत्तर मुंह करके भगवान शिव को अर्पित करने से कैलाश पर्वत पर विराजमान भगवान शिव का ध्यान करें. 

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