Poranik Katha:पौराणिक काल के 24 चर्चित श्रापों की कहानी
सनातन पौराणिक ग्रंथों में अनेक श्रापों का वर्णन मिलता है। हर श्राप के पीछे कोई न कोई कहानी जरूर मिलती है। आज हम आपको 24 ऐसे ही प्रसिद्ध श्राप और उनके पीछे की कथा बताएँगे। इस बात से क्रोधित होकर तारा ने राम को श्राप दिया कि वह अपनी पत्नी सीता को खो देंगे। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि अगले जन्म में उनकी मृत्यु वालि के हाथों होगी। 1- युधिष्ठिर का स्त्री जाति को श्राप Poranik Katha महाभारत के शांति पर्व के अनुसार, युद्ध समाप्त होने के बाद जब कुंती ने युधिष्ठिर को बताया कि कर्ण तुम्हारा बड़ा भाई था, तो पांडवों को बहुत दुख हुआ। तब युधिष्ठिर ने विधि-विधान पूर्वक कर्ण का भी अंतिम संस्कार किया। माता कुंती ने जब पांडवों को कर्ण के जन्म का रहस्य बताया, तो शोक में आकर युधिष्ठिर ने संपूर्ण स्त्री जाति को श्राप दिया कि “आज से कोई भी स्त्री गुप्त बात छिपा कर नहीं रख सकेगी।” Bagwan Shiv :क्यों आए भगवान शिव, महाकाली के पैरों के नीचे ? 2- ऋषि किंदम का राजा पांडु को श्राप महाभारत के अनुसार एक बार राजा पांडु शिकार खेलने वन में गए। उन्होंने वहां हिरण के जोड़े को मैथुन करते देखा और उन पर बाण चला दिया। वास्तव में वो हिरण व हिरणी ऋषि किंदम व उनकी पत्नी थी। तब ऋषि किंदम ने राजा पांडु को श्राप दिया कि जब भी आप किसी स्त्री से मिलन करेंगे। उसी समय आपकी मृत्यु हो जाएगी। इसी श्राप के चलते जब राजा पांडु अपनी पत्नी माद्री के साथ मिलन कर रहे थे, उसी समय उनकी मृत्यु हो गई। 3- माण्डव्य ऋषि का यमराज को श्राप माण्डव्य ऋषि एक महान तपस्वी और ऋषि थे। वे अपने ज्ञान और कर्म के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार, वे एक जंगल में तपस्या कर रहे थे। तभी, एक राजा अपनी सेना के साथ जंगल से गुजर रहा था। राजा ने देखा कि माण्डव्य ऋषि एक पेड़ के नीचे ध्यान में बैठे हैं। राजा ने सोचा कि यह पेड़ उसके महल के लिए बहुत अच्छा होगा। इसलिए, उसने अपने सैनिकों को पेड़ को काटने का आदेश दिया। माण्डव्य ऋषि ने पेड़ पर ध्यान नहीं दिया। सैनिकों ने पेड़ काटना शुरू कर दिया। माण्डव्य ऋषि ने जब यह देखा तो उन्होंने क्रोध से भरकर यमराज को श्राप दे दिया कि वे अगले जन्म में एक दासी के पुत्र के रूप में जन्म लेंगे। यमराज ने माण्डव्य ऋषि से माफी मांगी और कहा कि वे अनजाने में ऐसा कर बैठे हैं। माण्डव्य ऋषि ने अपना श्राप वापस ले लिया, लेकिन उन्होंने यमराज को एक शर्त रखी कि वे अगले जन्म में शूद्र योनि में जन्म लेंगे। यमराज ने इस शर्त को मान लिया और अगले जन्म में उन्हें विदुर के रूप में जन्म हुआ। विदुर एक महान ज्ञानी और राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने पांडवों की बहुत सहायता की। माण्डव्य ऋषि का श्राप एक महत्वपूर्ण सबक देता है। यह बताता है कि हमें किसी भी व्यक्ति को बिना सोचे-समझे दंड नहीं देना चाहिए। हमे हमेशा यह सोचना चाहिए कि उस व्यक्ति ने क्या गलती की है और उसका क्या कारण है। 4- नंदी का रावण को श्राप वाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार रावण भगवान शंकर से मिलने कैलाश गया। वहां उसने नंदी जी को देखकर उनके स्वरूप की हंसी उड़ाई और उन्हें बंदर के समान मुख वाला कहा। तब नंदी जी ने रावण को श्राप दिया कि बंदरों के कारण ही तेरा सर्वनाश होगा। 5- कद्रू का अपने पुत्रों को श्राप महाभारत के अनुसार ऋषि कश्यप की कद्रू व विनता नाम की दो पत्नियां थीं। कद्रू सर्पों की माता थी व विनता गरुड़ की। एक बार कद्रू व विनता ने एक सफेद रंग का घोड़ा देखा और शर्त लगाई। विनता ने कहा कि ये घोड़ा पूरी तरह सफेद है और कद्रू ने कहा कि घोड़ा तो सफेद हैं, लेकिन इसकी पूछ काली है। कद्रू ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए अपने सर्प पुत्रों से कहा कि तुम सभी सूक्ष्म रूप में जाकर घोड़े की पूछ से चिपक जाओ, जिससे उसकी पूछ काली दिखाई दे और मैं शर्त जीत जाऊं। कुछ सर्पों ने कद्रू की बात नहीं मानी। तब कद्रू ने अपने उन पुत्रों को श्राप दिया कि तुम सभी जनमजेय के सर्प यज्ञ मंं भस्म हो जाओगे। 6- उर्वशी का अर्जुन को श्राप महाभारत के युद्ध से पहले जब अर्जुन दिव्यास्त्र प्राप्त करने स्वर्ग गए, तो वहां उर्वशी नाम की अप्सरा उन पर मोहित हो गई। यह देख अर्जुन ने उन्हें अपनी माता के समान बताया। यह सुनकर क्रोधित उर्वशी ने अर्जुन को श्राप दिया कि तुम नपुंसक की भांति बात कर रहे हो। इसलिए तुम नपुंसक हो जाओगे, तुम्हें स्त्रियों में नर्तक बनकर रहना पड़ेगा। यह बात जब अर्जुन ने देवराज इंद्र को बताई तो उन्होंने कहा कि अज्ञातवास के दौरान यह श्राप तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हें कोई पहचान नहीं पाएगा। 7- तुलसी का भगवान विष्णु को श्राप शिवपुराण के अनुसार शंखचूड़ नाम का एक राक्षस था। उसकी पत्नी का नाम तुलसी था। तुलसी पतिव्रता थी, जिसके कारण देवता भी शंखचूड़ का वध करने में असमर्थ थे। देवताओं के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने शंखचूड़ का रूप लेकर तुलसी का शील भंग कर दिया। तब भगवान शंकर ने शंखचूड़ का वध कर दिया। यह बात जब तुलसी को पता चली तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर हो जाने का श्राप दिया। इसी श्राप के कारण भगवान विष्णु की पूजा शालीग्राम शिला के रूप में की जाती है। 8- श्रृंगी ऋषि का परीक्षित को श्राप पाण्डवों के स्वर्गारोहण के बाद अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित ने शासन किया। उसके राज्य में सभी सुखी और संपन्न थे। एक बार राजा परीक्षित शिकार खेलते-खेलते बहुत दूर निकल गए। तब उन्हें वहां शमीक नाम के ऋषि दिखाई दिए, जो मौन अवस्था में थे। राजा परीक्षित ने उनसे बात करनी चाहिए, लेकिन ध्यान में होने के कारण ऋषि ने कोई जबाव नहीं दिया। ये देखकर परीक्षित बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने एक मरा हुआ सांप उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया। यह बात जब शमीक ऋषि के पुत्र श्रृंगी को पता चली, तो उन्होंने श्राप दिया कि आज से सात दिन बात तक्षक
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