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Krishna Janmashtami 2025: साल 2025 में कब-कब रखा जाएगा मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत? यहां देखें पूरी लिस्ट

Krishna Janmashtami 2025:भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रप्रद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। हिंदू धर्म में इस दिन को हर साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। बाल गोपाल के भक्त भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव बहुत धूमधाम से मनाते हैं। भगवान कृष्ण की पूजा के लिए हर महीने मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। हिंदू धर्म में भगवान श्री कृष्ण की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। Krishna Janmashtami 2025 मासिक जन्माष्टमी हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल की साधना या व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। जिन लोगों को संतान प्राप्ति में दिक्कतें आती हैं, अगर वे इस दिन लड्डू गोपाल की पूजा करें तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। Krishna Janmashtami 2025:मासिक जन्माष्टमी व्रत का महत्व हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर रखे जाने वाले व्रत की अपार महिमा बताई गई है, जिसे विधि-विधान से करने पर व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं जल्द ही पूरी हो जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि Krishna Janmashtami 2025 जन्माष्टमी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन से जुड़ी सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और उसे जीवन से जुड़ी सभी खुशियां मिलती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह व्रत व्यक्ति को अकाल मृत्यु और पाप कर्मों से बचाकर मोक्ष प्रदान करता है। हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के व्रत का बहुत ही विशेष महत्व माना जाता है। जन्माष्टमी का व्रत एक हजार एकादशियों के व्रत के बराबर है। इस दिन कृष्ण भक्त पूजा-अर्चना के साथ-साथ पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान के जन्म के बाद व्रत समाप्त करते हैं। Masik Krishna Janmashtami 2025 List: हिंदू धर्म में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का दिन बहुत ही विशेष और पवित्र माना जाता है. ये दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के द्वापर युग के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित किया गया है. Krishna Janmashtami 2025 मासिक कृष्ण जन्माष्टमी को कृष्ण के श्री जन्मदिन के रूप में मनाने की मान्यता है. हर महीने होती है मासिक जन्माष्टमी हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक जन्माष्टमी मनाई जाती है. Masik Krishna Janmashtami 2025 मासिक जन्माष्टमी पर व्रत भी रखा जाता है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजन और व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति और ससृद्धि का वास सदा बना रहता है. ऐसे में आइएं जानते हैं कि इस साल मासिक जन्माष्टमी का व्रत कब-कब है. Krishna Janmashtami 2025 list:मासिक जन्माष्टमी 2025 लिस्ट Magh Masik Krishna Janmashtami 2025: कब है साल की पहली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी? जानें तिथि और शुभ मुहूर्त Krishna Janmashtami 2025 Puja vidhi:मासिक जन्माष्टमी पूजा विधि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए. इसके बाद भगवान कृष्ण का ध्यान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए. इस दिन लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान करवाना चाहिए. इसके बाद उन्हें पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करवाना चाहिए. फिर उन्हें कपड़े पहनाने चाहिए. उनका श्रृंगार करना चाहिए. फिर भगवान को माखन मिश्री का भोग लगाना चाहिए. उनके भोग में तुलसी भी अववश्य डालनी चाहिए. उनके सामने घी का दिया प्रज्वलित करना चाहिए. श्री कृष्ण के मंत्रों का जाप करना चाहिए. अंत में उनकी आरती करके पूजा संपन्न करनी चाहिए. मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर जो भी व्रत और पूजन करता है उसे यश, कीर्ति, धन और वैभव प्राप्त होता है. साथ ही इस दिन व्रत और भगवान श्री कृष्ण के पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. Krishna Janmashtami bhog ke uppay:भोग के उपाय मासिक जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण का आशीर्वाद पाना है तो गाय को चारा खिलाने का आसान उपाय करें. मासिक जन्माष्टमी पर अगर श्रीकृष्ण को भोग के रूप में लड्डू, माखन, मिश्री अर्पित करें तो व मोर पंख चढ़ाएं तो घर में खुशहाली आएगी.  मासिक जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को तुलसी दल और खीर का भोग अर्पित करने से घर की समृद्धि बढ़ती है.  श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिए मासिक जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की सेवा करें. अच्छे अच्छे भोग अर्पित करें. Masik Krishna Janmashtami 2025:मासिक जन्माष्टमी पर गुप्त रूप से करें ये उपाय, श्रीकृष्ण देंगे अपार कृपा और समृद्धि !  संतान के लिए उपाय  मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर अगर श्रीकृष्ण को मोर पंख अर्पित करें को घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है. संतान पक्ष की समस्याएं दूर होती है.  मासिक जन्माष्टमी पर संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करना अति शुभ होता है. इस उपाय को करने से संतान रोग दोष से दूर रहती है.

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Vikat Sankashti Chaturthi 2025: कब है 2025 में विकट संकष्टी चतुर्थी, जाने पूजा मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और इस दिन किये जाने वाले उपाय

Vikat Sankashti Chaturthi kab hai: विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत विघ्न हर्ता भगवान गणेश को समर्पित हैं. यह व्रत हर साल वैशाख माह के कृष्ण पक्षकी चुतथी तिथि को रखा जाता है. मान्यता है कि इस व्रत करने से व्यक्ति के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और सुख-समद्धि आती है. Vikat Sankashti Chaturthi 2025: गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत का हिन्दू धर्म मे विशेष महत्व होता है। हिंदी पंचांग के अनुसार संकष्टी चतुर्थी महीने में दो बार पड़ती है। एक शुक्ल पक्ष में तो दूसरा कृष्ण पक्ष में, हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुथी तिथि को विकट संकष्टी चतुथी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश जी को समर्पित होता है। Vikat Sankashti Chaturthi 2025 इसलिए आज के दिन यानी गणेश चतुर्थी के दीन भगवान गणेश की पूरे विधि विधान के साथ व्रत और पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से और व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। और इस दिन भगवान चंद्रदेव की पूजा करने से चंद्रदोष से मुक्ति मिलती है। और हर तरह के तनाव भी दूर होता है। और आज के दिन जल का अर्घ देने से सभी मनोकामना पूरी होती है। विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत कब है? 16 या 17 अप्रैल, जाने सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किया जाने वाले उपाय – विकट संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि Vikat Sankashti Chaturthi 2025 Puja Vidhi विकट संकष्ट चतुर्थी के दिन शुभ मुहूर्त में गणेश जी की मूर्ति को पंचामृत से स्न्नान करा कर सिंदूर, दूर्वा, गंध, अक्षत, अबीर, गुलाल, सुंगधित फूल, जनेऊ, सुपारी, पान, मौसमी फल अर्पित करें. Vikat Sankashti Chaturthi 2025 पूजा के समय गणेश जी की मूर्ति न होने पर एक साबुत सुपारी को ही गणेश जी मानकर पूजन किया जा सकता है. फिर दूर्वा अर्पित करके मोदक का प्रसाद लगाएं एवं दीप-धूप से उनकी आरती कर लें. Vikat Sankashti Chaturthi 2025:विकट संकष्टी चतुर्थी उपाय Vikat Sankshti Vrat Upay Vikat Sankashti Chaturthi 2025:संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित होती है। इस इस भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसलिए भगवान गणेश जी को प्रसन्न करके किसी भी कार्य में सफलता पाना चाहते हो तो विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी को पूजा के दौरान गुड़ और तिल से बने लड्डू का भोग लगाना चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन भूलकर कर भी चंद्रमा का दर्शन नही करना चाहिए और नाही चंद्रमा को दूध का अर्घ देना चाहिए। शास्त्रो के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत को भुलकर भी लहसुन, प्याज, मूली आदि नही खाना चाहिए। इसके अलावा मास, मछली को हाथ भी नही लगाना चाहिए। यदि अपनी संतान की प्रगति करना चाहते है तो गणेश चतुर्थी के दिन सफेद या पिले रंग का कपड़ा पहनकर भगवान गणेश जी की पूजा करने से संतान की उन्नति होती है। और उसकी सभी परेशानिया दूर होती है। यदि विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी को 5 हल्दी की गांठ चढ़ाने से और इस मंत्र (श्री गणाधिपतये नम:) का जाप करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। ऐसी मान्यता है कि विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी को लाल वस्त और लाल चंदन अर्पित करने से मानसिक तनाव दूर होता है। और मन को शांति मिलती है। Rinharta Ganesh Stotra:ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र: कर्ज से मुक्ति पाने का चमत्कारी उपाय विकट संकष्टी चतुर्थी 2025 शुभ मुहूर्त Vikat Sankashti Chaturthi 2025 Date Time पंचांग के अनुसार, वैशाख माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल को दोपहर 1 बजकर 16 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 17 अप्रैल को दोपहर 3 बजकर 23 मिनट पर होगा. इस दिन चंद्रोदय के समय पूजा का विधान है. ऐसे में 16 अप्रैल को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी. भगवान गणेश के मंत्र| Vikat Sankashti Chaturthi Puja Mantra ॐ गं गणपतये नमः वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ. निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा विकट सकंष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व| Vikat Sankashti Chaturthi Mahatva धार्मिक मान्यता के अनुसार, विकट सकंष्टी चतुर्थी के दिन व्रत करने और विधिपूर्वक भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं. साथ ही घर-परिवार में चल रही सभी समस्याओं का समाधान निकल जाता है और जातक के सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है. Vikat Sankashti Chaturthi 2025 date:  हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. यह दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है. Vikat Sankashti Chaturthi 2025 इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने वालों पर भगवान गणेश की गणेश की विशेष कृपा बरसती है. इस व्रत में चतुर्थी तिथि में चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य का महत्व होता है. मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक शांति,कार्यों में सफलता, प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है. Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती

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Kamada Ekadashi 2025 Importance : कामदा एकादशी पर श्री हरि को अर्पित करें ये खास चीजें, धन-धान्य से भरा रहेगा जीवन

Kamada Ekadashi 2025 Importance:कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi 2025) का व्रत बहुत शुभ माना जाता है। यह हर साल चैत्र माह की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन साधक भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन श्री हरि की पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है और कष्टों का नाश होता है। Kamada Ekadashi 2025 Importance: हिंदू धर्म में कामदा एकादशी एक महत्वपूर्ण और पुण्यकारी व्रत है. यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे करने से व्यक्ति के सभी पाप और कष्ट दूर होते हैं. मान्यता है कि कामदा एकादशी का व्रत करने से ब्रह्महत्या और अनजाने में किए गए सभी पापों से मुक्ति मिलती है. Kamada Ekadashi 2025 Importance कामदा एकादशी व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. Kamada Ekadashi 2025 Importance यह व्रत मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी लाभकारी है. कामदा एकादशी की कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ का पुण्य मिलता है. पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 07 अप्रैल को रात 08 बजे शुरू होगी और 08 अप्रैल को रात 09 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार, 08 अप्रैल को कामदा एकादशी मनाई जाएगी. Kamada Ekadashi 2025 Importance कामदा एकादशी का पारण 09 अप्रैल को किया जाएगा. व्रती लोग 09 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 02 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 34 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं. इस दौरान साधक गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान करें। इसके बाद विधिवत लक्ष्मी नारायण की पूजा करें। Kamada Ekadashi 2025 Importance पूजा समाप्त होने के बाद अन्न दान कर व्रत खोलें। Kamada Ekadashi vrat puja vidhi कामदा एकादशी व्रत पूजा विधि आज कामदा एकादशी पर पढ़ें यह व्रत कथा, पापों से मिलती है मुक्ति Kamada Ekadashi vrat paran कामदा एकादशी व्रत पारण एकादशी का व्रत रखने के साथ शुभ मुहूर्त में पारण करना बेहद जरूरी है. कामदा एकादशी व्रत पारण अगले दिन 06 बजकर 02 मिनट से 08 बजकर 34 मिनट के बीच किया जाएगा. Kamada Ekadashi 2025 Importance कामदा एकादशी का व्रत करने से सांसारिक जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है. एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है और साधक के पूर्वजों को भी मुक्ति मिलती है. Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय Kamada Ekadashi per kya kare कामदा एकादशी पर क्या करें Kamada Ekadashi 2025 Importance:कामदा एकादशी महत्व Kamada Ekadashi 2025 Importance:पद्म पुराण के अनुसार, कामदा एकादशी का व्रत करने से ब्रह्महत्या और अनजाने में किए हुए सभी पापों से छुटकारा मिलता है. कामदा एकादशी पिशाचत्व आदि दोषों का भी नाश करने वाली मानी गई है. Kamada Ekadashi 2025 Importance ऐसा कहते हैं कि कामदा एकादशी का व्रत करने और इसकी कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ का पुण्य मिलता है. Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi : कामदा एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें जरूरी नियम श्री हरि को चढ़ाएं ये खास चीजें (Vishnu ji Ko Chadhaye Ye Chijen) मेष राशि: मेष राशि के लोगों को कामदा एकादशी पर विष्णु भगवान को लाल फूल अर्पित करने चाहिए। वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातक को इस दिन पर श्री हरि को पंचामृत चढ़ाना चाहिए। मिथुन राशि: मिथुन राशि के लोगों को इस तिथि पर विष्णु जी को तुलसी पत्र अर्पित करने चाहिए। कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों को कामदा एकादशी पर नारायण को धनिया की पंजीरी का भोग लगाना चाहिए। सिंह राशि: सिंह राशि वालों को इस तिथि पर श्री हरि को लाल रंग के वस्त्र चढ़ाने चाहिए। कन्या राशि: कन्या राशि के लोगों को इस मौके पर भगवान विष्णु को मोर का पंख चढ़ाना चाहिए। तुला राशि: तुला राशि के लोगों को कामदा एकादशी पर श्री हरि को दही-चीनी अर्पित करनी चाहिए। वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातकों को इस अवसर पर नारायण को लाल चंदन चढ़ाना चाहिए। धनु राशि: धनु राशि के लोगों को इस दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए। मकर राशि: मकर राशि के लोगों को इस तिथि पर नारायण को शमी के फूल चढ़ाने चाहिए। कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातकों को कामदा एकादशी पर भगवान विष्णु को शमी के पत्ते चढ़ाने चाहिए। मीन राशि: मीन राशि वालों को इस तिथि पर भगवान विष्णु को गोपी चंदन का तिलक लगाना चाहिए। कामदा एकादशी का महत्व

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Puthandu 2025 Date : कब और कैसे मनाया जाता है पुथांडु का पर्व? जानें इसकी मान्यता

Puthandu 2025:तमिल नव वर्ष की शुरुआत को पुथांडु कहा जाता है। तमिलनाडु के साथ-साथ आस पास के क्षेत्रों में भी इस पर्व को बड़े ही उत्साह और पारम्परिक तरीके से मनाया जाता है। यह पर्व तमिल लोगों में बहुत ही महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं तमिल नव वर्ष यानी पुथांडु कब और कैसे मनाया जाता है। पुथांडू, जिसे पुथुवरुदम के नाम से भी जाना जाता है, तमिल नव वर्ष का प्रतीक है और यह तमिल कैलेंडर का पहला दिन या चिथिराई महीने का पहला दिन है जिसे तमिलनाडु के लोगों द्वारा पुथांडू के रूप में मनाया जाता है। तमिल नव वर्ष के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन बहुत महत्व रखता है। पुथांडू ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर साल लगभग एक ही दिन पड़ता है। इस वर्ष, पुथांडू 14 अप्रैल को मनाया जाएगा पुथंडु,Puthandu जिसे तमिल नव वर्ष या वरुशा पिरप्पु के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया भर में तमिल समुदायों द्वारा मनाया जाने वाला एक खुशी और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण त्योहार है। यह तमिल कैलेंडर की शुरुआत का प्रतीक है और पारंपरिक अनुष्ठानों, प्रार्थनाओं और उत्सवों के साथ मनाया जाता है जो नवीकरण, समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। Puthandu 2025 इस लेख में, हम पुथंडु के रीति-रिवाजों, रीति-रिवाजों, महत्व और आध्यात्मिक सार के बारे में विस्तार से बताएंगे, जिसमें इस शुभ अवसर से जुड़ी प्रार्थना और त्योहार मनाने की प्रक्रिया भी शामिल है। Puthandu 2025:क्या है मान्यता तमिल लोगों द्वारा पुथांडु का त्योहार बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन से भगवान ब्रह्म ने सृष्टि का निर्माण शुरू किया था। Puthandu 2025 साथ ही इस तिथि पर भगवान इंद्र स्वयं धरती पर लोगों के कल्याण के लिए उतरे थे। Puthandu 2025 माना जाता है कि इस दिन पर पूजा करने से व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही उनका पूरा वर्ष अच्छा बीतता है। कैसे मनाया जाता है यह पर्व पुथांडु को तमिल लोग बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दिन को पुथुरूषम एवं वरुषा पिरप्पु के नाम से भी जाना जाता है। इस खास मौके पर लोग अपने घर की अच्छे से साफ-सफाई करते हैं। साथ ही घर को रंगोली से घर को सजाया जाता है, जिसमें चावल के आटे का भी उपयोग किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से जो सौभाग्य आता है। इसके बाद लोग पारंपरिक वस्त्र धारण करके अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना करते हैं। Puthandu 2025 साथ ही मंदिर जाकर भी भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। इस दिन पर चावल की खीर का भोग लगाने का विशेष महत्व माना गया है। इसी खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस दिन शाकाहारी भोजन ही किया जाता है। पुथांडू का इतिहास पुथांडू की उत्पत्ति चोल राजवंश के शासनकाल से लगाया जा सकता है, जिसने 9वीं से 13वीं शताब्दी तक तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों पर शासन किया था। इस दौरान, तमिल कैलेंडर बनाया गया और चिथिराई के पहले दिन को तमिल नव वर्ष के रूप में नामित किया गया। पुथांडू का महत्व तमिल सौर कैलेंडर का पहला महीना, चिथिराई, पुथांडू उत्सव के साथ शुरू होता है। इस दिन को तमिलनाडु और श्रीलंका में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है। अन्य राज्य भी इसी दिन नया साल मनाते हैं। Puthandu 2025 इस दिन पश्चिम बंगाल पोहेला बोइशाख मनाता है, केरल विशु मनाता है, पंजाब बैसाखी मनाता है और असम इस दिन बिहू मनाता है। पुथंडु,Puthandu पर पूजा और त्यौहार मनाने की प्रक्रिया  कोलम और सजावट –  Puthandu 2025 पुथंडु की शुरुआत घरों और मंदिरों के सामने कोलम (रंगोली डिज़ाइन) बनाने की पारंपरिक कला से होती है। ये जटिल और रंगीन पैटर्न चावल के आटे या रंगीन पाउडर का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं, जो समृद्धि, स्वागत और शुभता का प्रतीक हैं। घरों को आम के पत्तों, फूलों और पारंपरिक रूपांकनों से सजाया जाता है। मंदिरों की यात्रा –  पुथंडु पर, परिवार प्रार्थना करने और नए साल के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए मंदिरों में जाते हैं। भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी लक्ष्मी जैसे देवताओं को समर्पित मंदिरों में विशेष पूजा (अनुष्ठान), अभिषेकम (देवताओं का पवित्र स्नान), और आराधना (प्रसाद) किए जाते हैं। नीम के फूल का रसम – पुथंडु का एक अनोखा पहलू नीम के फूल के रसम की तैयारी है, जो नीम के फूल, इमली, गुड़ और मसालों से बना एक विशेष व्यंजन है। नीम अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है, और शरीर को शुद्ध करने और बीमारियों को दूर करने के लिए पुथंडु के दौरान रसम का सेवन किया जाता है। दावत और पारिवारिक जमावड़ा –  पुथांडू आम पचड़ी, वड़ा, पायसम और चावल की किस्मों जैसे पारंपरिक तमिल व्यंजनों पर दावत का समय है। परिवार भोजन साझा करने, उपहारों का आदान-प्रदान करने और नए साल के अवसरों का स्वागत करते हुए पिछले वर्ष के आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त करने के लिए एक साथ आते हैं। सांस्कृतिक प्रदर्शन –  तमिल संस्कृति, कला और साहित्यिक परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए Puthandu 2025 पुथंडु के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत समारोह, नृत्य प्रदर्शन और कहानी सत्र आयोजित किए जाते हैं। कोलट्टम और भरतनाट्यम जैसे लोक नृत्य उत्सव के माहौल को बढ़ाते हैं।

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Charak Jayanti 2025 Date Hindi:आज चरक जयंती, आयुर्वेद में आचार्य चरक का है विशेष योगदान, जानें इतिहास और महत्व

Charak Jayanti 2025 Date Hindi:चरक पूजा, एक हिंदू लोक उत्सव है जो भगवान शिव के सम्मान में आयोजित किया जाता है जिसे नील पूजा के नाम से भी जाना जाता है । यह त्योहार भारत में विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। बांग्लादेश में इस त्योहार को चैत्र महीने के आखिरी दिन के रूप में गिना जाता है। यह त्योहार बंगाली कैलेंडर में चैत्र महीने के आखिरी दिन चैत्र संक्रांति की आधी रात को मनाया जाता है Charak Jayanti 2025: आज चरक जयंती मनाई जा रही है. आचार्य चरक ही आयुर्वेद के चिकित्सक माने जाते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं आचार्य चरक के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी. Charak Jayanti 2025 Date Hindi:चरक पूजा कैसे मनाई जाती है: लोगों का मानना ​​है कि चरक पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और यह पर्व पिछले वर्ष के दुखों और कष्टों को दूर कर समृद्धि लाता है।तैयारी आमतौर पर एक महीने पहले शुरू होती है। Charak Jayanti 2025 Date Hindi उत्सव की व्यवस्था करने वाली टीम गाँव-गाँव जाकर धान, तेल, चीनी, नमक, शहद, धन और अनुष्ठान के लिए आवश्यक अन्य वस्तुओं की खरीद करती है। संक्रांति की आधी रात को, पूजा करने वाले एक साथ सफलता के लिए शिव और मां दुर्गा की पूजा करने के लिए इकट्ठा होते हैं और पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है। Bhagwan Shiv:भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है तो फिर क्या है उनकी अवतरण कथा… Charak Jayanti 2025 Date Hindi:इसे हजरा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं पूजा से पहले भोजन नहीं करती हैं।कभी-कभी इस त्योहार में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए एक मानव `चरक` तैयार किया जाता है। चरक को उसकी पीठ पर एक हुक के साथ बांधा जाता है और फिर उसे एक लंबी रस्सी के सहारे एक पट्टी के चारों ओर घुमाया जाता है। हालांकि यह जोखिम भरा है, वे इसकी व्यवस्था करते हैं। महाराष्ट्र में इसी तरह के त्योहार को बगड़ कहा जाता है, जबकि विजयनगरम, आंध्र प्रदेश में इसे सिरिमानु उत्सवम कहा जाता है। बगड़ चरक पूजा, गजान या मैक्सिकन डेंज़ा डे लॉस वोलाडोर्स के भारतीय समानांतर की एक समान अवधारणा है। Swapna Shastra Ke Mutabik Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna:पने में मां दुर्गा को देखने से मिलते हैं ये शुभ संकेत, जीवन में हो सकते हैं ये बदलाव कौन थे आचार्य चरक ? (Who is Rishi Charak) Charak Jayanti 2025 Date Hindi:चरक कुषाण राज्य के राजवैद्य थे. आचार्य चरक आयुर्वेद की जनक माने गए हैं. भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी चरक एक महर्षि एवं आयुर्वेद विशारद के रूप में प्रसिद्ध हैं. महा ऋषि चरक की जन्म तिथि के बारे में कुछ निश्चित तथ्य मौजूद नहीं हैं लेकिन माना जाता है कि 2300-2400 साल पहले उनका जन्म हुआ था. चरक ऐसे पहले चिकित्सक थे जिन्होंने पाचन, चयापचय और शरीर प्रतिरक्षा की अवधारणा दी थी.चरक के अनुसार शरीर में पित्त, कफ और वायु के कारण दोष उत्पन्न हो जाते है और यही बीमारियों की जड़ बनते हैं. Charak Jayanti 2025 Date Hindi आयुर्वेदाचार्य चरक मानव कल्याण के लिए आयुर्वेद ग्रंथ ‘चरक संहिता’ लिखा था. इसमें विभिन्न रोगों के उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधियों की व्याख्या की गई है, जिन्हें सही मात्रा और तरीके से प्रयोग करने के उपाय भी दिए गए हैं.  Lord Shiva in Dream:सपने में भगवान शिव को देखने का क्या होता है मतलब, जानिए इससे जीवन पर कैसा पड़ता है प्रभाव आयुर्वेद का अमूल्य ग्रंथ है चरक संहिता (Charak Samhita) ‘चरक संहिता’ में आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों, औषधियों, और रोगों के कारणों वर्णन किया गया है. Charak Jayanti 2025 Date Hindi इस पुस्तक को आज भी चिकित्सा जगत में बहुत सम्मान दिया जाता है. यह ग्रन्थ ऋषि आत्रेय तथा पुनर्वसु के ज्ञान का संग्रह है जिसे चरक ने कुछ संशोधित कर अपनी शैली में प्रस्तुत किया. Sapne me bichhu dekhna:सपने में बिच्छू सहित दिखें ये 5 चीज, तो समझ लीजिए चमकने वाली है आपकी किस्मत ‘इलाज नहीं बीमारी से बचाना ही चिकित्सक का कर्तव्य’ Charak Jayanti 2025 Date Hindi:आचार्य चरक कहते हैं कि ज्यादा महत्वपूर्ण यह है की व्यक्ति को बीमारी से बचाना न की इलाज करना ”. जो चिकित्सक अपने ज्ञान और समझ का दीपक लेकर बीमार के शरीर को नहीं समझता, वह बीमारी कैसे ठीक कर सकता है. इसलिए सबसे पहले उन सब कारणों का अध्ययन करना चाहिए जो रोगी को प्रभावित करते है, फिर उसका इलाज करना चाहिए.

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Pana Sankranti 2025 Date Hindi : पना संक्रांति कहां मनाई जाती है, इस दिन क्या करते हैं

Pana Sankranti 2025 Date:हिंदू पंचांग के अनुसार, जिस दिन भगवान सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन मेष संक्रांति मनाई जाती है। ओडिशा में इसे पना संक्रांति कहा जाता है और इस दिन नए साल का त्योहार भी मनाया जाता है। Pana Sankranti 2025 Date इस वर्ष 14 अप्रैल पना संक्रांति है। इस अवसर पर, ओडिशा के लोग एक दूसरे को पना संक्रांति और नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हैं। साथ ही इस दिन फल, दही, सत्तू और अन्य वस्तुओं से बने शर्बत पीने का भी विधान है। यह भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। जहां उत्तर भारत में बैसाखी मनाई जाती है। वहीं, विशु इस दिन केरल और तमिलनाडु में पुथांडु में मनाया जाता है। जबकि बोहाग बिहू असम में मनाया जाता है। केवल इस दिन, सूरज पूरी तरह से दो अवसरों पर भूमध्य रेखा पर रहता है, जैसे कि मेष संक्रांति और तुला संक्रांति। दिन का नाम पना के नाम पर रखा गया है। यह दिन बहुत खुशी, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रदर्शनों के साथ मनाया जाता है। Pana Sankranti 2025 Date:पना संक्रांति क्यों कहा जाता है? Pana Sankranti 2025 Date:पना नाम उत्सव के मुख्य घटक से लिया गया है। मुख्य अनुष्ठानों में से एक में पके आम, नारियल, गुड़, दही और पानी जैसी विभिन्न सामग्रियों से बने “पना” नामक एक विशेष पेय की तैयारी और खपत शामिल है। पना को साझाकरण और सामुदायिक बंधन के प्रतीक के रूप में परिवार के सदस्यों, दोस्तों और पड़ोसियों के बीच वितरित किया जाता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list:जून 2025 में पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची निम्नलिखित है Pana Sankranti ki pouranik katha:पना संक्रांति का पौराणिक कथा जिस दिन इसे मनाया जाता है उसका कारण यह है कि यह सौर वर्ष का पहला दिन है। Pana Sankranti 2025 Date केवल इस दिन, सूरज पूरी तरह से दो मौकों पर भूमध्य रेखा पर रहता है, जैसे कि मेष संक्रांति और तुला संक्रांति। मेष संक्रांति के बाद, सूर्य उत्तरी दिशा में उगता है जहां भारत भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित है। इसलिए, इस वर्ष से सूर्य के पहले दिन, जो मिशा संक्रांति है। ओडिया की परंपरा के अनुसार, पना संक्रांति को हिंदू देवता हनुमान का जन्मदिन माना जाता है। रामायण में विष्णु अवतार राम के प्रति उनकी प्रेममयी भक्ति पौराणिक है। शिव और सूर्य (सूर्य) भगवान के साथ उनके मंदिर नए साल में पूजनीय हैं। इस दिन हिंदू भगवान मंदिरों में भी जाते हैं। पना संक्रांति का समारोह Pana Sankranti 2025 Date:इस दिन, लोग पना से भरे एक छोटे बर्तन का उपयोग करते हैं या मिश्री का मीठा पेय और तुलसी के पौधे पर पानी डाला जाता है। बर्तन के तल पर एक छेद बनाया जाता है, जो बारिश का प्रतिनिधित्व करते हुए पानी को गिरने देता है। यह त्योहार व्यापक रूप से कुछ शहरों और गांवों में, तटीय क्षेत्रों में, ओडिशा में एक अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है। पना संक्रांति का महत्व (Pana Sankranti Ka Mahatva) पना संक्रांति सौर वर्ष के पहले दिन मनाई जाती है। Pana Sankranti 2025 Date ओडिया की परंपरा के अनुसार पना संक्रांति के दिन ही हनुमान भगवान का जन्मदिन हुआ था। इसलिए इस दिन यहां हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण का आधा सफर पूरा कर लेते हैं। अन्य संक्रांति की तरह ही इस दिन भी स्नान-दान, पितरों का तर्पण और मधुसूदन भगवान की पूजा का महत्व बताया गया है। पना संक्रांति पर क्या करते हैं (Pana Sankranti Par Kya Karte Hai) Pana Sankranti 2025 Date:इस दिन सूर्य की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते हैं पना संक्रांति के दिन सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सूर्य देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Pana Sankranti 2025 Date इसलिए इस दिन सूर्य को अर्घ्य जरूर देना चाहिए। कहते हैं सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। पना संक्रांति पर करें ये दान (Pana Sankranti Daan) मेष संक्रांति के दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन दान करने से सूर्य देवता प्रसन्न होते हैं। लेकिन दान करने से पहले पवित्र नदी में स्थान जरूर करें। लेकिन अगर नदियों में स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर में स्नान के पानी में ही गंगाजल डालकर स्नान करें। Pana Sankranti 2025 Date:खास संदेश  इस पना संक्रांति पर भगवान जगन्नाथ का दिव्य आशीर्वाद आपके जीवन में प्रचुरता और समृद्धि लाए। आपको और आपके परिवार को प्रेम, खुशी और एकजुटता से भरी आनंदमय पना संक्रांति की शुभकामनाएं। जैसे ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, यह आपके जीवन में नई शुरुआत और अवसर लेकर आएगा। पण संक्रांति की शुभकामनाएं! आइए नए सौर माह की शुरुआत का जश्न कृतज्ञता और भक्ति के साथ मनाएं। पण संक्रांति की शुभकामनाएँ! पाना पेय का मीठा स्वाद आपके जीवन को मिठास और आनंद से भर दे। पण संक्रांति की शुभकामनाएँ! इस शुभ दिन पर, भगवान जगन्नाथ आप और आपके प्रियजनों पर अपना आशीर्वाद बरसाएं। पण संक्रांति की शुभकामनाएं! Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi : कामदा एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें जरूरी नियम

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Baisakhi Festival 2025: पंजाब से जुड़ी इस फसल कटाई के पर्व की खास बातें

Baisakhi Festival 2025:वैशाखी त्यौहार सिख धर्म के पवित्र त्यौहारों में से एक है। वैशाखी त्यौहार हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है और सौर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। वैशाखी जिसे बैसाखी के नाम से भी जाना जाता है। जो भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य क्षेत्रों जैसे पोइला बोइशाख, बोहाग बिहू, विशु, पुथंडु और अन्य क्षेत्रों में बैशाख के पहले दिन मनाए जाते हैं। वैशाखी विशेष रूप से पंजाब और उत्तर भारत के राज्य में मनाया जाता है। सिख समुदाय के लिए वैशाखी का एक विशेष अर्थ है क्योंकि यह खालसा की स्थापना का प्रतीक है। इस दिन, दसवें और अंतिम गुरु – गुरु गोबिंद सिंह ने सिखों को खालसा या शुद्ध लोगों में संगठित किया। ऐसा करके, उन्होंने उच्च और निम्न के मतभेदों को समाप्त कर दिया और स्थापित किया कि सभी मनुष्य एक समान हैं। Baisakhi Festival 2025:बैसाखी बैसाखी को हर साल देशभर में उत्साह एवं जोश के साथ मनाया जाता है। साल 2025 में कब है बैसाखी का पर्व? कैसे मनाते है बैसाखी? जानने के लिए पढ़ें। बैसाखी के त्यौहार को प्रतिवर्ष वैशाख के महीने में मनाया जाता है। Baisakhi Festival 2025 वैसे तो साल भर अनेक व्रत, पर्व एवं त्यौहार मनाये जाते हैं। बैसाखी को वैसाखी,वैशाखी या फसल त्यौहार और नए वसंत के के प्रतीक के रूप में अत्यंत उत्साह एवं धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हिंदुओं द्वारा बैसाखी के पर्व को नए साल के रूप में अधिकांश भारत में मनाया जाता है।  बैसाखी 2025 की तिथि एवं मुहूर्त बैसाखी का त्यौहार कब और क्यों मनाया जाता है? पंचांग के अनुसार, बैसाखी के दिन आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। पूर्णिमा में विशाखा नक्षत्र होने के कारण ही इस माह को बैसाखी कहते हैं। अन्य शब्दों में कहें तो, वैशाख महीने के प्रथम दिन को बैसाखी कहा जाता है। Baisakhi Festival 2025 बैसाखी से पंजाबी नववर्ष का आरंभ होता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, बैसाखी को हर साल 13 अप्रैल या 14 अप्रैल के दिन मनाया जाता है। Baisakhi Festival 2025:बैसाखी का महत्व Baisakhi Festival 2025 बैसाखी का पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक के साथ आर्थिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है। खालसा पंथ का स्थापना दिवस होने के कारण जहां यह सिक्खों के लिए पवित्र दिन है, वहीं हिंदूओं के लिए भी कई मायनों से खास है। ऐसी मान्यता है कि बैसाख माह में भगवान बद्रीनाथ की यात्रा की शुरुआत होती है। पद्म पुराण में, बैसाखी के दिन स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य के मेष राशि में परिवर्तन करने यानि मेष संक्रांति होने के कारण यह ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होता है। सौर नववर्ष का आरंभ भी इसी दिन से होता है। बैसाखी का पर्व उन तीन त्योहारों में से एक है जिसे सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमर दास द्वारा मनाया गया था। बैसाखी को अंतिम सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के राज्याभिषेक के साथ-साथ सिख धर्म के खालसा पंथ की नींव के तौर पर मनाया जाता है, इसलिए इसे सिख धर्म के लिए विशेष माना गया है। देशभर में बैसाखी को फसल के मौसम के अंत का प्रतीक माना जाता है Baisakhi Festival 2025 जो किसानों के लिए विशेष रूप से समृद्धि का समय है। वैसाखी के नाम से भी प्रसिद्ध है और यह खुशी और उत्सव का पर्व है। यह त्यौहार मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण होता है। बड़ी सिख आबादी के द्वारा बैसाखी बहुत ऊर्जा और जोश के साथ मनाई जाती है।  यह त्यौहार पश्चिम बंगाल में पोहेला बोइशाख, तमिलनाडु में पुथंडु, असम में बोहाग बिहु, पूरामुद्दीन केरल, उत्तराखंड में बिहू, ओडिशा में महा विष्णु संक्रांति और आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। किसानों का त्यौहार बैसाखी इस पर्व के दिन सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होने के कारण धूप तेज होने लगती है, साथ ही गर्मी का आरंभ हो जाता है। सूरज की गर्माहट से रबी की फसल पक जाती है इसलिए किसानों के द्वारा इसे एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। अप्रैल के महीने में सर्दी पूरी तरह समाप्त हो चुकी होती है और गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है। इस त्यौहारको मौसम में होने वाले कुदरती बदलाव के कारण भी मनाया जाता है. बैसाखी से जुड़ीं पौराणिक मान्यता Baisakhi Festival 2025:ऐसा पौराणिक मान्यता है कि गुरु तेग बहादुर जो सिखों के 9वें गुरु है, वो औरंगज़ेब के साथ युद्ध करते हुए शहीद हो गए थे। उस समय तेग बहादुर मुगलों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे। इस युद्ध में उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र गुरु गोबिन्द सिंह अगले गुरु बने। सन् 1650 में पंजाब मुगलों, अत्याचारियों और भ्रष्टाचारियों का अत्याचार झेल रहा था। Baisakhi Festival 2025 उस समय समाज में लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा था और लोगों को न्याय की कही उम्मीद नज़र नहीं आ रही थी।  ऐसी विपरीत परिस्थितियों में गुरू गोबिन्द सिंह ने सभी लोगों में अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज उठाने और उनमें साहस भरने का कार्य किया था। उन्होंने आनंदपुर में सिखों के संगठन का निर्माण करने के लिए लोगों का आवाह्न किया। Baisakhi Festival 2025 इस सभा में ही उन्होंने तलवार उठाकर लोगों से ये सवाल किया कि आप में से वे बहादुर योद्धा कौन हैं जो बुराई के ख़िलाफ शहीद होने के लिए तैयार हैं। उस समय सभा में से पाँच योद्धा सामने आए और इन्ही पांच योद्धाओं को “पंच प्यारे” कहा गया जिन्हे खालसा पंथ का नाम दिया गया। बैसाखी कैसे मनाते है? बैसाखी को मुख्य रूप से किसी गुरुद्वारे या किसी खुले स्थान पर मनाया जाता है Baisakhi Festival 2025 जिसमें भांगड़ा और गिद्दा आदि नृत्यु करते हैं। इस पर्व को निम्नलिखित तरीके से मनाया जाता है।  इस दिन लोग प्रातःकाल उठकर गुरूद्वारे में जाकर प्रार्थना करते हैं। बैसाखी में गुरुद्वारे में गुरुग्रंथ साहिब जी के स्थान को जल और दूध से शुद्ध किया जाता है। उसके बाद पवित्र किताब को ताज के साथ उसके स्थान पर रखा जाता है। इसके बाद किताब को पढ़ा जाता है और अनुयायी ध्यानपूर्वक गुरू की वाणी सुनते हैं। इस दिन श्रद्धालुयों के लिए विशेष प्रकार का अमृत तैयार किया जाता है जो बाद में बाँटा जाता है। परंपरा के अनुसार,अनुयायी एक पंक्ति

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June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list:जून 2025 में पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची निम्नलिखित है

June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list:जून 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्यौहार आने वाले हैं, जो हमारे जीवन में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। इन त्यौहारों में मिथुन संक्रांति पितृ दिवस, संकष्टी गणेश चतुर्थी, पूर्णिमा, कबीर जयंती, पूर्णिमा, सत्य व्रत, गंगा दशहरा, विश्व पर्यावरण दिवस, और कई अन्य महत्वपूर्ण त्यौहार शामिल हैं। ये त्यौहार न केवल हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं, बल्कि हमें आध्यात्मिक ज्ञान और शांति की प्राप्ति भी कराते हैं। इन त्यौहारों के महत्व और उनके पीछे की कहानियों को जानने से हमें अपनी जड़ों को समझने और अपनी संस्कृति को समृद्ध बनाने में मदद मिलती है। यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि ये त्यौहार क्यों मनाए जाते हैं और उनके पीछे की पौराणिक कथाएं क्या हैं। इन त्यौहारों के दौरान, लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करते हैं। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list इन त्यौहारों का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी है। ये त्यौहार हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझने और समृद्ध बनाने में मदद करते हैं।  इस लेख में, हम आपको जून 2025 में आने वाले विशेष व्रत और त्यौहारों की एक पूरी लिस्ट प्रदान करेंगे, साथ ही हम आपको इन त्यौहारों के महत्व, उनके पीछे की कहानियों, और उनके आयोजन के तरीकों के बारे में भी बताएंगे…. June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list:जून 2025 में प्रमुख व्रत और त्योहारों की विस्तृत जानकारी हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व होता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list यह धार्मिक अनुष्ठान न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति भी लाते हैं। आइए देखें जून 2025 में आने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों का विवरण। जून 2025 में प्रमुख व्रत और त्योहारों की विस्तृत जानकारी हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व होता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list यह धार्मिक अनुष्ठान न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति भी लाते हैं। आइए देखें जून 2025 में आने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों का विवरण। 1 जून (रविवार) – षष्ठी व्रत षष्ठी व्रत का संबंध भगवान स्कंद (कार्तिकेय) से होता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list इसे विशेष रूप से संतान प्राप्ति और उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। 2 जून (सोमवार) – सोमवार व्रत यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इसे करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और इच्छाओं की पूर्ति होती है। 3 जून (मंगलवार) – वृषभ व्रत, दुर्गाष्टमी व्रत, धूमावती जयंती वृषभ व्रत: वृषभ राशि के जातकों के लिए यह दिन विशेष शुभ होता है। दुर्गाष्टमी व्रत: मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए अष्टमी के दिन यह व्रत रखा जाता है। धूमावती जयंती: यह दिन देवी धूमावती को समर्पित है, जो तंत्र साधना करने वालों के लिए विशेष महत्व रखती हैं। 4 जून (बुधवार) – महेश नवमी यह पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है और विशेष रूप से माहेश्वरी समाज द्वारा मनाया जाता है। 5 जून (गुरुवार) – गंगा दशहरा, विश्व पर्यावरण दिवस गंगा दशहरा: इस दिन गंगा नदी स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से पापों का नाश होता है। विश्व पर्यावरण दिवस: पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिन मनाया जाता है। 6 जून (शुक्रवार) – निर्जला एकादशी निर्जला एकादशी व्रत को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना जाता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखा जाता है, जिससे हजारों एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त होता है। 7 जून (शनिवार) – बकरीद (ईद-उल-अज़हा) यह इस्लाम धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे कुर्बानी के रूप में मनाया जाता है। 8 जून (रविवार) – प्रदोष व्रत शिव जी की उपासना के लिए यह व्रत रखा जाता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list इसे करने से सभी दोष समाप्त होते हैं। 10 जून (मंगलवार) – सत्य व्रत, पूर्णिमा व्रत, वैट सावित्री पूर्णिमा सत्य व्रत: यह व्रत सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने और पूजा करने के लिए किया जाता है। पूर्णिमा व्रत: पूर्णिमा तिथि को चंद्र देव की पूजा की जाती है। वैट सावित्री पूर्णिमा: यह व्रत सुहागिन स्त्रियों द्वारा अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। 11 जून (बुधवार) – देव स्नान पूर्णिमा, कबीर जयंती देव स्नान पूर्णिमा: इस दिन भगवान जगन्नाथ का विशेष अभिषेक किया जाता है। कबीर जयंती: संत कबीर का जन्म इसी दिन हुआ था, June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list जो समाज सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे। 14 जून (शनिवार) – संकष्टी गणेश चतुर्थी गणपति बप्पा की कृपा पाने के लिए यह व्रत रखा जाता है। इसे करने से संकट दूर होते हैं। 15 जून (रविवार) – मिथुन संक्रांति, पितृ दिवस मिथुन संक्रांति: यह दिन सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश करने का संकेत देता है और विशेष धार्मिक कार्य किए जाते हैं। पितृ दिवस: पितरों (पूर्वजों) को सम्मान देने के लिए यह दिन मनाया जाता है। 18 जून (बुधवार) – कालाष्टमी, बुधाष्टमी व्रत कालाष्टमी: भगवान काल भैरव की पूजा इस दिन की जाती है। बुधाष्टमी व्रत: यह व्रत विशेष रूप से बुध ग्रह से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है। 21 जून (शनिवार) – योगिनी एकादशी यह व्रत पापों के नाश के लिए श्रेष्ठ माना जाता है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है। 23 जून (सोमवार) – सोम प्रदोष व्रत, मास शिवरात्रि सोम प्रदोष व्रत: शिव जी की कृपा पाने के लिए यह व्रत किया जाता है। मास शिवरात्रि: इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना की जाती है। 24 जून (मंगलवार) – रोहिणी व्रत यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list और विशेष रूप से जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा किया जाता है। 25 जून (बुधवार) – अमावस्या अमावस्या को पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म करने का विशेष महत्व होता है। 26 जून (गुरुवार) – गुप्त नवरात्र प्रारंभ, चंद्र दर्शन गुप्त नवरात्र: यह तंत्र साधकों

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Hanuman Jayanti kab ki hai: हनुमान जयंती कब है? नोट कर लें सही तिथि और पूजा विधि

Hanuman Jayanti kab ki hai: हर साल चैत्र माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बजरंग बली हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान राम और हनुमान जी पूजा करने से जीवन से सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है, तो आइए जानते हैं कि इस साल कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती. Hanuman Jayanti Date and Importance: हनुमान जन्मोत्सव हिंदू धर्म में एक पवित्र पर्व है, जो भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार संकट मोचन हनुमान जी आज भी धरती पर विद्यमान हैं और भक्तों के कष्टों को हरने वाले देवता माने जाते हैं। हर साल यह पर्व चैत्र माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। Hanuman Jayanti kab ki hai इस दिन श्री राम और हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्री हनुमान जन्मोत्सव या हनुमान जयंती श्री राम भक्त, वानर राज, वीर हनुमान जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री हनुमंत शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक हैं, वह जादुई शक्तियों, भूत, प्रेत एवं बुरी आत्माओं पर विजय प्राप्त करने वाले देव के रूप मे पूजे जाते हैं। Lord Hanuman: मंगलवार के दिन ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, जीवन के संकटों से मिलेगा छुटकारा हनुमान जयंती भारत के विभिन्न क्षेत्रों मे अलग-अलग समय पर मनाई जाती है, उत्तर भारत मे यह त्यौहार मुख्य रूप से चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है। हनुमान जयंती के दिन उपवास रखने वाले व्यक्ति को एक दिन ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करना चाहिए। हनुमान जयंती तिथि |Hanuman Jayanti 2025 Date हिंदू पंचांग के अनुसार, हनुमान जयंती यानी चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल को सुबह 3 बजकर 21 मिनट पर होगी. साथ ही तिथि का समापन अगले दिन 13 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा. Hanuman Jayanti kab ki hai उदया तिथि के अनुसार, हनुमान जयंती 12 अप्रैल को मनाई जाएगी. श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर:गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत Hanuman Jayanti kab ki hai:हनुमान जन्मोत्सव 2025 कब है? इस वर्ष 12 अप्रैल 2025 को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 12 अप्रैल को सुबह 3:21 बजे से शुरू होकर 13 अप्रैल सुबह 5:51 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को मनाया जाएगा। हनुमान जयंती पूजा विधि |Hanuman Jayanti Puja Vidhi Hanuman Jayanti kab ki hai हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा की जाती है. इस दिन सुबह उठकर स्नान कर लाल रंग के वस्त्र पहने. उसके बाद हनुमान जी को सिंदूर, लाल रंग के फूल, तुलसी दल, चोला और बूंदी के लड्डू का प्रसाद अर्पित करें. उसके बाद मंत्र जाप करें. फिर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें. अंत में आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें. April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें हनुमान जयंती का महत्व |Hanuman Jayanti Significance Hanuman Jayanti kab ki hai हिंदू धर्म में हनुमान जी को 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है. कहते हैं वह आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, Hanuman Jayanti kab ki hai जिससे उसके जीवन के सभी कष्ट और संकट दूर होते हैं. इस दिन पूजा में उन्हें फूल, माला, सिंदूर चढ़ाने के साथ बूंदी या बेसन के लड्डू, तुलसी दल अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं. पूजा विधि         “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्॥” हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। आरती कर प्रसाद वितरित करें। हनुमान जन्मोत्सव के इस शुभ अवसर पर विधिपूर्वक पूजा करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है Hanuman Jayanti kab ki hai और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।  Bandi Mochan Hanuman Stotra | बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र

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Jain Festival 2025 Calendar 2025: में कब-कब मनाए जाएंगे जैन धर्म के प्रमुख त्योहार, महावीर स्वामी के बारे में जानें ये ख़ास बातें

Jain Festival 2025 Calendar 2025 : महावीर जयंती इस साल चार अप्रैल को है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर जयंती जैन समुदाय का विशेष पर्व होता है. इस जयंती को भगवान महावीर स्वामी के जन्म के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे. उनका जन्म ईसा पूर्व 599 वर्ष माना जाता है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 उनके पिता राजा सिद्धार्थ और माता रानी त्रिशला थीं और बचपन में उनका नाम वर्द्धमान था. Mahavir Jayanti 2025: महावीर जयंती 2025 कब है? Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर जयंती हिंदू चंद्र कैलेंडर में चैत्र महीने के 13वें दिन आती है, Jain Festival 2025 Calendar 2025 जो आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में मार्च या अप्रैल में आती है। इस वर्ष, महावीर जयंती 10 अप्रैल, 2025 (गुरुवार) को मनाई जाएगी। Jain calendar 2025 Festival: जैन धर्म, अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह जैसे महान सिद्धांतों पर आधारित, विश्व के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। इस धर्म के संस्थापक ऋषभदेव माने जाते हैं। जैन धर्म का एक विशेष कैलेंडर होता है, Jain Festival 2025 Calendar 2025 जिसमें उनके सभी व्रत और त्योहारों की जानकारी दी जाती है। जैसे हिंदू कैलेंडर में त्योहारों का उल्लेख होता है, वैसे ही जैन कैलेंडर में भी विभिन्न व्रत और पर्वों की तिथियां निर्धारित होती हैं। यहां 2025 के जैन कैलेंडर में महत्वपूर्ण व्रत और पर्वों के बारे में जानकारी है। जैन कैलेंडर के 12 महीने हिंदू कैलेंडर की तरह ही जैन कैलेंडर में भी 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीना 30 दिनों का होता है। इन 12 महीनों के नाम, कार्तक, मगसर, पोष, महा, फागन, चैत्र, वैशाख, जेठ, आषाढ़, श्रावण, भादरवो और आसो है। Jain Festival 2025 Calendar 2025 जैन धर्म का नववर्ष दिवाली के अगले दिन से शुरू होता है। यह दिन वीर निर्वाण संवत के अनुसार वर्ष का पहला दिन माना जाता है। जैन धर्म के अनुयायी अपने व्रत और त्योहारों को आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मिक शुद्धि के लिए मनाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2025 में जैन धर्म के कौन से त्योहार किस दिन मनाए जाएंगे।  जैन धर्म किन चीज़ों पर आधारित है? हिंदू धर्म की तरह जैन धर्म का भी कोई संस्थापक नहीं है. जैन धर्म 24 तीर्थंकरों के जीवन और शिक्षा पर आधारित है. तीर्थंकर यानी वो आत्माएं जो मानवीय पीड़ा और हिंसा से भरे इस सांसारिक जीवन को पार कर आध्यात्मिक मुक्ति के क्षेत्र में पहुंच गई हैं. सभी जैनियों के लिए 24वें तीर्थंकर महावीर जैन का ख़ास महत्व है. महावीर इन आध्यात्मिक तपस्वियों में से अंतिम तीर्थंकर थे. लेकिन, जहां औरों की ऐतिहासिकता अनिश्चित है वहीं, महावीर जैन के बारे में पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि उन्होंने इस धरती पर जन्म लिया. अहिंसा के इस उपदेशक का जन्म क्षत्रिय जाति में हुआ. वो गौतम बुद्ध के समकालीन थे. Jain Festival 2025 Calendar 2025:महावीर जयंती का उत्सव  Jain Festival 2025 Calendar 2025:महावीर जयंती को दुनिया भर में जैन धर्मावलंबियों द्वारा जीवंत उत्सव और गहरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव में आम तौर पर ये शामिल होते हैं: जुलूस और रथ यात्राएँ : कई शहरों और कस्बों में भव्य जुलूस निकाले जाते हैं, जिन्हें रथ यात्रा के नाम से जाना जाता है। Jain Festival 2025 Calendar 2025 भगवान महावीर की मूर्तियों को भव्य रूप से सजाए गए रथों पर ले जाया जाता है, साथ में भक्त भजन गाते हैं, धार्मिक गीत गाते हैं और पारंपरिक नृत्य करते हैं। मंदिर भ्रमण और प्रार्थना : जैन धर्मावलंबी जैन मंदिरों (देरासार) में प्रार्थना करने और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए जाते हैं। भगवान महावीर की मूर्तियों का विशेष अभिषेक (औपचारिक स्नान) किया जाता है। व्याख्यान और प्रवचन: धार्मिक नेता और विद्वान भगवान महावीर के जीवन और शिक्षाओं पर व्याख्यान और प्रवचन देते हैं। ये सत्र जैन दर्शन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं और श्रोताओं को अपने दैनिक जीवन में इसके सिद्धांतों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। धर्मार्थ गतिविधियाँ और सामुदायिक सेवा: इस शुभ दिन पर, जैन लोग विभिन्न धर्मार्थ गतिविधियों में संलग्न होते हैं, जैसे कि जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और दवाएँ दान करना। वे रक्तदान शिविर और निःशुल्क चिकित्सा जाँच शिविर भी आयोजित करते हैं। पशु आश्रयों को अक्सर सहायता दी जाती है, और जानवरों को बचाने और उनकी रक्षा करने के प्रयास किए जाते हैं। उपवास और ध्यान: कई जैन लोग महावीर जयंती पर उपवास रखते हैं, भोजन से परहेज करते हैं या केवल कुछ प्रकार के भोजन का सेवन करते हैं। वे आंतरिक शांति और आध्यात्मिक विकास की तलाश में ध्यान और चिंतन के लिए भी समय समर्पित करते हैं। बूचड़खानों से पशुओं को मुक्त करना: बूचड़खानों में जाने वाले पशुओं को मुक्त करना एक विशेष रूप से प्रभावशाली प्रथा है। करुणा का यह कार्य अहिंसा के सिद्धांत का प्रतीक है और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा के लिए जैन प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। सजावट और रोशनी: जैन मंदिरों और घरों को रंग-बिरंगे झंडों, फूलों और रोशनी से सजाया जाता है, जिससे उत्सव का माहौल बनता है। किसी भी जीव को नुकसान पहुँचाए बिना तैयार किए गए विशेष जैन व्यंजन परोसे जाते हैं। 2025: जैन धर्म के प्रमुख पर्व-त्योहार Jain Festival 2025 Calendar 2025 2 जनवरी 2025 यतीन्द्र सुरेश्वर दिवस   गुरुवार 02 जनवरी 2025 त्रिस्तुति     गुरुवार 06 जनवरी 2025 श्री राजेंद्र सूरीश्वर दिवस सोमवार 26 जनवरी 2025  शीतलनाथ जन्म तप   रविवार 27 जनवरी 2025 मेरु त्रयोदशी     सोमवार 27 जनवरी 2025  आदिनाथ निर्वाण कल्याणक  सोमवार 28 जनवरी 2025 ऋषभदेव मोक्ष   मंगलवार 02 फरवरी 2025  दशलक्षण (3/3) प्रारम्भ रविवार 04 फरवरी 2025 मर्यादा महोत्सव   मंगलवार 11 फरवरी 2025  श्री जीतेन्द्र रथ यात्रा  मंगलवार 11 फरवरी 2025   दशलक्षण (3/3) समाप्त  मंगलवार 07 मार्च 2025   अष्टान्हिका (3/3) प्रारम्भ   शुक्रवार 14 मार्च 2025  अष्टान्हिका (3/3) समाप्त शुक्रवार 02 अप्रैल 2025  दशलक्षण (1/3) प्रारम्भ बुधवार 04 अप्रैल 2025 आयंबिल ओली प्रारंभ शुक्रवार 10 अप्रैल 2025 महावीर जयंती  गुरुवार 11 अप्रैल 2025 दशलक्षण (1/3) समाप्त     शुक्रवार 12 अप्रैल 2025  आयंबिल ओली अंत  शनिवार 07 मई 2025 श्री महावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान दिवस बुधवार 13 मई 2025 ज्येष्ठ जिनवार व्रत प्रारंभ मंगलवार 24 मई 2025  श्री अनंतनाथ जन्म तप शनिवार 11 जून 2025 

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Ram Navami Kab hai 2025:आने वाले साल में कब है, राम नवमी पर करें इन मंत्रों का जाप, नोट कर लें सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी को भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस के रूप मे मानते है। यह पर्व हिंदू पंचांग के प्रथम माह चैत्र के शुक्ला पक्ष की नवमी के दिन आता है तथा यह उत्सव चैत्र नवरात्रि का नौवें दिन के रूप मे भी मनाया जाता है। श्री राम का प्राकट्य अभिजित नक्षत्र में दोपहर बारह बजे हुआ था। भगवान श्रीराम को भारत मे एक आदर्श पुरुष के रूप मे माना जाता है, Ram Navami Kab hai 2025:इस कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहा जाता है, तथा उनके उच्चतम प्रशासनिक कौशल को राम-राज्य के नाम से संबोधित किया जाता है। राम नवमी के दिन भक्त पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र की जन्मभूमि अयोध्या की पवित्र नदी सरयू में डुबकी लगाते हैं। तथा भक्त भगवान श्री राम, उनकी पत्नी माता सीता, उनके छोटे भाई श्री लक्ष्मण और श्री राम भक्त हनुमान जी से संबंधित भजन, कीर्तन, रामायण पाठ, उपवास, शोभा यात्रा और रथ यात्रा का आयोजन किया जाता हैं। माना जाता है कि, श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस दिन राम चरित मानस की रचना आरंभ की थी। Ram Navami 2025: राम नवमी का पर्व हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, जिन्हें विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम ने धरती पर अधर्म का नाश करने और धर्म की पुनः स्थापना के लिए अवतार लिया था। इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ माना जाता है। Ram Navami Kab hai 2025 राम नवमी का पर्व हर हिंदू परिवार में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, लेकिन अयोध्या में इसकी भव्यता देखते ही बनती है।  राम नवमी के दिन करें ये काम, बरसेगी मां दुर्गा की कृपा ramnavmi Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी 2025 तिथि इस साल  चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का प्रारम्भ 5 अप्रैल की शाम को 07:26 बजे होगा और समाप्त 6 अप्रैल की शाम 07:22 बजे होगा। ऐसे में इस साल राम नवमी का पर्व 6 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन चैत्र नवरात्रि का समापन भी होगा, इसलिए यह दिन और अधिक पावन माना जाएगा। Ram Navami puja subh muhurat पूजा का शुभ मुहूर्त राम नवमी के दिन मध्याह्न पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:08 बजे से लेकर दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा। यह अवधि 2 घंटे 31 मिनट की रहेगी। हालांकि, मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर 12 बजे हुआ था, इसलिए 12:34 का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इस समय पूजन और अभिषेक करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। राम नवमी के दिन पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान राम की बरसेगी कृपा Ram Navami puja mantra:राम नवमी पूजा मंत्र इस दिन श्रीराम के विभिन्न मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व होता है। “ॐ श्री रामचन्द्राय नमः”“ॐ रां रामाय नमः” श्रीराम तारक मंत्र “श्री राम, जय राम, जय जय राम” श्रीराम गायत्री मंत्र “ॐ दाशरथये विद्महे, सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥” इस दिन इन मंत्रों का जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। रामनवमी कथा Ram Navami Puja vidhi:पूजा विधि  Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने और सूर्यदेव को जल अर्पित करने का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत का संकल्प लेने के बाद घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर भगवान राम की प्रतिमा स्थापित की जाती है। Ram Navami Kab hai 2025 दोपहर 12 बजे के करीब श्रीराम का गंगाजल, पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है।  पूजा में तुलसी पत्ता और कमल का फूल रखना शुभ माना जाता है। फिर षोडशोपचार विधि से भगवान राम की पूजा की जाती है और खीर, फल एवं अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। इस दिन राम रक्षा स्तोत्र, सुंदरकांड और रामायण का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। अंत में आरती करने के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है और भक्तों को आशीर्वाद दिया जाता है। आज राम नवमी पर इस सरल विधि से करें हवन, प्रभु श्री राम के साथ मां सिद्धिदात्री भी होंगी प्रसन्न राम नवमी पूजा (Lord Ram puja vidhi) Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर राम जी का ध्यान करें। इसका बाद पूजा स्थल पर चौकी बिछाकर भगवान राम के साथ-साथ माता सीता, लक्ष्मण और भगवान हनुमान की मूर्ति या फिर तस्वीर स्थापित करें। Ram Navami Kab hai 2025 सभी को चंदन, रोली, धूप, फूल माला आदि अर्पित करें।इसके बाद अलग-अगल तरह के फल अर्पित करें। साथ ही इस दिन पर रामायण, रामचरितमानस और रामरक्षास्तोत्र का पाठ करना भी काफी लाभदायक माना जाता है। अंत में श्रद्धापूर्वक आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बांटें।

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may 2025 vrat tyohar list: मई 2025 व्रत और त्योहारों की संपूर्ण सूची एवं महत्व

may 2025 vrat tyohar list:मई 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, जो हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में विशेष स्थान रखते हैं। नीचे मई 2025 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची प्रस्तुत है: मई 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं, may 2025 vrat tyohar list जिनका धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह माह बुद्ध पूर्णिमा, वट सावित्री व्रत, मोहिनी एकादशी, शनि जयंती जैसे प्रमुख पर्वों से भरा हुआ है। may 2025 vrat tyohar list आइए जानते हैं मई 2025 के सभी व्रत और त्योहारों की सूची और उनके महत्व के बारे में विस्तार से। तारीख दिन व्रत/त्योहार 1 मई 2025 गुरुवार चतुर्थी व्रत, महाराष्ट्र दिवस, मई दिवस 2 मई 2025 शुक्रवार सूरदास जयंती 3 मई 2025 शनिवार बगलामुखी जयंती, दुर्गा अष्टमी व्रत 5 मई 2025 सोमवार गंगा सप्तमी 6 मई 2025 मंगलवार सीता नवमी 7 मई 2025 बुधवार रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 8 मई 2025 गुरुवार मोहिनी एकादशी 9 मई 2025 शुक्रवार प्रदोष व्रत 11 मई 2025 रविवार नरसिंह जयंती, मातृ दिवस 12 मई 2025 सोमवार पूर्णिमा, कूर्म जयंती, चित्रा पूर्णिमा, श्री सत्यनारायण व्रत, बुद्ध पूर्णिमा 13 मई 2025 मंगलवार नारद जयंती 15 मई 2025 गुरुवार वृषभ संक्रांति 16 मई 2025 शुक्रवार संकष्टी चतुर्थी 20 मई 2025 मंगलवार कालाष्टमी 23 मई 2025 शुक्रवार भद्रकाली जयंती, अपरा एकादशी 24 मई 2025 शनिवार प्रदोष व्रत 25 मई 2025 रविवार मासिक शिवरात्रि 26 मई 2025 सोमवार वट सावित्री व्रत 27 मई 2025 मंगलवार रोहिणी व्रत, भौमवती अमावस्या, शनि जयंती 28 मई 2025 बुधवार चंद्र दर्शन 29 मई 2025 गुरुवार चतुर्थी व्रत 30 मई 2025 शुक्रवार महाराणा प्रताप जयंती 31 मई 2025 शनिवार शीतल षष्ठी may 2025 vrat tyohar list:इन व्रतों और त्योहारों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। उदाहरण के लिए: may 2025 vrat tyohar list पूजा विधि और लाभ इन व्रतों और त्योहारों के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हैं और may 2025 vrat tyohar list आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं।

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