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Holi 2025 Special Tips: होली के दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना हो सकता है भारी नुकसान

Holi 2025 Special Tips: 14 मार्च 2025 को रंगों का त्योहार होली मनाया जाने वाला है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि होली पर भूलकर भी इन 5 चीजों का दान न करें वरना हो सकता है भारी नुकसान। जानिए होली के दिन किन गलतियों से बचें ताकि बनी रहे सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों का असर न हो। Holi 2025 Special Tips:होलिका दहन पर क्या न करें? उधार– आज होलिका दहन के दिन किसी को पैसे उधार देने से बचें। होलिका दहन पर पैसे उधार देने से आर्थिक स्थिति पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। फटे-पुराने कपड़े– होलिका दहन के दिन कटे-फटे कपड़े पहनने से बचें। किसी भी त्योहार या शुभ मौके पर फटे कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है की फटे-पुराने कपड़े पहनने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। मास-मदिरा– होलिका दहन के दिन भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान विष्णु नराज हो सकते हैं। काले वस्त्र– धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ अवसर या फिर पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसलिए होलिका दहन के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा।अपमान- कोशिश करें की इस दिन आप किसी का दिल न दुखाएं और वाद-विवाद से भी बचें। किसी का भी Holi 2025 Special Tips अपमान करने से बचें और न ही किसी का मजाक उड़ाएं। 

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Holi 2025:होली किस तारीख को है? जानें सही तिथि और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

Holi 2025:हर साल होली (Holi 2025 Kab hai) के पर्व का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस त्योहार के दिन देशभर में लोगों में बेहद खास देखने को मिलता है। होली के पर्व को 2 दिन तक मनाया जाता है। एक दिन पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन रंगों का पर्व होली मनाई जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं होली से जुड़ी विशेष बातें। Holi 2025: हिंदू धर्म में होली का त्योहार प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। देशभर में बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ होली मनाया जाता है। यह त्योहार फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को पड़ता है, लेकिन इससे एक दिन पहले रात्रि में होलिका दहन Holi 2025 किया जाता है। जिसे छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। होली का महापर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस त्योहार को लेकर कई अलग-अलग पौराणिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। रंगों का पर्व होली काम, क्रोध, मद,मोह और लोभ जैसे दोषों को त्यागकर ईश्वर की भक्ति में समय व्यतीत करने का संदेश देता है। इस दिन लोगों एक-दूसरे को गुलाल और रंग लगाते हैं और आपस में खुशियां बांटते हैं। इस साल होलिका दहन के दिन भद्रा का साया रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्राकाल में होलिका दहन करना शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं होली की सही तिथि और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त… Holi Kab hai 2025:होली कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 13 मार्च 2025 को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर होगी और अगले दिन 14 मार्च 2025 को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 14 मार्च को होली मनाई जाएगी और 13 मार्च की रात्रि को होलिका दहन किया जाएगा। इस साल होलिका दहन के दिन भद्रा का भी साया रहेगा। होलिका दहन पर भद्रा : 13 मार्च को होलिका दहन के दिन 10:35 AM से 11:26 PM तक भद्राकाल रहेगा। इस दौरान होलिका दहन करने से बचें। होलिका दहन का मुहूर्त : पंचांग के अनुसार, 13 मार्च को देर रात 11 : 27 PM से लेकर 14 मार्च को 12:30 AM तक लगभग 01 घंटा 40 मिनट तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। Holi 2025:होलिका दहन के उपाय यदि आप शादी में किसी बाधा का सामना कर रहे हैं, तो होलिका दहन Holi 2025 के समय परिक्रमा लगाएं। साथ ही अग्नि में हवन सामग्री अर्पित करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से विवाह में आ रही रुकावट से छुटकारा मिलता है। साथ ही वैवाहिक जीवन हमेशा खुशहाल रहता है। इसके अलावा किसी रोग से छुटकारा पाने के लिए होलिका दहन की आग में कपूर डालें। ऐसी मान्यता है कि इस उपाय को करने से सभी तरह की बीमारी दूर होती है और मन सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है। अगर आप लंबे समय से घर में नकारात्मक ऊर्जा का सामना कर रहे हैं, तो ऐसे में होली की आग घर लाएं और उसे अपने पूरे घर में घुमाएं। माना जाता है कि होलिका दहन की आग से इस उपाय को करने से घर में उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

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Vinayak Chaturthi 2025 Date: मार्च महीने में कब है विनायक चतुर्थी? शुभ मुहूर्त एवं योग के लिए पढ़ें यह खबर

Vinayak Chaturthi 2025 Date:भगवान गणेश को कई नामों से जाना जाता है। भगवान गणेश की पूजा करने से धन की परेशानी दूर होती है। साथ ही सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में देवों के देव महाेदव के पुत्र भगवान गणेश की श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है। साथ ही चतुर्थी का व्रत (Vinayak Chaturthi 2025 Date) रखा जाता है। धार्मिक मत है कि चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा करने से साधक के आय, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है। आइए, फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025 Date) की सही डेट एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं। विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Vinayak Chaturthi Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 02 मार्च को रात 09 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, चतुर्थी तिथि का समापन 03 मार्च को शाम 06 बजकर 02 मिनट पर होगा। इस दिन चन्द्रास्त रात 10 बजकर 11 मिनट पर होगा। साधक 03 मार्च को विनायक चतुर्थी का व्रत रख सकते हैं। विनायक चतुर्थी शुभ योग (Vinayak Chaturthi Shubh Yog) फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर शुक्ल और ब्रह्म योग का निर्माण हो रहा है। शुक्ल योग सुबह 08 बजकर 57 मिनट तक है। इसके बाद ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही भद्रावास योग का भी संयोग बनेगा। इसके अलावा, अश्विनी नक्षत्र का भी योग है। इन योग में भगवान गणेश की पूजा करने से साधक ही हर मनोकामना पूरी होगी। Vinayak Chaturthi 2025:पंचांग सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 44 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 22 मिनट पर चन्द्रोदय- सुबह 08 बजकर 40 मिनट पर चंद्रास्त- रात 10 बजकर 11 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 05 मिनट से 05 बजकर 55 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 16 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 20 मिनट से 06 बजकर 45 मिनट तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक

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Amalaki Ekadashi 2025:आमलकी एकादशी पर व्रती गलती से भी न खाएं ये चीजें, टूट सकता है व्रत

Amalaki Ekadashi 2025:आमलकी एकादशी हर साल फाल्गुन महीने में मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए बहुत शुभ माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह एकादशी 10 मार्च (Amalaki Ekadashi Kab hai 2025) को मनाई जाएगी। कहते हैं कि जो लोग इस उपवास को रखते हैं उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। Amalaki Ekadashi Kab hai 2025:हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सबसे शुभ व्रतों में से एक माना जाता है। एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है और सभी भक्त भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन श्रद्धापूर्वक उपवास करते हैं। एक साल में कुल 24 और महीने में दो बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के दौरान एकादशी आती है। सभी एकादशी का अपना महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च 2025 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाएगा। जब यह व्रत (Amalaki Ekadashi 2025) इतना विशेष है, तो इसमें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? इसका भी ध्यान देना बहुत जरूरी है, तो आइए जानते हैं। ताकि आप व्रत का पूरा फल प्राप्त कर सकें। आमलकी एकादशी पर क्या खाएं और क्या नहीं? (Amalaki Ekadashi 2025 Par Kya Khaye Or Kya Nahi?) क्या खा सकते हैं? (Vrat Me Kya Khana Chahiye) आमलकी एकादशी व्रत को जो लोग रखने वाले हैं, वे दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही इस दिन आंवले का सेवन और आंवले के पेड़ के नीचे भोजन भी जरूर करना चाहिए, क्योंकि यह इस दिन पूजा का अहम भाग माना गया है। हालांकि व्रती को तामसिक व नमक आदि के उपयोग से बचना चाहिए। कहते हैं कि इस दिन जो लोग सभी नियमों का पालन करते हुए व्रत रखते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की कृपा सदैव के लिए प्राप्त होती है। न खाएं ये चीजें (Vrat Me Kya Nahi Khana Chahiye?) Vrat Me Kya Khana Chahiye:जो लोग आमलकी एकादशी का उपवास रखते हैं, उन्हें तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन, मसाले, तेल आदि से भी दूर रहना चाहिए। इसके साथ ही इस दिन (Significance Of Amalaki Ekadashi 2025) चावल और नमक खाने को भी पूरी तरह मना किया गया है। ऐसे में अगर आप इस व्रत को रखने वाले हैं, तो इन बातों का जरूर ध्यान दें। वरना व्रत टूट सकता है। प्रसाद अर्पित करने का मंत्र (Bhog Mantra) Amalaki Ekadashi 2025:प्रसाद अर्पित करते समय इस मंत्र ”त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।” का करें जाप। कहा जाता है कि इससे प्रसाद तुरंत स्वीकार हो जाता है। इसके साथ ही अन्न और धन में बरकत आती है। एकादशी के प्रकार एकादशी दो प्रकार की होती है। 1 सम्पूर्णा 2. विद्धा1) सम्पूर्णा – जिस तिथि में केवल एकादशी तिथि होती है अन्य किसी तिथि का उसमे मिश्रण नहीं होता उसे सम्पूर्णा एकादशी कहते है। 2) विद्धा एकादशी पुनः दो प्रकार की होती है2. A) पूर्वविद्धा – दशमी मिश्रित एकादशी को पूर्वविद्धा एकादशी कहते हैं। Amalaki Ekadashi 2025 यदि एकादशी के दिन अरुणोदय काल (सूरज निकलने से 1घंटा 36 मिनट का समय) में यदि दशमी का नाम मात्र अंश भी रह गया तो ऐसी एकादशी पूर्वविद्धा दोष से दोषयुक्त होने के कारण वर्जनीय है यह एकादशी दैत्यों का बल बढ़ाने वाली है। पुण्यों का नाश करने वाली है। वासरं दशमीविधं दैत्यानां पुष्टिवर्धनम ।मदीयं नास्ति सन्देह: सत्यं सत्यं पितामहः ॥ [पद्मपुराण]दशमी मिश्रित एकादशी दैत्यों के बल बढ़ाने वाली है इसमें कोई भी संदेह नहीं है। 2. B) परविद्धा – द्वादशी मिश्रित एकादशी को परविद्धा एकादशी कहते हैं।द्वादशी मिश्रिता ग्राह्य सर्वत्र एकादशी तिथि।द्वादशी मिश्रित एकादशी सर्वदा ही ग्रहण करने योग्य है। इसलिए भक्तों को परविद्धा एकादशी ही रखनी चाहिए। Amalaki Ekadashi 2025 ऐसी एकादशी का पालन करने से भक्ति में वृद्धि होती है। दशमी मिश्रित एकादशी से तो पुण्य क्षीण होते हैं।

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Maha Shivratri Mahamantra 2025: महाशिवरात्रि पर करें शिव जी के इन मंत्रों का जाप, मृत्यु के भय से मिल सकती है मुक्ति

Maha Shivratri Mahamantra 2025:इस बार 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की शादी माता पार्वती से हुई थी। महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की आराधना की जाती है इसके साथ ही उपवास भी रखते है। इस दिन शिवलिंग पूजा के दौरान अगर भगवान शिव के महा मंत्रों का जाप किया जाए तो इससे मृत्यु का भय दूर हो जाता है। Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है यह पर्व भोलेनाथ को समर्पित है। यह दिन शिव के विवाह दिवस का प्रतीक है। महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाई जाती है, इस बार महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025, बुधवार को मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि एक हिंदू पर्व है जो भगवान शिव का सम्मान करता है, इसे शिव की रात भी कहा जाता है। इस दिन भक्त दिन-रात व्रत रखकर भगवान की पूजा करते हैं। यह दिन शिव और शक्ति का मिलन का दिन है। Maha Shivratri Mahamantra 2025:इस दिन भगवान भोलेनाथ का विवाह माता पार्वती से हुआ था।  महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शिवलिंग पूजा के दौरान भगवान शिव के महा मंत्रों का जाप किया जाए तो इससे मृत्यु का भय दूर हो जाता है और कुंडली में बनने वाले अकाल मृत्यु का योग भी टल जाता है।  Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के महामंत्र Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि के दिन 4 प्रहरों में भगवान शिव का पूजन किया जाता है। हर एक प्रहर का एक मंत्र भी है। इसलिए चार प्रहर के 4 मंत्र जो मृत्यु के भय से मुक्ति दिला सकते हैं। प्रथम प्रहर की पूजा का समय 26 फरवरी को शाम 6 बजकर 19 मिनट से रात 9 बजकर 26 मिनट तक है। इस प्रहर में भगवान शिव के ‘ह्रीं ईशानाय नमः’ मंत्र का जाप करें। महाशिवरात्रि के दूसरे प्रहर की पूजा का समय 26 फरवरी को रात 9 बजकर 26 मिनट से रात 12 बजकर 34 मिनट तक है। इस दौरान भगवान शिव के  ‘ह्रीं अघोराय नम:’ मंत्र का जाप करें। तीसरे प्रहर की पूजा का समय 26 फरवरी को रात 12 बजकर 34 मिनट से रात 3 बजकर 41 मिनट है। इस दौरान भगवान शिव के ‘ह्रीं वामदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करें। महाशिवरात्रि के चौथे प्रहर की पूजा का समय 26 फरवरी को रात 3 बजकर 41 मिनट से 27 फरवरी को सुबह 6 बजकर 48 मिनट है। ऐसे में इस प्रहर के दौरान भगवान शिव के ह्रीं सद्योजाताय नमः मंत्र का जाप करें। Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि पर जपने योग्य शुभ मंत्र महामृत्युंजय मंत्र – मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए मंत्र:ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥ लाभ: 2. शिव पंचाक्षर मंत्र – शिव कृपा प्राप्ति के लिए मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥ लाभ: 3. रुद्र गायत्री मंत्र – शिव तत्व की प्राप्ति के लिए मंत्र:ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ लाभ: 4. काल भैरव मंत्र – भय और शत्रुओं से मुक्ति के लिए मंत्र:ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्॥ लाभ: Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि पर मंत्र जाप की विधि Maha Shivratri Mahamantra 2025:मंत्र जाप के नियम जाप हमेशा पवित्र मन से करें और शांत स्थान पर बैठें।रुद्राक्ष माला से मंत्र जाप करना श्रेष्ठ माना जाता है।भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बिल्वपत्र, भांग, धतूरा और पंचामृत अर्पित करें। मंत्र जाप के बाद शिव आरती करें और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें। Maha Shivratri Mahamantra 2025:निष्कर्ष Maha Shivratri Mahamantra 2025:महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के इन मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति मृत्यु के भय से मुक्त होकर सुख-शांति, समृद्धि और दीर्घायु प्राप्त करता है। विशेष रूप से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना इस दिन अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस महाशिवरात्रि पर श्रद्धा और भक्ति से शिव पूजन करें और शिव कृपा प्राप्त करें।

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Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:महाशिवरात्रि पर कैसे करें जलाभिषेक? जानें शिवलिंग पर जल चढ़ाने के शुभ नियम और विधि

Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:महाशिवरात्रि पर कैसे करें जलाभिषेक? जानें शिवलिंग पर जल चढ़ाने के शुभ नियम और विधि Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। जलाभिषेक का विशेष महत्व है क्योंकि यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है। यदि जलाभिषेक विधिपूर्वक किया जाए, तो भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक कैसे करें और इसके शुभ नियम क्या हैं। Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:भगवान शिव को जल कैसे चढ़ाएं Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक की विधि Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:शिवलिंग पर जल चढ़ाने के शुभ नियम महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का महत्व Maha Shivratri 2025 Water Offering Mantra:पुराणों में जलाभिषेक को पवित्र और कल्याणकारी बताया गया है। मान्यता है कि जल चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्टों को हर लेते हैं। विशेष रूप से, जो लोग आर्थिक संकट, रोग या जीवन की परेशानियों से ग्रसित होते हैं, उन्हें महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक जरूर करना चाहिए। इस महाशिवरात्रि पर श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उनकी असीम कृपा प्राप्त करें। हर-हर महादेव!

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Falgun Chaturthi 2025:फाल्गुन माह में कब है विनायक चतुर्थी? नोट करें शुभ मुहूर्त

Falgun Chaturthi 2025:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। Falgun Chaturthi 2025 Puja Vidhi Kese kare :विनायक चतुर्थी पूजा विधि कैसे करें: Falgun Chaturthi 2025 मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि की पूजा दोपहर के समय करनी चाहिए। Falgun Chaturthi 2025 क्योंकि शाम के समय चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से झूठा कलंक लगता है। मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने विनायक चतुर्थी की रात को चंद्रमा देखा था, जिसके बाद उन्हें स्यामंतक मणि चोरी करने के लिए झूठा कलंक लगाया गया था। इस दिन प्रात:काल स्नान कर व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर पूजा प्रारंभ करें। भगवान गणेश को पीले फूलों की माला अर्पित करने के बाद धूप-दीप, नैवेद्य, अक्षत और उनकी प्यारी दूर्वा घास अर्पित करें। इसके बाद मिठाई या मोदक का भोग लगाएं। अंत में व्रत कथा पढ़कर गणेश जी की आरती करें। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को सिंदूर बहुत प्रिय होता है इसलिए Falgun Chaturthi 2025 विनायक चतुर्थी के दिन पूजा के समय गणेश जी को लाल रंग के सिंदूर का तिलक लगाएं। सिंदूर चढ़ाते समय निम्न मंत्र का जाप करें-सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् ।शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ॥ विनायक चतुर्थी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Vinayak Chaturthi 2025 Date and Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह (Vinayak Chaturthi Phalgun 2025 Shubh Muhurat) के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का प्रारंभ 02 मार्च को रात 09 बजकर 01 मिनट पर हो रहा है। वहीं, तिथि का समापन अगले दिन यानी 03 मार्च को शाम 06 बजकर 02 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi Kab hai) 03 मार्च को मनाई जाएगी। ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा (Lord Ganesh Puja Vidhi) Falgun Chaturthi 2025:चतुर्थी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें। इसके बाद स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। अब दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत करें। सच्चे मन से भगवान गणेश की आरती करें। मोदक और फल समेत प्रिय चीजों का भोग लगाएं। इस दौरान भोग मंत्र का जप करें। आखिरी में लोगों में प्रसाद बाटें।

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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि की रात जागने से क्या होता है?

Mahashivratri 2025: हिंदू धर्म शास्त्रों में महाशिवरात्रि का दिन बड़ा ही पावन और विशेष माना गया है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन भोलेनाथ का पूजन और व्रत किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के पूजन और व्रत से भकतों की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. Mahashivratri 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह साल का अंतिम महीना होता है. हिंदू धर्म शास्त्रों में ये महीना भगवान महादेव को समर्पित किया गया है. इसी महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पड़ती है. Mahashivratri 2025 महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का पूजन और व्रत किया जाता है. इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान शिव सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. Mahashivratri 2025 Kab hai:महाशिवरात्रि कब है ? हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी. वहीं 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट प इस तिथि का समापन होगा. ऐसे में महाशिवरात्रि 26 फरवरी को मनाई जाएगी. इस दिन इसका व्रत रखा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार… हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना और जागरण किया जाता है. महाशिवरात्रि की रात में जागरण करने का अध्यामिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है, आइए जानते हैं. महाशिवरात्रि की रात का धार्मिक महत्व महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ वैराग्य जीवन छोड़कर मां पार्वती के साथ विवाह के बंधन में बंधे थे. इस दिन माता पार्वती और भोलेनाथ रात में भ्रमण पर निकलते हैं. ऐसे में जो लोग रात्रि जागरण कर महादेव की आराधना करते हैं Mahashivratri 2025 उनके समस्त दुख दूर होते हैं और जीवन में खुशियों का आगमन होता है.  महाशिवरात्रि की रात का वैज्ञानिक महत्व महाशिवरात्रि की रात में ब्रह्माण्ड में ग्रह और नक्षत्रों की ऐसी स्थिति होती है जिससे एक खास ऊर्जा का प्रवाह होता है. इस रात ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य के भीतर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर जाने लगती है यानी प्रकृति स्वयं मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद कर रही होती है. Mahashivratri 2025 इसलिए  महाशिवरात्रि की रात में जागरण करने व रीढ़ की हड्डी सीधी करके ध्यान मुद्रा में बैठने की बात कही गई है. Mahashivratri 2025 Puja Vidhi महाशिवरात्रि पूजा विधि महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुभ मुहूर्त में ही पूजा करें. इस दिन रात्रि के चारों प्रहर में भी पूजा की जाती है. लेकिन निशिता मुहूर्त में पूजा करना सबसे शुभ होता है. पूजा के लिए साफ कपड़े पहन लें और शिव-पार्वती का ध्यान करें. आसन लेकर बैठ जाएं. एक साफ स्थान पर चौकी रखें और सफेद का कपड़ा बिछाएं.  चौकी के ऊपर शिव पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. आप मंदिर जाकर भी शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं.  सबसे पहले शिवलिंग का गंगाजल, कच्चे दूध, गन्ने के रस, दही आदि से अभिषेक करें. फिर घी का दीपक जलाकर विधि-विधान से शिवजी और मां पार्वती का पूजन करें. शिवजी को चंदन का टीका लगाएं और उन्हें बेलपत्र, भांग, धतूरा, फूल, मिष्ठान आदि सभी सामग्रियां अर्पित करें. माता पार्वती को भी सिंदूर लगाएं और उनका पूजन करें.  साथ ही पार्वती जी को सुहाग का सामान भी अर्पित करें. अब भगवान को भोग लगाएं और फिर शिवजी की आरती करें. इस दिन शिवजी के प्रिय मंत्रों का जाप भी जरूर करें. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Kalashtami 2025: कालाष्टमी के दिन लगाएं इन विशेष चीजों का भोग, प्रसन्न होंगे बाबा काल भैरव, मनोकामनाएं होंगी पूरी!

Kalashtami 2025: 20 फरवरी को कालाष्टमी व्रत रखा जाएगा. इस दिन काल भैरव का व्रत और पूजन करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. साथ ही भय व शत्रुओं से मुक्ति मिलती है. Kalashtami Puja Upay Niyam and Importance: कालाष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन भगवान भैरव को समर्पित है, जो भगवान शिव के उग्र रूप माने जाते हैं. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से सभी प्रकार के भय और संकट दूर होते हैं. मान्यता है कि भगवान भैरव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें नकारात्मक शक्तियों से बचाते हैं. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. जो लोग सच्चे मन से भगवान भैरव की पूजा करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 20 फरवरी दिन गुरुवार को सुबह 03 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 21 फरवरी दिन शुक्रवार को सुबह 01 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार कालाष्टमी की पूजा 20 फरवरी को करना शुभ रहेगा. इस दिन मनाई जाएगी कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 20 फरवरी को सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर शुरु होगी और 21 फरवरी को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में कालाष्टमी का व्रत 20 फरवरी के दिन रखा जाएगा और इसी दिन कालाष्टमी व्रत रखा जाएगा. भगवान काल भैरव को लगाए ये भोग कालाष्टमी के दिन बाबा काल भैरव को गुलगुले, जलेबी या हलवे का भोग लगाना चाहिए. यह उन्हें बेहद प्रिय माने जाते हैं. भगवान काल भैरव को कालाष्टमी के दिन मदिरा का भोग लगाने का भी महत्व है, इसलिए इस दिन आप इन्हें मदिरा का भोग लगा सकते हैं. मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव को इस दिन पूजा के समय पान, सुपारी, लौंग सहित मुखवास आदि चढ़ाना भी अच्छा माना जाता है. एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि जब भी आप कालाष्टमी की पूजा करके उन्हें भोग लगाएं. उसके बाद गरीबों को भोजन अवश्य कराएं. इससे आपको अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा. Kalashtami 2025 Ki Puja Vidhi:कालाष्टमी की पूजा विधि कालाष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. भगवान भैरव की प्रतिमा को एक चौकी पर स्थापित करें. भगवान भैरव को धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें. कालाष्टमी की व्रत कथा सुनें. दिन भर व्रत रखें और भगवान भैरव का ध्यान करें. शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करें. व्रत पारण के लिए सबसे पहले भगवान भैरव को मोदक का भोग लगाएं. इसके बाद आप फल, मिठाई और अन्य सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं. इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है. Kalashtami 2025:काल भैरव को अर्पित करें ये चीजें Kalashtami 2025:कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व है. Kalashtami 2025 इस दिन काल भैरव को कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से मनोकामनाएं जल्द पूरी होती हैं. यहां कुछ चीजें बताई गई हैं जिन्हें आप कालाष्टमी के दिन काल भैरव को अर्पित कर सकते हैं. काला तिल: कालाष्टमी के दिन काल भैरव को काले तिल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है. इससे पितृ दोष शांत होता है और राहु-केतु के दोष भी दूर होते हैं. उड़द की दाल: उड़द की दाल से बनी चीजें जैसे कि पकौड़े, बड़े आदि काल भैरव को अर्पित करने से शनि के दोष शांत होते हैं. सरसों का तेल: कालाष्टमी के दिन काल भैरव को सरसों का तेल अर्पित करना चाहिए. इससे रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है. भैरव अष्टमी: इस दिन काल भैरव को आठ प्रकार के फल अर्पित करने से अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति होती है. काले वस्त्र: काल भैरव को काले वस्त्र अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुरक्षा मिलती है. पंच मेवा: काल भैरव को पंच मेवा अर्पित करने से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है. मदिरा: कुछ लोग कालाष्टमी के दिन काल भैरव को मदिरा भी अर्पित करते हैं. कुत्ते को भोजन: कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को भोजन कराना बहुत शुभ माना जाता है. इससे Kalashtami 2025 काल भैरव प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कालाष्टमी Kalashtami 2025 के दिन काल भैरव को ये चीजें अर्पित करने से आपके जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. Kalashtami 2025:कालाष्टमी का महत्व ऐसी मान्यता है कि Kalashtami 2025 कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से जीवन में समृद्धि और सफलता आती है. भगवान भैरव को धन और ऐश्वर्य का देवता भी माना जाता है. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. यह दिन बुरी शक्तियों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए बहुत शुभ माना जाता है. भगवान भैरव की पूजा करने से आध्यात्मिक विकास होता है. यह दिन आत्मा को शुद्ध करने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर क्या करें और क्या न करें, मिलेगा महादेव का आशीर्वाद

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे फाल्गुन माह में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं जीवन में सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जिसका पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। Maha Shivratri 2025 Puja: महाशिवरात्रि इस साल 26 फरवरी को है। महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था और इस दिन दो भी महादेव की उपासना करता है, Mahashivratri 2025:उसे दोगुना फल प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिर जाकर भगवान शिव को फल-फूल अर्पित करते हैं और शिवलिंग पर दूध व जल अर्पित करते हैं। महाशिवरात्रि के दिन देशभर के सभी शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस दिन पूजा की भी खास विधि होती है। हालांकि, पूजा करते समय आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखने की भी जरूरत है। वरना भगवान शिव आपसे नाराज हो सकते हैं। Mahashivratri 2025 तो आज की इस खबर में हम आपको उन चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको करनी है। साथ ही वह चीजें भी बता रहे हैं, जो आपको नहीं करनी है। आइए जानते हैं। Mahashivratri 2025:महाशिवरात्रि व्रत के नियम अगर आप  महाशिवरात्रि का व्रत रख रहे हैं, तो इस दिन दोपहर में सोने से बचें। महाशिवरात्रि के दिन भूलकर भी शिवलिंग पर चढ़ा भोग ग्रहण न करें। यदि महाशिवरात्रि पर उपवास किया है तो अन्न का सेवन न करें। आप फलाहार खा सकते है। महाशिवरात्रि में कुछ भक्त निर्जला उपवास रखते हैं, ऐसे में आप पूरा दिन जल की एक बूंद भी ग्रहण न करें। महाशिवरात्रि के दिन शिव जी का जलाभिषेक जरूर करें। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। महाशिवरात्रि पर पूरा दिन भगवान शिव का ध्यान करें। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। महाशिवरात्रि के व्रत में साबुत अनाज और सफेद नमक का उपयोग न करें। इस दिन घर में भूलकर भी मांस मदिरा न लाएं। महाशिवरात्रि के व्रत में आप साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़े का हलवा, कुट्टू  का सेवन करें। इस दिन मन को शांत रखें और किसी से भी लड़ाई झगड़ा न करें। महाशिवरात्रि पर शाम को भोलेनाथ की पूजा अवश्य करें। महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये काम काले-नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें महाशिवरात्रि के दिन आपको काले और नीले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। Mahashivratri 2025 इस दिन लाल-पीले या हरे रंग के कपड़े शुभ माने जाते हैं। इसलिए सुबह-सुबह नहाकर आप इसी रंग के कपड़े पहनकर पूजा करें। Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा से मोक्ष की होगी प्राप्ति, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत विधि Maha Shivratri:2025 में महाशिवरात्रि कब है? नोट कर लें डेट और पूजा-विधि Mahashivratri 2025:मेष राशि वाले आज करें इस मंत्र का जाप, वैवाहिक जीवन में आएगी खुशहाली, जानें 12 राशियों के लिए शिव मंत्र महाशिवरात्रि व्रत कथा अन्न का सेवन न करेंMahashivratri 2025:महाशिवरात्रि के दिन आपको व्रत रखना चाहिए। Mahashivratri 2025 इस दिन कई लोग खाली पेट ही भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं और बाद में फलाहार करते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि इस दिन आप अन्न की जगह दूध या फलों का सेवन कर और सूर्य के अस्त होने के बाद कुछ भी खाने से बचें। देर तक न सोएं महाशिवरात्रि के दिन सुबह उठकर ही पूजा करना ही शुभ होता है। Mahashivratri 2025 इस दिन देर तक सोने से बचना चाहिए। अगर आपमें सामर्थ है तो आप रात में जाग भी सकते हैं। इससे काफी शुभ फल मिलता है। किसी से झगड़ा न करेंइस दिन आपको किसी से भी झगड़ा करने से बचना चाहिए। साथ ही मुंह से अपशब्द भी नहीं निकालने चाहिए। यही नहीं, इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। साथ ही घर में कलेश आदि नहीं होना चाहिए। क्या करना चाहिए भगवान का करें अभिषेकमहाशिवरात्रि के दिन महादेव का रुद्राभिषेक या अभिषेक जरूर करना चाहिए। यही नहीं, आप ओम नमः शिवाय बोलते हुए भी इस काम को अच्छी तरह कर सकते हैं। चाह प्रहर की पूजा करेंअगर संभव हो तो आप महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा कर सकते हैं। यह विशेष फलदायी मानी जाती है। इसके साथ महामृत्युंजय मंत्र का जप करना भी शुभ होता है। घर में कर सकते हैं शिवलिंग की स्थापनायह दिन शिवलिंग की स्थापना के लिए काफी शुभ माना जाता है। अगर आप घर में शिवलिंग लाकर पूजा करना चाहते हैं तो यह फलदायी होगा। बेलपत्र के नीचे करें स्नानअगर संभव हो तो इस दिन बेलपत्र के पेड़ के नीचे स्नान करना बहुत ही फलदायक होता है। शिवपुराण की मानें तो बेल वृक्ष के नीचे स्नान करने से कई जन्मों के पाप कट जाते हैं। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Falgun Amavasya 2025 Date and Shubh Muhurat:फरवरी में फाल्गुन अमावस्या कब है? जानें डेट व स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

Falgun Amavasya 2025 Shubh Muhurat: हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या पर शुभ मुहूर्त में स्नान-दान करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इससे भगवान विष्णु व पितृदेव के प्रसन्न होने की भी मान्यता है। सनातन धर्म में फाल्गुन महीने में पड़ने वाली अमावस्या को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya 2025) के पर्व को होली से पहले मनाया जाता है। इस तिथि पर पवित्र नदी में स्नान ध्यान और दान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन कामों को करने से व्यक्ति को पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। फाल्गुन अमावस्या 2024 डेट और शुभ मुहूर्त (Falgun Amavasya 2025 Date and Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 27 फरवरी को सुबह 08 बजकर 54 मिनट से होगी और इसके अगले दिन यानी 28 फरवरी को सुबह 06 बजकर 14 मिनट पर तिथि का समापन होगा। ऐसे में फाल्गुन अमावस्या का पर्व 27 फरवरी को मनाया जाएगा। फाल्गुन अमावस्या पर बन रहे शुभ योग: फाल्गुन अमावस्या पर शिव व साध्य योग का शुभ संयोग बन रहे हैं। Falgun Amavasya 2025 शिव योग रात 11 बजकर 41 मिनट तक रहेगा और इसके बाद साध्य योग प्रारंभ होगा। ज्योतिष शास्त्र में शिव व साध्य योग अत्यंत शुभ माने गए हैं। मान्यता है कि ये शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ होते हैं और इस अवधि में किए गए कार्यों के शुभ फल प्राप्त होते हैं। फाल्गुन अमावस्या पर राहुकाल का समय: फाल्गुन अमावस्या पर राहुकाल दोपहर 2 बजे से दोपहर 03 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ माना गया है। इस दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। Falgun Amavasya 2025:फाल्गुन अमावस्या पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त- 05:08 ए एम से 05:58 ए एम अभिजित मुहूर्त- 12:11 पी एम से 12:57 पी एम विजय मुहूर्त- 02:29 पी एम से 03:15 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 06:17 पी एम से 06:42 पी एम Falgun Amavasya 2025:शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 05 बजकर 09 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 07 मिनट से शाम 06 बजकर 42 मिनट तकनिशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से 12 फरवरी रात 12 बजकर 58 मिनट तकअभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक सूर्योदय और सूर्यास्त का समय सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 48 मिनट परसूर्यास्त – शाम 06 बजकर 20 मिनट परचंद्रोदय – कोई नहींचन्द्रास्त – शाम 05 बजकर 42 मिनट पर फाल्गुन अमावस्या पूजा विधि (Falgun Amavasya Puja Vidhi) फाल्गुन अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस दौरान सच्चे मन से पितरों की मोक्ष प्राप्ति की कामना करें। दीपक जलाकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं। विष्णु जी के मंत्रों का जप करें। इसके बाद जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। मंदिर या फिर गरीब लोगों में श्रद्धा अनुसार अन्न, धन और कपड़े का दान करें। धार्मिक मान्यत है कि फाल्गुन अमावस्या के दिन दान करने से व्यक्ति को जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती है। फाल्गुन अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करने का विशेष महत्व है।

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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा से मोक्ष की होगी प्राप्ति, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत विधि

Mahashivratri 2025:महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पावन पर्व है, जो हर वर्ष फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से सांसारिक कष्टों से. Mahashivratri 2025 : फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन पर्व प्रतिवर्ष मनाया जाता है. इस दिन का भगवान भोलेनाथ के भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है. Mahashivratri 2025 इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा व्रत आदि करने से समस्त प्रकार के सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है. साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है. भगवान भोलेनाथ का इस दिन जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. आइये विस्तार से जानते हैं शुभ मुहूर्त और व्रत की विधि. महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त : इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी बुधवार के दिन मनाया जाएगा. फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की तिथि का शुभारंभ 26 फरवरी को सुबह 11:00 बजे से शुरू होकर 27 फरवरी प्रातः 8:54 तक रहेगा. महाशिवरात्रि पर निश्चित कल में पूजा करने का फल अधिक माना जाता है. निश्चित कल में रात्रि 12:09 से 12:59 तक महादेव का रुद्राभिषेक करने के लिए यह समय सर्वोत्तम माना गया है. यह समय में तंत्र-मंत्र की सिद्धि एवं साधना आज के लिए अत्यंत शुभ होता है. महाशिवरात्रि व्रत विधि : भगवान शिव की पूजा-वंदना करने के लिए प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (मासिक शिवरात्रि) को व्रत रखा जाता है. लेकिन सबसे बड़ी शिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी होती है. इसे महाशिवरात्रि भी कहा जाता है. वर्ष 2025 में महाशिवरात्रि का व्रत 14 फरवरी को रखा जाएगा. गरुड़ पुराण के अनुसार शिवरात्रि से एक दिन पूर्व त्रयोदशी तिथि में शिव जी की पूजा करनी चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके उपरांत चतुर्दशी तिथि को निराहार रहना चाहिए. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को जल चढ़ाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर “ऊं नमो नम: शिवाय” मंत्र से पूजा करनी चाहिए. इसके बाद रात्रि के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए और अगले दिन प्रात: काल ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए. गरुड़ पुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव को बिल्व पत्र अर्पित करना चाहिए. भगवान शिव को बिल्व पत्र बेहद प्रिय हैं. शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को रुद्राक्ष, बिल्व पत्र, भांग, शिवलिंग और काशी अतिप्रिय हैं. Shiv Chalisa:शिव चालीसा शिव आरती – ॐ जय शिव ओंकारा (Shiv Aarti – Om Jai Shiv Omkara) Mahashivratri 2025:मेष राशि वाले आज करें इस मंत्र का जाप, वैवाहिक जीवन में आएगी खुशहाली, जानें 12 राशियों के लिए शिव मंत्र Mahashivratri 2025:पूजा विधि Mahashivratri 2025 भगवान शिव को प्रिय वस्तुएं Mahashivratri 2025:महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को विशेष रूप से कुछ चीजें अर्पित की जाती हैं, जिनमें मुख्य रूप से बिल्व पत्र, रुद्राक्ष, भांग, और काशी शामिल हैं। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के उपासकों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है और उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा न केवल भक्तों के लिए एक धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि यह उनकी मानसिक शांति और जीवन की दिशा को सही करने में भी मदद करता है।

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