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Devshayani Ekadashi 2025 Date:देवशयनी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, पारण का समय

Devshayani Ekadashi:देवशयनी एकादशी 2025 चातुर्मास की शुरुआत का प्रतीक है, जो भक्ति, उपवास और आत्म-अनुशासन का पवित्र 4 महीने का काल है। जानिए तिथि, अनुष्ठान और इस शुभ समय के दौरान क्या न करें। देवशयनी एकादशी वह दिन है जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस क्षण से, ब्रह्मांड की जिम्मेदारी अगले चार महीनों के लिए अन्य देवताओं को सौंप दी जाती है। यह पवित्र दिन चातुर्मास की शुरुआत का भी प्रतीक है, जो आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण अवधि है, जिसके दौरान विवाह, गृह प्रवेश समारोह और भूमि पूजन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Devshayani Ekadashi Shubh Muhurat) Kab hai Devshayani Ekadash:वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 05 जुलाई को शाम 06 बजकर 58 मिनट पर होगी। वहीं, 06 जुलाई को रात 09 बजकर 14 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन होगा। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इसके लिए 06 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी।साधक देवशयनी एकादशी का व्रत 06 जुलाई के दिन रखेंगे। वहीं, 07 जुलाई को पारण सुबह 05 बजकर 29 मिनट से लेकर 08 बजकर 16 मिनट के मध्य किया जाएगा। इस दौरान स्नान-ध्यान और पूजा के बाद अन्न और धन का दान कर व्रत खोलें। देवशयनी एकादशी शुभ योग (Devshayani Ekadashi Shubh Muhurat) Devshayani Ekadashi:ज्योतिषियों की मानें तो आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर साध्य योग का संयोग रात 09 बजकर 27 मिनट तक है। इसके बाद शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से सभी प्रकार के शुभ कामों में सफलता मिलेगी। इसके साथ ही त्रिपुष्कर योग और रवि योग का भी संयोग बन रहा है। Devshayani Ekadashi Puja Vidhi:देवशयनी एकादशी की पूजा विधि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें। एक तांबे के लोटे में जल, सिंदूर, लाल फूल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। सबसे पहले व्रत का संकल्प लें।  इसके बाद विष्णु जी की पूजा आरंभ करें। सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी में पीले रंग का वस्त्र बिछाकर श्री विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें। सबसे पहले जल से आचमन करें। इसके बाद विष्णु जी को पीला चंदन, फूल, माला, अक्षत आदि लगाने के साथ भोग में तुलसी का दल के साथ रखें। इसके बाद जल अर्पित करें। फिर घी का दीपक और धूप जलाकर एकादशी व्रत कथा, विष्णु चालीसा, विष्णु मंत्र के बाद श्री विष्णु आरती कर लें। अंत में भूल चूक के लिए माफी मांग लें और दिनभर व्रत रखें। दूसरे दिन तय समय पर पूजा पाठ करने के बाद व्रत का पारण कर लें। Devshayani Ekadashi chatur mass ka mahetwa:देवशयनी एकादशी और चातुर्मास का महत्व इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और ब्रह्मांड का संचालन अन्य दिव्य प्राणियों को सौंप देते हैं। Devshayani Ekadashi उनका विश्राम काल, जिसे चातुर्मास के नाम से जाना जाता है, 6 जुलाई से शुरू होकर 1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी तक जारी रहेगा। चातुर्मास को तपस्या, उपवास, ध्यान और आत्मसंयम का समय माना जाता है। इस अवधि के दौरान विलासिता, उत्सव और भोग-विलास से दूर रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस दौरान ध्यान आंतरिक चिंतन और आध्यात्मिक विकास की ओर केंद्रित होता है। Chatur mas Ke dauran kya nhi karna chahiye:चातुर्मास के दौरान क्या नहीं करना चाहिए? चातुर्मास के दौरान कुछ कार्य पारंपरिक रूप से प्रतिबंधित होते हैं, क्योंकि यह आत्म-अनुशासन और भक्ति का एक पवित्र चरण है: Chatur mas mein kya karna chahiye:चातुर्मास में क्या करना चाहिए? देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) न केवल भगवान विष्णु के विश्राम का प्रतीक है, बल्कि यह एक व्यक्तिगत विराम, आत्म-अनुशासन, आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उत्थान का अवसर भी है। चातुर्मास के सिद्धांतों का पालन करके, व्यक्ति जीवन में शांति, अनुशासन और ईश्वरीय कृपा ला सकता है। यदि आप अपने प्रयासों में सफलता और स्थायी सद्भाव चाहते हैं, तो इस पवित्र चार महीने की अवधि के आध्यात्मिक दिशानिर्देशों का पालन करें। देवशयनी एकादशी संकल्प मंत्र सत्यस्थ: सत्यसंकल्प: सत्यवित् सत्यदस्तथा।धर्मो धर्मी च कर्मी च सर्वकर्मविवर्जित:।।कर्मकर्ता च कर्मैव क्रिया कार्यं तथैव च।श्रीपतिर्नृपति: श्रीमान् सर्वस्यपतिरूर्जित:।। देवशयनी एकादशी विष्णु क्षमा मंत्र भक्तस्तुतो भक्तपर: कीर्तिद: कीर्तिवर्धन:।कीर्तिर्दीप्ति: क्षमाकान्तिर्भक्तश्चैव दया परा।।

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Yogini ekadashi vrat katha: योगिनी एकादशी का व्रत इस कथा के बिना है अधूरा

Yogini ekadashi vrat katha in hindi:धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से जातक को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि Yogini ekadashi vrat katha एकादशी व्रत बिना कथा का पाठ करने से अधूरा माना जाता है। आइए पढ़ते हैं योगिनी एकादशी की व्रत कथा। योगिनी एकादशी व्रत कथा (Yogini Ekadashi Vrat Katha) पौराणिक कथा के अनुसार, स्वर्ग लोक में कुबेर नाम का राजा रहता था। वह शिव भक्त था। रोजाना महादेव की पूजा किया करता था। उसका हेम नाम का माली था, जो हर दिन पूजा के लिए फूल लाता था। माली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था। Yogini ekadashi vrat katha वह बेहद सुंदर थी। एक बार जब सुबह माली मानसरोवर से फूल तोड़कर लाया, लेकिन कामासक्त होने की वजह से वह अपनी स्त्री से हास्य-विनोद करने लगा।राजा को उपासना करने में देरी हो गई, जिसकी वजह से वह क्रोधित हुआ। ऐसे में राजा ने माली को श्राप दे दिया। उन्होंने कहा कि तुमने ईश्वर की भक्ति से ज्यादा कामासक्ति को प्राथमिकता दी है, तुम्हारा स्वर्ग से पतन होगा और तुम धरती पर स्त्री वियोग और कुष्ठ रोग का सामना करोगे। इसके बाद वह धरती पर आ गिरा, जिसकी वजह से उसे कुष्ठ रोग हो गया और उसकी स्त्री भी चली गई। वह कई वर्षों तक धरती पर कष्टों का सामना करता रहा। एक बार माली को मार्कण्डेय ऋषि के दर्शन हुए। उसने अपने जीवन की सभी परेशानियों को बताया।ऋषि माली को बातों को सुनकर आश्चर्य हुआ। ऐसे में मार्कण्डेय ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी के व्रत के महत्व के बारे में बताया। Yogini ekadashi vrat katha मार्कण्डेय ने कहा कि इस व्रत को करने से तुम्हारे जीवन के सभी पाप खत्म होंगे और तुम पुनः भगवत कृपा से स्वर्ग लोक को प्राप्त करोगे। माली ने ठीक ऐसा ही किया। भगवान विष्णु ने उसके समस्त पापों को क्षमा करके उसे पुनः स्वर्ग लोक में स्थान प्रदान किया। योगिनी एकादशी कब है: हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 जून 2025 को सुबह 07 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ होगी और 22 जून को सुबह 04 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में इस साल योगिनी एकादशी 21 जून 2025 को रखा जाएगा। योगिनी एकादशी का महत्व: योगिनी एकादशी निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले आती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति व खुशहाली आती है। भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने से पहले इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा खास मानी गई है। Yogini Ekadashi 2024 Vrat Katha: एकादशी तिथि सभी शुभ तिथियों में से एक है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। हर माह में 2 बार एकादशी व्रत किया जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को Yogini ekadashi vrat katha योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। Yogini ekadashi vrat katha इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत कथा पाठ जरूर करना चाहिए।  योगिनी एकादशी पूजन मुहूर्त 2025:Yogini Ekadashi Puja Muhurta 2025: ब्रह्म मुहूर्त- 04:04 ए एम से 04:44 ए एम अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:51 पी एम विजय मुहूर्त- 02:43 पी एम से 03:39 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 07:21 पी एम से 07:41 पी एम अमृत काल- 01:12 पी एम से 02:41 पी एम योगिनी एकादशी व्रत पारण मुहूर्त: योगिनी एकादशी व्रत का पारण 22 जून 2025 को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 47 मिनट से शाम 04 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 09 बजकर 41 मिनट है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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Yogini Ekadashi 2025 Date: कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? नोट कर लें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Yogini Ekadashi 2025 Date: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जो कोई इस दिन व्रत रखकर भगवान की उपासना करता है, उसके हर संकट दूर हो जाते हैं. Yogini Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल भर में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं. हर महीने दो एकादशी पड़ती है- एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में, हर एकादशी व्रत का अपना अलग महत्व है. वैदिक पंचांग के अनुसार, कुछ दिनों में आषाढ़ मास की शुरुआत होने वाली है. इस महीने की पहली एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. इस एकादशी के दिन भी व्रत रखकर भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. कहते हैं कि इस एकादशी के व्रत से अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि जून में योगिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, व्रत-पूजन के लिए शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है. सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत ज्यादा महत्व है। यह भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। हर महीने में एकादशी दो बार मनाई जाती है। एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष में। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को ‘योगिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि इस एकादशी (Yogini Ekadashi 2025) का उपवास करने से पापों से मुक्ति मिलती है। वहीं, इसकी डेट को लेकर लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन बनी हुई है, आइए यहां इसकी डेट जानते हैं। कब मनाई जाएगी योगिनी एकादशी 2025? (Yogini Ekadashi 2025 Kab Hai?) हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून को सुबह 07 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसकी समाप्ति 22 जून को सुबह 04 बजकर 27 मिनट पर होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि के अनुसार, तीज-त्योहार मनाए जाते हैं। इसलिए 21 जून को योगिनी एकादशी का उपवास रखा जाएगा। योगिनी एकादशी 2025 पूजा विधि (Yogini Ekadashi 2025 Puja Vidhi) योगिनी एकादशी का महत्व:Importance of Yogini Ekadashi हिंदू धर्म में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व है. शास्त्रों के जानकार बताते हैं कि जो कोई किन्हीं कारणों से निर्जला एकादशी का व्रत नहीं रख सकते, वे इस एकादशी का व्रत रखकर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना करने से विशेष फल प्राप्त होता है. इस दिन भगवान को खीर का भोग लगाना चाहिए. इसके अलावा इस दिन ‘ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ इस मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से बीमारी से मुक्ति मिलती है. योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व (Yogini Ekadashi 2025 Significance) योगिनी एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि जो साधक इस कठिन उपवास का पालन करते हैं, उन्हें आरोग्य और सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है। ऐसे में इस पावन दिन उपवास जरूर करें। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Nirjala Ekadashi:निर्जला एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए? रखें इन बातों का ध्यान

Nirjala Ekadashi:निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi Vrat Niyam 2025) का व्रत ज्येष्ठ महीने में किया जाता है जिसमें 24 घंटे बिना पानी पिए रहना होता है। गर्मी में यह व्रत मुश्किल हो सकता है इसलिए व्रत से एक दिन पहले शरीर को हाइड्रेट रखें और धूप में निकलने से बचें। साथ ही कुछ और बातों को ध्यान में रख आप इस व्रत को अच्छे से कर सकते हैं। हिंदू धर्म में कई तरह के व्रत-उपवास किए जाते हैं। मन की शुद्धि और भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए लोग अक्सर व्रत-उपवास करते हैं। सिर्फ धार्मिक ही नहीं साइंस के मुताबिक भी फास्टिंग सेहत के लिए फायदेमंद होती है। हिंदू धर्म में यूं तो कई तरह के व्रत किए जाते हैं, लेकिन एकादशी व्रत का काफी ज्यादा महत्व माना जाता है। खासकर निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2025) का व्रत सभी एकादशी में अहम माना जाता है। हर साल ज्येष्ठ महीने में निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi Vrat Niyam 2025) का व्रत किया जाता है। इस साल 6 जून को यह व्रत किया जाएगा। जैसाकि नाम से ही पता चलता है कि यह व्रत यानी बिना पानी पिए किया जाता है। इस दौरान लोग 24 घंटे बिना कुछ खाए-पिए रहते हैं। ऐसे में गर्मी के मौसम में बिना कुछ खाए-पिए रहना मुश्किल हो जाता है, जिससे कई बार तबीयत भी खराब हो सकती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे, जिनका फॉलो कर आप बिना तबीयत बिगाड़े निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi fasting tips) का व्रत कर सकते हैं। निर्जला एकादशी Nirjala Ekadashi का व्रत 24 घंटे के लिए रखा जाता है। इसका मतलब है कि इस व्रत को अगले दिन यानी द्वादशी को खोला जाता है। ऐसे में पूरा एक दिन पानी के बिना रहने से शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार बन सकता है। इसलिए व्रत के एक दिन पहले आप बॉडी को अच्छी तरह से हाइड्रेट कर लें। इसके लिए ढेर सारा पानी और नारियल पानी पिएं। साथ ही ढेर सारे फलों को डाइट में शामिल करें। धूप में निकलने से बचें:avoid exposure to sunlight अगर आप निर्जला एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो इस दौरान धूप में निकलने से बचें। इस दिन आप वैसे ही पानी नहीं पीते हैं। ऐसे में धूप में निकलने से गर्मी की वजह से आप डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं, जिससे आपकी तबीयत बिगड़ सकती है। इसलिए कोशिश करें कि आप घर या कहीं अंदर ही रहें। एक साथ ढेर सारा पानी न पिएं:Do not drink a lot of water at once पूरे एक दिन बिना पानी पिए रहना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में जब लोग व्रत खोलते हैं, तो एक साथ ढेर सारा पानी पी जाते हैं। हालांकि, ऐसा करना भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए व्रत खोलते समय थोड़ा पानी पिएं और फिर इसे घूंट-घूंट करके पीते रहें। Nirjala Ekadashi 2025 Vrat Niyam  हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए खास माना गया है। हिंदू पंचांग के आधार पर यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस व्रत में भक्त अन्न व जल ग्रहण नहीं करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से 24 एकादशी का फल मिलता है व भगवान विष्णु की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, निर्जला या भीमसेनी एकादशी के दिन कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है। जानें- 1. इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में कीड़े मकोड़े के रूप में जन्म लेता है। 2. इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि नमक का सेवन करने से एकादशी व गुरु ग्रह का फल खत्म हो जाता है। 3. एकादशी के दिन तुलसी को जल अर्पित नहीं करना चाहिए और न ही छूना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता उपवास करती हैं। तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। 4. इस दिन किसी के प्रति बुरे या अपमानजनक शब्द प्रयोग नहीं करने चाहिए। Nirjala Ekadashi इस दिन क्रोध नहीं करना चाहिए और वाद-विवाद से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। 5. एकादशी के दिन बाल या नाखून काटना अशुभ माना गया है। What to do on the day of Ekadashi:एकादशी के दिन क्या करें- 1. एकादशी के दिन अधिक से अधिक मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की अराधना करनी चाहिए। 2. भगवान विष्णु को तुलसी दल युक्त प्रसाद का भोग लगाना चाहिए। 3. भगवान विष्णु की आरती करनी चाहिए। 4. इस दिन गरीब व जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए।

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Nirjala Ekadashi Vrat Niyam:निर्जला एकादशी का व्रत कर रहे हैं, तो जानिए कब पी सकते हैं पानी

Nirjala Ekadashi Vrat Niyam:निर्जला एकादशी का व्रत 6 जून को है। इस व्रत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का महत्व है। व्रत करने वाले को पूरे दिन जल का त्याग करना होता है जिससे यह व्रत कठिन माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने और झूठ चोरी से बचने की सलाह दी जाती है। Nirjala Ekadashi 2025:हर माह में दो एकादशी के व्रत होते हैं। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाएगा। Nirjala Ekadashi Vrat Niyam पंचांग के अनुसार, इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 6 जून को है। यह व्रत करना जितना कठिन है, उतना ही फलदायी भी है। मान्यता है कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति को समस्त भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। मरने के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह विष्णु लोक में वास करता है।  जैसा कि इस व्रत के नामNirjala Ekadashi Vrat Niyam निर्जला एकादशी से ही स्पष्ट है इस दिन उपवास रखने वाला व्यक्ति पानी नहीं पी सकता है। ज्येष्ठ के महीने में जब गर्मी अपने चरम पर होती है, तब इस व्रत को करना और भी मुश्किल हो जाता है। यदि व्रत के दौरान जल ग्रहण कर लिया जाए, तो व्रत टूट जाता है और उसका फल नहीं मिलता है।  निर्जला एकादशी पर करें तुलसी से ये उपाय (Do These Remedies With Tulsi On Nirjala Ekadashi Vrat Niyam ) कब पी सकते हैं पानी:When can you drink water ? Nirjala Ekadashi Vrat Niyam:निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करना चाहिए। उसके बाद ही वह पानी पी सकता है। निर्जला एकादशी के दिन सुबह उठने के बाद पहली बार जल का इस्तेमाल सिर्फ नहाने के लिए किया जा सकता है।  Nirjala Ekadashi Vrat Niyam इसके बाद व्रत का संकल्प लेने के दौरान और आचमन करते समय व्रत करने वाला व्यक्ति पानी का उपयोग कर सकता है। इसके बाद पूरे दिन पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। हालांकि, हाथ-मुंह धोने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन पीने के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।    Nirjala Ekadashi Vrat Niyam 2025 1. निर्जला एकादशी व्रत में अन्न व जल पूरी तरह से वर्जित है। इसमें फलाहार भी मान्य नहीं है। 2. इस व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और शारीरिक इच्छाओं पर कंट्रोल रखना चाहिए। 3. इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए व व्रत कथा का पाठ करना चाहिए। 4. एकादशी व्रत करने के बाद अगले दिन व्रत पारण के समय ही पानी पीना चाहिए। 5. निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को जल नहीं अर्पित करना चाहिए क्योंकि इस दिन तुलसी माता भी व्रत करती हैं। 6. निर्जला एकादशी के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन दान-पु्ण्य भी लाभकारी माना गया है। 7. निर्जला एकादशी के दिन पलंग पर नहीं सोना चाहिए, भूमि पर ही आराम या शयन करना चाहिए। व्रत में दिन में सोने की मनाही होती है। 8. व्रत के दौरान क्रोध और लोभ जैसे नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। 9. इस दिन जीव-जंतु को हानि नहीं पहुंचानी चाहिए। इस दिन न ही बाल कटवाने चाहिए और न ही नाखून काटने चाहिए। 10. निर्जला एकादशी के दिन वाद-विवाद से दूर रहना चाहिए।

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Nirjala Ekadashi 2025 Date:कब है निर्जला एकादशी,व्रत के दिन नहीं करें ये काम, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त

Nirjala Ekadashi 2025 Muhurat :निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है। Nirjala Ekadashi 2025 Muhurat, निर्जला एकादशी 2025 हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है। हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि विशेष महत्व रखती है। इस साल जून के पहले हफ्ते में निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसलिए आइए जानते हैं निर्जला एकादशी की सही डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत पारण का समय- कब है निर्जला एकादशी When is Nirjala Ekadashi ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 06 जून 2025 को 02:15 ए एम बजे होगी, जिसका समापन 07 जून 2025 को 04:47 ए एम तक होगा। लेकिन उदया तिथि के चलते निर्जला एकादशी का व्रत शुक्रवार, 6 जून के दिन रखा जाएगा। गृहस्थ लोग 6 जून के दिन यह व्रत रखेंगे वहीं, वैष्णव संप्रदाय के लोग 7 जून के दिन यह व्रत रखेंगे। निर्जला एकादशी क्या है? What is Nirjala Ekadashi ? निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। ‘निर्जला’ का अर्थ है ‘बिना जल के’, अर्थात इस व्रत में भक्त न तो भोजन करते हैं और न ही पानी ग्रहण करते हैं। ये व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से साल की सभी 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। ये व्रत आत्म-अनुशासन, भक्ति और तप का प्रतीक है, जो भक्तों को मोक्ष, समृद्धि और पापों से मुक्ति दिलाता है। निर्जला एकादशी का महत्व Importance of Nirjala Ekadashi निर्जला एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है। ये व्रत न केवल भक्तों के शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण में मदद करता है, बल्कि ये भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का भी सशक्त माध्यम है। निर्जला एकादशी की कथा:Story of Nirjala Ekadashi निर्जला एकादशी की कथा महाभारत के पांडव भाई भीम से जुड़ी है, इसलिए इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भीम भोजन के अत्यधिक शौकीन थे और सभी एकादशियों का व्रत रखने में असमर्थ थे, जबकि उनके भाई और द्रौपदी नियमित रूप से एकादशी व्रत रखते थे। भीम को चिंता थी कि वे भगवान विष्णु का अपमान कर रहे हैं। तब उन्होंने ऋषि वेदव्यास से मार्गदर्शन मांगा। वेदव्यास ने उन्हें सलाह दी कि वे ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला व्रत रखें, जिसका पुण्य सभी एकादशियों के बराबर है। भीम ने इस व्रत को पूर्ण भक्ति के साथ रखा और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त की। तभी से ये व्रत भीमसेनी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। निर्जला एकादशी पूजा-विधि:Nirjala Ekadashi puja method पूजा प्रक्रिया Nirjala Ekadashi Puja Process व्रत के नियम और सावधानियां Rules and precautions for Nirjala Ekadashi fast क्या करें What to do क्या न करें what not to do

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Apara Ekadashi Vrat Niyam:एकादशी के दिन क्या करे क्या न करे,कैसे मिलेगी खूब उन्नति, धन-संपत्ति में भी होगी बढ़ोतरी

Apara Ekadashi Vrat Niyam: एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। अगर आपके जीवन में कई परेशानियां चल रही हैं तो एकादशी के दिन इन उपायों को जरूर करें। Apara Ekadashi 2025: अपार धन और प्रसिद्धि प्रदान करने वाला अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह (Jyeshtha ekadshi) की भीषण गर्मी में रखा जाता है. इस व्रत के प्रभाव से जातक की अधूरी इच्छाएं पूरी होती है साथ ही वह मृत्यु के बाद बैकुंठ लोक को जाता है. एकादशी व्रत 4 तरह से रखा जाता है (How to do Ekadashi Vrat Niyam) धार्मिक ग्रंथों में चार तरह से एकादशी व्रत रखने का वर्णन है. जिसमें जलाहार, क्षीरभोजी, फलाहारी, नक्तभोजी जलाहर- सिर्फ जल ग्रहण करते हुये एकादशी व्रत करना. क्षीरभोजी- क्षीर मतलब दुग्ध पदार्थऔ र पौधों के दूधिया रस के सेवन कर एकादशी का व्रत करना. फलाहारी- केवल फलों का सेवन करते हुए एकादशी व्रत करना. नक्तभोजी- सूर्यास्त से ठीक पहले दिन में एक समय फलाहार और व्रत से संबंधित पदार्थ ग्रहण करना. Vrat Niyam इसमें साबूदाना, शकरकंद आदि शामिल हैं. अपरा एकादशी पर क्या दान करें? (Apara Ekadashi 2024 Daan List) अपरा एकादशी के दिन अन्न का दान करें। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अन्न की कभी कमी नहीं होती। Vrat Niyam इसके अलावा चावल और मक्का का भी दान किया जा सकता है। अगर आप कुंडली में गुरु कमजोर की समस्या का सामना कर रहे हैं, तो अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र का दान करें। क्योंकि भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है। इसके अलावा अपरा एकादशी के दिन दूध और दही का दान करें। Vrat Niyam माना जाता है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाली सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। अपरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद श्रद्धा अनुसार धन का दान करें। इससे श्री हरि और मां लक्ष्मी का कृपा प्राप्त होती है और धन से तिजोरी भरी रहती है। अपरा एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए (Apara ekadashi vrat me kya khaye) एकादशी व्रत भगवान विष्णु (Vishnu ji) को समर्पित है. इस व्रत का 24 घंटे पालन किया जाता है. अपरा एकादशी व्रत में साधक साबूदाना, बादाम, नारियल,  शकरकंद, कुट्टू, आलू, काली मिर्च, सेंधा नमक, सिंघाड़े का आटा, राजगीरे का आटा, चीनी आदि का सेवन कर सकते हैं. ये एकादशी के नक्तभोजी व्रत नियम में आते हैं. आध्यात्मिकता में प्रगति करने के लिए एकादशी एक बहुत शक्तिशाली व्रत है. एकादशी व्रत में क्या न खाएं (Ekadashi vrat what to not eat) Vrat Niyam एकादशी व्रत के दिन घर में चावल न बनाएं. व्रती और परिवार वाले इस दिनमांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन न करें. अपरा एकादशी के दिन जरूर करें ये विशेष उपाय 1. अगर आप अपने जीवन में खूब उन्नति करना चाहते हैं तो आज के दिन एक जटा वाला नारियल लेकर उस पर लाल मौली या कलावा बांधकर श्री हरि का ध्यान करते हुए उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें।  2. अगर आप अपनी धन-संपत्ति में बढ़ोतरी करना चाहते हैं तो आज के दिन एक सफेद धागे में पीले फूल पिरोकर उसकी माला बनाएं और भगवान विष्णु को अर्पित करें साथ ही भगवान के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करें।  3. अगर आप अपने जीवन में खुशियां ही खुशियां लाना चाहते हैं तो Vrat Niyam आज के दिन श्री विष्णु मंदिर में जाकर शहद की शीशी दान करें और भगवान के आगे घी का दीपक जलाकर ॐ नमो भगवते नारायणाय मंत्र का 11 बार जप करें। 4. अगर आप अपने बच्चे की सफलता सुनिश्चित करना चाहते हैं तो आज के दिन स्नान आदि के बाद पीले रंग के कपड़े पहनकर भगवान विष्णु को केसर का तिलक लगाइए। अगर केसर ना हो तो आप हल्दी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। साथ ही भगवान को तिलक लगाने के बाद अपने बच्चे को भी तिलक लगाएं।  5. अगर आप अपने सभी कामों में मातापिता का सहयोग पाना चाहते हैं तो आज के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें और तुलसी माता को हाथ जोड़कर प्रणाम करें। 6. अगर आप बिजनेस के किसी काम से यात्रा करने जा रहे हैं और अपनी यात्रा से काम में लाभ पाना चाहते हैं तो आज के दिन अपने स्नान के पानी में थोड़ासा गंगाजल और कुछ सफेद तिल के दाने मिलाकर स्नान करें और स्नान के बाद भगवान के आगे हाथ जोड़कर कोई पीले रंग का रुमाल या अन्य कोई पीले रंग का छोटासा कपड़ा लेकर आज पूरे दिन अपने पास रखें। 7. अगर आप किसी खास काम के लिए कुछ प्लानिंग कर रहे हैं और उस प्लानिंग में आप सक्सेस होना चाहते हैं Vrat Niyam तो आज के दिन बरगद के पेड़ में जल चढ़ाएं और जल चढ़ाने से जमीन में जो मिट्टी गिली हो उससे अपने मस्तक पर तिलक लगाएं।  8. अगर आप अपने व्यवहार से दूसरे लोगों को प्रभावित करना चाहते हैं तो Vrat Niyam आज के दिन विष्णु जी के सामने घी का दीपक जलाएं। साथ ही भगवान को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं और भोग लगाने के कुछ देर बाद ही उन लड्डूओं को प्रसाद के रूप में घर के सब सदस्यों और आसपास के लोगों में बांट दें साथ ही थोड़ासा प्रसाद स्वयं भी ग्रहण करें।  9. अगर आप परिवार में सबके बीच बेहतर तालमेल बनाये रखना चाहते हैं तो आज के दिन भगवान विष्णु को माखन मिश्री का भोग लगाएं और श्री विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के आगे बैठकर श्री हरि श्री हरि के नाम का 108 बार जप करें। 10. अगर आपके बच्चे आपकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और उसके चलते आप थोड़े परेशान रहते हैं तो आज के दिन एक डिब्बी में थोड़ासा केसर लेकर उस पर ॐ नमो भगवते नारायणाय मंत्र का 11बार जप करें और उस डिब्बी में से थोड़ा Vrat Niyam केसर लेकर भगवान को तिलक लगाएं । फिर उस डिब्बी को अपने पास संभालकर 45 दिनों के लिये रख लें । 45 दिनों के बाद उस केसर को स्वयं तिलक के रूप में इस्तेमाल कर लें। 11. अगर आप अपने व्यापार को निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर होते देखना चाहते हैं तो Vrat Niyam आज के दिन किसी ब्राहमण को आदर सहित घर पर

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Apara Ekadashi Vrat Katha:अपरा एकादशी पर जरूर पढ़ें व्रत कथा, मिलेगा अपार धन और पापों से छुटकारा !

Apara Ekadashi Vrat Katha: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है. Vrat Katha इस दिन पूजा के दौरान अपरा एकादशी व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. आइए पढ़ें अपरा एकादशी व्रत की कथा. Apara Ekadashi Katha: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है. एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है. हर महीने में 2 बार एकादशी व्रत रखा जाता है. एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में. ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है. इस तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-व्रत करने की मान्यता है. इस Vrat Katha व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं. एकादशी पूजा के दौरान एकादशी व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. एकादशी (Vrat Katha) व्रत कथा पढ़ने से इस व्रत का पूर्ण फल मिलता है. ऐसी मान्यता है कि कथा का पाठ करने से पूजा सफल होती है और श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होते हैं. आइए जानते हैं अपरा एकादशी व्रत कथा के बारे में. अपरा एकादशी व्रत कथा (Apara Ekadashi Vrat Katha) युधिष्ठिर ने पूछा- जनार्दन ! ज्येष्ठके कृष्णपक्षमें किस नामकी एकादशी होती है ? मैं उसका माहात्म्य सुनना चाहता हूं। उसे बताने की कृपा कीजिये । भगवान् श्रीकृष्ण बोले- राजन् ! तुमने सम्पूर्ण लोकोंके हितके लिये बहुत उत्तम बात पूछी है। राजेन्द्र ! इस एकादशीका नाम ‘अपरा’ है। यह बहुत पुण्य प्रदान करने वाली और बड़े-बड़े पातकोंका नाश करनेवाली है। Vrat Katha ब्रह्महत्यासे दबा हुआ, गोत्रकी हत्या करनेवाला, गर्भस्थ बालक को मारने वाला, परनिन्दक तथा परस्त्रीलम्पट पुरुष भी अपरा एकादशी के सेवन से निश्चय ही पाप रहित हो जाता है। जो झूठी गवाही देता, माप-तोलमें धोखा देता, बिना जाने ही नक्षत्रों की गणना करता और कूटनीति से आयुर्वेद का ज्ञाता बनकर वैद्य का काम करता है- ये सब नरकमें निवास करने वाले प्राणी हैं। परन्तु अपरा एकादशी के सेवनसे ये भी पापरहित हो जाते हैं। यदि व क्षत्रिय क्षात्रधर्मका परित्याग करके युद्धसे भागता है, तो वह क्षत्रियोचित धर्म से भ्रष्ट होनेके कारण घोर नरकमें पड़ता है। जो शिष्य विद्या प्राप्त करके स्वयं ही गुरुकी निन्दा करता है, वह भी महापातकों से युक्त होकर भयङ्कर नरक में गिरता है। किन्तु अपरा एकादशीके सेवनसे ऐसे मनुष्य भी सद्गतिको प्राप्त होते हैं। Apara Ekadashi 2025 Date:मई में कब रखा जाएगा अपरा एकादशी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व माघमें जब सूर्य मकर राशिपर स्थित हों, उस समय प्रयाग में स्नान करनेवाले मनुष्यों को जो पुण्य होता है, काशी में शिवरात्रिका व्रत करनेसे जो पुण्य प्राप्त होता है, गया में पिण्डदान करके पितरों को तृप्ति प्रदान करनेवाला पुरुष जिस पुण्यका भागी होता है, बृहस्पति के सिंहराशिपर स्थित होनेपर गोदावरीमें स्रान करनेवाला मानव जिस फलको प्राप्त करता है, बदरिकाश्रमकी यात्रा के समय भगवान् केदार के दर्शन से तथा बदरीतीर्थ के सेवन से जो पुण्य फल उपलब्ध होता है तथा सूर्यग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में दक्षिणा सहित यज्ञ करके हाथी, घोड़ा और सुवर्ण-दान करनेसे जिस फलकी प्राप्ति होती है; Vrat Katha अपरा एकादशी के सेवनसे भी मनुष्य वैसे ही फल प्राप्त करता है। ‘अपरा’ को उपवास करके भगवान् वामन की पूजा करनेसे मनुष्य सब पापों से मुक्त हो श्रीविष्णुल्लेकमें प्रतिष्ठित होता है। इसको पढ़ने और सुननेसे सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। युधिष्ठिर ने कहा- जनार्दन । ‘अपरा’का सारा माहात्य मैंने सुन लिया, अब ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी है उसका वर्णन कीजिये । भगवान् श्रीकृष्ण बोले- राजन् ! इसका वर्णन परम धर्मात्मा सत्यवतीनन्दन व्यासजी करेंगे; क्योंकि ये सम्पूर्ण शास्त्रों के तत्त्वज्ञ और वेद-वेदाङ्गोंके पारङ्गत विद्वान् हैं। तब वेदव्यासजी कहने लगे – दोनों ही पक्षोंकी एकादशियोंको भोजन न करे । द्वादशीको स्त्रान आदि से पवित्र हो फूलों से भगवान् के शव की पूजा करके नित्य कर्म समाप्त होनेके पश्चात् पहले ब्राह्मणों को भोजन देकर अन्तमें स्वयं भोजन करे। राजन् ! जननाशौच और मरणा शौच में भी एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिये । यह सुनकर भीम सेन बोले- परम बुद्धिमान् पितामह । मेरी उत्तम बात सुनिये । राजा युधिष्ठिर, माता न कुन्ती, द्रौपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव-ये एकादशीको कभी भोजन नहीं करते तथा मुझसे भी ने हमेशा यही कहते हैं कि ‘भीमसेन ! तुम भी एकादशी को न खाया करो।’ किन्तु मैं इन लोगों से यही कह दिया करता हूं कि ‘मुझसे भूख नहीं सही जाएगी ।’

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Apara Ekadashi 2025 Date:मई में कब रखा जाएगा अपरा एकादशी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Apara Ekadashi:भगवान विष्णु की महिमा निराली है। भगवान विष्णु अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। उनकी कृपा से भक्तजनों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। उनकी कृपा से धन संबंधी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही जीवन में सुखों का आगमन होता है। एकादशी तिथि (Apara Ekadashi 2025 Date) पर पूजा-पाठ के बाद दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। Apara Ekadashi Kab hai:अपरा एकादशी का सनातन धर्म में खास महत्व है। यह पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन साधक जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। साथ ही लक्ष्मी नारायण जी के निमित्त एकादशी का व्रत रखते हैं। सनातन शास्त्रों में निहित है कि अपरा एकादशी व्रत करने से साधक द्वारा जन्म-जन्मांतर में किए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही साधक पर लक्ष्मी नारायण जी की कृपा बरसती है। आइए, अपरा एकादशी (Apara Ekadashi 2025 Date) के बारे में सबकुछ जानते हैं- अपरा एकादशी कब है? Apara Ekadashi 2025 date पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अपरा एकादशी का व्रत रखा जाता है. ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 मई को देर रात 1 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 23 मई को रात 10 बजकर 29 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 23 मई को रखा जाएगा. अपरा एकादशी की पूजा विधि | Apara Ekadashi ki Puja Vidhi दशमी तिथि की रात्रि में सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. एकादशी के दिन प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें. चंदन, फूल, धूप और दीप जलाकर उनकी पूजा करें. तुलसी दल अवश्य अर्पित करें. भगवान विष्णु को फल, मिठाई और तुलसी डालकर भोग लगाएं. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, जैसे “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी होता है. अपरा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें. भगवान विष्णु की आरती गाएं. अपनी क्षमतानुसार गरीबों को वस्त्र, भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें. द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत खोलें. अपरा एकादशी पारण (Apara Ekadashi Paran Timing) साधक 24 मई को पारण कर सकते हैं। 24 मई को पारण सुबह 05 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम 08 बजकर 11 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं। इस दौरान साधक स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें। वहीं, पूजा के बाद अन्न और धन का दान कर व्रत खोलें। अपरा एकादशी शुभ योग (Apara Ekadashi Shubh Muhurat) ज्योतिषियों की मानें तो ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की तिथि पर प्रीति और आयुष्मान का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बनेगा। इन योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी।  पंचांग सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 26 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 07 बजकर 10 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 45 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 35 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 08 मिनट से 07 बजकर 29 मिनट तक निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक अपरा एकादशी का महत्व | Apara Ekadashi Significance अपरा एकादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है, जो गंगा स्नान, स्वर्ण दान, भूमि दान और गौ दान के समान है. धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मान-सम्मान और यश बढ़ता है. मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है.

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Vrat 2025 :Mohini Ekadashi जीवन में नहीं चाहते कोई कमी? तो मोहिनी एकादशी के दिन करें इन चीजों का दान

Mohini Ekadashi:आपको बता दें कि एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाले सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है. आप 8 मई को पड़ने वाली मोहिनी एकादशी के दिन विधिवत रूप से तुलसी की पूजा करते हैं, तो इससे आपको धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिल सकता है. हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सभी तिथि को बेहद खास माना जाता है, जिनमें एकादशी तिथि भी शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) का व्रत करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। Mohini Ekadashi 2025 : हिन्दू धर्म के मानने वालों के लिए एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है. यह व्रत महीने में दो बार आता है यानी 1 साल में 24 एकादशी व्रत रखा जाता है. वहीं, अगर अधिकमास होता है तो 26 एकादशी पड़ती है. आपको बता दें कि एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाले सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है. आप 8 मई को पड़ने वाली मोहिनी एकादशी के दिन विधिवत रूप से तुलसी की पूजा करते हैं, तो इससे आपको धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिल सकता है. मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है और विशेष दान चीजों का दान भी जरूर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि Mohini Ekadashi मोहिनी एकादशी के दिन दान करने से आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलता है और धन लाभ के योग बनते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि मोहिनी एकादशी के दिन किन चीजों का दान करना चाहिए? Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai: कब शुरू होगा बड़ा मंगल? जानें इसका महत्व, पूजा विधि और डेट मोहिनी एकादशी पर कैसे करें तुलसी की पूजा- How to worship Tulsi on Mohini Ekadashi इन बातों का रखें ख्याल(take care of these things) आप इस दिन तुलसी के पौधे में जल जरूर अर्पित करिए. हालांकि धार्मिक मान्यता है कि तुलसी में जल अर्पित करने से व्रत खंडित हो सकता है क्योंकि तुलसी देवी निर्जला व्रत रखती हैं.  मोहिनी एकादशी पारण का समय 2025 – Mohini Ekadashi Parana Time 2025 मोहिनी एकादशी व्रत के पारण का समय 09 मई, 2025 को रखा जाएगा. पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 5:34 मिनट से सुबह 8:16 मिनट तक रहेगा. इस दौरान आप भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत खोल सकते हैं.  बनी रहेगी मां लक्ष्मी की कृपा(Goddess Lakshmi’s blessings will remain) धार्मिक मान्यता के अनुसार, Mohini Ekadashi मोहिनी एकादशी के दिन गरीब लोगों में कपड़ों का दान करने का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस एकादशी तिथि पर कपड़ों का दान करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। घर में बनी रहेगी सुख-शांति(There will be peace and happiness in the house) सनातन धर्म में तुलसी का पौधा पूजनीय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पौधे में धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसे में तुलसी को मोहिनी एकादशी के दिन दान कर सकते हैं। तुलसी दान करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। Mohini Ekadashi साथ ही साधक पर मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। हमेशा पैसों से तिजोरी भरी रहेगी। वैवाहिक जीवन होगा खुशहाल(Married life will be happy) अगर आप वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन चाहते हैं, तो मोहिनी एकादशी की पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को सिंदूर, बिंदी और चूड़ियां समेत आदि चीजों का दान करें। इसके बाद इन चीजों को किसी सुहागिन महिलाओं को दान में दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोहिनी एकादशी के दिन इन चीजों का दान करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और साथ पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं। साल की सभी एकादशी का नाम – Name of all Ekadashi of the year तुलसी मंत्र(Tulsi Mantra)

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Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी पर भूलकर भी न करें 5 काम, होगी धन की हानि

Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी का दिन बहुत शुभ माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से सभी कष्टों का अंत होता है। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date इसके साथ ही घर में माता लक्ष्मी का वास होता है। इस साल यह एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) 8 मई को रखा जाएगा। Mohini Ekadashi Vrat Niyam: मोहिनी एकादशी पर भक्त उपवास रखकर विष्णु भगवान की आराधना करेंगे। मोहिनी एकादशी पर कुछ कामों को करना अशुभ माना जाता है, जो प्रभु की नाराजगी का कारण भी बन सकते हैं। Mohini Ekadashi Vrat Niyam:  मोहिनी एकादशी का व्रत। सनातन धर्म में मोहिनी एकादशी का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस शुभ दिन पर भक्त उपवास रखते हैं और द्वादशी तिथि पर पारण करते हैं। इसके अलावा कुछ साधक विशेष पूजा करने के लिए भगवान विष्णु के मंदिर जाते हैं। एकादशी एक महीने में दो बार आती है। एक कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date एकादशी पर कुछ चीजों को करने से भगवान विष्णु कुपित हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। Mohini Ekadashi per kya na kare:मोहिनी एकादशी पर क्या न करें? 1. चावल- मोहिनी एकादशी पर चावल का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। मान्यता है Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date इस दिन चावल का सेवन करने से दोष लगता है।  2. तुलसी की पत्तियां- तुलसी की पत्तियां भगवान श्री हरि विष्णु को बेहद प्रिय हैं, जिनके बिना भगवान को भोग नहीं लगाया जाता है। इसलिए मोहिनी एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी की पत्तियों को न तो स्पर्श करना चाहिए और न ही इन्हें तोड़ना चाहिए। तुलसी की पत्तियां तोड़ने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। 3. काले वस्त्र- धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ अवसर या फिर पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसलिए मोहिनी एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा। 4. मास-मदिरा- मोहिनी एकादशी के दिन भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान विष्णु नराज हो सकते हैं।  5. अपमान- कोशिश करें की इस दिन आप किसी का दिल न दुखाएं और वाद-विवाद से भी बचें। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date किसी का भी अपमान करने से बचें और न ही किसी का मजाक उड़ाएं।  Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी का व्रत बहुत मंगलकारी माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप को समर्पित है। साधक इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) का व्रत 8 मई को रखा जाएगा। इस दिन माता तुलसी की पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date इसलिए सुबह व्रती उठकर पवित्र स्नान के बाद मां तुलसी को जल चढ़ाएं। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date फिर मां के सामने घी का दीपक जलाएं। तुलसी चालीसा, मंत्र का जप करें। आखिरी में आरती करें। पूजा में हुई गलतियों के लिए माफी मांगे। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date।।तुलसी चालीसा।। श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय। जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।। नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी। दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।। विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी। भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।। जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा। करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।। कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा। तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।। कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी। वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।। श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई। कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।। छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी। तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।। औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता, देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।। वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया। नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।। नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी। नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।। नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि। नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।। नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि। जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।। निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ। करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।। शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं। क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।। मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै। जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।। बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा। प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।। चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे। करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।। पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की। यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।। करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं। है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।। तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी। भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।। यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय। गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। 

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Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai:सभी एकादशियों में बड़ी एकादशी कौन – कौन सी होती हैं,सबसे शुभ माना जाता है इन चार एकादशी को….

Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai:हर माह आने वाली एकादशी की दो तिथियां भगवान विष्णु की अराधना के लिए समर्पित होती हैं. एक वर्ष में कुल 24 एकादशी आती हैं लेकिन उनमें से कुछ एकादशी बहुत खास मानी जाती हैं. Most Important Ekadashi:हर माह आने वाली एकादशी की दो तिथियां भगवान विष्णु की अराधना के लिए समर्पित होती हैं. इस दिन भक्त व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा करते हैं. Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की अराधना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और सांसारिक कष्ट मिट जाते हैं. एक वर्ष में कुल 24 एकादशी (Ekadashi) आती हैं लेकिन उनमें से कुछ एकादशी बहुत खास होती हैं. आइए जानते हैं कौन सी 4 एकादशी का महत्व होता है सबसे अधिक. Ekadashi | हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में महत्वपूर्ण होता हैं और साल में चौबीस एकादशी आती हैं यानि कि हर महीने में दो एकादशी होती हैं एक कृष्ण पक्ष की और दूसरी शुक्ल पक्ष की लेकिन जिस साल अधिक मास या फिर मलमास आती हैं तो एकादशी व्रत की संख्या दो बढ़ जाया करती हैं अर्थात 24 एकादशी की जगह 26 एकादशी होती हैं अधिक मास में परमा और पद्मिनी एकादशी नाम की होती हैं. Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai सभी एकादशी व्रत भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के लिए समर्पित होती हैं मान्यता है कि जो भी एकादशी व्रत को सच्चे मन से करता है उसे उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती हैं और इस लोक में सभी सुखों को भोगकर मृत्यु के बाद स्वर्ग में स्थान प्राप्त करता है कहा जाता हैं कि एकादशी व्रत के प्रताप से पितरों को मोक्ष मिलता हैं. हर एकादशी का अपना विशेष महत्व होता लेकिन सभी एकादशियों में से चार एकादशियों ऐसी है जिनको विशेष महत्व माना गया है और वे सभी एकादशी बड़ी एकादशी कहलाती हैं. Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai :आइए जानते हैं साल की चार बड़ी एकादशी और उनके महत्व को…. 1) आमलकी एकादशी : Amalaki Ekadashi Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai आमलकी एकादशी फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है इस एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरनी एकादशी भी कहा जाता हैं. आमलकी एकादशी को सारे एकादशियों में श्रेष्ठ माना जाता हैं क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले वृक्ष की भी विधिवत पूजन किया जाता हैं. Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai यह एकादशी साल की एक मात्र ऐसी एकादशी है जिसमें भगवान विष्णु के अलावा भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा होती हैं मान्यता है कि इस एकादशी के दिन भगवान शंकर के गण शंकर पार्वती के संग गुलाल की होली खेलते हैं इसी लिए इस एकादशी को रंगभरनी एकादशी भी कहा जाता हैं. आमलकी एकादशी का महत्व :Importance of Amalaki Ekadashi Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai धार्मिक मान्यता हैं कि आमलकी एकादशी व्रत को करने से सभी पाप धुल जाते हैं और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु को आंवला फल को चढ़ाने से भक्त को अच्छे स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. शास्त्रों के अनुसार जब सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्माजी का जन्म हुआ तब उसी समय भगवान विष्णु ने आंवले वृक्ष को आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया जिसके हर भाग में ईश्वर का स्थान माना जाता हैं. 2) पापमोचनी एकादशी : Papmochani Ekadashi पापमोचनी एकादशी चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती हैं और धार्मिक मान्यता के अनुसार पापमोचनी एकादशी का विशेष महत्व है. पापमोचनी दो शब्द पाप और मोचनी से मिलकर बना है Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai जिसमें पाप का अर्थ पाप या फिर दुष्कर्म और मोचनी का अर्थ है हटाने वाला यानि कि पापमोचनी एकादशी का व्रत को करने वालों को उनके पापों से मुक्ति मिल जाती हैं. पापमोचनी एकादशी का महत्व : Importance of Papamochani Ekadashi: पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने से मन की चंचलता खत्म होने के साथ ही धन और आरोग्य की प्राप्ति होती हैं.पुराणों के अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सारे कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai तो वहीं पापमोचनी एकादशी व्रत से जाने अनजाने में कि गई पाप और गलतियों से छुटकारा मिल जाता हैं और उसे सहस्त्र गोदान यानि हजार गायों के बराबर दान का फल मिलता हैं मान्यता है कि ब्रह्म हत्या, स्वर्ण चोरी, सुरापान और गुरुपत्नी गमन जैसे महापाप भी पापमोचनी एकादशी व्रत को करने से दूर हो जाते हैं. 3) निर्जला एकादशी : Nirjala Ekadashi निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती हैं. इस एकादशी में निर्जल व्रत यानि कि बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती हैं. निर्जला एकादशी को भीम एकादशी भी कहा जाता हैं. मान्यता है कि जो कोई भी यह व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ ही यश, वैभव और सुख की प्राप्ति होती हैं. निर्जला एकादशी का महत्व : Importance of Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठिन और पवित्र व्रतों में से एक है इस एकादशी के बारे में मान्यता है कि अगर पूरे साल एक भी एकादशी का व्रत नहीं करते हैं और जो निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai तो उनकों संपूर्ण एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता हैं. पद्म पुराण के अनुसार इस व्रत को करने से दीर्घायु और मोक्ष मिलता है इस व्रत को अन्न और जल त्याग करके व्रत करना पड़ता हैं. 4) देवोत्थान एकादशी : Devotthan Ekadashi देवोत्थान एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है इस एकादशी को देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देव शयन करते हैं और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को उठते हैं इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी या देवउठनी एकादशी कहते हैं. इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती

Sabse Badi Ekadashi Kaun – kaun Hoti Hai:सभी एकादशियों में बड़ी एकादशी कौन – कौन सी होती हैं,सबसे शुभ माना जाता है इन चार एकादशी को…. Read More »