EKADASHI

Fast Rules Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं ?

Fast Rules Kamika Ekadashi 2025: कामिका एकादशी का व्रत बहुत ही खास माना जाता है। एकादशी व्रत हर महीने में दो बार आता है। इस बार यह व्रत 21 जुलाई 2025 को रखा जाएगा। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन (Kamika Ekadashi 2025) उपवास करने के साथ भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। Fast Rules Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का व्रत हर साल सावन महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21, जुलाई 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का व्रत विष्णु जी को बहुत ज्यादा प्रिय है, तो चलिए कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2025 2025 Fast Rules) के नियम को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। Fast Rules Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का व्रत हर साल सावन महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21, जुलाई 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का व्रत विष्णु जी को बहुत ज्यादा प्रिय है, तो चलिए कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2025 2025 Fast Rules) के नियम को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। Fast Rules Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं ? कामिका एकादशी में क्या खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Khayein?) Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी पर जो साधक उपवास रख रहे हैं, वे दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही व्रती भगवान विष्णु की पूजा के बाद ही कुछ सेवन करें। वहीं, भोग को तैयार करते इसके समय सफाई का अच्छी तरह से ध्यान रखें। कामिका एकादशी में क्या न खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Nahin Khayein?) अगर आप कामिका एकादशी पर व्रत कर रहे हैं, तो अपने खाने का पूरा ध्यान दें, क्योंकि यह व्रत को सफल और असफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है। बता दें, व्रती को एकादशी व्रत के दिन भोजन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा इस तिथि पर तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन, मसाले, तेल आदि से भी परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही इस व्रत (Kamika Ekadashi 2025 Significance) पर चावल और नमक का सेवन गलती से भी नहीं करना चाहिए। ऐसे में अगर आप इस व्रत का पालन कर रहे हैं, तो इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखें। भोग चढ़ाने का मंत्र (Kamika Ekadashi 2025 Bhog Mantra) कामिका एकादशी Fast Rules Kamika Ekadashi पर नारायण को भोग लगाते समय इस मंत्र ”त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।” का भावपूर्ण जप करें। ऐसा करने से भगवान प्रसाद स्वीकार कर लेते हैं। इसके साथ ही मनचाहा फल प्रदान करते हैं।

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Kamika Ekadashi 2025 Date: कामिका एकादशी 2025 जानें 20 या 21 जुलाई में कब है व्रत, शुभ मुहूर्त और विशेष योग

Kamika Ekadashi 2025: देवों के देव महादेव को सावन का महीना प्रिय है। सावन सोमवार के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही सावन सोमवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से अविवाहित जातकों की शादी जल्द हो जाती है। इस महीने में कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi 2025 Date) और पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। Kamika Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बहुत शुभ और फलदायक माना जाता है। कामिका एकादशी  सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। सावन के माह में कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है। तो आइए जानते हैं कामिका एकादशी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में Kamika Ekadashi 2025 Date:कब मनाई जाती है कामिका एकादशी? हर साल सावन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन कामिका एकादशी मनाई जाती है। इस दिन लक्ष्मी नारायण जी की पूजा एवं भक्ति की जाती है। सनातन शास्त्रों में व्रत की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। साधक मनचाही मुराद पाने के लिए कामिका एकादशी का व्रत रखते हैं। Kamika Ekadashi Shubh Muhurat कामिका एकादशी शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 20 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर होगी और इसका समापन 21 जुलाई को सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई को रखा जाएगा। कामिका एकादशी पारण समय कामदा एकादशी का पारण 22 जुलाई को किया जाएगा। साधक 22 जुलाई को सुबह 05 बजकर 37 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 05 मिनट के मध्य कर सकते हैं। इस दौरान भक्ति भाव से पूजा कर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अन्न और धन का दान कर व्रत खोलें। कामिका एकादशी शुभ योग (Kamika Ekadashi 2025 Shubh Yoga) सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर वृद्धि और ध्रुव योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाएगी। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाएगा। भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। Kamika Ekadashi Puja Vidhi कामिका एकादशी पूजा विधि कामिका एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।फिर घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें और व्रत का संकल्प लें।उसके बाद एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु जी की मूर्ति स्थापित करें।अब भगवान विष्णु को चंदन, फूल, तुलसी पत्र, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें और पंचामृत का भोग लगाएं।इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों और नामों का जाप करें।अंत में श्री हरि के समक्ष घी का दीपक जलाएं और आरती करें। 

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Devshayani Ekadashi Vrat Katha: देवशयनी एकादशी की व्रत कथा क्या है,आप भी इस व्रत…..

Devshayani ekadashi vrat katha:आषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु चार महीने के लिए निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इस एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। हिंदू धर्म में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के निमित्त व्रत रखा जाता है और उनकी पूजा की जाती है। इस दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। एकादशी व्रत के नियमों का पालन करने के अलावा व्रत कथा का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी की कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है। आइए, जानते हैं कि भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में क्यों चले जाते हैं और इसके पीछे क्या कथा है।  Devshayani Ekadashi Vrat Katha:देवशयनी एकादशी व्रत कथा Devshayani Ekadashi Vrat Katha पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्माजी ने नारदजी को बताया था कि सतयुग में मांधाता नामक एक चक्रवर्ती राजा का शासन था। उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी रहती थी, लेकिन नियति को पलटने में देर नहीं लगती है। अचानक, तीन वर्षों तक वर्षा नहीं होने के कारण राज्य में भयंकर अकाल पड़ गया। यज्ञ, हवन, पिंडदान, कथा-व्रत आदि धार्मिक क्रियाएं कोई भी कार्य नहीं हो पा रहे थे। प्रजा ने राजा के पास जाकर अपनी व्यथा सुनाई। राजा मांधाता इस स्थिति से पहले ही परेशान थे और सोचते थे कि न जाने किस पाप के कारण यह आपदा उन पर आई है। अंगिरा ऋषि ने बताया कारण Devshayani Ekadashi Vrat Katha राजा मांधाता अपनी सेना सहित वन की ओर प्रस्थान कर, ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुंचे। ऋषिवर ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनके आने का कारण पूछा। राजा ने हाथ जोड़कर कहा, महात्मन्, मैं धर्म का पालन पूरी ईमानदारी से करता हूं, लेकिन इसके बावजूद भी पिछले तीन वर्षों से मेरे राज्य में बारिश नहीं हुई है और राज्य में अकाल पड़ा हुआ है। महर्षि अंगिरा ने कहा कि हे राजन्! सतयुग में छोटे से पाप का भी भयंकर दण्ड मिलता है। आपके राज्य में एक शूद्र तपस्या कर रहा है, जो इस युग में अनुचित माना गया है। इसी कारण आपके राज्य में वर्षा नहीं होती। जब तक वह शूद्र तपस्वी जीवित रहेगा, अकाल समाप्त नहीं होगा। राजा मांधाता ने कहा, “हे भगवान! मेरा मन किसी निर्दोष व्यक्ति को मारने को तैयार नहीं है। कृपया कोई अन्य उपाय बताएं।” महर्षि अंगिरा उन्हें आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत के प्रभाव से उनके राज्य में अवश्य वर्षा होने की बात कही। राजा ने राजधानी लौटकर विधि-विधान से पद्मा एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से मूसलाधार वर्षा हुई और राज्य धन-धान्य से भर गया।

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Tulsi Puja on Ekadashi:एकादशी व्रत और तुलसी पूजन का अद्भुत फल – जानिए कारण और लाभ

Tulsi Puja on Ekadashi: धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दिन उनकी पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है. तुलसी को भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है, इसलिए एकादशी पर तुलसी पूजा से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है. Tulsi Puja on Ekadashi:एकादशी व्रत और तुलसी पूजन हिंदू धर्म में एकादशी (ekadashi) तिथि को सभी तिथियों में शुभ और महत्वपूर्ण माना गया है. एकादशी तिथि भगवान विष्णु (lord vishnu) को समर्पित है और साल की सभी एकादशी तिथियों पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किए जाते हैं. एकादशी के दिन तुलसी (tulsi) की पूजा को भी काफी शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि तुलसी के पौधे में (tulsi plant) साक्षात मां लक्ष्मी (maa laxmi) निवास करती हैं. Tulsi Puja on Ekadashi: इस दिन तुलसी के पौधे की पूजा के साथ साथ इसके नीचे दीपक जलाने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. आपको बता दें कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है और तुलसी की पूजा पर भगवान विष्णु प्रसन्न हो जाते हैं. चलिए जानते हैं कि एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पौधे की पूजा कैसे करनी चाहिए और इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना क्यों निषेध कहा गया है. तुलसी पूजन का महत्व तुलसी माता, भगवान विष्णु की परम प्रिय हैं। Tulsi Puja on Ekadashi शास्त्रों में तुलसी को देवी स्वरूप माना गया है। तुलसी का पूजन करने से व्यक्ति के घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। कारण लाभ भगवान विष्णु को प्रिय है तुलसी (Tulsi plant puja is important for lord vishnu) Tulsi Puja on Ekadashi: तुलसी को वृंदा भी कहा जाता है. वृंदा पिछले जन्म में असुर जालंधर की पत्नी थीं और भगवान विष्णु की पूजा किया करती थीं. एक युद्ध के दौरान भगवान विष्णु को जालंधर का वध करने के लिए धोखे से वृंदा का पतिव्रत धर्म भंग करना पड़ा और इससे क्रोधित होकर वृंदा ने भगवान विष्णु को पत्थर में बदल जाने का श्राप दिया. भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर में बदल गए. इसके बाद वृंदा ने आत्मदाह किया और उसकी राख से तुलसी के पौधे का जन्म हुआ. तब मां लक्ष्मी तुलसी के पौधे में विराजमान हो गई और शालिग्राम और तुलसी के पौधे का विवाह हुआ. चूंकि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का निवास कहा गया है इसलिए Tulsi Puja on Ekadashi एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ साथ तुलसी के पौधे की पूजा से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं. हर साल देवउठनी एकादशी के अगले दिन भक्त तुलसी के पौधे का भगवान विष्णु के विग्रह शालिग्राम से विवाह करवाते हैं जिसे बहुत ही पावन और शुभ कहा जाता है. एकादशी तिथि का व्रत करने और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के साथ साथ इस दिन तुलसी के पौधे की पूजा भी बहुत ही शुभ मानी जाती है. इस दिन तुलसी के पौधे को लेकर कुछ खास नियम अपनाने चाहिए. एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को जल नहीं देना चाहिए. कहा जाता है कि तुलसी में विराजित मां लक्ष्मी इस दिन निर्जला व्रत करती हैं. ऐसे में अगर आप तुलसी के पौधे को जल देते हैं तो मां लक्ष्मी का व्रत खंडित हो सकता है. ऐसे में मां लक्ष्मी क्रोधित हो सकती हैं. इसलिए एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पौधे को जल नहीं देना चाहिए. एकादशी के दिन तुलसी के पौधे से पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. Tulsi Puja on Ekadashi अगर आपको भगवान विष्णु की पूजा के लिए तुलसी दल चाहिए तो जमीन पर गिरे तुलसी दल इस्तेमाल कर सकते हैं. आप चाहें तो एक दिन पहले तुलसी के पौधे से पत्ते तोड़कर रख सकते हैं. इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, ऐसा करने पर जातक के परिवार को शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती हैं. एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते यानी तुलसी दल भगवान विष्णु की पूजा में अर्पित करने चाहिए. इससे भगवान विष्णु विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं और जातक को सुख समृद्धि का वरदान देते हैं.  एकादशी के दिन पंचामृत बनाते वक्त भी तुलसी के पत्ते उसमें जरूर डालने चाहिए. एकादशी के दिन तुलसी के नीचे दीपक जलाना चाहिए. ऐसा करना शास्त्रों में बहुत ही शुभ कहा गया है. Tulsi Puja on Ekadashi एकादशी के दिन सायंकाल के समय भगवान विष्णु की पूजा के बाद तुलसी के नीचे घी का दीपक जलाने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. इस दिन तुलसी को लाल चुनरी पहनाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. Tulsi Puja on Ekadashi एकादशी के दिन तुलसी की मंजरियां भगवान विष्णु को चढ़ानी चाहिए. आप किसी भी दिन इन मंजरियों को तुलसी के पौधे से ले सकते हैं. इनको धोकर भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें. इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु जातक को और उसके परिवार को सुख समृद्धि और शांति का वरदान देते हैं. एकादशी व्रत का महत्व एकादशी, हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है। Tulsi Puja on Ekadashi यह दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। पुराणों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और वह मोक्ष की ओर बढ़ता है। कारण लाभ

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Yogini Ekadashi 2025:योगिनी एकादशी: जीवन के सारे पाप होंगे नष्ट, बस करें यह काम !

Yogini Ekadashi Vrat Niyam:योगिनी एकादशी पर भक्त उपवास रखकर विष्णु भगवान की आराधना करेंगे। योगिनी एकादशी पर कुछ कामों को करना अशुभ माना जाता है, जो प्रभु की नाराजगी का कारण भी बन सकता है। Yogini Ekadashi:हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. यह दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विशेष माना गया है. आप योगिनी एकादशी पर एक आसान उपाय अपनाकर जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति पा सकते हैं. Yogini Ekadashi 2025 mein Kab Hai:हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. यह दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विशेष माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत रखने से कई बीमारियों से राहत मिलती है और जाने-अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्ति मिलती है. धर्म शास्त्रों में योगिनी एकादशी को रोगों को दूर करने वाली सबसे शुभ तिथि बताया गया है. आप योगिनी एकादशी पर एक आसान उपाय अपनाकर जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति पा सकते हैं. Yogini Ekadashi 2025 Kab Hai:योगिनी एकादशी 2025 कब है? साल 2025 में योगिनी एकादशी का व्रत 21 जून, दिन शनिवार को रखा जाएगा. आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून की सुबह 7:18 बजे से शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 22 जून की सुबह 4:27 बजे होगा. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर 21 जून को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखना सर्वश्रेष्ठ रहेगा. योगिनी एकादशी पर सभी पापों से मुक्ति पाने का उपाय:Remedy to get freedom from all sins on Yogini Ekadashi योगिनी एकादशी के शुभ अवसर पर भगवान विष्णु के साथ ही तुलसी माता की पूजा का भी अत्यंत महत्व माना गया है. योगिनी एकादशी के दिन की सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. फिर भगवान विष्णु और तुलसी माता की विधिवत पूजा करें. इसके बाद तुलसी को जल अर्पित करें और तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं. आप चाहें तो अगरबत्ती भी जला सकते हैं. अब “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें. इसके अलावा, तुलसी माता की सात बार परिक्रमा करें. अगर आप योगिनी एकादशी पर यह उपाय आजमाते हैं, तो भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और आपके जाने-अनजाने में किए गए पापों से आपको मुक्ति प्रदान करेंगे. इस दिन विष्णु भगवान को अर्पित करने वाले भोग में तुलसी के पत्ते जरूर रखें. धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं. अगर आप चाहें तो योगिनी एकादशी पर तुलसी की माला का से तुलसी माता के मंत्र जाप कर सकते हैं. वहीं, अगर आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो एकादशी के दिन पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. What not to do on Yogini Ekadashi:योगिनी एकादशी पर क्या न करें? डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Devshayani Ekadashi Vrat Katha:देवशयनी एकादशी व्रत कथा, जानें कथा पाठ का लाभ

Devshayani ekadashi Vrat Katha In Hindi : आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी या हरिशयनी एकादशी का उपवास किया जाता है। इस एकादशी का व्रत करने से और कथा सुनने व पढ़ने मात्र से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी व्रत कथा के बारे में… आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी व्रत किया जाता है। सनातन धर्म में इस एकादशी का काफी महत्व माना जाता है क्योंकि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीर सागर की योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद कार्तिक मास की एकादशी तिथि तक को भगवान विष्णु योगनिद्रा से निकलते हैं। इस दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं। देवशयनी एकादशी व्रत कथा का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत की कथा सुनने व पढ़ने मात्र से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। देवशयनी एकादशी व्रत कथा:Devshayani Ekadashi Vrat Katha वामन अवतार की कथा:Story of Vaman Avatar वामन पुराण के अनुसार, एक बार राजा बलि ने तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा लिया था। Devshayani Ekadashi Vrat Katha यह देखकर इंद्र समेत अन्‍य देवी-देवता घबरा गए और भगवान विष्णु की शरण में पहुंच गए। देवताओं को परेशान देखकर भगवान विष्‍णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए। राजा बलि ने वामन देवता से कहा कि जो मांगना चाहते हैं मांग लीजिए। इस पर वामन देवता ने भिक्षा में तीन पग भूमि मांग ली। पहले और दूसरे पग में वामन देवता ने धरती और आकाश और पूरा संसार को नाप लिया। अब तीसरे पग के लिए कोई जगह नहीं बची तो राजा बलि से वामन देवता ने पूछा कि तीसरा पग में कहां रखूं तब राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान विष्णु राजा बलि को देखकर काफी प्रसन्‍न हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा। बलि ने उनसे वरदान में पाताल लोक में बस जाने की बात कही। बलि की बात मानकर उनको पाताल में जाना पड़ा। ऐसा करने से समस्‍त देवता और मां लक्ष्‍मी परेशान हो गए। Devshayani Ekadashi Vrat Katha अपने पति विष्‍णुजी को वापस लाने के लिए मां लक्ष्‍मी गरीब स्‍त्री के भेष में राजा बलि के पास गईं और उन्‍हें अपना भाई बनाकर राखी बांध दी और उपहार के रूप में विष्‍णुजी को पाताल लोक से वापस ले जाने का वरदान ले लिया। माता लक्ष्‍मी के साथ वापस जाते हुए भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया की वह प्रत्‍येक वर्ष आषाढ़ शुक्‍ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक मास की एकादशी तक पाताल में ही निवास करेंगे और इन 4 महीने की अवधि को उनकी योगनिद्रा माना जाएगा। यही वजह है कि दीपावली पर मां लक्ष्‍मी की पूजा भगवान विष्‍णु के बिना ही की जाती है। भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी यह कथा:Lord Krishna told this story to Yudhishthir Devshayani Ekadashi Vrat Katha:देवशयनी एकादशी व्रत कथा का वर्णन खुद भगवान श्रीकृष्ण ने किया है। भगवान श्रीकृष्ण ने इस वृतांत को धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाया था। कथाओं के अनुसार, सतयुग में मांधाता नाम का एक चक्रवर्ती राजा राज्य करता था। एक बार उसके राज्य में तीन साल तक वर्षा नहीं हुई, जिसकी वजह से राज्य में भंयकर अकाल पड़ गया। अकाल की वजह से चारो ओर त्रासदी का माहौल बन गया। राज्य के लोगों के अंदर धार्मिक भावनाएं कम होने लगीं। प्रजा ने राजा के पास जाकर अपना दर्द बताया, जिससे राजा भी चिंतित थे। राजा मांधाता को लगता था कि आखिर ऐसा कौन-सा पाप हो गया है, जिसकी सजा हमारे राज्य को ईश्वर दे रहा है। इस संकट से मुक्ति पाने के लिए राजा अपनी सेना के साथ ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुंचे। Devshayani Ekadashi Vrat Katha ऋषिवर ने उनको यहां आने का कारण पूछा। तब राजा ने हाथ जोड़कर कहा कि हे ऋषिवर, मैंने हमेशा से पूरा निष्ठा से धर्म का पालन किया है, फिर मेरे राज्य की ऐसी हालत क्यों है। कृपया करके मुझे इसका समाधान दें। अंगिरा ऋषि ने कहा कि यह सतयुग है, यहां छोटे से पाप का भी बड़ा दंड मिलता है। अंगिरा ऋषि ने राजा को आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने को कहा। महर्षि ने कहा कि इस व्रत का फल जरूर मिलेगा और इसके प्रभाव से तुम्हारा संकट से भी निकल आएगा। Devshayani Ekadashi Vrat Katha महर्षि अंगिरा के निर्देश का पालन करते हुए राजा अपनी राजधानी वापस आ गए और उन्होंने चारों वर्णों सहित देवशयनी एकादशी का व्रत पूरा किया, जिसके बाद राज्य में मूसलधार वर्षा हुई।

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Devshayani Ekadashi 2025 Date:देवशयनी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, पारण का समय

Devshayani Ekadashi:देवशयनी एकादशी 2025 चातुर्मास की शुरुआत का प्रतीक है, जो भक्ति, उपवास और आत्म-अनुशासन का पवित्र 4 महीने का काल है। जानिए तिथि, अनुष्ठान और इस शुभ समय के दौरान क्या न करें। देवशयनी एकादशी वह दिन है जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस क्षण से, ब्रह्मांड की जिम्मेदारी अगले चार महीनों के लिए अन्य देवताओं को सौंप दी जाती है। यह पवित्र दिन चातुर्मास की शुरुआत का भी प्रतीक है, जो आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण अवधि है, जिसके दौरान विवाह, गृह प्रवेश समारोह और भूमि पूजन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Devshayani Ekadashi Shubh Muhurat) Kab hai Devshayani Ekadash:वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 05 जुलाई को शाम 06 बजकर 58 मिनट पर होगी। वहीं, 06 जुलाई को रात 09 बजकर 14 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन होगा। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इसके लिए 06 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी।साधक देवशयनी एकादशी का व्रत 06 जुलाई के दिन रखेंगे। वहीं, 07 जुलाई को पारण सुबह 05 बजकर 29 मिनट से लेकर 08 बजकर 16 मिनट के मध्य किया जाएगा। इस दौरान स्नान-ध्यान और पूजा के बाद अन्न और धन का दान कर व्रत खोलें। देवशयनी एकादशी शुभ योग (Devshayani Ekadashi Shubh Muhurat) Devshayani Ekadashi:ज्योतिषियों की मानें तो आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर साध्य योग का संयोग रात 09 बजकर 27 मिनट तक है। इसके बाद शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से सभी प्रकार के शुभ कामों में सफलता मिलेगी। इसके साथ ही त्रिपुष्कर योग और रवि योग का भी संयोग बन रहा है। Devshayani Ekadashi Puja Vidhi:देवशयनी एकादशी की पूजा विधि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें। एक तांबे के लोटे में जल, सिंदूर, लाल फूल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। सबसे पहले व्रत का संकल्प लें।  इसके बाद विष्णु जी की पूजा आरंभ करें। सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी में पीले रंग का वस्त्र बिछाकर श्री विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें। सबसे पहले जल से आचमन करें। इसके बाद विष्णु जी को पीला चंदन, फूल, माला, अक्षत आदि लगाने के साथ भोग में तुलसी का दल के साथ रखें। इसके बाद जल अर्पित करें। फिर घी का दीपक और धूप जलाकर एकादशी व्रत कथा, विष्णु चालीसा, विष्णु मंत्र के बाद श्री विष्णु आरती कर लें। अंत में भूल चूक के लिए माफी मांग लें और दिनभर व्रत रखें। दूसरे दिन तय समय पर पूजा पाठ करने के बाद व्रत का पारण कर लें। Devshayani Ekadashi chatur mass ka mahetwa:देवशयनी एकादशी और चातुर्मास का महत्व इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और ब्रह्मांड का संचालन अन्य दिव्य प्राणियों को सौंप देते हैं। Devshayani Ekadashi उनका विश्राम काल, जिसे चातुर्मास के नाम से जाना जाता है, 6 जुलाई से शुरू होकर 1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी तक जारी रहेगा। चातुर्मास को तपस्या, उपवास, ध्यान और आत्मसंयम का समय माना जाता है। इस अवधि के दौरान विलासिता, उत्सव और भोग-विलास से दूर रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस दौरान ध्यान आंतरिक चिंतन और आध्यात्मिक विकास की ओर केंद्रित होता है। Chatur mas Ke dauran kya nhi karna chahiye:चातुर्मास के दौरान क्या नहीं करना चाहिए? चातुर्मास के दौरान कुछ कार्य पारंपरिक रूप से प्रतिबंधित होते हैं, क्योंकि यह आत्म-अनुशासन और भक्ति का एक पवित्र चरण है: Chatur mas mein kya karna chahiye:चातुर्मास में क्या करना चाहिए? देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) न केवल भगवान विष्णु के विश्राम का प्रतीक है, बल्कि यह एक व्यक्तिगत विराम, आत्म-अनुशासन, आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उत्थान का अवसर भी है। चातुर्मास के सिद्धांतों का पालन करके, व्यक्ति जीवन में शांति, अनुशासन और ईश्वरीय कृपा ला सकता है। यदि आप अपने प्रयासों में सफलता और स्थायी सद्भाव चाहते हैं, तो इस पवित्र चार महीने की अवधि के आध्यात्मिक दिशानिर्देशों का पालन करें। देवशयनी एकादशी संकल्प मंत्र सत्यस्थ: सत्यसंकल्प: सत्यवित् सत्यदस्तथा।धर्मो धर्मी च कर्मी च सर्वकर्मविवर्जित:।।कर्मकर्ता च कर्मैव क्रिया कार्यं तथैव च।श्रीपतिर्नृपति: श्रीमान् सर्वस्यपतिरूर्जित:।। देवशयनी एकादशी विष्णु क्षमा मंत्र भक्तस्तुतो भक्तपर: कीर्तिद: कीर्तिवर्धन:।कीर्तिर्दीप्ति: क्षमाकान्तिर्भक्तश्चैव दया परा।।

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Yogini ekadashi vrat katha: योगिनी एकादशी का व्रत इस कथा के बिना है अधूरा

Yogini ekadashi vrat katha in hindi:धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से जातक को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि Yogini ekadashi vrat katha एकादशी व्रत बिना कथा का पाठ करने से अधूरा माना जाता है। आइए पढ़ते हैं योगिनी एकादशी की व्रत कथा। योगिनी एकादशी व्रत कथा (Yogini Ekadashi Vrat Katha) पौराणिक कथा के अनुसार, स्वर्ग लोक में कुबेर नाम का राजा रहता था। वह शिव भक्त था। रोजाना महादेव की पूजा किया करता था। उसका हेम नाम का माली था, जो हर दिन पूजा के लिए फूल लाता था। माली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था। Yogini ekadashi vrat katha वह बेहद सुंदर थी। एक बार जब सुबह माली मानसरोवर से फूल तोड़कर लाया, लेकिन कामासक्त होने की वजह से वह अपनी स्त्री से हास्य-विनोद करने लगा।राजा को उपासना करने में देरी हो गई, जिसकी वजह से वह क्रोधित हुआ। ऐसे में राजा ने माली को श्राप दे दिया। उन्होंने कहा कि तुमने ईश्वर की भक्ति से ज्यादा कामासक्ति को प्राथमिकता दी है, तुम्हारा स्वर्ग से पतन होगा और तुम धरती पर स्त्री वियोग और कुष्ठ रोग का सामना करोगे। इसके बाद वह धरती पर आ गिरा, जिसकी वजह से उसे कुष्ठ रोग हो गया और उसकी स्त्री भी चली गई। वह कई वर्षों तक धरती पर कष्टों का सामना करता रहा। एक बार माली को मार्कण्डेय ऋषि के दर्शन हुए। उसने अपने जीवन की सभी परेशानियों को बताया।ऋषि माली को बातों को सुनकर आश्चर्य हुआ। ऐसे में मार्कण्डेय ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी के व्रत के महत्व के बारे में बताया। Yogini ekadashi vrat katha मार्कण्डेय ने कहा कि इस व्रत को करने से तुम्हारे जीवन के सभी पाप खत्म होंगे और तुम पुनः भगवत कृपा से स्वर्ग लोक को प्राप्त करोगे। माली ने ठीक ऐसा ही किया। भगवान विष्णु ने उसके समस्त पापों को क्षमा करके उसे पुनः स्वर्ग लोक में स्थान प्रदान किया। योगिनी एकादशी कब है: हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 जून 2025 को सुबह 07 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ होगी और 22 जून को सुबह 04 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में इस साल योगिनी एकादशी 21 जून 2025 को रखा जाएगा। योगिनी एकादशी का महत्व: योगिनी एकादशी निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले आती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति व खुशहाली आती है। भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने से पहले इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा खास मानी गई है। Yogini Ekadashi 2024 Vrat Katha: एकादशी तिथि सभी शुभ तिथियों में से एक है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। हर माह में 2 बार एकादशी व्रत किया जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को Yogini ekadashi vrat katha योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। Yogini ekadashi vrat katha इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत कथा पाठ जरूर करना चाहिए।  योगिनी एकादशी पूजन मुहूर्त 2025:Yogini Ekadashi Puja Muhurta 2025: ब्रह्म मुहूर्त- 04:04 ए एम से 04:44 ए एम अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:51 पी एम विजय मुहूर्त- 02:43 पी एम से 03:39 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 07:21 पी एम से 07:41 पी एम अमृत काल- 01:12 पी एम से 02:41 पी एम योगिनी एकादशी व्रत पारण मुहूर्त: योगिनी एकादशी व्रत का पारण 22 जून 2025 को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 47 मिनट से शाम 04 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 09 बजकर 41 मिनट है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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Yogini Ekadashi 2025 Date: कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? नोट कर लें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Yogini Ekadashi 2025 Date: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जो कोई इस दिन व्रत रखकर भगवान की उपासना करता है, उसके हर संकट दूर हो जाते हैं. Yogini Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल भर में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं. हर महीने दो एकादशी पड़ती है- एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में, हर एकादशी व्रत का अपना अलग महत्व है. वैदिक पंचांग के अनुसार, कुछ दिनों में आषाढ़ मास की शुरुआत होने वाली है. इस महीने की पहली एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. इस एकादशी के दिन भी व्रत रखकर भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. कहते हैं कि इस एकादशी के व्रत से अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि जून में योगिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, व्रत-पूजन के लिए शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है. सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत ज्यादा महत्व है। यह भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। हर महीने में एकादशी दो बार मनाई जाती है। एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष में। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को ‘योगिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि इस एकादशी (Yogini Ekadashi 2025) का उपवास करने से पापों से मुक्ति मिलती है। वहीं, इसकी डेट को लेकर लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन बनी हुई है, आइए यहां इसकी डेट जानते हैं। कब मनाई जाएगी योगिनी एकादशी 2025? (Yogini Ekadashi 2025 Kab Hai?) हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून को सुबह 07 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसकी समाप्ति 22 जून को सुबह 04 बजकर 27 मिनट पर होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि के अनुसार, तीज-त्योहार मनाए जाते हैं। इसलिए 21 जून को योगिनी एकादशी का उपवास रखा जाएगा। योगिनी एकादशी 2025 पूजा विधि (Yogini Ekadashi 2025 Puja Vidhi) योगिनी एकादशी का महत्व:Importance of Yogini Ekadashi हिंदू धर्म में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व है. शास्त्रों के जानकार बताते हैं कि जो कोई किन्हीं कारणों से निर्जला एकादशी का व्रत नहीं रख सकते, वे इस एकादशी का व्रत रखकर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना करने से विशेष फल प्राप्त होता है. इस दिन भगवान को खीर का भोग लगाना चाहिए. इसके अलावा इस दिन ‘ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ इस मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से बीमारी से मुक्ति मिलती है. योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व (Yogini Ekadashi 2025 Significance) योगिनी एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि जो साधक इस कठिन उपवास का पालन करते हैं, उन्हें आरोग्य और सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है। ऐसे में इस पावन दिन उपवास जरूर करें। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Nirjala Ekadashi:निर्जला एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए? रखें इन बातों का ध्यान

Nirjala Ekadashi:निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi Vrat Niyam 2025) का व्रत ज्येष्ठ महीने में किया जाता है जिसमें 24 घंटे बिना पानी पिए रहना होता है। गर्मी में यह व्रत मुश्किल हो सकता है इसलिए व्रत से एक दिन पहले शरीर को हाइड्रेट रखें और धूप में निकलने से बचें। साथ ही कुछ और बातों को ध्यान में रख आप इस व्रत को अच्छे से कर सकते हैं। हिंदू धर्म में कई तरह के व्रत-उपवास किए जाते हैं। मन की शुद्धि और भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए लोग अक्सर व्रत-उपवास करते हैं। सिर्फ धार्मिक ही नहीं साइंस के मुताबिक भी फास्टिंग सेहत के लिए फायदेमंद होती है। हिंदू धर्म में यूं तो कई तरह के व्रत किए जाते हैं, लेकिन एकादशी व्रत का काफी ज्यादा महत्व माना जाता है। खासकर निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2025) का व्रत सभी एकादशी में अहम माना जाता है। हर साल ज्येष्ठ महीने में निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi Vrat Niyam 2025) का व्रत किया जाता है। इस साल 6 जून को यह व्रत किया जाएगा। जैसाकि नाम से ही पता चलता है कि यह व्रत यानी बिना पानी पिए किया जाता है। इस दौरान लोग 24 घंटे बिना कुछ खाए-पिए रहते हैं। ऐसे में गर्मी के मौसम में बिना कुछ खाए-पिए रहना मुश्किल हो जाता है, जिससे कई बार तबीयत भी खराब हो सकती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे, जिनका फॉलो कर आप बिना तबीयत बिगाड़े निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi fasting tips) का व्रत कर सकते हैं। निर्जला एकादशी Nirjala Ekadashi का व्रत 24 घंटे के लिए रखा जाता है। इसका मतलब है कि इस व्रत को अगले दिन यानी द्वादशी को खोला जाता है। ऐसे में पूरा एक दिन पानी के बिना रहने से शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार बन सकता है। इसलिए व्रत के एक दिन पहले आप बॉडी को अच्छी तरह से हाइड्रेट कर लें। इसके लिए ढेर सारा पानी और नारियल पानी पिएं। साथ ही ढेर सारे फलों को डाइट में शामिल करें। धूप में निकलने से बचें:avoid exposure to sunlight अगर आप निर्जला एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो इस दौरान धूप में निकलने से बचें। इस दिन आप वैसे ही पानी नहीं पीते हैं। ऐसे में धूप में निकलने से गर्मी की वजह से आप डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं, जिससे आपकी तबीयत बिगड़ सकती है। इसलिए कोशिश करें कि आप घर या कहीं अंदर ही रहें। एक साथ ढेर सारा पानी न पिएं:Do not drink a lot of water at once पूरे एक दिन बिना पानी पिए रहना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में जब लोग व्रत खोलते हैं, तो एक साथ ढेर सारा पानी पी जाते हैं। हालांकि, ऐसा करना भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए व्रत खोलते समय थोड़ा पानी पिएं और फिर इसे घूंट-घूंट करके पीते रहें। Nirjala Ekadashi 2025 Vrat Niyam  हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए खास माना गया है। हिंदू पंचांग के आधार पर यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस व्रत में भक्त अन्न व जल ग्रहण नहीं करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से 24 एकादशी का फल मिलता है व भगवान विष्णु की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, निर्जला या भीमसेनी एकादशी के दिन कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है। जानें- 1. इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में कीड़े मकोड़े के रूप में जन्म लेता है। 2. इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि नमक का सेवन करने से एकादशी व गुरु ग्रह का फल खत्म हो जाता है। 3. एकादशी के दिन तुलसी को जल अर्पित नहीं करना चाहिए और न ही छूना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता उपवास करती हैं। तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। 4. इस दिन किसी के प्रति बुरे या अपमानजनक शब्द प्रयोग नहीं करने चाहिए। Nirjala Ekadashi इस दिन क्रोध नहीं करना चाहिए और वाद-विवाद से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। 5. एकादशी के दिन बाल या नाखून काटना अशुभ माना गया है। What to do on the day of Ekadashi:एकादशी के दिन क्या करें- 1. एकादशी के दिन अधिक से अधिक मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की अराधना करनी चाहिए। 2. भगवान विष्णु को तुलसी दल युक्त प्रसाद का भोग लगाना चाहिए। 3. भगवान विष्णु की आरती करनी चाहिए। 4. इस दिन गरीब व जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए।

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Nirjala Ekadashi Vrat Niyam:निर्जला एकादशी का व्रत कर रहे हैं, तो जानिए कब पी सकते हैं पानी

Nirjala Ekadashi Vrat Niyam:निर्जला एकादशी का व्रत 6 जून को है। इस व्रत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का महत्व है। व्रत करने वाले को पूरे दिन जल का त्याग करना होता है जिससे यह व्रत कठिन माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने और झूठ चोरी से बचने की सलाह दी जाती है। Nirjala Ekadashi 2025:हर माह में दो एकादशी के व्रत होते हैं। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाएगा। Nirjala Ekadashi Vrat Niyam पंचांग के अनुसार, इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 6 जून को है। यह व्रत करना जितना कठिन है, उतना ही फलदायी भी है। मान्यता है कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति को समस्त भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। मरने के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह विष्णु लोक में वास करता है।  जैसा कि इस व्रत के नामNirjala Ekadashi Vrat Niyam निर्जला एकादशी से ही स्पष्ट है इस दिन उपवास रखने वाला व्यक्ति पानी नहीं पी सकता है। ज्येष्ठ के महीने में जब गर्मी अपने चरम पर होती है, तब इस व्रत को करना और भी मुश्किल हो जाता है। यदि व्रत के दौरान जल ग्रहण कर लिया जाए, तो व्रत टूट जाता है और उसका फल नहीं मिलता है।  निर्जला एकादशी पर करें तुलसी से ये उपाय (Do These Remedies With Tulsi On Nirjala Ekadashi Vrat Niyam ) कब पी सकते हैं पानी:When can you drink water ? Nirjala Ekadashi Vrat Niyam:निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करना चाहिए। उसके बाद ही वह पानी पी सकता है। निर्जला एकादशी के दिन सुबह उठने के बाद पहली बार जल का इस्तेमाल सिर्फ नहाने के लिए किया जा सकता है।  Nirjala Ekadashi Vrat Niyam इसके बाद व्रत का संकल्प लेने के दौरान और आचमन करते समय व्रत करने वाला व्यक्ति पानी का उपयोग कर सकता है। इसके बाद पूरे दिन पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। हालांकि, हाथ-मुंह धोने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन पीने के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।    Nirjala Ekadashi Vrat Niyam 2025 1. निर्जला एकादशी व्रत में अन्न व जल पूरी तरह से वर्जित है। इसमें फलाहार भी मान्य नहीं है। 2. इस व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और शारीरिक इच्छाओं पर कंट्रोल रखना चाहिए। 3. इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए व व्रत कथा का पाठ करना चाहिए। 4. एकादशी व्रत करने के बाद अगले दिन व्रत पारण के समय ही पानी पीना चाहिए। 5. निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को जल नहीं अर्पित करना चाहिए क्योंकि इस दिन तुलसी माता भी व्रत करती हैं। 6. निर्जला एकादशी के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन दान-पु्ण्य भी लाभकारी माना गया है। 7. निर्जला एकादशी के दिन पलंग पर नहीं सोना चाहिए, भूमि पर ही आराम या शयन करना चाहिए। व्रत में दिन में सोने की मनाही होती है। 8. व्रत के दौरान क्रोध और लोभ जैसे नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। 9. इस दिन जीव-जंतु को हानि नहीं पहुंचानी चाहिए। इस दिन न ही बाल कटवाने चाहिए और न ही नाखून काटने चाहिए। 10. निर्जला एकादशी के दिन वाद-विवाद से दूर रहना चाहिए।

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Nirjala Ekadashi 2025 Date:कब है निर्जला एकादशी,व्रत के दिन नहीं करें ये काम, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त

Nirjala Ekadashi 2025 Muhurat :निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है। Nirjala Ekadashi 2025 Muhurat, निर्जला एकादशी 2025 हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है। हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि विशेष महत्व रखती है। इस साल जून के पहले हफ्ते में निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसलिए आइए जानते हैं निर्जला एकादशी की सही डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत पारण का समय- कब है निर्जला एकादशी When is Nirjala Ekadashi ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 06 जून 2025 को 02:15 ए एम बजे होगी, जिसका समापन 07 जून 2025 को 04:47 ए एम तक होगा। लेकिन उदया तिथि के चलते निर्जला एकादशी का व्रत शुक्रवार, 6 जून के दिन रखा जाएगा। गृहस्थ लोग 6 जून के दिन यह व्रत रखेंगे वहीं, वैष्णव संप्रदाय के लोग 7 जून के दिन यह व्रत रखेंगे। निर्जला एकादशी क्या है? What is Nirjala Ekadashi ? निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। ‘निर्जला’ का अर्थ है ‘बिना जल के’, अर्थात इस व्रत में भक्त न तो भोजन करते हैं और न ही पानी ग्रहण करते हैं। ये व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से साल की सभी 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। ये व्रत आत्म-अनुशासन, भक्ति और तप का प्रतीक है, जो भक्तों को मोक्ष, समृद्धि और पापों से मुक्ति दिलाता है। निर्जला एकादशी का महत्व Importance of Nirjala Ekadashi निर्जला एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है। ये व्रत न केवल भक्तों के शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण में मदद करता है, बल्कि ये भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का भी सशक्त माध्यम है। निर्जला एकादशी की कथा:Story of Nirjala Ekadashi निर्जला एकादशी की कथा महाभारत के पांडव भाई भीम से जुड़ी है, इसलिए इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भीम भोजन के अत्यधिक शौकीन थे और सभी एकादशियों का व्रत रखने में असमर्थ थे, जबकि उनके भाई और द्रौपदी नियमित रूप से एकादशी व्रत रखते थे। भीम को चिंता थी कि वे भगवान विष्णु का अपमान कर रहे हैं। तब उन्होंने ऋषि वेदव्यास से मार्गदर्शन मांगा। वेदव्यास ने उन्हें सलाह दी कि वे ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला व्रत रखें, जिसका पुण्य सभी एकादशियों के बराबर है। भीम ने इस व्रत को पूर्ण भक्ति के साथ रखा और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त की। तभी से ये व्रत भीमसेनी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। निर्जला एकादशी पूजा-विधि:Nirjala Ekadashi puja method पूजा प्रक्रिया Nirjala Ekadashi Puja Process व्रत के नियम और सावधानियां Rules and precautions for Nirjala Ekadashi fast क्या करें What to do क्या न करें what not to do

Nirjala Ekadashi 2025 Date:कब है निर्जला एकादशी,व्रत के दिन नहीं करें ये काम, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त Read More »