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Tulsi Aarti – Maharani Namo Namo:तुलसी आरती – महारानी नमो-नमो

“Tulsi Aarti:तुलसी जी की आरती”: लाभ, महत्व और चमत्कारी फायदे Tulsi Aarti:तुलसी जी की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि तुलसी को हिंदू धर्म में एक पूजनीय और पवित्र पौधा माना गया है। तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है, और उनकी आरती करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। “Tulsi Aarti तुलसी जी की आरती” का नियमित पाठ परिवार और घर के लिए लाभकारी माना जाता है। आइए जानते हैं तुलसी जी की आरती के लाभ, महत्व, और इसे करने के विशेष फायदे। 1. सकारात्मक ऊर्जा का संचार तुलसी जी की Tulsi Aarti आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। तुलसी को वातावरण को शुद्ध करने वाला पौधा माना गया है, और उनकी आरती करने से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक रहता है। इससे घर में शांति और खुशहाली बनी रहती है। 2. स्वास्थ्य लाभ और रोगों से मुक्ति Tulsi Aarti:तुलसी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है और उसकी आरती करने से स्वास्थ्य लाभ होता है। तुलसी की पूजा करने से व्यक्ति रोगों से सुरक्षित रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। तुलसी की आरती करने से स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं में कमी आती है। 3. परिवार में सुख-शांति और समृद्धि तुलसी जी की आरती करने से परिवार में सुख-शांति का वास होता है। इससे परिवार के सभी सदस्य प्रेम, एकता और सद्भाव से रहते हैं। तुलसी माता का आशीर्वाद प्राप्त करने से घर में समृद्धि और आर्थिक उन्नति का अनुभव होता है। 4. धार्मिक पुण्य और ईश्वर का आशीर्वाद तुलसी जी की आरती करने से व्यक्ति को धार्मिक पुण्य और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Tulsi Aarti तुलसी जी का पूजन करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में सभी प्रकार की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। 5. वास्तु दोष से मुक्ति तुलसी का पौधा घर के वास्तु दोष को दूर करने में सहायक माना जाता है। तुलसी जी की आरती करने से घर में वास्तु दोष से उत्पन्न समस्याएं दूर होती हैं और परिवार में खुशहाली का वातावरण बनता है। तुलसी माता के आशीर्वाद से घर में सकारात्मकता बनी रहती है। 6. पारिवारिक कलह का नाश तुलसी जी की आरती का नियमित पाठ परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम और सद्भावना को बढ़ाता है। Tulsi Aarti इससे पारिवारिक कलह समाप्त होती है और परिवार में सामंजस्य बना रहता है। तुलसी माता का आशीर्वाद परिवार को एकजुट रखता है। 7. मन और आत्मा की शांति तुलसी जी की Tulsi Aarti आरती का नियमित पाठ करने से मन को शांति और आत्मा को सुकून मिलता है। यह आरती मानसिक शांति प्रदान करती है और नकारात्मक विचारों को दूर करती है। इससे व्यक्ति का मन शांत और संयमित रहता है। 8. धन-धान्य की वृद्धि और आर्थिक समृद्धि तुलसी जी की आरती करने से धन-धान्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह आरती घर में आर्थिक स्थिरता और संपन्नता लाती है। तुलसी माता की कृपा से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं। 9. धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति तुलसी जी की आरती व्यक्ति को धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर ले जाती है। यह आरती भगवान विष्णु की भक्ति को और भी गहरा बनाती है और व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन को मजबूत बनाती है। तुलसी माता का आशीर्वाद मिलने से आध्यात्मिक मार्ग पर सफलता मिलती है। 10. बीमारियों से सुरक्षा और स्वास्थ्य में सुधार तुलसी जी की आरती करने से व्यक्ति को बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। तुलसी के औषधीय गुणों के कारण यह शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाता है। तुलसी माता की आरती करने से परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ और निरोग रहते हैं। 11. प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा तुलसी माता को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा देने वाली देवी माना गया है। तुलसी जी की आरती करने से व्यक्ति और उसका परिवार प्राकृतिक आपदाओं जैसे आंधी, तूफान, और अन्य विपदाओं से सुरक्षित रहता है। तुलसी माता का आशीर्वाद परिवार को इन संकटों से बचाने में सहायक होता है। 12. जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति तुलसी जी की आरती का नियमित पाठ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने का मार्ग है। यह आरती भगवान विष्णु और तुलसी माता की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। नियमित रूप से इसे गाने या सुनने से जीवन में सौभाग्य, खुशहाली और समृद्धि का अनुभव होता है। निष्कर्ष “तुलसी जी की आरती” का नियमित पाठ व्यक्ति और परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। यह आरती सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य, और आर्थिक उन्नति का कारण बनती है। तुलसी माता के आशीर्वाद से घर में शांति, संतोष, और सुरक्षा बनी रहती है। Tulsi Aarti – Maharani Namo Namo:तुलसी आरती – महारानी नमो-नमो माँ Tulsi Aarti तुलसी पूजन, तुलसी विवाह एवं कार्तिक माह में माँ तुलसी की आरती सबसे अधिक श्रवण की जाती है। तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । धन तुलसी पूरण तप कीनो,शालिग्राम बनी पटरानी ।जाके पत्र मंजरी कोमल,श्रीपति कमल चरण लपटानी ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । धूप-दीप-नवैद्य आरती,पुष्पन की वर्षा बरसानी ।छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,बिन तुलसी हरि एक ना मानी ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । सभी सखी मैया तेरो यश गावें,भक्तिदान दीजै महारानी ।नमो-नमो तुलसी महारानी,तुलसी महारानी नमो-नमो ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो ।

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Shri Kuber Aarti, Jai Kuber Swami:श्री कुबेर जी आरती – जय कुबेर स्वामी

Kuber Aarti:श्री कुबेर जी की आरती: लाभ, महत्व और चमत्कारी फायदे Kuber Aarti:श्री कुबेर जी की आरती का विशेष महत्व है, क्योंकि भगवान कुबेर धन, वैभव और समृद्धि के देवता माने जाते हैं। “श्री कुबेर जी की आरती” का नियमित पाठ जीवन में आर्थिक समृद्धि, धन-धान्य की वृद्धि और जीवन में सुख-शांति लाने का माध्यम है। यहां जानिए श्री कुबेर जी की आरती के फायदे और इसे करने के महत्वपूर्ण लाभ। 1. आर्थिक समृद्धि और धन की प्राप्ति श्री कुबेर जी को धन के स्वामी माना जाता है। उनकी आरती करने से आर्थिक समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। यह आरती उन लोगों के लिए विशेष लाभकारी है, जो धन-संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। नियमित रूप से कुबेर जी की आरती करने से व्यापार में लाभ होता है और आय के नए स्रोत खुलते हैं। 2. घर और कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा का संचार श्री कुबेर जी की आरती का पाठ घर और कार्यस्थल पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इससे घर में खुशहाली का माहौल बनता है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। कार्यस्थल पर कुबेर जी की कृपा से माहौल बेहतर होता है, जिससे काम में उन्नति और सफलता मिलती है। 3. व्यापार और करियर में वृद्धि कुबेर Kuber Aarti जी की आरती का पाठ करने से व्यापार में उन्नति और करियर में प्रगति होती है। जो लोग अपने करियर या व्यापार में वृद्धि चाहते हैं, उनके लिए यह आरती अत्यंत फलदायक होती है। कुबेर जी का आशीर्वाद व्यक्ति को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाता है और व्यापार को स्थिरता प्रदान करता है। 4. कर्ज से मुक्ति और वित्तीय स्थिरता कुबेर जी की Kuber Aarti आरती करने से व्यक्ति को कर्ज से मुक्ति मिलती है। इस आरती का नियमित रूप से पाठ करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और वित्तीय स्थिरता का अनुभव होता है। यह आरती व्यक्ति को धन का सही उपयोग करने की प्रेरणा देती है, जिससे अनावश्यक खर्चों से बचा जा सकता है। 5. परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास कुबेर जी की आरती का पाठ घर में सुख-शांति और समृद्धि लाता है। यह आरती परिवार में प्रेम, एकता और सद्भावना का संचार करती है। कुबेर जी की कृपा से परिवार के सभी सदस्य आर्थिक दृष्टि से सुरक्षित और संतुष्ट रहते हैं, जिससे घर में खुशहाली बनी रहती है। 6. धन-संबंधी चिंताओं से मुक्ति कुबेर जी की आरती का नियमित पाठ धन-संबंधी चिंताओं को दूर करता है। जिन लोगों को आर्थिक अस्थिरता या वित्तीय चिंता हो, उनके लिए यह आरती विशेष लाभकारी है। Kuber Aarti श्री कुबेर जी की कृपा से व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से चिंतामुक्त होकर जीवन का आनंद ले सकता है। 7. धन और संपत्ति की सुरक्षा श्री कुबेर जी की आरती का नियमित पाठ करने से धन और संपत्ति की रक्षा होती है। Kuber Aarti यह आरती व्यक्ति के संचित धन की सुरक्षा करती है और उसे नकारात्मक शक्तियों से बचाती है। कुबेर जी की आरती करने से चोरी या नुकसान जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। 8. अचानक धन लाभ और अनुकूल अवसरों की प्राप्ति कुबेर जी की कृपा से व्यक्ति को अचानक धन लाभ और नए अवसर प्राप्त होते हैं। इस Kuber Aarti आरती का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में आर्थिक उन्नति के अनेक अवसर प्राप्त होते हैं और उनके जीवन में अनुकूल बदलाव आते हैं। 9. धन का सही उपयोग और संतुलित जीवन कुबेर जी की Kuber Aarti आरती व्यक्ति को धन का सही उपयोग करने की प्रेरणा देती है। Kuber Aarti इस आरती के माध्यम से व्यक्ति को धन का सदुपयोग करने की प्रेरणा मिलती है और उसे संतुलित जीवन जीने में सहायता मिलती है। कुबेर जी की कृपा से व्यक्ति में लोभ की भावना दूर होती है। 10. वास्तु दोष से मुक्ति Kuber Aarti कुबेर जी की आरती का नियमित पाठ घर में वास्तु दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। इससे घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बना रहता है, जिससे वास्तु दोष से उत्पन्न समस्याओं का निवारण होता है। कुबेर जी की आरती से घर में संपन्नता और सुख-शांति बनी रहती है। 11. आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि कुबेर जी की आरती का पाठ करने से व्यक्ति में आत्मबल और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। Kuber Aarti आर्थिक संकटों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है और जीवन में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। कुबेर जी की कृपा से व्यक्ति मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त महसूस करता है। 12. पारिवारिक कलह और आर्थिक विवादों का नाश कुबेर जी की आरती करने से परिवार में आर्थिक विवाद और कलह समाप्त होते हैं। श्री कुबेर जी का आशीर्वाद मिलने से परिवार के सदस्य आर्थिक मामलों में सामंजस्य रखते हैं और अनावश्यक विवादों से दूर रहते हैं। निष्कर्ष “श्री कुबेर जी की आरती” का नियमित पाठ घर में सुख, शांति, और समृद्धि लाने का उत्तम साधन है। भगवान कुबेर की आरती करने से व्यक्ति का जीवन धन-धान्य से भरपूर होता है और आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं। श्री कुबेर जी की आरती को नियमित रूप से करने से व्यक्ति न केवल आर्थिक दृष्टि से सशक्त होता है बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी प्राप्त करता है। Shri Kuber Aarti, Jai Kuber Swami:श्री कुबेर जी आरती – जय कुबेर स्वामी जय कुबेर स्वामी,प्रभु जय कुबेर स्वामी,हे समरथ परिपूरन ।हे समरथ परिपूरन ।हे अन्तर्यामी ॥ॐ जय कुबेर स्वामीप्रभु जय कुबेर स्वामी.. जय कुबेर स्वामी,प्रभु जय कुबेर स्वामी,हे समरथ परिपूरन । -x2हे अन्तर्यामी ।ॐ जय कुबेर स्वामीप्रभु जय कुबेर स्वामी.. विश्रवा के लाल इदविदा के प्यारे,माँ इदविदा के प्यारे,कावेरी के नाथ हो । -x2शिवजी के दुलारे ।ॐ जय कुबेर स्वामीप्रभु जय कुबेर स्वामी.. मनिग्रवी मीनाक्षी देवी,नलकुबेर के तात,प्रभु नलकुबेर के तातदेवलोक में जागृत । -x2आप ही हो साक्षात ।ॐ जय कुबेर स्वामीप्रभु जय कुबेर स्वामी.. रेवा नर्मदा तटशोभा अतिभारीप्रभु शोभा अतिभारीकरनाली में विराजत । -x2भोले भंडारी ।ॐ जय कुबेर स्वामीप्रभु जय कुबेर स्वामी.. वंध्या पूत्र रतन औरनिर्धन धन पायेसब निर्धन धन पायेमनवांछित फल देते । -x2जो मन से ध्याये ।ॐ जय कुबेर स्वामीप्रभु जय कुबेर स्वामी.. सकल जगत में तुम हीसब के सुखदाताप्रभु सब के सुखदातादास जयंत कर वन्दे । -x2जाये बलिहारी ।ॐ जय कुबेर स्वामीप्रभु जय कुबेर स्वामी..

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Om Jai Mahavir Prabhu:आरती: ॐ जय महावीर प्रभु

“Mahavir Prabhu:ॐ जय महावीर प्रभु” आरती: लाभ, महत्व, और फायदे “Mahavir Prabhu:ॐ जय महावीर प्रभु” आरती भगवान महावीर Mahavir Prabhu को समर्पित है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी को अहिंसा, सत्य, और करुणा का प्रतीक माना गया है। यह आरती उनके प्रति श्रद्धा, प्रेम और आस्था प्रकट करने का एक प्रभावी साधन है। “ॐ जय महावीर प्रभु” आरती के नियमित पाठ से आत्मिक शांति, सकारात्मकता और नैतिक उन्नति प्राप्त होती है। इस लेख में हम आरती के लाभ, महत्व, और नियमित पाठ से होने वाले फायदों पर चर्चा करेंगे। 1. आध्यात्मिक शांति और संतुलन “Mahavir Prabhu:ॐ जय महावीर प्रभु” आरती जैन धर्म के उच्च आदर्शों को याद दिलाती है। महावीर स्वामी के उपदेशों का अनुसरण करने से आत्मा को शांति और संतुलन मिलता है। यह आरती मन में शांति का संचार करती है और आंतरिक उथल-पुथल को दूर करने में सहायक होती है। 2. सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति नियमित रूप से “ॐ जय महावीर प्रभु Mahavir Prabhu ” आरती गाने या सुनने से मानसिक तनाव दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस आरती के उच्चारण से नकारात्मकता दूर होती है, जिससे मन शांति और आनंद का अनुभव करता है। यह आरती ध्यान और आत्मविश्लेषण की भावना को प्रोत्साहित करती है। 3. अहिंसा, सत्य, और करुणा का विकास Mahavir Prabhu महावीर स्वामी का संदेश अहिंसा, सत्य और करुणा पर आधारित है। “ॐ जय महावीर प्रभु” आरती का पाठ व्यक्ति को इन मूल्यों को अपने जीवन में शामिल करने की प्रेरणा देता है। यह आरती जीवन में सकारात्मक गुणों का विकास करती है और दूसरों के प्रति प्रेम और करुणा की भावना को मजबूत बनाती है। 4. धार्मिक और नैतिक जीवन की ओर अग्रसर “ॐ जय महावीर प्रभु” आरती हमें धर्म और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। महावीर स्वामी के आदर्शों का अनुसरण करने से व्यक्ति का जीवन सरल और शांतिपूर्ण बनता है। यह आरती भक्त को धार्मिक और नैतिक जीवन जीने की ओर प्रेरित करती है, जो आंतरिक संतोष और सुख का स्रोत है। 5. मनोकामनाओं की पूर्ति और आशीर्वाद प्राप्ति सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ महावीर स्वामी की आरती करने से व्यक्ति की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। भगवान महावीर का आशीर्वाद मिलने से जीवन में सफलता, शांति और समृद्धि का अनुभव होता है। यह आरती ईश्वर से निकटता और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सशक्त साधन है। 6. भय और चिंता से मुक्ति इस आरती का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के मन से भय और चिंता दूर होते हैं। महावीर स्वामी के संदेशों का अनुसरण करते हुए व्यक्ति अपने अंदर साहस और आत्मबल का विकास करता है, जिससे वह जीवन की चुनौतियों का सामना कर पाता है। 7. पारिवारिक सुख और शांति का अनुभव “ॐ जय महावीर प्रभु” Mahavir Prabhu आरती का नियमित पाठ परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाने का कारक बनता है। इस आरती को करने से घर का वातावरण सकारात्मक और शांतिपूर्ण बनता है, जिससे पारिवारिक सदस्यों के बीच आपसी समझ और प्रेम में वृद्धि होती है। 8. ध्यान और आत्म-संयम की वृद्धि महावीर स्वामी Mahavir Prabhu का जीवन ध्यान और संयम का प्रतीक है। “ॐ जय महावीर प्रभु” आरती का पाठ ध्यान की भावना को बढ़ावा देता है, जिससे व्यक्ति के मन में एकाग्रता और आत्म-संयम बढ़ता है। नियमित रूप से इसे सुनने या गाने से मन शांत और विचार संयमित रहते हैं। 9. अहंकार और इच्छाओं का नाश भगवान महावीर ने जीवन में तप और संयम का महत्व बताया है। इस आरती का पाठ अहंकार और अनावश्यक इच्छाओं का नाश करता है और व्यक्ति को साधारण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। महावीर स्वामी की आरती से जीवन में त्याग, संयम और संतोष की भावना का विकास होता है। 10. समस्त पापों से मुक्ति “ॐ जय महावीर प्रभु” Mahavir Prabhu आरती का नियमित पाठ व्यक्ति के पापों का नाश करने में सहायक माना जाता है। इसे सच्चे मन से करने से व्यक्ति के पूर्व जन्म और वर्तमान जीवन के पाप नष्ट होते हैं, जिससे आत्मा शुद्ध होती है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होती है। 11. स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक शांति इस आरती के नियमित पाठ से व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। महावीर स्वामी की आरती से मानसिक शांति प्राप्त होती है, जो शारीरिक स्वास्थ्य को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इससे व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त और स्वस्थ रहने में सहायता मिलती है। निष्कर्ष “ॐ जय महावीर प्रभु” आरती का नियमित पाठ जीवन में शांति, समृद्धि, और सद्भावना लाने में सहायक है। यह आरती महावीर स्वामी की शिक्षाओं और आदर्शों को जीवन में अपनाने का मार्गदर्शक है। इसके नियमित श्रवण से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सफलता, संयम, और संतोष का अनुभव होता है। Om Jai Mahavir Prabhu:आरती: ॐ जय महावीर प्रभु ॐ जय महावीर प्रभु,स्वामी जय महावीर प्रभु ।कुण्डलपुर अवतारी,चांदनपुर अवतारी,त्रिशलानंद विभु ॥ सिध्धारथ घर जन्मे,वैभव था भारी ।बाल ब्रह्मचारी व्रत,पाल्यो तप धारी ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ आतम ज्ञान विरागी,सम दृष्टि धारी ।माया मोह विनाशक,ज्ञान ज्योति जारी ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ जग में पाठ अहिंसा,आप ही विस्तारयो ।हिंसा पाप मिटा कर,सुधर्म परिचारियो ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ अमर चंद को सपना,तुमने परभू दीना ।मंदिर तीन शेखर का,निर्मित है कीना ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ जयपुर नृप भी तेरे,अतिशय के सेवी ।एक ग्राम तिन्ह दीनो,सेवा हित यह भी ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ जल में भिन्न कमल जो,घर में बाल यति ।राज पाठ सब त्यागे,ममता मोह हती ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ भूमंडल चांदनपुर,मंदिर मध्य लसे ।शांत जिनिश्वर मूरत,दर्शन पाप लसे ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ जो कोई तेरे दर पर,इच्छा कर आवे ।धन सुत्त सब कुछ पावे,संकट मिट जावे ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ निशदिन प्रभु मंदिर में,जगमग ज्योत जरे ।हम सेवक चरणों में,आनंद मूँद भरे ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ ॐ जय महावीर प्रभु,स्वामी जय महावीर प्रभु ।कुण्डलपुर अवतारी,चांदनपुर अवतारी,त्रिशलानंद विभु ॥

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Aarti Kunj Bihari Ki:आरती कुंजबिहारी की

Aarti Kunj Bihari:आरती कुंज बिहारी की: लाभ, महत्व, और फायदे “Aarti Kunj Bihariआरती कुंज बिहारी की” श्रीकृष्ण की एक प्रसिद्ध आरती है, जो भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण को व्यक्त करती है। इसके नियमित पाठ या श्रवण से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। आइए जानते हैं कि “आरती कुंज बिहारी की” का नियमित पाठ करने से क्या-क्या लाभ होते हैं और कैसे यह आरती हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। 1. आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति श्रीकृष्ण की Aarti Kunj Bihari आरती का पाठ आत्मा को शुद्ध करता है और व्यक्ति को भक्ति मार्ग पर अग्रसर करता है। यह आरती भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का गुणगान करती है, जो आत्मिक उन्नति और मोक्ष की ओर प्रेरित करती है। नियमित पाठ से आध्यात्मिक विकास होता है और भगवान की कृपा मिलती है। 2. मन की शांति और सकारात्मकता का अनुभव “आरती कुंज बिहारी की” के नियमित पाठ से मन को गहरी शांति मिलती है। यह आरती मन में सकारात्मकता का संचार करती है, नकारात्मकता और अशांति को दूर करती है। नियमित रूप से इसे सुनने या गाने से मन शांत, सकारात्मक और उत्साहित रहता है। 3. भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि इस आरती का पाठ भक्त के हृदय में भक्ति और श्रद्धा को बढ़ाता है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की भावना को जागृत करता है, जिससे जीवन में प्रेम, दया, और सहिष्णुता का संचार होता है। 4. तनाव और चिंता से मुक्ति आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में “आरती कुंज बिहारी की” का नियमित पाठ या श्रवण मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। इसके मंत्रमुग्ध कर देने वाले शब्द और संगीत मन को शांति प्रदान करते हैं, जिससे तनाव और चिंता से राहत मिलती है और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। 5. सकारात्मक ऊर्जा का संचार और नकारात्मकता से मुक्ति Aarti Kunj Bihari इस आरती का पाठ करते समय घर और मन दोनों में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। भगवान श्रीकृष्ण की महिमा गाते समय नकारात्मक ऊर्जाएं दूर हो जाती हैं, और घर का वातावरण शांतिपूर्ण और पवित्र होता है। इससे मन में उत्साह और ऊर्जा का संचार होता है। 6. भय, कष्ट और संकटों का नाश श्रीकृष्ण संकटों का नाश करने वाले देवता माने जाते हैं। “आरती कुंज बिहारी की” का नियमित रूप से पाठ करने से जीवन के सभी कष्ट और भय दूर होते हैं। यह आरती भौतिक समस्याओं और मानसिक संघर्षों से मुक्ति दिलाने में सहायक होती है। 7. मनोकामनाओं की पूर्ति सच्चे मन से “Aarti Kunj Bihari आरती कुंज बिहारी की” का पाठ करने से भगवान Aarti Kunj Bihari श्रीकृष्ण भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भक्ति और श्रद्धा से किए गए पाठ से भगवान की कृपा प्राप्त होती है, और भक्त की इच्छाएं पूरी होती हैं। 8. पारिवारिक सुख और समृद्धि में वृद्धि घर में नियमित रूप से इस आरती का पाठ करने से पारिवारिक सुख, समृद्धि और एकता में वृद्धि होती है। घर का वातावरण सकारात्मक और सुखदायी होता है, जिससे परिवार के सदस्यों में प्रेम और आपसी समझ बढ़ती है। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से परिवार में खुशहाली का वास होता है। 9. श्रीकृष्ण के आदर्शों का पालन “Aarti Kunj Bihari आरती कुंज बिहारी की” श्रीकृष्ण की लीला और उनके जीवन से जुड़ी शिक्षाओं का गुणगान करती है। इससे व्यक्ति को भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है। यह आरती हमें सत्य, धर्म, और न्याय के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। 10. आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि इस आरती के नियमित पाठ से आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। Aarti Kunj Bihari भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से व्यक्ति को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति और साहस मिलता है। आत्मविश्वास के साथ व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है। 11. मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार भगवान की आरती से मन शांत होता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। मानसिक शांति शरीर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे व्यक्ति तनावमुक्त और स्वस्थ महसूस करता है। इससे सकारात्मक जीवनशैली को अपनाने में मदद मिलती है। Aarti Kunj Bihari Ki:आरती कुंजबिहारी की आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गले में बैजंती माला,बजावै मुरली मधुर बाला ।श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला ।गगन सम अंग कांति काली,राधिका चमक रही आली ।लतन में ठाढ़े बनमालीभ्रमर सी अलक,कस्तूरी तिलक,चंद्र सी झलक,ललित छवि श्यामा प्यारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ कनकमय मोर मुकुट बिलसै,देवता दरसन को तरसैं ।गगन सों सुमन रासि बरसै ।बजे मुरचंग,मधुर मिरदंग,ग्वालिन संग,अतुल रति गोप कुमारी की,श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ जहां ते प्रकट भई गंगा,सकल मन हारिणि श्री गंगा ।स्मरन ते होत मोह भंगाबसी शिव सीस,जटा के बीच,हरै अघ कीच,चरन छवि श्रीबनवारी की,श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ चमकती उज्ज्वल तट रेनू,बज रही वृंदावन बेनू ।चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनूहंसत मृदु मंद,चांदनी चंद,कटत भव फंद,टेर सुन दीन दुखारी की,श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

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Maa Saraswati Ji:माँ सरस्वती जी – आरती 

Maa Saraswati Ji:माँ सरस्वती जी की आरती का विशेष महत्व है, क्योंकि वे विद्या, ज्ञान, कला और संगीत की देवी मानी जाती हैं। उनकी आराधना से बुद्धि, विवेक और ज्ञान की प्राप्ति होती है। विद्यार्थी, कलाकार, संगीतकार, और लेखक विशेष रूप से माँ सरस्वती की पूजा करते हैं ताकि उन्हें अपने कार्यों में सफलता और रचनात्मकता प्राप्त हो। Maa Saraswati Ji माँ सरस्वती की आरती विशेष रूप से वसंत पंचमी के दिन की जाती है, जिसे उनके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। Maa Saraswati Ji:माँ सरस्वती आरती के लाभ इस आरती का पाठ करने से माँ सरस्वती की कृपा से विद्या, कला और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सफलता और प्रगति का मार्ग खुलता है। Maa Saraswati Ji:माँ सरस्वती आरती की विधि माँ सरस्वती की आरती नियमित रूप से श्रद्धा भाव से करने से ज्ञान, विद्या और बुद्धि का विकास होता है, और व्यक्ति को अपने जीवन में सफलता प्राप्त होती है। Maa Saraswati Ji:माँ सरस्वती जी – आरती जय सरस्वती माता,मैया जय सरस्वती माता ।सदगुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्याता ॥जय जय सरस्वती माता…॥ चन्द्रवदनि पद्मासिनि,द्युति मंगलकारी ।सोहे शुभ हंस सवारी,अतुल तेजधारी ॥जय जय सरस्वती माता…॥ बाएं कर में वीणा,दाएं कर माला ।शीश मुकुट मणि सोहे,गल मोतियन माला ॥जय जय सरस्वती माता…॥ देवी शरण जो आए,उनका उद्धार किया ।पैठी मंथरा दासी,रावण संहार किया ॥जय जय सरस्वती माता…॥ विद्या ज्ञान प्रदायिनि,ज्ञान प्रकाश भरो ।मोह अज्ञान और तिमिर का,जग से नाश करो ॥जय जय सरस्वती माता…॥ धूप दीप फल मेवा,माँ स्वीकार करो ।ज्ञानचक्षु दे माता,जग निस्तार करो ॥॥ जय सरस्वती माता…॥ माँ सरस्वती की आरती,जो कोई जन गावे ।हितकारी सुखकारी,ज्ञान भक्ति पावे ॥जय जय सरस्वती माता…॥ जय सरस्वती माता,जय जय सरस्वती माता ।सदगुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्याता ॥

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Shri Kuber Aarti:श्री कुबेर आरती 

Shri Kuber Aarti:भारत के सबसे बड़े त्यौहार दीपावली का शुभ आरंभ धनतेरस से होता है, धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर एवं श्री गणेश की पूजा-आरती प्रमुखता से की जाती है। Shri Kuber Aarti:कुबेर आरती को लक्ष्मी पूजन और धन प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कुबेर देवता धन, संपत्ति और ऐश्वर्य के देवता हैं और उनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और आर्थिक उन्नति आती है।Shri Kuber Aarti कुबेर भगवान की आरती विशेष रूप से दीपावली, धनतेरस और अन्य शुभ अवसरों पर की जाती है। कुबेर आरती के लाभ Shri Kuber Aarti:कुबेर आरती का पाठ यहाँ कुबेर देव की आरती का सरल पाठ दिया गया है: जय कुबेर महाराज, जय कुबेर महाराज।धन धान्य के तुम हो साज, जय कुबेर महाराज।। जय धनेश्वर महिमा न्यारी, सब धन तुमसे पाता है।जो भी ध्यान लगाए तेरा, तुम उसकी नैया पार लगाए।। अमूल्य भंडार है तेरा, अन्नपूर्णा तुमसे भरती।सब दुखहारी देवा तुम्ही, सबके मन की आस पुरी।। जय कुबेर महाराज, जय कुबेर महाराज।धन धान्य के तुम हो साज, जय कुबेर महाराज।। इस आरती का नियमित रूप से और श्रद्धा भाव से पाठ करने से व्यक्ति को कुबेर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है, और उसके घर में धन, सुख और समृद्धि का वास होता है। Shri Kuber Aarti:कुबेर आरती की विधि इस आरती से आपके जीवन में कुबेर देव की कृपा से आर्थिक प्रगति होगी। Shri Kuber Aarti:श्री कुबेर आरती ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे,स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे ।शरण पड़े भगतों के,भण्डार कुबेर भरे ।॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,स्वामी भक्त कुबेर बड़े ।दैत्य दानव मानव से,कई-कई युद्ध लड़े ॥॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ स्वर्ण सिंहासन बैठे,सिर पर छत्र फिरे,स्वामी सिर पर छत्र फिरे ।योगिनी मंगल गावैं,सब जय जय कार करैं ॥॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ गदा त्रिशूल हाथ में,शस्त्र बहुत धरे,स्वामी शस्त्र बहुत धरे ।दुख भय संकट मोचन,धनुष टंकार करें ॥॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,स्वामी व्यंजन बहुत बने ।मोहन भोग लगावैं,साथ में उड़द चने ॥॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ बल बुद्धि विद्या दाता,हम तेरी शरण पड़े,स्वामी हम तेरी शरण पड़े ।अपने भक्त जनों के,सारे काम संवारे ॥॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ मुकुट मणी की शोभा,मोतियन हार गले,स्वामी मोतियन हार गले ।अगर कपूर की बाती,घी की जोत जले ॥॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ यक्ष कुबेर जी की आरती,जो कोई नर गावे,स्वामी जो कोई नर गावे ।कहत प्रेमपाल स्वामी,मनवांछित फल पावे ॥॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

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Laxmi Mata Aarti:लक्ष्मीजी आरती

Laxmi Mata Aart:लक्ष्मीजी की आरती का महत्त्व और उसके लाभ विभिन्न समयों पर अलग-अलग होते हैं। Laxmi Mata Aarti इसे करने के सही समय और गलत समय का ध्यान रखना ज़रूरी है ताकि आरती का पूरा लाभ मिल सके और कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। यहाँ कुछ मुख्य जानकारी दी जा रही है: Laxmi Mata Aart:लाभ के लिए कब करें लक्ष्मीजी की आरती कब न करें लक्ष्मीजी की आरती: संक्षेप में: लक्ष्मीजी की आरती करने का समय संध्या का और शुक्रवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। Laxmi Mata Aarti विशेष अवसरों पर या शुभ मुहूर्त में आरती करने से लक्ष्मीजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। लेकिन राहुकाल, ग्रहणकाल, या नकारात्मक मनोदशा में आरती करने से बचें।

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Vishwakarma Aarti(विश्वकर्मा आरती)

Vishwakarma Aarti:विश्वकर्मा आरती का पाठ भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो निर्माण, तकनीकी, या कला से जुड़े होते हैं। विश्वकर्मा जी को भगवान का रूप माना जाता है जो सृष्टि के विभिन्न निर्माणों के देवता हैं। यहां विश्वकर्मा आरती के फायदे और उसे कब करना चाहिए, के बारे में जानकारी दी गई है: Vishwakarma Aarti:विश्वकर्मा आरती के फायदे: Vishwakarma Aarti:कब करें विश्वकर्मा आरती: आरती का पाठ: आरती का पाठ करते समय एक स्वच्छ स्थान पर भगवान Vishwakarma Aarti विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीप जलाना चाहिए और ध्यानपूर्वक आरती करनी चाहिए। इसे परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर करना और प्रसाद वितरण करना भी शुभ माना जाता है। इन बातों का ध्यान रखकर, आप विश्वकर्मा आरती का सही ढंग से लाभ उठा सकते हैं। Vishwakarma Aarti(विश्वकर्मा आरती) जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा ।सकल सृष्टि के करता,रक्षक स्तुति धर्मा ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । आदि सृष्टि मे विधि को,श्रुति उपदेश दिया ।जीव मात्र का जग में,ज्ञान विकास किया ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । ऋषि अंगीरा तप से,शांति नहीं पाई ।ध्यान किया जब प्रभु का,सकल सिद्धि आई ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । रोग ग्रस्त राजा ने,जब आश्रय लीना ।संकट मोचन बनकर,दूर दुःखा कीना ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । जब रथकार दंपति,तुम्हारी टेर करी ।सुनकर दीन प्रार्थना,विपत सगरी हरी ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । एकानन चतुरानन,पंचानन राजे।त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,सकल रूप साजे ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । ध्यान धरे तब पद का,सकल सिद्धि आवे ।मन द्विविधा मिट जावे,अटल शक्ति पावे ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । श्री विश्वकर्मा की आरती,जो कोई गावे ।भजत गजानांद स्वामी,सुख संपति पावे ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा ।सकल सृष्टि के करता,रक्षक स्तुति धर्मा ॥

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Tulsi Aarti – Maharani Namo Namo:(तुलसी आरती – महारानी नमो-नमो)

Tulsi Aarti:तुलसी आरती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, और इसके कई फायदे भी होते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख फायदे दिए गए हैं: इन सबके अलावा, तुलसी की आरती करने से भक्ति का भाव भी गहरा होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में संतोष और खुशी बनी रहती है। Tulsi Aarti – Maharani Namo Namo:(तुलसी आरती – महारानी नमो-नमो) Tulsi Aarti:माँ तुलसी पूजन, तुलसी विवाह एवं कार्तिक माह में माँ तुलसी की आरती सबसे अधिक श्रवण की जाती है। तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । धन तुलसी पूरण तप कीनो,शालिग्राम बनी पटरानी ।जाके पत्र मंजरी कोमल,श्रीपति कमल चरण लपटानी ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । धूप-दीप-नवैद्य आरती,पुष्पन की वर्षा बरसानी ।छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,बिन तुलसी हरि एक ना मानी ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । सभी सखी मैया तेरो यश गावें,भक्तिदान दीजै महारानी ।नमो-नमो तुलसी महारानी,तुलसी महारानी नमो-नमो ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो ।

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Shiv aarti lyrics:शिव आरती – ॐ जय शिव ओंकारा (Shiv Aarti – Om Jai Shiv Omkara)

shiv aarti lyrics ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ एकानन चतुराननपंचानन राजे ।हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे ।त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ अक्षमाला वनमाला,मुण्डमाला धारी ।चंदन मृगमद सोहै,भाले शशिधारी ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे ।सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ कर के मध्य कमंडलचक्र त्रिशूलधारी ।सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका ।प्रणवाक्षर में शोभितये तीनों एका ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरतिजो कोइ नर गावे ।कहत शिवानंद स्वामीसुख संपति पावे ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ Shiv aarti lyrics shiv aarti lyrics english Om Jai Shiv Omkara Har Jai Shiv OmKara।Brahma Vishnu Sadashiv Ardhaangi Dhaara॥ Ekanan Chaturanan Panchanan Raajey।Hansanan Garurasan Vrishvaahan Saajey॥ Do Bhuj Chaar Chaturbhuj Das Bhuj Te Sohey।Teeno Roop Nirakhta Tribhuvan Jan Mohey॥ Akshmala Banmala Mundmala Dhaari।Chandan Mrigmad Sohay Bholay Shubhkari॥ Shwetambar Pitambar Baagambar Angey।Sankadik Brahmadik Bhutadik Sangey॥ Karkey Madhya Kamandal Chakra Trishul Dharta।Jagkarta Jagbharta Jagsanhaarkarta॥ Brahma Vishnu Sada Shiv Jaanat Aviveka।Pranvaakshar Madhye Ye Teeno Eka॥ Trigun Shivji Ki Aarti Jo Koi Nar Gaavey।Kahat Shivanand Swami Manvaanchit Phal Paavey॥ Om Jai Shiv Omkara Har Jai Shiv OmKara।Brahma Vishnu Sadashiv Ardhaangi Dhaara॥ श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti)

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श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti)

Ganesh Aarti जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत,चार भुजा धारी ।माथे सिंदूर सोहे,मूसे की सवारी ॥ जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ पान चढ़े फल चढ़े,और चढ़े मेवा ।लड्डुअन का भोग लगे,संत करें सेवा ॥ जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ अंधन को आंख देत,कोढ़िन को काया ।बांझन को पुत्र देत,निर्धन को माया ॥ जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ ‘सूर’ श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ Ek Dant Daya Want,Char Bhuuja Dhari ।Mathe Sindor Shoye,Muse Ki Sawari ॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ Pan Chadhe Phool Chadhe,Aur Chadhe Mewa ।Laduan Ko Bhog Lage,Sant Kare Sewa ॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ Andhan Ko Aankh Det,Kodhin Ko Kaya ।Bajhan Ko Purta Det,Nirdhan Ko Maya॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ ‘sur’ Shaam Sharan Aaye,Safal Ki Jiye Sewa ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ हनुमान आरती (Hanuman Aarti)

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हनुमान आरती (Hanuman Aarti)

Hanuman Aarti ॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥ ॥ आरती ॥आरती कीजै हनुमान लला की ।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरवर काँपे ।रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥अंजनि पुत्र महा बलदाई ।संतन के प्रभु सदा सहाई ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ दे वीरा रघुनाथ पठाए ।लंका जारि सिया सुधि लाये ॥लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।जात पवनसुत बार न लाई ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ लंका जारि असुर संहारे ।सियाराम जी के काज सँवारे ॥लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।लाये संजिवन प्राण उबारे ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ पैठि पताल तोरि जमकारे ।अहिरावण की भुजा उखारे ॥बाईं भुजा असुर दल मारे ।दाहिने भुजा संतजन तारे ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।जय जय जय हनुमान उचारें ॥कंचन थार कपूर लौ छाई ।आरती करत अंजना माई ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ जो हनुमानजी की आरती गावे ।बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥लंक विध्वंस किये रघुराई ।तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥ आरती कीजै हनुमान लला की ।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥॥ इति संपूर्णंम् ॥ आरती श्री वृषभानुसुता – राधा आरती (Radha Aarti: Aarti Shri Vrashbhanusuta Ki)

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