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Shri Jhulelal Arti:श्री झूलेलाल आरती

श्री Jhulelal Arti झूलेलाल जी की आरती के लाभ (Benefits of Performing Shri Jhulelal Aarti) Jhulelal Arti श्री झूलेलाल जी को जल देवता के रूप में पूजा जाता है, खासकर सिंधी समुदाय में। वे सिंधियों के रक्षक देवता माने जाते हैं, जिन्हें वरुण देवता (जल के देवता) का अवतार भी माना जाता है। श्री झूलेलाल की आरती करने से भक्तों को कई आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह आरती समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है, जो हर भक्त को शांति, सुरक्षा, और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती है। आइए जानते हैं श्री झूलेलाल जी की आरती के प्रमुख लाभों के बारे में: 1. संकटों से मुक्ति और सुरक्षा (Relief from Difficulties and Protection) श्री झूलेलाल जी की आरती करने से व्यक्ति को संकटों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है। जल देवता के रूप में, वे अपने भक्तों की हर प्रकार की कठिनाइयों से रक्षा करते हैं। यह आरती जल में या जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक मानी जाती है। 2. धैर्य और विश्वास की वृद्धि (Enhancement of Patience and Faith) झूलेलाल Jhulelal Arti जी की आरती व्यक्ति में धैर्य और विश्वास को बढ़ाती है। जब व्यक्ति किसी प्रकार के मानसिक या भावनात्मक संघर्ष से गुजरता है, तो यह आरती उसे शांति और संतुलन प्रदान करती है। यह भक्त को अपने विश्वास को मजबूत करने और हर स्थिति में धैर्य बनाए रखने में मदद करती है। 3. समृद्धि और वित्तीय स्थिरता (Prosperity and Financial Stability) श्री झूलेलाल जी की आरती से आर्थिक उन्नति और वित्तीय स्थिरता प्राप्त होती है। Jhulelal Arti जो लोग अपने व्यापार, नौकरी या आर्थिक स्थिति में सुधार चाहते हैं, उन्हें झूलेलाल जी की आरती नियमित रूप से करनी चाहिए। उनके आशीर्वाद से व्यापार में उन्नति होती है और धन का आगमन बना रहता है। 4. पारिवारिक सुख और शांति (Family Harmony and Peace) श्री झूलेलाल जी की आरती घर में सुख-शांति और सौहार्द का वातावरण बनाती है। Jhulelal Arti परिवार के सदस्य झूलेलाल जी की आरती करें, तो उनके बीच आपसी प्रेम, सहयोग, और समझ में वृद्धि होती है। यह आरती परिवार के कलह और विवादों को शांत करने में सहायक होती है। 5. रोगों से मुक्ति (Health Benefits) झूलेलाल जी को जल देवता माना जाता है, और जल से संबंधित आराधना करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं। यह आरती करने से शरीर की ऊर्जा में सुधार होता है और रोगों से मुक्ति मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि झूलेलाल जी की कृपा से जल-जनित बीमारियों से भी सुरक्षा मिलती है। 6. आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति (Spiritual Growth and Mental Peace) श्री झूलेलाल Jhulelal Arti जी की आरती करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह आरती मन को स्थिर और शांत करती है, जिससे व्यक्ति को अपने जीवन के उद्देश्य का बोध होता है। झूलेलाल जी की आराधना से आत्मा में शांति और पवित्रता का संचार होता है, जो आध्यात्मिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। 7. समुद्री यात्राओं में सुरक्षा (Protection in Sea Travel) चूंकि श्री Jhulelal Arti झूलेलाल जी को जल का देवता माना जाता है, इसलिए जो लोग समुद्री यात्रा या जल-सम्बन्धी कार्यों से जुड़े हैं, उनके लिए यह आरती विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। यह आरती समुद्र और जल के देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक माध्यम है, जो समुद्री यात्राओं में सुरक्षा प्रदान करता है। आरती करने का समय और विधि (Ideal Time and Method for Performing Jhulelal Aarti) निष्कर्ष Jhulelal Arti श्री झूलेलाल जी की आरती नियमित रूप से करने से व्यक्ति के जीवन में हर प्रकार की समस्या, दुख, और चिंता का अंत होता है। यह आरती न केवल मानसिक शांति प्रदान करती है, बल्कि आर्थिक, शारीरिक और पारिवारिक समस्याओं का समाधान भी करती है। झूलेलाल जी की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। Shri Jhulelal Arti:श्री झूलेलाल आरती चेटी चंड जैसे त्यौहारों तथा सिंधी समाज के अन्य कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा गाई जाने वाली आरती। भगवान झूलेलाल के प्रत्येक मंदिर में यह आरती सुवह-शाम अवश्य गायी जाती है। भगवान झूलेलाल को लाल साई, उदेरो लाल, वरुण देव, दूलह लाल, दरिया लाल और जिंदा पीर भी कहा जाता है। ॐ जय दूलह देवा,साईं जय दूलह देवा ।पूजा कनि था प्रेमी,सिदुक रखी सेवा ॥ तुहिंजे दर दे केई,सजण अचनि सवाली ।दान वठन सभु दिलि,सां कोन दिठुभ खाली ॥॥ ॐ जय दूलह देवा…॥ अंधड़नि खे दिनव,अखडियूँ – दुखियनि खे दारुं ।पाए मन जूं मुरादूं,सेवक कनि थारू ॥॥ ॐ जय दूलह देवा…॥ फल फूलमेवा सब्जिऊ,पोखनि मंझि पचिन ।तुहिजे महिर मयासा अन्न,बि आपर अपार थियनी ॥॥ ॐ जय दूलह देवा…॥ ज्योति जगे थी जगु में,लाल तुहिंजी लाली ।अमरलाल अचु मूं वटी,हे विश्व संदा वाली ॥॥ ॐ जय दूलह देवा…॥ जगु जा जीव सभेई,पाणिअ बिन प्यास ।जेठानंद आनंद कर,पूरन करियो आशा ॥ ॐ जय दूलह देवा,साईं जय दूलह देवा ।पूजा कनि था प्रेमी,सिदुक रखी सेवा ॥

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Shri Surya Dev Arti :श्री सूर्य देव आरती 

Surya Dev Arti:श्री सूर्य देव की आरती के लाभ (Benefits of Performing Shri Surya Dev Aarti) Surya Dev Arti:शास्त्रों के अनुसार, श्री सूर्य देव की आरती करने से कई अद्भुत लाभ प्राप्त होते हैं। सूर्य देव, जिन्हें “सकल जगत के पिता” के रूप में जाना जाता है, प्रकाश, ऊर्जा और शक्ति के स्रोत हैं। हर सुबह उनके आराधना से व्यक्ति को शारीरिक, Surya Dev Arti मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं श्री सूर्य देव की आरती के प्रमुख लाभों के बारे में: 1. स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits) Surya Dev Arti:श्री सूर्य देव की आरती करने से शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। सूर्य की किरणों में मौजूद ऊर्जा से शरीर को विटामिन डी मिलता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। माना जाता है कि सूर्य देव की कृपा से रोग और बीमारियों से मुक्ति मिलती है। यह आरती करने से आंखों की रोशनी, पाचन तंत्र और संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार होता है। 2. मानसिक शांति और सकारात्मकता (Mental Peace and Positivity) सूर्य देव की आरती से मन को शांति और संतोष मिलता है। Surya Dev Arti हर सुबह आरती करने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मकता का संचार होता है, और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। सूर्य देव के प्रकाश से मन में उमंग और जोश का संचार होता है, जो जीवन में आने वाली हर समस्या का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है। 3. आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि (Boosts Confidence and Courage) सूर्य देव को साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। उनकी आरती करने से व्यक्ति में आत्मबल और धैर्य बढ़ता है। यह आरती विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो जीवन में किसी प्रकार की असुरक्षा या अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। सूर्य देव की कृपा से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, जिससे व्यक्ति सफलता की ओर बढ़ता है। 4. वित्तीय समृद्धि और धन लाभ (Financial Prosperity and Wealth Gain) सूर्य देव की आराधना और आरती से वित्तीय समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। ऐसा माना जाता है कि Surya Dev Arti सूर्य देव की कृपा से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और व्यक्ति को धन लाभ के अवसर प्राप्त होते हैं। यह आरती व्यापारियों, नौकरीपेशा और व्यवसायिक लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। 5. करियर और शिक्षा में प्रगति (Progress in Career and Education) सूर्य देव Surya Dev Arti की आरती करने से करियर और शिक्षा में उन्नति होती है। विद्यार्थी जो परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें सूर्य देव की आरती और पूजा से विशेष लाभ मिल सकता है। नौकरी और व्यवसाय में उन्नति के लिए भी सूर्य देव का आशीर्वाद अत्यंत फलदायी होता है। 6. पारिवारिक शांति और सौहार्द (Family Harmony and Peace) सूर्य देव की आरती से परिवार में शांति और सौहार्द बना रहता है। यह आरती घर के वातावरण को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और समझ बढ़ती है। सूर्य देव की आरती करने से घर में खुशहाली बनी रहती है और कलह व विवाद समाप्त होते हैं। 7. आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth) सूर्य देव Surya Dev Arti की आरती करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह आरती मन को स्थिर करती है और व्यक्ति को अपने आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। सूर्य देव का पूजन आत्मा को ऊर्जावान और पवित्र बनाता है, जिससे व्यक्ति का जुड़ाव ईश्वर के साथ गहरा होता है। आरती का समय और विधि (Ideal Time and Method for Performing Aarti) निष्कर्ष Surya Dev Arti:श्री सूर्य देव की आरती नियमित रूप से करने से व्यक्ति का जीवन स्वास्थ्य, समृद्धि, और सुख-शांति से भर जाता है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार लाता है, बल्कि मानसिक शांति, आत्मविश्वास, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। Shri Surya Dev Arti :श्री सूर्य देव आरती  ऊँ जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥॥ ऊँ जय कश्यप…॥ सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥॥ ऊँ जय कश्यप…॥ सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥॥ ऊँ जय कश्यप…॥ सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥॥ ऊँ जय कश्यप…॥ कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥॥ ऊँ जय कश्यप…॥ नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥॥ ऊँ जय कश्यप…॥ सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ ऊँ जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥

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Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती

Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी की आरती करने से कई प्रकार के आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं। शाकुम्भरी देवी को माँ दुर्गा का एक रूप माना जाता है, Shakumbhari Devi Ki Aarti जो अपने भक्तों को सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। उनकी आरती करने के लाभ इस प्रकार हैं: Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी की आरती से व्यक्ति को आंतरिक शक्ति, आत्मिक शांति, और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, जिससे उसका जीवन संतुलित और सकारात्मक रहता है। Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती हरि ओम श्री शाकुम्भरी अंबा जी की आरती क़ीजोएसी अद्वभुत रूप हृदय धर लीजोशताक्षी दयालू की आरती किजो तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,सब घट तुम आप भखनी माँशकुंभारी अंबा जी की आरती किजो तुम्ही हो शाकुम्भर,तुम ही हो सताक्षी माँशिवमूर्ति माया प्रकाशी माँशाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो नित जो नर नारी अंबे आरती गावे माँइच्छा पूरण किजो,शाकुम्भर दर्शन पावे माँशाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो जो नर आरती पढ़े पढ़ावे माँ,जो नर आरती सुनावे माँबस बैकुण्ठ शाकुम्भर दर्शन पावेशाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

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Shri Lalita Mata Ki Aarti:श्री ललिता माता की आरती 

Lalita Mata Ki Aarti:श्री ललिता माता की आरती करने के कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ होते हैं। Lalita Mata Ki Aarti यह भक्तों के जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने में सहायक होती है। श्री ललिता माता की आरती करने के लाभ इस प्रकार हैं: Lalita Mata Ki Aarti:श्री ललिता माता की आरती से भक्तों को मनोकामना पूर्ति और सकारात्मक जीवन का Lalita Mata Ki Aarti आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो उन्हें आध्यात्मिक और भौतिक जीवन में सफलता दिलाता है। Shri Lalita Mata Ki Aarti:श्री ललिता माता की आरती  श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ।राजेश्वरी जय नमो नमः ॥ करुणामयी सकल अघ हारिणी ।अमृत वर्षिणी नमो नमः ॥ जय शरणं वरणं नमो नमः ।श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ॥ अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी ।खल-दल नाशिनी नमो नमः ॥ भण्डासुर वधकारिणी जय माँ ।करुणा कलिते नमो नम: ॥ जय शरणं वरणं नमो नमः ।श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ॥ भव भय हारिणी, कष्ट निवारिणी ।शरण गति दो नमो नमः ॥ शिव भामिनी साधक मन हारिणी ।आदि शक्ति जय नमो नमः ॥ जय शरणं वरणं नमो नमः ।जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः ॥ श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ।राजेश्वरी जय नमो नमः ॥

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Dharmraj Ki Aarti:धर्मराज आरती – ॐ जय धर्म धुरन्धर

Dharmraj Ki Aarti:धर्मराज की आरती करने के अनेक आध्यात्मिक लाभ होते हैं। Dharmraj Ki Aarti यह व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और संतोष लाने में सहायक होती है। इसके लाभ इस प्रकार हैं: धर्मराज की आरती व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से जागरूक बनाकर उसे जीवन में सही मार्ग पर चलने में मदद करती है, जिससे उसका जीवन सफल और आनंदमय बनता है। Dharmraj Ki Aarti:धर्मराज आरती – ॐ जय धर्म धुरन्ध ॐ जय जय धर्म धुरन्धर,जय लोकत्राता ।धर्मराज प्रभु तुम ही,हो हरिहर धाता ॥ जय देव दण्ड पाणिधर यम तुम,पापी जन कारण ।सुकृति हेतु हो पर तुम,वैतरणी ताराण ॥2॥ न्याय विभाग अध्यक्ष हो,नीयत स्वामी ।पाप पुण्य के ज्ञाता,तुम अन्तर्यामी ॥3॥ दिव्य दृष्टि से सबके,पाप पुण्य लखते ।चित्रगुप्त द्वारा तुम,लेखा सब रखते ॥4॥ छात्र पात्र वस्त्रान्न क्षिति,शय्याबानी ।तब कृपया, पाते हैं,सम्पत्ति मनमानी ॥5॥ द्विज, कन्या, तुलसी,का करवाते परिणय ।वंशवृद्धि तुम उनकी,करते नि:संशय ॥6॥ दानोद्यापन-याजन,तुष्ट दयासिन्धु ।मृत्यु अनन्तर तुम ही,हो केवल बन्धु ॥7॥ धर्मराज प्रभु,अब तुम दया ह्रदय धारो ।जगत सिन्धु से स्वामिन,सेवक को तारो ॥8॥ धर्मराज जी की आरती,जो कोई नर गावे ।धरणी पर सुख पाके,मनवांछित फल पावे ॥9॥

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Dharmraj Ki Aarti धर्मराज आरती – धर्मराज कर सिद्ध काज

Dharmraj Ki Aarti:धर्मराज की आरती करने के कई लाभ होते हैं, जो भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने में सहायक माने जाते हैं। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं: धर्मराज की आरती नियमित रूप से करने से व्यक्ति का मनोबल, आत्मविश्वास, और आंतरिक शांति प्राप्त होती है, जो उसके जीवन को समृद्ध और सफल बनाता है। Dharmraj Ki Aarti धर्मराज आरती – धर्मराज कर सिद्ध काज धर्मराज कर सिद्ध काज,प्रभु मैं शरणागत हूँ तेरी ।पड़ी नाव मझदार भंवर में,पार करो, न करो देरी ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥ धर्मलोक के तुम स्वामी,श्री यमराज कहलाते हो ।जों जों प्राणी कर्म करत हैं,तुम सब लिखते जाते हो ॥ अंत समय में सब ही को,तुम दूत भेज बुलाते हो ।पाप पुण्य का सारा लेखा,उनको बांच सुनते हो ॥ भुगताते हो प्राणिन को तुम,लख चौरासी की फेरी ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥ चित्रगुप्त हैं लेखक तुम्हारे,फुर्ती से लिखने वाले ।अलग अगल से सब जीवों का,लेखा जोखा लेने वाले ॥ पापी जन को पकड़ बुलाते,नरको में ढाने वाले ।बुरे काम करने वालो को,खूब सजा देने वाले ॥ कोई नही बच पाता न,याय निति ऐसी तेरी ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥ दूत भयंकर तेरे स्वामी,बड़े बड़े दर जाते हैं ।पापी जन तो जिन्हें देखते ही,भय से थर्राते हैं ॥ बांध गले में रस्सी वे,पापी जन को ले जाते हैं ।चाबुक मार लाते,जरा रहम नहीं मन में लाते हैं ॥ नरक कुंड भुगताते उनको,नहीं मिलती जिसमें सेरी ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥ धर्मी जन को धर्मराज,तुम खुद ही लेने आते हो ।सादर ले जाकर उनको तुम,स्वर्ग धाम पहुचाते हो । जों जन पाप कपट से डरकर,तेरी भक्ति करते हैं ।नर्क यातना कभी ना करते,भवसागर तरते हैं ॥ कपिल मोहन पर कृपा करिये,जपता हूँ तेरी माला ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥

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Shri Chitragupt Aarti:श्री चित्रगुप्त जी की आरती

Chitragupt Aarti:श्री चित्रगुप्त जी की आरती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो अपने कर्मों का मूल्यांकन और सुधार करना चाहते हैं। Chitragupt Aarti चित्रगुप्त जी को कर्मों के लेखा-जोखा के देवता माना जाता है, जो यमराज के साथ प्रत्येक व्यक्ति के कर्मों का हिसाब रखते हैं। उनकी आरती से जीवन में ईमानदारी, सत्कर्म, और धार्मिकता का विकास होता है। Chitragupt Aarti:श्री चित्रगुप्त जी की आरती के लाभ श्री Chitragupt Aarti चित्रगुप्त जी की आरती करते समय मन को एकाग्र और कर्मों के प्रति जागरूक बनाना चाहिए। उनकी आरती से भक्त को अपने कर्मों का सही मूल्यांकन करने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। Shri Chitragupt Aarti:श्री चित्रगुप्त जी की आरती श्री विरंचि कुलभूषण,यमपुर के धामी ।पुण्य पाप के लेखक,चित्रगुप्त स्वामी ॥ सीस मुकुट, कानों में कुण्डल,अति सोहे ।श्यामवर्ण शशि सा मुख,सबके मन मोहे ॥ भाल तिलक से भूषित,लोचन सुविशाला ।शंख सरीखी गरदन,गले में मणिमाला ॥ अर्ध शरीर जनेऊ,लंबी भुजा छाजै ।कमल दवात हाथ में,पादुक परा भ्राजे ॥ नृप सौदास अनर्थी,था अति बलवाला ।आपकी कृपा द्वारा,सुरपुर पग धारा ॥ भक्ति भाव से यह,आरती जो कोई गावे ।मनवांछित फल पाकर,सद्गति पावे ॥

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Aarti Shri Bhagwat Geeta Aarti:भगवद्‍ गीता आरती

Bhagwat Geeta Aarti:भगवद् गीता की आरती का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। गीता का संदेश जीवन के वास्तविक उद्देश्यों, कर्तव्यों, और आत्मज्ञान को समझने में सहायक होता है। गीता की आरती करने से Bhagwat Geeta Aarti भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है, जो जीवन में धैर्य, शांति, और आध्यात्मिक ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करती है। श्रीकृष्ण ने भगवद्‍ गीता में अर्जुन को जो उपदेश दिए थे, वे आज भी हर व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक हैं और जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शक हैं। Bhagwat Geeta Aarti:भगवद्‍ गीता आरती के लाभ Bhagwat Geeta Aarti:भगवद्‍ गीता आरती की विधि भगवद्‍ गीता की आरती से मन, बुद्धि और आत्मा को दिव्य आनंद की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति को अपने जीवन के धर्म और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती है और उसे जीवन में सफलता, शांति और संतोष का अनुभव कराती है। Aarti Shri Bhagwat Geeta Aarti:भगवद्‍ गीता आरती जय भगवद् गीते,जय भगवद् गीते ।हरि-हिय-कमल-विहारिणि,सुन्दर सुपुनीते ॥ कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,कामासक्तिहरा ।तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,विद्या ब्रह्म परा ॥जय भगवद् गीते…॥ निश्चल-भक्ति-विधायिनि,निर्मल मलहारी ।शरण-सहस्य-प्रदायिनि,सब विधि सुखकारी ॥जय भगवद् गीते…॥ राग-द्वेष-विदारिणि,कारिणि मोद सदा ।भव-भय-हारिणि,तारिणि परमानन्दप्रदा ॥जय भगवद् गीते…॥ आसुर-भाव-विनाशिनि,नाशिनि तम रजनी ।दैवी सद् गुणदायिनि,हरि-रसिका सजनी ॥जय भगवद् गीते…॥ समता, त्याग सिखावनि,हरि-मुख की बानी ।सकल शास्त्र की स्वामिनी,श्रुतियों की रानी ॥जय भगवद् गीते…॥ दया-सुधा बरसावनि,मातु! कृपा कीजै ।हरिपद-प्रेम दान कर,अपनो कर लीजै ॥जय भगवद् गीते…॥ जय भगवद् गीते,जय भगवद् गीते ।हरि-हिय-कमल-विहारिणि,सुन्दर सुपुनीते ॥

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Shri Badrinath Aarti:श्री बद्रीनाथजी की आरती

Shri Badrinath Aarti:श्री बद्रीनाथजी की आरती भगवान विष्णु के एक रूप बद्रीनारायण की स्तुति में गाई जाती है। बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड के चारधामों में से एक है और यह विशेष रूप से वैष्णव भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। Shri Badrinath Aarti यहाँ बद्रीनाथजी की आरती करने से मन की शांति, समृद्धि, और धर्म में रुचि का विकास होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बद्रीनाथजी की आराधना करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। Shri Badrinath Aarti:श्री बद्रीनाथजी की आरती के लाभ इस आरती का श्रद्धा और भक्ति भाव से पाठ करने से बद्रीनाथ भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है, Shri Badrinath Aarti जिससे भक्त को सभी सुख, शांति, और समृद्धि मिलती है। श्री बद्रीनाथजी की आरती की विधि बद्रीनाथजी की आरती करने से व्यक्ति की धार्मिकता में वृद्धि होती है और उसके जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति का वास होता है। Shri Badrinath Aarti:श्री बद्रीनाथजी की आरती पवन मंद सुगंध शीतल,हेम मंदिर शोभितम् ।निकट गंगा बहत निर्मल,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥ शेष सुमिरन करत निशदिन,धरत ध्यान महेश्वरम् ।वेद ब्रह्मा करत स्तुति,श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ शक्ति गौरी गणेश शारद,नारद मुनि उच्चारणम् ।जोग ध्यान अपार लीला,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर,धूप दीप प्रकाशितम् ।सिद्ध मुनिजन करत जय जय,बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ यक्ष किन्नर करत कौतुक,ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम् ।श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ कैलाश में एक देव निरंजन,शैल शिखर महेश्वरम् ।राजयुधिष्ठिर करत स्तुति,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ श्री बद्रजी के पंच रत्न,पढ्त पाप विनाशनम् ।कोटि तीर्थ भवेत पुण्य,प्राप्यते फलदायकम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ पवन मंद सुगंध शीतल,हेम मंदिर शोभितम् ।निकट गंगा बहत निर्मल,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥

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Maa Kali arti:आरती: माँ महाकाली 

Maa Kali arti:माँ महाकाली की आरती का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। माँ काली को शक्ति, साहस, और रक्षक देवी माना जाता है। वे विनाश और पुनः सृजन की देवी हैं, जो भक्तों को निडरता, आत्मबल, और संकटों से मुक्ति प्रदान करती हैं। उनकी आरती करने से जीवन में नकारात्मकता का नाश होता है और भक्त में शक्ति और साहस का संचार होता है। Maa Kali arti माँ काली की आराधना से भक्त को हर प्रकार के भय और कष्टों से मुक्ति मिलती है। Maa Kali arti:माँ महाकाली की आरती के लाभ इस आरती का नियमित रूप से श्रद्धा और भावपूर्वक पाठ करने से माँ काली की कृपा से जीवन में सुख, शांति, और सुरक्षा का अनुभव होता है। Maa Kali arti:माँ महाकाली की आरती की विधि Maa Kali arti माँ महाकाली की आरती से भक्तों का मन और आत्मा शुद्ध होती है, और माँ काली के आशीर्वाद से जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा प्राप्त होती है। Aarti: Maa Maha Kali:आरती: माँ महाकाली  जय काली माता, माँ जय महा काली माँ।रतबीजा वध कारिणी माता।सुरनर मुनि ध्याता, माँ जय महा काली माँ॥ दक्ष यज्ञ विदवंस करनी माँ शुभ निशूंभ हरलि।मधु और कैितभा नासिनी माता।महेशासुर मारदिनी, ओ माता जय महा काली माँ॥ हे हीमा गिरिकी नंदिनी प्रकृति रचा इत्ठि।काल विनासिनी काली माता।सुरंजना सूख दात्री हे माता॥ अननधम वस्तराँ दायनी माता आदि शक्ति अंबे।कनकाना कना निवासिनी माता।भगवती जगदंबे, ओ माता जय महा काली माँ॥ दक्षिणा काली आध्या काली, काली नामा रूपा।तीनो लोक विचारिती माता धर्मा मोक्ष रूपा॥ ॥ जय महा काली माँ ॥

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Arti Bhagwan Shri Sheetalnath Ji:आरती: भगवान श्री शीतलनाथ जी

Arti Bhagwan Shri Sheetalnath:भगवान श्री शीतलनाथ जी की आरती का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। शीतलनाथ जी, जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर, भक्तों के लिए करुणा, शांतिप्रद मार्ग, और कल्याणकारी भावना के प्रतीक हैं। उनकी आरती से मानसिक शांति, शीतलता, और रोगों से मुक्ति मिलती है। विशेषतौर पर Arti Bhagwan Shri Sheetalnath शीतलनाथ जी की आरती करने से शांति और संयम का विकास होता है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है। Arti Bhagwan Shri Sheetalnath:भगवान श्री शीतलनाथ जी की आरती के लाभ Arti Bhagwan Shri Sheetalnath:भगवान श्री शीतलनाथ जी की आरती का महत्व भगवान श्री शीतलनाथ Arti Bhagwan Shri Sheetalnath जी की आरती करने से जीवन में शांति, समर्पण, और धर्म की ओर झुकाव बढ़ता है। उनकी पूजा और आरती से व्यक्ति के कर्मों का शुद्धिकरण होता है, जो मोक्ष की ओर बढ़ने में सहायक है। विशेष रूप से जैन पर्व और महत्वपूर्ण अवसरों पर उनकी आरती करने से भक्त को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि का अनुभव होता है। यदि आप शीतलनाथ Arti Bhagwan Shri Sheetalnath जी की आरती को नियमित रूप से करते हैं, तो यह आपके जीवन में शांति, संतोष, और मानसिक स्थिरता लेकर आती है। Arti Bhagwan Shri Sheetalnath Ji:आरती: भगवान श्री शीतलनाथ जी ॐ जय शीतलनाथ स्वामी,स्वामी जय शीतलनाथ स्वामी।घृत दीपक से करू आरती,घृत दीपक से करू आरती।तुम अंतरयामी,ॐ जयशीतलनाथ स्वामी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ भदिदलपुर में जनम लिया प्रभु,दृढरथ पितु नामी,दृढरथ पितु नामी।मात सुनन्दा के नन्दा तुम,शिवपथ के स्वामी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ जन्म समय इन्द्रो ने,उत्सव खूब किया,स्वामी उत्सव खूबकिया ।मेरु सुदर्शन ऊपर,अभिषेक खूब किया॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ पंच कल्याणक अधिपति,होते तीर्थंकर,स्वामी होते तीर्थंकर ।तुम दसवे तीर्थंकर स्वामी,हो प्रभु क्षेमंकर॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ अपने पूजक निन्दक केप्रति,तुम हो वैरागी,स्वामी तुम हो वैरागी ।केवल चित्त पवित्र करन नित,तुमपूजे रागी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ पाप प्रणाशक सुखकारक,तेरे वचन प्रभो,स्वामी तेरे वचन प्रभो।आत्मा को शीतलता शाश्वत,दे तब कथन विभो॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ जिनवर प्रतिमा जिनवर जैसी,हम यह मान रहे,स्वामी हम यह मान रहे।प्रभो चंदानामती तब आरती,भाव दुःख हान करें॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी,स्वामी जय शीतलनाथ स्वामी।घृत दीपक से करू आरती,घृत दीपक से करू आरती।तुम अंतरयामी,ॐ जयशीतलनाथ स्वामी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥

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Shri Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की है आरती

Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की आरती का गहन धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे करने से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का आगमन होता है और नकारात्मकता दूर होती है। Bhagwat Bhagwan Ki Aarti श्री भगवत भगवान को समर्पित आरती उनके दिव्य स्वरूप और लीला का स्मरण कराते हुए भक्तों के मन में विश्वास और आस्था को और भी दृढ़ बनाती है। Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की आरती के लाभ Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की आरती का महत्व भगवत भगवान की आरती का नियमित रूप से पाठ करने से भक्त के मन में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है। इसमें भगवान की महिमा का वर्णन और उनके दिव्य कार्यों का स्मरण किया जाता है, जिससे भक्त की भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास प्रबल होता है। आरती करते समय भक्त भगवान से अपनी परेशानियों के समाधान, सुख-शांति, और उन्नति की कामना कर सकते हैं। Shri Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की है आरती श्री भगवत भगवान की है आरती,पापियों को पाप से है तारती। ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ,ये पंचम वेद निराला,नव ज्योति जलाने वाला।हरि नाम यही हरि धाम यही,यही जग मंगल की आरतीपापियों को पाप से है तारती॥॥ श्री भगवत भगवान की है आरती…॥ ये शान्ति गीत पावन पुनीत,पापों को मिटाने वाला,हरि दरश दिखाने वाला।यह सुख करनी, यह दुःख हरिनी,श्री मधुसूदन की आरती,पापियों को पाप से है तारती॥॥ श्री भगवत भगवान की है आरती…॥ ये मधुर बोल, जग फन्द खोल,सन्मार्ग दिखाने वाला,बिगड़ी को बनानेवाला।श्री राम यही, घनश्याम यही,यही प्रभु की महिमा की आरतीपापियों को पाप से है तारती॥॥ श्री भगवत भगवान की है आरती…॥ श्री भगवत भगवान की है आरती,पापियों को पाप से है तारती।

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