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Shri Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी

Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी की आरती के लाभ Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी की आरती का गायन मात्र ही मन को शांति और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यह माना जाता है कि उनकी कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं Rani Sati Dadi Ji Arti आरती के कुछ प्रमुख लाभ: Shri Rani Sati Dadi Ji Arti:कब करें आरती: कैसे करें आरती: ध्यान रखें: अन्य लाभ: निष्कर्ष: Shri Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी की आरती का गायन एक पवित्र अनुष्ठान है जो भक्तों को शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक विकास प्रदान करता है। Shri Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ।अपने भक्त जनन की,दूर करन विपत्ती ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ अवनि अननंतर ज्योति अखंडीत,मंडितचहुँक कुंभा ।दुर्जन दलन खडग की,विद्युतसम प्रतिभा ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ मरकत मणि मंदिर अतिमंजुल,शोभा लखि न पडे ।ललित ध्वजा चहुँ ओरे,कंचन कलश धरे ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ घंटा घनन घडावल बाजे,शंख मृदुग घूरे ।किन्नर गायन करते,वेद ध्वनि उचरे ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ सप्त मात्रिका करे आरती,सुरगण ध्यान धरे ।विविध प्रकार के व्यजंन,श्रीफल भेट धरे ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ संकट विकट विदारनि,नाशनि हो कुमति ।सेवक जन ह्रदय पटले,मृदूल करन सुमति ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ अमल कमल दल लोचनी,मोचनी त्रय तापा ।त्रिलोक चंद्र मैया तेरी,शरण गहुँ माता ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ या मैया जी की आरती,प्रतिदिन जो कोई गाता ।सदन सिद्ध नव निध फल,मनवांछित पावे ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ।अपने भक्त जनन की,दूर करन विपत्ती ॥

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Shri Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती

Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती ही महाराष्ट्रातील एक प्रसिद्ध देवीची आरती आहे. शांतादुर्गा देवी ही शक्तिपीठांपैकी एक आहे आणि तिची पूजा शांती आणि समृद्धीसाठी केली जाते. आरतीचे काही महत्वाचे भाग: आरतीचे फायदे: आरती कशी करावी: किती वेळा आरती करावी: Shanta Durgechi Aarti:नियमितपणे आरती करणे अधिक फायद्याचे असते. Shanta Durgechi Aarti आपण रोज किंवा आठवड्यातून एकदाही आरती करू शकता. श्री शांतादुर्गेची आरतीचे महत्व: श्री शांतादुर्गेची आरती ही केवळ एक धार्मिक अनुष्ठान नाही तर एक आध्यात्मिक अनुभव आहे. देवीची भक्ति करण्याने मन शांत होते आणि जीवन सुखमय होते Shri Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ भूकैलासा ऐसी ही कवला नगरी ।शांतादुर्गा तेथे भक्तभवहारी ।असुराते मर्दुनिया सुरवरकैवारी ।स्मरती विधीहरीशंकर सुरगण अंतरी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ प्रबोध तुझा नव्हे विश्वाभीतरी ।नेति नेति शब्दे गर्जती पै चारी ।साही शास्त्रे मथिता न कळीसी निर्धारी ।अष्टादश गर्जती परी नेणती तव थोरी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ कोटी मदन रूपा ऐसी मुखशोभा ।सर्वांगी भूषणे जांबूनदगाभा ।नासाग्री मुक्ताफळ दिनमणीची प्रभा ।भक्तजनाते अभय देसी तू अंबा । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ अंबे भक्तांसाठी होसी साकार ।नातरी जगजीवन तू नव्हसी गोचर ।विराटरूपा धरूनी करीसी व्यापार ।त्रिगुणी विरहीत सहीत तुज कैचा पार । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ त्रितापतापे श्रमलो निजवी निजसदनी ।अंबे सकळारंभे राका शशीवदनी ।अगमे निगमे दुर्गे भक्तांचे जननी ।पद्माजी बाबाजी रमला तव भजनी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥

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Kaila Mata Aarti:कैला माता आरती

Kaila Mata Aarti:कैला माता आरती Kaila Mata Aarti:कैला माता की आरती एक अत्यंत पवित्र और भक्तिमय अनुष्ठान है। माँ कैला देवी को शक्ति की देवी माना जाता है और उनकी पूजा करने से भक्तों को मन की शांति, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने का वरदान मिलता है। Kaila Mata Aarti:आइए जानते हैं कैला माता की आरती के कुछ प्रमुख लाभ Kaila Mata Aarti:कैला माता की आरती कैसे करें Kaila Mata Aarti:कैला माता की आरती के कुछ पंक्तियाँ ध्यान रखें: निष्कर्ष: Kaila Mata Aarti:माँ कैला की आरती एक शक्तिशाली अनुष्ठान है जो भक्तों के जीवन में कई तरह के लाभ ला सकता है। यदि आप माँ कैला की भक्त हैं तो नियमित रूप से उनकी आरती करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय बनाएं। Kaila Mata Aarti:कैला माता आरती ॐ जय कैला रानी,मैया जय कैला रानी ।ज्योति अखंड दिये माँतुम सब जगजानी ॥ तुम हो शक्ति भवानीमन वांछित फल दाता ॥मैया मन वांछित फल दाता ॥अद्भुत रूप अलौकिकसदानन्द माता ॥ॐ जय कैला रानी। गिरि त्रिकूट पर आपबिराजी चामुंडा संगा ॥मैया चामुंडा संगा ॥भक्तन पाप नसावौंबन पावन गंगा ॥ॐ जय कैला रानी। भक्त बहोरा द्वारे रहताकरता अगवानी ॥मैया करता अगवानी ॥लाल ध्वजा नभ चूमतराजेश्वर रानी ॥ॐ जय कैला रानी। नौबत बजे भवन मेंशंक नाद भारी ॥मैया शंक नाद भारी ॥जोगन गावत नाचतदे दे कर तारी ॥ॐ जय कैला रानी। ध्वजा नारियल रोलीपान सुपारी साथा ॥मैया पान सुपारी साथा ॥लेकर पड़े प्रेम सेजो जन यहाँ आता ॥ॐ जय कैला रानी । दर्श पार्श कर माँ केमुक्ती जान पाता ॥मैया मुक्ती जान पाता ॥भक्त सरन है तेरीरख अपने साथा ॥ॐ जय कैला रानी । कैला जी की आरतीजो जन है गाता ॥मैया जो जन है गाता ॥भक्त कहे भव सागरपार उतर जाता ॥ ॐ जय कैला रानी,मैया जय कैला रानी ।ज्योति अखंड दिये माँतुम सब जगजानी ॥

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Vaishno Mata Aarti:वैष्णो माता आरती

Vaishno Mata Aarti:वैष्णो माता आरती के लाभ Vaishno Mata Aarti:माँ वैष्णो देवी की आरती सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, Vaishno Mata Aarti बल्कि भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव भी है। माना जाता है कि माँ वैष्णो की आरती करने से मन शांत होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। Vaishno Mata Aarti:आइए जानते हैं वैष्णो माता आरती के कुछ प्रमुख लाभ Vaishno Mata Aarti:कब और कैसे करें आरती ध्यान रखें निष्कर्ष माँ वैष्णो की आरती एक शक्तिशाली अनुष्ठान है जो भक्तों के जीवन में कई तरह के लाभ ला सकता है। यदि आप माँ वैष्णो की भक्त हैं तो नियमित रूप से उनकी आरती करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय बनाएं। Vaishno Mata Aarti:वैष्णो माता आरती जय वैष्णवी माता,मैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगे,आरती मैं गाता ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ शीश पे छत्र विराजे,मूरतिया प्यारी ।गंगा बहती चरनन,ज्योति जगे न्यारी ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे,शंकर ध्यान धरे ।सेवक चंवर डुलावत,नारद नृत्य करे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी,मन को अति भावे ।बार-बार देखन को,ऐ माँ मन चावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ भवन पे झण्डे झूलें,घंटा ध्वनि बाजे ।ऊँचा पर्वत तेरा,माता प्रिय लागे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल,भेंट पुष्प मेवा ।दास खड़े चरणों में,दर्शन दो देवा ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ जो जन निश्चय करके,द्वार तेरे आवे ।उसकी इच्छा पूरण,माता हो जावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ इतनी स्तुति निश-दिन,जो नर भी गावे ।कहते सेवक ध्यानू,सुख सम्पत्ति पावे ॥ जय वैष्णवी माता,मैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगे,आरती मैं गाता ॥

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Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती

Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती के लाभ (फायदे) Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि, माँ दुर्गा के सातवें रूप के रूप में पूजी जाती हैं। उनका स्वरूप भय को दूर करने वाला और भक्तों को शत्रु-भय, अंधकार, और बुरी शक्तियों से रक्षा प्रदान करने वाला है। माँ कालरात्रि की आरती करने से आध्यात्मिक और भौतिक दोनों लाभ मिलते हैं। Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती के फायदे: 1. भय और शत्रु से मुक्ति: 2. Mata Kalratri Ki Aarti नकारात्मक शक्तियों का नाश: 3. आध्यात्मिक उन्नति: 4. स्वास्थ्य लाभ: 5. आकस्मिक संकटों से सुरक्षा: 6. कुंडली दोष और ग्रह बाधा का निवारण 7. परिवार में सुख-शांति: माँ कालरात्रि की आरती का शुभ समय: आरती विधि: माँ कालरात्रि की आरती करने से न केवल भय और संकटों का नाश होता है, बल्कि भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि, और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है। Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती नवरात्रि के सातवें दिन माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है, माँ कालरात्रि की यह अत्यंत महत्वपूर्ण आरती के लिरिक्स कुछ इस प्रकार से हैं। कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।काल के मुह से बचाने वाली ॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।महाचंडी तेरा अवतार ॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा ।महाकाली है तेरा पसारा ॥ खडग खप्पर रखने वाली ।दुष्टों का लहू चखने वाली ॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥ सभी देवता सब नर-नारी ।गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥ रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥ ना कोई चिंता रहे बीमारी ।ना कोई गम ना संकट भारी ॥ उस पर कभी कष्ट ना आवें ।महाकाली माँ जिसे बचाबे ॥ तू भी भक्त प्रेम से कह ।कालरात्रि माँ तेरी जय ॥

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Chandra Dev Aarti:चन्द्र देव आरती

Chandra Dev चंद्र देव की आरती के लाभ (फायदे): Chandra Dev:चंद्र देव, मन के स्वामी और ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण ग्रह के रूप में माने जाते हैं। उनकी आरती करने से मन, भावनाओं और जीवन के अन्य पहलुओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। Chandra Dev :चंद्र देव आरती के फायदे: 1. मानसिक शांति और स्थिरता: 2. भावनात्मक संतुलन: 3. धन और समृद्धि: 4. स्वास्थ्य लाभ: 5. वैवाहिक जीवन में सुख: 6. चंद्र दोष का निवारण: 7. रचनात्मकता और कलात्मक क्षमता: Chandra Dev Aarti:चन्द्र देव आरती ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी । रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी । जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि । योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा । वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी । शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे । विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें । ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

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Gorakhnath ji Arti:श्री नाथ जी आरती 

Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी आरती के लाभ Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी, भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के रूप में पूजे जाते हैं। उनकी आरती करने से कई आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। 1. आध्यात्मिक शांति और भक्ति का भाव श्रीनाथ जी की आरती नियमित करने से मन शांत होता है और भक्त के हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव प्रबल होता है। 2. परिवार में सुख-शांति श्रीनाथ जी को समर्पित आरती करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कलह दूर होते हैं। यह आरती परिवार में आपसी प्रेम और सौहार्द बढ़ाती है। 3. धन-समृद्धि का आशीर्वाद Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी, गोवर्धन पर्वत के उद्धारकर्ता, धन और समृद्धि के प्रतीक हैं। उनकी आरती करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और घर में धन की बरकत होती है। 4. संकटों और कष्टों से मुक्ति श्रीनाथ जी को “संकट मोचन” भी माना जाता है। उनकी आरती करने से जीवन के सभी संकट और बाधाएं दूर होती हैं। 5. आध्यात्मिक उन्नति आरती के माध्यम से भक्त अपने मन को श्रीकृष्ण के चरणों में लगाकर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे आत्मा की उन्नति होती है। 6. कार्यों में सफलता Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी की कृपा से हर कार्य निर्विघ्न और सफल होता है। उनके प्रति समर्पित आरती व्यापार, नौकरी, और अन्य क्षेत्रों में सफलता दिलाती है। 7. संतान प्राप्ति और संतानों की रक्षा Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी को बाल स्वरूप मानकर उनकी आरती करने से नि:संतान दंपतियों को संतान का सुख प्राप्त होता है और संतान की उन्नति होती है। आरती करने का शुभ समय आरती विधि महत्व:Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी की आरती करने से जीवन में श्रीकृष्ण का आशीर्वाद बना रहता है, जो जीवन को मंगलमय और सुखद बनाता है। Gorakhnath ji Arti:श्री नाथ जी आरती  जय गोरख योगी (श्री गुरु जी) हर हर गोरख योगी ।वेद पुराण बखानत, ब्रह्मादिक सुरमानत, अटल भवन योगी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ बाल जती ब्रह्मज्ञानी योग युक्ति पूरे (श्रीगुरुजी) योग युक्ति पूरे ।सोहं शब्द निरन्तर (अनहद नाद निरन्तर) बाज रहे तूरे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ रत्नजड़ित मणि माणिक कुण्डल कानन में (श्री गुरुजी) कुंडल कानन मेंजटा मुकुट सिर सोहत मन मोहत भस्मन्ती तन में ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ आदि पुरुष अविनाशी, निर्गुण गुणराशी (श्री गुरुजी) निर्गुण गुणराशी,सुमिरण से अघ छूटे, सुमिरन से पाप छूटे, टूटे यम फाँसी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ ध्यान कियो दशरथ सुत रघुकुल वंशमणी (श्री गुरुजी) रघुकुल वंशमणि,सीता शोक निवारक, सीता मुक्त कराई, मार्यो लंक धनी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ नन्दनन्दन जगवन्दन, गिरधर वनमाली, (श्री गुरुजी) गिरधर वनमालीनिश वासर गुण गावत, वंशी मधुर वजावत, संग रुक्मणी बाली ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ धारा नगर मैनावती तुम्हरो ध्यानधरे (श्रीगुरुजी) तुम्हरो ध्यान धरेअमर किये गोपीचन्द, अमर किये पूर्णमल, संकट दूर करे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ चन्द्रावल लखरावल निजकर घातमरी, (श्रीगुरुजी) निजकर घातमरी,योग अमर फल देकर, 2 क्षण में अमर करी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ भूप अमित शरणागत जनकादिक ज्ञानी, (श्रीगुरुजी)जनकादिक ज्ञानीमान दिलीप युधिष्ठिर 2 हरिश्चन्द्र से दानी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ वीर धीर संग ऋद्धि सिद्धि गणपति चंवर करे (श्रीगुरुजी) गणपति चँवर करेजगदम्बा जगजननी 2 योगिनी ध्यान धरे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ दया करी चौरंग पर कठिन विपतिटारी (श्रीगुरुजी) कठिन विपतिटारीदीनदयाल दयानिधि 2 सेवक सुखकारी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ इतनी श्री नाथ जी की मंगल आरती निशदिन जो गावे (श्रीगुरुजी)प्रात समय गावे, भणत विचार पद (भर्तृहरि भूप अमर पद)सो निश्चय पावे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥

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Gauri Nandan Arti: गौरी नंदन आरती

Gauri Nandan Arti:गौरी नंदन आरती के फायदे और शुभ मुहूर्त Gauri Nandan Arti:गौरी नंदन आरती के फायदे: Gauri Nandan Arti;गौरी नंदन आरती के शुभ मुहूर्त: Gauri Nandan Arti:आरती करने का तरीका: यह आरती जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है और भगवान गणेश का विशेष आशीर्वाद प्रदान करती है। Gauri Nandan Arti: गौरी नंदन आरती जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते शुभ कार्यो में सबसे पहलेतेरा पूजन करतेविघ्न हटाते काज बनातेसभी अमंगल हरतेओ देवा सिद्धि और सिद्धि बाटेचुनते राहो के काटेखुशियों के रंग को बिखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते ओमकार है रूप तिहाराअलौकिक है मायालम्ब कर्ण तेरे उज्जवल नैनाधुम्रवर्ण है कायाओम्हर है रूप तिहाराअलौकिक है मायाओ देवा शम्भू के लाल दुलारेसंतो के नैनन तारेमस्तक पे चन्द्रमा को वारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते गणपति बाप्पा घर में आनासुख वैभव कर जानाएक दन्त लम्बोदर स्वामीसारे कष्ट मिटानागणपति बाप्पा घर में आनासुख वैभव बरसानादेवा लडूअन का भोग लगातेमूषक वहानपे आतेभक्तो की बिगड़ी संवारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते धन कुबेर चरणों के चाकरलक्ष्मी संग विराजेदसो दिशा नवखण्ड में देवाडंका तेरा बाजेदेवा तुझमे ध्यान लगायेमन चाहा फल वो पाएनैया भवंर से उबारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते बांझो की गोदे भर देनानिर्धन को धन देनादिनों को सन्मान दिलानानिर्बल को बाल देनाओ देवा सुनलो अरदास हमारीविनती करते नर नारीसेवा में तन मन वारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते

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Sankata Mata Aarti:संकटा माता आरती

Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक, मानसिक, और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। संकटा माता को संकटों को हरने वाली देवी माना जाता है। उनकी आराधना से भक्त को जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने के फायदे 1. Sankata Mata Aarti संकटों और बाधाओं से मुक्ति 2. सुख-समृद्धि में वृद्धि 3. स्वास्थ्य लाभ 4. भय और नकारात्मकता का नाश 5. परिवारिक सुख और सामंजस्य 6. आध्यात्मिक जागरूकता 7. मनोकामनाओं की पूर्ति 8. शत्रुओं पर विजय 9. धार्मिक पुण्य का संचय आरती का समय और विधि सारांश Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने से व्यक्ति को न केवल संकटों से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का आगमन भी होता है। माता की कृपा से भक्त का जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है और वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। Sankata Mata Aarti:संकटा माता आरती जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।शरण पड़ी हूँ तेरी माता,अरज सुनहूं अब मेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ नहिं कोउ तुम समान जग दाता,सुर-नर-मुनि सब टेरी ।कष्ट निवारण करहु हमारा,लावहु तनिक न देरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ काम-क्रोध अरु लोभन के वशपापहि किया घनेरी ।सो अपराधन उर में आनहु,छमहु भूल बहु मेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ हरहु सकल सन्ताप हृदय का,ममता मोह निबेरी ।सिंहासन पर आज बिराजें,चंवर ढ़ुरै सिर छत्र-छतेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ खप्पर, खड्ग हाथ में धारे,वह शोभा नहिं कहत बनेरी ॥ब्रह्मादिक सुर पार न पाये,हारि थके हिय हेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ असुरन्ह का वध किन्हा,प्रकटेउ अमत दिलेरी ।संतन को सुख दियो सदा ही,टेर सुनत नहिं कियो अबेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ गावत गुण-गुण निज हो तेरी,बजत दुंदुभी भेरी ।अस निज जानि शरण में आयऊं,टेहि कर फल नहीं कहत बनेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।भव बंधन में सो नहिं आवै,निशदिन ध्यान धरीरी ॥ जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।शरण पड़ी हूँ तेरी माता,अरज सुनहूं अब मेरी ॥

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Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती

Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने के अनेक आध्यात्मिक और जीवनशैली से जुड़े लाभ हैं। एकादशी का व्रत और आरती विष्णु भगवान और उनकी अवतार स्वरूपा माता एकादशी को समर्पित होती है। यह भक्ति, ध्यान, और अनुशासन का प्रतीक है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने के लाभ 1. पापों का नाश 2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 3. आध्यात्मिक बल और मानसिक शांति 4. सांसारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि 5. भक्ति और विश्वास में वृद्धि 6. स्वास्थ्य में सुधार 7. मोक्ष और पुनर्जन्म से मुक्ति 8. धार्मिक और पारिवारिक एकता 9. विष्णु भगवान की कृपा आरती का समय और विधि सारांश Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने से मन, शरीर, और आत्मा को शांति मिलती है। यह आरती व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥ॐ जय एकादशी…॥ तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥ॐ जय एकादशी…॥ पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥ॐ जय एकादशी…॥ नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥ॐ जय एकादशी…॥ विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥ॐ जय एकादशी…॥ चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥ॐ जय एकादशी…॥ शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥ॐ जय एकादशी…॥ योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥ॐ जय एकादशी…॥ अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥ॐ जय एकादशी…॥ पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥ॐ जय एकादशी…॥ देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥ॐ जय एकादशी…॥ परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥ॐ जय एकादशी…॥

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Shri Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान आरती

Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। महावीर भगवान जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं और उनकी आराधना आत्मिक शांति, संयम, और जीवन में सादगी लाने में सहायक मानी जाती है। आरती के निम्नलिखित लाभ हैं: 1. आत्मिक शांति और ध्यान में वृद्धि 2. संयम और सहनशीलता का विकास 3. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 4. धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव 5. पापों का नाश और पुण्य का संचय 6. अहिंसा और सत्य की प्रेरणा Mahaveer Bhagwan Arti 7. Mahaveer Bhagwan Arti रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ 8. परिवार में शांति और सुख-समृद्धि आरती का समय और विधि: श्री महावीर भगवान की आरती से व्यक्ति का जीवन अध्यात्म, अहिंसा और सत्य की राह पर चलता है, जो जीवन को पूर्णता और समृद्धि प्रदान करता है। Shri Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान आरती जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे,त्रिशला के जाये ।कुण्डलपुर अवतार लिया,प्रभु सुर नर हर्षाये ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ देव इन्द्र जन्माभिषेक कर,उर प्रमोद भरिया ।रुप आपका लख नहिं पाये,सहस आंख धरिया ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये,घर में बाल यती ।राजपाट ऐश्वर्य छोड़ सब,ममता मोह हती ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ बारह वर्ष छद्मावस्था में,आतम ध्यान किया।घाति-कर्म चूर-चूर,प्रभु केवल ज्ञान लिया ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ पावापुर के बीच सरोवर,आकर योग कसे ।हने अघातिया कर्म शत्रु सब,शिवपुर जाय बसे ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ भूमंडल के चांदनपुर में,मंदिर मध्य लसे ।शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी,दर्शन पाप नसे ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ करुणासागर करुणा कीजे,आकर शरण गही।दीन दयाला जगप्रतिपाला,आनन्द भरण तु ही ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥ जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥

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Narasimha Aarti:नृसिंह आरती

Narasimha Aarti:नृसिंह आरती के लाभ (फायदे):नृसिंह भगवान की आरती करने से व्यक्ति को अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। Narasimha Aarti यह आरती विशेष रूप से भय और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने के लिए मानी जाती है। Narasimha Aarti:फायदे: Narasimha Aarti:शुभ मुहूर्त: नोट: पूजा के समय पवित्रता, भक्ति, और श्रद्धा का होना अति महत्वपूर्ण है। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान का आह्वान करने से आरती का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। Narasimha Aarti:नृसिंह आरती नमस्ते नरसिंहायप्रह्लादाह्लाद-दायिने हिरण्यकशिपोर्वक्षः-शिला-टङ्क-नखालये इतो नृसिंहः परतो नृसिंहोयतो यतो यामि ततो नृसिंहः बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहोनृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये तव करकमलवरे नखमद्भुत-शृङ्गंदलितहिरण्यकशिपुतनुभृङ्गम्केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे ।

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