AARTI

Babosa Aarti:बाबोसा आरती

Babosa Aarti:बाबोसा आरती के लाभ Babosa Aarti:बाबोसा भगवान की आरती का गायन या सुनना भक्तों के जीवन में अनेक लाभकारी प्रभाव डालता है। माना जाता है कि बाबोसा भगवान की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता आती है। Babosa Aarti:बाबोसा आरती के कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: कुल मिलाकर, Babosa Aarti बाबोसा भगवान की आरती करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। यहां कुछ अन्य लाभ भी हो सकते हैं: ध्यान रखें कि ये लाभ व्यक्ति की आस्था और भक्ति पर निर्भर करते हैं। नियमित रूप से बाबोसा भगवान की पूजा करने से इन लाभों को प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है। बाबोसा भगवान की कृपा से आपका जीवन सुखमय हो! क्या आप बाबोसा भगवान के बारे में और कुछ जानना चाहते हैं? यहां कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है: बाबोसा भगवान की कृपा से आपका जीवन सुखमय हो! Babosa Aarti:बाबोसा आरती ॥ बाबोसा चूरू वाले की आरती ॥देवा बाबोसा चूरू वाले,भक्तो के है रखवाले,रिम झिम उतारे तेरी आरती,बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥ सिर पे मुकुट कान में कुंडल,हाथ में सोटा साजे,जग मग जग मग रूप निराला,जग मग जग मग रूप निराला,भुत प्रेत सब भागे,जय हो माता छगनी के लाले,कोठारी कुल के तारे,रिम झिम उतारे तेरी आरती,बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥ बालाजी ने राज तिलक से,अपनी गोद बिठाया,मृगसर पांचू भरे है मेला,मृगसर पांचू भरे है मेला,भक्तो के मन है भाया,सबके मन को हरषाने वाले,विपदा मिटाने वाले,रिम झिम उतारे तेरी आरती,बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥ भक्ति भाव से करे आरती,तेरे सारे पुजारी,मन दर्पण में बसों बाबोसा,मन दर्पण में बसों बाबोसा,कलयुग के अवतारी,तेरा मंजूदेवी गुण गाये,गोपाला शीश नवाये,रिम झिम उतारे तेरी आरती,बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥ देवा बाबोसा चूरू वाले,भक्तो के है रखवाले,रिम झिम उतारे तेरी आरती,बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥

Babosa Aarti:बाबोसा आरती Read More »

 Shri Yugal Kishore Aarti:युगलकिशोर आरती  

Yugal Kishore Aarti:श्री युगल किशोर आरती के लाभ Yugal Kishore Aarti:श्री युगल किशोर की आरती का गायन या सुनना भक्तों के जीवन में अनेक लाभकारी प्रभाव डालता है। माना जाता है कि श्री युगल किशोर की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता आती है। Yugal Kishore Aarti:श्री युगल किशोर आरती के कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: कुल मिलाकर, श्री युगल किशोर की आरती करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। यहां कुछ अन्य लाभ भी हो सकते हैं ध्यान रखें कि ये लाभ व्यक्ति की आस्था और भक्ति पर निर्भर करते हैं। नियमित रूप से श्री युगल किशोर की पूजा करने से इन लाभों को प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है। Yugal Kishore Aarti:श्री युगल किशोर की कृपा से आपका जीवन सुखमय हो! Shri Yugal Kishore Aarti:युगलकिशोर आरती आरती युगलकिशोर की कीजै ।तन मन धन न्योछावर कीजै ॥ गौरश्याम मुख निरखन लीजै ।हरि का रूप नयन भरि पीजै ॥ रवि शशि कोटि बदन की शोभा ।ताहि निरखि मेरो मन लोभा ॥ ओढ़े नील पीत पट सारी ।कुंजबिहारी गिरिवरधारी ॥ फूलन सेज फूल की माला ।रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला ॥ कंचन थार कपूर की बाती ।हरि आए निर्मल भई छाती ॥ श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी ।आरती करें सकल नर नारी ॥ नंदनंदन बृजभान किशोरी ।परमानंद स्वामी अविचल जोरी ॥

 Shri Yugal Kishore Aarti:युगलकिशोर आरती   Read More »

Shri Banke Bihari Aarti:श्री बांके बिहारी आरती 

Shri Banke Bihari Aarti:श्री बांके बिहारी आरती के लाभ Shri Banke Bihari Aarti:श्री बांके बिहारी जी की आरती का गायन या सुनना भक्तों के जीवन में अनेक लाभकारी प्रभाव डालता है। माना जाता है कि श्री बांके बिहारी जी की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता आती है। Shri Banke Bihari Aarti :श्री बांके बिहारी आरती के कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: कुल मिलाकर, श्री बांके बिहारी जी की आरती करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। यहां कुछ अन्य लाभ भी हो सकते हैं: ध्यान रखें कि ये लाभ व्यक्ति की आस्था और भक्ति पर निर्भर करते हैं। Shri Banke Bihari Aarti नियमित रूप से श्री बांके बिहारी जी की पूजा करने से इन लाभों को प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है। क्या आप श्री बांके बिहारी जी की आरती के बारे में और कुछ जानना चाहते हैं? यहां कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है Shri Banke Bihari Aarti:श्री बांके बिहारी जी की कृपा से आपका जीवन सुखमय हो! Shri Banke Bihari Aarti:श्री बांके बिहारी आरती श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं,हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं,श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे,प्यारी बंसी मेरो मन मोहे ।देख छवि बलिहारी मैं जाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ चरणों से निकली गंगा प्यारी,जिसने सारी दुनिया तारी ।मैं उन चरणों के दर्शन पाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ दास अनाथ के नाथ आप हो,दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो ।हरी चरणों में शीश झुकाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ श्री हरीदास के प्यारे तुम हो ।मेरे मोहन जीवन धन हो।देख युगल छवि बलि बलि जाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं,हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं,श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।

Shri Banke Bihari Aarti:श्री बांके बिहारी आरती  Read More »

Mata Parvati Aarti:माता पार्वती आरती 

Mata Parvati Aarti:माता पार्वती आरती के लाभ Mata Parvati Aarti:माता पार्वती की आरती का गायन या सुनना भक्तों के जीवन में अनेक लाभकारी प्रभाव डालता है। Mata Parvati Aarti माना जाता है कि माता पार्वती की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता आती है। Mata Parvati Aarti:माता पार्वती आरती के कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: कुल मिलाकर, माता पार्वती की आरती करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। यहां कुछ अन्य लाभ भी हो सकते हैं: ध्यान रखें कि ये लाभ व्यक्ति की आस्था और भक्ति पर निर्भर करते हैं। नियमित रूप से माता पार्वती की पूजा करने से इन लाभों को प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है। Mata Parvati Aarti:माता पार्वती आरती  जय पार्वती माता,जय पार्वती माताब्रह्मा सनातन देवी,शुभ फल की दाता ।॥ जय पार्वती माता… ॥ अरिकुल कंटक नासनि,निज सेवक त्राता,जगजननी जगदम्बा,हरिहर गुण गाता ।॥ जय पार्वती माता… ॥ सिंह को वहान साजे,कुंडल है साथा,देव वधू जस गावत,नृत्य करत ता था ।॥ जय पार्वती माता… ॥ सतयुग रूप शील अतिसुंदर,नाम सती कहलाता,हेमाचंल घर जन्मी,सखियाँ संगराता ।॥ जय पार्वती माता… ॥ शुम्भ निशुम्भ विदारे,हेमाचंल स्थाता,सहस्त्र भुजा तनु धरिके,चक्र लियो हाथा ।॥ जय पार्वती माता… ॥ सृष्टि रूप तुही है जननी,शिव संग रंगराता,नन्दी भृंगी बीन लही,सारा जग मदमाता ।॥ जय पार्वती माता… ॥ देवन अरज करत हम,चरण ध्यान लाता,तेरी कृपा रहे तो,मन नहीं भरमाता ।॥ जय पार्वती माता… ॥ मैया जी की आरती,भक्ति भाव से जो नर गाता,नित्य सुखी रह करके,सुख संपत्ति पाता ।॥ जय पार्वती माता… ॥ जय पार्वती माता,जय पार्वती माता,ब्रह्मा सनातन देवी,शुभ फल की दाता । जय पार्वती माता,जय पार्वती माताब्रह्मा सनातन देवी,शुभ फल की दाता ।

Mata Parvati Aarti:माता पार्वती आरती  Read More »

Shri Siddhivinayak Aarti:श्री सिद्धिविनायक आरती

Siddhivinayak Aarti:सिद्धिविनायक आरती गणपति जी की विशेष आरती है, जो भक्तों को भगवान गणेश की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम है। भगवान सिद्धिविनायक को विघ्नहर्ता और बुद्धि, विवेक, और समृद्धि के दाता माना जाता है। इस आरती को श्रद्धा से करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। Siddhivinayak Aarti:सिद्धिविनायक आरती के लाभ 1. विघ्नों और बाधाओं का निवारण 2. समृद्धि और आर्थिक लाभ 3. बुद्धि और विवेक की वृद्धि 4. मनोकामनाओं की पूर्ति 5. पारिवारिक सुख और शांति 6. मानसिक शांति और सकारात्मकता 7. शुभ कार्यों में सफलता 8. स्वास्थ्य में सुधार 9. ईश्वरीय कृपा और आशीर्वाद सिद्धिविनायक आरती के शब्द: “जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती,दर्शन मात्रे मन कामना पूर्ति।“ Siddhivinayak Aarti:यह आरती भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करती है और उनके भक्तों के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाने का मार्ग प्रशस्त करती है। नियमित रूप से इस आरती का पाठ करने से भक्त गणेश जी की कृपा से अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। Shri Siddhivinayak Aarti:श्री सिद्धिविनायक आरती Siddhivinayak Aarti:श्री सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई का सबसे प्रसिद्ध भगवान श्री गणेश मंदिर है, यहाँ होने वाली पूर्ण आरती मे श्री गणेश की विभिन्न स्तुतियाँ, भगवान शिव एवं देवी दुर्गा की स्तुतियाँ भी जुड़ी हैं। सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची ।नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची ।सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची ।कंठी झलके माल मुकताफळांची ।जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय मंगल मूर्ति ।दर्शनमात्रे मनः,कामना पूर्तिजय देव जय देव ॥ रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा ।चंदनाची उटी कुमकुम केशरा ।हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा ।रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया ।जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय मंगल मूर्ति ।दर्शनमात्रे मनः,कामना पूर्तिजय देव जय देव ॥ लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना ।सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना ।दास रामाचा वाट पाहे सदना ।संकटी पावावे निर्वाणी, रक्षावे सुरवर वंदना ।जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय मंगल मूर्ति ।दर्शनमात्रे मनः,कामना पूर्तिजय देव जय देव ॥ ॥ श्री गणेशाची आरती ॥शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको ।दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको ।हाथ लिए गुड लड्डू सांई सुरवरको ।महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराज ।विद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि ।विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी ।गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराज ।विद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ भावभगत से कोई शरणागत आवे ।संतत संपत सबही भरपूर पावे ।ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराज ।विद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ ॥ श्री शंकराची आरती ॥लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा,वीषे कंठ काळा त्रिनेत्री ज्वाळालावण्य सुंदर मस्तकी बाळा,तेथुनिया जळ निर्मळ वाहे झुळझुळा ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय श्रीशंकरा ।आरती ओवाळू,तुज कर्पुरगौराजय देव जय देव ॥ कर्पुरगौरा भोळा नयनी विशाळा,अर्धांगी पार्वती सुमनांच्या माळाविभुतीचे उधळण शितकंठ नीळा,ऐसा शंकर शोभे उमा वेल्हाळा ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय श्रीशंकरा ।आरती ओवाळू,तुज कर्पुरगौराजय देव जय देव ॥ देवी दैत्यी सागरमंथन पै केले,त्यामाजी अवचित हळहळ जे उठलेते त्वा असुरपणे प्राशन केले,नीलकंठ नाम प्रसिद्ध झाले ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय श्रीशंकरा ।आरती ओवाळू,तुज कर्पुरगौराजय देव जय देव ॥ व्याघ्रांबर फणिवरधर सुंदर मदनारी,पंचानन मनमोहन मुनिजनसुखकारीशतकोटीचे बीज वाचे उच्चारी,रघुकुलटिळक रामदासा अंतरी ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय श्रीशंकरा ।आरती ओवाळू,तुज कर्पुरगौराजय देव जय देव ॥ ॥ श्री देवीची आरती ॥दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी,अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ।वारी वारीं जन्ममरणाते वारी,हारी पडलो आता संकट नीवारी ॥जय देवी जय देवी.. जय देवी जय देवी,जय महिषासुरमथनी ।सुरवर-ईश्वर-वरदे,तारक संजीवनीजय देवी जय देवी ॥ त्रिभुवनी भुवनी पाहतां तुज ऎसे नाही,चारी श्रमले परंतु न बोलावे काहीं ।साही विवाद करितां पडिले प्रवाही,ते तूं भक्तालागी पावसि लवलाही ॥जय देवी जय देवी.. जय देवी जय देवी,जय महिषासुरमथनी ।सुरवरईश्वरवरदे,तारक संजीवनीजय देवी जय देवी ॥ प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासां,क्लेशापासूनि सोडी तोडी भवपाशा ।अंवे तुजवांचून कोण पुरविल आशा,नरहरि तल्लिन झाला पदपंकजलेशा ॥जय देवी जय देवी.. जय देवी जय देवी,जय महिषासुरमथनी ।सुरवरईश्वरवरदे,तारक संजीवनीजय देवी जय देवी ॥ ॥ घालीन लोटांगण आरती ॥घालीन लोटांगण, वंदीन चरण ।डोळ्यांनी पाहीन रुप तुझें ।प्रेमें आलिंगन, आनंदे पूजिन ।भावें ओवाळीन म्हणे नामा ॥ त्वमेव माता च पिता त्वमेव ।त्वमेव बंधुक्ष्च सखा त्वमेव ।त्वमेव विध्या द्रविणं त्वमेव ।त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥ कायेन वाचा मनसेंद्रीयेव्रा,बुद्धयात्मना वा प्रकृतिस्वभावात ।करोमि यध्य्त सकलं परस्मे,नारायणायेति समर्पयामि ॥ अच्युतं केशवं रामनारायणं,कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम ।श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं,जानकीनायकं रामचंद्र भजे ॥ हरे राम हर राम,राम राम हरे हरे ।हरे कृष्ण हरे कृष्ण,कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।

Shri Siddhivinayak Aarti:श्री सिद्धिविनायक आरती Read More »

Panch Parmeshthi Aarti:पंच परमेष्ठी आरती

Panch Parmeshthi Aarti:पंच परमेष्ठी आरती जैन धर्म की एक महत्वपूर्ण आरती है, जो पाँच परम पूज्य व्यक्तित्वों को समर्पित है। यह आरती धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा और विशेष अवसरों पर की जाती है। पंच परमेष्ठी में निम्नलिखित पूज्य शामिल होते हैं: Panch Parmeshthi Aarti:पंच परमेष्ठी आरती के लाभ 1. आध्यात्मिक उन्नति 2. धर्म में रुचि और समर्पण 3. मन की शांति और स्थिरता 4. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 5. पुण्य और धर्म लाभ 6. सही मार्गदर्शन 7. संपूर्ण समाज के कल्याण की भावना पंच परमेष्ठी आरती (शब्द) “जय जय अरिहंत, जय जय अरिहंत।जय जय सिद्ध, जय जय सिद्ध।जय जय आचार्य, जय जय आचार्य।जय जय उपाध्याय, जय जय उपाध्याय।जय जय साधु, जय जय साधु।“ यह आरती जैन धर्म के पंच परमेष्ठी की महिमा और उनके द्वारा बताए गए मोक्ष मार्ग को अपनाने की प्रेरणा देती है। नियमित रूप से इसे करने से व्यक्ति के जीवन में धार्मिक, मानसिक, और आध्यात्मिक संतुलन बना रहता है। Panch Parmeshthi Aarti:पंच परमेष्ठी आरती इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ पहली आरति श्रीजिनराजा,भव दधि पार उतार जिहाजा ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ दूसरी आरति सिद्धन केरी,सुमिरन करत मिटे भव फेरी ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ तीजी आरति सूरि मुनिंदा,जनम मरन दु:ख दूर करिंदा ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ चौथी आरति श्री उवझाया,दर्शन देखत पाप पलाया ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ पाँचमि आरति साधु तिहारी,कुमति विनाशन शिव अधिकारी ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ छट्ठी ग्यारह प्रतिमाधारी,श्रावक वंदूं आनंदकारी ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ सातमि आरति श्रीजिनवानी,‘द्यानत’ सुरग मुकति सुखदानी ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥

Panch Parmeshthi Aarti:पंच परमेष्ठी आरती Read More »

Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti:श्री सत्यनारायण जी आरती

Satyanarayan Ji Ki Aarti:श्री सत्यनारायण जी की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह आरती सत्यनारायण भगवान की कृपा पाने का एक सशक्त माध्यम है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं: 1. Satyanarayan Ji Ki Aarti:संकटों और बाधाओं का निवारण 2. धन, समृद्धि और खुशहाली 3. सकारात्मक ऊर्जा और शांति 4. मनोकामनाओं की पूर्ति 5. पारिवारिक सुख और एकता 6. धार्मिकता और अच्छे संस्कारों का विकास 7. स्वास्थ्य लाभ 8. पुण्य और ईश्वरीय कृपा 9. आध्यात्मिक उन्नति 10. विवाह और अन्य शुभ कार्यों में सफलता आरती के शब्द: नियमित रूप से श्री सत्यनारायण जी की आरती करने से जीवन के सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं। यह आरती भक्तों को ईश्वरीय मार्ग पर चलने और उनके आशीर्वाद से जीवन को सफल बनाने में मदद करती है। Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti:श्री सत्यनारायण जी आरती जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।सत्यनारायण स्वामी,जन पातक हरणा ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । रत्‍‌न जडि़त सिंहासन,अद्भुत छवि राजै ।नारद करत निराजन,घण्टा ध्वनि बाजै ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । प्रकट भये कलि कारण,द्विज को दर्श दियो ।बूढ़ा ब्राह्मण बनकर,कंचन महल कियो ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । दुर्बल भील कठारो,जिन पर कृपा करी ।चन्द्रचूड़ एक राजा,तिनकी विपत्ति हरी ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । वैश्य मनोरथ पायो,श्रद्धा तज दीन्ही ।सो फल भोग्यो प्रभुजी,फिर-स्तुति कीन्हीं ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । भाव भक्ति के कारण,छिन-छिन रूप धरयो ।श्रद्धा धारण कीन्हीं,तिनको काज सरयो ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । ग्वाल-बाल संग राजा,वन में भक्ति करी ।मनवांछित फल दीन्हों,दीनदयाल हरी ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । चढ़त प्रसाद सवायो,कदली फल, मेवा ।धूप दीप तुलसी से,राजी सत्यदेवा ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । श्री सत्यनारायण जी की आरती,जो कोई नर गावै ।ऋद्धि-सिद्ध सुख-संपत्ति,सहज रूप पावे ॥ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।सत्यनारायण स्वामी,जन पातक हरणा ॥

Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti:श्री सत्यनारायण जी आरती Read More »

Swaminarayan Arti:स्वामीनारायण आरती 

Swaminarayan Arti:स्वामीनारायण आरती का पाठ और इसके दर्शन करने से कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं: Swaminarayan Arti:श्री स्वामीनारायण आरती प्रतिदिन सभी BAPS मंदिरों में तथा भक्ति भाव से भरे अनगिनत घरों में और विशेष अवसरों पर गाई जाती है। यह आरती उपासकों के ह्रदय को अक्षरपुरूषोत्तम प्रभु के दिव्य रूपों की महिमा की याद दिलाती है। श्री स्वामीनारायण आरती के बोल हिंदी में इस प्रकार से हैं.. 1. आध्यात्मिक उन्नति 2. मानसिक शांति 3. सकारात्मक ऊर्जा 4. संकटों का निवारण 5. धार्मिक संस्कारों का विकास 6. सामूहिक भक्ति का अनुभव 7. शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार 8. ईश्वरीय कृपा और आशीर्वाद Swaminarayan Arti:स्वामीनारायण आरती के शब्द नियमित रूप से स्वामीनारायण आरती करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों ही क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन होता है। Swaminarayan Arti:स्वामीनारायण आरती  जय स्वामीनारायण, जय अक्षरपुरुषोत्तम,अक्षरपुरुषोत्तम जय, दर्शन सर्वोत्तमजय स्वामीनारायण मुक्त अनंत सुपुजित, सुंदर साकारम्,सर्वोपरी करुणाकर, मानव तनुधारम्जय स्वामीनारायण पुरूषोत्तम परब्रह्म, श्रीहरि सहजानन्द,अक्षरब्रह्म अनादि, गुणातीतानंदजय स्वामीनारायण प्रकट सदा सर्वकर्ता, परम मुक्तिदाता,धर्म एकान्तिक स्थापक, भक्ति परित्राताजय स्वामीनारायण दशभाव दिव्यता सह, ब्रह्मरूपे प्रीति,सुह्राद्भाव अलौकिक, स्थापित शुभ रीतिजय स्वामीनारायण धन्य धन्य मम जीवन, तव शरणे सुफलम्,यज्ञपुरुष प्रवर्तित, सिद्धांतम् सुखदम्जय स्वामीनारायण, जय स्वामीनारायण, जय अक्षरपुरुषोत्तम,अक्षरपुरुषोत्तम जय, दर्शन सर्वोत्तमजय स्वामीनारायण भगवान स्वामीनारायण के छठे आध्यात्मिक उत्तराधिकारी परम पूज्य महंत स्वामी महाराज ने अक्षर पुरूषोत्तम प्रभु की महिमा भरी आरती को रचकर इसके गायन की एवं प्रेरणा दी है।

Swaminarayan Arti:स्वामीनारायण आरती  Read More »

Narmada Aarti:नर्मदा आरती

Narmada Aarti:नर्मदा माता की आरती के लाभ Narmada Aarti:नर्मदा माता को भारत की पवित्र नदियों में से एक माना जाता है। उनकी पूजा और आरती करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। आइए जानते हैं नर्मदा माता की आरती के कुछ प्रमुख लाभ Narmada Aarti:नर्मदा माता की आरती का पाठ कैसे करें Narmada Aarti:कहां से करें आरती Narmada Aarti:आप नर्मदा नदी के किनारे स्थित किसी मंदिर में जाकर आरती में शामिल हो सकते हैं या घर पर भी आरती का पाठ कर सकते हैं। Narmada Aarti:नर्मदा आरती ॐ जय जगदानन्दी,मैया जय आनंद कन्दी ।ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवाशिव हर‍ि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥ देवी नारद सारद तुम वरदायक,अभिनव पदण्डी ।सुर नर मुनि जन सेवत,सुर नर मुनि…शारद पदवाचन्ती ।॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥ देवी धूमक वाहन राजत,वीणा वाद्यन्ती।झुमकत-झुमकत-झुमकत,झननन झमकत रमती राजन्ती ।॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥ देवी बाजत ताल मृदंगा,सुर मण्डल रमती ।तोड़ीतान-तोड़ीतान-तोड़ीतान,तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती ।॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥ देवी सकल भुवन पर आप विराजत,निशदिन आनन्दी ।गावत गंगा शंकर, सेवत रेवाशंकर तुम भट मेटन्ती ।॥ ॐ जय जगदानन्दी…॥ मैयाजी को कंचन थार विराजत,अगर कपूर बाती ।अमर कंठ में विराजत,घाटन घाट बिराजत,कोटि रतन ज्योति ।॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥ मैयाजी की आरती,निशदिन पढ़ गा‍वरि,हो रेवा जुग-जुग नरगावे,भजत शिवानन्द स्वामीजपत हर‍ि नंद स्वामी मनवांछित पावे। ॐ जय जगदानन्दी,मैया जय आनंद कन्दी ।ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवाशिव हर‍ि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥

Narmada Aarti:नर्मदा आरती Read More »

Sheetla Mata Ki Aarti:शीतला माता की आरती

Sheetla Mata Ki Aarti;शीतला माता की आरती के लाभ Sheetla Mata Ki Aarti:शीतला माता की आरती का पाठ करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। माता शीतला को रोगों की देवी माना जाता है और उनकी पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं शीतला माता की आरती के कुछ प्रमुख लाभ Sheetla Mata Ki Aarti:शीतला माता की आरती का पाठ कैसे करें Sheetla Mata Ki Aarti:कहां से करें आरती Sheetla Mata Ki Aarti:आप शीतला माता के मंदिर में जाकर आरती में शामिल हो सकते हैं या घर पर भी आरती का पाठ कर सकते हैं। ध्यान रखें शीतला माता की आरती (Sheetla Mata Ki Aarti) जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता ।आदि ज्योति महारानी,सब फल की दाता ॥ॐ जय शीतला माता..॥ रतन सिंहासन शोभित,श्वेत छत्र भाता ।ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें,जगमग छवि छाता ॥ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । विष्णु सेवत ठाढ़े,सेवें शिव धाता ।वेद पुराण वरणत,पार नहीं पाता ॥ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । इन्द्र मृदङ्ग बजावत,चन्द्र वीणा हाथा ।सूरज ताल बजावै,नारद मुनि गाता ॥ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । घण्टा शङ्ख शहनाई,बाजै मन भाता ।करै भक्तजन आरती,लखि लखि हर्षाता ॥ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । ब्रह्म रूप वरदानी,तुही तीन काल ज्ञाता ।भक्तन को सुख देती,मातु पिता भ्राता ॥ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । जो जन ध्यान लगावे,प्रेम शक्ति पाता ।सकल मनोरथ पावे,भवनिधि तर जाता ॥ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । रोगों से जो पीड़ित कोई,शरण तेरी आता ।कोढ़ी पावे निर्मल काया,अन्ध नेत्र पाता ॥ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । बांझ पुत्र को पावे,दारिद्र कट जाता ।ताको भजै जो नाहीं,सिर धुनि पछताता ॥ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । शीतल करती जननी,तू ही है जग त्राता ।उत्पत्ति व्याधि बिनाशन,तू सब की घाता ॥ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । दास विचित्र कर जोड़े,सुन मेरी माता ।भक्ति आपनी दीजै,और न कुछ भाता ॥ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता ।आदि ज्योति महारानी,सब फल की दाता ॥ॐ जय शीतला माता..॥

Sheetla Mata Ki Aarti:शीतला माता की आरती Read More »

Shri Balaji Ki Aarti:श्री बालाजी आरती

Balaji Ki Aarti:बालाजी की आरती का नियमित पाठ करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। बालाजी भगवान हनुमान का एक लोकप्रिय रूप हैं और उनकी भक्ति से जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं। आइए जानते हैं बालाजी की आरती के कुछ प्रमुख लाभ: Balaji Ki Aarti:बालाजी की आरती का पाठ कैसे करें Balaji Ki Aarti:कहां से करें आरती Balaji Ki Aarti:आप हनुमान मंदिर में जाकर आरती में शामिल हो सकते हैं या घर पर भी आरती का पाठ कर सकते हैं। ध्यान रखें Shri Balaji Ki Aarti:श्री बालाजी आरती श्री हनुमान जन्मोत्सव, मंगलवार व्रत, शनिवार पूजा, बूढ़े मंगलवार और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से गाये जाने वाली आरती है ॐ जय हनुमत वीरा,स्वामी जय हनुमत वीरा ।संकट मोचन स्वामी,तुम हो रनधीरा ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ पवन पुत्र अंजनी सूत,महिमा अति भारी ।दुःख दरिद्र मिटाओ,संकट सब हारी ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ बाल समय में तुमने,रवि को भक्ष लियो ।देवन स्तुति किन्ही,तुरतहिं छोड़ दियो ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ कपि सुग्रीव राम संग,मैत्री करवाई।अभिमानी बलि मेटयो,कीर्ति रही छाई ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ जारि लंक सिय-सुधि ले आए,वानर हर्षाये ।कारज कठिन सुधारे,रघुबर मन भाये ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ शक्ति लगी लक्ष्मण को,भारी सोच भयो ।लाय संजीवन बूटी,दुःख सब दूर कियो ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ रामहि ले अहिरावण,जब पाताल गयो ।ताहि मारी प्रभु लाय,जय जयकार भयो ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ राजत मेहंदीपुर में,दर्शन सुखकारी ।मंगल और शनिश्चर,मेला है जारी ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ श्री बालाजी की आरती,जो कोई नर गावे ।कहत इन्द्र हर्षित,मनवांछित फल पावे ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥

Shri Balaji Ki Aarti:श्री बालाजी आरती Read More »

Sita Mata Aarti:श्री सीता आरती

Sita Mata Aarti:श्री सीता आरती के लाभ Sita Mata Aarti:श्री सीता माता की आरती का पाठ करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। माता सीता आदर्श नारीत्व का प्रतीक हैं और उनकी भक्ति से जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं। आइए जानते हैं सीता माता की आरती के कुछ प्रमुख लाभ: Sita Mata Aarti:सीता माता की आरती का पाठ कैसे करें Sita Mata Aarti:कहां से करें आरती Sita Mata Aarti:आप सीता माता के मंदिर में जाकर आरती में शामिल हो सकते हैं या घर पर भी आरती का पाठ कर सकते हैं। ध्यान रखें निष्कर्ष: सीता माता की आरती का पाठ एक शक्तिशाली साधन है जो मन को शांत करने और आध्यात्मिक उन्नति करने में मदद करता है। यदि आप नियमित रूप से आरती का पाठ करते हैं तो आपको कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं। Sita Mata Aarti:श्री सीता आरती आरती श्री जनक दुलारी की ।सीता जी रघुवर प्यारी की ॥ जगत जननी जग की विस्तारिणी,नित्य सत्य साकेत विहारिणी,परम दयामयी दिनोधारिणी,सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥ आरती श्री जनक दुलारी की ।सीता जी रघुवर प्यारी की ॥ सती श्रोमणि पति हित कारिणी,पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥ आरती श्री जनक दुलारी की ।सीता जी रघुवर प्यारी की ॥ विमल कीर्ति सब लोकन छाई,नाम लेत पवन मति आई,सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,शरणागत जन भय हरी की ॥ आरती श्री जनक दुलारी की ।सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

Sita Mata Aarti:श्री सीता आरती Read More »