Chhath Puja 2026 Date, Arghya Time And Puja Vidhi : जानिए छठ पूजा की सही तारीख, नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य का पूरा कैलेंडर…..

FESTIVAL
Chhath Puja 2026 Date, Arghya Time And Puja Vidhi : जानिए छठ पूजा की सही तारीख, नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य का पूरा कैलेंडर…..
KARMASU 6 November 2026 9 मिनट पढ़ें
FESTIVAL📅 6 November 2026⏱ 9 मिनट

Chhath Puja 2026 Mein Kab Hai : लोक आस्था, पवित्रता, अनुशासन और प्रकृति प्रेम का प्रतीक महापावन पर्व Chhath Puja 2026 बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा संपूर्ण देश-विदेश में बेहद श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला यह चार दिवसीय महापर्व प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य (सविता) और उनकी बहन Chhath Puja 2026 छठी मैया (प्रकृति के छठे रूप) की उपासना को समर्पित है। सनातन संस्कृति में यह एकमात्र ऐसा पावन पर्व है Chhath Puja 2026 जहाँ न केवल उगते सूर्य को बल्कि अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को भी अर्घ्य देकर उनकी वंदना की जाती है।

यदि आप वर्ष 2026 में Chhath Puja 2026 की सही तारीख, चारों दिनों (नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य) का पंचांगीय कैलेंडर, Chhath Puja 2026 अर्घ्य का शुभ समय, Chhath Puja 2026 पूजा विधि, आवश्यक सामग्री और पौराणिक कथा जानना चाहते हैं, Chhath Puja 2026 तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका है।

छठ पूजा 2026 तिथि, कैलेंडर और पंचांगीय शुभ मुहूर्त :Chhath Puja 2026: Date, Calendar, and Auspicious Timings (Panchang-based)

वैदिक पंचांग और द्रिक पंचांग के अनुसार, छठ महापर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि से होती है और इसका समापन कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उषा अर्घ्य व पारण के साथ होता है।

🙏 पूजा सेवाएँ — अभी बुक करें

वर्ष 2026 में Chhath Puja 2026 का मुख्य दिन (संध्या अर्घ्य) 15 नवंबर 2026, दिन रविवार को मनाया जाएगा। Chhath Puja 2026 इस वर्ष षष्ठी तिथि पर रविवार का दुर्लभ व अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। चूंकि रविवार का दिन सूर्य देव की उपासना के लिए सर्वाधिक फलदायी माना गया है, Chhath Puja 2026 इसलिए इस बार के व्रत का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

चार दिनों के पावन पर्व का संपूर्ण कैलेंडर निम्नलिखित सारणी में दिया गया है….

दिन व चरणतिथि एवं वारमुख्य धार्मिक कृत्य एवं नियम[6]
पहला दिन: नहाय-खाय13 नवंबर 2026 (शुक्रवार)पवित्र नदी/जल निकाय में स्नान, घर-रसोई की सफाई, सात्विक कद्दू-भात (लौकी की सब्जी, चना दाल व अरवा चावल) का प्रसाद[।
दूसरा दिन: खरना (लोहंडा)14 नवंबर 2026 (शनिवार)दिनभर का निर्जला उपवास, संध्या समय गुड़-चावल की खीर (रसियाव) व रोटी का भोग। इसके पश्चात 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत का प्रारंभ।
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (मुख्य दिन)15 नवंबर 2026 (रविवार)घाटो पर अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य दान, ठेकुआ व फलों की सूप/दउरा सजावट, कोसी भराई।
चौथा दिन: उषा अर्घ्य एवं पारण16 नवंबर 2026 (सोमवार)प्रात:काल उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पण, छठी मैया से परिवार व संतान की सुरक्षा की प्रार्थना, प्रसाद ग्रहण कर पारण।

सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय (नई दिल्ली के अनुसार) : Sunrise and sunset times (as per New Delhi)

संध्या अर्घ्य (15 नवंबर 2026): सूर्यास्त शाम 05:28 PM पर होगा।

उषा अर्घ्य (16 नवंबर 2026): सूर्योदय सुबह 06:44 AM पर होगा। (नोट: स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है )

छठ पर्व के चारों दिनों की विस्तृत पूजा विधि एवं नियम : Detailed worship procedures and rules for the four days of the Chhath Puja 2026

छठ महापर्व में स्वच्छता, पवित्रता और अनुशासन का सर्वोच्च स्थान है। Chhath Puja 2026 इन चार दिनों में नियमों का पालन किस प्रकार किया जाता है, आइए विस्तार से समझें

1. पहला दिन: नहाय-खाय (13 नवंबर 2026) : First Day Nahay-Khay (13 November 2026)

Chhath Puja 2026 नहाय-खाय के दिन व्रती (पर्वैतिन) प्रातःकाल किसी पवित्र नदी, तालाब या जलाशय में स्नान करते हैं। इसके बाद पूरे घर और रसोईघर की गहन सफाई की जाती है। Chhath Puja 2026 इस दिन पीतल या मिट्टी के नए चूल्हे पर सात्विक भोजन तैयार किया जाता है, Chhath Puja 2026 जिसमें सेंधा नमक, लौकी (कद्दू), चने की दाल और अरवा चावल शामिल होता है। Chhath Puja 2026 भोजन में प्याज, लहसुन या तामसिक मसालों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। भगवान सूर्य को भोग लगाने के बाद व्रती भोजन ग्रहण करते हैं और यही महापर्व के दौरान उनका अंतिम अन्न-जल ग्रहण होता है।

2. दूसरा दिन खरना या लोहंडा (14 नवंबर 2026) : Second day: Kharna or Lohanda (14 November 2026)

Chhath Puja 2026 का दूसरा दिन खरना कहलाता है। Chhath Puja 2026 इस दिन व्रती दिनभर बिना जल ग्रहण किए कड़ा उपवास रखते हैं। Chhath Puja 2026 शाम के समय नए मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से शुद्ध गाय के दूध और गुड़ में चमेली या नए चावल की खीर (रसियाव) तथा गेहूं की रोटी बनाई जाती है। Chhath Puja 2026 एकांत में छठी मैया और सूर्य देव को खीर-रोटी का भोग लगाया जाता है। Chhath Puja 2026 इसके बाद व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही व्रती का 36 घंटे का अखंड निर्जला (जल के बिना) महाव्रत प्रारंभ हो जाता है।

3. तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (15 नवंबर 2026) :Third Day Sandhya Arghya (15 November 2026)

तीसरा दिन इस महापर्व का सबसे मुख्य और विहंगम दिन होता है। Chhath Puja 2026 इस दिन घर में पूर्ण पवित्रता के साथ शुद्ध देसी घी, गेहूं के आटे और गुड़ से पारंपरिक ‘ठेकुआ’ बनाया जाता है। Chhath Puja 2026 बांस के बने सूप (दउरा) में ठेकुआ, कसार के लड्डू, गन्ना (उख), नारियल, डाभ नींबू, सुथनी, केला, सेब और मौसमी फल सजाए जाते हैं।

अपराह्न काल में पूरा परिवार गाजे-बाजे और पारंपरिक छठ गीतों के साथ नदी या तालाब के घाटों की ओर प्रस्थान करता है। व्रती कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य देव को दूध और जल से अर्घ्य अर्पित करते हैं। Chhath Puja 2026 रात के समय घर पर गन्ने का मंडप बनाकर दीये जलाए जाते हैं Chhath Puja 2026 और ‘कोसी भराई’ का अलौकिक अनुष्ठान संपन्न होता है।

4. चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण (16 नवंबर 2026) : Fourth Day Usha Arghya and Parana (16 November 2026)

कार्तिक शुक्ल सप्तमी की तड़के ब्रह्म मुहूर्त में ही सभी श्रद्धालु पुनः घाट पर एकत्र होते हैं। Chhath Puja 2026 जब पूर्व दिशा में सूर्य देव की लालिमा (उषा किरणें) प्रकट होती हैं, तब जल में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। Chhath Puja 2026 अर्घ्य अर्पण के बाद व्रती और परिजन संतान की रक्षा, दीर्घायु, आरोग्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए छठी मैया से आंचल फैलाकर प्रार्थना करते हैं। Chhath Puja 2026 इसके बाद घाट पर ही अदरक, गुड़ और प्रसाद का अंश ग्रहण करके 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत का पारण किया जाता है।

छठ पूजा सामग्री सूची: Chhath Puja 2026 Items List

भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा के लिए प्रयुक्त होने वाली सभी सामग्रियां प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल होती हैं। Chhath Puja 2026 की मुख्य सामग्री सूची निम्नलिखित है

बांस के सूप और दउरा: प्रसाद रखने के लिए विशेष रूप से बुने गए बांस के सूप और टोकरियां।

मुख्य प्रसाद: ठेकुआ, कसार (चावल या गेहूं के आटे व गुड़ के लड्डू), चावल के पीठा।

कंद-मूल और फल: पत्तों सहित गन्ना (उख), डाभ नींबू (बड़ा नींबू), नारियल, केला (पूरा घौद), सुथनी, शकरकंद (अल्हुआ), हल्दी व अदरक के हरे पौधे।

पूजा के बर्तन व दीये: तांबे/पीतल का कलश व लोटा, मिट्टी के दीये, ढक्कन और बत्तियां।

शृंगार व अन्य वस्तुएं: लाल/पीला सूती कपड़ा, कुमकुम (सिंदूर), अक्षत, कपूर, धूपबत्ती, गंगाजल और गाय का कच्चा दूध।

छठ महापर्व का पौराणिक इतिहास और कथाएं :The Mythological History and Legends of the Chhath Puja 2026

सनातन धर्मग्रंथों, रामायण और महाभारत में छठ पूजा से जुड़ी कई अमर पौराणिक कथाएं मिलती हैं

माता सीता द्वारा सूर्य पूजा (रामायण काल): मान्यता है कि 14 वर्ष का वनवास पूरा कर जब भगवान श्रीराम और माता सीता अयोध्या लौटे, तब कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन उन्होंने रामराज्य की स्थापना के अवसर पर सूर्य देव का उपवास रखा था। Chhath Puja 2026 वहीं एक अन्य कथा के अनुसार, मुंगेर (बिहार) में गंगा तट पर और वाल्मीकि आश्रम (नारायणी नदी तट) में माता सीता ने स्वयं छठ महापर्व का अनुष्ठान किया था।

सूर्यपुत्र कर्ण द्वारा पूजा (महाभारत काल): महाभारत के अनुसार, अँग देश (भागलपुर, बिहार) के राजा और सूर्यपुत्र कर्ण प्रतिदिन कमर तक जल में खड़े होकर अपने पिता सूर्य देव की उपासना करते थे और अर्घ्य देते थे[20]। कर्ण की अनन्य भक्ति से ही जल में खड़े होकर अर्घ्य देने की परंपरा लोकप्रिय हुई।

द्रौपदी का सूर्य व्रत: महाभारत काल में ही जब पांडव अपना राजपाट हारकर वन-वन भटक रहे थे, तब द्रौपदी ने पांडवों के कष्ट दूर करने और खोया हुआ राज्य पुनः प्राप्त करने के लिए छठ व्रत किया था।

राजा प्रियंवद और षष्ठी देवी कथा: ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, राजा प्रियंवद की कोई संतान नहीं थी। Chhath Puja 2026 महर्षि कश्यप द्वारा कराए गए यज्ञ से पुत्र तो हुआ, परंतु वह मृत पैदा हुआ। Chhath Puja 2026 राजा के शोक को देखकर ब्रह्मा जी की मानस पुत्री ‘देवसेना’ (प्रकृति की छठी कला, जिन्हें छठी मैया कहा जाता है) प्रकट हुईं। Chhath Puja 2026 उन्होंने मृत बालक को स्पर्श कर जीवित कर दिया। राजा ने कृतज्ञ होकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को देवी षष्ठी का पूजन किया।

    प्रकृति संरक्षण और सामंजस्य का प्रतीक (Ecological & Social Harmony)

    आधुनिक युग में Chhath Puja 2026 केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का विश्व स्तरीय मॉडल है…

    शून्य प्लास्टिक व पर्यावरण-अनुकूल: छठ पूजा में प्लास्टिक, रसायनों या कृत्रिम सजावट का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। Chhath Puja 2026 सूप, दउरा, दीये, कंद-मूल और फल सब कुछ सीधे प्रकृति से प्राप्त होता है और पुनः मिट्टी व जल में लीन हो जाता है।

    सामाजिक समानता: इस पावन पर्व में कोई छोटा-बड़ा, धनी-निर्धन या जाति-भेद नहीं होता। Chhath Puja 2026 राजा हो या रंक, सभी एक ही नदी के तट पर एक साथ जल में खड़े होकर एक ही प्रकार के सूप और प्रसाद से सूर्य देव की पूजा करते हैं।

    युनेस्को (UNESCO) सांस्कृतिक धरोहर नामांकन: भारत सरकार ने छठ महापर्व की अभूतपूर्व सांस्कृतिक धरोहर, जनभागीदारी और पारिस्थितिक संतुलन को देखते हुए इसे यूनेस्को (UNESCO) की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) सूची के लिए आधिकारिक तौर……

    App Download