Maa Shailputri Puja Vidhi 2026 : सनातन धर्म में शक्ति साधना का पर्व शारदीय नवरात्रि अत्यंत पावन और फलदायी माना गया है। नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के नौ पवित्र रूपों में से प्रथम रूप देवी शैलपुत्री की उपासना की जाती है[1][2]। पर्वतराज हिमालय (शैल) के घर पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। Maa Shailputri नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना (घटस्थापना) करके मां शैलपुत्री की पूजा करने से साधक के जीवन में स्थिरता, सुख, आरोग्य और समृद्धि का आगमन होता है ।
यदि आप भी नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं इसमें हम घटस्थापना 2026 का सटीक शुभ मुहूर्त, मां शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप, संपूर्ण पूजन विधि, प्रिय भोग, सिद्ध मंत्र, शैलपुत्री देवी कवच, पौराणिक व्रत कथा, व्रत नियम और आरती का सविस्तार वर्णन करेंगे।
मां शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप और आध्यात्मिक महत्व : The Divine Form and Spiritual Significance of Goddess Shailaputri
मां शैलपुत्री Maa Shailputri का स्वरूप अत्यंत पवित्र, शांत, सरल, सुशील और करुणा से परिपूर्ण है । माता नंदी बैल (वृषभ) पर सवार होती हैं, इसीलिए इन्हें ‘वृषारूढ़ा’ या ‘वृषभारूढ़ा’ भी कहा जाता है। देवी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है ।
आध्यात्मिक दृष्टि से Maa Shailputri नवरात्रि के प्रथम दिन की पूजा में योगीजन अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं। मूलाधार चक्र हमारे शरीर का मुख्य ऊर्जा केंद्र है, जो व्यक्ति को जीवन में स्थिरता, सुरक्षा, धैर्य और मानसिक शांति प्रदान करता है।
Ghatsthapana Muhurat 2026: घटस्थापना का सबसे शुभ समय
वैदिक पंचांगीय गणना के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि के साथ हो रहा है । इस दिन घटस्थापना के लिए पंचांगीय समय निम्नलिखित है…..
प्रतिपदा तिथि की अवधि: 11 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय (नई दिल्ली में प्रातः 06:19 AM) से लेकर रात्रि 09:32 PM तक प्रतिपदा तिथि रहेगी ।
प्रातःकालीन घटस्थापना मुहूर्त: प्रातः 06:19 AM से सुबह 10:12 AM तक (नई दिल्ली अनुसार) ।
अभिजित मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ व सुरक्षित विकल्प): सुबह 11:44 AM से दोपहर 12:30 PM तक (नई दिल्ली) तथा दोपहर 12:01 PM से 12:48 PM तक (मुंबई)।
2026 में अभिजित मुहूर्त का विशेष महत्व: शास्त्रों में घटस्थापना के समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का त्याग किया जाता है। वर्ष 2026 में 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र (रात 10:32 PM तक) और वैधृति योग (रात 09:05 PM तक) दिनभर व्याप्त रहेंगे। Maa Shailputri ज्योतिष शास्त्र के नियमानुसार जब चित्रा व वैधृति से बचना संभव न हो, तो मध्याह्न काल का ‘अभिजित मुहूर्त’ सभी दोषों से मुक्त होकर सबसे सुरक्षित और फलदायी विकल्प माना जाता है ।
घटस्थापना व मां शैलपुत्री की संपूर्ण पूजन विधि : Complete Worship Rituals for Ghatsthapana and Goddess Shailputri
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना और षोडशोपचार पूजन का विशेष शास्त्रीय विधान है
1. पूजन सामग्री (Puja Samagri):
चौकी व वस्त्र: लकड़ी की चौकी, लाल वस्त्र, मां दुर्गा की मूर्ति/चित्र।
घटस्थापना सामग्री: मिट्टी/तांबे का कलश, शुद्ध जल, गंगाजल, मौली (कलावा), आम के 5/7 पत्ते, पानी वाला नारियल, लाल चुनरी, सिक्का, सुपारी, लौंग, इलायची, हल्दी की गांठ और अक्षत।
जौ बोने की सामग्री: मिट्टी का चौड़ा पात्र, स्वच्छ छानकर रखी मिट्टी, जौ (या गेहूं) के दाने।
अन्य सामग्री: गाय का शुद्ध घी, 5 देसी घी के दीपक, कपूर, धूप, अक्षत, कुमकुम, रोली, चंदन, सफेद व लाल पुष्प, फल, और सफेद मिष्ठान।
2. चरण-दर-चरण पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi):
स्थान शुद्धि व संकल्प: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके स्वच्छ श्वेत या लाल वस्त्र धारण करें। Maa Shailputri पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
जौ बोना व कलश स्थापना: मिट्टी के पात्र में मिट्टी बिछाकर जौ बिखेरें। कलश में जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी, अक्षत व हल्दी डालें। Maa Shailputri कलश के मुख पर आम के पत्ते सजाएं, कलावा बांधें और लाल चुनरी में लिपटा नारियल रखें। कलश को जौ के पात्र के बीच में स्थापित करें।
मां शैलपुत्री की स्थापना व आह्वान: चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर Maa Shailputri मां शैलपुत्री की प्रतिमा रखें। रोली या केसर से ‘शं’ लिखें। Maa Shailputri हाथ में अक्षत और लाल पुष्प लेकर मां का ध्यान करें और सभी तीर्थों, नदियों व दिशाओं का आह्वान करें।
अखंड ज्योति व धूप-दीप: कलश व मां के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं तथा 5 घी के दीये प्रज्वलित करें।
तिलक, पुष्प व वस्त्र: माता को कुमकुम का तिलक लगाएं, अक्षत, लाल व सफेद पुष्पमाला अर्पित करें।
भोग अर्पण: मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी, सफेद मिठाई, खीर, मावा, फल (केला व सेब) और मिश्री का भोग लगाएं।
मंत्र जाप व पाठ: मां शैलपुत्री Maa Shailputri के ध्यान मंत्रों व बीज मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। Maa Shailputri इसके उपरांत शैलपुत्री देवी कवच, दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या व्रत कथा का पाठ करें।
आरती व क्षमा याचना: कपूर और घी के दीपक से मां शैलपुत्री की आरती उतारें तथा जाने-अनजाने हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
मां शैलपुत्री के सिद्ध मंत्र, ध्यान व स्तोत्र :Siddha Mantras, Meditation, and Stotra of Goddess Shailaputri
1. मुख्य ध्यान मंत्र (Dhyan Mantra):
> वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्। वृषारूढ़ां शूलधरां Maa Shailputri शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
2. मूल बीज मंत्र (Beej Mantra):
> “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥”ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नमः॥” “ॐ शं शैलपुत्री देव्यै नमः॥”
3. स्तुति मंत्र (Stuti Mantra):
> या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
4. शैलपुत्री स्तोत्र पाठ (Stotra Path):
> प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्। धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥ त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्। सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥ चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन। मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
शैलपुत्री देवी कवच (Shailputri Devi Kavach)
शास्त्रों में शैलपुत्री देवी कवच का पाठ अत्यंत रहस्यमयी और सुरक्षात्मक माना गया है। इसका नित्य पाठ करने से साधक की बुरी शक्तियों, नकारात्मक ऊर्जाओं, बीमारियों और आर्थिक तंगी से रक्षा होती है
कवच पाठ:
> ॐ कार्तिकेयि वदनं पातु, ललाटे शंखधारिणी। नेत्रे मे त्रिनेत्रा मां, श्रोत्रे मां शिवनन्दिनी॥ नासायां पातु वाराही, वदने सर्वमङ्गला।कण्ठे पातु जगद्धात्री, स्कन्धे मां विकटानना॥ हस्तयोः शूलधारिणी, हृदये पातु पार्वती। नाभौ पातु जगद्धात्री, जठरे माता चण्डिका॥ गुह्ये गह्वरे मां रक्षेत, पृष्ठे पातु शिवानुजा। पादयोः मां महादेवी, सर्वाङ्गे शैलसुन्दरी॥ रात्रौ दिवा सर्वदा मां, पातु शैलात्मजा सदा॥
मां शैलपुत्री का प्रिय भोग और अर्पण
शास्त्रों के अनुसार, मां शैलपुत्री को सफेद रंग की सात्विक वस्तुएं और गाय का शुद्ध देसी घी सर्वाधिक प्रिय है
गाय का शुद्ध घी: प्रथम दिन मां शैलपुत्री Maa Shailputri को गाय के शुद्ध घी का नैवेद्य अर्पित करने से भक्त को आरोग्यता, दीर्घायु, निरोगी काया और मानसिक शांति का वरदान मिलता है
श्वेत मिष्ठान: दूध की बर्फी, मलाई पेड़ा, खीर, सफेद लड्डू, रसगुल्ला या कलाकंद
फल व अन्य वस्तुएं: केला, सेब, नारियल (गोला-गरी), मिश्री और सफेद तिल का भोग विशेष रूप से शुभ फल प्रदान करता है।
मां शैलपुत्री की पावन व्रत कथा :Holy fasting story of Maa Shailputri
पौराणिक कथा के अनुसार, मां शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में प्रजापति दक्ष की पुत्री ‘सती’ थीं और उनका विवाह भगवान शिव से हुआ था एक बार प्रजापति दक्ष ने एक अत्यंत विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने सभी देवताओं को आमंत्रित किया, किंतु भगवान शिव और सती को निमंत्रित नहीं किया।
देवी सती को जब पिता के यज्ञ की जानकारी मिली, तो वे वहां जाने के लिए विकल हो उठीं। Maa Shailputri भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि बिना आमंत्रण जाना उचित नहीं है, Maa Shailputri परंतु सती का प्रबल आग्रह देखकर उन्होंने जाने की अनुमति दे दी। जब सती अपने पिता के घर पहुंचीं, तो केवल उनकी माता ने ही उन्हें प्रेम दिया। पिता दक्ष और बहनों ने भगवान शिव के प्रति अपमानजनक और व्यंग्यात्मक वचन कहे ।
पति का यह दारुण अपमान सती सहन न कर सकीं और उन्होंने तत्काल योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को जलाकर भस्म कर दिया । Maa Shailputri इस दुखद घटना से क्रोधित होकर भगवान शिव ने वीरभद्र व अपने गणों को भेजकर दक्ष का यज्ञ विध्वंस करा दिया।
वही देवी सती अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय (शैलराज) की पुत्री के रूप में अवतरित हुईं और ‘शैलपुत्री’ कहलाईं । Maa Shailputri पार्वती और हैमवती भी इन्हीं के पावन नाम हैं। शैलपुत्री के रूप में पुनः तपस्या करके इन्होंने भगवान शिव से विवाह किया और उनकी अर्द्धांगिनी बनीं….
नवरात्रि व्रत के 10 महत्वपूर्ण नियम :10 Important Rules for the Navratri Fast
नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत रखने वाले साधकों को इन 10 नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए
ब्रह्मचर्य का पालन: नौ दिनों तक पूर्ण ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें
सत्य व मधुर वाणी: झूठ न बोलें, क्रोध न करें और वाणी पर संयम रखें
महिलाओं का सम्मान: किसी भी स्थिति में किसी स्त्री, कन्या या वृद्ध का अपमान न करें
तामसिक पदार्थों का त्याग: लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, गुटका, पान व मसालेदार भोजन का पूर्ण त्याग करें ।
सात्विक उपवास: अपनी क्षमतानुसार (रसोपवास, फलोपवास या एकभुक्त) ही व्रत रखें; अति-भोजन से बचें ।
नियमित पूजन: प्रतिदिन सुबह-शाम समय पर मां दुर्गा का पूजन, दीप प्रज्वलन व आरती करें।
स्वच्छता व सात्विकता: शरीर, वस्त्र और मन की स्वच्छता बनाए रखें ।
व्रत भंग न करें: बिना किसी अपरिहार्य कारण के व्रत बीच में न तोड़ें।
अशौच में व्रत न रखें: अस्वस्थ या रजस्वरा स्थिति होने पर मानसिक पूजा करें।
उद्यापन व कन्या पूजन: नवमी/अष्टमी के दिन व्रत का विधिवत पारण व कन्या पूजन करके ही व्रत पूर्ण करें।
मां शैलपुत्री की आरती (Maa Shailputri Ki Aarti)
> शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार॥ शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी॥ पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे॥ ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू॥ सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी॥ उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो॥ घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के॥ श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं॥ जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे॥ मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो॥ जोर से बोलो जय माता दी! सारे बोले जय माता दी!
मां शैलपुत्री पूजन का संक्षिप्त सार (Summary Table)
| पूजन पहलू | शास्त्रीय विवरण |
|---|---|
| देवी का स्वरूप | वृषारूढ़ा (नंदी सवारी), दाहिने हाथ में त्रिशूल, बाएं में कमल |
| घटस्थापना तिथि 2026 | रविवार, 11 अक्टूबर 2026 |
| शुभ मुहूर्त 2026 | प्रातः 06:19 AM – 10:12 AM / अभिजित मुहूर्त 11:44 AM – 12:30 PM |
| प्रिय भोग | गाय का शुद्ध देसी घी, सफेद मिठाई, खीर, केला व सेब |
| मुख्य मंत्र | “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” / “वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्… |
| आध्यात्मिक चक्र | मूलाधार चक्र (स्थिरता व सुरक्षा का प्रतीक) |

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