Durga Saptashati

Durga Saptashati Path Mantra Benefits In Navrtari : जानिए दुर्गा सप्तशती पाठ का महात्म्य, नियम और आवृत्ति के फल….

Durga Saptashati Path karne Ke Fayden : सनातन धर्म और वैदिक परंपरा में जगज्जननी मां भगवती की साधना और उपासना का सर्वोपरि ग्रंथ ‘दुर्गा सप्तशती’ को माना गया है। धर्मग्रंथों में वर्णन मिलता है कि जिस प्रकार देवताओं में भगवान विष्णु और यज्ञों में अश्वमेघ यज्ञ श्रेष्ठ है, उसी प्रकार समस्त स्तोत्रों और धार्मिक पाठों में दुर्गा सप्तशती का पाठ परम पवित्र, भुक्ति-मुक्ति प्रदाता और कल्याणकारी है। उत्तर भारत में इसे दुर्गा सप्तशती कहा जाता है, दक्षिण भारत में ‘देवी माहात्म्य’ (Devi Mahatmyam) और पश्चिम बंगाल में इसे ‘चंडी’ (Chandi) के पावन नाम से जाना जाता है।

महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी द्वारा संकलित यह अलौकिक ग्रंथ ‘मार्कंडेय पुराण’ का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है । इस पावन ग्रंथ में 13 अध्याय और कुल 700 श्लोक निहित हैं । इन श्लोकों में देवी भगवती के तीन प्रमुख स्वरूपों महाकाली (तामसिक/विष्णु माया), महालक्ष्मी (राजसिक) और महासरस्वती (सात्विक) द्वारा अधर्म का नाश करने और मधु-कैटभ, महिषासुर, धूम्रलोचन, चंड-मुंड, रक्तबीज तथा शुंभ-निशुंभ जैसे भयानक दैत्यों के वध की गाथा गाई गई है ।

यदि आप भी नवरात्रि या सामान्य दिनों में भक्तिभाव से Durga saptashati path करना चाहते हैं इस पावन पाठ के धार्मिक महात्म्य, पूजन विधियों (त्रयंगम व नवांगम), नवरात्रि के 9 दिनों का दैनिक क्रम, विभिन्न आवृत्तियों के चमत्कारिक फल और इसके पठन से मिलने वाले अलौकिक लाभों का सविस्तार विवेचन करेंगे ।

दुर्गा सप्तशती पाठ का धार्मिक व आध्यात्मिक महात्म्य : The Religious and Spiritual Significance of Reciting the Durga Saptashati

शास्त्रों में वर्णन है कि जब-जब संसार में असुरी शक्तियां बढ़ती हैं और लोक कल्याण संकट में पड़ता है, तब-तब मां जगदंबे दिव्य अवतार लेकर भक्तों की रक्षा करती हैं । Durga Saptashati दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठानपूर्वक पाठ करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और बड़े से बड़ा संकट भी छूमंतर हो जाता है ।

Durga saptashati path के 700 मंत्र केवल पौराणिक गाथाएं नहीं हैं, बल्कि ये अलौकिक जागृत मंत्र हैं जो व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, ग्रह दोष, दरिद्रता और भय का नाश करके उसमें सकारात्मक शक्ति का संचार करते हैं।

दुर्गा सप्तशती पठन की दो प्रमुख शास्त्रीय विधियां : Two major scriptural methods for reciting the Durga Saptashati.

परंपरागत रूप से इस पवित्र ग्रंथ का पाठ दो प्रमुख शास्त्रीय पद्धतियों द्वारा किया जाता है

1. त्रयंगम विधि (Trayangam Method)

त्रयंगम विधि अत्यंत सरल और लोकप्रिय मानी जाती है। Durga Saptashati इसमें मुख्य 13 अध्यायों का पाठ करने से पूर्व तीन प्रमुख प्रार्थनाओं और मंत्र का जप किया जाता है

नवाक्षरी मंत्र का जप (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे)।

देवी कवच (Devi Kavach)।

अर्गला स्तोत्रम (Argala Stotram)।

देवी कीलकम (Kilak Stotram)।

इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का क्रमबद्ध पाठ किया जाता है।

2. नवांगम विधि (Navangam Method)

नवांगम विधि विशेष अनुष्ठानों और साधनाओं में अपनाई जाती है। Durga Saptashati इसमें मुख्य पाठ प्रारंभ करने से पूर्व 9 अंगभूत प्रार्थनाओं का पाठ अनिवार्य होता है….

देवी न्यास (Devi Nyasa)

देवी आह्वान (Devi Aahvan)

देवी नमामि (Devi Namami)

अर्गला स्तोत्रम (Argala Stotram)

कीलक स्तोत्रम (Kilak Stotram)

देवी हृदय (Devi Hridaya)

ढाल (Dhala)

देवी ध्यान (Devi Dhyan)

देवी कवच (Devi Kavach)

    इन 9 प्रार्थनाओं के उपरांत ही 13 अध्यायों का पठन प्रारंभ किया जाता है।

    नवरात्रि में 9 दिनों का दैनिक पाठ क्रम : Daily recitation schedule for the nine days of Navratri:

    नवरात्रि के पावन पर्व पर संपूर्ण Durga saptashati path को 9 दिनों में व्यवस्थित रूप से विभाजित करके पढ़ने का विधान है…

    प्रथम दिन (प्रतिपदा): अध्याय 1 (मधु-कैटभ संहार की कथा)।

    द्वितीय दिन (द्वितीया): अध्याय 2, 3 और 4 (महिषासुर वध की कथा व शक्रादि स्तुति)।

    तृतीय दिन (तृतीया): अध्याय 5 और 6 (धूम्रलोचन वध का प्रसंग)।

    चतुर्थ दिन (चतुर्थी): अध्याय 7 (चंड-मुंड संहार)।

    पंचम दिन (पंचमी): अध्याय 8 (रक्तबीज वध की अलौकिक कथा)।

    षष्ठम दिन (षष्ठी): अध्याय 9 और 10 (शुंभ-निशुंभ वध)।

    सप्तम दिन (सप्तमी): अध्याय 11 (नारायणी स्तुति)।

    अष्टम दिन (अष्टमी): अध्याय 12 (फल श्रुति – पाठ के लाभ)।

    नवम दिन (नवमी): अध्याय 13 (राजा सुरथ और वैश्य समाधि को देवी का आशीर्वाद)।

    विजयादशमी (दशहरा): पाठ की पूर्णता के पश्चात ‘देवी अपराध क्षमा स्तोत्रम’ का पाठ किया जाता है।

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    जय माता दी

    दुर्गा सप्तशती की आवृत्तियों के चमत्कारिक फल:Miraculous results of Durga Saptashati frequencies

    ज्योतिषाचार्यों और धर्मशास्त्रों के अनुसार, निष्ठापूर्वक Durga saptashati path की अलग-अलग संख्या में आवृत्तियां (बार-बार पाठ) करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है…

    3 आवृत्तियां (3 बार पाठ): जीवन में आने वाले अचानक संकटों और दुखों की शांति होती है।

    5 आवृत्तियां (5 बार पाठ): कुंडली के जटिल ग्रह दोषों का शमन होता है।

    7 आवृत्तियां (7 बार पाठ): किसी भी प्रकार के महाभय का निवारण होता है।

    9 आवृत्तियां (9 बार पाठ): प्राण संकट से मुक्ति और परम शांति की प्राप्ति होती है।

    11 आवृत्तियां (11 बार पाठ): राजकृपा, सरकारी कार्यों में सफलता और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

    12 आवृत्तियां (12 बार पाठ): मनोवांछित सिद्धियां मिलती हैं और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है।

    14 आवृत्तियां (14 बार पाठ): शत्रुओं और विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है।

    15 आवृत्तियां (15 बार पाठ): गृहस्थ जीवन में सुख, समृद्धि और श्री-लक्ष्मी का वास होता है।

    16 आवृत्तियां (16 बार पाठ): पुत्र, पौत्र, धन और धान्य की प्रचुर उपलब्धि होती है।

    17 आवृत्तियां (17 बार पाठ): व्यक्ति को राजकीय दण्ड व कानून से जुड़े भय से मुक्ति मिलती है।

    18 आवृत्तियां (18 बार पाठ): बैर रखने वाले प्रतिद्वंद्वी परास्त होते हैं।

    20 आवृत्तियां (20 बार पाठ): किसी भी बड़े महासंकट से मुक्ति मिलती है।

    25 आवृत्तियां (25 बार पाठ): किसी भी प्रकार के बंधन (मानसिक, शारीरिक या कानूनी) से छुटकारा मिलता है।

    100 आवृत्तियां (शत चंडी): 100 बार Durga saptashati path करने से असाध्य रोगों की शांति, त्रिविध तापों से रक्षा, धन-लक्ष्मी की वृद्धि और अंत में मोक्ष की सुगम प्राप्ति होती है।

    108 आवृत्तियां: 108 बार पाठ करने से 100 अश्वमेघ यज्ञों के समान फल और समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

    1000 आवृत्तियां (सहस्र चंडी): सहस्र बार पाठ करने से अचल लक्ष्मी की प्राप्ति और परम मोक्ष का द्वार खुलता है।

    दुर्गा सप्तशती पठन के प्रमुख लाभ : Key benefits of reciting the Durga Saptashati:

    ग्रंथ के 12वें अध्याय (फल श्रुति) में स्वयं देवी भगवती ने देवताओं को इस पावन स्तोत्र के पठन से मिलने वाले लाभों का वर्णन किया है…..

    उपद्रवों व आपदाओं से रक्षा: जिस स्थान पर नियमित Durga saptashati path होता है, वहां आग, बाढ़, महामारी या प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप नहीं रहता।

    दरिद्रता का नाश: घर से गरीबी और आर्थिक तंगी दूर होती है तथा धन-धान्य के नए स्रोत खुलते हैं।

    ग्रह दोष व बुरी नजर से बचाव: नवग्रहों के दुष्प्रभाव, दुष्ट आत्माओं और नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण सुरक्षा कवच मिलता है।

    मानसिक शांति व सकारात्मक ऊर्जा: व्यक्ति का मन शांत होता है और परिवार में आपसी सौहार्द बढ़ता है।

    रोगों से मुक्ति: नियमित पाठ करने से शारीरिक व्याधियां दूर होती हैं और व्यक्ति दीर्घायु होता है।

      पाठ करते समय ध्यान रखने योग्य आवश्यक नियम :Essential rules to observe while reciting.

      शास्त्रों के अनुसार, जब भी आप Durga saptashati path करें, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें

      शुद्धता व आसन: प्रातःकाल स्नान के पश्चात लाल या पीले वस्त्र धारण करें और कुश या ऊन के लाल आसन पर बैठें।

      स्पष्ट उच्चारण: श्लोकों का उच्चारण बिल्कुल स्पष्ट, न अति-शीघ्र और न अति-धीमा होना चाहिए।

      पुस्तकाधार का प्रयोग: पुस्तक को सीधे हाथ में लेकर न पढ़ें, बल्कि काष्ठ के stand (व्यासपीठ) पर रखकर ही पाठ करें।

      दीपक प्रज्वलन: पाठ प्रारंभ करने से पूर्व मां भगवती के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक और धूप अवश्य जलाएं।

      क्षमा याचना: पाठ के समापन पर अपनी अनजानी भूल-चूक के लिए देवी माँ से हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।

      विभिन्न पाठ विधियों व आवृत्तियों का संक्षिप्त विवरण : A brief overview of various recitation methods and frequencies.
      पाठ की स्थिति / संख्यामुख्य उद्देश्य / प्राप्त होने वाला फल
      त्रयंगम विधिनवाक्षरी मंत्र, कवच, अर्गला, कीलक व 13 अध्याय
      नवांगम विधि9 विशेष प्रारम्भिक प्रार्थनाएं व 13 अध्याय
      3 आवृत्तियांसंकटों और दुखों का निवारण
      7 आवृत्तियांमहाभय से मुक्ति
      12 आवृत्तियांकाम्य सिद्धि व शत्रु नाश
      100 आवृत्तियां (शत चंडी)असाध्य रोग शांति, मोक्ष व सर्वसिद्धि
      108 आवृत्तियां100 अश्वमेघ यज्ञों के समान फल

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