भगवान दत्तात्रेय जन्म | पतिव्रता सती माता अनसूइया की कथा (Pativrata Sati Mata Ansuiya Ki Katha)

EKADASHI
भगवान दत्तात्रेय जन्म | पतिव्रता सती माता अनसूइया की कथा (Pativrata Sati Mata Ansuiya Ki Katha)
KARMASU 14 March 2022 3 मिनट पढ़ें
EKADASHI📅 14 March 2022🔄 अपडेट: 3 October 2023⏱ 3 मिनट

भगवान को अपने भक्तों का यश बढ़ाना होता है तो वे नाना प्रकार की लीलाएँ करते हैं। श्री लक्ष्मी जी, माता सती और देवी सरस्वती जी को अपने पतिव्रत का बड़ा अभिमान था।
तीनों देवियों के अभिमान को नष्ट करने तथा अपनी परम भक्तिनी पतिव्रता धर्मचारिणी अनसूया के मान बढ़ाने के लिये भगवान ने नारद जी के मन में प्रेरणा की। फलत: वे श्री लक्ष्मी जी के पास पहुँचे, नारद जी को देखकर लक्ष्मी जी का मुख-कमल के समान खिल उठा।

लक्ष्मी जी ने कहा: आइये, नारद जी! आप तो बहुत दिनों बाद आये। कहिये, क्या हाल है?
नारद जी बोले: माता! क्या बताऊँ, कुछ बताते नहीं बनता। अब की बार मैं घूमता हुआ चित्रकूट की ओर चला गया। वहाँ मैं महर्षि अत्रि के आश्रम पर पहुँचा। माता! मैं तो महर्षि की पत्नी अनुसूया जी के दर्शन करके कृतार्थ हो गया। तीनों लोकों में उनके समान कोई भी पतिव्रता स्त्री नहीं है।

लक्ष्मी जी को नारद जी की बात पर आश्चर्य हुआ।
उन्होंने पूछा: नारद! क्या वह मुझसे भी बढ़कर पतिव्रता है?
नारद जी ने कहा: माता! आप ही नहीं, तीनों लोकों में कोई भी स्त्री सती अनुसूया की तुलना में किसी भी गिनती में नहीं है।

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dattatreya jayanti 2019 sati anusuya ki pariksha katha - सती अनुसुईया के क्रोध से खत्‍म होने लगी सृष्टि तो ब्रह्मा, विष्‍णु और शिव को बनना पड़ा बच्‍चा | religious blog

इसी प्रकार देवर्षि नारद ने माता पार्वती एवं माता सरस्वती के पास जाकर उनके मन में भी सती अनुसूया के प्रति यही भाव जगा दिया। अन्त में तीनों देवियों ने त्रिदेवों से हठ करके उन्हें सती अनुसूया के सतीत्व की परीक्षा लेने के लिये आग्रह किया। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश महर्षि अत्रि के आश्रम पर पहुँचे। तीनों देव मुनि वेष में थे। उस समय महर्षि अत्रि अपने आश्रम मे नहीं थे। अतिथि के रूप में आये हुए त्रिदेवों का सती अनुसूया ने स्वागत-सत्कार करना चाहा, किन्तु त्रिदेवों ने उसे अस्वीकार कर दिया।

त्रिदेव बन गए शिशु
सती अनुसूया ने उनसे पूछा: मुनियो! मुझसे कौन-सा ऐसा अपराध हो गया, जो आप लोग मेरे द्वारा की हुई पूजा को ग्रहण नहीं कर रहे हैं?
मुनियों ने कहा: देवि! यदि आप बिना वस्त्र के हमारा आतिथ्य करें तो हम आपके यहाँ भिक्षा ग्रहण करेंगे।

यह सुनकर सती अनुसूया सोच में पड़ गयीं। उन्होंने ध्यान लगाकर देखा तो सारा रहस्य उनकी समझ में आ गया।
वे बोलीं: मैं आप लोगों का विवस्त्र होकर आतिथ्य करूँगी। यदि मैं सच्ची पतिव्रता हूँ और मैंने कभी भी काम-भाव से किसी पर-पुरुष का चिन्तन नहीं किया हो तो आप तीनों छ:-छ: माह के बच्चे बन जाएँ।

पतिव्रता माता अनसूइया का इतना कहना था कि त्रिदेव छ:-छ: माह के बच्चे बन गये। माता अनुसूया ने विवस्त्र होकर उन्हें अपना स्तनपान कराया और उन्हें पालने में खेलने के लिये डाल दिया। इस प्रकार त्रिदेव माता अनुसूया के वात्सल्य प्रेम के बन्दी बन गये।

उधर जब तीनों देवियों ने देखा कि हमारे पति तो आये ही नहीं तो वे चिन्तित हो गयीं। अंततः तीनों देवियाँ अपने पतियों का पता लगाने के लिये चित्रकूट गयीं। संयोग से वहीं नारद जी से उनकी भेंट हो गयी। त्रिदेवियों ने उनसे अपने पतियों के बारे मे पूछा। नारद जी ने कहा कि वे लोग तो आश्रम में बालक बनकर खेल रहे हैं।

दत्तात्रेय जन्म कथा
त्रिदेवियों ने अनुसूया जी से आश्रम में प्रवेश करने की आज्ञा माँगी। अनुसूया जी ने उनसे उनका परिचय पूछा?
त्रिदेवियों ने कहा: माता जी! हम तो आपकी बहुएँ हैं। आप हमें क्षमा करदें और हमारे पतियों को लौटा दें।
अनुसूया जी का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने बच्चों पर जल छिड़ककर उन्हें उनका पूर्व रूप प्रदान किया और अन्तत: उन त्रिदेवों की पूजा-स्तुति की।

त्रिदेवों ने प्रसन्न होकर अपने-अपने अंशों से अनुसूया के यहाँ पुत्र रूप में प्रकट होने का वरदान दिया। इस प्रकार त्रिदेवों के अंश के रूप मे दत्तात्रेय का जन्म हुआ।

भगवान दत्तात्रेय जन्म | पतिव्रता सती माता अनसूइया की कथा (Pativrata Sati Mata Ansuiya Ki Katha)

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