2026

Maha Shivratri 2026

Maha Shivratri 2026 Date And Time: महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है महादेव और गौरी के मिलन की रात्रि, जानें चारों प्रहर के शुभ मुहूर्त और मनोकामना पूर्ति के अचूक उपाय…

“करपूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।” Mahashivratri 2026 Mein Kab Hai: सनातन धर्म में देवाधिदेव महादेव की उपासना के लिए शिवरात्रि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वैसे तो हर माह शिवरात्रि आती है, लेकिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाली महाशिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक है। यह वह पावन रात्रि है जब शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। वर्ष 2026 में Maha Shivratri 2026 को लेकर अभी से भक्तों में उत्साह है, लेकिन तारीख और मुहूर्त को लेकर कुछ दुविधा भी है। क्या आप जानते हैं कि महाशिवरात्रि की रात को ‘सिद्धि की रात्रि’ भी कहा जाता है? माना जाता है कि इस रात वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है। यदि आप Maha Shivratri 2026 पर विधि-विधान से व्रत रखकर चारों प्रहर की पूजा करते हैं, तो बड़े से बड़ा कष्ट भी दूर हो सकता है। आज के इस विस्तृत लेख में हम आपको इस पर्व की सही तिथि, निशीथ काल का समय, पूजा विधि और उन खास उपायों के बारे में बताएंगे जो आपकी सोई हुई किस्मत जगा सकते हैं। Maha Shivratri 2026 Date And Time: महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है महादेव और गौरी के मिलन की रात्रि….. Maha Shivratri 2026: सही तारीख और दिन (Date and Day) सबसे पहले पंचांग की गणना को समझना आवश्यक है ताकि आप सही दिन व्रत रख सकें। पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में, Maha Shivratri 2026 का पावन पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। चतुर्दशी तिथि का समय: व्रत के लिए तिथि का सही ज्ञान होना जरुरी है। Maha Shivratri 2026 स्रोतों के अनुसार चतुर्दशी तिथि की समय सारिणी इस प्रकार है: तिथि प्रारम्भ: 15 फरवरी 2026 को शाम 05 बजकर 04 मिनट से। तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026 को शाम 05 बजकर 34 मिनट तक (कुछ पंचांगों में सुबह 5:34 भी बताया गया है, लेकिन पूजा रात्रि व्यापिनी होती है)। चूंकि महाशिवरात्रि की पूजा मुख्य रूप से मध्यरात्रि (निशीथ काल) में की जाती है और 15 फरवरी को ही रात्रि में चतुर्दशी तिथि विद्यमान है, इसलिए Maha Shivratri 2026 का व्रत 15 फरवरी को ही रखा जाएगा। महाशिवरात्रि का धार्मिक और पौराणिक महत्व (Significance) Maha Shivratri 2026 केवल एक व्रत नहीं, बल्कि यह शिव तत्व से जुड़ने का अवसर है। धर्म ग्रंथों में इस रात्रि के कई महत्व बताए गए हैं: शिव-शक्ति का विवाह: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। भक्त इस दिन को शिव-पार्वती के विवाहोत्सव के रूप में मनाते हैं। शिव का प्राकट्य: एक अन्य कथा के अनुसार, माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव शिवलिंग के रूप में (अग्नि लिंग) प्रकट हुए थे। सुख-समृद्धि की प्राप्ति: मान्यता है कि जो भक्त इस दिन उपवास, मंत्र जप और रात्रि जागरण करते हैं, Maha Shivratri 2026 उन्हें जीवन के समस्त सुख प्राप्त होते हैं और अंत में मोक्ष मिलता है। महाशिवरात्रि 2026: पूजा के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) महाशिवरात्रि की पूजा दिन की बजाय रात में अधिक फलदायी मानी जाती है। विशेषकर ‘निशीथ काल’ और ‘चार प्रहर’ की पूजा का विधान है। Maha Shivratri 2026 पर पूजा के लिए निम्नलिखित शुभ मुहूर्त रहेंगे: निशीथ काल पूजा (मध्यरात्रि का समय) शिव पूजा के लिए निशीथ काल को सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली समय माना जाता है। वैसे तो आप किसी भी वक्त पूजा कर सकते हैं, लेकिन मध्यरात्रि में 11 बजे से 1 बजे के बीच उपासना ज्यादा शुभ मानी जाती है। निशीथ काल मुहूर्त: 15 फरवरी की रात 11:52 बजे से लेकर 16 फरवरी की रात 12:42 बजे तक। (एक अन्य स्रोत के अनुसार 16 फरवरी की रात 12:09 से 01:01 बजे तक भी समय बताया गया है)। भक्तों को पूजा के लिए करीब 50 मिनट का अत्यंत शुभ समय मिलेगा। चार प्रहर की पूजा का समय (Char Prahar Puja Timings) महाशिवरात्रि की पूरी रात को चार प्रहरों में बांटा जाता है और हर प्रहर में शिव जी के अलग-अलग स्वरूपों या मंत्रों से पूजा की जाती है। Maha Shivratri 2026 के लिए चार प्रहर का समय इस प्रकार है: 1. प्रथम प्रहर पूजा: 15 फरवरी की शाम 06:11 बजे से रात 09:23 बजे तक (या 06:01 से 09:09 बजे तक)। 2. द्वितीय प्रहर पूजा: 15 फरवरी की रात 09:23 बजे से 16 फरवरी की रात 12:35 बजे तक (या 09:09 से 12:17 बजे तक)। 3. तृतीय प्रहर पूजा: 16 फरवरी की रात 12:35 बजे से सुबह 03:47 बजे तक (या 12:17 से 03:25 बजे तक)। 4. चतुर्थ प्रहर पूजा: 16 फरवरी की सुबह 03:47 बजे से सुबह 06:59 बजे तक (या 03:25 से 06:33 बजे तक)। इन चारों प्रहरों में की गई पूजा से व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। व्रत पारण का समय (Parana Time) व्रत का समापन भी सही समय पर होना अनिवार्य है। Maha Shivratri 2026 का व्रत 16 फरवरी को खोला जाएगा। पारण का समय: 16 फरवरी 2026 को सुबह 06 बजकर 33 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 10 मिनट तक। भक्तों को चाहिए कि वे सूर्योदय के बाद स्नान-पूजा करके इस समय सीमा के भीतर अपना व्रत खोल लें। महाशिवरात्रि पूजन विधि (Step-by-Step Puja Vidhi) भगवान शिव बहुत ही भोले हैं और वे मात्र जल चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन Maha Shivratri 2026 पर विधि-विधान से पूजा करने का विशेष फल मिलता है। 1. स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। 2. अभिषेक: मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग का अभिषेक करें। शिवलिंग को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) से स्नान कराएं। इसके बाद गंगाजल और केसर मिला जल अर्पित करें। 3. श्रृंगार और अर्पण: महादेव को चंदन का तिलक लगाएं। उन्हें बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार के फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। भगवान शिव को भस्म अति प्रिय है, इसलिए भस्म अवश्य चढ़ाएं। 4. मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ नमो भगवते रुद्राय” मंत्रों का निरंतर जप करें। 5. दीप दान: पूरी रात शिवलिंग

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Crematorium In a Dream

Crematorium In a Dream: क्या सपने में शमशान घाट देखना मौत का संकेत है या खजाने की चाबी? जानिए स्वप्न शास्त्र का सच..

सपने वो सच हैं जो हम बंद आंखों से देखते हैं, लेकिन कभी-कभी ये खुली आंखों की किस्मत बदल देते हैं। Crematorium In a Dream: हम सभी रात को सोते समय सपनों की दुनिया में खो जाते हैं। कुछ सपने हमें खुशी देते हैं, तो कुछ सपने ऐसे होते हैं जिन्हें देखकर हम पसीने से तर-बतर होकर जाग जाते हैं। ऐसा ही एक डरावना सपना है—सपने में शमशान घाट या जलती हुई चिता देखना। जब कोई व्यक्ति Crematorium In a Dream देखता है, तो उसका पहला विचार यही होता है कि शायद उसके या उसके परिवार के साथ कुछ बुरा होने वाला है। मन में मृत्यु का भय, अशुभ घटना की आशंका और नकारात्मक विचार घर कर जाते हैं। लेकिन, ठहरिए! घबराने की कोई जरूरत नहीं है। स्वप्न शास्त्र (Dream Interpretation) के प्राचीन सिद्धांतों और आधुनिक ज्योतिषीय विश्लेषणों के अनुसार, हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत हो सकती है। Crematorium In a Dream आज के इस विस्तृत लेख में, हम आपको बताएंगे कि क्यों शमशान का सपना आपकी सोई हुई किस्मत जगा सकता है और किन विशेष परिस्थितियों में यह सपना आपको चेतावनी देता है। Crematorium In a Dream: क्या सपने में शमशान घाट देखना मौत का संकेत है… स्वप्न शास्त्र का नियम: जो दिखता है, वो होता नहीं स्वप्न शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है जो मानता है कि सपने हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्व संकेत (Sign) देते हैं। पंडितों और ज्योतिषियों के अनुसार, सपने में दिखने वाली हर वस्तु का हमारे भविष्य से गहरा संबंध होता है। अक्सर देखा गया है कि जो चीजें असल जिंदगी में हमें डराती हैं या अशुभ मानी जाती हैं, सपनों में उनका अर्थ बेहद शुभ होता है। देखना इसी श्रेणी में आता है। असल जीवन में शमशान दुख और अंत का प्रतीक है, लेकिन सपनों की दुनिया में यह ‘नई शुरुआत’ और ‘कष्टों के अंत’ का सूचक माना जाता है। आइए, अलग-अलग परिस्थितियों के माध्यम से समझते हैं कि यह सपना आपके जीवन में क्या बदलाव लाने वाला है। 1. सपने में शमशान घाट देखना (Seeing a Crematorium) अगर आपने सपने में केवल शमशान घाट का दृश्य देखा है, जहाँ शांति है या चिताएं हैं, तो यह आपके लिए बहुत बड़ी राहत की खबर है। • दुख और दरिद्रता का नाश: स्रोतों के अनुसार, सपने में शमशान घाट दिखने का सीधा अर्थ है कि आपके जीवन से अब दुख और दरिद्रता (Poverty) का अंत होने वाला है। जिस प्रकार शमशान में शरीर नश्वर होकर पंचतत्व में विलीन हो जाता है, उसी प्रकार आपकी पुरानी परेशानियां अब खत्म होने वाली हैं। • सुख-समृद्धि का आगमन: यह सपना इस बात का संकेत है कि जल्द ही आपके घर में सुख-समृद्धि का आगमन होने वाला है। आर्थिक तंगी, जो आपको लंबे समय से परेशान कर रही थी, अब दूर हो सकती है। इसलिए, यदि आपको Crematorium In a Dream दिखाई दे, तो डरें नहीं, बल्कि खुश हो जाएं कि बुरा वक्त अब बीत चुका है। 2. खुद को शमशान जाते हुए देखना (Going to the Crematorium) कई बार हम सपने में देखते हैं कि हम शमशान की ओर जा रहे हैं या वहां खड़े हैं। यह सपना देखने में भले ही भयावह लगे, लेकिन इसका फल बहुत ही मीठा होता है। • मुसीबतों का अंत: स्वप्न शास्त्र कहता है कि यदि व्यक्ति खुद को शमशान जाते हुए देखता है, तो यह एक बेहद शुभ संकेत है। इसका अर्थ है कि आपके सिर पर जो बड़ी मुसीबत मंडरा रही थी, वह अब खत्म होने वाली है। • सफलता की ओर कदम: शमशान जाने का मतलब है कि आप अपनी पुरानी असफलताओं को पीछे छोड़कर नई सफलता की ओर बढ़ रहे हैं। यह आपके लक्ष्यों (Goals) पर ध्यान केंद्रित करने और मेहनत करने का समय है, क्योंकि सफलता अब आपसे बस कुछ ही कदम दूर है। 3. सपने में शव यात्रा या मुर्दा देखना (Funeral Procession or Corpse) यह सबसे सामान्य लेकिन डरावना सपना है। सपने में अपनी ही अर्थी देखना या किसी और की शव यात्रा (Shav Yatra) देखना किसी को भी विचलित कर सकता है। लेकिन इसका अर्थ जानकर आप हैरान रह जाएंगे। • अधूरी इच्छा पूरी होना: अगर आपको Crematorium In a Dream के साथ शव यात्रा दिखाई देती है, तो समझ लें कि जल्द ही आपकी कोई अधूरी इच्छा पूरी होने वाली है। यह इच्छा मकान, वाहन या विवाह से जुड़ी हो सकती है। • भाग्य में बड़ा बदलाव: यह सपना जीवन में होने वाले किसी बड़े सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है। यह तरक्की (Promotion) और भाग्य उदय का प्रतीक है। • मुर्दा जलते हुए देखना: यदि आप सपने में जलती हुई चिता या मुर्दा जलते हुए देखते हैं, Crematorium In a Dream तो यह अत्यंत शुभ माना गया है। यह संकेत देता है कि आपकी इच्छाएं पूर्ण होंगी और जीवन में प्रकाश आएगा। 4. सपने में शमशान में ‘अग्नि देना’ (Giving Fire to the Pyre) यह सपना बहुत विशिष्ट है। यदि आप देखते हैं कि आप शमशान में किसी चिता को अग्नि दे रहे हैं, तो इसका संबंध आपकी जिम्मेदारियों और कर्मों से है। • अच्छे दिनों की शुरुआत: स्रोतों के अनुसार, यह सपना बताता है कि अब आपके ‘अच्छे दिन’ आने वाले हैं। • नकारात्मकता का खात्मा: अग्नि शुद्धिकरण का प्रतीक है। चिता को अग्नि देने का अर्थ है कि आपके आस-पास फैली हुई सारी नकारात्मकता (Negativity) अब सकारात्मकता (Positivity) में बदल जाएगी। आपके शत्रु या आपसे ईर्ष्या करने वाले लोग अब आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। 5. सपने में शमशान के अंदर मंदिर देखना (Temple inside Crematorium) यह एक दुर्लभ सपना है, लेकिन यदि किसी को Crematorium In a Dream के दौरान वहां कोई मंदिर दिखाई दे, तो उसे खुद को अत्यंत भाग्यशाली मानना चाहिए। • धन लाभ: स्वप्न शास्त्र में इसे धन प्राप्ति का प्रबल योग बताया गया है। यह सपना संकेत देता है कि दैवीय कृपा आप पर बनी हुई है और आपको अचानक कहीं से धन लाभ हो सकता है। • आत्मिक शांति: शमशान में मंदिर देखना यह भी बताता है कि जीवन के कोलाहल के बीच आपको मानसिक शांति मिलेगी। सावधान! ये सपने हो सकते हैं अशुभ (Negative Signs) जहाँ Crematorium In a

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Vijaya Ekadashi 2026

Vijaya Ekadashi 2026 Date And Time: 13 फरवरी को है शत्रु नाशिनी विजया एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पारण समय और भगवान राम से जुड़ी अद्भुत व्रत कथा

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” Vijaya Ekadashi 2026 Date And Time: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का महात्म्य सबसे अधिक माना गया है। वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियां भगवान विष्णु को समर्पित हैं, लेकिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का स्थान अद्वितीय है। इसे ‘विजया एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी अपने भक्तों को हर क्षेत्र में ‘विजय’ दिलाने वाली मानी जाती है। वर्ष 2026 में Vijaya Ekadashi 2026 को लेकर भक्तों में अभी से उत्साह और तारीख को लेकर थोड़ी दुविधा भी है। यह व्रत न केवल शत्रुओं पर विजय दिलाता है, बल्कि जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी रास्ता दिखाता है। Vijaya Ekadashi 2026 मान्यताओं के अनुसार, स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले इस व्रत को धारण किया था। आज के इस विस्तृत लेख में, हम Vijaya Ekadashi 2026 की सही तारीख, पारण का समय, पूजा विधि और उस पौराणिक कथा के बारे में जानेंगे जिसे पढ़ने मात्र से पापों का नाश हो जाता है। विजया एकादशी क्या है और इसका महत्व:What is Vijaya Ekadashi and its importance….. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह तिथि समस्त संसार के पालनकर्ता भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। इस व्रत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह ‘विजय’ प्रदान करने वाली एकादशी है। जीवन में कई बार ऐसा समय आता है जब हम विरोधियों से घिर जाते हैं, कोर्ट-कचहरी के मामलों में फंस जाते हैं, या व्यापार में लगातार असफलता मिलती है। ऐसे समय में Vijaya Ekadashi 2026 का व्रत एक अचूक उपाय है। Vijaya Ekadashi 2026 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से पूर्व जन्मों के पापों का नाश होता है और वर्तमान जीवन में सफलता के द्वार खुलते हैं। इस व्रत का प्रभाव इतना गहरा है कि यह न केवल बाहरी शत्रुओं पर, बल्कि हमारे भीतर छिपे काम, क्रोध और लोभ जैसे शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त करने में मदद करता है। यह आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। 2. Vijaya Ekadashi 2026: सही तारीख – 12 या 13 फरवरी ? (Confusion Resolved) अक्सर पंचांग की गणना और तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण व्रत की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती है। इस बार भी Vijaya Ekadashi 2026 की तारीख को लेकर 12 और 13 फरवरी के बीच भ्रम है। आइए पंचांग के अनुसार इसे स्पष्ट करते हैं। एकादशी तिथि का समय इस प्रकार रहेगा:The timing of Ekadashi tithi will be as follows: • एकादशी तिथि प्रारम्भ: 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट (या 12:23 बजे) से,। • एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026 को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट (या 02:26 बजे) तक,। निर्णय: हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों के लिए ‘उदयातिथि’ (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को ही मान्य माना जाता है। चूंकि 12 फरवरी को सूर्योदय के समय दशमी तिथि होगी और 13 फरवरी को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए Vijaya Ekadashi 2026 का व्रत शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा,। अतः आप बिना किसी संशय के 13 फरवरी को ही उपवास रखें। 3. व्रत पारण का समय (Parana Time) एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि को किया जाता है, जिसे ‘पारण’ कहते हैं। Vijaya Ekadashi 2026 यदि आप पारण सही समय पर नहीं करते, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। शास्त्रों के अनुसार, हरि वासर समाप्त होने के बाद ही पारण करना चाहिए। Vijaya Ekadashi 2026 के पारण का विवरण इस प्रकार है: • पारण की तारीख: 14 फरवरी 2026, शनिवार। • हरि वासर समाप्ति: सुबह 08:01 बजे। • पारण का शुभ मुहूर्त: सुबह 10:15 बजे से लेकर दोपहर 12:15 बजे तक। सभी व्रतियों को सलाह दी जाती है कि वे 14 फरवरी को सुबह 10:15 के बाद और 12:15 से पहले अपना व्रत खोल लें। यदि किसी कारणवश यह समय छूट जाए, तो द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले भोजन ग्रहण कर लेना चाहिए। 4. विजया एकादशी की पौराणिक व्रत कथा (Ramayana Context) Vijaya Ekadashi 2026 के दिन इस कथा को पढ़ने या सुनने का विशेष महत्व है। यह कथा त्रेता युग और भगवान श्रीराम से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब लंकापति रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था, तब भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और सुग्रीव की वानर सेना के साथ लंका की ओर प्रस्थान कर रहे थे। जब वे समुद्र तट पर पहुंचे, तो उनके सामने विशाल और अथाह समुद्र खड़ा था। यह समुद्र मगरमच्छों और जलीय जीवों से भरा हुआ था और इसे पार करना असंभव प्रतीत हो रहा था। चूंकि भगवान श्रीराम मानव रूप में थे, इसलिए वे मानवीय मर्यादाओं का पालन करते हुए इस समस्या का समाधान चाहते थे। उन्होंने अपने अनुज लक्ष्मण से पूछा कि इस विशाल सागर को कैसे पार किया जाए? तब लक्ष्मण जी ने विनम्रतापूर्वक कहा, “हे प्रभु! आप तो आदिपुरुष हैं, आप सब जानते हैं। लेकिन फिर भी, यहाँ से कुछ दूरी पर कुमारी द्वीप में ‘वकदालभ्य’ (Vakdalabhya) नामक मुनि का आश्रम है। हमें उनसे उपाय पूछना चाहिए”। भगवान श्रीराम तुरंत मुनि वकदालभ्य के आश्रम पहुंचे और उन्हें प्रणाम करके अपनी समस्या बताई। मुनि ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा और कहा, “हे राम! यदि आप अपनी सेना सहित फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करें, तो आप निश्चित रूप से समुद्र को पार करने में सफल होंगे और लंका पर विजय प्राप्त करेंगे”। मुनि के आदेशानुसार, भगवान श्रीराम और उनकी सेना ने Vijaya Ekadashi 2026 (उस समय की तिथि) का व्रत पूरे विधि-विधान से रखा। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से ही सागर ने उन्हें रास्ता दिया, रामसेतु का निर्माण संभव हुआ और अंततः श्रीराम ने रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्त की,। तभी से यह मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अपने शत्रुओं से घिरा हो या किसी कार्य में सफलता चाहता हो, उसे यह व्रत अवश्य करना चाहिए। 5. विजया एकादशी 2026 पूजा विधि (Step-by-Step Rituals) यदि आप Vijaya Ekadashi 2026 का पूर्ण फल प्राप्त करना

Vijaya Ekadashi 2026 Date And Time: 13 फरवरी को है शत्रु नाशिनी विजया एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पारण समय और भगवान राम से जुड़ी अद्भुत व्रत कथा Read More »

February Ekadashi

February Ekadashi 2026 Date And Time: विजया और आमलकी एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पारण का समय – सम्पूर्ण जानकारी

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” February Ekadashi 2026 Mein Kab Kab Hain: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का महात्म्य सबसे अधिक माना गया है। हर माह में दो एकादशियां आती हैं—एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। यह दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है। वर्ष 2026 का फरवरी महीना अध्यात्म और व्रत-त्योहारों की दृष्टि से बहुत खास रहने वाला है। भक्त जन अभी से February Ekadashi 2026 की तिथियों को लेकर उत्सुक हैं ताकि वे अपनी पूजा और उपवास की योजना पहले से बना सकें। इस माह में दो प्रमुख और अत्यंत फलदायी एकादशियां पड़ रही हैं—पहली ‘विजया एकादशी’ और दूसरी ‘आमलकी एकादशी’। शास्त्रों के अनुसार, इन व्रतों को विधि-विधान से करने पर व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और अक्षत पुण्य की प्राप्ति होती है। आज के इस विस्तृत लेख में, हम February Ekadashi 2026 की तारीखों, पूजा के शुभ मुहूर्त, पारण के सही समय और इन व्रतों के पीछे छिपे पौराणिक महत्व पर चर्चा करेंगे। February Ekadashi 2026 Date And Time: विजया और आमलकी एकादशी की सही तारीख….. 1. February Ekadashi 2026: एक नज़र में (Overview) फरवरी 2026 में पड़ने वाली एकादशियां अपने आप में विशिष्ट हैं। पंचांग के अनुसार, इस महीने में फाल्गुन मास का आरंभ हो रहा है, जो हिंदू कैलेंडर का अंतिम महीना होता है। इस माह में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा का विशेष विधान है। यदि आप February Ekadashi 2026 की सूची ढूंढ रहे हैं, तो वह इस प्रकार है: 1. विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi): 13 फरवरी 2026, शुक्रवार। 2. आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi): 27 फरवरी 2026, शुक्रवार। दोनों ही एकादशियां शुक्रवार को पड़ रही हैं, जो माता लक्ष्मी का दिन भी है। इसलिए इस बार February Ekadashi 2026 पर भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी भक्तों पर बरसेगी। 2. विजया एकादशी 2026: शत्रु विजय और सफलता का पर्व:Vijaya Ekadashi 2026: Festival of enemy victory and success फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘विजया एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी ‘विजय’ प्रदान करने वाली है। क. सही तारीख और महत्व पंचांग गणना के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। February Ekadashi 2026 की यह पहली एकादशी उन लोगों के लिए वरदान समान है जो अपने विरोधियों से परेशान हैं या किसी मुकदमे में फंसे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम लंका पर चढ़ाई करने जा रहे थे, तब सागर पार करने और रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए उन्होंने भी विधि-विधान से विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से ही उन्हें वानर सेना सहित समुद्र पार करने का मार्ग मिला और अंततः उन्होंने लंकापति रावण का वध किया। इसलिए, जो साधक इस व्रत को करता है, उसे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। ख. विजया एकादशी पारण का समय (Paran Time) व्रत का फल तभी मिलता है जब उसका पारण सही समय पर किया जाए। 13 फरवरी को व्रत रखने वाले भक्तों को अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत खोलना चाहिए। • पारण की तारीख: 14 फरवरी 2026, शनिवार। • पारण का शुभ समय: प्रातः 06:35 बजे से लेकर सुबह 09:14 बजे के बीच। • द्वादशी तिथि समाप्ति: 14 फरवरी को शाम 04:01 बजे तक। 3. आमलकी एकादशी 2026: आंवले के वृक्ष में हरि का वास फरवरी माह की दूसरी महत्वपूर्ण एकादशी ‘आमलकी एकादशी’ है, जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आती है। इसे रंगभरी एकादशी के रूप में भी कुछ स्थानों पर मनाया जाता है क्योंकि यह होली से कुछ दिन पहले आती है। क. सही तारीख और महत्व February Ekadashi 2026 की दूसरी एकादशी, यानी आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। ‘आमलकी’ का अर्थ है आंवला। शास्त्रों में आंवले को देव वृक्ष माना गया है। मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु ने आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति की थी, इसलिए इसमें त्रिदेवों का वास माना जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व है। जो भक्त इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं या आंवले का दान करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों प्रदान करता है। ख. आमलकी एकादशी पारण का समय (Paran Time) 27 फरवरी को उपवास रखने वाले साधकों को अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करना होगा। • पारण की तारीख: 28 फरवरी 2026, शनिवार। • पारण का शुभ समय: प्रातः 06:25 बजे से लेकर सुबह 08:45 बजे के बीच। (कुछ पंचांगों में समय 06:47 से 09:06 भी बताया गया है, अतः सुबह 7 से 8:45 के बीच पारण करना सबसे सुरक्षित और श्रेष्ठ रहेगा)। • द्वादशी तिथि समाप्ति: 28 फरवरी को रात्रि 08:43 बजे तक। 4. एकादशी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi) चाहे विजया एकादशी हो या आमलकी, February Ekadashi 2026 के व्रतों में भगवान विष्णु की पूजा विधि लगभग समान रहती है, बस संकल्प और कुछ विशेष सामग्रियों का अंतर होता है। 1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: एकादशी के दिन (13 या 27 फरवरी) सुबह जल्दी उठें। पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। 2. संकल्प: घर के मंदिर में दीप जलाएं और हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें। मन ही मन भगवान विष्णु का ध्यान करें। 3. कलश स्थापना: विजया एकादशी पर कलश स्थापना का विशेष महत्व है। पूजा स्थान पर एक वेदी बनाकर उस पर सात प्रकार के अनाज (सप्त धान्य) रखें और उस पर कलश स्थापित करें। 4. विष्णु पूजन: भगवान विष्णु की प्रतिमा को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें चंदन, रोली, और पीले फूल अर्पित करें। 5. तुलसी दल: भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है। भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य रखें। 6. आंवला पूजन (आमलकी एकादशी के लिए): 27 फरवरी को होने वाली एकादशी पर भगवान

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Ashtottar Shatnam Stotram

Shri Krishna Ashtottar Shatnam Stotram: श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

Shri Krishna Ashtottar Shatnam Stotram: श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्: श्री कृष्ण ने शतनामावली स्तोत्र में भगवान श्री कृष्ण के 108 नामों का वर्णन किया है। श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भगवान श्री कृष्ण आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान कृष्ण सभी हिंदू देवताओं में सबसे अधिक पूजे जाने वाले और सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं। Ashtottar Shatnam Stotram हिंदू धर्म और भारतीय पौराणिक कथाओं में कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। कृष्ण को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है, ये नाम ज्यादातर उनके गुणों, उनके कर्मों और उनकी जीवन शैली पर आधारित हैं। Ashtottar Shatnam Stotram भगवान विष्णु के अवतार, कृष्ण का जन्म मथुरा में देवकी और वासुदेव के यहाँ हुआ था और वृंदावन में नंद और यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया। शरारती भगवान की पूजा ज्यादातर उनके बाल रूप और युवा रूप में पूरे भारत और विदेशों में की जाती है। Ashtottar Shatnam Stotram श्री कृष्ण के जन्म का एकमात्र उद्देश्य पृथ्वी को राक्षसों की बुराई से मुक्त करना था। Ashtottar Shatnam Stotram उन्होंने महाभारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भक्ति और अच्छे कर्मों के सिद्धांत का प्रचार किया, जिसका वर्णन भगवत गीता में गहराई से किया गया है। कृष्ण को उनके चित्रण से आसानी से पहचाना जा सकता है। हालांकि कुछ चित्रणों में, विशेष रूप से मूर्तियों में, उनकी त्वचा का रंग काला या गहरा दिखाया जा सकता है, Ashtottar Shatnam Stotram लेकिन आधुनिक चित्रों जैसे अन्य चित्रों में, कृष्ण को आमतौर पर नीली त्वचा के साथ दिखाया जाता है। उन्हें जामुन (एक बैंगनी रंग का फल) के रंग की त्वचा वाला बताया गया है। श्रीमद् भागवत की टीका में बताए अनुसार उनके दाहिने पैर पर जामुन फल के चार प्रतीक भी हैं। श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र के लाभ: जो व्यक्ति इस श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का नियमित पाठ करता है और इसे पढ़ता है, वह देवताओं का सलाहकार और गंधर्व होता है। भले ही वह हमेशा डरा हुआ रहता है, उस व्यक्ति को इस दुनिया में कहीं भी कोई डर नहीं होता है। वह मृत्यु के वश में नहीं आता है, और मृत्यु से मोक्ष प्राप्त होता है, लेकिन सप्तशती पढ़ने की विधि जानकर पढ़ना चाहिए। Ashtottar Shatnam Stotram जो ऐसा नहीं करता, उसका नाश हो जाता है। स्त्रियों में जो भी सौभाग्य देखा जाता है, वह इसी पाठ का आशीर्वाद है, इसलिए इस कल्याणकारी स्तोत्र का पाठ हमेशा करना चाहिए। यह मनचाही संतान देता है। यदि पाठ किया जाए तो विवाह में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।यह पति-पत्नी के बीच सामंजस्य लाता है। यह आत्म-सम्मान को बढ़ाता है यह स्तोत्र किसे पढ़ना है: जिस व्यक्ति को पुत्र की इच्छा हो, उसे यह Ashtottar Shatnam Stotram श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र नियमित रूप से पढ़ना चाहिए। Ashtottar Shatnam Stotram इसके अलावा, जिन लोगों की शादी में रुकावट आ रही है और इस वजह से तनाव है, उन्हें भी यह पढ़ना चाहिए। श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् हिंदी पाठ: Shri Krishna Ashtottar Shatnam Stotram in Hindi ॥ श्रीगोपालकृष्णाय नमः ॥ ॥ श्रीशेष उवाच ॥ ॐ अस्य श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रस्य।श्रीशेष ऋषिः ॥ अनुष्टुप् छंदः ॥ श्रीकृष्णोदेवता ॥ ॥ श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामजपे विनियोगः ॥ ॐ श्रीकृष्णः कमलानाथो वासुदेवः सनातनः ।वसुदेवात्मजः पुण्यो लीलामानुषविग्रहः ॥ 1 ॥ श्रीवत्सकौस्तुभधरो यशोदावत्सलो हरिः ।चतुर्भुजात्तचक्रासिगदा शंखाद्युदायुधः ॥ 2 ॥ देवकीनंदनः श्रीशो नंदगोपप्रियात्मजः ।यमुनावेगसंहारी बलभद्रप्रियानुजः ॥ 3 ॥ पूतनाजीवितहरः शकटासुरभंजनः ।नंदव्रजजनानंदी सच्चिदानंदविग्रहः ॥ 4 ॥ नवनीतविलिप्तांगो नवनीतनटोऽनघः ।नवनीतनवाहारो मुचुकुंदप्रसादकः ॥ 5 ॥ षोडशस्त्री सहस्रेश स्रिभंगि मधुराकृतिः ।शुकवागमृताब्धींदुर्गोविंदो गोविदांपतिः ॥ 6 ॥ वत्सवाटचरोऽनंतो धेनुकासुरभंजनः ।तृणीकृततृणावर्तो यमलार्जुनभंजनः ॥ 7 ॥ उत्तानतालभेत्ता च तमालश्यामलाकृतिः ।गोपगोपीश्वरो योगी सूर्यकोटिसमप्रभः ॥ 8 ॥ इलापतिः परंज्योतिर्यादवेंद्रो यदूद्वहः ।वनमाली पीतवासाः पारिजातापहारकः ॥ 9 ॥ गोवर्धनाचलोद्धर्ता गोपालः सर्वपालकः ।अजो निरंजनः कामजनकः कंजलोचनः ॥ 10 ॥ मधुहा मथुरानाथो द्वारकानायको बली ।वृंदावनांतसंचारी तुलसीदामभूषणः ॥ 11 ॥ श्यमंतकमणेर्हर्ता नरनारायणात्मकः ।कुब्जाकृष्णांबरधरो मायी परमपूरुषः ॥ 12 ॥ मुष्टिकासुरचाणूरमहायुद्धविशारदः ।संसारवैरी कंसारिर्मुरारिर्नरकांतकः ॥ 13 ॥ अनादिब्रह्मचारी च कृष्णाव्यसनकर्षकः ।शिशुपालशिरश्छेत्ता दुर्योधनकुलांतकः ॥ 14 ॥ विदुराक्रूरवरदो विश्वरूपप्रदर्शकः ।सत्यवाक् सत्यसंकल्पः सत्यभामारतो जयी ॥ 15 ॥ सुभद्रापूर्वजो विष्णुर्भीष्ममुक्तिप्रदायकः ।जगद्गुरुर्जगन्नाथो वेणुनादविशारदः ॥ 16 ॥ वृषभासुरविध्वंसी बाणासुरबलांतकः ।युधिष्ठिरप्रतिष्ठाता बर्हिबर्हावतंसकः ॥ 17 ॥ पार्थसारथिरव्यक्तो गीतामृतमहोदधिः ।कालीयफणिमाणिक्यरंजितश्रीपदांबुजः ॥ 18 ॥ दामोदरो यज्ञभोक्ता दानवेंद्रविनाशकः ।नारायणः परंब्रह्म पन्नगाशनवाहनः ॥ 19 ॥ जलक्रीडासमासक्त गोपीवस्त्रापहारकः ।पुण्यश्लोकस्तीर्थपादो वेदवेद्यो दयानिधिः ॥ 20 ॥ सर्वतीर्थात्मकः सर्वग्रहरुपी परात्परः ।एवं श्रीकृष्णदेवस्य नाम्नामष्टोत्तरं शतम् ॥ 21 ॥ कृष्णनामामृतं नाम परमानंदकारकम् ।अत्युपद्रवदोषघ्नं परमायुष्यवर्धनम् ॥ 22 ॥ ॥ इति श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् संपूर्णम् ॥

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Falgun Kalashtami Vrat

Falgun Kalashtami Vrat 2026 Date And Time: फरवरी को है काल भैरव की उपासना का महापर्व, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और संकट मुक्ति के अचूक उपाय

“ॐ कालभैरवाय नमः” Falgun Kalashtami Vrat: सनातन धर्म में प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का एक विशेष महत्व है। इस दिन को कालाष्टमी या भैरव अष्टमी के नाम से जाना जाता है। लेकिन जब यह अष्टमी फाल्गुन मास में आती है, तो इसकी दिव्यता और भी बढ़ जाती है। वर्ष 2026 में Falgun Kalashtami Vrat का पावन पर्व भक्तों के लिए भय, रोग और शत्रुओं से मुक्ति पाने का एक सुनहरा अवसर लेकर आ रहा है। भगवान काल भैरव, जिन्हें ‘काशी का कोतवाल’ भी कहा जाता है, वे भगवान शिव के ही उग्र स्वरूप हैं। Falgun Kalashtami Vrat मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से कालाष्टमी का व्रत करते हैं, अकाल मृत्यु, बुरी नजर और तंत्र-बाधाएं उन्हें कभी छू भी नहीं सकतीं। आज के इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि फरवरी 2026 में कालाष्टमी कब है, पूजा का शुभ समय क्या है और वे कौन से उपाय हैं जो आपकी सोई हुई किस्मत जगा सकते हैं। Falgun Kalashtami Vrat 2026 Date And Time: फरवरी को है काल भैरव की उपासना का महापर्व….. 1. Falgun Kalashtami Vrat 2026 : सही तारीख और महत्व भक्तों के मन में अक्सर तारीख को लेकर संशय रहता है। Falgun Kalashtami Vrat पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को Falgun Kalashtami Vrat मनाया जाएगा। वर्ष 2026 में,यह पवित्र व्रत 9 फरवरी, सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार का अद्भुत संयोग: इस बार कालाष्टमी 9 फरवरी को सोमवार के दिन पड़ रही है। सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन है और काल भैरव शिव के ही अवतार हैं। इसलिए, इस दिन की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यह दिन बाधाओं और नकारात्मकता से मुक्ति पाने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। अष्टमी तिथि का समय (Tithi Timings): किसी भी व्रत में तिथि के आरम्भ और समापन का ज्ञान होना आवश्यक है। Falgun Kalashtami Vrat स्रोतों के अनुसार: • अष्टमी तिथि प्रारम्भ: 9 फरवरी 2026 को सुबह 05:01 बजे से। • अष्टमी तिथि समाप्त: 10 फरवरी 2026 को सुबह 07:27 बजे तक। चूंकि कालाष्टमी की पूजा विशेष रूप से रात्रि में की जाती है और 9 फरवरी को अष्टमी तिथि पूरी रात विद्यमान है, इसलिए Falgun Kalashtami Vrat 9 फरवरी को ही मान्य होगा। 2. भगवान काल भैरव: समय और दंड के स्वामी कालाष्टमी का व्रत भगवान काल भैरव को समर्पित है। ‘काल’ का अर्थ है समय और मृत्यु। काल भैरव समय के स्वामी हैं और कर्मों का हिसाब रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने इसी दिन भैरव रूप में अवतार लिया था। इन्हें ‘दंडपाणि’ भी कहा जाता है क्योंकि ये अन्याय करने वालों को दंड देते हैं और अपने भक्तों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। काल भैरव की उपासना व्यक्ति को निर्भय, आत्मविश्वासी और सुरक्षित बनाती है। Falgun Kalashtami Vrat यदि आप जीवन में अकारण डर महसूस करते हैं या आत्मविश्वास की कमी है, तो Falgun Kalashtami Vrat आपके लिए एक कवच का कार्य करेगा। 3. पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और विधि (Step-by-Step Puja Vidhi) कालाष्टमी की पूजा विधि सरल है, लेकिन इसमें नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। यह पूजा मुख्य रूप से रात्रि में फलदायी होती है। प्रातःकालीन तैयारी: 1. स्नान: 9 फरवरी को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और घर की शुद्धि करें। 2. वस्त्र: इस दिन स्वच्छ वस्त्र धारण करें। कई भक्त भैरव बाबा को प्रसन्न करने के लिए काले वस्त्र भी धारण करते हैं। 3. संकल्प: हाथ में जल लेकर Falgun Kalashtami Vrat का संकल्प लें कि आप आज पूरे दिन उपवास रखेंगे और रात्रि में प्रभु की आराधना करेंगे। संध्या और रात्रि पूजन विधि: चूँकि काल भैरव की शक्तियां रात्रि में जाग्रत होती हैं, इसलिए मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद करें: 1. स्थापना: एक चौकी पर भगवान शिव और काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। 2. दीपक: काल भैरव के समक्ष सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। यह शत्रुओं का नाश करने वाला माना जाता है। 3. अर्पण: बाबा भैरव को काले तिल, उड़द, और श्रीफल (नारियल) अर्पित करें। उन्हें नीले या जामुनी फूल भी अति प्रिय हैं। 4. भोग: परंपरा के अनुसार भोग लगाएं। कुछ स्थानों पर मीठी रोटी या पुए का भोग लगाया जाता है। मंत्र जाप: पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का 108 बार जाप करें: • “ॐ कालभैरवाय नमः” • “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा” इसके बाद काल भैरव अष्टक, शिव चालीसा या भैरव स्तोत्र का पाठ करें। 4. कालाष्टमी व्रत के चमत्कारी लाभ (Benefits of the Vrat) Falgun Kalashtami Vrat रखने के लाभ केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि भौतिक भी हैं। 1. भय और शत्रु बाधा से मुक्ति: यदि आप अज्ञात भय (Anxiety) से परेशान हैं या शत्रु आपको अकारण परेशान कर रहे हैं, तो यह व्रत आपको सुरक्षा कवच प्रदान करता है। शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए यह अचूक उपाय है। 2. नकारात्मक ऊर्जा का नाश: यह व्रत घर से बुरी नजर, तंत्र-मंत्र और भूत-प्रेत की बाधाओं को दूर करता है। काल भैरव नकारात्मक शक्तियों को शांत करते हैं। 3. ग्रह दोष निवारण: जिनकी कुंडली में राहु-केतु या शनि का दोष हो, उनके लिए कालाष्टमी का व्रत अमृत समान है। भैरव उपासना से इन क्रूर ग्रहों का दुष्प्रभाव कम होता है। 4. कोर्ट-कचहरी में विजय: यदि कोई कानूनी विवाद चल रहा है, तो इस दिन की गई पूजा से राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। 5. आर्थिक समृद्धि: भगवान भैरव की कृपा से जीवन में आने वाली आर्थिक रुकावटें दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। 5. कालाष्टमी के दिन किए जाने वाले विशेष उपाय (Special Remedies) यदि आप जीवन में किसी विशेष संकट से जूझ रहे हैं, तो 9 फरवरी 2026 को Falgun Kalashtami Vrat के दिन ये उपाय अवश्य करें: • काले कुत्ते की सेवा: काला कुत्ता भगवान भैरव का वाहन माना जाता है। इस दिन काले कुत्ते को रोटी, दूध या बिस्किट खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे भैरव बाबा शीघ्र प्रसन्न होते हैं। • 8 दीपकों का रहस्य: संध्या काल में पीपल के पेड़ के नीचे या भैरव मंदिर में सरसों के तेल के 8 दीपक जलाएं। यह उपाय

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Silver In Dreams

Silver In Dreams: सपने में चांदी देखने का असली सच ! क्या खुलने वाली है आपकी किस्मत ? जानिए स्वप्न शास्त्र के रहस्य…

“सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, बल्कि सपने वो संकेत हैं जो हमें आने वाले कल के लिए तैयार करते हैं। “ Silver In Dreams: हम सभी जीवन में सफलता, धन और खुशियां चाहते हैं। दिन भर की भागदौड़ के बाद जब हम गहरी नींद में जाते हैं, तो हमारा अवचेतन मन (Subconscious Mind) जाग्रत हो जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने केवल मन का वहम नहीं होते, बल्कि वे भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्व-संकेत देते हैं। कई बार हमें सपने में अलग-अलग धातुएं (Metals) जैसे सोना, चांदी, तांबा या लोहा दिखाई देती हैं। क्या आपने भी हाल ही में सपने में चांदी देखी है? या आप यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि Silver In Dreams देखना शुभ होता है या अशुभ? अगर हाँ, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। आज के इस विस्तृत लेख में हम भोपाल के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा और अन्य विशेषज्ञों द्वारा बताई गई बातों के आधार पर सपनों में धातुओं के रहस्य को उजागर करेंगे। Silver In Dreams: सपने में चांदी देखने का असली सच! क्या खुलने वाली है आपकी किस्मत…. विशेष रूप से, हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि क्यों Silver In Dreams देखना आपके जीवन में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। स्वप्न शास्त्र और धातुओं का महत्व:Dream science and importance of metals भारतीय ज्योतिष शास्त्र की एक महत्वपूर्ण शाखा ‘स्वप्न शास्त्र’ है। इसके अनुसार, हर सपना कुछ कहता है। हालाँकि विज्ञान इसे केवल विचारों का प्रतिबिंब मानता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सपने भविष्यवाणी करते हैं। जब धातुओं की बात आती है, तो हर धातु का अपना एक ग्रह और ऊर्जा होती है। सोना जहाँ बृहस्पति और सूर्य से जुड़ा है, वहीं चांदी का संबंध चंद्रमा और शुक्र से माना जाता है। लोहा शनि का प्रतीक है और तांबा सूर्य का। इसलिए, जब ये धातुएं सपने में आती हैं, तो ये सीधे तौर पर आपके भाग्य, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करती हैं। आइये सबसे पहले सबसे शुभ धातु—चांदी—के बारे में विस्तार से जानते हैं। 1. Silver In Dreams: चांदी का दिखना लाता है अपार खुशियां अगर आपने सपने में चांदी देखी है, तो आपको खुश हो जाना चाहिए। स्वप्न शास्त्र और विशेषज्ञों के अनुसार, Silver In Dreams देखना अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है,। यह सपना इस बात की ओर इशारा करता है कि आपके बुरे दिन अब खत्म होने वाले हैं और जीवन में शीतलता और सुख का आगमन होने वाला है। आइए जानते हैं कि सपने में चांदी दिखने के क्या-क्या फल हो सकते हैं: क. बहुत बड़ी खुशखबरी का संकेत (Good News) स्रोतों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को सपने में चांदी की धातु दिखाई देती है, तो इसका सीधा अर्थ है कि आने वाले समय में उसे कोई बड़ी ‘खुशखबरी’ मिलने वाली है। यह खुशखबरी आपके करियर, परिवार या किसी पुराने रुके हुए काम से जुड़ी हो सकती है। Silver In Dreams देखना यह बताता है कि मानसिक तनाव दूर होगा और घर का माहौल खुशनुमा बनेगा। ख. आर्थिक लाभ और धन की वर्षा:economic benefits and rain of wealth चांदी को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। सपने में चांदी दिखना यह संकेत देता है कि आपको निकट भविष्य में आर्थिक लाभ (Financial Gain) हो सकता है। यदि आप किसी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, तो Silver In Dreams देखना यह भरोसा दिलाता है कि लक्ष्मी जी की कृपा आप पर बरसने वाली है। यह धन लाभ व्यापार में मुनाफे के रूप में या किसी unexpected source से हो सकता है। ग. विवाह और हमसफर की प्राप्ति:Marriage and finding a partner यह संकेत कुंवारों के लिए बहुत ही खास है। स्वप्न शास्त्र कहता है कि यदि आपकी शादी नहीं हुई है और आप Silver In Dreams देखते हैं, तो प्रबल योग हैं कि आप जल्द ही विवाह बंधन में बंध सकते हैं। इतना ही नहीं, यह सपना यह भी इशारा करता है कि आपको एक बहुत अच्छा और समझदार हमसफर मिलने वाला है जो आपके जीवन को संवार देगा। घ. घर में मेहमानों का आगमन भारतीय संस्कृति में “अतिथि देवो भव” कहा जाता है। सपने में चांदी देखना इस बात का भी संकेत है कि आपके घर में मेहमान आने वाले हैं। मेहमानों का आना घर में उत्सव और खुशियों का माहौल लेकर आता है। Silver In Dreams का यह मतलब भी है कि आपके सामाजिक संबंधों में सुधार होगा और लोगों के साथ आपका मेल-जोल बढ़ेगा। 2. सपने में सोना (Gold) देखना: एक बड़ा विरोधाभास अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर चांदी शुभ है, तो सोना (Gold) तो उससे भी ज्यादा शुभ होना चाहिए क्योंकि वह महंगा है। लेकिन स्वप्न शास्त्र यहाँ आपको चौंका सकता है। स्रोतों के अनुसार, सपने में सोना दिखाई देना एक ‘अशुभ’ संकेत माना जाता है,। • धन हानि: जहाँ Silver In Dreams धन लाभ कराता है, वहीं सपने में सोना देखना धन हानि की तरफ इशारा करता है। • परेशानियां: यह सपना परिवार में परेशानियां बढ़ने का संकेत देता है। हो सकता है कि कोई बनता हुआ काम बिगड़ जाए या घर में किसी बात को लेकर कलह हो जाए। इसलिए, असल जिंदगी में सोना खरीदना भले ही शुभ हो, लेकिन सपनों की दुनिया में चांदी का स्थान सोने से ऊपर है। 3. तांबा (Copper): सफलता और लक्ष्य प्राप्ति का संकेत चांदी के बाद, तांबा एक ऐसी धातु है जिसे सपने में देखना बहुत ही सकारात्मक माना गया है। पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, जिन लोगों को सपने में तांबा दिखाई देता है, यह उनके लिए शुभ संकेत है। लक्ष्य प्राप्ति: यह सपना इशारा करता है कि आप जिस लक्ष्य के लिए लंबे समय से मेहनत कर रहे हैं, वह लक्ष्य अब आपको प्राप्त होने वाला है। करियर में उन्नति: यदि आप नौकरी या व्यापार में हैं और आपको प्रमोशन या ग्रोथ का इंतजार है, तो तांबा देखना यह बताता है कि उन्नति के नए मार्ग खुलने वाले हैं और भविष्य में धन प्राप्ति होगी। तो, जहाँ Silver In Dreams आपको शीतलता और खुशखबरी देता है, वहीं तांबा आपको आपके कर्मों का फल और सफलता दिलाता है। 4. लोहा (Iron): मेहनत का फल

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Hair In a Dream

Washing Your Hair In a Dream: सपने में बाल धोने या टूटने का क्या है मतलब? जानिए स्वप्न शास्त्र और लाल किताब के रहस्य

सपनों की दुनिया अजीब है, कभी डराती है तो कभी खुशियों की सौगात लाती है। Washing Your Hair In a Dream: हम सभी जानते हैं कि इंसान के लिए उसके बाल कितने मायने रखते हैं। ये न केवल हमारे चेहरे की सुंदरता को बढ़ाते हैं, बल्कि हमारे आत्मविश्वास का भी प्रतीक होते हैं। लेकिन क्या हो जब यही बाल आपको नींद में दिखाई दें ? स्वप्न शास्त्र और लाल किताब के अनुसार, Hair In a Dream देखना कोई सामान्य घटना नहीं है। यह आपके भविष्य, धन, और मानसिक स्थिति के बारे में गहरे संकेत देता है। आज के इस विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में, हम जानेंगे कि सपने में बाल धोने, कटने, या झड़ने का क्या अर्थ होता है और यह आपके जीवन में आने वाले बदलावों की ओर कैसे इशारा करता है। Washing Your Hair In a Dream: सपने में बाल धोने या टूटने का क्या है मतलब…. सपनों का समय और उनका प्रभाव स्वप्न शास्त्र के नियमों को समझना बहुत जरूरी है। हर सपना सच नहीं होता। स्रोतों के अनुसार, रात को 10 बजे से 12 बजे के बीच देखे गए सपनों का अक्सर कोई विशेष फल नहीं होता, क्योंकि ये दिन भर की थकान और घटनाओं का परिणाम होते हैं। हालाँकि, यदि आपने Hair In a Dream रात के 12 बजे से सुबह 3 बजे के बीच देखा है, तो यह बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ब्रह्म मुहूर्त या देर रात के ये सपने आपके आने वाले भविष्य का आईना होते हैं। कभी-कभी डरावने दिखने वाले सपने भी शुभ फल दे जाते हैं और सुखद दिखने वाले सपने अशुभ संकेत ला सकते हैं। इसलिए घबराने के बजाय उनके अर्थ को समझना आवश्यक है। सपने में बाल धोना: एक बेहद शुभ संकेत स्वप्न शास्त्र में सबसे विस्तार से जिस सपने की चर्चा मिलती है, वह है—सपने में खुद के बाल धोना। यदि आपको Hair In a Dream में बाल धोते हुए दिखाई देते हैं, तो खुश हो जाइए। यह जीवन में आने वाली बहार का संकेत है। 1. सकारात्मक बदलाव और खुशखबरी ऐसा माना जाता है कि सपने में अपने बाल धोना बहुत ही शुभ समय का प्रतीक है। Hair In a Dream यह सपना इस बात का इशारा है कि आपको बहुत जल्द कोई ‘गुड न्यूज’ या खुशखबरी मिलने वाली है। यह खुशखबरी आपके परिवार, करियर या निजी जीवन से जुड़ी हो सकती है। 2. नकारात्मकता का नाश जब हम असल जिंदगी में बाल धोते हैं, तो हम गंदगी साफ कर रहे होते हैं। ठीक उसी प्रकार, Hair In a Dream में बाल धोना यह दर्शाता है कि आप अपने जीवन से फालतू चीजों और नकारात्मक विचारों (Negative Thoughts) से छुटकारा पाने वाले हैं। वे चिंताएं जो आपको लंबे समय से परेशान कर रही थीं, अब उनका अंत होने वाला है। यह मानसिक शांति की ओर एक बड़ा कदम है। 3. आर्थिक लाभ (धन प्राप्ति) स्रोतों के अनुसार, यह सपना भविष्य में धन प्राप्ति के प्रबल योग बनाता है। Hair In a Dream यदि आप आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और आपको ऐसा सपना आता है, तो यह संकेत है कि आपके अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं। बाल धोने की विभिन्न अवस्थाएं और उनके मतलब स्वप्न शास्त्र में हर छोटी डिटेल का महत्व है। आप बाल कैसे धो रहे हैं, किससे धो रहे हैं—इन सबका अलग मतलब होता है। आइए जानते हैं Hair In a Dream की विभिन्न स्थितियों का फल: क. शैम्पू या साबुन से बाल धोना अगर आप सपने में देखते हैं कि आप शैम्पू या साबुन का उपयोग करके बाल धो रहे हैं, तो यह आने वाले ‘अच्छे समय’ की गारंटी है। • व्यापार में तरक्की: यह सपना विशेष रूप से उन लोगों के लिए लकी है जो बिजनेस या नौकरी करते हैं। यह सर्विस में प्रमोशन या व्यापार में मुनाफे का संकेत देता है। • मानसिक खुशी: आप खुद को पहले से ज्यादा शांत और खुश महसूस करेंगे। जीवन में एक सकारात्मक बदलाव (Positive Change) आने वाला है। ख. सादे पानी से बाल धोना कभी-कभी हम सपने में देखते हैं कि हम बिना किसी साबुन के, सिर्फ सादे पानी से बाल धो रहे हैं। Hair In a Dream का यह स्वरूप भी अत्यंत शुभ माना गया है। यह शुद्ध रूप से भविष्य में ‘धन प्राप्ति’ के अवसर प्रदान करने वाला सपना है। रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है या आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। ग. बाल धोकर खुद को नहाते हुए देखना यह सपना “सोने पर सुहागा” जैसा है। यदि आप बाल धोने के साथ-साथ खुद को नहाते हुए भी देखते हैं, तो इसका अर्थ है शारीरिक और मानसिक शुद्धि। • तनाव से मुक्ति: आपको जल्द ही शारीरिक कष्टों और मानसिक तनाव से छुटकारा मिलने वाला है। • नई शुरुआत: यह भविष्य में होने वाले सकारात्मक बदलावों की नींव रखता है। सावधान! यह सपना हो सकता है अशुभ जहाँ अपने बाल धोना शुभ है, वहीं Hair In a Dream का एक रूप ऐसा भी है जो आपको चेतावनी देता है। किसी और के बाल धोते हुए देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आप सपने में किसी दूसरे व्यक्ति के बाल धो रहे हैं, तो यह शुभ संकेत नहीं है। • अनचाही मुलाकात: इसका अर्थ है कि भविष्य में आपकी मुलाकात किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकती है जिसे आप बिल्कुल पसंद नहीं करते। • व्यर्थ का समय: वह व्यक्ति आपके किसी काम नहीं आने वाला है और उससे मिलना केवल समय की बर्बादी होगी। इसलिए, यदि ऐसा सपना आए तो अपने सामाजिक दायरे में सतर्क रहें। लाल किताब और अन्य बालों से जुड़े सपने लाल किताब (Lal Kitab) में सपनों का विश्लेषण बहुत ही सूक्ष्म तरीके से किया गया है। यहाँ Hair In a Dream के कई अन्य रूप भी बताए गए हैं जो विचारणीय हैं: 1. सपने में बाल कटते हुए देखना (Hair Cut) अक्सर लोग सपने में खुद को बाल काटते हुए या नाई से बाल कटवाते हुए देखते हैं। लाल किताब में ‘सपने में बाल कटे देखना’ एक महत्वपूर्ण विषय है। हालाँकि इसका फल परिस्थिति पर निर्भर करता है, लेकिन आमतौर पर बाल कटना बदलाव का प्रतीक है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यह कर्ज मुक्ति

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Lalita Jayanti 2026

Lalita Jayanti 2026 Date And Time: ललिता जयंती सौंदर्य और शक्ति की अधिष्ठात्री माँ ललिता का प्राकट्य दिवस, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भंडासुर वध की कथा

“ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ललिता त्रिपुर सुंदरी देव्यै नमः” Lalita Jayanti 2026 Mein Kab Hai: सनातन धर्म में दश महाविद्याओं का सर्वोच्च स्थान है, और इन्हीं में से एक अत्यंत सौम्य, तेजस्वी और शीघ्र फल देने वाली शक्ति हैं—माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी। माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला Lalita Jayanti 2026 का पर्व केवल एक सामान्य पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह उस ब्रह्मांडीय ऊर्जा के अवतरण का उत्सव है जिसने देवताओं को भय से मुक्त किया और सृष्टि में पुनः प्रेम और सौंदर्य की स्थापना की। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व बहुत ही शुभ संयोगों के साथ आ रहा है। यदि आप अपने जीवन में भौतिक सुख, वैवाहिक आनंद और आध्यात्मिक मोक्ष की कामना रखते हैं, तो Lalita Jayanti 2026 आपके लिए एक सुनहरा अवसर है। आज के इस विस्तृत लेख में, हम जानेंगे कि इस वर्ष ललिता जयंती कब है, इसका पूजा मुहूर्त क्या है, और आप किस प्रकार माँ की आराधना करके अपनी कुंडली के ग्रह दोषों को शांत कर सकते हैं। Lalita Jayanti 2026 Date And Time: ललिता जयंती सौंदर्य और शक्ति की अधिष्ठात्री माँ ललिता का प्राकट्य दिवस….. Lalita Jayanti 2026: सही तिथि और पंचांग (Date and Tithi) सबसे पहले भक्तों के मन में उठने वाले प्रश्न का निवारण करते हैं—आखिर Lalita Jayanti 2026 की सही तारीख क्या है? हिंदू पंचांग और चंद्रमा की गति के अनुसार, ललिता जयंती माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में, Lalita Jayanti 2026 का पावन पर्व 1 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि का समय (Purnima Tithi Timings): पूजा और व्रत के लिए तिथि का सही ज्ञान होना आवश्यक है: • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 01 फरवरी 2026 को सुबह 05:52 बजे से। • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 02 फरवरी 2026 को सुबह 03:38 बजे तक। चूँकि 1 फरवरी को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि व्याप्त है, इसलिए उदयातिथि के नियमानुसार Lalita Jayanti 2026 का व्रत और पूजन 1 फरवरी को ही मान्य होगा। रविवार का दिन और पूर्णिमा का संयोग इसे सूर्य और चंद्रमा दोनों की कृपा प्राप्ति के लिए विशेष बनाता है। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat for Puja) तंत्र साधना और श्रीविद्या उपासना में मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। Lalita Jayanti 2026 पर पूजा के लिए निम्नलिखित मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ रहेंगे: • ब्रह्म मुहूर्त (साधना के लिए सर्वोत्तम): सुबह 04:45 बजे से 05:30 बजे तक। यह समय ध्यान और मंत्र सिद्धि के लिए सबसे शक्तिशाली माना जाता है। • प्रातः काल पूजा: सूर्योदय के बाद सुबह 07:00 बजे से 09:00 बजे तक। • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:55 बजे से 12:45 बजे तक। • प्रदोष काल (संध्या पूजन): शाम 06:30 बजे से 08:15 बजे तक। गृहस्थ लोग अभिजीत मुहूर्त या प्रातः काल में पूजा कर सकते हैं, जबकि तांत्रिक और विशेष साधक ब्रह्म मुहूर्त या मध्यरात्रि में माँ की गुप्त साधना करते हैं। कौन हैं माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी? (Who is Goddess Lalita?) Lalita Jayanti 2026 मनाने से पहले हमें देवी के स्वरूप को समझना होगा। माँ ललिता, जिन्हें ‘त्रिपुर सुंदरी’ और ‘षोडशी’ भी कहा जाता है, दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख देवी हैं। • नाम का अर्थ: ‘ललिता’ का अर्थ है—जो लीला करती हैं या जो अत्यंत सुंदर और चंचल हैं। ‘त्रिपुर सुंदरी’ का अर्थ है—तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) में सबसे सुंदर। • स्वरूप: माँ का वर्ण उदीयमान सूर्य के समान कांतिवान (सिंदूरी लाल) है। वे 16 वर्ष की नित्य युवती (षोडशी) मानी जाती हैं, जो पंचप्रेतासन (ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश्वर और सदाशिव के आसन) पर विराजमान हैं। उनके हाथों में पाश, अंकुश, गन्ने का धनुष और फूलों के बाण होते हैं। • श्रीविद्या: माँ ललिता श्रीचक्र (Shri Yantra) की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी साधना को ‘श्रीविद्या साधना’ कहा जाता है, जो भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करती है। ललिता जयंती का आध्यात्मिक महत्व (Significance) Lalita Jayanti 2026 का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-जागृति का पर्व है। 1. शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक: यह पर्व याद दिलाता है कि शक्ति केवल उग्र नहीं होती, वह अत्यंत सौम्य और सुंदर भी हो सकती है। माँ ललिता ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) का प्रतीक हैं। 2. ग्रह दोष निवारण: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माँ ललिता की पूजा से कुंडली के समस्त दोष दूर होते हैं। विशेषकर, यह दिन शुक्र ग्रह (Venus) को मजबूत करने के लिए सर्वोत्तम है। जो लोग प्रेम, विलासिता और कला के क्षेत्र में सफलता चाहते हैं, उनके लिए यह दिन वरदान समान है। 3. मोक्ष प्राप्ति: मान्यता है कि Lalita Jayanti 2026 पर ‘ललिता सहस्रनाम’ का पाठ करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और साधक शिव-शक्ति के मिलन को समझ पाता है। माँ ललिता के प्राकट्य की पौराणिक कथा (The Legend of Bhandasura) Lalita Jayanti 2026 के दिन इस कथा को पढ़ने या सुनने का विशेष फल है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार कामदेव (प्रेम के देवता) को भगवान शिव ने अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया था। कामदेव की भस्म से चित्रकर्म नामक गण ने एक पुरुष की आकृति बनाई, जिसे शिव जी ने प्राण दान दिया। चूँकि उसका जन्म शिव के क्रोध और कामदेव की भस्म से हुआ था, वह ‘भंडासुर’ नामक राक्षस बना। भंडासुर ने कठोर तपस्या करके यह वरदान प्राप्त कर लिया कि उसे कोई पुरुष नहीं मार सकता। वरदान पाकर उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया। उसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया और ऋषियों का वध करने लगा। हताश होकर सभी देवता और ऋषिगण ने महायज्ञ किया और आदिशक्ति की आराधना की। उनकी पुकार सुनकर यज्ञ की अग्नि (चिदग्निकुंड) से एक दिव्य तेज प्रकट हुआ। यह तेज और कोई नहीं, साक्षात् माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी थीं। उनका स्वरूप इतना दैदीप्यमान था कि करोड़ों सूर्यों की चमक भी फीकी पड़ जाए। माँ ललिता ने भंडासुर की विशाल सेना के साथ युद्ध किया। अंत में, उन्होंने अपने ‘कामेश्वर अस्त्र’ और दिव्य मुस्कान से भंडासुर का वध कर दिया। भंडासुर अज्ञान और अहंकार का प्रतीक था, और माँ ललिता ने ज्ञान रूपी प्रकाश से उसका अंत किया। यही कारण है कि Lalita Jayanti 2026 बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय

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Dwijapriya Sankashti Chaturthi

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी अद्भुत ‘सुकर्मा योग’, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और संपूर्ण विधि

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ सनातन धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत हो या जीवन में आए संकटों का नाश करना हो, गजानन की आराधना सबसे पहले की जाती है। हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को ‘संकष्टी चतुर्थी’ मनाई जाती है, लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का अपना एक विशेष महत्व है। इसे Dwijapriya Sankashti Chaturthi के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में फरवरी के महीने में पड़ने वाला यह व्रत भक्तों के लिए बहुत खास होने वाला है। इस बार ग्रहों की स्थिति और ‘सुकर्मा योग’ का निर्माण इस दिन को और भी अधिक फलदायी बना रहा है। आज के इस विस्तृत लेख में, हम Dwijapriya Sankashti Chaturthi की तारीख, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी अद्भुत ‘सुकर्मा योग’, जानें……. Dwijapriya Sankashti Chaturthi क्या है? (परिचय) संकष्टी चतुर्थी का शाब्दिक अर्थ है “संकटों को हरने वाली चतुर्थी”। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को ‘द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश के ‘द्विजप्रिय’ स्वरूप की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन गणेश जी के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा करने का भी विधान है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और पारिवारिक शांति के लिए रखा जाता है। यदि आपके काम बार-बार अटक रहे हैं या घर में बरकत नहीं हो रही है, तो Dwijapriya Sankashti Chaturthi का व्रत आपके लिए रामबाण सिद्ध हो सकता है। द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026: सही तारीख और तिथि (Date and Tithi) वर्ष 2026 में इस व्रत की तारीख को लेकर अगर आपके मन में कोई भी संशय है, तो उसे दूर कर लें। पंचांग की गणना के अनुसार, Dwijapriya Sankashti Chaturthi का व्रत 5 फरवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि का सटीक समय: वैदिक पंचांग के अनुसार, तिथि का समय इस प्रकार रहेगा: चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: 5 फरवरी 2026 को सुबह 12:09 AM (मध्यरात्रि के बाद) से। चतुर्थी तिथि समाप्त: 6 फरवरी 2026 को सुबह 12:22 AM तक। चूंकि 5 फरवरी को सूर्योदय के समय चतुर्थी तिथि मौजूद है और इसी रात को चंद्रमा भी निकलेगा, इसलिए उदयातिथि के नियमानुसार व्रत 5 फरवरी को ही मान्य होगा। 3. इस बार क्यों खास है यह चतुर्थी? (शुभ योग और नक्षत्र) साल 2026 की Dwijapriya Sankashti Chaturthi सामान्य नहीं है। इस दिन आकाशमंडल में कुछ ऐसे शुभ योग बन रहे हैं जो आपकी पूजा का फल दोगुना कर देंगे। सुकर्मा योग (Sukarma Yoga): इस दिन ‘सुकर्मा योग’ का निर्माण हो रहा है। यह योग 5 फरवरी को प्रात:काल से लेकर देर रात 12:04 AM तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में सुकर्मा योग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों में कभी बाधा नहीं आती और सफलता सुनिश्चित होती है। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र: इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:57 PM तक रहेगा। यह नक्षत्र स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है। इन शुभ संयोगों में की गई Dwijapriya Sankashti Chaturthi की पूजा आपको जीवन में स्थिरता और अपार धन-वैभव प्रदान कर सकती है। 4. पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat for Puja) किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब पूजा सही समय (मुहूर्त) पर की जाए। पंचांग के अनुसार, 5 फरवरी 2026 को पूजा के लिए दिन भर कई शुभ समय उपलब्ध हैं। Dwijapriya Sankashti Chaturthi: पूजन मुहूर्त 1. ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:22 AM से 06:15 AM तक। (ध्यान और मंत्र जाप के लिए सर्वश्रेष्ठ)। 2. शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 07:07 AM से 08:29 AM तक। (सुबह की पूजा के लिए)। 3. अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 PM से 12:57 PM तक। (यह दिन का सबसे शुभ समय होता है)। 4. लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 12:35 PM से 01:57 PM तक। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे इन्हीं मुहूर्तों में अपनी पूजा संपन्न करें ताकि भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त हो सके। 5. सावधान इस समय न करें पूजा (राहुकाल) ज्योतिष शास्त्र में ‘राहुकाल’ को अशुभ माना जाता है। इस समय कोई भी शुभ कार्य या पूजा शुरू नहीं करनी चाहिए। Dwijapriya Sankashti Chaturthi के दिन राहुकाल का समय दोपहर में रहेगा। राहुकाल समय: दोपहर 01:57 PM से लेकर 03:19 PM तक। इस डेढ़ घंटे की अवधि में पूजा करने से बचें। यदि आपने पूजा पहले शुरू कर दी है तो उसे जारी रख सकते हैं, लेकिन नई शुरुआत इस समय न करें। 6. चंद्रोदय का समय (Moonrise Time) संकष्टी चतुर्थी का व्रत बिना चंद्रमा को अर्घ्य दिए पूरा नहीं माना जाता। भक्त दिन भर निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं और रात में चाँद निकलने पर उसकी पूजा करते हैं। Dwijapriya Sankashti Chaturthi पर चांद निकलने का समय चंद्रोदय: 5 फरवरी 2026 को रात 09:35 PM पर। ध्यान दें कि अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, लेकिन मानक समय रात 9 बजकर 35 मिनट रहेगा। इस समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही अपना व्रत खोलें। 7. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi) यदि आप पहली बार Dwijapriya Sankashti Chaturthi का व्रत रख रहे हैं, तो नीचे दी गई सरल विधि का पालन करें: 1. संकल्प: 5 फरवरी की सुबह जल्दी उठें (ब्रह्म मुहूर्त में उठना श्रेष्ठ है)। स्नान करके साफ कपड़े पहनें। लाल या पीले वस्त्र पहनना शुभ होता है। हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। 2. स्थापना: घर के मंदिर में एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें। 3. अभिषेक: गणपति बप्पा का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। 4. प्रिय वस्तुएं: गणेश जी को उनकी प्रिय चीजें अर्पित करें—जैसे दूर्वा घास (21 गांठें), लाल गुड़हल का फूल, मोदक या लड्डू, और सिंदूर। 5. मंत्र जाप: धूप और दीप जलाकर गणेश जी के मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें। 6. कथा: Dwijapriya Sankashti Chaturthi की व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026 Date And Time: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी अद्भुत ‘सुकर्मा योग’, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और संपूर्ण विधि Read More »

Sri Kartikeya Stotram

Sri Kartikeya Stotram:श्री कार्तिकेय स्तोत्र

श्री कार्तिकेय स्तोत्र हिंदी पाठ: Sri Kartikeya Stotram in Hindi स्कंद उवाच – योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः ।स्कंदः कुमारः सेनानी स्वामी शंकरसंभवः ॥ १ ॥ गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः ।तारकारिरुमापुत्रः क्रोधारिश्च षडाननः ॥ २ ॥ शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः ।सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः ॥ ३ ॥ शरजन्मा गणाधीशः पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् ।सर्वागमप्रणेता च वांछितार्थप्रदर्शनः ॥ ४ ॥ अष्टाविंशतिनामानि मदीयानीति यः पठेत् ।प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पतिर्भवेत् ॥ ५ ॥ महामंत्रमयानीति मम नामानुकीर्तनात् ।महाप्रज्ञामवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥ ६ ॥ ॥ इति श्री कार्तिकेय स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥ Sri Kartikeya Stotram Lyrics: श्री कार्तिकेय स्तोत्र पाठ skand uvach – yogishvaro mahasenah kartikeyo̕gninandanah ।skandah kumarah senani svaami shankarasambhavah ।। 1 ।। gangeyastamrachoodasch bramachari shikhidhvajah ।tarakarirumaputrah krodharisch shadananah ।। 2 ।। shabdabramasamudrasch siddhah sarasvato guhah ।sanatkumaro bhagavan bhogamokshafalpradah ।। 3 ।। sharajanma ganadhishah purvajo muktimargakrut ।sarvagamapraneta ch vanghchhitarthapradarshanah ।। 4 ।। ashtavimshatinamani madiyaaniti yah pathet ।pratyusham shraddhaya yukto muko vachaspatirbhavet ।। 5 ।। mahamantramayaniti mam namanukirtanat ।mahapragnyamvapnoti natra karya vicharana ।। 6 ।। ।। iti shri kartikeya stotra sampurnam ।। श्री कार्तिकेय स्तोत्र विशेषताए:Shri Karthikeya Stotra Features Sri Kartikeya Stotram: श्री कार्तिकेय स्तोत्र के साथ-साथ यदि कार्तिकेय अष्टकम का पाठ किया जाए तो, इस स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, यह स्तोत्र शीघ्र ही फल देने लग जाते है| यदि साधक Sri Kartikeya Stotram इस स्तोत्र  का पाठ प्रतिदिन करने से बुराइया खुद- ब- खुद दूर होने लग जाती है साथ ही सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है अपने परिवार जनों का स्वस्थ्य ठीक रहता है और लम्बे समय से बीमार व्यक्ति को इस स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने पर रोग मुक्त हो जाता है| यदि मनुष्य जीवन की सभी प्रकार के भय, डर से मुक्ति चाहता है तो वह इस स्तोत्र का पाठ करे| Sri Kartikeya Stotram श्री कार्तिकेय स्तोत्र के पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है| और नियमित रुप से करने से रुके हुए कार्य भी पूर्ण होने लगते है और साधक के जीवन में रोग, भय, दोष, शोक, बुराइया, डर दूर हो जाते है साथ ही Sri Kartikeya Stotram श्री कार्तिकेय जी की पूजा करने से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि प्राप्त होती है। याद रखे इस श्री कार्तिकेय स्तोत्र पाठ को करने से पूर्व अपना पवित्रता बनाये रखे| इससे मनुष्य को जीवन में बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है

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Shabri Jayanti 2026

Shabri Jayanti 2026 Date And Time: शबरी जयंती 8 या 9 फरवरी ? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता शबरी की अनसुनी कथा

मोहि तोहि नाते अनेक मानिए जो कहै। पर एक नाता भगति को, जो शबरी सो अहै।। Shabri Jayanti 2026 Mein Kab Hai: भगवान श्रीराम ने स्वयं कहा है कि मेरे और भक्त के बीच केवल एक ही नाता है, और वह है ‘भक्ति’ का। इसी भक्ति की सबसे बड़ी मिसाल हैं—माता शबरी। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाने वाली शबरी जयंती न केवल एक पर्व है, बल्कि यह धैर्य, प्रतीक्षा और समर्पण का उत्सव है। वर्ष 2026 में Shabri Jayanti 2026 को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे एक भीलनी ने अपने जूठे बेरों से त्रिलोकीनाथ का पेट भरा और मोक्ष प्राप्त किया। Shabri Jayanti 2026 आज के इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि साल 2026 में यह पर्व कब मनाया जाएगा, पूजा का सही समय क्या है और इस दिन किन चीजों का दान करने से आपको स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है। Shabri Jayanti 2026: सही तारीख और समय Date and Time …. सबसे पहले पंचांग की गणना को समझते हैं ताकि आप सही दिन व्रत और पूजन कर सकें। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में, Shabri Jayanti 2026 का पावन पर्व 08 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा,। सप्तमी तिथि का विस्तृत समय: किसी भी व्रत में तिथि के आरम्भ और समापन का ज्ञान होना आवश्यक है: • सप्तमी तिथि प्रारम्भ: 08 फरवरी 2026 को सुबह 02:54 बजे से,। • सप्तमी तिथि समाप्त: 09 फरवरी 2026 को सुबह 05:01 बजे तक,। चूंकि 8 फरवरी को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि व्याप्त है और पूरा दिन यह तिथि रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार Shabri Jayanti 2026 रविवार, 8 फरवरी को ही मनाई जाएगी। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat for Puja) किसी भी पूजा का फल तभी पूर्ण रूप से मिलता है जब उसे सही मुहूर्त में किया जाए। 8 फरवरी 2026 को पूजा के लिए कई अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं। यदि आप Shabri Jayanti 2026 पर भगवान राम और माता शबरी की कृपा पाना चाहते हैं, तो निम्नलिखित मुहूर्तों का ध्यान रखें: • ब्रह्म मुहूर्त (सबसे उत्तम): प्रातः 05:21 बजे से 06:13 बजे तक। यह समय ध्यान और मंत्र जाप के लिए सर्वश्रेष्ठ है। • प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:47 बजे से 07:05 बजे तक। • रवि योग: सुबह 07:05 बजे से अगले दिन (09 फरवरी) सुबह 05:02 बजे तक। रवि योग में की गई पूजा से सभी दोष नष्ट होते हैं और सूर्य के समान तेज प्राप्त होता है। • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 12:57 बजे तक। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:26 बजे से 03:10 बजे तक। • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:03 बजे से 06:29 बजे तक। माता शबरी की पौराणिक कथा: त्याग और प्रतीक्षा की मिसाल:Mythology of Mata Shabari: Example of sacrifice and waiting Shabri Jayanti 2026 मनाने का असली आनंद तभी है जब हम माता शबरी के जीवन संघर्ष और उनकी प्रेममयी कथा को जानें। श्रमणा से शबरी बनने का सफर: पौराणिक कथाओं के अनुसार, शबरी का असली नाम ‘श्रमणा’ था और वे भील समुदाय (शबर जाति) के मुखिया की बेटी थीं। जब वे विवाह योग्य हुईं, तो उनके पिता ने उनके विवाह की तैयारी शुरू की। भील प्रथा के अनुसार, विवाह के भोज के लिए सैकड़ों निर्दोष जानवरों की बलि दी जानी थी। Shabri Jayanti 2026 जब श्रमणा ने इन बेजुबान जानवरों को देखा, तो उनका हृदय करुणा से भर गया। उन्हें लगा कि उनके विवाह के लिए इतनी हिंसा पाप है। इसी ग्लानि और वैराग्य के कारण, वे विवाह से ठीक एक दिन पहले घर छोड़कर जंगल (दंडकारण्य वन) भाग गईं। मतंग ऋषि की शरण और वरदान: जंगल में भटकते हुए वे मतंग ऋषि के आश्रम के पास पहुंचीं। चूंकि वे निम्न जाति की थीं, उन्हें डर था कि कहीं ऋषि उन्हें स्वीकार न करें। इसलिए वे चुपके से सुबह जल्दी उठकर आश्रम का रास्ता साफ़ करतीं, कांटे चुनतीं और रेत बिछा देती थीं ताकि ऋषियों को चलने में कष्ट न हो। एक दिन मतंग ऋषि ने उनकी सेवा देख ली और प्रसन्न होकर उन्हें अपनी शिष्या बना लिया। जब मतंग ऋषि का अंत समय आया, तो उन्होंने शबरी को वरदान दिया, “बेटी! तुम यहीं प्रतीक्षा करो, एक दिन भगवान श्रीराम स्वयं तुमसे मिलने यहाँ आएंगे”। जूठे बेर और मोक्ष: गुरु के वचनों पर विश्वास करके शबरी बूढ़ी हो गईं, लेकिन उनका विश्वास नहीं डगमगाया। वे रोज रास्ते में फूल बिछातीं और जंगल से मीठे बेर चुनकर लातीं। कोई बेर खट्टा न हो, इसलिए वे हर बेर को चखकर (जूठा करके) रखती थीं। अंततः Shabri Jayanti 2026 जिस दिन मनाई जाती है, Shabri Jayanti 2026 उसी तिथि के आसपास भगवान राम और लक्ष्मण उन्हें खोजते हुए वहां पहुंचे। शबरी ने प्रेम से अपने जूठे बेर प्रभु को खिलाए। भगवान ने भी ‘भाव’ को प्रधान मानते हुए वे बेर खाए और शबरी को मोक्ष प्रदान किया,। शबरी जयंती 2026 पूजा विधि: Step-by-Step Puja Vidhi धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से पूजा करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है और श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है। Shabri Jayanti 2026 पर पूजा की विधि इस प्रकार है: 1. स्नान और संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें,। हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें। 2. स्थान की शुद्धि: पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें। एक चौकी पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी और माता शबरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें,। 3. दीप प्रज्वलन: सबसे पहले घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती व धूप दिखाएं। 4. पूजन सामग्री: भगवान को रोली, अक्षत, चंदन, और तुलसी दल अर्पित करें। माता शबरी को विशेष रूप से लाल फूल (गुलाब या कमल) अर्पित करें। 5. विशेष भोग (बेर): इस दिन ‘बेर’ के भोग का सबसे अधिक महत्व है। शबरी माता की स्मृति में भगवान राम को बेर अर्पित करें। इसके अलावा फल, फूल, नारियल और मिष्ठान का भोग भी लगाएं,। 6.

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