Shabri Jayanti 2026

Shabri Jayanti 2026 Date And Time: शबरी जयंती 8 या 9 फरवरी ? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता शबरी की अनसुनी कथा

मोहि तोहि नाते अनेक मानिए जो कहै। पर एक नाता भगति को, जो शबरी सो अहै।।

Shabri Jayanti 2026 Mein Kab Hai: भगवान श्रीराम ने स्वयं कहा है कि मेरे और भक्त के बीच केवल एक ही नाता है, और वह है ‘भक्ति’ का। इसी भक्ति की सबसे बड़ी मिसाल हैं—माता शबरी। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाने वाली शबरी जयंती न केवल एक पर्व है, बल्कि यह धैर्य, प्रतीक्षा और समर्पण का उत्सव है।

वर्ष 2026 में Shabri Jayanti 2026 को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे एक भीलनी ने अपने जूठे बेरों से त्रिलोकीनाथ का पेट भरा और मोक्ष प्राप्त किया। Shabri Jayanti 2026 आज के इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि साल 2026 में यह पर्व कब मनाया जाएगा, पूजा का सही समय क्या है और इस दिन किन चीजों का दान करने से आपको स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है।

Shabri Jayanti 2026: सही तारीख और समय Date and Time ….

सबसे पहले पंचांग की गणना को समझते हैं ताकि आप सही दिन व्रत और पूजन कर सकें। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है।

वर्ष 2026 में, Shabri Jayanti 2026 का पावन पर्व 08 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा,।

सप्तमी तिथि का विस्तृत समय: किसी भी व्रत में तिथि के आरम्भ और समापन का ज्ञान होना आवश्यक है:

सप्तमी तिथि प्रारम्भ: 08 फरवरी 2026 को सुबह 02:54 बजे से,।

सप्तमी तिथि समाप्त: 09 फरवरी 2026 को सुबह 05:01 बजे तक,।

चूंकि 8 फरवरी को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि व्याप्त है और पूरा दिन यह तिथि रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार Shabri Jayanti 2026 रविवार, 8 फरवरी को ही मनाई जाएगी।

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat for Puja)

किसी भी पूजा का फल तभी पूर्ण रूप से मिलता है जब उसे सही मुहूर्त में किया जाए। 8 फरवरी 2026 को पूजा के लिए कई अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं। यदि आप Shabri Jayanti 2026 पर भगवान राम और माता शबरी की कृपा पाना चाहते हैं, तो निम्नलिखित मुहूर्तों का ध्यान रखें:

ब्रह्म मुहूर्त (सबसे उत्तम): प्रातः 05:21 बजे से 06:13 बजे तक। यह समय ध्यान और मंत्र जाप के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:47 बजे से 07:05 बजे तक।

रवि योग: सुबह 07:05 बजे से अगले दिन (09 फरवरी) सुबह 05:02 बजे तक। रवि योग में की गई पूजा से सभी दोष नष्ट होते हैं और सूर्य के समान तेज प्राप्त होता है।

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 12:57 बजे तक। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:26 बजे से 03:10 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:03 बजे से 06:29 बजे तक।

माता शबरी की पौराणिक कथा: त्याग और प्रतीक्षा की मिसाल:Mythology of Mata Shabari: Example of sacrifice and waiting

Shabri Jayanti 2026 मनाने का असली आनंद तभी है जब हम माता शबरी के जीवन संघर्ष और उनकी प्रेममयी कथा को जानें।

श्रमणा से शबरी बनने का सफर: पौराणिक कथाओं के अनुसार, शबरी का असली नाम ‘श्रमणा’ था और वे भील समुदाय (शबर जाति) के मुखिया की बेटी थीं। जब वे विवाह योग्य हुईं, तो उनके पिता ने उनके विवाह की तैयारी शुरू की। भील प्रथा के अनुसार, विवाह के भोज के लिए सैकड़ों निर्दोष जानवरों की बलि दी जानी थी। Shabri Jayanti 2026 जब श्रमणा ने इन बेजुबान जानवरों को देखा, तो उनका हृदय करुणा से भर गया। उन्हें लगा कि उनके विवाह के लिए इतनी हिंसा पाप है। इसी ग्लानि और वैराग्य के कारण, वे विवाह से ठीक एक दिन पहले घर छोड़कर जंगल (दंडकारण्य वन) भाग गईं।

मतंग ऋषि की शरण और वरदान: जंगल में भटकते हुए वे मतंग ऋषि के आश्रम के पास पहुंचीं। चूंकि वे निम्न जाति की थीं, उन्हें डर था कि कहीं ऋषि उन्हें स्वीकार न करें। इसलिए वे चुपके से सुबह जल्दी उठकर आश्रम का रास्ता साफ़ करतीं, कांटे चुनतीं और रेत बिछा देती थीं ताकि ऋषियों को चलने में कष्ट न हो।

एक दिन मतंग ऋषि ने उनकी सेवा देख ली और प्रसन्न होकर उन्हें अपनी शिष्या बना लिया। जब मतंग ऋषि का अंत समय आया, तो उन्होंने शबरी को वरदान दिया, “बेटी! तुम यहीं प्रतीक्षा करो, एक दिन भगवान श्रीराम स्वयं तुमसे मिलने यहाँ आएंगे”।

जूठे बेर और मोक्ष: गुरु के वचनों पर विश्वास करके शबरी बूढ़ी हो गईं, लेकिन उनका विश्वास नहीं डगमगाया। वे रोज रास्ते में फूल बिछातीं और जंगल से मीठे बेर चुनकर लातीं। कोई बेर खट्टा न हो, इसलिए वे हर बेर को चखकर (जूठा करके) रखती थीं। अंततः Shabri Jayanti 2026 जिस दिन मनाई जाती है, Shabri Jayanti 2026 उसी तिथि के आसपास भगवान राम और लक्ष्मण उन्हें खोजते हुए वहां पहुंचे। शबरी ने प्रेम से अपने जूठे बेर प्रभु को खिलाए। भगवान ने भी ‘भाव’ को प्रधान मानते हुए वे बेर खाए और शबरी को मोक्ष प्रदान किया,।

शबरी जयंती 2026 पूजा विधि: Step-by-Step Puja Vidhi

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धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से पूजा करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है और श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है। Shabri Jayanti 2026 पर पूजा की विधि इस प्रकार है:

1. स्नान और संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें,। हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।

2. स्थान की शुद्धि: पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें। एक चौकी पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी और माता शबरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें,।

3. दीप प्रज्वलन: सबसे पहले घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती व धूप दिखाएं।

4. पूजन सामग्री: भगवान को रोली, अक्षत, चंदन, और तुलसी दल अर्पित करें। माता शबरी को विशेष रूप से लाल फूल (गुलाब या कमल) अर्पित करें।

5. विशेष भोग (बेर): इस दिन ‘बेर’ के भोग का सबसे अधिक महत्व है। शबरी माता की स्मृति में भगवान राम को बेर अर्पित करें। इसके अलावा फल, फूल, नारियल और मिष्ठान का भोग भी लगाएं,।

6. मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते रामचन्द्राय नमः” और “ॐ नमः शबरी माते नमः” मंत्रों का 108 बार जाप करें।

7. कथा और आरती: रामायण के अरण्यकांड से शबरी प्रसंग का पाठ करें या कथा सुनें। अंत में “श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन” और माता शबरी की आरती गाएं,।

शबरी जयंती का महत्व : Significance

Shabri Jayanti 2026 केवल एक व्रत नहीं है, यह एक सामाजिक संदेश भी है।

भक्ति की शक्ति: यह दिन हमें सिखाता है कि ईश्वर को पाने के लिए धन, उच्च कुल या ज्ञान की आवश्यकता नहीं है, केवल पवित्र मन और धैर्य चाहिए,।

समानता का संदेश: भगवान राम ने एक वनवासी भीलनी के जूठे फल खाकर समाज में ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया था।

संजीवनी बूटी का रहस्य: एक रोचक मान्यता यह भी है कि Shabri Jayanti 2026 शबरी के दिए हुए जिन बेरों को लक्ष्मण जी ने संकोचवश नहीं खाया था, बाद में वही बेर ‘संजीवनी बूटी’ के रूप में उनके प्राण बचाने के काम आए।

शबरी जयंती पर क्या करें और क्या न करें? (Dos and Don’ts)

इस पवित्र दिन का पूरा लाभ उठाने के लिए कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

क्या करें (Dos)

इस दिन “रामायण” के अरण्यकांड का पाठ अवश्य करें।

जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और विशेषकर ‘बेर’ का दान करें।

पूरे दिन सात्विक रहें और भजन-कीर्तन में समय बिताएं।

अपने गुरु और बड़ों का सम्मान करें, जैसे शबरी ने मतंग ऋषि का किया था।

क्या न करें (Don’ts)

इस दिन तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन) का सेवन भूलकर भी न करें।

किसी भी व्यक्ति, जाति या गरीब का अपमान न करें, क्योंकि माता शबरी ने हर जीव में राम को देखा था।

घर में कलह या झगड़ा न करें।

बेर का अनादर न करें और न ही इसे व्यर्थ फेंकें।

दान का महत्व: स्वर्ग प्राप्ति का मार्ग

शास्त्रों में कहा गया है कि Shabri Jayanti 2026 के दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। इस दिन आपको निम्नलिखित चीजों का दान करना चाहिए:

अन्न और धन: गरीबों को भोजन कराएं और सामर्थ्य अनुसार धन दें,।

वस्त्र: किसी असहाय व्यक्ति को वस्त्र दान करें।

बेर: इस दिन बेर का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन दान और सेवा करने से मरने के बाद जीव को सीधे स्वर्ग की प्राप्ति होती है और भगवान राम की विशेष कृपा मिलती है।

राशियों पर प्रभाव

Shabri Jayanti 2026 पर बन रहा ‘रवि योग’ सभी 12 राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रहा है। विशेष रूप से मेष, कर्क और धनु राशि के जातकों को भगवान राम की पूजा से मानसिक शांति और रुके हुए कार्यों में सफलता मिलेगी। यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह दोष है, तो इस दिन राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करना लाभकारी सिद्ध होगा।

निष्कर्ष

भक्तों, Shabri Jayanti 2026 हमें याद दिलाती है कि भगवान महलों में नहीं, बल्कि भक्त के भाव में बसते हैं। 8 फरवरी 2026 को आइए हम सब मिलकर अपने मन के अहंकार को त्यागें और माता शबरी जैसी निस्वार्थ भक्ति को अपने जीवन में अपनाएं।

चाहे आप किसी भी जाति या वर्ग से हों, यदि आपका मन पवित्र है, तो राम आपसे दूर नहीं हैं। इस शबरी जयंती पर अपने घर में बेर का भोग लगाएं और प्रभु से प्रार्थना करें कि वे हमें भी शबरी जैसी अटूट श्रद्धा प्रदान करें।

प्रेम के बस नृप रघुपति नाचा। शबरी के घर खाये रूखे बेर, दुर्योधन के मेवा त्यागे।।

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