Radha Ashtami 2026

Radha Ashtami 2026 Date And Time : राधा अष्टमी जानें सही तिथि, 3 शुभ योग, पूजा का मध्याह्न मुहूर्त, विधि और सामग्री….

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Radha Ashtami 2026 Date And Time : राधा अष्टमी जानें सही तिथि, 3 शुभ योग, पूजा का मध्याह्न मुहूर्त, विधि और सामग्री….
KARMASU 15 September 2026 9 मिनट पढ़ें
FESTIVAL📅 15 September 2026⏱ 9 मिनट

Radha Ashtami 2026 Mein Kab Hai : सनातन हिंदू धर्म में भाद्रपद मास का शुक्ल पक्ष अत्यंत पवित्र और पावन माना जाता है। इसी मास में भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और इसके ठीक 15 दिन बाद उनकी आह्लादिनी शक्ति, प्राणप्रिया श्री राधा रानी का प्राकट्य दिवस बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। Radha Ashtami भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बरसाना, वृंदावन, मथुरा, नंदगांव और देश-विदेश के घरों में राधा रानी का जन्मोत्सव भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष Radha Ashtami 2026 का यह पावन पर्व कई दुर्लभ और शुभ योगों के अद्भुत संयोग में आ रहा है।

शास्त्रों के अनुसार, श्री राधा रानी की आराधना और कृपा के बिना भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति व पूजा अधूरी मानी जाती है। Radha Ashtami इस दिन व्रत रखने और युगल सरकार की उपासना करने से जीवन में सुख, समृद्धि, अखंड सौभाग्य और निष्काम प्रेम की असीम प्राप्ति होती है। आज हम Radha Ashtami 2026 की सही तिथि, पंचांगीय समय, बनने वाले 3 शुभ योग, मध्याह्न पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त, संपूर्ण पूजन व श्रृंगार सामग्री, चरण-दर-चरण पूजा विधि और व्रत पारण समय का विस्तारपूर्वक विवेचन करेंगे।

राधा अष्टमी 2026 कब है ? तिथि और पंचांगीय गणना : When is Radha Ashtami 2026? Date and Panchang calculations.

वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री राधा रानी का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी (4 सितंबर 2026) के ठीक 15 दिन बाद अष्टमी तिथि का पावन योग बन रहा है….

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पर्व की मुख्य तारीख: उदयातिथि के शास्त्रीय नियमों के अनुसार, इस वर्ष Radha Ashtami 2026 का पावन पर्व शनिवार, 19 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

अष्टमी तिथि का प्रारंभ: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 01:00 बजे से प्रारंभ हो जाएगी।

अष्टमी तिथि का समापन: इस तिथि का समापन 19 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 03:26 बजे होगा।

उदयातिथि का महत्व: चूंकि 19 सितंबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी और मुख्य पूजा का मध्याह्न काल भी इसी दिन प्राप्त हो रहा है, इसलिए राधा अष्टमी का पूजन और व्रत 19 सितंबर को ही रखा जाएगा।

राधा अष्टमी 2026 में बन रहे 3 दुर्लभ शुभ योग : 3 Rare Auspicious Yogas Forming on Radha Ashtami 2026

वर्ष 2026 में राधा अष्टमी का पर्व धार्मिक दृष्टि से और भी विशेष हो गया है क्योंकि इस दिन पंचांग में 3 अत्यंत मंगलकारी और शुभ योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है….

आयुष्मान् योग: 19 सितंबर की प्रातःकाल से लेकर दोपहर 02 बजकर 29 मिनट तक आयुष्मान् योग रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, इस योग में की गई पूजा-अर्चना से साधक को उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्राप्ति होती है।

सौभाग्य योग: दोपहर 02 बजकर 29 मिनट के बाद सौभाग्य योग प्रारंभ होगा। यह योग जीवन में सुख, सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाली को बढ़ाने वाला माना जाता है।

रवि योग: 20 सितंबर की मध्य रात्रि (01:43 AM से सुबह 06:08 AM तक) रवि योग का निर्माण होगा। रवि योग में सूर्य देव का प्रबल प्रभाव होता है, जिससे सभी प्रकार के दोष स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं ।

इसके अलावा, इस पावन दिन प्रातःकाल से लेकर 20 सितंबर तड़के 01:43 AM तक मूल नक्षत्र रहेगा, जिसके पश्चात पूर्वाषाढा नक्षत्र प्रारंभ होगा।

राधा अष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण समय : Radha Ashtami 2026: Auspicious Time for Puja and Parana Time

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री राधा रानी का प्राकट्य दोपहर (मध्याह्न काल) के समय हुआ था, Radha Ashtami इसलिए राधा अष्टमी की मुख्य पूजा दोपहर के समय करने का विधान है….

मध्याह्न पूजा मुहूर्त: 19 सितंबर 2026 को पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय सुबह 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 01:28 बजे तक रहेगा।

पूजा की कुल अवधि: भक्तों को लाडली जी की पूजा-अर्चना और अभिषेक के लिए 2 घंटे 27 मिनट का अत्यंत शुभ समय मिलेगा ।

अभिजीत मुहूर्त: इस दिन अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा[10]। मुख्य पूजा के समय यह मुहूर्त उपस्थित रहेगा।

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 34 मिनट से 05 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।

व्रत पारण का समय: जो भक्त इस दिन निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं, वे अगले दिन यानी 20 सितंबर 2026 को सुबह 06 बजकर 08 मिनट के बाद अपना व्रत खोल (पारण कर) सकते हैं ।

(नोट: अलग-अलग शहरों जैसे मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु आदि में सूर्योदय के अनुसार मुहूर्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, Radha Ashtami इसलिए स्थानीय पंचांग भी देख लें ।

धार्मिक महत्व: राधा रानी के प्राकट्य की पावन कथा : Religious Significance: The Sacred Story of Radha Rani’s Manifestation

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित बरसाना धाम में वृषभानु (वृषभानु गोप) और उनकी धर्मपत्नी कीर्ति (कीर्तिदा) के घर देवी श्री राधा रानी का प्राकट्य हुआ था ।

श्री राधा रानी केवल एक नाम नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की ‘आह्लादिनी शक्ति’ और शुद्ध प्रेम व निष्काम भक्ति का साक्षात स्वरूप हैं । Radha Ashtami शास्त्रों में कहा गया है कि ‘रा’ का अर्थ है राधा और ‘धा’ का अर्थ है धारण करने वाली — जो श्रीकृष्ण के मन और प्राणों को धारण करती हैं, वही राधा हैं।

बरसाना के विश्वप्रसिद्ध श्री लाडली जी मंदिर तथा वृंदावन और मथुरा के मंदिरों में Radha Ashtami 2026 पर विशेष महाअभिषेक, अलौकिक श्रृंगार, भव्य फूलों की होली और संकीर्तन का आयोजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है Radha Ashtami कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से श्री राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा करते हैं, उनके जीवन से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और उन्हें गोलोक धाम में स्थान प्राप्त होता है।

राधा अष्टमी 2026 की संपूर्ण पूजा व श्रृंगार सामग्री सूची : Complete List of Puja and Adornment Materials for Radha Ashtami 2026

पूजा के दिन किसी भी प्रकार की हड़बड़ी न हो, इसके लिए पूजा की आवश्यक सामग्री पहले से ही एकत्र कर लेनी चाहिए। Radha Ashtami आवश्यक पूजन सामग्री की विस्तृत सूची नीचे दी गई है…

1. मूर्ति और मण्डप सामग्री

राधा-कृष्ण की सुंदर युगल मूर्ति या तस्वीर

लकड़ी की स्वच्छ चौकी और उस पर बिछाने हेतु लाल या पीला वस्त्र

गंगाजल (शुद्धि हेतु) और अभिषेक के लिए शंख

2. श्रृंगार सामग्री (Shringar Samagri)

पंचामृत स्नान के बाद राधा रानी और श्रीकृष्ण का भव्य श्रृंगार किया जाता है

श्री राधा रानी और श्रीकृष्ण के लिए नए वस्त्र व चुनरी

सुहाग सामग्री: चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, रोली, चंदन और आभूषण

प्राकृतिक इत्र (सुगंध हेतु)

ताजे फूल और फूलों की माला (विशेष रूप से कमल का फूल)

3. भोग और प्रसाद सामग्री

पंचामृत: दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर

मुख्य भोग: माखन-मिश्री, खीर, मालपुआ, पंजीरी, पंचमेवा और मौसमी फल

तुलसी दल: परंपरा के अनुसार तुलसी पत्र केवल श्रीकृष्ण के भोग में रखा जाता है Radha Ashtami (राधा रानी को केवल पुष्प और श्रृंगार अर्पित किया जाता है)।

भोग पूरी तरह सात्विक होना चाहिए, जिसमें प्याज व लहसुन का प्रयोग वर्जित है।

4. धूप, दीप और आरती सामग्री

देसी घी का दीपक और रुई की बाती

अगरबत्ती, भीमसेनी कपूर और सांबरानी कप

चरण-दर-चरण आसान पूजा विधि : Easy step-by-step Puja procedure

यदि आप अपने घर पर ही Radha Ashtami 2026 की पूजा कर रहे हैं, तो नीचे दी गई शास्त्रीय विधि का पालन करें

प्रातः स्नान व शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।

व्रत संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर श्री राधा-कृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प ले।

चौकी स्थापना: लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर श्री राधा-कृष्ण की युगल मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पंचामृत अभिषेक: मध्याह्न मुहूर्त (सुबह 11:01 बजे से दोपहर 01:28 बजे के बीच) में शंख में पंचामृत भरकर राधा-कृष्ण का प्रेमपूर्वक अभिषेक करें।

शुद्ध स्नान व वस्त्र धारण: पंचामृत के बाद मूर्ति को शुद्ध जल से स्नान कराएं, साफ कपड़े से पोंछें और नए वस्त्र धारण कराएं।

दिव्य श्रृंगार: राधा रानी को चुनरी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर व आभूषण पहनाएं और चंदन व इत्र से श्रृंगार करें।

पुष्प व भोग अर्पण: कमल का फूल व माला अर्पित करें। इसके बाद माखन-मिश्री, खीर, पंजीरी व पंचमेवा का भोग लगाएं (श्रीकृष्ण के भोग में तुलसी दल रखें)।

धूप-दीप व आरती: देसी घी का दीपक और भीमसेनी कपूर जलाकर अगरबत्ती व सांबरानी कप से धूप दिखाएं।

मंत्र जाप व संकीर्तन: “ॐ श्री राधायै नमः” या “राधे-राधे” नाम का जाप करते हुए आरती करें और परिवार के साथ भजन-कीर्तन करें।

प्रसाद वितरण: आरती के बाद परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. वर्ष 2026 में राधा अष्टमी कब है ?

Ans: वर्ष 2026 में राधा अष्टमी का पावन पर्व शनिवार, 19 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

Q2. राधा अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है ?

Ans: मुख्य पूजा का मध्याह्न मुहूर्त 19 सितंबर 2026 को सुबह 11:01 बजे से दोपहर 01:28 बजे तक रहेगा।

Q3. राधा अष्टमी कृष्ण जन्माष्टमी के कितने दिन बाद आती है ?

Ans: राधा अष्टमी, कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को आती है।

Q4. क्या राधा रानी के भोग में तुलसी पत्र रखा जाता है ?

Ans: नहीं, धार्मिक परंपरा के अनुसार तुलसी दल केवल भगवान श्रीकृष्ण के भोग में रखा जाता है, जबकि राधा रानी को पुष्प और सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है।

Q5. व्रत पारण का सही समय क्या है ?

Ans: व्रत पारण 20 सितंबर 2026 को सुबह 06:08 बजे……..

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