Lalita Chhath 2026 Date And Time : सनातन धर्म और श्री राधा-कृष्ण की भक्ति परंपरा में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष का विशेष महत्व माना गया है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी और सप्तमी तिथि पर राधारानी की सबसे प्रिय सखी, अष्टसखियों में प्रधान देवी ललिता जी का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम और भक्तिभाव से मनाया जाता है । इस वर्ष Lalita Chhath 2026 का पर्व अत्यंत पावन और दिव्य योग में आ रहा है । Lalita ब्रज भूमि, वृंदावन, बरसाना और देश-विदेश के राधा-कृष्ण मंदिरों में ललिता जी के जन्मोत्सव की तैयारियां बहुत ही हर्षोल्लास के साथ की जाती हैं ।
भगवान श्री कृष्ण और श्री राधारानी के अलौकिक प्रेम की मुख्य सूत्रधार और अष्टसखियों की शिरोमणि देवी ललिता जी को प्रेम, सेवा और अनन्य भक्ति की प्रतिमूर्ति माना जाता है । हम Lalita Chhath 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, ललिता जी का महात्म्य, अष्टसखियों का स्वरूप, पूजन विधि और धार्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे ।
ललिता छ्ठ 2026 कब है ? तिथि और पंचांगीय गणना : When is Lalita Chhath 2026? Date and Panchang calculations
ललिता जी के जन्मोत्सव की तिथि को लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में थोड़ी विविधता देखने को मिलती है । कुछ स्थानों पर भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को ‘ललिता छठ’ के रूप में मनाया जाता है, तो कुछ क्षेत्रों में सप्तमी तिथि को ‘ललिता सप्तमी’ के रूप में पूजन करने का विधान है ।
ललिता छठ की मुख्य तिथि: वैदिक पंचांग के अनुसार Lalita Chhath 2026 का पावन उत्सव 17 सितंबर 2026, दिन गुरुवार को मनाया जाएगा[4]।
ललिता सप्तमी की तिथि: जो लोग सप्तमी तिथि के अनुसार पूजन करते हैं, वे ललिता छठ के अगले दिन यानी 18 सितंबर 2026, दिन शुक्रवार को ललिता सप्तमी का पर्व मनाएंगे।
राधाष्टमी का पावन संबंध: देवी ललिता जी का जन्मोत्सव श्री राधा रानी के जन्मोत्सव (राधाष्टमी) से ठीक दो दिन पूर्व आता है। Lalita जन्माष्टमी के 14 दिनों बाद यह पावन अवसर भक्तों को प्राप्त होता है।
देवी ललिता जी का महात्म्य और पौराणिक स्वरूप : The Significance and Mythological Form of Goddess Lalita
पौराणिक मान्यताओं और सनातन ग्रंथों के अनुसार, देवी ललिता Lalita जी का जन्म मथुरा के पास स्थित ‘करेहला’ (Karehala) गांव में हुआ था । वे श्री राधा जी की आठ मुख्य सखियों (अष्टसखियों) में सबसे प्रधान और अग्रगण्य मानी जाती हैं ।
अष्टसखियों के नाम इस प्रकार हैं
- श्री ललिता देवी (सखियों की नायिका व प्रधान)
- श्री विशाखा देवी
- श्री चित्रलेखा देवी
- श्री चंपकलता देवी
- श्री तुंगविद्या देवी
- श्री इंदुलेखा देवी
- श्री रंगादेवी
- श्री सुदेवी
इन सभी अष्टसखियों का नेतृत्व देवी ललिता जी ही करती थीं । वे अत्यंत चतुर, बुद्धिमान, कलाप्रवीण और श्री राधा-कृष्ण की अनन्य भक्त थीं । Lalita श्री राधा रानी को ललिता जी अतिप्रिय थीं और ललिता जी का संपूर्ण जीवन केवल श्री युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की सेवा और सुख में ही समर्पित था।
धार्मिक ग्रंथों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख मिलता है कि ललिता जी की कृपा के बिना श्री राधारानी और भगवान श्री कृष्ण की गोलोक लीला या निभृत निकुंज सेवा में प्रवेश मिलना असंभव है। जो भक्त ललिता जी की शरण लेता है, उसके जीवन की समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं।
ललिता छ्ठ 2026 का धार्मिक महत्व और ब्रज की परंपरा : Religious Significance of Lalita Chhath 2026 and the Tradition of Braj
ब्रज भूमि में ललिता जी के जन्मोत्सव का विशेष आकर्षण होता है। ब्रज क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों और राजस्थान के जयपुर शहर में स्थित लाड़ली जी के प्रसिद्ध मंदिर में ललिता छठ के पावन अवसर पर ललिता जी का दिव्य जन्मोत्सव भव्य रूप से आयोजित किया जाता है।
ललिता कुण्ड का महात्म्य: उत्तर प्रदेश के पवित्र वृंदावन धाम में प्रसिद्ध ‘ललिता कुण्ड’ स्थित है। ऐसी मान्यता है कि ललिता छठ के पावन अवसर पर जो भक्त इस कुण्ड में स्नान करते हैं और देवी ललिता जी का ध्यान करते हैं, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके जीवन के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
सौभाग्य की प्राप्ति: मान्यता है कि Lalita Chhath 2026 के दिन राधा-कृष्ण के साथ देवी ललिता की पूजा करने से भक्तों को अखंड सौभाग्य, अटूट प्रेम, मान-सम्मान और दैवीय कृपा की प्राप्ति होती है।
संतान सप्तमी से जुड़ाव: कई क्षेत्रों में ललिता छठ और सप्तमी का व्रत संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु के लिए भी रखा जाता है, जिसे संतान सप्तमी व्रत के नाम से जाना जाता है। इस व्रत का महत्व स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने पांडव श्रेष्ठ युधिष्ठिर को बताया था।
ललिता छ्ठ 2026 की चरण-दर-चरण आसान पूजा विधि : Step-by-step, easy Puja ritual for Lalita Chhath 2026
ललिता छठ के पावन दिन देवी ललिता जी के साथ-साथ श्री राधा-कृष्ण का पूजन करने का विधान है । नीचे दी गई सरल विधि से आप अपने घर के मंदिर में यह पूजन संपन्न कर सकते हैं:
प्रातः स्नान और स्वच्छता: इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (लाल, पीले या हरे रंग के) धारण करें।
पूजा स्थल की सजावट: अपने घर के मंदिर को साफ करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर श्री राधा-कृष्ण तथा देवी ललिता जी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें ।
संकल्प और दीप प्रज्वलन: शुद्ध देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। हाथ में जल व अक्षत लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करते हुए व्रत और पूजन का संकल्प लें।
अभिषेक और तिलक: श्री युगल सरकार और ललिता जी को गंगाजल या पंचामृत से आचमन कराएं। तत्पश्चात चंदन, रोली, अक्षत और ताजे पुष्प (विशेषकर कमल या गुलाब के फूल) अर्पित करें।
सोलह श्रृंगार सामग्री: देवी ललिता जी को राधारानी की प्रिय सखी मानते हुए सुहाग सामग्री (चूड़ियां, सिंदूर, चुनरी, मेहंदी) अर्पित करें।
भोग अर्पण: भगवान को माखन-मिश्री, फल, मिठाइयां और मेवे का सात्विक भोग लगाएं। ध्यान रहे कि भोग में तुलसी पत्र अवश्य शामिल करें।
कथा और मंत्र जाप: ललिता जी का माहात्म्य पढ़ें या सुनें। “ॐ श्री राधा-कृष्णाय नमः” और ललिता जी के नाम का ध्यान करते हुए जाप करें।
आरती और आशीर्वाद: अंत में कपूर या घी के दीपक से श्री राधा-कृष्ण और ललिता जी की आरती उतारे। पूजा के बाद परिवार में प्रसाद बांटें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
जीवन में सुख और प्रेम के लिए विशेष उपाय : Special remedies for happiness and love in life
यदि आप अपने दांपत्य जीवन में मिठास, प्रेम और घर में सुख-शांति चाहते हैं, तो Lalita Chhath 2026 के दिन ये सरल उपाय अवश्य करें:
श्रृंगार सामग्री का दान: ललिता छठ के दिन किसी गरीब या सुहागिन महिला को सुहाग की वस्तुएं और वस्त्र दान करें। इससे वैवाहिक जीवन की खटपट समाप्त होती है।
माखन-मिश्री का भोग: श्री राधा-कृष्ण और ललिता जी को सफेद माखन और मिश्री का भोग लगाकर बच्चों में वितरित करें।
ललिता कुण्ड स्मरण या दीपदान: यदि आप वृंदावन नहीं जा सकते, तो अपने घर के पास किसी पवित्र नदी में या घर के मुख्य द्वार पर संध्या समय घी का दीपक जलाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. वर्ष 2026 में ललिता छठ कब है ?
Ans: वर्ष 2026 में ललिता छठ का पावन पर्व गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।
Q2. ललिता जी कौन थीं ?
Ans: ललिता जी श्री राधारानी की सबसे प्रिय सखी और भगवान श्री कृष्ण की अष्टसखियों में सबसे प्रधान गोपिका थीं।
Q3. ललिता छठ और ललिता सप्तमी में क्या अंतर है?
Ans: कुछ स्थानों पर षष्ठी तिथि (17 सितंबर) को ललिता छठ के रूप में जन्मोत्सव मनाया जाता है, जबकि कुछ मंदिरों में सप्तमी तिथि (18 सितंबर) को ललिता सप्तमी के रूप में उत्सव मनाया जाता है।
Q4. ललिता छठ की पूजा से क्या लाभ होता है ?
Ans: इस दिन पूजा करने से श्री राधा-कृष्ण की अनन्य कृपा प्राप्त होती है, वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है और जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं।
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