June 2026

Hrudayam Stotram

Sri Mahalakshmi Hrudayam Stotram : श्री महालक्ष्मी हृदय स्तोत्र….

श्री महालक्ष्मी हृदय स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Mahalakshmi Hrudayam Stotram in Hindi श्रीमत सौभाग्यजननीं, स्तौमि लक्ष्मीं सनातनीं ।सर्वकामफलावाप्ति साधनैक सुखावहां ॥ 1 ॥ श्री वैकुंठ स्थिते लक्ष्मि, समागच्छ मम अग्रत: ।नारायणेन सह मां, कृपा दृष्ट्या अवलोकय ॥ 2 ॥ सत्यलोक स्थिते लक्ष्मि, त्वं समागच्छ सन्निधिम ।वासुदेवेन सहिता, प्रसीद वरदा भव ॥ 3 ॥ श्वेतद्वीपस्थिते लक्ष्मि, शीघ्रम आगच्छ सुव्रते ।विष्णुना सहिते देवि, जगन्मात: प्रसीद मे ॥ 4 ॥ क्षीराब्धि संस्थिते लक्ष्मि, समागच्छ समाधवे ।त्वत कृपादृष्टि सुधया, सततं मां विलोकय ॥ 5 ॥ रत्नगर्भ स्थिते लक्ष्मि, परिपूर्ण हिरण्यमयि ।समागच्छ समागच्छ, स्थित्वा सु पुरतो मम ॥ 6 ॥ स्थिरा भव महालक्ष्मि, निश्चला भव निर्मले ।प्रसन्ने कमले देवि, प्रसन्ना वरदा भव ॥ 7 ॥ श्रीधरे श्रीमहाभूते, त्वदंतस्य महानिधिम ।शीघ्रम उद्धृत्य पुरत, प्रदर्शय समर्पय ॥ 8 ॥ वसुंधरे श्री वसुधे, Hrudayam Stotram वसु दोग्ध्रे कृपामयि ।त्वत कुक्षि गतं सर्वस्वं, शीघ्रं मे त्वं प्रदर्शय ॥ 9 ॥ विष्णुप्रिये। रत्नगर्भे, समस्त फलदे शिवे ।त्वत गर्भ गत हेमादीन, संप्रदर्शय दर्शय ॥ 10 ॥ अत्रोपविश्य लक्ष्मि, त्वं स्थिरा भव हिरण्यमयि ।सुस्थिरा भव सुप्रीत्या, प्रसन्न वरदा भव ॥ 11 ॥ सादरे मस्तकं हस्तं, मम Hrudayam Stotram तव कृपया अर्पय ।सर्वराजगृहे लक्ष्मि, त्वत कलामयि तिष्ठतु ॥ 12 ॥ यथा वैकुंठनगर, यथैव क्षीरसागरे ।तथा मद भवने तिष्ठ, स्थिरं श्रीविष्णुना सह ॥ 13 ॥ आद्यादि महालक्ष्मि, विष्णुवामांक संस्थिते ।प्रत्यक्षं कुरु मे रुपं, रक्ष मां शरणागतं ॥ 14 ॥ समागच्छ महालक्ष्मि, धन्य धान्य समन्विते ।प्रसीद पुरत: स्थित्वा, प्रणतं मां विलोकय ॥ 15 ॥ दया सुदृष्टिं कुरुतां मयि श्री: ।सुवर्णदृष्टिं कुरु मे गृहे श्री: ॥ 16 ॥ ॥ इति श्री महालक्ष्मी हृदय स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Ganesha Pancharatnam

Sri Maha Ganesha Pancharatnam Stotram : श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र….

श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Maha-Ganesha Pancharatnam Stotram in Hindi मुदाकरात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् ।नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥ नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् ।नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् ।महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरंतरम् ॥ 2 ॥ समस्त लोक शंकरं निरस्त दैत्य कुंजरम् ।दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् ।मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ 3 ॥ अकिंचनार्ति मार्जनं चिरंतनोक्ति भाजनम् ।पुरारि पूर्व नंदनं सुरारि गर्व चर्वणम् ।प्रपंच नाश भीषणं धनंजयादि भूषणम् ।कपोल दानवारणं भजे पुराण वारणम् ॥ 4 ॥ नितांत कांति दंत कांति Ganesha Pancharatnam मंत कांति कात्मजम् ।अचिंत्य रूपमंत हीन मंतराय कृंतनम् ।हृदंतरे निरंतरं वसंतमेव योगिनाम् ।तमेकदंतमेव तं विचिंतयामि संततम् ॥ 5 ॥ महागणेश पंचरत्नमादरेण योऽन्वहम् ।प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम् ।समाहितायु रष्टभूति मभ्युपैति सोऽचिरात् ॥ ॥ इति श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Mayureshwar Stotra

Shri Mayureshwar Stotra : श्री मयूरेश्वर स्तोत्र…..

Shri Mayureshwar Stotraश्री मयूरेश्वर स्तोत्र: श्री मयूरेश्वर स्तोत्र संस्कृत भाषा में रचित है। इस स्तोत्र की रचना स्वयं भगवान ब्रह्मा ने की है। यह भगवान गणेश की स्तुति है। ‘मयूरेश’ भगवान गणेश का ही एक नाम है। श्री मयूरेश्वर स्तोत्र का पाठ करने से साधक को ‘भुक्ति’ (सांसारिक सुख) और ‘मुक्ति’ (मोक्ष) दोनों की प्राप्ति होती है। यह सभी प्रकार की विपत्तियों और कठिनाइयों का नाश करता है। यह साधक की समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। यह मानसिक और शारीरिक, दोनों प्रकार के रोगों और व्याधियों को दूर करता है। श्री मयूरेश्वर स्तोत्र अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली है। Mayureshwar Stotra भगवान गणपति ही एकमात्र ऐसे समर्थ देवता हैं जो सभी विघ्नों का नाश करते हैं और समस्त कार्यों को सिद्ध करते हैं। यदि किसी भी पूजा-पाठ या अनुष्ठान में उन्हें साक्षी (गवाह) बनाया जाए, तो वह पूजा या अनुष्ठान निश्चित रूप से सफल होता है। यद्यपि भगवान गणपति के अनेक स्तोत्र प्रचलित हैं, तथापि ‘श्री मयूरेश्वर स्तोत्र’ का महत्व सर्वोपरि माना जाता है। यह स्तोत्र अपने आप में पूर्ण और स्वयंसिद्ध है, अतः इसका पाठ करने से पूर्ण सफलता की प्राप्ति होती है। गृह-क्लेश निवारण, बच्चों के रोगों से मुक्ति, सुख-शांति, उन्नति और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने हेतु इसका पाठ अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस स्तोत्र का पाठ कोई भी पुरुष अथवा स्त्री कर सकता है। यदि आप प्रतिदिन अपने जीवन में इस स्तोत्र का पाठ करते हैं और भगवान गणपति की आराधना करते हैं, तो वे आपके जीवन में किसी भी प्रकार का विघ्न नहीं आने देंगे। Mayureshwar Stotra सभी प्रकार के रोगों और चिंताओं से मुक्ति पाने के लिए, सुखी पारिवारिक जीवन के लिए, बच्चों के रोगों के निवारण के लिए, पूर्ण शांति के लिए तथा प्रत्येक क्षेत्र में पूर्ण सफलता और उन्नति प्राप्त करने के लिए इस स्तोत्र को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। संसार के समस्त साधक इस बात को स्वीकार करते हैं कि किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न करने हेतु, सर्वप्रथम भगवान गणपति का ध्यान अथवा उनकी पूजा करना अनिवार्य है। Mayureshwar Stotra केवल मनुष्य ही नहीं, अपितु स्वयं देवताओं ने भी सर्वप्रथम भगवान गणपति की पूजा को ही स्वीकार किया है। स्वयं भगवान शिव ने भी यह कहा है कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए ‘गणपति साधना’ ही सर्वप्रथम आवश्यक है। इस स्तोत्र का पाठ कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे वह किसी भी लिंग या आयु का हो। Mayureshwar Stotra भगवान शिव के पुत्र, गणेश जी को ‘शीघ्र फलदायी’ देवता माना जाता है। Mayureshwar Stotra इस स्तोत्र का पाठ किसी भी ‘चतुर्थी’ तिथि पर करना लाभकारी होता है, परंतु ‘अंगारक चतुर्थी’ के दिन इसका पाठ करने से प्राप्त होने वाला पुण्य-फल कई गुना बढ़ जाता है। राजा इंद्र, मयूरेश के गणेश की मधुरता से प्रसन्न हुए; उन्होंने सभी बाधाओं को पार कर लिया था। श्री मयूरेश्वर स्तोत्र के लाभ: श्री मयूरेश्वर स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है, यह आपके जीवन से सभी बुराइयों को दूर रखता है, और आपको स्वस्थ, धनवान तथा समृद्ध बनाता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: जो व्यक्ति कोई नया कार्य (प्रोजेक्ट) शुरू करना चाहता है Mayureshwar Stotra और उसमें सफलता प्राप्त करना चाहता है, उसे श्री मयूरेश्वर स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। श्री मयूरेश्वर स्तोत्र हिंदी पाठ: Shri Mayureshwar Stotra in Hindi ।। श्रीगणेशाय नम: ।। ब्रहोवाच – पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा ।मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 1 ।। परातत्परं चिदानन्दं निर्विकारं हृदि स्थितम् ।गुणातीतं गुणमयं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 2 ।। सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया ।सर्वविघ्नहरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 3 ।। नानादैत्यनिहन्तारं नानारूपाणि बिभ्रतम् ।नानायुधधरं भक्त्या मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 4 ।। इन्द्रादिदेवतावृन्दैरभिष्टुतमहर्निशम् ।सदसद्व्यक्तमव्यक्तं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 5 ।। सर्वशक्तिमयं देवं सर्वरूपधरं विभुम् ।सर्वविद्याप्रवक्तारं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 6 ।। पार्वतीनदनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम् ।भक्तानन्दकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 7 ।। मुनिध्येयं मुनिनुतं मुनिकामप्रपूरकम् ।समष्टिव्यष्टिरूपं त्वां मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 8 ।। सर्वाज्ञाननिहान्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम् ।सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 9 ।। अनेककोटिब्रह्माण्डनायकं जगदीश्वरम् ।अनन्तविभवं विष्णुं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 10 ।। इदं ब्रह्मकरं स्तोत्रं सर्वपापप्रणाशनम् ।सर्वकामप्रदं नृणां सर्वोपद्रवनाशनम् ।। 11 ।। कारागृहगतानां च मोचनं दिनसप्तकात् ।आधिव्याधिहरं चैव भुक्तिमुक्तिप्रदं शुभम् ।। 12 ।। ।। इति श्री मयूरेश्वर स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Matangi Stotram

Shri Matangi Stotram : श्री मातंगी स्तोत्रम्….

श्री मातंगी स्तोत्रम् हिंदी पाठ: Shri Matangi Stotram in Hindi ॥ ईश्वर उवाच ॥ आराध्य मातश्चरणाम्बुजे तेब्रह्मादयो विस्तृतकीर्तिमापुः ।अन्ये परं वा विभवं मुनीन्द्राः परां श्रियं भक्तिभरेण चान्ये ॥ १ ॥ नमामि देवीं नवचन्द्रमौले-र्मातङ्गिनीं चन्द्रकलावतंसाम् ।आम्नायप्राप्तिप्रतिपादितार्थं प्रबोधयन्तीं प्रियमादरेण ॥ २ ॥ विनम्रदेवासुरमौलिरत्नै-र्नीराजितं ते चरणारविन्दम् ।भजन्ति ये देवि महीपतीनां व्रजन्ति ते सम्पदमादरेण ॥ ३ ॥ कृतार्थयन्तीं पदवीं पदाभ्या-मास्फालयन्तीं कृतवल्लकीं ताम् ।मातङ्गिनीं सद्धृदयां धिनोमि लीलांशुकां शुद्धनितम्बबिम्बाम् ॥ ४ ॥ तालीदलेनार्पितकर्णभूषां माध्वीमदोद्घूर्णितनेत्रपद्माम् ।घनस्तनीं शम्भुवधूं नमामि तटिल्लताकान्तिमनर्घ्यभूषाम् ॥ ५ ॥ चिरेण लक्ष्यं नवलोमराज्या स्मरामि भक्त्या जगतामधीशे ।वलित्रयाढ्यं तम मध्यमम्ब नीलोत्पलांशुश्रियमावहन्त्याः ॥ ६ ॥ कान्त्या कटाक्षैः कमलाकराणां कदम्बमालाञ्चितकेशपाशम् ।मातङ्गकन्यां हृदि भावयामि ध्यायेयमारक्तकपोलबिम्बम् ॥ ७ ॥ बिम्बाधरन्यस्तललामवश्य-मालीललीलालकमायताक्षम् ।मन्दस्मितं ते वदनं महेशि स्तुत्यानया शङ्करधर्मपत्नीम् ॥ ८ ॥ मातङ्गिनीं वागधिदेवतां तां Matangi Stotram स्तुवन्ति ये भक्तियुता मनुष्याः ।परां श्रियं नित्यमुपाश्रयन्ति परत्र कैलासतले वसन्ति ॥ ९ ॥ उद्यद्भानुमरीचिवीचिविलसद्वासो वसानां परांगौरीं सङ्गतिपानकर्परकरामानन्दकन्दोद्भवाम् ।गुञ्जाहारचलद्विहारहृदयामापीनतुङ्गस्तनींमत्तस्मेरमुखीं नमामि सुमुखीं शावासनासेदुषीम् ॥ १० ॥ ॥ इति श्री मातंगी स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

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