Sri Mahalakshmi Hrudayam Stotram : श्री महालक्ष्मी हृदय स्तोत्र….
श्री महालक्ष्मी हृदय स्तोत्र हिंदी पाठ : Sri Mahalakshmi Hrudayam Stotram in Hindi श्रीमत सौभाग्यजननीं, स्तौमि लक्ष्मीं सनातनीं ।सर्वकामफलावाप्ति साधनैक सुखावहां ॥ 1 ॥ श्री वैकुंठ स्थिते लक्ष्मि, समागच्छ मम अग्रत: ।नारायणेन सह मां, कृपा दृष्ट्या अवलोकय ॥ 2 ॥ सत्यलोक स्थिते लक्ष्मि, त्वं समागच्छ सन्निधिम ।वासुदेवेन सहिता, प्रसीद वरदा भव ॥ 3 ॥ श्वेतद्वीपस्थिते लक्ष्मि, शीघ्रम आगच्छ सुव्रते ।विष्णुना सहिते देवि, जगन्मात: प्रसीद मे ॥ 4 ॥ क्षीराब्धि संस्थिते लक्ष्मि, समागच्छ समाधवे ।त्वत कृपादृष्टि सुधया, सततं मां विलोकय ॥ 5 ॥ रत्नगर्भ स्थिते लक्ष्मि, परिपूर्ण हिरण्यमयि ।समागच्छ समागच्छ, स्थित्वा सु पुरतो मम ॥ 6 ॥ स्थिरा भव महालक्ष्मि, निश्चला भव निर्मले ।प्रसन्ने कमले देवि, प्रसन्ना वरदा भव ॥ 7 ॥ श्रीधरे श्रीमहाभूते, त्वदंतस्य महानिधिम ।शीघ्रम उद्धृत्य पुरत, प्रदर्शय समर्पय ॥ 8 ॥ वसुंधरे श्री वसुधे, Hrudayam Stotram वसु दोग्ध्रे कृपामयि ।त्वत कुक्षि गतं सर्वस्वं, शीघ्रं मे त्वं प्रदर्शय ॥ 9 ॥ विष्णुप्रिये। रत्नगर्भे, समस्त फलदे शिवे ।त्वत गर्भ गत हेमादीन, संप्रदर्शय दर्शय ॥ 10 ॥ अत्रोपविश्य लक्ष्मि, त्वं स्थिरा भव हिरण्यमयि ।सुस्थिरा भव सुप्रीत्या, प्रसन्न वरदा भव ॥ 11 ॥ सादरे मस्तकं हस्तं, मम Hrudayam Stotram तव कृपया अर्पय ।सर्वराजगृहे लक्ष्मि, त्वत कलामयि तिष्ठतु ॥ 12 ॥ यथा वैकुंठनगर, यथैव क्षीरसागरे ।तथा मद भवने तिष्ठ, स्थिरं श्रीविष्णुना सह ॥ 13 ॥ आद्यादि महालक्ष्मि, विष्णुवामांक संस्थिते ।प्रत्यक्षं कुरु मे रुपं, रक्ष मां शरणागतं ॥ 14 ॥ समागच्छ महालक्ष्मि, धन्य धान्य समन्विते ।प्रसीद पुरत: स्थित्वा, प्रणतं मां विलोकय ॥ 15 ॥ दया सुदृष्टिं कुरुतां मयि श्री: ।सुवर्णदृष्टिं कुरु मे गृहे श्री: ॥ 16 ॥ ॥ इति श्री महालक्ष्मी हृदय स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
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