Bhairav Stotra

Swarnakarshan Bhairav Stotra : स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र…

Swarnakarshan Bhairav Stotra in Hindi : स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र: शास्त्रों में श्री भैरव के कई रूपों और साधनाओं का वर्णन मिलता है। उन्हीं में से एक है स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र, जो साधक को गरीबी से मुक्ति दिलाता है। जैसा इनका नाम है, वैसा ही इनके स्तोत्र का प्रभाव भी है। ‘स्वर्णाकर्षण भैरव’ नाम इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि ये अपने भक्तों की गरीबी दूर करते हैं और उन्हें धन-संपन्न बनाते हैं। स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से स्वर्ण (सोना) प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र रसकर्म (पारा बंधन) की मूल साधनाओं में से एक है।

इसके माध्यम से साधक को सोना बनाने की प्रक्रिया और पारे को बांधने (स्थिर करने) की विद्या का ज्ञान प्राप्त होता है। इनकी साधना विशेष रूप से रात्रि के समय की जाती है। इनकी साधना सभी कार्यों, शांति-पुष्टि आदि में बहुत सफल मानी जाती है। शास्त्रों में इनके मंत्रों, स्तुतियों, कवच, सहस्रनाम और यंत्रों आदि का विस्तृत वर्णन मिलता है। Bhairav Stotra यहाँ केवल धन-प्राप्ति से संबंधित विधि बताई जा रही है, ताकि आम लोगों को इसका लाभ मिल सके। स्वर्णाकर्षण भैरव महर्षि मार्कंडेय जी के आराध्य देव हैं।

स्वर्णाकर्षण भैरव लाल रंग के वस्त्र धारण करते हैं। उनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है और उनकी चार भुजाएँ हैं। Bhairav Stotra श्री स्वर्णाकर्षण भैरव की पूजा से धन और विभिन्न सिद्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। Bhairav Stotra यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में धन की कमी हो या धन से संबंधित कोई समस्या या शत्रु बाधा हो, तो स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र का पाठ और 41 दिनों की साधना करने से धन संबंधी समस्या दूर हो जाती है।

भगवान शिव ने ‘रुद्र यामल तंत्र’ में इस साधना का वर्णन किया है। Bhairav Stotra हमारी हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वर्णाकर्षण भैरव का निवास स्थान पाताल लोक माना गया है और उनकी पूजा का समय मध्यरात्रि 12 बजे से 3 बजे के बीच होता है। इनके उपासकों का कहना है कि उनकी उपस्थिति का अनुभव गंध (खुशबू) से होता है। Bhairav Stotra इसी कारण कुत्ते को उनकी सवारी के रूप में बताया गया है, क्योंकि कुत्ते में गंध पहचानने की तीव्र क्षमता होती है।

स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र के लाभ:

स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र का नियमित पाठ करने से सभी दुख दूर हो सकते हैं और आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।
इसकी साधना से आठ प्रकार की दरिद्रता (अष्ट-दरिद्रता) का अंत हो सकता है।
जो साधक इसका अभ्यास करता है, उसे जीवन में कोई आर्थिक नुकसान नहीं होता और उसे केवल आर्थिक लाभ ही प्राप्त होते हैं।

किसे करना चाहिए इस स्तोत्र का पाठ:

जो लोग घोर गरीबी या आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, उन्हें इस स्थिति से उबरने के लिए स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए।

मूल-मन्त्रः-

“ॐ ऐं क्लां क्लीं क्लूं ह्रां ह्रीं ह्रूंसः वं आपदुद्धारणाय अजामल-बद्धायलोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण-भैरवाय ममदारिद्र्य-विद्वेषणायश्रींमहा-भैरवायनमः ।”

।। श्री मार्कण्डेय उवाच ।।

भगवन् ! प्रमथाधीश ! शिव-तुल्य-पराक्रम ।
पूर्वमुक्तस्त्वयामन्त्रं, भैरवस्यमहात्मनः ।।

इदानींश्रोतुमिच्छामि, तस्यस्तोत्रमनुत्तमं ।
तत्केनोक्तंपुरास्तोत्रं, पठनात्तस्यकिंफलम् ।।
तत्सर्वंश्रोतुमिच्छामि, ब्रूहिमेनन्दिकेश्वर ।।

।। श्री नन्दिकेश्वर उवाच ।।

इदंब्रह्मन् ! महा-भाग, लोकानामुपकारक ।
स्तोत्रंवटुक-नाथस्य, दुर्लभंभुवन-त्रये ।।

सर्व-पाप-प्रशमनं, सर्व-सम्पत्ति-दायकम् ।
दारिद्र्य-शमनंपुंसामापदा-भय-हारकम् ।।

अष्टैश्वर्य-प्रदंनृणां, पराजय-विनाशनम् ।
महा-कान्ति-प्रदंचैव, सोम-सौन्दर्य-दायकम् ।।

महा-कीर्ति-प्रदंस्तोत्रं, भैरवस्यमहात्मनः ।
नवक्तव्यंनिराचारे, हिपुत्रायचसर्वथा ।।

शुचयेगुरु-भक्ताय, शुचयेऽपितपस्विने ।
महा-भैरव-भक्ताय, सेवितेनिर्धनायच ।।

निज-भक्तायवक्तव्यमन्यथाशापमाप्नुयात् ।
स्तोत्रमेतत्भैरवस्य, ब्रह्म-विष्णु-शिवात्मनः ।।
श्रृणुष्वब्रूहितोब्रह्मन् ! सर्व-काम-प्रदायकम् ।।

विनियोगः-

सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर जल भूमि पर छोड़ दे ।

ॐअस्यश्रीस्वर्णाकर्षण-भैरव-स्तोत्रस्यब्रह्माऋषिः, अनुष्टुप्छन्दः, श्रीस्वर्णाकर्षण-भैरव-देवता, ह्रींबीजं, क्लींशक्ति, सःकीलकम्, मम-सर्व-काम-सिद्धयर्थेपाठेविनियोगः ।

ध्यानः-

मन्दार-द्रुम-मूल-भाजिविजितेरत्नासनेसंस्थिते ।
दिव्यंचारुण-चञ्चुकाधर-रुचादेव्याकृतालिंगनः ।।
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