Annapurna Vrat

Annapurna Vrat 2025:माता अन्नपूर्णा की कृपा से कभी न रहे घर में अन्न की कमी

Annapurna Vrat 2025 Mein Kab Hai: : अन्नपूर्णा व्रत 2025 की तारीख, पूजा विधि, कथा, महत्व और अन्नदान का महत्व जानें। मार्गशीर्ष मास में मनाया जाने वाला यह व्रत देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है, जो घर में समृद्धि और भोजन की पूर्णता का प्रतीक हैं। जानिए इस व्रत से जुड़ी हर आवश्यक जानकारी – पूजा का सही समय, विधि, कथा, और लाभ।

Annapurna Vrat: मां अन्नपूर्णा माता का महाव्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष पंचमी से प्रारम्भ होता है और मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी को समाप्त होता है। यह उत्तमोत्तम व्रत सत्रह दिनों तक चलने वाला व्रत है। व्रत के प्रारंभ के साथ भक्त 17 गांठों वाले धागे का धारण करते हैं। इस अति कठोर महाव्रत में व्रती 17 दिन तक अन्न का त्याग करते हैं। फलाहार भी एक ही वक्त किया जाता है।

कई भक्त इस व्रत को 21 दिन तक भी पालन करते हैं, इस मान्यता के अनुसार व्रत मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा से प्रारंभ होकर मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी को समापन होता है।

Annapurna Vrat 2025 Date And Auspicious Time:अन्नपूर्णा व्रत 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त

व्रत तिथि: रविवार, 9 नवंबर 2025

आरम्भ: मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष पंचमी से

समापन: मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष षष्ठी को

अन्नपूर्णा व्रत की विधि:Annapurna Vrat Vidhi

अन्नपूर्णा माता Annapurna Vrat के व्रत के दिनों प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इस प्रकर से सोलह दिन तक माता अन्नपूर्णा की कथा का श्रवण करें व डोरे का पूजन करें। फिर जब सत्रहवाँ दिन आये (मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की षष्ठी) को व्रत करनेवाला सफेद वस्त्र और स्त्री लाल वस्त्र धारण करें। रात्रि में पूजास्थल में जाकर धान के पौधों से एक कल्पवृक्ष बनाकर स्थापित करें और उस वृक्ष के नीचे भगवती अन्नपूर्णा की दिव्य मूर्ति स्थापित करें। पूरे घर और रसोई, चूल्हे की अच्छे से साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।

खाने के चूल्हे पर हल्दी, कुमकुम, चावल पुष्प अर्पित करें। धूप दीप प्रज्वलित करें।
इसके साथ ही माता पार्वती और शिव जी की पूजा करें। माता पार्वती ही अन्नपूर्णा हैं।
विधिवत् पूजा करने के बाद माता से प्रार्थना करें कि हमारे घर में हमेशा अन्न के भंडारे भरे रहें मां अन्नपूर्णा हमपर और पूरे परिवार एवं समस्त प्राणियों पर अपनी कृपा बनाए रखें।
इन् दिनों मैं अन्न का दान करें जरूरतमंदो को भोजन करवाएं।

इस व्रत में अगर व्रत न कर सकें तो एक समय भोजन करके भी व्रत का पालन किया जा सकता है। Annapurna Vrat इस व्रत में सुबह घी का दीपक जला कर माता अन्नपूर्णा की कथा पढ़ें और भोग लगाएं ।

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकर प्राण वल्लभे ।
ज्ञान वैराग्य सिध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥
माता च पार्वति देवी पिता देवो महेश्वरः ।
बान्धवा शिव भक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥

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व्रत के दिनों में आहार

व्रती को निम्न खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिये- मूँग की दाल,चावल, जौ का आटा,अरवी, केला, आलू, कन्दा,मूँग दाल का हलवा । इस व्रत में नमक का सेवन नहीं करना चाहिये।

Benefits of Annapurna Vrat:अन्नपूर्णा व्रत से मिलने वाले लाभ

  • घर के अन्न भंडार सदा भरे रहते हैं
  • परिवार में धन-धान्य और समृद्धि आती है
  • कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है
  • गृहस्थ जीवन में संतोष और सुख-शांति बनी रहती है
  • जो व्यक्ति अन्नदान करता है, उसे अगले जन्मों में भी अभाव नहीं होता

Annapurna Devi Mantra:अन्नपूर्णा देवी मंत्र

ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥

इस मंत्र का जप करने से मानसिक शांति, धन-धान्य और बुद्धि-वैराग्य की प्राप्ति होती है।

Auspicious results of fasting for Maa Annapurna Mata:मां अन्नपूर्णा माता का व्रत करने का शुभ फल

इस व्रत के करने से आयु, लक्ष्मी और श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होता है।
अन्नपूर्णा व्रत Annapurna Vrat के प्रभाव से पुरुष को पुत्र ,पौत्रतथा धनादि का वियोग कभी नहीं होता।
जिनके घर अन्नपूर्णा व्रत की कथा होती है उस घर को माता अन्नपूर्णा कभी नहीं त्यागती, गृह में सदैव माता अन्नपूर्णा का निवास रहता है।
शास्त्रों में बताया गया है कि मां अन्नपूर्णा माता का व्रत करने से घर में अन्न के भंडार कभी खाली नहीं होते हैं।

इस व्रत को करने और माता की परिक्रमा से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
जो इस उत्तम व्रत को करते हैं, उनकी श्रीलक्ष्मी सदैव बनी रहती है। उनके लक्ष्मी का कभी विनाश नहीं होता।
कभी अन्न का क्लेश-कष्ट नहीं होता और न उनके सन्तति का विनाश ही होता है ।

इस व्रत के समय पूर्वांचल के किसान धान की पहली फसल माता को मंदिर में चढ़ाते हैं। पूरे मंदिर प्रांगण को धान की बालियों से सजाया जाता है। फिर दूसरे दिन ये बालियां प्रसाद के रूप में भक्तों को बांटी जाती हैं। Annapurna Vrat इस में कोई किसी प्रकार की मनोकामना रखता है तो वो निश्चित रूप से पूर्ण होती है। व्रत रखकर मंदिर परिक्रमा करने का विधान है। इससे कल्याण होता है और बाधा दूर होती है।

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