September 2025

श्रीमद्भागवत गीता: मानसिक शांति, ऊर्जा और जीवन के उद्देश्य की स्पष्टता के लिए क्यों पढ़नी चाहिए रोज़ाना ?

Bhagwat Geeta Padhne Ke Fayde: श्रीमद्भागवत गीता: मानसिक शांति, ऊर्जा और जीवन के उद्देश्य की स्पष्टता के लिए क्यों पढ़नी चाहिए रोज़ाना ?

Bhagwat Geeta Padhne Ke Fayde: क्या आप अपने जीवन में मानसिक शांति, सकारात्मकता और उद्देश्य की स्पष्टता की तलाश में हैं? श्रीमद्भागवत गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। यह जीवन जीने की कला सीखने का एक ज़रिया है। भगवान श्री कृष्ण ने यह ग्रंथ कुरुक्षेत्र युद्ध के समय अर्जुन

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Bhagavad Gita

Bhagavad Gita: श्रीमद्भागवत गीता जीवन बदलने वाले चमत्कारी लाभ और पाठ के सही नियम – पूर्ण ज्ञान की कुंजी

Bhagavad Gita: क्या आप अपने जीवन में शांति, स्पष्टता और सकारात्मकता की तलाश में हैं? सनातन धर्म का एक अमूल्य रत्न, श्रीमद्भागवत गीता, आपको इन सभी की प्राप्ति में मदद कर सकती है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक अद्भुत दर्शन है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान

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Shri mahAchaNDyaShTottarashatanAmAvalI:श्रीमहाचण्ड्यष्टोत्तरशतनामावली

Shri mahAchaNDyaShTottarashatanAmAvalI:श्रीमहाचण्ड्यष्टोत्तरशतनामावली ॐ अस्यश्री महाचण्डी महामन्त्रस्य दीर्घतमा ऋषिः ककुप्छन्दः श्री महाचण्डिका दुर्गा देवता ॥ ह्रां – ह्रीं इत्यादिना न्यासमाचरेत्ध्यानम्शशलाञ्छनसम्युतां त्रिनेत्रांवरचक्राभयशङ्खशूलपाणिम् ।असिखेटकधारिणीं महेशीं त्रिपुरारातिवधूं शिवांस्मरामि ॥ मन्त्रः – ॐ ह्रीं श्च्यूं मं दुं दुर्गायै नमः ॐ ॥ ॥अथ महाचण्डी नामावलिः॥ ॐ चण्डिकायै नमः ।ॐ मङ्गलायै नमः ।ॐ सुशीलायै नमः ।ॐ परमार्थप्रबोधिन्यै नमः ।ॐ दक्षिणायै नमः ।ॐ

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Devistuti ShakrAdaya or Mahishantakarisuktam:शक्रादयकृता देवीस्तुतिः अथवा महिषन्तकरीसूक्तम्

Devistuti ShakrAdaya or Mahishantakarisuktam:शक्रादयकृता देवीस्तुतिः अथवा महिषन्तकरीसूक्तम् दुर्गा सप्तशत्यान्तर्गतम् ॥ अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ ऋषिरुवाच ॥ १॥ शक्रादयः सुरगणा निहतेऽतिवीर्ये तस्मिन्दुरात्मनि सुरारिबले च देव्या । तां तुष्टुवुः प्रणतिनम्रशिरोधरांसा वाग्भिः प्रहर्षपुलकोद्गमचारुदेहाः ॥ २॥ देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या । तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ॥ ३॥ यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं

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Shri Durganama Shodashi: श्रीदुर्गानामषोडशी

Shri Durganama Shodashi: श्रीदुर्गानामषोडशी दुर्गा नारायणीशाना विष्णुमाया शिवा सती ।नित्या सत्या भगवती शर्वाणी सर्वमङ्गळा ।अम्बिका वैष्णवी गौरी पार्वती च सनातनी ॥ एषा नाम्नां षोडशिका श्रीदुर्गायाः प्रियङ्करी ।कीर्तनादाशु सुखदा सर्वोपद्रवनाशिनी ।ॐ दुर्गायै नमः । नारायण्यै नमः । ईशानायै नमः । विष्णुमायायैनमः । शिवायै नमः । सत्यै नमः । नित्यायै नमः । सत्यायै नमः ।भगवत्यै नमः ।

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ShrIdurgAsaptashlokI: श्रीदुर्गासप्तश्लोकी

ShrIdurgAsaptashlokI: श्रीदुर्गासप्तश्लोकी । अथ सप्तश्लोकी दुर्गा ।शिव उवाचदेवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी ।कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ॥ देव्युवाचश‍ृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम् ।मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते ॥ ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमहामन्त्रस्य नारायण ऋषिः ।अनुष्टुभादीनि छन्दांसि । श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः ।श्रीदूर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकी दुर्गापाठे विनियोगः ॥ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा ।बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥ १॥ दुर्गे

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DevIkShamApaNastotram: देवीक्षमापणस्तोत्रम्

devIkShamApaNastotram: देवीक्षमापणस्तोत्रम् श्रीगणेशाय नमः ।अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया ।दासोऽयमिति मां मत्त्वा क्षमस्व परमेश्वरि ॥ १॥ आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि ॥ २॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे ॥ ३॥ अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत् ।यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रह्मादयः सुराः ॥ ४॥ सापराधोऽस्मि शरणं

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Vishwakarma Jayanti

Vishwakarma Jayanti: विश्वकर्मा पूजा 2025: कब है भगवान विश्वकर्मा जी की जयंती? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि !

Vishwakarma Jayanti: सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा का विशेष महत्व है। भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला वास्तुकार (आर्किटेक्ट) और शिल्पकार माना जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, इन्होंने भगवान ब्रह्मा के सातवें पुत्र के रूप में ब्रह्मांड के निर्माण में उनकी सहायता की थी। Vishwakarma Jayanti यह पर्व मुख्य रूप

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Indira Ekadashi

Indira Ekadashi 2025 Date: इंदिरा एकादशी पितरों को मोक्ष और जीवन में सुख-समृद्धि दिलाने वाला पावन व्रत

Indira Ekadashi: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और इनमें इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi 2025) का स्थान अत्यंत पवित्र है। यह व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली यह एकमात्र एकादशी है, जो इसे पितरों के उद्धार और

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Geeta Adhyay

Geeta Adhyay: पितृ पक्ष में क्यों करते हैं गीता के अध्याय का पाठ, जानिए – कुल 16 दिन का होता है पितृ पक्ष

Geeta Adhyay: श्रद्धा से किया गया कर्म श्राद्ध कहलाता है। अपने पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते हैं। उन्हें तृप्त करने की क्रिया को तर्पण कहा जाता है। श्रद्धा से किया गया कर्म श्राद्ध कहलाता है। अपने पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते

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Durga Dvatrimshat Namavalih: दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावलिः

Durga Dvatrimshat Namavalih: दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावलिः दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गाऽऽपद्विनिवारिणी ।दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी ॥ १॥ दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा ।दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला ॥ २॥ दुर्गमादुर्गमालोका दुर्गमाऽऽत्मस्वरूपिणी ।दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता ॥ ३॥ दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी ।दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी ॥ ४॥ दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी ।दुर्गमाङ्गी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी ॥ ५॥ दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी ।नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया सुधी मानवः ॥ ६॥ पठेत् सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति

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ChaNDikAShTakam:चण्डिकाष्टकम्

ChaNDikAShTakam:चण्डिकाष्टकम् सहस्रचन्द्रनित्दकातिकान्त-चन्द्रिकाचयै-दिशोऽभिपूरयद् विदूरयद् दुराग्रहं कलेः ।कृतामलाऽवलाकलेवरं वरं भजामहेमहेशमानसाश्रयन्वहो महो महोदयम् ॥ १॥ विशाल-शैलकन्दरान्तराल-वासशालिनींत्रिलोकपालिनीं कपालिनी मनोरमामिमाम् ।उमामुपासितां सुरैरूपास्महे महेश्वरींपरां गणेश्वरप्रसू नगेश्वरस्य नन्दिनीम् ॥ २॥ अये महेशि! ते महेन्द्रमुख्यनिर्जराः समेसमानयन्ति मूर्द्धरागत परागमंघ्रिजम् ।महाविरागिशंकराऽनुरागिणीं नुरागिणीस्मरामि चेतसाऽतसीमुमामवाससं नुताम् ॥ ३॥ भजेऽमरांगनाकरोच्छलत्सुचाम रोच्चलन्निचोल-लोलकुन्तलां स्वलोक-शोक-नाशिनीम् ।अदभ्र-सम्भृतातिसम्भ्रम-प्रभूत-विभ्रम-प्रवृत-ताण्डव-प्रकाण्ड-पण्डितीकृतेश्वराम् ॥ ४॥ अपीह पामरं विधाय चामरं तथाऽमरंनुपामरं परेशिदृग्-विभाविता-वितत्रिके ।प्रवर्तते प्रतोष-रोष-खेलन तव स्वदोष-मोषहेतवे समृद्धिमेलनं पदन्नुमः ॥

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